Friday, February 27, 2015

A Boost for RSS Ghar Vapsi

"घर वापसी" पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर... 


हिन्दू धर्म के लिए खुशखबरी तथा...हिन्दू धर्म द्रोहियों, चर्च-वेटिकन के गुर्गों और गाँव-गाँव में सेवा के नाम पर "धंधा" करने वाले फादरों के लिए बुरी खबर है कि सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के निर्णय को धता बताते हुए यह निर्णय सुनाया है कि यदि कोई व्यक्ति हिन्दू धर्म में वापसी करता है तो उसका दलित स्टेटस बरकरार रहेगा और उसे आरक्षण की सुविधा मिलती रहेगी... 

मामला केरल का है, जहाँ एक व्यक्ति ने हिन्दू धर्म में "घर-वापसी" की. उसे उसकी मूल दलित जाति का प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया. जब वह आरक्षण लेने पहुँचा तो वेटिकन के "दोगलों" ने हंगामा खड़ा करते हुए केरल हाईकोर्ट में याचिका लगा दी कि वह ईसाई बन चुका था, इसलिए उसे अब आरक्षण नहीं दिया जा सकता. अब सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था दे दी है कि हिन्दू धर्म में लौटने के बाद भी वह दलित माना जाएगा और उसे आरक्षण मिलेगा.

ऊपर मैंने चर्च के सफ़ेद शांतिदूतों को "दोगला" इसलिए कहा, क्योंकि इन्हीं लोगों की माँग थी कि जो दलित ईसाई धर्म में जाए उसे भी "दलित ईसाई" श्रेणी में आरक्षण मिलना चाहिए. लेकिन जब वही व्यक्ति उनके चंगुल से निकलकर हिन्दू धर्म में वापस आया तो उसे आरक्षण के नाम पर रुदालियाँ गाने लगे. ठीक ऐसी ही दोगली कोलकाता निवासी एक महिला भी थी जिसे "सेवा"(?) उसी स्थिति में करनी थी, जब सरकार कठोर धर्मांतरण विरोधी क़ानून न बनाए. इस प्रस्तावित क़ानून के विरोध में मोरारजी देसाई को चिठ्ठी भी लिख मारी.

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पाखण्ड, धूर्तता, चालाकी, झूठ, फुसलाना आदि के सहारे हिंदुओं को बरगलाने वालों को तगड़ा झटका लगा है... अब गरीब दलितों के सामने अच्छा विकल्प है कि पहले वे चर्च से "मोटा माल" लेकर ईसाई बन जाएँ फिर कुछ वर्ष बाद हिन्दू धर्म में "घर वापसी" कर लें और मजे से आरक्षण लें... "आम के आम, गुठलियों के दाम'.." wink emoticon wink emoticon 


Wednesday, February 25, 2015

How to Debate Effectively on TV

टीवी बहस और उसकी प्रभावोत्पादकता 

(साभार - आनंद राजाध्यक्ष जी)

Jeet Bhargava जी ने मुद्दा उठाया है कि टीवी डिबेट में आने वाले हिन्दू नेता न तो स्मार्ट ढंग से अपनी बात रख पा रहे है और ना ही विरोधियो के तर्कों को धार से काट रहे हैं.




विहिप, बजरंग दल और हिन्दू महासभा वाले बंधुओ, ज़रा ढंग के ओरेटर लाओ. होम वर्क करके बन्दे भेजो. 
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जीत भार्गव जी, मुद्दा आप ने १००% सही उठाया है लेकिन उत्तर इतना सहज और सरल नहीं है. वैसे इस विषय पर बहुत दिनों से लिखने की मंशा थी, आज आप ने प्रेरित ही कर दिया. लीजिये : 
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अच्छे वक्ता जो अच्छे तर्क भी दे सकें, और विषय की गहरी जानकारी भी रखते हों, आसानी से नहीं मिलते. मैंने ऐसे लोग देखे हैं जो लिखते बेहद तार्किक और मार्मिक भी हैं, लेकिन लेखन और वक्तृत्व में फर्क होता है, डिलीवरी का अंदाज, आवाज, बॉडी लैंग्वेज इत्यादि बहुतही मायने रखते हैं जो हर किसी में उपलब्ध नहीं होते. अंदाज, आवाज और बॉडी लैंग्वेज तो खैर, सीखे और विक्सित भी किये जा सकते हैं लेकिन मूल बुद्धिमत्ता भी आवश्यक है. अनपढ़ गंवार के हाथों में F16 जैसा फाइटर विमान भी क्या काम का? 
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एक्टर और ओरेटर में यही तो फर्क होता है. अक्सर जो देखने मिलते हैं उन्हें वक्ता न कहकर बकताकहना ही सही होगा. 


ज्ञान के साथ साथ वक्ते के वाणी मैं ओज और अपनी बात मैं कॉन्फिडेंस होना अत्यावश्यक है, तभी उसकी बात सुननेवाले के दिल को छू पाएगी. यह सब कुछ नैसर्गिक देन नहीं होता. कुछ अंश तक होता है, बाकी लगन, मेहनत और प्रशिक्षण अत्यावश्यक है. हीरा तराशने के बाद ही निखरता है .
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टीवी डिबेट एक और ही विधा है, केवल वक्तृत्व से काम नहीं चलता. भारतीय दर्शन परंपरा मैं वाद विवाद पद्धति पर ज्ञान उपलब्ध है; जरूरत है उसके अभ्यास की. इसको टीवी डिबेट के तांत्रिक अंगों से align करना आवश्यक है कि विपक्ष से कैसे फुटेज खाया जा सके, आवाज कैसी लगानी चाहिए, बॉडी लैंग्वेज कैसी होनी चाहिए, मुख मुद्रा (एक्सप्रेशन) कैसे हों, आवाज के चढ़ उतार इत्यादि.
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पश्चिमी देशों की और अपने यहाँ वामपंथियों की इस विषय में गहरी सोच है, यह विषय का महत्त्व समझते हैं. पश्चिमी देशों में यह तो बाकायदा एक व्यवसाय है और ऐसे प्रोफेशनल्स की सेवाएं लेना वहां के राजनेता अनिवार्य मानते हैं. मोदीजी ने भी ऐसे मीडिया कंसल्टेंट्स की सेवाएं लेने की बात सुनी है, लेकिन अधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं कर सकता. वैसे, डिबेट के स्तर का नेता या प्रवक्ता और मंच पर जनसमुदाय को सम्बंधित करनेवाला वक्ता उन दोनों में अंतर रहता है, लेकिन वो विषय विस्तार इस पोस्ट के दायरे से बाहर है. अमेरिका में प्रेसिडेंट पद के लिए शीर्ष के दो प्रत्याशियों को डिबेट करनी पड़ती है, अपने यहाँ वो प्रणाली नहीं है. 
अपने यहाँ वामपंथी लोग कॉलेज स्तर से ही विद्यार्थियों को अपने जाल में फंसाते हैं और उनका कोचिंग करना शुरू होता है. एक सुनियोजित पद्धति से उनकी जमात बनाई जाती है जो उनकी सामाजिक सेना भी है. यहाँ http://on.fb.me/1mFlPkB और यहाँhttp://on.fb.me/1CFIwMO पढ़ें. 
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इसमें अब हिन्दुत्ववादी संघटनों को करने जैसे तात्कालिक उपाय क्या होंगे जो बिना प्रचुर धन खर्चे हो सके? हाँ, समय अवश्य लगेगा, लेकिन बच्चा शादी के दूसरे दिन तो पैदा नहीं हो सकता भाई ! Full term delivery ही सही होगी. तो प्रस्तुत है :
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1.
संघ की हर "शाखा" में विषय चुन कर वक्तृत्व को उत्तेजन दें. अभ्यासी, होनहार लोगों / मेधावी बच्चों का चयन करें. विविध विषयों का चयन हो, और वक्ता के आकलन शक्ति, delivery इत्यादि उपरनिर्दिष्ट शक्तियों का अभ्यास किया जाए, बिना पक्षपात के. 
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2.
इनमे से छंटे वक्ताओं की तालुका, जिला, शहर और राज्य स्तर पर परीक्षा हो. किसमें कौनसी / कितनी भाषा में किस हद तक धाराप्रवाह और तार्किक वक्तृत्व की क्षमता है यह जांचा जाए. कौनसा वक्ता मंच का है और कौन सा टीवी डिबेट का, किसे प्रचार टीम में जोड़ा जाए, किसे थिंक टैंक में समाया जाए ये काफी उपलब्धियां इस उपक्रम से हो सकती हैं. इसी परीक्षा का विस्तार राष्ट्रीय स्तर पर भी किया जाए ये भी अत्यावश्यक है, सारी मेहनत इसी के लिए ही तो है. 
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3.
उनमें जो कॉलेज के छात्र हों उन्हें अपने सहाध्यायिओं को प्रभावित कर के इस धारा में जोड़ने का प्रयास करना चाहिए. कॉलेज में भी वक्तृत्व स्पर्धा में अवश्य भाग लें, इस से लोकप्रियता भी बढ़ेगी, एक neutral या hostile क्राउड का भी अनुभव होगा, stage-fright जाती रहेगी. 
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4.
अभी जो लोग लिख रहे हैं, विडिओ पर भाषण देने का भी अभ्यास करें. आजकल विडियो बिलकुल मुफ्त की चीज हो गई है मोबाइल के चलते. कम से कम ढाई मिनट और ज्यादा से ज्यादा दस मिनट तक भाषण कर के देख सकते हैं कहाँ तक प्रभावशाली हैं और कहाँ तक लोगों को पकड़ में रख सकते हैं. आपस में स्काइप पर विडिओ कॉन्फ़्रेंसिंग कर के डिबेट कर के भी देख सकते हैं कि किस लायक है नेशनल टीवी पर जाने के लिए ?
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5.
उपरोक्त जो विडिओ टॉक की बात कही गई है, अपने आप में एक स्वतंत्र और महत्वपूर्ण विधा भी है. अपना फोल्लोविंग बढाकर पक्ष विचार से अधिकाधिक लोग जोड़ सकते हैं. सेना में हर कोई जनरल नहीं होता, पर हर किसी का योगदान अपनी जगह पर बहुत महत्त्व रखता है, और बिना १००% योगदान के मुहीम फेल हो सकती है. वो कहावत तो आप ने पढ़ी ही होगी . नाल से गिरी कील वापस न ठोंकने पर घोडा गिरा, इसीलिए घुड़सवार गिरा.... कील ही सही, लेकिन यह जान लें की यह कील दुश्मन के coffin में ठोंकी जा रही है, अगर मजबूत न रही तो coffin तोड़कर Dracula बाहर आएगा जरूर...
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6.
और जो प्रभावी लेखक हैं अगर वक्ता नहीं है तो कोई बात नहीं, आदमी पढ़ना नहीं छोडनेवाला... आप की भी बहुत भारी जरुरत है भाई, बस आप भी अपनी क्षमता की एक बार जांच कर लें और अपने niche में अपनी तलवार मतलब कलम को और धारदार बनाए वार उसका भी खाली नहीं जाता और न जाए... 


Monday, February 23, 2015

A Wise Advise to Hinduvta Forces

हिंदूवादियों को प्यार भरा एक पत्र


(कूटनीति से अनजान, "उतावले हिन्दूवादियों" को भाई गौरव शर्मा की एक तेज़ाबी, लेकिन यथार्थवादी नसीहत...) 

खुर्शीद अनवर याद है , जेएनयू का बहुत बड़ा नारीवादी बुद्धिजीवी था और बलात्कारी भी , पर दुस्साहस देखिये जब उसका मामला आया तब पूरी सेक्युलर जमात उसके पीछे खड़ी हो गयी , वही सेक्युलर जमात जो बुद्धिजीवियों से भरी पडी है और जहाँ "एक हो जाओ" जैसी बातें करना बचकाना समझा जाना चाहिए , खैर हमने सोचा की इकलौता केस होगा , फिर लिफ्ट में अपनी बच्ची की सहेली के साथ बलात्कार करने वाले वहशी तरुण तेजपाल की बारी आई , बड़े बड़े बुद्धिजीवियों ने उसके समर्थन में अख़बार के अख़बार भर डाले , नहीं नहीं साहब जमानत तो मिलना चाहिए उन्हें रेप ही तो किया है मर्डर थोड़े ही किया , ऐसे जुमले फेंके गए , कल तीस्ता जैसी फ्रॉड दलाल के समर्थन में सैकड़ों सेक्युलर सडकों पर उतर गए, दंगा पीड़ितों का पैसा खा जाने वाली के सारे अपराध सिर्फ इसलिए माफ़ हो गए क्योंकि उसने मोदी से लोहा लिया , ट्विटर , फेसबुक पर उसके समर्थन में मुहीम चल रही है , आज दलालों की दलाल बुरखा दत्त एनडीटीवी से विदाई ले रही हैं , ट्विटर पर उसकी विदाई का ऐसे वर्णन हो रहा है जैसे कोई योद्धा बरसों तक लड़ने के बाद रिटायर हुआ हो , और ये सब तथाकथित सेक्युलर बुद्धिजीवी ही तो हैं जो उसके सारे गुणदोष भूलकर अपने साथी के साथ खड़े हैं!! इन सब का एजेंडा साफ़ है हिन्दुत्ववादी ताकतों को हराना , ये अपने दिमाग में कोई फितूर नहीं पालते की सही क्या है और गलत क्या है , कॉमरेड है बस , बात खत्म !!



एक हम हैं... महान बुद्धिजीवी , किरण बेदी जैसी महिला हमारी आँखों के सामने कृष्णानगर से हार गयी और हम वहीँ पान की दुकान पर पिचकारी मारते रहे , कहते हैं की किरण बेदी हमारी विचारधारा के लिए नयी थी इसलिए काम नहीं किया .....तो भाई मेरे..... अरविन्द केजरीवाल नितीश कुमार और प्रकाश करात का कोई लंगोटिया यार था क्या ? फिर क्यों वे सब उसके पीछे एक हो गए ? क्यों गोयल और मुखियों की तरह उन्हें ये डर नहीं सताया की ये आदमी आगे बढ़ गया तो हमारा करियर भी ख़राब कर देगा ? देखा जाए तो असली बुद्धिजीवी तो हम हिंदूवादी हैं क्योंकि हम ज्यादा देर तक किसी की अच्छाई के साथ खड़े हो ही नहीं सकते , मीन मेक निकालना , आपस में ही अपनी बौद्धिक श्रेष्ठता की होड़ मचाना कोई हमसे सीखे , हमसे कोई कह दे की आपको 1 महीने तक मोदी के खिलाफ कुछ नहीं लिखना है फिर देखिये पेट दुखने लगेगा, दस्त लग जायेंगे , हम बाल नोचने लगेंगे पर थोड़े दिन चुप नहीं रह सकेंगे  ? आखिर निष्पक्ष फेसबुकिस्म भी कोई चीज़ है !! और ये मानसिकता फेसबुक तक नहीं बल्कि ऊपर से लेकर ज़मीन पर काम करने तक फैली है ...जेटली और राजनाथ को विरोधियों ने नहीं बल्कि हमने खुद फ्लॉप किया , खैर जब हम मोदी को ही नहीं बक्शते तो ये कहाँ के सूरमा हैं !! 


जैसे कुछ महीनों पहले मोदी की फ़र्ज़ी चापलूसी करना एक फैशन था वैसे ही आजकल मोदी को गरियाना भी एक फैशन हो चला है , छोटा छोटा फेसबुकिया भी अपने आप को मोदी से बड़ा हिंदूवादी समझता है , हमें मोदी से ये शिकायत है की वो हमारे हिसाब से क्यों नहीं चलता , काम होते हुए दिख तो रहा है पर हमारी इन्द्रियों को तुष्ट करने वाली स्टाइल से नहीं हो रहा , हम चाहते हैं की वाड्रा को घर से घसीटते हुए सड़क पे पीटते पीटते थाने तक लाया जाए जबकि मोदी अपनी स्टाइल से कानून के सहारे वही सब कर रहे हैं , हम चाहते हैं गौ वध , धर्मान्तरण क़ानून अभी के अभी लाया जाये भले ही ओंधे मुँह गिर किरकिरी क्यों ना हो जाये  , जबकि मोदी उसके लिए राज्यसभा में बहुमत इकठा करने की जुगत में हैं !! हम चाहते हैं की अरब देशों की चापलूसी बंद हो और इज़राइल से दोस्ती बढे ......तो उसके लिए तेल की निर्भरता खत्म करनी होगी , अब रूस के साथ संधि के बाद ये निर्भरता खत्म होने की पहल शुरू हुई है !! हम चाहते हैं मीडिया पर लगाम कसी जाए पर बताते नहीं की कैसे ? क्या स्टूडियों में घुस जाएँ और गर्दन पकड़ लें ? अब बात ये है की मीडिया की जान उनके व्यावसायिक घपलों में छिपी है जिन्हे एक एक कर बाहर लाया जा रहा है , डेक्कन क्रॉनिकल के मालिक की गिरफ़्तारी उसी कड़ी में समझी जाये , एनडीटीवी बहुत जल्द कानून के शिकंजे में आने वाला है , आईबीएन समूह बहुत हद तक अपनी लाइन सही कर चुका है !! 



एक बात गाँठ बाँध के रख लो दोस्तों , मोदी हिन्दुओं की आखिरी उम्मीद है , सैकड़ों साल से गायें कट रही हैं , पांच साल और कट जाएँगी तो कोई पहाड़ नहीं टूट पड़ेगा , पर अगली बार मोदी नहीं आया तो ये सारे सेक्युलर की खाल में बैठे जेहादी मिलके तुम्हारा ऐसा हश्र करेंगे की आने वाले कई सालों तक किसी दूसरे मोदी के दिल्ली तक पहुँचने  का सपना देखने में भी डर लगेगा  !! ऐसा नहीं है की मैं मोदी से हर चीज़ में सहमत हूँ , विरोध मैंने भी किया है, पर बहुत विचार के बाद अब चुप रहना सीख लिया है , उसे पांच साल मौका देने का मन बना लिया है क्योंकि मेरे मोदी के बारे में विचार भले कुछ भी हों....... मुझे मेरे और मेरी आने वाली पीढ़ियों के दुश्मनों का पूरा आभास है ,और जिन हिन्दुओं को ये आभास होते हुए भी मोदी को गरियाने में एक विशिष्ट संतुष्टि का अनुभव होता है उन्हें आज की परिस्थितियों में मैं "महामूर्ख" की श्रेणी में रखना पसंद करूँगा !!

समय की ज़रुरत है की मोदी के विकास मन्त्र को , उपलब्धियों को घर घर पहुँचाया जाए , क्योंकि मोदी को वोट सिर्फ आपने ही नहीं कईयों ने कई कारण से दिया है , आप घराती हो आपके लिए खाना बचे न बचे ये मेहमान आपके घर से भूखे नहीं जाना चाहियें , हिन्दुओं को भी उनकी सुरक्षा और भविष्य के संकट समझाना मुश्किल है और विकास के मुद्दे समझाना आसान !! और ये करना भी इसलिए जरूरी है ताकि एक हिंदूवादी ना सही हिन्दू हितैषी स्थिर सरकार भारतवर्ष में बनी रहे क्योंकि याद रहे जब तक मुर्गी ज़िंदा रहेगी तब तक ही अंडे देगी  , अटल जी की तरह उसका भी पेट चीर दोगे तो अगला मनमोहन केजरीवाल के रूप में पाओगे , फिर लड़ते रहना इन टोपीवालों से ज़िंदगी भर !!  

Sunday, February 22, 2015

Windows Versus Linux

विन्डोज़ Vs लाईनक्स 

(फेसबुक की वाल से कॉपी - ताकि भविष्य में सनद रहे)
Windows के करप्ट होनेक्रैश होनेवायरस हमलों आदि से बहुत परेशानी होती है... बारम्बार Install करने अथवा Restore/Recovery करने में समय बर्बाद होता है...
समस्या यह है कि मेरा साइबर कैफे होने के कारण सभी पीसी पर Linux भी नहीं अपना सकता... क्योंकि कैफे पर जो सामान्य ग्राहक, Gmail तक को गूगल सर्च बॉक्स में जाकर खोजते होंजो अनभिज्ञ ग्राहक आज भी Chrome की बजायइंटरनेट का मतलब Internet Explorer ही समझते हों... उन्हें Linux का ले-आउट और इंटरफेस कैसे सिखाऊँगा?? कुछ ऐसा होना चाहिएकि Windows करप्ट या क्रैश होने की स्थिति में सिर्फ पेन ड्राईव लगाकर दस-पन्द्रह मिनट में पूरा का पूरा सिस्टम (डाटाप्रिंटर्ससाफ्टवेयर आदि सहित) Restore हो जाए...

=====================यदि ऐसा हो जाए तो फिर तो तमाम एंटी-वायरस से भी तौबा की जा सकती है... आने दो वायरसों को... जैसे ही विंडोज क्रैश हुआ... दस मिनट में पीसी को फिर से ओके कर लिया... क्या ऐसा कुछ होता है?? 

समाधान हेतु आए कुछ चुनिंदा जवाब को भी यहाँ लिख रहा हूँ... ताकि रिकॉर्ड में रहे... 

Adhokshaj Mishra · Aisa ho to sakta hai, lekin

1) 10 min me nahi hoga

2) thoda tedha kaam hai.

Disk cloning and recovery software use kariye. Aam taur pe 30-40 min pe sab ready ho jayega. Sare software, driver, settings sab kuch. 



Adhokshaj Mishra · Friends with Anand G. Sharma





Ranjan Jain लिनक्स हॉट इमेज या रेडी तो यूज़ इमेज ट्राई करो। हर बार एक ही स्टेटस रहेगा सिस्टम का। बूट होते ही पहले जैसा। 

 · 
Agar aap windows hi use karna chahte hai to Acronic True Image install kijiye. jisse aap apna system crash or corrupt ho jaane par aap pehle jaisa restore kar sakte hai maatr 15 min me. 

Ankush Kalia · Friends with लवी भरद्वाज सावरकर


किशोर बड़थ्वाल fedora Linux kar sakte hain.. interface lagbhag window jaisa he hai aur chrome to sabhi Linux me chal jata hai... mai 19 saal se pahle UNIX aur fir Linux use kar raha hun.. kabhi koi samasya nahi aayi... aur virus to kabhi nahi... 


Prabhat Sandheliya Linux install कर लीजिये फिर उसमें windows virtualbox चला लीजिये। कभी भी विंडोज currupt हो जाये तो virtual machine फिर से कॉपी कर लीजिये। 


Shyam Rathore 1. Install Linux 2. Install VirtualBox 3. Create virtual machine 4. Virtual machine ko clone kare and every morning reset to initial state. I can demo on teamviewer to you. 


Hridayesh Gupta clonezilla se pure system ki image bana kar rakh sakte hain. jab corrupt ho jaye to 30 minutes me pura system waisa ka waisa sab kuch installed aa jayega jab image banayi hogi
http://clonezilla.org/ 


  •  linux mint प्रयोग करें .. इसमें mozila firefox और google chrome दोनों ब्राउज़र डाल सकते हैं .. किसी डिवाइस ड्राइवर की भी जरुरत नहीं .. एकदम विंडोज जैसा है .. किसी मदद के लिए मुझे फोन कर सकते हैं नंबर मेसेज बॉक्स में भेज रहा हूँ
  • Samant B Jain ९९% लिनिक्स का पेन ड्राइव से बूट करने वाला वर्शन बनाना संभव है .. ये टूल डाउनलोड करें http://www.pendrivelinux.com/universal-usb-installer.../ 


दिब्यम प्रभात् Suresh Chiplunkar जी शायद मेरे दो सुझाव आपके काम आ सकता है....
(1) Linux का OS install करे फिर उसके ऊपर Oracle का Virtual Box install करने से आपकी समस्या हल हो जाएगी....और फिर आप उसमे Xp install कर दीजिये....सारा सॉफ्टवेर install करने के बाद आप एक Snap
sort ले लीजिये बाद में समस्या आने में आप मिनट में सिस्टम को Restore/Revert कर सकते है... 
लिंक :- https://www.virtualbox.org/ 

पर इसके लिए एक अच्छा हार्डवेयर चाहिये...
(2) सबसे अच्छा और सबसे हल्का linux जिसे आप पेन ड्राइव से चला सकते है और data और सारा configuration भी save कर सकते है वो Puppy Linux है जिसे आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते "OS Size is aprox. 170 MB" साथ में ऑफिस package भी और काम की बहुत सॉफ्टवेर Preloaded रहती है....है...http://puppylinux.org/main/Download%20Latest%20Release.htm
वैसे मैंने अपने कैफे में काफी हद तक सफल प्रयोग किया था...आप भी अपने किसी एक PC में Trial कर के देख लीजिये....