Saturday, March 9, 2013

A Project - Put Indian Literature, Art, Architecture, History online in Hindi



क्या इस विराट प्रोजेक्ट में आप हमारा सहयोग करेंगे???



मित्रों...
शुरुआत मामूली प्रश्नों से करते हैं –

१) क्या आप मानते हैं कि युवाओं में इंटरनेट पर "हिन्दी" में लिखे लेख, पुस्तकें पढ़ने की ललक बढ़ रही है?

२) क्या आप चाहते हैं कि भारतीय संस्कृति, कला, इतिहास, वास्तु, राजनीति इत्यादि पर आधारित प्रमुख पुस्तकें व ख्यात लेखकों के लेख (जो अंगरेजी में हैं), आपको हिन्दी में पढ़ने को मिलें?

३) क्या आप पसंद करेंगे कि हिन्दी में प्रकाशित प्रसिद्ध पुस्तकें, जो इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं हैं, ऐसी पुस्तकें स्कैन करके आपको अपने कंप्यूटर, मोबाईल, किंडल पर पढ़ने को मिलें?

मैं जानता हूँ कि तीनों प्रश्नों का जवाब "हाँ" में ही होगा. अतः इस सम्बन्ध में एक विशाल प्रोजेक्ट में आप सभी मित्रों से "सभी प्रकार के सहयोग" की आकांक्षा है...

जैसा कि आप जानते ही हैं भारत की कला, संस्कृति, इतिहास, वास्तुकला सहित अनेक विषयों को जितना मुगलों और अंग्रेजों ने विकृत नहीं किया था, उससे कहीं अधिक दूषित और विकृत काले अंग्रेजों अर्थात नेहरूवादी सेकुलरों और वामपंथियों ने कर दिया है. कई महत्वपूर्ण पुस्तकें, लेख और ऐतिहासिक दस्तावेज़ आम जनता से जानबूझकर षड्यंत्रपूर्वक छिपाकर रखे गए हैं. एक समस्या यह भी है कि इनमें से अधिकाँश लेख और पुस्तकें अंग्रेजी में हैं, हिन्दी में नहीं हैं. इसके अलावा यदि कई पुस्तकें हिन्दी में उपलब्ध भी हैं तो वह प्रकाशित स्वरूप में हैं, इंटरनेट पर डाउनलोड हेतु उपलब्ध नहीं हैं. साथ ही कुछ पुस्तकें व लेख ऐसे भी हैं, जो क्षेत्रीय भाषा में हैं जैसे वीर सावरकर लिखित कुछ साहित्य, गोवा, मैसूर, विजयनगरम इत्यादि के वास्तविक इतिहास संबंधी कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज इत्यादि. इन क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्य को भी धीरे-धीरे हिन्दी में अनुवाद करके इंटरनेट पर अपलोड किया जाएगा. जो पुस्तकें हिन्दी में तो हैं, परन्तु सिर्फ प्रकाशित हैं इंटरनेट पर नहीं हैं, उन्हें स्कैन करके PDF स्वरूप में ई-बुक बनाकर अपलोड कर दिया जाएगा.

मित्रों... संक्षेप में योजना का मूल खाका इस प्रकार है –

कुछ मित्र मिलकर गैर-लाभकारी संस्था के रूप में एक फाउन्डेशन का गठन करने जा रहे हैं. यह फाउन्डेशन दान व आर्थिक सहयोग की अवधारणा पर काम करेगा. डोनेशन से प्राप्त पूरा पैसा किसी भी लाभकारी कार्य में उपयोग नहीं किया जाएगा. फाउन्डेशन का मुख्य कार्य और उद्देश्य उपरोक्त पुस्तकों, लेखों अथवा दस्तावेजों को अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद करके उसे इंटरनेट पर मुक्त स्रोत के रूप में उपलब्ध करवाना है, ताकि युवाओं में इंटरनेट पर हिन्दी पढ़ने की जो ललक बढ़ रही है, उसे देखते हुए उन्हें ऐसी महत्वपूर्ण सामग्री हिन्दी में भी उपलब्ध हो.


मुझे इस फाउन्डेशन के अवैतनिक मानद निदेशक का कार्यभार सौंपा जाने वाला है. अतः इस विराट कार्य में आप सभी मित्रों के अधिकाधिक सहयोग की आवश्यकता होगी. फाउन्डेशन के इस सामाजिक कार्य में सबसे बड़ी चुनौती होगी धन जुटाना, जबकि दूसरी बड़ी चुनौती है अंग्रेजी से हिन्दी, मराठी से हिन्दी, तमिल से हिन्दी इत्यादि अच्छे अनुवादकों (अथवा टाइपिस्टों) की टीम जुटाना.

फाउन्डेशन के निदेशक के रूप में मेरा काम मुख्यतः यह होगा :- धन जुटाने के लिए समय-समय पर लोगों से मिलना और इस कार्य के उद्देश्यों को उन्हें समझाकर उनसे आर्थिक सहयोग प्राप्त करना, अनुवादकों की टीम के बीच समन्वय और तालमेल बैठाना, अनुवाद की गुणवत्ता जाँचना, देश के विभिन्न क्षेत्रों के पुस्तकालयों का कम से कम एक दौरा करके अनुवाद की जाने वाले साहित्य की प्राथमिकताएं तय करना.

जो भी मित्र इस समाज-कार्य में अपना सहयोग देना चाहते हों, वे मुझसे संपर्क करें. एक सूची तैयार की जा रही है ताकि समुचित कार्य-विभाजन किया जा सके. जो मित्र स्वयं आर्थिक सहयोग कर सकते हों उनकी एक सूची, जो मित्र किसी धनपति अथवा दानवीर संस्था के जरिए आर्थिक सहयोग करवा सकते हों उनकी एक सूची, जो मित्र अनुवाद के कार्य में अपना समय निःशुल्कदे सकते हों, उनकी अलग सूची, तथा जो मित्र सशुल्क अनुवाद करना चाहते हों उनकी अलग सूची... ऐसा करने से मुझे विभिन्न प्रकार के कार्य विभाजन में मदद मिलेगी. जो मित्रगण सशुल्क कार्य करना चाहते हैं, वे अपनी दरें निःसंकोच होकर बताएं, इसी प्रकार जो मित्र इस प्रोजेक्ट में निःशुल्क सेवा देना चाहते हैं वे भी बिना किसी झिझक या मुलाहिजे के साफ़-साफ़ बताएं कि वे सप्ताह में कितने घंटे इस कार्य के लिए दे सकते हैं, ताकि मुझे समुचित योजना बनाने में आसानी हो.

फिलहाल यह फाउन्डेशन आरंभिक अवस्था अर्थात प्रथम चरण में है, फाउन्डेशन के रजिस्ट्रेशन और नामकरण हेतु आवेदन दिया जा चुका है. इस प्रक्रिया की समस्त कागजी कार्रवाई पूर्ण होने के बाद, इस फाउन्डेशन के बारे में संक्षेप में एक फोल्डर या पैम्फलेट तैयार किया जाएगा, फाउन्डेशन को जो भी नाम मिलेगा उसके प्रतीक चिन्ह का डिजाइन, लेटर-हेड इत्यादि का प्रकाशन होगा. हालांकि इस बीच अनुवाद का कार्य शुरू कर दिया जाएगा, ताकि जैसे ही वेबसाईट का निर्माण हो उस पर सामग्री डालने की शुरुआत की जा सके.

इस दिशा में आरंभिक रुझान बहुत ही उत्साहवर्धक हैं. अर्थात लोगों की दिली इच्छा है कि ऐसा साहित्य, पुस्तकें, लेख व ऐतिहासिक दस्तावेज उन्हें हिन्दी में पढ़ने को मिलें. चूँकि मेरे पास तो सदा की तरह आर्थिक संसाधनों का टोटा है इसलिए इस फाउन्डेशन के गठन और सरकारी प्रक्रिया में जो पैसा लग रहा है, वह एक मित्र दे रहे हैं... इसी प्रकार एक अन्य मित्र उस वेबसाईट को बनाने और सुचारू रूप से चलाने का जिम्मा उठा चुके हैं... एक अन्य मित्र ने कह दिया है कि वे इस फाउन्डेशन के प्रतीक चिन्ह, लेटर-पैड, विजिटिंग कार्ड इत्यादि का डिजाईन कर देंगे...| तात्पर्य यह है कि मेरे जैसे फक्कड़ और मामूली इंसान द्वारा की गई, सिर्फ एक अनुनय-विनय पर ही आरंभिक कार्य के लिए लोगों ने अपनी जेब और अपने संसाधनों से कार्य शुरू कर दिया है. इसी प्रकार मुझे उम्मीद है कि मैं अनुवादकों की टीम जुटाने में भी सफल हो जाऊँगा. साथ ही यदि इस प्रोजेक्ट हेतु धन जुटाने, चंदा मांगने के लिए मुझे किसी के चरणों में माथा भी रखना पड़े तो मैं रखूंगा, क्योंकि यह कार्य मैं अपने लाभ के लिए नहीं कर रहा हूँ, राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करने तथा आने वाली युवा पीढ़ी तक भारत के इतिहास, कला-संस्कृति का सटीक ज्ञान हिन्दी में’ पहुँचाने हेतु कर रहा हूँ.

मित्रों... मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि आप इस प्रोजेक्ट से जुड़ें और यथायोग्य सहयोग करने का प्रयास करें... ईश्वर की इच्छा होगी तो निश्चित रूप से हम भारत के इस समृद्ध ज्ञान को हिन्दी में संजोकर रख सकेंगे, ताकि आने वाले समय में यह एक सन्दर्भ बिंदु अथवा विशाल डाटा बैंक के रूप में तैयार हो सके.  

31 comments:

sandeep bhalerao said...

विचार अति उत्तम है ..तत्काल कुछ भी कहना, या बिना अपना समय सुनिश्चित किये हवाई वादा करना गलत होगा थोडा समय लूँगा और विचार पूर्वक अपनी उपलब्धता / सहभागिता बता सकूँगा ..शुभ-भाव सदा ही .
-संदीप भालेराव

Akshay kumar ojha said...

bahut hi sundar vichar hai suresh ji aapki sahayata karne ki puri koshish rahegi

Akshay kumar ojha said...

बहुत ही उत्तम विचार है सुरेश जी आपकी
हर संभव सहायता की जाएगी
साधुवाद

राजेश सहरावत said...

sursh ji ek chhoti si bhent hamari bhee swikar karen

आशुतोष केवलिया said...

मैं आ​र्थिक सहयोग देना चाहता हूं...
अनुवाद कार्य (अंग्रेजी से हिन्दी) के बारे में विचार कर आपको सूचित करुंगा.

DEVSACHIN said...

इस महान कार्य मे मेरा सहयोग अपेक्षित है, तन , मन और धन से

श्रीयंत्र said...

आप कार्य को आगे बढ़ाएं यथोचित सहयोग प्रदान करेंगे।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बहुत अच्छा प्रयास है, इस यज्ञ में आहुति देने का प्रयास करूंगा.

Hemant Arora said...

उत्तम विचार है सफलता के लिए शुभकामनाएं

Hemant Arora said...

उत्तम विचार एवं सफलता के लिए शुभकामनाएं

संजय बेंगाणी said...

वेब पर डालना... पुस्तकों को वेब पर प्रकाशित करना समान को एक जगह रख देने से कहीं अधिक जटील प्रक्रिया है. साथ ही तकनीक तेजी से बदलती है और यह सारे परिश्रम का सत्यानाश भी करती है. यह विषय इसलिए उठा रहा हूँ क्योंकि इस पर बहुत बड़ी चर्चा होनी चाहिए और इसे बहुत हल्के से लिया जाता है. कभी .टिफ में स्कैन कर रखा गया था फिर .जेपेक आया तो वह चीजें भारी लगने लगी. पिडिएफ है तो इबुक के भी विभिन्न स्वरूप है और नई नई चीजें आती जा रही है, पुरानी का समर्थन खत्म होता जा रहा है. क्या लगातार सामग्री का परिवर्तन सम्भव है? तो क्या हाथ पर हाथ धरे रहें? नहीं. मगर चीज की गम्भरिता को समझना होगा.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

सर्वप्रथम ढेरों शुभकामनाएं.
आगे, बेंगाणी जी ने जो प्रश्न उठाया है उसी का विस्तार करते हुए ...मुझे लगता है कि काॕॕपीराइट एक बहुत बड़ा प्रश्न होगा अत: प्रत्येक शब्द जिसे इंटरनेट पर public domain में प्रकाशित किया जाएगा उसके काॕॕपीराइट का उलंघन न हो तो बेहतर अन्यथा बहुत सा धन, समय आैर ऊर्जा इन्ही समस्याआें से जूझते हुए नष्ट न हो जाएं

hemant said...

suresh ji, apke nek kary me ham tan, man aur dhan se apke sath hai

संजय अनेजा said...

सुरेश जी,
ईश्वर की इच्छा है तो सब होना ही है। आपके इस उद्देश्य के लिये सामर्थ्यानुसार समर्थन और अनंत शुभकामनायें।

Anuj Kumar mittal said...

भाई साहब में १ विद्यार्थी हूँ , मेरी शनिवार और रविवार को अवकाश रहता है| इन दिनों में में लगभग २ घंटे खाली रहता हूँ | जो में आपके इस पुनीत कार्य में नि:शुल्क लगाने की इक्छा रखता हूँ | हालाँकि में आर्थिक सहयोग नहीं कर सकता | पर में हिंदी से इंग्लिश अनुवाद , इंग्लिश से हिंदी अनुवाद कर सकता हूँ | में पुस्तकों को वेब पर भी अपलोड कर सकता हूँ | कृपया अपने इस पवन कार्य में मुझे साथ लेकर अनुग्रहीत करे |

MKPandey said...

Mai bhi yatha-sambhav aarthik sahyog kar dunga....

sandeepgoyal said...

आदरणीय सुरेश जी ,
अपने ये बड़ा ही महत्वपूर्ण बीड़ा उठाया है। मुझे क्षमा करना की में इसमें आपकी आर्थिक मदद नहीं कर सकता। परन्तु में स्वेच्छा से समाज के इस कार्य में आपकी मदद करूँगा। मुझसे बेजिझक होकर बताएं !

धन्यवाद
संदीप गोयल

amAtya rAkshasa said...

चिपलूनकरजी विचार उत्तम है! लेकिन संजयजी की बात भी बिलकुल सटीक है, मसलन, कितने लोग ये बात जानते हैं की हिंदी में कई गंभीर पुस्तकें DLI (Digital Library of India) पर उपलब्ध है। कई उच्च कोटि के विद्वान् जैसे की हजारी प्रसाद द्विवेदी, राहुल संकृत्यायन (हालाकि ये थोड़े कम्युनिस्ट विचार से प्रभावित थे, लेकिन फिर भी इनके ग्रन्थ पड़ने लायक हैं) आदि की पुस्तकें यहाँ उपलब्ध हैं। ऐसे अन्य स्त्रोत भी हैं, लेकिन DLI सबसे विशाल है।

Narinder Tiwari said...

I am also ready to help.

MANU PRAKASH TYAGI said...

एक हफते में चार घंटे हिंदी टायपिंग निशुल्क और हो सका तो आर्थिक सहयोग भी करूंगा

साहित्यायन said...

सुरेश जी , आप की योजना का समर्थन करता हूँ । मेरा एक सुझाव है । पहले हिन्दी में प़काशित पुस्तकों को अन्तर्जाल पर डाला जाए , विशेषत: उन पुस्तकों को जो रायल्टी से मुक्त हैं या जिन के लेखक लिख कर देंगे कि वे रायल्टी नहीं लेंगे । अनुवाद का काम साथ साथ शुरु हो सकता है , क्योंकि उस में समय लगेगा । किसी को अभी शुल्क न दिया जाए, अन्यथा कोई निश्शुल्क काम नहीं करेगा । अन्त में यह कि संगठन का नाम फाउण्डेशन के बजाए संस्थान रखा जाए । मैं अपनी २८ प़काशित पुस्तकें बिना मूल्य भेंट कर दूँगा । कोई रायल्टी नहीं लूँगा । साधन पास में हों तो काम का शुल्क देना ठीक होगा ।

Anonymous said...

Param Adarniy Shri Suresh ji apek maha karya ka subharambh kijiye her sachha hindustani apke sath hai.. Jay Hind

Bharat Arya said...

bahut anand ki bat hai sureshji. kash patanjali ke mahabhashy ka hindi tika sahit sanskaran mil jae to bahut khushi hogi. motilal banarsidas prakashan ne mahabhashy to prakashit kiya kintu angreji me aur kimat bhi bahut jyada hai.

Pawan Pandey said...
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Pawan Pandey said...

अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद के लिए १५-२० घंटे निःशुल्क सेवा हर हफ्ते दे सकता हूँ| अणु डाक पता :- pawanpandey20072007@gmail.com
दूरभाष :- ८८००७५२२३०

SP Sudhesh said...

अप ने मेरे सुझावों पर अपनी राय प़कट नहीं की । आप की योजना में मैं ंभी
शामिल हो सकता हूँ ।

vivek said...

Mujhe se mere mail id par sampark kare, aarthik sahayta ttha other net acivity kar sakta hu, mai khud kai dino se net par Hindi me Histry lkhoj raha tha, par iss site se jayada kuch nahi mila

"http://www.apnihindi.com "


vivxpt@gmail.com

Anonymous said...

My Contribution : English to Hindi Translation. On an average 4 hours per week.
nemjain@gmail.com

Saket Singh Tiwari said...

likhane ki kala to koi aap se sikhe.bahut badhiya likha hai.

Chandan Shukla said...

आदरणीय सुरेश जी,
आपका ये प्रयास बहुत ही सराहनीय है, मैं इस पुनीत कार्य में आपसे जुडकर स्वयं को धन्य समझूंगा | मैं इस समय आर्थिक सहयोग तो नहीं कर पाउँगा लेकिन समय दे सकता हूँ | मैंने संपादकीय कार्य का अनुभव है इसलिए अगर हिंदी से अंग्रेजी और अंग्रेजी से हिंदी या पंजाबी में अनुवाद या संपादन में मैं यथासंभव योगदान दे सकता हूँ | बाकि जैसी आपकी आज्ञा|
चन्दन शुक्ल ,
दिल्ली

Anonymous said...

ham bhi taiyar hain sahyog ke liye...rupeshg07@gmail.com