Tuesday, October 16, 2012

"Dalit Christians" feeling like "stabbed in back"

"दलित ईसाईयों" के साथ भेदभाव… 


नमस्कार मित्रों…

जैसा कि वादा था… नवरात्र के पहले दिन से ब्लॉगिंग में वापसी कर रहा हूँ…

1) जो पोस्ट पहले फ़ेसबुक पर आ चुकी होंगी, आगे से उन पोस्ट की पहली लाइन "फ़ेसबुक वॉल से…" शुरु होगी, जबकि किसी अन्य पोस्ट में ऐसा नहीं होगा…
2) इसी प्रकार ऐसी कोई पोस्ट जो मैंने नहीं लिखी होगी, बल्कि किसी मित्र द्वारा मेरे ब्लॉग पर पब्लिश की जाएगी, उसमें सबसे अन्त में उनका नाम भी ससम्मान, साभार सहित होगा…

अतः आज पेश है फ़ेसबुक की गई एक पोस्ट का कॉपी-पेस्ट संस्करण…
(यह उन मित्रों के लिए है, जो फ़ेसबुक की मेरी अपडेट्स नियमित नहीं ले पाते, या फ़ेसबुक पर हैं ही नहीं…)
===============================

रामेश्वरम से 70 किमी दूर तिरुवदनी कस्बे में "दलित ईसाईयों"(?) के एक समूह ने वहाँ के चर्च की "सिल्वर जुबली" महोत्सव से 6 दलित पादरियों को बाहर किए जाने के खिलाफ़ हिंसात्मक प्रदर्शन किया है।

चर्च के प्रमुख पादरी ने आरोप लगाया है कि जब जुबली
महोत्सव के दौरान 200 ईसाईयों और ननों का जुलूस निकल रहा था, तब "दलित ईसाईयों"(?) की भीड़ ने पहले प्रदर्शन किया और फ़िर हिंसा की। वे लोग इस बात का विरोध कर रहे थे कि जुबली महोत्सव के दौरान इन दलित पादरियों को पूजा में हिस्सा नहीं लेने दिया गया…

"दलित ईसाईयों"(?) के समर्थन में रामेश्वर में भी काले झण्डे लहराए गए और कई संगठनों ने आरोप लगाया है कि अक्सर ऐसा होता है कि चर्च में प्रमुख पूजा अवसरों पर धर्म परिवर्तित दलितों को पर्याप्त सम्मान नहीं दिया जाता…

फ़िलहाल यह उत्सव स्थगित कर दिया गया है, और "ईसाईयों" और "दलित ईसाईयों"(?) के बीच समझौता वार्ता जारी है, जबकि माहौल में तनाव व्याप्त है…

=====================
मित्रों… "दलित ईसाईयों" शब्द पर मैंने (?) मार्क लगाया है, इसका मतलब आप और मैं तो जानते हैं… लेकिन "सेकुलरों" और "हिन्दू विरोधी बुद्धिजीवियों" के दिमाग की बत्ती जलाने के लिए यह जरूरी था…

क्या मेरा कोई "सेकुलर" मित्र यह बता सकता है, कि "दलित ईसाई" की सटीक परिभाषा क्या होगी? क्योंकि मेरा Confusion यह है कि या तो वह "दलित" होगा (सो उसे आरक्षण मिले), या फ़िर वह "ईसाई" होगा (धार्मिक आधार पर आरक्षण कैसे मिले?)… दोनों हाथों में लड्डू कोई कैसे रख सकता है भाई?

12 comments:

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद said...

मुझे ये समझ में नहीं आता... राजनीति कब से इतनी सीधी होने लगी जितनी हम देख रहे है.
भिंडरावाले को अकाली दल के खिलाफ खड़ी कर देने वाली कांग्रेस, लिट्टे के गढ मे इंडियन आर्मी भेज देने वाली कांग्रेस कब से इतनी सीधी और सरल हो गयी की राजनीति की दुनिया मे एक नौसिखिया "अरविन्द केजरीवाल" उसे चुनौती देने लगे. मुखर मध्यम वर्ग को अपने ही एक एजेंट के पीछे लगा कर विपक्षी पार्टी "भाजपा" के मात्र तीन प्रतिशत वोट काट कर उसे उन्नीस प्रतिशत सीटो का नुकसान कराने का गंडित है, साथ मे चित भी अपनी और पट भी..
-
फिलहाल तो सभी इस बन्दर की उछल - कूद देखने में व्यस्त है.. धुआं और धुंध छटने दीजिये...
तब जाकर समझ में आएगा की ये भी "कांग्रेस का एजेंट" निकला...

राजेंद्र

पूरण खंडेलवाल said...

ईसाईयों में दलित शब्द कहाँ से आ गया !!

Ratan singh shekhawat said...

धर्म-परिवर्तन करने वाले दलितों को इस घटना से समझ लेना चाहिए कि भेदभाव में ईसाई भी हिन्दुओं से आगे है|

वीरमदेव की चौकी से ......... said...

दलित ईसाई ,दलित मुसलमान यह शब्द ही अजीब तथा गलत है इन लोगो ने मत परिवर्तन इस लिए किया की हिन्दू समाज मे इनके साथ भेद भाव होता है परंतु ईसाइयत और इस्लाम तो भेद भाव विरोधी है वह यह इससे दो अर्थ निकलते है पहला तो की उनका हिंदुकरण होकर वह भी धीरे धीरे जातिवादी समाज बन रहे है /दूसरा जिस समानता के विचार और आधार पर मत बदला गया था वह धोखा तथा छल था

विवेक उपाध्याय said...

आपकी ब्लॉग पर वापसी बहुत ही सुखद अनुभव है हम जैसे पाठकों के लिए ...|
ईसाई मिसनरीयो का पूरा ध्यान सिर्फ धर्मान्तरण पर है ,उन्हें उनका उचित हक दिलाने में नहीं..|

संजय @ मो सम कौन ? said...

भेदभाव हर धर्म में है, हम लोगों के धर्म में यह अच्छे से दिखता है और दूसरे इसे अच्छे से छिपा लेते हैं। वास्तव में तो हिन्दू धर्म में इस भेदभाव का प्रभाव दिनोंदिन कम हो रहा है, जबकि बाकी जगह अब उजागर हो रहा है।

महेंद्र said...

सुरेशजी
ब्लॉग वर स्वागत. अहो बरेच दिवसापासून तुमचा ब्लॉग न वाचल्याने काहीतरी चुकल्यासारख्ं वाटत होतं. आता पुन्हा लिहीणे सुरु करा लवकर.. मी फेस बुक वर पण नाही , त्या मुळे तिथले लेख पण इथे पोस्ट केले तरी चालतील. :) धन्यवाद.

Rajat Rai said...

Hindu Castism is so filthy that it rotten the all great religion of earth like Islam and Christainty. Due to its ill thinking thank GOD it could not spread in the world otherwise Castism will spread in whole the world.

Vijay Thorat said...

This is all about castism because some have been taught right from childhood and that hammering make them to think and view that they are superior and above being humane and that is there visual perception psychologically, which can be named rotton brain. Nothing else.....

Anonymous said...

हिन्दू में भी तो दलितों को मंदिर में पंडित न बनाया जावे तब तो आपको खुजली न होय.
(यहाँ पर फेसबुक से लॉग इन केसे करे में अपनी आई दी से जवाब देना चाहता हु - अरविन्द.

anil baviskar said...

स्वामी नरेँद्राचार्य को वहा भेज देना चाहिए उन्होने आजतक बारा हजार से अधिक कथित दलित ईसाईयोँको हिँदु बनाया है

Anonymous said...

@ anil baviskar क्या ये स्वामी नरेँद्राचार्य दालित कहलाये जाने वालो को ब्राह्मण बना सकते है?
- अरविंद