Friday, March 23, 2012

अनुवाद कार्य के लिए “अवकाश” की सूचना एवं पाठकों हेतु शुभकामना संदेश…


नमस्कार मित्रों…

बहुत दिनों बाद (14 फ़रवरी के बाद) आज आपसे मुखातिब हूँ… सर्वप्रथम आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। आपके जीवन में आगामी वर्ष मंगलमय हो, सुख-स्वास्थ्य-समृद्धि एवं यश से भरपूर हो यह कामना है। 

मित्रों, जैसा कि मैंने अपने 26 जनवरी वाली पोस्ट (http://blog.sureshchiplunkar.com/2012/01/five-years-in-hindi-blogging-overview.html) में ब्लॉगिंग से दूरी बनाने तथा व्यवसाय की ओर अधिक ध्यान देने के सम्बन्ध में पोस्ट लिखी थी, फ़िलहाल उस पर अमल करने में लगा हुआ हूँ…।

आप सभी को एक हर्षमिश्रित खेद भरी सूचना देना चाहता हूँ…
हर्षमिश्रित खेद!!!!! ये क्या होता है???

तो मित्रों, आप सभी की शुभकामनाओं से मुझे अनुवाद करने हेतु दो प्रोजेक्ट मिले हैं। पहला प्रोजेक्ट मराठी से हिन्दी अनुवाद का है, जबकि दूसरा प्रोजेक्ट अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद का है, तथा यह दोनों ही प्रोजेक्ट मुझे एक निश्चित तय समय सीमा (अर्थात दीपावली) से पहले सम्पूर्ण करने हैं। चूंकि आर्थिक रूप से दोनों ही प्रोजेक्ट आकर्षक हैं, सो मना करने का तो सवाल ही नहीं उठता था… इसलिये यह तो हुई हर्षदायक सूचना…

अब इसमें छिपे खेद को भी आपके समक्ष रखता हूँ, वह यह है कि जैसा मैंने कहा था कि मैं कभी-कभार ब्लॉगिंग भी करूंगा अथवा किसी घटना विशेष पर कोई लेख भी लिखूंगा… परन्तु अब समयाभाव एवं कार्य के अत्यधिक दबाव के कारण यह सम्भव नहीं हो सकेगा। विगत लगभग दो वर्ष से मैं फ़ेसबुक पर काफ़ी सक्रिय रहा, 5000 मित्र और 3000 से अधिक सब्स्क्राइबर्स भी बनाए, लगभग सभी विषयों पर विचार रखे (क्योंकि फ़ेसबुक पर 4-6 पंक्तियों के नोट्स लिखना आसान था, बनिस्बत शोध करके ब्लॉग लिखने के)। परन्तु अनुवाद के इन दोनों प्रोजेक्ट्स की महत्ता को देखते हुए एवं इसमें लगने वाली एकाग्रता के मद्देनज़र अब फ़ेसबुक पर भी कम ही आना-जाना होगा…

जैसा कि मैंने अपने उस लेख में कहा था कि विगत लगभग डेढ़ साल की मेरी ब्लॉगिंग मुख्यतः दो मित्रों के कारण ही सम्भव हुई (पहले वे जिन्होंने इस कार्य हेतु लैपटॉप प्रदान किया तथा दूसरे वे जिन्होंने एक वर्ष के लिए प्रतिमाह 3000/- रुपए का योगदान दिया)। इसके अलावा कई मित्रों ने अपने तईं सहयोग राशियाँ भी दीं थी, परन्तु यह आर्थिक सहयोग सिर्फ़ ब्लॉग चलाने के लिए ही पर्याप्त और सीमित था इस एक-डेढ़ साल के बीच, एक सुदृढ़ आर्थिक मॉडल तैयार करने सम्बन्धी विभिन्न तरह की सलाह-मशविरे प्राप्त हुए, जैसे कि कोई ट्रस्ट बनाना, कोई NGO तैयार करना, कोई कम्पनी बनाकर एक न्यूज़ वेबसाइट बनाना इत्यादि…।

ज़ाहिर है कि सभी शुभचिंतक चाहते थे कि एक Financial Mechanism बने जिसके द्वारा कुछ आर्थिक मजबूती प्राप्त की जा सके… परन्तु यह सभी सुझाव एवं नायाब आईडियाज़, मेरे आलस्य, निकम्मेपन, समय की कमी तथा मुझमें Entrepreneurship (उद्यमिता) भावना न होने की वजह से, कभी भी सिरे नहीं चढ़ सके और घूम-फ़िरकर मैं वापस वहीं पहुँच गया जहाँ से शुरु हुआ था। निश्चित रूप से यह सिर्फ़ मेरी ही असफ़लता है, कि मैं अपने ब्लॉग एवं हिन्दुत्ववादी लेखन को एक नई आर्थिक ऊँचाई नहीं दे सका। कुछ विज्ञापन भी मिले पर पैसा नहीं मिला, कई लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में भी छपे, लेकिन पैसा वहाँ से भी नहीं मिला (बल्कि यूँ कहिये कि संकोचवश मैंने ही उनसे नहीं माँगा)। बीच में एक आकर्षक ऑफ़र आया था, परन्तु जो मालिक महोदय थे वे अपनी शर्तों पर तथा उनके चुने हुए विषयों पर मुझसे लेखन चाहते थे, जिसे मैंने नकार दिया। पाँच वर्ष तक मुक्त रूप से अपने मन का हिन्दुत्ववादी लेखन करने के बाद किसी की नौकरी, दबाव या तय समय-सीमा का लेखन अपने बस की बात नहीं…।

मेरी इच्छा तो यही थी कि ऐसा कोई मॉडल या मैकेनिज़्म तैयार होता जो हिन्दुत्व की सेवा, जनजागरण के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी मजबूती ग्रहण करता, परन्तु ऐसा नहीं हो सका। फ़ेसबुक पर मेरी सक्रियता देखकर जो नए दोस्त-दुश्मन बने, उनमें से अधिकांश सोचते हैं कि शायद मैं संघ-भाजपा से भारी मात्रा में पैसा लेकर लिखता हूँ। फ़ेसबुक पर मुझसे खार खाए बैठे मित्रों(?) से मैं आज खुले तौर पर कहना चाहता हूँ कि भाजपा-संघ से पैसा लेना तो दूर, मैं तो संघ का जमीनी एवं सक्रिय सदस्य भी नहीं हूँ…। विगत पाँच वर्ष में मैंने जितना भी लिखा अपनी अन्तरात्मा की आवाज़ पर लिखा, अपनी विचारधारा के तहत लिखा और मुझे इसका कोई खेद भी नहीं है।

बहरहाल… बीती हुई बातों को याद करने का अब कोई मतलब नहीं है, और वैसे भी अन्ततः मेरे ब्लॉग एवं लेखन-कर्म को देखकर ही तो मुझे अनुवाद के यह दोनों प्रोजेक्ट्स मिले हैं, इसलिए इसे अप्रत्यक्ष रूप से ब्लॉग से होने वाली कमाई ही माना जाना चाहिए…। बस खेद सिर्फ़ इतना है कि ब्लॉगिंग तो लगभग छोड़नी ही पड़ेगी, फ़ेसबुक पर भी सक्रियता बहुत कम करनी पड़ेगी (कम से कम अगले छः माह)।

2012 की दीपावली तक सम्भवतः मैं थोड़ा फ़्री हो जाऊँगा, इंटरनेट के तेज गति जमाने में यदि तब तक आप लोग मुझे याद रख सकें और (मुझे तो इंटरनेट पर सर्च करने और लिखने के अलावा कुछ और आता नहीं है इसलिए), मानो फ़िर भी इस बीच कोई आर्थिक मॉडल तैयार हुआ, तो हम दीपावली के बाद फ़िर मिलेंगे… तब तक मैं अनुवाद का यह अति-आवश्यक कार्य निपटा लूँ। यह भी हो सकता है, कि मेरा अनुवाद कार्य दोनों ग्राहकों को बेहद पसन्द आ जाए तो मैं इसी को अपना "पूर्णकालिक व्यवसाय" बना लूं तथा ब्लॉग-फ़ेसबुक को पूरी तरह तिलांजलि दे दूं…

कुछ बुद्धिजीवी नक्सलवाद के नाम पर, कुछ गरीबों के नाम पर, कुछ गोधरा दंगों के नाम पर जबकि कुछ हिन्दुत्व के नाम पर मोटी कमाई कर रहे हैं, अपने मकान और कारें खड़ी करते जा रहे हैं, मुझमें यह सब करने जितनी अकल और क्षमता नहीं है, इसलिए टेम्परेरी अवकाश लेकर अनुवाद-कर्म के जरिये चार पैसे कमाने की जुगाड़ में आपसे दूर जा रहा हूँ…

नमस्कार एवं एक बार पुनः नववर्ष की समस्त शुभकामनाएं।

========
नोट :- मित्रों आप यह न सोचें कि मैं हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद की सेवा से कुछ समय के लिए दूर जा रहा हूँ, क्योंकि जिन पुस्तकों का मैं अनुवाद करने जा रहा हूँ, वह भी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने वाली ही हैं…, फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि ब्लॉगिंग और फ़ेसबुक पर मैं बगैर मेवे की प्रत्यक्ष सेवा करता था, अब यह अप्रत्यक्ष सेवा करूंगा जिसमें मेवा भी मिलेगा…

(यदि ब्लॉग पर आई हुई टिप्पणियों, ई-मेल अथवा फ़ेसबुक कमेण्ट्स का समय पर जवाब न दे सकूं, तो माफ़ कर दीजिएगा…)

41 comments:

Anonymous said...

शुभकामनायें

Anonymous said...

शुभकामनायें

जी.के. अवधिया said...

प्रिय सुरेश जी,

अन्य कार्यों को छोड़ कर आवश्यक कार्य सबसे पहले करना बहुत जरूरी है। मेरी कामना है कि आपका कार्य आपके ग्राहकों को बेहद पसन्द आए!

आपके सुखद भविष्य की कामना के साथ,

जी.के. अवधिया

पंकज कुमार झा. said...

बहुत शुभ कामना सुरेश जी. आपने सदा ही स्तुत्य कार्य किया है, उम्मीद है भविष्य में भी इसी तारह सक्रिय रहेंगे, मदह्यम चाहे जो भी हो.बधाई.

भारतीय नागरिक said...

आपके लिए बहुत बहुत शुभकामनाएँ/

Padm Singh said...

हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं... एक इच्छा मेरी पहले भी थी और आज फिर से प्रकट करना चाहता हूँ कि आपके लेखों को एक पुस्तक का रूप दिया जाना आवश्यक है और इस पर भी आप कार्य करेंगे ऐसी आशा और अभिलाषा भी है। आपके कार्य के लिए साधुवाद... हमारी मंगल कामनाएँ आपके साथ सदैव

Jitendra Dave said...

बिलकुल सही कदम. ब्लोगिंग के भले ही अस्थाई अवकाश लिया हो, लेकिन लेखन से जुड़े रहे हो वह भी कम नहीं. और आज के आर्थिक युग में आर्थिक सुरक्षा पर सोचना भी लाजिमी है. इस बीच पाठको को आपके पुराने लेखो से जुगाली करने का मौक़ा मिलेगा.
और हाँ, आपको देखकर हम जैसे कई अनाडी ब्लोगरो को लिखने का हौंसला मिला है, ये कोई कम उपलब्धी नहीं है.

Desh Premi said...

शुभकामनायें

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

ढेर सारी शुभकामनाएं .

संजय @ मो सम कौन ? said...

शुभकामनाओं के लिये धन्यवाद और जिस कार्य का उल्लेख किया है, उसके लिये शुभकामनायें।
जाईये और सफ़लतापूर्वक काम करके लौटिये, इंतज़ार रहेगा।

sanjay patel said...

सुरेश भाई आपको प्रणाम करता हूँ.चूँकि गुडीपडवा का दिन है और मालवी दिवस भी तो आपको शुभकामना बधाई देता हूँ.आपने इंटरनेट पर माँ-भारती की अनन्य सेवा की है और यह पूरी तरह से एक थेंकलैस जॉब रहा है. कितने कितने विषयों पर आपके क़लम ने जादू बिखेरा है याद करना मुश्किल है. मित्रों ! यदि मैं देवनागरी में कंप्यूटर पर लिखने के क़ाबिल बना हूँ तो इसका श्रेय हमारे सुरेश भाई को ही जाता है. उन्होंने मुझे तकनीक समझाकर न जाने कितने हज़ार शब्द रचने की प्रेरणा दे दी जिससे मेरे लेखन और कर्म को व्यापक फलक मिला.आभार और साधुवाद देना ही होगा आपका..वरना मालवी में जिसे कहते हैं 'नुगरा' ही कहलाउँगा....

अनुवाद के लिये सुरेश भाई ये अवकाश अनिवार्य है उसके बिना बड़े प्रकल्प पूरे नहीं किये जा सकते. हाँ जहाँ तक इंटरनेट पर लिखने का सवाल है आप अपने आपको रोक नहीं सकेंगे सुरेश भाई....आपके अंदर का लेखक आपसे लिखवाएगा..मैं उसको आपसे ज़्यादा जानता हूँ...

शुभेच्छाएँ...

Ratan Singh Shekhawat said...

शुभकामनाएँ

दिवस said...

आदरणीय सुरेश भाई, सर्वप्रथम आपको भी नववर्ष की अनेकों शुभकामनाएं साथ ही इस नवीन कार्य के लिए आपको बधाई एवं मंगलकामनाएं।
फेसबुक व ब्लॉग जगत से आपकी दूरी अखरेगी। ब्लॉग से तो फिलहाल हम भी दूर हैं क्योंकि फेसबुक पर यह अभियान सरल व सफल लगा। आपकी विवशता समझ सकते हैं। हो सके तो समय निकाल कर कभी-कभी दर्शन दे दिया कीजियेगा। आपको भूलने का तो प्रश्न ही नहीं। जो आग आप लगा चुके हैं उसे ठंडा करना अब असंभव है। हिंद्त्व की रक्षा में आपका योगदान अतुल्य है।
इश्वर से प्रार्थना है कि वह आपको ऐसे और भी अनेकों सुअवसर प्रदान करे।
आपका इंतज़ार रहेगा बस आप हमे मत भूल जाना।
आशा है आप शीघ्र ही साथ होंगे।
वन्देमातरम...

संजय तिवारी said...

यहां जितने लोग कमेन्ट कर रहे हैं किसी को तकलीफ नहीं हो रही है कि आर्थिक संकट के कारण एक लेखक अनुवादक हुआ जा रहा है.

हिन्दी पाठकों की दरिद्रदता और तथाकथित हिन्दूवादियों का छद्म स्वरूप इसी से सामने आ जाता है.

सुरेश भाई, लिखना बंद मत करना. अनुवाद और लेखन दो अलग अलग तरह के कार्य जरूर हैं लेकिन हिन्दी का दुर्भाग्य है कि यहां लेखक को पेट पालने के लिए अनुवाद करना पड़ता है. न जाने कितने लेखक ऐसा करते आये हैं और आज भी कर रहे हैं.

क्या कहें, इस दुर्भाग्य पर. कायदे से तो आपको कोई ऐसा प्रोजेक्ट मिलता कि जो कर रहे थे वही करते रहते. दुखी हो जाने से अधिक अपने पास भी कहने के लिए कुछ नहीं है. फोन पर बात करेंगे.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

यह भी हो सकता है, कि मेरा अनुवाद कार्य दोनों ग्राहकों को बेहद पसन्द आ जाए तो मैं इसी को अपना "पूर्णकालिक व्यवसाय" बना लूं तथा ब्लॉग-फ़ेसबुक को पूरी तरह तिलांजलि दे दूं…

...पेट और भूख को अलग अलग रख्‍ों, गड्डमगड्ड न करें. ब्‍लागिंग में बहुत से लोग केवल भावाभि‍व्‍यक्‍ति‍ के कारण हैं (उनकी रोज़ी वर्ना ठीक-ठाक ही चल रही है) ☺☺☺

manoj sharma said...

good luck........

Kuntal F Services said...

आदरणीय सुरेश जी,
सादर वंदे,

वस्तुतः राष्ट्र सदैव व्यक्ति विशेष से अनेको स्थान ऊपर है, किन्तु ये भी सत्य है की व्यक्ति को राष्ट्र सेवा के साथ साथ अपने परिवार व स्वयं के भरण पोषण का प्रबंध करना भी आवश्यक है, अतः आपको अपने नए व्यावसायिक उद्यम हेतु शुभकामनाये. किन्तु कुछ ऐसा भी प्रबंध करे की आप ना तो अपने ब्लॉग से दुर रहे न अपने फेसबूक मित्रों से, दिन में १० मिनट के लिए ही सही आप अपने विचार फेसबूक पर तो रख ही सकते है, यदि आपके विचार में कोई उपयुक्त व्यक्ति हो तो उनहे आप अपने ब्लॉग पर लेख लिखने की परमिशन दे सकते है, आप चाहे तो उनके विचार व लेख आपके द्वारा मोडरेट करने के पश्चात प्रकाशित हो ऐसा प्रबंध भी कर सकते है.

कृपया इन सुझावों पर एक बार अवश्य विचार करे.

धन्यवाद

टिप: यदि किसी प्रकार की कोई तकनीकी सहायता की आवश्यकता हो तो आप निसंकोच मुझसे संपर्क कर सकते है.

आपका
चंद्रप्रकाश जोशी

Dhananjay said...

हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं...

Ravishankar Shrivastava said...

संजय तिवारी और काजल कुमार की बात से सहमत.

अनुवादों में तो मैं भी जुटा रहता हूँ. मगर ब्लॉगिंग?
ये तो अनुवाद करते करते जब दिमाग का भट्टा बैठने लगता है तो यह उसे रीफ्रेश करता है.
बहरहाल, शुभकामनाएं.

save bharat said...

आदरणीय सुरेश भाई,
प्रणाम
सर्वप्रथम आपको तथा आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें!
आपको नए प्रोजेक्ट्स प्राप्त हुए हैं ये जानकर प्रसन्ता हुई परन्तु ये जानकर अत्यंत दुःख हुआ की आप अब facebook पर सक्रिय नहीं रहेंगे, मैं प्रारंभ से ही आपके लेखन का प्रशंसक रहा हूँ और आपके निडर लेखन तथा प्रत्येक विषय पर सटीक टिप्पणी के लिए आपकी सराहना भी करता हूँ l मैं मानता हूँ की आपका ये कार्य भी राष्ट्र सेवा का कार्य है, और राष्ट्र सेवा के कार्य में अल्प विराम या पूर्ण विराम का कोई स्थान नहीं होना चाहिए l यदि आप अपने प्रोजेक्ट पर कार्य करते हुए जीवन के अन्य आवश्यक कार्यों के लिए समय निकल सकते हैं तो अवश्य ही आपको इस राष्ट्र सेवा के कार्य को भी निरंतर प्रारंभ रखना चाहिए l
धन्यवाद् !

मह्फ़ूज़ अली said...

Agreed with Ravi Shankar Shrivastava ji, kajal kumar ji.... Shubhkaamanayen.....

Mahender said...

शुभकामनायें.......

आशा है आप अपनी आर्थिक स्तिथि को सुधर कर पुनः ब्लॉग्गिंग कि दुनिया में वापिस आयेंगे......

वंदे मातरम............

श्रीयंत्र said...

नव संवत् पर नए आर्थिक कार्य करने के संकल्प तथा इस पारी के कुछ अनुभव बांटते हुए आपने जो लिखा है वह शिरोधार्य है। आपने विगत अनेक वर्षों से 'पूर्व पक्ष' के संबंध में ब्लॉगिंग कर अपने स्तर पर जो प्रयास किया है वह अपनी विशिष्टता के साथ पर्याप्त मानता हूँ तथा इस धारा पर अनेक बंधु भी कार्य के लिए प्रेरित हुए हैं। आपने अपने 'स्वभाव' अनुसार जो कार्य किया है उसके परिणाम अन्य 'स्वभाव' के हो भी नहीं सकते थे। कुछ भाग प्रारब्ध से भी मिलता है यह भी जीवन में देखने को मिलता है अतः क्या, कितना, कैसे मिला या क्या स्वयं का लगा सदैव भिन्न देखा गया है फिर भी मंगलकामना करता हूँ कि आपका कार्य नए बंधु बांधवों को भी इस कार्य क्षेत्र में प्रेरणादेय रहेगा। हमें भी अनेक अवसरों पर आपकी कमी भी खलेगी। इस 'रिटायर्ड हर्ट' स्थिति में आपके लौटने पर अच्छे खेल के लिए क्रमिक करतल ध्वनि का स्वागत करता हूँ।

Sulabh Jaiswal "सुलभ" said...

शुभकामनाएं !!

राष्ट्रहित में आपका सेवा कार्य (लेखन ) याद रखा जायेगा, और बहुतो ने तो इससे प्रेरणा भी पायीं, यही आपकी उपलब्धि है.
जैसा कि ऊपर कहा जा चूका है, फेसबुक पर आना जाना एक रिस्फ्रेश्मेंट है. जीवन में कुछ भी बहुत ज्यादा गंभीर नहीं होता (कुछ समय के लिए गंभीर प्रतीत होता है बाद में सामान्य हो जाता है), सभी कार्य जरुरी होते हैं. आपको और भी प्रोजेक्ट्स मिले, हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ है. बाकी टाईम मैनेजमेंट से बहुत कुछ संभव हो जाता है. (मैं स्वयं मैनेजमेंट में कमजोर हूँ सलाह देना उचित नहीं लगता )
जैसा कि आप पहले कह चुके है आर्थिक सरंचना सुदृढ़ होने तक आप पुरे मन से अपना समय बिजनस में दें. मैं भी तो आर्थिक मोर्चे पर संघर्ष कर रहा हूँ, ब्लॉग पर आना जाना कम होता है.
लेकिन रिफ्रेशमेंट और प्रेरणा लोगों के बीच से ही मिलती है. शुभकामनाएं !!

Anand Khadilkar said...

Wish you all the best for your project..

Kautilya said...

प्रिय सुरेशजी, आपको ब्लागिंग से दूर होते देखना दुखद है, पर कोई बात नहीं। जीवन में उतार चढाव तो आते ही रहते हैं। मैं कभी प्रचारक के रूप में पूरे समय समाज के काम लगा रहता था, आज आजीविका के कामों से समय निकालना कठिन हो रहा है। परंतु मैं जानता हूँ कि यह प्यास है बडी। यह सोने नहीं देती है। आप कल भी माँ भारती की सेवा कर रहे थे, आज भी कर रहे हैं और कल भी करते रहेंगे भले ही माध्यम कुछ भी हो।
यह ठीक है कि अनुवाद लेखन जैसा रचनाधर्मी कार्य नहीं है, परंतु वह रचनाधर्मी नहीं है, ऐसा कहना बिल्कुल भी उचित नहीं। कुछ नहीं करते हुए केवल रोते रहने से अच्छा है कुछ करते रहना और प्रसन्न रहना। यही आप कर रहे हैं और इसी की आप से हमें अपेक्षा भी है।
आपके नए कार्य के लिए हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

ePandit said...

आपके प्रोजैक्ट के लिये शुभकामनायें। आर्थिक पक्ष देखना भी जरूरी है, कहावत है, 'भूखे पेट न भजन गोपाला'

आप सफल होकर लौटें, यही कामना है।

Mahendra Gupta said...

hardik shubhkamnaye

Viral Trivedi said...

શુભકામનાઓ...
નેટ પર તો શું ગમે ત્યાં ગમે તે લખો કંઇ ફરક નથી પડતો કારણકે આપણે બહુમત લોકો?

indianrj said...

सुरेशजी आपको बहुत-२ शुभकामनायें. मैं तो सिर्फ आपका ब्लॉग ही पढ़ती हूँ, facebook पर सक्रिय नहीं हूँ. स्वार्थवश एक प्रार्थना करना चाहूंगी कि आप हम जैसे कितने लोगों को अपडेट करने का बहुत ही अच्छा कार्य कर रहे थे क्योंकि आपका लिखा पूर्णत सत्य होता था. अब हम ऐसी विश्वाश्पूर्ण जानकारियों से हाथ धो बैठेंगे. और एक बात, जैसे देश को आजाद कराने में कुछ लोगों ने किसी बात कि परवाह नहीं और देश को मुक्त कराया, ऐसे ही आप भी लिखकर जो अलख जला रहे थे और बहुत से लोगों के दिमाग पर पड़ी हुई जंजीरों से मुक्त करने का बहुत अच्छा और नेक उद्देश्य पूरा कर रहे थे, कृपया कभी-२ ही, सही मेरे जैसे स्वार्थी लोगों के लिए कुछ तो वक़्त निकाल ही लीजियेगा please .

पुष्कर वीर सिंह said...

फेस बुक व ब्लागिंग ना छोड़े समय का समायोजन कर के कुछ ना कुछ लिखते रहिये
आपको पढ़ने की आदत हो गयी है अब

Rupesh mishra said...

suresh ji, sanjay tiwari ji ne kitni badi baat kahi- kewal paise ke abhav ke karan ek lekhak dum tod raha hai. apke 1000 se upar subscriber hain. agar sabhi kewal 100 rupaye per month hindutva ke sewa me apko de dete to kitna achha hota. ap bina kisi tensoin ke ye punit karya kar sakte. mai to 200 per month bhi dene ko taiyar hoon. Hinduo ki yahi kami akharti hai. baate badi badi karte hain par jab sahyog ki baat ati hai to bus subhkamnaye dekar pechhe khisak jate hain.

Rahul said...

dosti k andaz ki sorat ho app
kisi ki zindagi ki zaroorat ho app
khubsurat phool tu bohat hain dunya mai
par kisi k liye phool sy ziyada khubsurat ho app.

प्रशांत गुप्ता said...

ढेर सारी शुभकामनाएं .

KAVITA said...

Kaam sabse pahle jaruri hai usi se to sabkuch chalta hai...
bahut achhi prastuti
aapko bhi hardik shubhkamnayen!

जितेन्द्र सिंह 'सदैव राष्ट्रवादी'... said...

आपके 'आर्थिक प्रोजेक्ट'?? की शुभ-कामनाएं...
'भूखे भजन ना होए गोपाला' की तर्ज पर इतना धन तो आवश्यक है जो आजीविका चला सके...
मुझे स्वयम पर और आपके स्वाभिमान पर गर्व हो रहा है कि मैं आपसे जुड़ा हुआ हूँ और आपने अपनी लेखनी का सौदा 'धन-दौलत' के लिए नही किया...
आपके लेखों का इन्तजार रहेगा...
पुनः शुभ-कामनाएं....
'राष्ट्र सर्वप्रथम सर्वोपरि'
वन्दे मातरम्...
जय हिंद... जय भारत...

anand khanwalkar said...

aap apna kary purn karke lotiye hame aapka intjar rahega

Anonymous said...

सुरेश जी अगर आज आपको धन कमाने के लिये अपनी रुचि का कार्य रोकना पड़ रहा है तो इसमेँ दोष हमारे देश की व्यवस्था का ही है, मैँ स्वयँ चाहता हूँ कि इस देश की बिगड़ी हुई व्यवस्था को सुधारने के लिये सभी राष्ट्रवादी एक साथ एक मँच पर आकर एक राष्ट्रवादी मीडिया हाउस बनायेँ जिसका एक चैनल, एक पत्रिका,एक समाचारपत्र,एक वेबसाइट और एक ब्लाग हो सरकार से लड़ने वाले सभी लोग एक साथ हो कर एक गठबंधन बना लेँ जिसमेँ डा0सुब्रम

YOGA said...

सुरेश जी अपनी आजीविका के लिए अर्थोपार्जन अत्यंत आवश्यक है पर मैं आपसे निवेदन करना चाहूँगा कि जिस कार्य को आपने आरम्भ किया है उसे मत छोडिये क्यों कि वर्तमान परिस्थिति में आपकी ब्लॉग वाली सेवा देश व् धर्मं के लिए अत्यंत आवश्यक है निश्चित आपको अलग से समय देना पड़ेगा वह भी अपने व्यस्ततम समय में से समय निकलकर . आप ईश्वरीय कार्य कर रहे हैं , ईश्वर भी यह कार्य पात्र व्यक्तियों को सौंपता है अतः निवेदन स्वीकारने की आपसे मेरी प्रार्थना है .

सुनील दत्त said...

सुरेश जी शुभकामनायें परन्तु हमें नहीं लगता कि कोई भी ऐसा हिन्दुत्ववादी/देशभक्त लेखक/बलागर ऐसा है जिसे देशहित में लिखने के बदले कोई फूटी कोड़ी भी देता हो क्योंकि हिन्दूओं के आर्थिक संससाधनों पर या तो सरकारों का कब्जा है या फिर ऐसे लोगों का जिनको सासंस्कृतिकराष्ट्रवाद की रती भर भी समझ नहीं। अगर हम लोगों ने इन आर्थिक समस्याओं से पार पानान है तो इन संस्साधनों पर हिन्दूत्व समर्थकों का नियन्त्रण सुनिस्चित करना जरूरी है ये काम SGPC की तर्ज पर अखिल भारतीय मन्दिर प्रबन्धक कमेटी(ABMPC) बनाकर ही किया जा सकता है । पाठक इस सन्दर्भ में अपनी राय sdsbtf@gmail.com पर भेज सकते हैं।

Praful said...

Suresh Sir,

Don't worry sirji, If you want to develop a fully customized own blog I will do it for you free of cost,
and also give you lifetime support.

If you need any type of technical help at any point of time, I am only far from one mail.

Hope to see you soon on both places.

Regards
Praful