Friday, February 3, 2012

2G Spectrum, Subrahmanian Swamy, Chidambaram and A Raja


इति दूरसंचार कथा… (गोभी का खेत और किसान का कपूत)

जब से सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फ़ैसला आया है, तभी से आपने विभिन्न चैनलों पर हीरो के चेहरे से अधिक विलेन के चेहरे, बयानों, सफ़ाईयों और प्रेस कॉन्फ़्रेंसों को लगातार सुना होगा। जिस हीरो के अनथक प्रयासों के कारण आज सैकड़ों CEOs और नेताओं की नींद उड़ी हुई है, उसके पीछे माइक लेकर दौड़ने की बजाय, मीडिया की मुन्नियाँ, और चैनलों की चमेलियाँ, अभी भी विलेन को अधिकाधिक फ़ुटेज और कवरेज देने में जुटी हुई हैं असली हीरो यदि चार लाईनें बोलता है तो उसमें से दो लाइनें सफ़ाई से उड़ा दी जाती हैं, जबकि विलेन बड़े इत्मीनान और बेशर्मी से अपना पक्ष रख रहा है…

बहरहाल, पाठकों ने पिछले 2 दिनों में, हमने तो NDA द्वारा स्थापित पहले आओ, पहले पाओ की नीति का ही अनुसरण किया है, इसमें हमारी कोई गलती नहीं है… इस वाक्य का उच्चारण कई बार सुना होगा। जिन मित्रों को इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है उनके लिए बात को आसान बनाने हेतु संक्षेप में एक कहानी सुनाता हूँ… 


2001 में एक किसान अपने खेत में ढेर सारी गोभी उगाता था, लेकिन उस समय उस गोभी को खरीदकर बाज़ार में बेचने वाले व्यापारी बहुत कम थे और गोभी खाने वाले ग्राहक भी बहुत कम संख्या में थे। किसान ने सोचा कि गोभी तो बेचना ही है, फ़िलहाल पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर जो व्यापारी मिले उसे औने-पौने भावों में गोभी बेच देते हैं… यह सिलसिला 2-3 साल चला। किसान की मौत के बाद उसका एक नालायक बेटा खेत पर काबिज हो गया। 2008 आते-आते उसके खेत की गोभियों की माँग व्यापारियों के बीच जबरदस्त रूप से बढ़ गई थी, साथ ही उन गोभियों को खाने वालों की संख्या भी लगभग दस गुना हो गई। ज़ाहिर है कि जब गोभियों की माँग और कीमत इतनी बढ़ चुकी थी, तो उस नालायक कपूत को उसके अधिक भाव लेने चाहिए थे, लेकिन असल में किसान का वह बेटा अपने घर-परिवार का खयाल रखने की बजाय, एक पराई औरत के करीबियों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए, गोभियाँ सस्ते भाव पर लुटाता रहा। सस्ते भाव में मिली गोभियों को महंगे भाव में बेचकर व्यापारियों, करीबियों और पराई औरत ने बहुत माल कमाया और उसका बड़ा हिस्सा इस नालायक को भी मिला…। लेकिन उस कपूत को कौन समझाए कि जिस समय किसान पहले आओ पहले पाओ के आधार पर गोभी बेचता था वह समय अलग था, उस समय गोभी इतनी नहीं बिकती थी, परन्तु यदि कपूत को अपने घर-परिवार को खुशहाल बनाने की इतनी ही चिंता और इच्छा होती तो वह उन गोभियों को ऊँचे से ऊँचे भाव में नीलाम कर सकता था… ज्यादा पैसा परिवार में ला सकता था…।

बहरहाल ये तो हुई कहानी की बात… माननीय कुटिल (सॉरी कपिल) सिब्बल साहब ने कहा है कि सारा दोष ए राजा का है…हमारी सरकार का कोई कसूर नही। इस दावे से क्या हमें कुछ बातें मान लेना चाहिए? जैसे

1) ए राजा ने अकेले ही पूरा घोटाला अंजाम दिया…? पूरा पैसा अकेले ही खा लिया? कांग्रेस के अति-प्रतिभाशाली मंत्रियों को भनक भी नहीं लगने दी?

2) चिदम्बरम साहब अफ़ीम के नशे में फ़ाइलों पर हस्ताक्षर करते थे…?

3) प्रधानमंत्री कार्यालय नाम की चिड़िया, पता नहीं क्या और कहाँ काम करती थी…?

4) जो सोनिया गाँधी एक अदने से राज्यमंत्री तक की नियुक्ति तक में सीधा दखल और रुचि रखती हैं, वह इतनी भोली हैं कि इतने बड़े दूरसंचार स्पेक्ट्रम सौदे के बारे में, न कुछ जानती हैं, न समझती हैं, न बोलती हैं, न सुनती हैं?


वाह… वाह… वाह… सिब्बल साहब, क्या आपने जनता को (एक असंसदीय शब्द) समझ रखा है? और मान लो कि समझ भी रखा हो, फ़िर भी जान लीजिये कि जब जनता अपनी वाली औकात पर आती है तो बड़ी मुश्किल खड़ी कर देती है… साहब!!!
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जिन पाठकों ने 2G Scam से सम्बन्धित मेरी पोस्टें नहीं पढ़ी हों, उनके लिए दोबारा लिंक पेश कर रहा हूँ, जिसमें आपको डॉ स्वामी द्वारा कोर्ट में पेश किए गये कुछ दस्तावेजों की झलक मिलेगी… जिनकी वजह से चिदम्बरम साहब का ब्लडप्रेशर बढ़ा हुआ है…




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नोट :- मित्रों, सोचा था कि अब कम से कम दो-चार महीने तक तो कुछ नहीं लिखूंगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक निर्णय तथा उस पर सिब्बल साहब की भावभंगिमा, अकड़-फ़ूं भाषा और हेकड़ी को देखते हुए रहा नहीं गया…

30 comments:

Amit Choudhary said...

bahut achha kiya.....congressi bevkufo ko samjjhane ke liye acha udaharan diya aapne

Amit Choudhary said...

acha kiya suresh ji aapne likha..bahut acha udaharan hai congressiyo ko unki galti btane ka

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

"दो-चार महीने तक तो कुछ नहीं लिखूंगा"
बहुत नाइंसाफी है ये....
अभी तो वी के सिंह का मामला बाकी है, फिर चिदम्बरम साहब का....
इब्दिता हो चुकी है...

Dhananjay said...

हमें पता था सिब्बल जैसों के होते आप खामोश नहीं रह सकते. आपकी तो आप जाने लेकिन सिब्बल में कुछ तो बात है ही!!! कहते हैं शकल अकल का आइना होती है. जिस आदमी कि शकल इतनी कुटिल हो उसकी अकल से कोई अच्छी बात कैसे निकल सकती है. वैसे हम तो चाहते हैं कि सिब्बल जैसे अपना मुहं खोलते ही रहें ताकि आप जैसे लिखते ही रहें!!! और अभी तो मनीष और सिंघवी को सुनना बाकी है भाई!!!!

Ekbaa; said...

roj char baar apke blog ko khol raha tha ki ab kuchh milega. aj mil hi gaya. ap please likhna band mat karein. desh par jo sahid huye hain unko yaad kijiye aur ye alakh jagate rahiye. kisi bhi rup me sahyog ke liye hamesh hajir hoon.

Jeet Bhargava said...

गुरु बोला ना था कि जब भी साँच पे आंच आएगी, आप खुद को लिखने से रोक नही पाओगे!!
शानदार पोल-खोल लेख के लिए आभार।

lokendra singh rajput said...

कहानी बढिय़ा है। शिक्षाप्रद है। कटाक्ष भी करती है। यह प्रण मत लीजिए कि चार-छह माह तक नहीं लिखेंगे। वैसे मेरा आग्रह मानो न मानो लेकिन ये नालायक सरकार आपको खाली नहीं बैठने देगी। मीडिया के बारे में भी सही लिखा आपने हीरो को पीछे माइक लेकर भागने की वजाय ये लोग विलेन को सफाई का पूरा मौका दिए जा रहे हैं। एक पक्ष को इतना मौका वह भी गलत पक्ष को इतना मौका देना गलत है।

Vivek Beniwal said...

कांग्रेस ने जनता को महा मुर्ख समझ रखा है. समझ में नहीं आता पहले आओ- पहले पाओ की नीति किस प्रकार कांग्रेस के घोटाले के लिए जिम्मेवार है. कांग्रेस ने सोची समझी साजिस के तहत ये घोटाला किया है. पहले तो स्पेक्ट्रम आबंटन की तिथि आचानक बदल दी गयी, ताकि जिन कंपनियों साथ सांठ-गाँठ नहीं है वो तैयारी भी ना कर पाएं. इसकी अनुमति भी प्रधान मंत्री कार्यालय से आयी. स्पेक्ट्रम आबंटन वाले दिन एक दम से नयी शर्तें रख दी गयी. कंपनियों को 2 बजे बोला गया कि बोली लगने के बाद 4 बजे तक डिमांड-ड्राफ्ट जमा करा दें, अगर ऐसा नहीं होता है तो स्पेक्ट्रम उसके बाद वाली सबसे ऊँची बोली वाले को दे दिया जाएगा. अब जो कंपनियां सांठ-गाँठ के साथ वहां थी वो पहले से ही जानती थी और तैयारी में बैठी थी. उसके बाद भी अगर कोई दूसरी कंपनी टाइम से पहले शर्तें पूरी करने में सफल भी हुयी तो ए. राजा ने टाइम नहीं दिया और उन्हें लाइन में लगाये रखा. कांग्रेस और डीएम्के के सिक्यूरिटी गार्डस (गुंडों) ने उन्हें समय पर अन्दर जाने ही नहीं दिया गया. फिर टाइम पूरा हो जाने के बाद उन्हें समय की दलील देते हुए भगा दिया. अब कांग्रेस कभी ये बताएगी कि आखिर इस सब के लिए इतनी जल्दी क्या थी? क्यों स्पेक्ट्रम आबंटन की तिथि को समय से पहले कर दिया गया? फिर बोली लगने के बाद ऐसी क्या जल्दी हो गयी कि उसी दिन और केवल दो घंटे ही स्पेक्ट्रम आबंटन की शर्तों को पूरा करने के लिए दिए गए?

manoj sharma said...

kutil sibbal..digvijay singh...jaise log hi satyanash kar rahe hai......gumraah kar rahe hai desh ko....per yeh Jo media bussiness wale hai........inka to bhagwan hi malik...........ANY WAY THNX GURU JI

Anonymous said...

Yeh baat har Bharatvasi acchhi tarah se janta hai, ki Congess yani UPA Sarkar kis tarah saare desh ko be-waqoof banaati aa rahi hai, ' Chori bhi khule aam, badmashi bhi khule aam karna to Iss Congress sarkar se puchhain.
Suresh ji, aapke lekh email ke jariye hum sab ko milte hain aur Congress ke kaale kaarnaamain ujagar hote rehta hain, par iss congress sarkar ko kaun hila saka hai. Ghor kliyug hai.
Dhanyawad

Anonymous said...

अपने देश मे लुटेरो का राज है जनता सोइ हुइ है
और जब तक जागेगी तब तक बहुत देर हो चुकी होगी

मेहराराम गोदारा said...

कोंग्रेसी एक नम्बर के बेशर्म झूठे और मक्कार है !इनके पास कोई तर्कसंगत जवाब नहीं होता है, केवल मक्कारी है !

vikas mehta said...

sureh ji nmskaar kam shbdo me bhi bhut acha likh diya ase hi likhte rahiye

सौरभ आत्रेय said...

कहानी में यह भी जोड़ना आवश्यक है - अपनी मोज-मस्ती और अपनी अय्याशियों के ळिये केवल अपने लाभ के लिये परिवार से छिपकर एक “पराई औरत के करीबियों” को फ़ायदा पहुँचाने के लिए, गोभियाँ सस्ते भाव पर लुटाता रहा।

Rajesh said...

Bahut hi badhiya Suresh Ji. Apne bahut acha udhaharan diya. In Khangresiyo ko samjhane ka bahut achi kahani hai. Dhanywad.

Manoj Pandey said...

Aap kam hi likhe lekin jaroor likhe. Aur last wala note to padh ke mari hansi to rook hi nahi payi. Dhanyabaad kabhi post kiya ki jiye taki hame energy milti rahe.

Man said...

वन्देमातरम सर
गोभी किसान का उदाहरन दे कर आप ने इन लूटेरो को नंगा कर दिया !!
बड़ी बेशर्मी से ""नकटा बूंचा सबसे ऊँचा "' वाली कहावत के हिसाब से ये चोर नंगाई कर रहे हे !!

Mahendra Gupta said...

सर बहुत मेहनत किया आपने अभ भी बहुत बहुत समय लगाना है लेकिन अब लगता है थोरा बहुत फल खाने का आ गया है इसलिए आप कृपया कृपया लिखते रहिये. आप के साथ खाने का मजा कुछ और ही रहेगा.

Lokesh said...

nalayak congressio ab toh sudhar jao.abhi bhi supreme court ke faisle ko nicha dikhane mein lage ho.

anand thebaria said...

AAP K LEKH KO PADH KAR MR. KUTIL(KAPIL)KO SAMAZ AA JAYEGI KI JANTA ITNI BHOLI NAHI HAI JITNI YE CONGRESSI SAMAJHTE HAIN.THE BEST EXAMPLE.

ANAND THEBARIA
ROURKELA

Viral Trivedi said...

सच्चाई छिप नहीं सकती बनावट के असूलो से...

Sulabh Jaiswal "सुलभ" said...

KUTIL SIBBAL SE PUCHHA JAYE - JAB NDA SARKAAR KA HAR KAAM KAAJ GALAT BATATE HO TO KISNE KAHA THA "PAHLE AAO PAHLE PAAO" KA ANUSARAN KARNE KE LIYE.

MAAL KHAA KHAA KAR BESHARM HO CHUKE HAIN YE MANTRI MAHODAY.

मह्फ़ूज़ अली said...

सिब्बल साब.... क्या आपने जनता को चूतिया समझ रखा है?

aarya said...

आपका निरंतर लेख हम जैसे लोगों को भी दौड़ में शामिल रखता है ....
बहुत ख़ुशी हुयी आपकी पोस्ट पढ़कर .....ख़ुशी इस नाते की ...जो जगा है वो कभी सो नहीं सकता ...और जो सोना नहीं जानता वो कभी रुक नहीं सकता ....
पुन : आपको बहुत बहुत धन्यवाद !
डॉ रत्नेश त्रिपाठी ...

पंकज साव said...

एक “पराई औरत के करीबियों” बहुत अच्छा लगा

राहुल पंडित said...

विज्ञान ही नहीं, अर्थशास्त्र में भी झोलाछाप डॉक्टर होते हैं…जैसे डॉक्टर मनमोहन सिंह!
मैं इसलिए कुछ नहीं बोलता क्योंकि मैडम ने एक दफा समझाया था…बातें कम, स्कैम ज़्यादा!
दबंग के बाद अभिनव कश्यप जल्द ही मनमोहन सिंह को लेकर इसका सीक्वल बनाने जा रहे हैं…इस बार फिल्म का नाम है-’अपंग‘!
ओसामा की मौत का स्वागत करते हुए मनमोहन सिंह ने एक बार फिर से सोनिया गांधी के कुशल नेतृत्व की तारीफ की है!
मनमोहन सिंह को देखकर यकीन करना मुश्किल है कि उन्हें भगवान ने बनाया या फिर मैडम तुसाद ने!
मनमोहन सिंह का कहना है कि वो अश्लीलता के बिल्कुल खिलाफ हैं इसलिए अपने जीते-जी किसी को EXPOSE नहीं होने देंगे!

vipin kumawat_shahpura_bhilwara_rajasthan said...

abhi court ko or majabut hona he.chamache lago apani khal bachane ke liye kuch bhi bol sakate he or kuch bhi kar sakate he.janata itani samajdar hoti to chor sansad me nahi ate.

Arjun Patidar said...

bhai bilkul sahi he mujhe gobi exam. se acche se samajh me aaya

पवित्र रावत said...

सुरेश जी नमस्कार! जबरदस्त पोस्ट के लिए आभार। आपके पिछले पोस्ट ने तो दिल ही तोड़ दिया था। सोचा था न जाने अब आप लिखेँगे भी की नहीँ पर आपकी नई पोस्ट देख कर अपार प्रसन्नता हुई। कृपया लिखना बँद मत किजिएगा। ईश्वर आपके साथ रहे।

Saurabh Pandya said...

Aapne Sibbal ke Chehre ki baat kahee, chehra to saaf kah raha hai ki voting machine me gadbadi karke hum to jeet hi jaayenge, Janta se seedhe joote na pade isliye bayaan dekar ehsaan karte rahte hai. Mat patro se chunav ho tab pata chale kitno ki jamanat bachti hai..