Saturday, November 17, 2012

Double Standards of Media and Secularism : Gujarat Elections

मीडिया, सेकुलरिज़्म और गुजरात चुनाव… (एक माइक्रो-पोस्ट)


भारत के चुनाव आयोग ने गुजरात में मकसूद काज़ी (अल्पसंख्यक सेल सूरत), तथा दो अन्य कांग्रेसी नेताओं कादिर पीरज़ादा व रिज़वान उस्मानी के खिलाफ़ चुनाव प्रचार के दौरान "भड़काऊ भाषण देने, घृणा फ़ैलाने, धार्मिक विद्वेष पैदा करने" समेत कई धाराओं में FIR दर्ज की है।





केन्द्रीय मंत्री शंकर सिंह वाघेला भी पीछे नहीं हैं, इनके खिलाफ़ भी चुनाव आयोग ने "आपत्तिजनक और उकसाने वाली भाषा" को लेकर FIR दर्ज कर दी है…। चूंकि स
भी भाषणों की वीडियो रिकॉर्डिंग हो रही है, इसलिए चुनाव आयोग स्वयं संज्ञान से यह कार्रवाई कर रहा है। अधिकांश उत्तेजक भाषणों में गोधरा के दंगों और मुसलमानों के साथ अन्याय इत्यादि को लेकर ही भड़काने वाले भाषण दिए जा रहे हैं।

(हालांकि "सेक्यूलर वेश्यावृत्ति" से ग्रस्त मीडिया में इस सम्बन्ध में कोई खबर नहीं है)

यहाँ पर सवाल यह नहीं है कि ये लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं? क्योंकि हम तो जानते ही हैं "कांग्रेस ही इस देश की सबसे बड़ी साम्प्रदायिक पार्टी है", लेकिन जब नरेन्द्र मोदी समेत गुजरात के सभी मंत्री "विकास" के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं, साम्प्रदायिक मुद्दों को पीछे छोड़ चुके हैं… तो फ़िर कांग्रेसी बार-बार गोधरा-गोधरा कहकर आग में घी क्यों डाल रहे हैं। विकास के मुद्दों पर चुनाव क्यों नहीं लड़ते?

इसी "नकली" मीडिया ने असम और हैदराबाद की घटनाओं पर अभी तक एक शब्द भी नहीं कहा है… जबकि आपको याद होगा कि वरुण गाँधी द्वारा "हाथ काटने" वाले बयान पर सभी सेकुलरों ने अपने कपड़े तार-तार कर लिए थे…

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अब कल्पना कीजिए कि यदि इनकी हरकतों की वजह से नरेन्द्र मोदी या किसी अन्य भाजपा नेता के मुँह से कोई गलत-सलत बात निकल गई तो यह "नेशनल मीडिया" और तथाकथित "सिक-यू-लायर" कैसी दुर्गन्ध मचाएंगे…

तात्पर्य यह है कि, जब हम "सेक्यूलरों, कांग्रेसियों और मीडिया" को (________), तथा (__________) और (_________) कहते हैं… तो हम बिलकुल सही कहते हैं…। 
स्रोत :-  http://deshgujarat.com/2012/11/15/so-who-exactly-is-communal-in-gujarat-in-this-election-season/ 

5 comments:

indian citizen said...

up me ek maulana ne hinduon ke sar kalam karne ki takat ek pratyashi ko dene ko kaha, lekin media ka munh sil gaya...

Indrajeet said...

श्रीमान जी! बिल्कुल सत्य लिखा है आपने किंतु सेक्युलर शब्द का उपयोग केवल काँग्रेस के लिये करना गलत है।
राष्ट्रीय स्तर पर यदि एक नरेंद्र मोदी को छोड़ दिया जाये तो भाजपा में भी सेक्युलर (हिंदुविरोधी) भरे पडे़ हैं

रही मीडिया की बात तो भारत का प्रत्येक सच्चा हिंदू ये जानता है कि जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है वास्तव में वह एक रांड (सेक्युलरों की रखैल) के सिवा और कुछ नहीं है।

Anonymous said...

I do not understand, why to blame and curse for media and others. It shows our frustrations, mentally ill. Do we have respect about others?
Ye Babu, Ye Public Hai Ye Sab Janati He. Do not cry foul. Respect their belief, feelings, mandate.
Do we have program for welfare of own citizens? All are Indians. Do not divide them based on religion and region.

Viral Trivedi said...

एसा अद्भूत कार्य किया फिर भी भाजपा को इस विस्तार मे सीट नही मिली। जरा लिंक खोल के देखे। फोर एक्जाम्पल।

Viral Trivedi said...

http://wwwviraltrivedi.blogspot.in/2012/03/blog-post.html