Tuesday, February 26, 2013

Suspicious NGOs Activity, Justice Aftab Alam, Teesta Setalvad, Rajshekhar Reddy and Chopper Scam



जस्टिस आफताब आलम, तीस्ता जावेद, सेमुअलराजशेखर रेड्डी  और NGOs के आपसी आर्थिक हित-सम्बन्ध,...


मित्रों...
जैसा कि पहले भी कई बार लिखा जा चुका है कि भारत में कई NGOs का एक विशाल नेटवर्क काम कर रहा है, जो भ्रष्टाचार और हिंदुत्व विरोधी कार्यों में लिप्त है. इन NGOs का आपस में एक नापाक गठबंधन (Nexus) है, जिसके जरिये ये देश के प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनाते हैं तथा अपने देशद्रोही उद्देश्यों के लिए उन लोगों द्वारा प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष काम करवाने में सफल होते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन NGOs पर सरकार की कठोर निगरानी नहीं है (या शायद जानबूझकर नहीं रखी जाती). हाल ही में ऐसी दो घटनाक्रम सामने आए हैं जिनसे पता चलता है कि भारत के हितों और हिंदुत्व को चोट पहुँचाने के लिए ऐसे NGOs किस प्रकार मिल-जुलकर काम कर रहे हैं, कैसे इनमे अथाह धन का प्रवाह हो रहा है और ये लोग किस प्रकार नेटवर्क बनाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं....

पहला मामला है गुजरात की कुख्यातसमाजसेविका(?) तीस्ता जावेद सीतलवाड (Teesta Javed Setalvad) से जुड़ा हुआ. फर्जी शपथ-पत्र और नकली गवाहों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की लताड़ खा चुकी तथा घोषित रूप से हिन्दू-विरोधी इन मोहतरमा के NGO पर पहले भी कई आरोप लगते रहे हैं. ताज़ा मामला थोड़ा और गंभीर है, क्योंकि इसमें अप्रत्यक्ष रूप से न्यायपालिका की गरिमा और निष्पक्षता का सवाल भी भी जुड़ गया है. 

पहला मामला इस प्रकार है - एक समय पर तीस्ता जावेद सीतलवाड के खासुलखास रहे, लेकिन तीस्ता द्वारा पीठ में छुरा घोंपने के बाद उसकी तमाम पोल खोलने वाले रईस खान पठान ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करते हुए मांग की है कि गुजरात दंगों से सम्बंधित सभी मामलों में हाईकोर्ट के Justice Aftab Alam को बेंच से हटाया जाए. जिस बेंच या अदालत में गुजरात के मामलों की सुनवाई हो रही हो, उससे जस्टिस आफताब आलम को दूर रखा जाए. रईस पठान ने जस्टिस आफताब आलम पर साफ़-साफ़ आरोप लगाते हुए कहा है कि चूँकि जस्टिस आलम की बेटी के आर्थिक हित-सम्बन्धतीस्ता और अन्य कई NGOs से जुड़े हुए हैं, इसलिए जस्टिस आलम की निष्पक्षता पर संदेह उठना स्वाभाविक है. 

रईस पठान ने खुलासा करते हुए बताया है कि जस्टिस आफताब आलम की बेटी शाहरुख आलम एक NGO चलाती है, जिसका नाम है पटना कलेक्टिव, इस एनजीओ को नीदरलैंड्स की संस्था HIVOS बड़ी मात्रा में धनराशि अनुदान के रूप में देती है. संयोग”(?) कुछ ऐसा है कि तीस्ता जावेद के एनजीओ सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) को भी नीदरलैंड की यही संस्था भारी पैसा देती है. HIVOS तथा नीदरलैंड की एक और संस्था जिसका नाम है कोस्मोपोलिस इंस्टीट्यूट, दोनों ने मिलकर 2010 में रिसर्च पेपर प्रकाशित करने की एक श्रृंखला शुरू की थी जिसे नाम दिया गया Promoting Pluralism Knowledge Programme” (PPKP). इस कार्यक्रम में स्वयं जस्टिस आफताब आलम ने लन्दन में अक्टूबर 2009 में एक पेपर प्रस्तुत किया था जिसका शीर्षक था, The Idea of Secularism and Supreme Court of India”


रईस पठान ने इन कड़ियों को जोड़ते हुए आगे एक और एनजीओ के बारे में लिखित में दिया है, जिसका नाम है “Centre for Study of Culture and Society” (CSCS), बंगलौर. यह एनजीओ ऊपर बताई गई संस्था PPKP के कार्यक्रमों की संयोजक है और जस्टिस आलम द्वारा पेश किए गए पेपर प्रायोजक भी. अब और आगे बढते हैं.... याचिका के अनुसार यह NGO भी नीदरलैंड के HIVOS के साथ संयुक्त उपक्रम में एक वेबसाईट चलाता है, जिसका नाम है Pluralism.in. इस वेब पोर्टल की कोर कमेटी में जस्टिस आलम साहब की बेटी भी शामिल हैं. इस वेबसाईट की सामग्री में गुजरात दंगों के लिए एक विशेष खण्ड बनाया गया है, जिसमें सेकुलरिज्म और गुजरात को नसीहतें देते हुए लगभग 60 लेख लिखे गए हैं, इनमें से अधिकाँश लेख सबरंग कम्यूनिकेशन एंड पब्लिशिंग, मुंबई द्वारा लिखे हैं, जो कि तीस्ता जावेद की ही संस्था है. संयोग देखिये कि जस्टिस आलम की सुपुत्री जुलाई 2008 से मार्च 2010 के बीच बंगलौर के इसी CSCS नाम एनजीओ की सवैतनिक रिसर्च फेलोरहीं. इस अवधि के दौरान इन्होंने वेतन के नाम पर चार लाख पैंतालीस हजार रूपए प्राप्त किए, जबकि स्वयं के एनजीओ के लिए ग्यारह लाख अडतालीस हजार रूपए प्राप्त किए. CSCS संस्था ने लिखित में स्वीकार किया है कि यह पैसा उन्होंने नीदरलैंड्स की संस्था HIVOS से विदेशी अनुदान के तहत प्राप्त किया. यहाँ पेंच यह है कि चूँकि शाहरुख की संस्था पटना कलेक्टिव भारत सरकार के विदेशी अनुदान क़ानून (FCRA) के तहत रजिस्टर्ड नहीं है, इसलिए हाथ घुमाकर कान पकड़ा गया और CSCS ने एक हाथ से पैसा लिया और उसी पैसे को पेपर प्रस्तुतीकरण और अनुदान के रूप में आलम साहब की बेटी के NGO को आगे बढ़ा दिया. 

नीदरलैंड्स की इस संदिग्ध संस्था HIVOS ने तीस्ता जावेद सीतलवाड के एनजीओ सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) को तो सीधे ही अनुदान दिया है, 23 नवंबर 2009 को CJP के अकाउंट में दस हजार यूरो (लगभग 7 लाख रूपए) का भुगतान हुआ है (जिसका हिसाब-किताब यात्रा, पुस्तकें व सेमीनार आयोजित करने जैसे मदों में दर्शाया गया है). इसके अलावा तीस्ता जावेद के वकील मिहिर देसाई को भी नवंबर 2009 में ही एक बार 45,000 व दूसरी बार 75,000 रूपए का भुगतान हुआ है. 

रईस पठान ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि, न्यायिक प्रक्रिया के सम्मानऔर सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा को ध्यान में रखते हुए गुजरात दंगों की सुनवाई से सम्बन्धित सभी मामलों से जस्टिस आफताब आलम को हटाया जाए, ताकि न्याय की निष्पक्षता पर कोई संदेह न रहे. याचिका में कहा गया है कि गुजरात दंगों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने तथा ऐसे कई NGOs जो कि स्वयं कई मामलों में एक पक्ष हैं, उनके सुश्री शाहरुख आलम के साथ आर्थिक हित सम्बन्धों के मद्देनज़र स्वाभाविक रूप से जस्टिस आफताब आलम को स्वयं ही इन सभी सुनवाइयों से अलग हो जाना चाहिए, ताकि न्यायालय का गौरव बना रहे और तमाम शंकाओं का निवारण हो. 

विदेशी अनुदान प्राप्त और भारत सरकार द्वारा कड़ा नियंत्रण नहीं होने की वजह से पिछले कुछ वर्षों में ऐसे ढेरों NGOs पनप गए हैं, जिनका एकमात्र एजेंडा सिर्फ और सिर्फ गुजरात ही है. ज्ञातव्य है कि पिछले दिनों शबनम हाशमी के NGOs पर भी उंगलियाँ उठी थीं जिनका समुचित समाधान या जवाब अभी तक नहीं दिया गया है. सवाल यही उठता है कि आखिर ऐसे NGOs पर नकेल क्यों नहीं कसी जाती? इन NGOs के आपसी लेनदेन पर निगाह क्यों नहीं रखी जाती है? 

जस्टिस आफताब आलम कितने "साम्प्रदायिक" मानसिकता के हैं, इस बारे में उन्हीं के साथ काम करने वाले जज जस्टिस सोनी ने सुप्रीम कोर्ट में पत्र लिखकर विस्तार से आफताब आलम की शिकायत की थी... जिसका लिंक इस प्रकार है... 

http://www.scribd.com/doc/101311814/Keep-Communal-Mindset-Justice-Aftab-Alam-Away-From-Gujarat-Cases-Justice-Soni-to-Chief-Justice-of-India#download


दूसरा मामला और भी मजेदार है... यहाँ पर एक ईसाई NGO की कड़ी ताजातरीन हेलीकाप्टर घोटाले से जुड़ने जा रही है... 

संदिग्ध गतिविधियों वाले NGOs की फेहरिस्त में एक नया नाम जुड़ने जा रहा है, जिसका नाम है आर्बोर चैरिटेबल फाउन्डेशन का. यह ईसाई संस्था आंध्रप्रदेश के खम्मम जिले में कार्यरत है. भारत में इस फाउन्डेशन के कर्ता-धर्ता रहे कार्लोस गेरोसा, जो कि हाल ही में उजागर हुए औगास्ता-वेस्टलैंड हेलीकाप्टर घोटाले के आरोपियों में से एक है. जैसा कि सभी जानते हैं आंध्रप्रदेश के दिवंगत मुख्यमंत्री सैमुअल राजशेखर रेड्डी ईसाई संस्थाओं के पक्के समर्थक थे, जबकि उनके दामाद अनिल कुमार तो घोषित रूप से एक एवेंजेलिस्ट (ईसाई धर्म-प्रचारक) हैं ही. आर्बोर चैरिटेबल फाउन्डेशन का रजिस्ट्रेशन दिसंबर 2007 में सैमुअल रेड्डी के कार्यकाल में ही हुआ. रजिस्ट्रेशन के वक्त बताया गया कि यह NGO जल प्रबंधन, बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा इत्यादि क्षेत्रों में कार्य करेगा (रजिस्ट्रेशन के वक्त अक्सर ऐसी ही लफ्फाजियाँ हांकी जाती हैं, जबकि वास्तविक काम कुछ और ही करना होता है). 

सैमुअल रेड्डी के कार्यकाल में यह एनजीओ खूब फला-फूला. मजे की बात देखिए, कि दिसंबर 2007 में इस एनजीओ के रजिस्ट्रेशन के तत्काल बाद ही सेमुअल राजशेखर रेड्डी ने इस संस्था को 2000 एकड़ की जमीन आवंटित कर दी. मार्च 2008 में जैसे ही कार्लोस गेरोसा, खम्मम जिले में इस एनजीओ के भारत प्रमुख बने, उसके सिर्फ दो माह के अंदर ही सेमुअलरेड्डी आन्ध्र सरकार ने इटली की अगस्ता वेस्टलैंड कम्पनी को 63 करोड़ रुपये में एक हेलीकाप्टर खरीदने का ऑर्डर दे दिया, जबकि आँध्रप्रदेश सरकार के पास पहले से ही Bell-430 कम्पनी का एक हेलीकाप्टर था जो कि जून 1999 में खरीदा गया था, परन्तु आर्बोर फाउन्डेशन की गतिविधियों में कार्लोस गेरोसा के शामिल होते ही यह हेलीकाप्टर खरीदा गया.


सितम्बर 2009 में सेमुअल रेड्डी की हेलीकाप्टर दुर्घटना में मौत के बाद कार्लोस गेरोसा तत्काल इटली वापस चला गया. सेमुअल रेड्डी का दामाद जिसका नाम ब्रदर अनिल कुमार है, उसने इस आर्बोर फाउन्डेशन के प्रचार-प्रसार और इसकी आड़ में धर्मांतरण का खेल आगे बढ़ाया. तेलोगू देसम पार्टी के सांसद द्वय नामा नागेश्वर राव और सीएम रमेश ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि हमारे पास इस बात के कई सबूत हैं जिनसे अनिल कुमार और राजशेखर रेड्डी के साथ आर्बोर फाउन्डेशन तथा हेलीकाप्टर घोटाले से उनके सम्बन्ध स्थापित होते हैं, समय आने पर हम वह CBI को देंगे.

संक्षेप में तात्पर्य यह है कि देशद्रोही, भ्रष्टाचारी और हिन्दू-विरोधी NGOs का मकडजाल इस देश में गहरे तक फ़ैल चुका है, इन संस्थाओं को विदेशी मिशनरियों से बड़ी मात्रा में पैसा मिलता है, जिसका उपयोग कागजों पर तो अस्पताल, बच्चों की शिक्षा, जल प्रबंधन इत्यादि में होता है, लेकिन वास्तव में इस पैसे का बड़ा हिस्सा इन NGOs के असली कामोंयानी धर्मांतरण करना, जेहादियों को अप्रत्यक्ष आर्थिक मदद करना, भारत-विरोधी विचार समूहों को बढ़ावा देना, सेमीनार-कान्क्लेव इत्यादि के नाम पर देश के प्रभावशाली लोगों को उपकृत(?) करना इत्यादि. यह खेल अब बहुत आगे बढ़ चुका है, यदि समय रहते ऐसे NGOs पर नकेल नहीं कसी गई, तो आने वाले दिनों में हालात और भी मुश्किल होने वाले हैं...

Sunday, February 24, 2013

Save Ganga : Prof GD Agrawal on Fast Unto Death

गंगापुत्र  प्रोफ़ेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद फिर से अनशन पर... 


IIT के भूतपूर्व प्रोफ़ेसर और प्रख्यात पर्यावरणवादी जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद, गंगा को बचाने के लिए विगत २६ जनवरी से अनशन पर हैं. लेकिन इस सम्बन्ध में कहीं कोई मीडिया कवरेज, हलचल या चर्चा तक नहीं है...

पिछले वर्ष २०१२ में ही प्रोफ़ेसर ने १४ जनवरी से १३ मार्च (तीन माह) का अनशन किया था, जो सरकारों के आश्वासन पर खत्म किया था. इसके पहले भी वे कई बार मौत के मुँह से वापस आ चुके हैं. खनन माफिया और बाँध माफिया की आँखों की किरकिरी तो वे हैं ही...

गंगा के प्रवाह को बचाने के लिए, अपने अनशन के जरिये प्रोफ़ेसर अग्रवाल पहले भी उत्तरकाशी से ऊपर तीन बाँध परियोजनाओं को रद्द करवा चुके हैं, इसके अलावा गोमुख से धरासूं तक भागीरथी नदी की के १३५ किमी किनारे को पर्यावरण की दृष्टी से संवेदनशील भी घोषित करवा चुके हैं. 





मीडिया की आपराधिक लापरवाही शायद इसलिए है क्योंकि प्रोफ़ेसर साहब, गंगा नदी के किनारे कुम्भ की चमक-दमक और साधू-संतों के वैभव से दूर नर्मदा किनारे अमरकंटक में अनशन पर बैठे हैं... हालांकि उनकी कई मांगों के साथ पहले भी कई बार सरकारों द्वारा विश्वासघात हो चुका है, परन्तु वर्तमान अनशन तीन प्रमुख मांगों को लेकर है, जिसका वादा पहले भी किया गया था.

१- भागीरथी, अलकनंदा,मंदाकिनी, नंदाकिनी और विश्नुगंगा, इन पाँच मूल धाराओं पर बनने वाली समस्त परियोजनाएं रद्द की जाएँ.

२- गंगा और गंगा नदी में मिलने वाले सभी नालों के आसपास स्थित चमड़ा और पेपर उद्योगों को पचास किमी दूर हटाया जाए.

३- गंगा नदी में नारोरा से प्रयाग तक हमेशा कम से कम १०० घनमीटर प्रति सेकण्ड प्रवाह मिले, जबकि कुम्भ या ऐसे पर्वों के दौरान कम से कम २०० घनमीटर प्रति सेकण्ड का प्रवाह मिले.


दुःख की बात यह है कि गंगा सफाई के नाम पर गत कई वर्षों में तीस हजार करोड़ से भी अधिक खर्च हो जाने के बावजूद गंगा की स्थिति बदतर ही होती जा रही है. न ही किसी धर्म प्रमुख या धर्म संसद ने कभी यह कहा कि अगर गंगा की स्थिति ऐसी ही विकट रही तो हम कुम्भ का बहिष्कार करेंगे. 


प्रोफ़ेसर अग्रवाल से पहले भी गत वर्ष युवा स्वामी निगमानंद की मौत लंबे अनशन के बाद हो चुकी है, फिर भी जो वास्तविक गंगा-पुत्र हैं वे चुपचाप अपना संघर्ष कर रहे हैं, परन्तु न तो जन-सरोकार से कौड़ी भर का संपर्क न रखने वाले मीडिया को... और न ही गंगा के नाम पर माल कूटने और नेतागिरी चमकाने वालों इस बात की कतई कोई परवाह है.




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मित्रों, सरकारों की ऐसी बेरुखी दुखद है...

Selected Facebook Posts on Blog... (Part-3)

१३ जनवरी की एक फेसबुक पोस्ट... 

खबर है कि "कांग्रेस के नए-नवेले दामाद" साहब, आदिलाबाद की जेल में "बोर" हो रहे हैं. उन्होंने एक टीवी की मांग की है, तथा चूंकि कुछ वर्ष पहले जमीन के झगडे में चली हुई एक गोली "गलत स्थान" पर धंसी हुई है, इसलिए उन्हें जमीन पर सोने में भी दिक्कत है, सो उन्होंने एक आरामदेह बिस्तर की भी मांग की है...

हो सकता है कि कुछ दिन बाद ओवैसी (Akbaruddin Owaisi) साहब "मुजरा" सुनने की मांग रख दें..

यह तो शुरुआत है मित्रों...

कसाब ने भी मुंबई पुलिस के जवानों से इत्र-फुलेल और बटर-चिकन की मांग की थी, और वह पूरी भी की गई थी...

अब ये मत पूछियेगा कि कैंसर से पीड़ित साध्वी प्रज्ञा के साथ इतना अमानवीय व्यवहार क्यों हो रहा है, और उन्हें पेशी के लिए एसी में यात्रा हेतु हाईकोर्ट से गुहार क्यों लगानी पडी थी... क्योंकि ऐसा कोई सवाल पूछते ही आप "साम्प्रदायिक", "भगवा गुंडे", "हिटलर के भक्त" इत्यादि विशेषणों से नवाजे जाएंगे..


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१८  जनवरी के एक फेसबुक पोस्ट... 


क्या कोई मुझे समझाएगा, कि कसाब की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से देश की सुरक्षा खतरे में कैसे पड सकती है? कसाब (Ajmal Kasab) की मौत के डीटेल्स जानने से देश के टुकड़े कैसे हो सकते हैं?

मुंबई के एक RTI कार्यकर्ता को महाराष्ट्र सरकार ने उपरोक्त दस्तावेज सौंपने से इनकार करते हुए यही "तर्क"(?) दिए...

यहाँ तक कि कसाब द्वारा पेश की गई "दया याचिका" को दिखाने से भी सरकार ने मना कर दिया... असल में RTI कार्यकर्ता देखना चाहता था कि "इस्लाम", "जेहाद", "७२ हूरों" इत्यादि की बड़ी-बड़ी बातें करने वाला अपनी मौत को सामने देखकर किस तरह "दया" के लिए गिडगिडा रहा था, उसकी भाषा क्या थी?... 


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२० जनवरी की एक पोस्ट...

मित्रों... मैं टीवी कम देख पाता हूँ... इसलिए यदि भाजपा के किसी प्रवक्ता ने अपनी प्रतिक्रिया या टिप्पणी में ऐसा कहा हो... कि

- "मेरी जानकारी के अनुसार कांग्रेस नाम का संगठन डाकुओं और बलात्कारियों की पार्टी है, हमारे पास इसकी पक्की सूचना है और कांग्रेस में इसके लिए बाकायदा प्रशिक्षण शिविर भी चलाए जाते हैं..." -

किसी चैनल पर किसी भाजपा प्रवक्ता ने यदि ऐसा कुछ कहा हो (या सार्वजनिक रूप से कहने की हिम्मत दिखाई हो)... तो उसकी लिंक या खबर मुझे अवश्य दीजिएगा...

वैसे आने वाले बजट सत्र के दौरान कांग्रेसियों के साथ, भाजपा के "गरिष्ठ" नेताओं की मुस्कुराती, बुके भेंट करती हुई, हाथ मिलाती हुई तस्वीरें तो हम देख ही लेंगे...


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२२ जनवरी की एक फेसबुक पोस्ट... 


अगले १८ माह में कांग्रेस Social Media  में भाजपाइयों से लड़ने के लिए १०० करोड रूपए खर्च करेगी...

"कपि" ने कहा कि सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता सुबह से शाम तक ट्विटर और फेसबुक पर कांग्रेस के खिलाफ लिखते रहते हैं, यही हजारों ट्वीट्स और पोस्ट अगले दिन कई अखबारों की हेडलाइन बन जाते हैं... उनसे मुकाबला करने के लिए कांग्रेस भी सोशल मीडिया में "अपने" आदमी भाड़े पर बैठाएगी...

दिग्गी राजा ने कहा कि जिस तरह Narendra Modi  अपने संचार केन्द्र द्वारा ट्विटर के ट्रेंड्स को अपनी मर्जी से मोड़ते हैं, उसका मुकाबला करने के लिए कांग्रेस के एक कोर ग्रुप ने राहुल गाँधी के सामने एक पायलट प्रोजेक्ट पेश किया है...

http://www.governancenow.com/news/regular-story/congress-plans-rs-100-crore-social-media-war-chest

जय हो... जय हो... मित्रों, आपकी जय हो...

लेकिन अभी रास्ता अधूरा है... हमें बिना रुके, बिना थके चलना है...


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२६  जनवरी की एक पोस्ट... 


26/11 के एक NSG Commando  मनेश के बारे में पहले भी एक पोस्ट लिखी थी, कि किस तरह उन्हें सरकारी नियमों का हवाला देकर आयुर्वेदिक इलाज से मना किया गया और उन्हें जबरन महंगे एलोपैथिक इलाज के लिए मजबूर किया गया था...

काफी ज़द्दोज़हद के बाद मनेश को उन्हें गृह जिले में ही आयुर्वेदिक इलाज (With Reimbursement) की अनुमति मिली. उल्लेखनीय है कि 26/11 को सर में एक गोली लगने की वजह से मनेश के शरीर का दांया हिस्सा लकवाग्रस्त (Paralyze) हो चुका है, जिसका इलाज सिर्फ आयुर्वेद में ही है. हालांकि अभी भी उनके सामने आजीविका का संकट सुलझा नहीं है.

इस बीच एक नई घटना में मनेश के भाई के बिजनेस पार्टनर द्वारा संपत्ति के एक मामले को लेकर उनके परिवार के धमकियां दी जा रही हैं. यदि मनेश स्वस्थ होते तो उस धमकी देने वाले को अच्छे से देख लेते. जब इसकी रिपोर्ट करने मनेश निकटस्थ थाने में गए, तो वहाँ के सब-इन्स्पेक्टर ने उन्हें बैठने के लिए कुर्सी देना तो दूर, मनेश के साथ बदसलूकी भी कर डाली और थाने से भगा दिया. मनेश ने इसकी शिकायत रक्षा मंत्री से की है.

मित्रों... GUNतंत्र ... Sorry "गणतंत्र" की शुभकामनाएं... 

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२७  जनवरी की एक फेसबुक पोस्ट... 


दोहरे मापदंड = सेकुलरिज्म...

१) MF Hussain के समर्थक, कमल हासन की फिल्म को समर्थन देने के नाम पर चुप्पी साधे हुए हैं...

२) गोधरा कांड पर "NGO उद्योग" चलाने वाले, हैदराबाद बस जलाने के कांड पर चुप्पी साधे हुए हैं...

३) "आतंकवाद का कोई रंग नहीं होता..." का भजन गाने वाले, "भगवा आतंकवाद" शब्द पर चुप्पी साधे हुए हैं...

४) "Pink Chaddi" अभियान चलाने वाली ईसाई गैंग, पुणे के डान बास्को स्कूल के प्राचार्य पर लगे बलात्कार के आरोपों पर चुप्पी साधे हुए हैं...

५) दिल्ली की मोमबत्ती गैंग, डॉक्टर स्वामी द्वारा नाबालिग की परिभाषा बदलने के लिए न्यायालय में लड़ी जाने वाली लड़ाई पर चुप्पी साधे हुए है...

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सिलसिला जारी रहेगा... :) :)

Wednesday, February 20, 2013

Few Selected Facebook Posts on Blog - 2


७  जनवरी २०१३ की एक पोस्ट... 





एक लाख पच्चीस हज़ार स्वयंसेवक, १०,००० से अधिक वाहन, १२० एकड़ में फैला हुआ "विवेकानंदपुरम", हजारों स्वयंसेवकों की स्वतःस्फूर्त और निस्वार्थ सेवा... कडाके की ठण्ड में भी गणवेश का अनुशासन... घड़ी के कांटे से काँटा मिलाकर किया गया कदमताल... सेवा भारती द्वारा १ लाख भोजन के पैकेट... हजारों स्थानीय परिवारों द्वारा स्वयंसेवकों के लिए घर का भोजन...

न्यूनतम पुलिस व्यवस्था, फिर भी न तो कोई ट्रैफिक जाम, न कोई अव्यवस्था... सब कुछ सिर्फ अदभुत-अदभुत-अदभुत...

संघ के मालवा प्रांत के एकीकरण समारोह के दो चित्र पेश हैं...
(कुछ तो बात है हममें कि - दुनिया जलती है, फुकती है, दुष्प्रचार करती है... परन्तु हमें बिना भटके हुए, अपने लक्ष्य की ओर संचालित होते रहना है...



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८ जनवरी २०१३ की एक पोस्ट...

ए सेकुलर भांडों... सच-सच बताना...

१) वरुण गांधी के "कथित" भड़काऊ बयान की फुटेज कितनी बार और कितने चैनलों पर देखा था...?

२) वरुण गांधी पर कितने "बयानवीरों" और "ज्ञानवानों" ने कितनी Debates(??) की थी?

३) वरुण गांधी ने उस बयान से पहले ऐसे कितने बयान दिए थे?

४) वरुण गांधी पर कौन-कौन सी धाराओं में केस दर्ज हुए...?

अरे नहीं... नहीं... नहीं... चिंता मत करो, मैं तुमसे ओवैसी के बारे में कोई सवाल नहीं करने जा रहा हूँ... (मैं नहीं चाहता कि तुम और तुम्हारी "रानी माँ" अपसेट हो जाएं...) 


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१० जनवरी की एक पोस्ट....

प्राप्त सूचना के अनुसार, "Debating Society of India" और "Debating Society of Pakistan" के कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी दिल्ली के ताज पैलेस होटल में आज भारत-पाकिस्तान के मधुर संबंधों(?) को लेकर एक चर्चा कर रहे हैं... जिसे प्रस्तुत किया है संस्था "अमन की आशा" ने.

इस कार्यक्रम के मुख्य सूत्रधार होंगे, तीन (या चार) शादियाँ करने, हम जैसों को "कैटल" बोलने वाले तथा ५ सितारा जीवन शैली वाले माननीय शशि थरूर, जबकि अन्य प्रमुख वक्ताओं में शामिल होंगे अंडमान की सेलुलर जेल से वीर सावरकर के नाम की पट्टियाँ अपमानजनक तरीके से हटवाने वाले तथा सड़े हुए चेहरे पर सदा खिन्नता और हिकारत का भाव रखने वाले "मणिशंकर अय्यर"... 






पाकिस्तान की तरफ से वक्ता होंगे नजम सेठी, जावेद जब्बार और वजाहत खान...

इस शानदार होटल में, शैम्पेन के जाम टकराते हुए इन बुद्धिजीवियों(?) के बीच जो चर्चा होगी, उससे भारत-पाकिस्तान के सम्बन्ध सुधरेंगे????????



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११ जनवरी की एक पोस्ट... 

गत शनिवार को मराठी रंगमंच और फिल्मों के जाने-माने कलाकार श्री प्रशांत दामले ने गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में अपना नाम दर्ज करवाया. प्रशांत दामले ने १९८३ में अपने रंगकर्म कैरियर के आरम्भ से अब तक 10,700 स्टेज शो कर लिए हैं, जो कि विश्व में किसी भी अभिनेता द्वारा रंगमंच पर सबसे अधिक हैं.


प्रशांत दामले ने अब तक 26 मराठी नाटकों, 24 मराठी सीरियलों व 37 मराठी फिल्मों में काम किया है. बावन वर्षीय प्रशांत दामले के नाम पर एक और अनूठा विश्व रिकार्ड भी दर्ज है, वह है - "एक ही दिन में चार भिन्न भूमिकाओं वाले ढाई-ढाई घंटे के चार अलग-अलग नाटकों के शो करना..."

ऐसे प्रतिभाशाली, कर्मठ, विनम्र और मेहनती कलाकार को हार्दिक बधाइयां, व शुभकामनाएं. 

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नमस्कार मित्रों... 

Tuesday, February 19, 2013

Posting on Facebook - A Collection of Few Micro Posts

फेसबुक  की कुछ महत्वपूर्ण पोस्ट को ब्लॉग पर रखने का प्रयोग... 


मेरे प्रिय पाठकों व मित्रों...

क्षमा चाहूंगा, व्यवसाय की व्यस्तताओं के कारण बहुत दिनों से कोई विस्तृत पोस्ट नहीं लिख सका...
हालांकि इस बीच सदा की तरह फेसबुक पर अत्यधिक सक्रिय रहा, इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि फेसबुक पर अधिक लंबी पोस्ट नहीं लिखनी पड़तीं और त्वरित प्रतिक्रिया और लाइक्स मिल जाते हैं और ब्लॉग के मुकाबले अपनी बात अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद होती है.

कुछ पाठकों का सुझाव है कि मैं अपनी फेसबुक की कुछ महत्वपूर्ण पोस्ट को इस ब्लॉग पर भी कॉपी-पेस्ट कर दिया करूँ, ताकि वह सदा रिकार्ड में रहे, क्योंकि फेसबुक पर पुरानी पोस्ट की "आयु" बहुत लंबी नहीं होती. अतः अब बीच-बीच में इस सुझाव पर भी अमल करने का प्रयास करूँगा.

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१ जनवरी २०१३ की पोस्ट - 

- इसाई "नववर्ष"(?) के आगमन पर पटाखों का शोर भी वैसा ही था जैसा पिछले साल था...

- दारू की दुकानों पर लम्बी कतारें भी वैसी ही थी...

- सड़कों पर चिल्लाते और मंडराते "यो-यो" कूल ड्यूड्स भी उतनी ही संख्या में थे...

"दामिनी" केस का कहीं-कहीं "थोड़ा सा असर" तो दिखा, लेकिन कोई "विशेष असर" मुझे तो नज़र नहीं आया...

हाँ, इतना अवश्य है कि इस बहाने कुछ "सफेदपोशों" और "पाखंडियों" ने अपनी झांकी जमा ली... 

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१ जनवरी २०१३ की ही एक अन्य फेसबुक पोस्ट... 



जिस तरह से "छिछोरे" हनी सिंह को ३१ दिसंबर का कार्य्रकम रोकने पर मजबूर किया गया है और अब अदालतों में उसकी नाक रगड़ने की तैयारी चल रही है, मैं इस पहल का हार्दिक स्वागत करता हूँ....

ऐसे घटिया लोगों की लगातार बढ़ती "खरपतवार" के मद्देनज़र वास्तव में अब एक ऐसा देशव्यापी संगठन बनाने की आवश्यकता हो गई है, जो इन पर नकेल कस सके... इस संगठन में वरिष्ठ वकील, RTI कार्यकर्ता और सामाजिक संगठन मिलजुलकर काम करें... और जहाँ मौका मिले इन "भौंडे" और "अश्लील" लोगों को "कानूनी सबक" सिखाएं...
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३ जनवरी २०१३ की फेसबुक पोस्ट... 


पीडिता के नाम पर रेप विरोधी नए क़ानून की मांग से कांग्रेस सहमत नहीं है, इसके दो प्रमुख कारण हैं -

१) आज से २०-२५-५० साल बाद तक भी जब इस क़ानून के तहत किसी को सजा होगी तो तत्काल लोगों के दिमाग में "सिंघवी कांग्रेस", "तिवारी कांग्रेस", "कांडा कांग्रेस" जैसे नाम हथौड़े की तरह बजेंगे...

२) इससे भी अधिक महत्वपूर्ण कारण यह है कि किसी महत्वपूर्ण योजना या संस्था का नाम, "पवित्र परिवार"(?) के अलावा किसी और के नाम इतनी आसानी से कैसे रखा जा सकता है??? 
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४ जनवरी २०१३ की फेसबुक पोस्ट... 


मोहन भागवत जी के बयान पर "नीरा राडीया" के दल्लों द्वारा मचाए जा रहे हंगामे से अधिक चिंतित, क्रुद्ध या निराश होने की आवश्यकता नहीं है...

असल में यह एक युद्ध है, तथाकथित "मुख्यधारा"(?) के मीडिया के Frustration और सोशल मीडिया के Enthusiasm के बीच... और "खाज्दीप" व "बुरका" के दुर्भाग्य से हम जैसे मामूली "इंटरनेट हिन्दुओं" के असंगठित, लेकिन निस्वार्थ उत्साह की वजह से उन्हें आजकल अक्सर मुंह की खानी पड़ रही है... :) :)  

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४ जनवरी २०१३ की ही एक अन्य पोस्ट... 

मीडिया का - Frustration, खुन्नस, घटियापन, बिकाऊ प्रवृत्ति... सब की सब एक साथ दिखाई दी आज तो...

क्या आपने ओवैसी के बयान, सिंघवी के वीडियो, मियाँदाद के वीजा इत्यादि पर कभी इतनी "छातीकूट" देखी है, जितनी भागवत जी के बयान पर देखी???

............. ज़ाहिर है कि ऊँचा उठने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन नीचे गिरने की न तो कोई सीमा है और न ही इसमें कोई मेहनत लगती है...

मीडिया के ऐसे ही हिन्दू विरोधी, संघ विरोधी, भाजपा विरोधी नीच कर्मों की वजह से हमारा मनोबल और मजबूत होता है, हम इन घटिया लोगों को सोशल मीडिया पर बेनकाब करने हेतु और कमर कस लेते हैं...

पिछले ३ वर्षों की मेहनत से हम फेसबुकियों ने, मीडिया की जो "छवि"(?) बना दी है, इसे सतत ऐसे ही जारी रखना है... क्योंकि मुख्यधारा का मीडिया, वास्तव में "हिंदूवादी सोशल मीडिया" का दोस्त या हमराज़ नहीं है, बल्कि "दुश्मन" है... 
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कई पाठक फेसबुक पर जाते ही नहीं हैं जबकि कई पाठक अपनी व्यस्तता की वजह से फेसबुक की मेरी सभी पोस्ट नहीं पढ़ पाते हैं... इसलिए यदि मित्रों को पसंद आया हो तो यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा...