अनुवाद कार्य के लिए “अवकाश” की सूचना एवं पाठकों हेतु शुभकामना संदेश…
नमस्कार मित्रों…
बहुत दिनों बाद (14 फ़रवरी के बाद) आज आपसे मुखातिब हूँ… सर्वप्रथम आप सभी
को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। आपके जीवन में आगामी वर्ष मंगलमय हो,
सुख-स्वास्थ्य-समृद्धि एवं यश से भरपूर हो यह कामना है।
मित्रों, जैसा कि मैंने अपने 26 जनवरी वाली पोस्ट
(http://blog.sureshchiplunkar.com/2012/01/five-years-in-hindi-blogging-overview.html) में ब्लॉगिंग से दूरी बनाने तथा व्यवसाय की ओर अधिक ध्यान देने के सम्बन्ध में
पोस्ट लिखी थी, फ़िलहाल उस पर अमल करने में लगा हुआ हूँ…।
आप सभी को एक “हर्षमिश्रित खेद” भरी
सूचना देना चाहता हूँ…
“हर्षमिश्रित
खेद”!!!!! ये क्या होता है???
तो मित्रों, आप सभी की शुभकामनाओं से मुझे अनुवाद करने
हेतु दो प्रोजेक्ट मिले हैं। पहला प्रोजेक्ट मराठी से हिन्दी अनुवाद का है, जबकि
दूसरा प्रोजेक्ट अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद का है, तथा यह दोनों ही प्रोजेक्ट मुझे
एक निश्चित तय समय सीमा (अर्थात दीपावली) से पहले सम्पूर्ण करने हैं। चूंकि आर्थिक
रूप से दोनों ही प्रोजेक्ट आकर्षक हैं, सो मना करने का तो सवाल ही नहीं उठता
था… इसलिये यह तो हुई हर्षदायक सूचना…
अब इसमें छिपे “खेद” को
भी आपके समक्ष रखता हूँ, वह यह है कि जैसा मैंने कहा था कि मैं कभी-कभार ब्लॉगिंग
भी करूंगा अथवा किसी घटना विशेष पर कोई लेख भी लिखूंगा… परन्तु अब समयाभाव एवं
कार्य के अत्यधिक दबाव के कारण यह सम्भव नहीं हो सकेगा। विगत लगभग दो वर्ष से मैं
फ़ेसबुक पर काफ़ी सक्रिय रहा, 5000 मित्र और 3000 से अधिक सब्स्क्राइबर्स भी बनाए,
लगभग सभी विषयों पर विचार रखे (क्योंकि फ़ेसबुक पर 4-6 पंक्तियों के नोट्स लिखना
आसान था, बनिस्बत शोध करके ब्लॉग लिखने के)। परन्तु अनुवाद के इन दोनों
प्रोजेक्ट्स की महत्ता को देखते हुए एवं इसमें लगने वाली एकाग्रता के मद्देनज़र अब
फ़ेसबुक पर भी कम ही आना-जाना होगा…
जैसा कि मैंने अपने उस लेख में कहा था कि विगत लगभग
डेढ़ साल की मेरी ब्लॉगिंग मुख्यतः दो मित्रों के कारण ही सम्भव हुई (पहले वे
जिन्होंने इस कार्य हेतु लैपटॉप प्रदान किया तथा दूसरे वे जिन्होंने एक वर्ष के
लिए प्रतिमाह 3000/- रुपए का योगदान दिया)। इसके अलावा कई मित्रों ने अपने तईं सहयोग राशियाँ भी दीं थी, परन्तु
यह आर्थिक सहयोग “सिर्फ़
ब्लॉग चलाने के लिए ही पर्याप्त और सीमित था”। इस एक-डेढ़ साल
के बीच, एक सुदृढ़ “आर्थिक
मॉडल” तैयार करने सम्बन्धी विभिन्न
तरह की सलाह-मशविरे प्राप्त हुए, जैसे कि कोई ट्रस्ट बनाना, कोई NGO तैयार करना, कोई कम्पनी बनाकर एक न्यूज़ वेबसाइट बनाना इत्यादि…।
ज़ाहिर है कि सभी शुभचिंतक चाहते थे कि एक Financial
Mechanism बने जिसके द्वारा कुछ आर्थिक मजबूती प्राप्त की जा
सके… परन्तु यह सभी सुझाव एवं नायाब आईडियाज़, मेरे आलस्य, निकम्मेपन, समय की कमी
तथा मुझमें Entrepreneurship (उद्यमिता) भावना न होने की वजह से, कभी
भी सिरे नहीं चढ़ सके और घूम-फ़िरकर मैं वापस वहीं पहुँच गया जहाँ से शुरु हुआ था।
निश्चित रूप से यह “सिर्फ़
मेरी ही असफ़लता” है,
कि मैं अपने ब्लॉग एवं हिन्दुत्ववादी लेखन को एक नई आर्थिक ऊँचाई नहीं दे सका। कुछ
विज्ञापन भी मिले पर पैसा नहीं मिला, कई लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में भी छपे,
लेकिन पैसा वहाँ से भी नहीं मिला (बल्कि यूँ कहिये कि संकोचवश मैंने ही उनसे नहीं
माँगा)। बीच में एक आकर्षक ऑफ़र आया था, परन्तु जो “मालिक महोदय” थे वे अपनी शर्तों पर तथा उनके चुने हुए विषयों पर मुझसे लेखन चाहते थे, जिसे
मैंने नकार दिया। पाँच वर्ष तक “मुक्त
रूप से अपने मन का”
हिन्दुत्ववादी लेखन करने के बाद किसी की “नौकरी”, “दबाव” या “तय
समय-सीमा” का
लेखन अपने बस की बात नहीं…।
मेरी इच्छा तो यही थी कि ऐसा कोई मॉडल या मैकेनिज़्म
तैयार होता जो हिन्दुत्व की सेवा, जनजागरण के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी मजबूती
ग्रहण करता, परन्तु ऐसा नहीं हो सका। फ़ेसबुक पर मेरी सक्रियता देखकर जो नए
दोस्त-दुश्मन बने, उनमें से अधिकांश सोचते हैं कि शायद मैं संघ-भाजपा
से भारी मात्रा में पैसा लेकर लिखता हूँ। फ़ेसबुक पर मुझसे खार खाए बैठे “मित्रों”(?) से मैं आज खुले तौर पर कहना चाहता हूँ कि भाजपा-संघ से
पैसा लेना तो दूर, मैं तो संघ का जमीनी एवं सक्रिय सदस्य भी नहीं हूँ…। विगत पाँच
वर्ष में मैंने जितना भी लिखा अपनी अन्तरात्मा की आवाज़ पर लिखा, अपनी विचारधारा के
तहत लिखा और मुझे इसका कोई खेद भी नहीं है।
बहरहाल… बीती हुई बातों को याद करने का अब कोई मतलब
नहीं है, और वैसे भी अन्ततः मेरे ब्लॉग एवं लेखन-कर्म को देखकर ही तो मुझे अनुवाद के यह दोनों प्रोजेक्ट्स मिले हैं, इसलिए इसे अप्रत्यक्ष रूप से “ब्लॉग से होने वाली कमाई” ही माना जाना चाहिए…। बस खेद सिर्फ़
इतना है कि ब्लॉगिंग तो लगभग छोड़नी ही पड़ेगी, फ़ेसबुक पर भी सक्रियता बहुत कम करनी
पड़ेगी (कम से कम अगले छः माह)।
2012 की दीपावली तक सम्भवतः मैं थोड़ा फ़्री हो
जाऊँगा, इंटरनेट के तेज गति जमाने में यदि तब तक आप लोग मुझे याद रख सकें और (मुझे
तो इंटरनेट पर सर्च करने और लिखने के अलावा कुछ और आता नहीं है इसलिए), मानो फ़िर
भी इस बीच कोई आर्थिक मॉडल तैयार हुआ, तो हम दीपावली के बाद फ़िर मिलेंगे… तब तक
मैं अनुवाद का यह अति-आवश्यक कार्य निपटा लूँ। यह भी हो सकता है, कि मेरा अनुवाद कार्य दोनों ग्राहकों को बेहद पसन्द आ जाए तो मैं इसी को अपना "पूर्णकालिक व्यवसाय" बना लूं तथा ब्लॉग-फ़ेसबुक को पूरी तरह तिलांजलि दे दूं…
कुछ बुद्धिजीवी नक्सलवाद के नाम पर,
कुछ गरीबों के नाम पर, कुछ गोधरा दंगों के नाम पर जबकि कुछ हिन्दुत्व के नाम पर
मोटी कमाई कर रहे हैं, अपने मकान और कारें खड़ी करते जा रहे हैं, मुझमें यह सब करने जितनी
अकल और क्षमता नहीं है, इसलिए “टेम्परेरी
अवकाश” लेकर अनुवाद-कर्म के जरिये चार
पैसे कमाने की जुगाड़ में आपसे दूर जा रहा हूँ…
नमस्कार एवं एक बार पुनः नववर्ष की समस्त
शुभकामनाएं।
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नोट :- मित्रों आप यह न सोचें कि मैं हिन्दुत्व और
राष्ट्रवाद की सेवा से कुछ समय के लिए दूर जा रहा हूँ, क्योंकि जिन पुस्तकों का
मैं अनुवाद करने जा रहा हूँ, वह भी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने वाली ही
हैं…, फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि ब्लॉगिंग और फ़ेसबुक पर मैं बगैर मेवे की “प्रत्यक्ष सेवा” करता था, अब यह “अप्रत्यक्ष सेवा” करूंगा जिसमें मेवा भी मिलेगा…
(यदि ब्लॉग पर आई हुई टिप्पणियों, ई-मेल अथवा फ़ेसबुक
कमेण्ट्स का समय पर जवाब न दे सकूं, तो माफ़ कर दीजिएगा…)


