Five Years in Hindi Blogging - An Overview
ब्लॉगिंग एवं इंटरनेट लेखन के पाँच वर्ष पूर्ण :– कुछ हिसाब-किताब एवं एक
ब्रेक का वक्त…
आगामी 26 जनवरी 2012 को मेरे इंटरनेट लेखन के पाँच
वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस अवसर पर मैं आप सभी शुभचिंतकों, पाठकों, मित्रों एवं
सहयोगियों का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन करना चाहता हूँ कि आप सभी के प्रेम एवं
विश्वास के चलते मैं आज यहाँ तक पहुँच सका। 26 जनवरी 2007 को ब्लॉगिंग आरम्भ करते
समय सोचा नहीं था कि इस मुकाम तक पहुँचूंगा, क्योंकि आज से 5 वर्ष पहले तक इंटरनेट
की ताकत का अंदाज़ा नहीं था, सिर्फ़ मौज-मजे, नई तकनीक सीखने एवं मन की बात खुलकर
कहने के एक माध्यम को आजमाने का ही एक भाव मन में था, परन्तु धीरे-धीरे विगत पाँच
वर्ष में कैसे यह मेरा जुनून बन गया, मुझे पता ही नहीं चला।
ब्लॉगिंग की सालगिरह के इस अवसर मैं पिछले एक-डेढ़
वर्ष में जिन सहयोगियों ने इस ब्लॉग एवं मेरे लेखन को जारी रखने में मदद की मैं
उनका “विशेष आभार” व्यक्त करना चाहता हूँ। भारतीय
संस्कृति में माना जाता है कि “दान” देने के बाद “नाम” की इच्छा नहीं रखनी चाहिए, इसलिए मैं यहाँ किसी का नाम तो
नहीं लूंगा, परन्तु आभार व्यक्त करना मेरा कर्तव्य है…। सबसे पहला एवं महत्वपूर्ण
आभार मैं अपने दो मित्रों का करना चाहूँगा, इनमें से एक मित्र ने मुझे लैपटॉप
प्रदान किया है, जबकि दूसरे मित्र ने 12 माह तक सतत प्रतिमाह 3000 रुपये के चेक
दिये…। मित्रों एवं पाठकों को याद होगा कि लगभग दो वर्ष पहले मैंने अपने ब्लॉग पर “पे-पाल” का कोड एवं SBI बैंक अकाउण्ट नम्बर लगाकर, इस ब्लॉग को सुचारु रूप
से चलाने हेतु “डोनेशन” की अपील की थी। मुझे आपको यह
बताते हुए हर्ष है कि इसके जवाब में कई पाठकों ने दो वर्ष की अवधि में छोटी-छोटी सहयोग
राशियाँ भी भेजीं, जिनका कुल योग लगभग 50,000 रुपये हुआ (इसमें तीन मित्रों ने
5000 रुपये की राशि भेजी है, जबकि बाकी के 35,000 रुपये अन्य योगदान रहा)। इस
प्रकार कुल मिलाकर दो वर्ष की अवधि में मुझे “डोनेशन” (आप इसे सहयोग राशि भी कह सकते हैं) के रूप में एक लैपटॉप
एवं 86,000 रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा मेरे जैसे गैर-तकनीकी व्यक्ति को ब्लॉग
संचालन में लगने वाली तकनीकी सलाह देने वाले कई-कई शुभचिंतक भी रहे… मैं इस हेतु आप
सभी का दिल से आभारी हूँ। महत्वपूर्ण यह रहा कि यह सब कुछ “आपसी सहयोग” से ही हुआ, किसी राजनैतिक
पार्टी या संस्था से कोई चन्दा नहीं लेना पड़ा…
इन 86,000 रुपए में से लगभग 40,000 रुपए पिछले एक-डेढ़
वर्ष के दौरान एक-दो हिन्दी टाइपिस्ट (तथा अनुवादकों) को आउटसोर्स करने में खर्च
हुए (लगभग मासिक 3000 रुपये)। बाकी के 46,000 रुपए में से लगभग 32,000 रुपये कुछ
पुस्तकें खरीदने, कुछ पैसा ब्लॉगिंग सम्बन्धी यात्राओं-सेमिनार, कुछ पैसा विभिन्न
पत्रिकाएं खरीदने, तथा कुछ एक अस्थायी इंटरनेट कनेक्शन इत्यादि में खर्च हुआ है। यानी
कि इस Donation में से लगभग 14,000
रुपये अभी भी मेरे पास बचे हुए हैं।
मित्रों को यह भी याद होगा कि एक राष्ट्रवादी
विचारों वाली न्यूज़ वेबसाइट बनाने का एक प्रोजेक्ट भी मैंने प्रस्तुत किया था
जिसमें 500 लोगों द्वारा प्रतिवर्ष 1200 रुपये सहयोग देने सम्बन्धी विचार दिया था,
इस विचार के समर्थन में लगभग 100 मित्रों की ओर से “हाँ” भी हो गई थी, तथा संख्या लगातार बढ़ रही थी… परन्तु मेरी
व्यस्तता (या नाकारेपन) की वजह से वह प्रोजेक्ट सिरे न चढ़ सका। फ़िर भी यह एक बड़ी बात थी कि जिस
जमाने में लोग अपने सगे भाई तक को 1000 रुपये देने में आनाकानी करते हों, वहाँ
सिर्फ़ मेरे कहने पर, एक “विचारधारा” को विस्तार देने के लिए 100-150 लोग 1200 रुपये प्रतिवर्ष
देने को तैयार हो गये हैं। ये बात अलग है कि मैंने इन मित्रों की सहमति को “होल्ड” पर रखा और उनसे कहा है कि जब भी
ऐसा कोई प्रोजेक्ट धरातल पर उतरेगा, तभी उनसे यह सहयोग राशि ली जाएगी…। क्योंकि
यदि मैं यह राशि उनसे मंगवा भी लेता, तो इस 1 लाख रुपए का मैं करता भी क्या?
भले ही देने वाला मुझ पर विश्वास करके उसका “हिसाब” न ले, परन्तु नैतिकता यह कहती
है कि “हिन्दुत्व” के नाम पर मुझे जो भी सहयोग
राशि मिली है, उसका उपयोग सिर्फ़ उसी कार्य के लिए होना चाहिए, व्यक्तिगत उपयोग
नहीं। जब इस सहयोग राशि में से मैंने 14,000 रुपये अभी बचाकर रखे हैं तो स्वाभाविक है कि ऐसी किसी
योजना के संभावित 1-2 लाख रुपये लेकर मैं क्या करता, जो योजना अभी धरातल पर है ही
नहीं?
संक्षेप में कहने का तात्पर्य यह है कि मेरी निष्ठा
और मेरे लेखन कर्म को देखते हुए मित्रों-पाठकों ने आपसी सहयोग से मुझे जो धनराशि
भेजी, उसके कारण मैं 2010-2011 के दो साल तक ब्लॉगिंग एवं लेखन की गाड़ी खींच
सका…वरना यह “रईसी
शौक” मेरे बस के बाहर हो चला
था। मेरे आलोचकों के लिए, “डेढ़ साल में सिर्फ़ 86,000 रुपये…!!!” कहकर इसकी खिल्ली उड़ाना आसान
है, परन्तु वे यह ध्यान में रखें कि यह राशि किसी पार्टी, समूह अथवा संस्था ने
नहीं दी है, बल्कि व्यक्तियों ने “अपनी खून-पसीने की कमाई” में से एक पवित्र उद्देश्य के लिए दी है, और मेरे लिए यह
बहुत बड़ी बात है।
खैर… एक ब्लॉग चलाने हेतु जितना पैसा, सहयोग एवं समर्थन आवश्यक है, वह मिलता
गया और मैं एक जुनून के तहत लिखता गया। पिछले वर्ष मेरे ब्लॉग के लगभग 1200
सब्स्क्राइबर्स थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब लगभग 2000 तक हो गई है, इसी प्रकार पिछले
एक वर्ष में (जबसे मैंने फ़ेसबुक पर सक्रियता बढ़ाई) फ़ेसबुक पर भी 5000 मित्र एवं
2000 सब्स्क्राइबर हो गये हैं, जिनकी वजह से मैं "विचारधारा" को काफ़ी लोगों तक पहुँचाने
में सफ़ल रहा। बहरहाल… ये तो हुई आभार प्रदर्शन एवं हिसाब-किताब की बात… अब आते हैं
मूल मुद्दे पर…
पाठकों ने नोट किया होगा कि पिछले एक वर्ष में मेरे
लेखों की संख्या में कमी आई है (2010 में 116 लेख एवं 2011 में सिर्फ़ 90), हालांकि
इसका एक कारण फ़ेसबुक पर सक्रियता बढ़ाना तो है ही, परन्तु दूसरा कारण व्यवसाय में
बढ़ी हुई व्यस्तता भी है। पाँच वर्षों की “जुनूनी ब्लॉगिंग” के चलते मेरा ध्यान मेरे मूल व्यवसाय से थोड़ा छिटक गया था,
जिसकी वजह से गलाकाट प्रतियोगिता के इस दौर में मैं वहाँ पिछड़ गया। हालांकि इस
क्षेत्र (अर्थात पैसा कमाने) में मैं शुरु से ही फ़िसड्डी साबित हुआ हूँ, परन्तु
महंगाई के बढ़ते दौर ने मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अब मुझे
ब्लॉगिंग/फ़ेसबुक/लेखन इत्यादि को दरकिनार करके अपने मूल व्यवसाय की ओर ध्यान देना जरुरी
है। राष्ट्रवादी ब्लॉगिंग के पाँच साल, 600 से अधिक लेख, 2000 सब्स्क्राइबर और कुछ
“शिष्य” तैयार करने के बाद, अब इस जुनून को सीमित
करने का समय आ गया है…। “सीमित” शब्द का उपयोग इसलिए, कि मेरी अन्तरात्मा और संस्कार मुझे
लेखन कार्य पूरी तरह से बन्द करने नहीं देंगे… ज़ाहिर है कि “सन्यास” या टंकी पर चढ़कर आत्महत्या जैसी कोई बात तो नहीं है, लेकिन
हाँ “प्राथमिकताएं” बदलना जरुरी हो गया है…। कुछ
पारिवारिक कार्य, कुछ व्यावसायिक प्रतिबद्धताएं एवं विस्तारीकरण बहुत दिनों से टल
रहा है, जिसे अब और नहीं टाला जा सकता, ब्लॉगिंग और लेखन के अलावा भी एक और दुनिया है, जिसमें हम रहते हैं…
(मेरे कुछ चाहने वाले इस निर्णय की "टाइमिंग" पर भी सवाल उठा सकते हैं, लेकिन कभी न कभी तो यह होना ही था, बल्कि पिछले डेढ़-दो साल अधिक चल गया)…
(मेरे कुछ चाहने वाले इस निर्णय की "टाइमिंग" पर भी सवाल उठा सकते हैं, लेकिन कभी न कभी तो यह होना ही था, बल्कि पिछले डेढ़-दो साल अधिक चल गया)…
अब इस स्थिति से निपटने के लिए
मेरे पास तीन विकल्प हैं –
1) कि मैं ब्लॉगिंग पूरी तरह छोड़ दूं (जो कि सम्भव नहीं है)
2) कि मैं अपना व्यवसाय बन्द
करके पूर्णकालिक ब्लॉगर बन जाऊँ… (लेकिन तब मैं अपने परिवार को क्या खिलाऊंगा? क्योंकि अभी हिन्दी ब्लॉगिंग उस स्तर पर नहीं पहुँची है, कि कोई इंसान सिर्फ़ ब्लॉगिंग करके कमाई कर सके।)
3) कि विगत पाँच वर्षों में
मित्रों व लेखकों का जो विशाल नेटवर्क तैयार हो गया है, उसमें से 15-20 श्रेष्ठ,
विश्वसनीय एवं राष्ट्रवाद हेतु पूर्णतः समर्पित लोगों की एक टीम बनाकर मेरे ब्लॉग
को एक “कम्युनिटी ब्लॉग” (अथवा न्यूज़ वेबसाइट) का स्वरूप
दे दिया जाए… जिसमें मेरी भूमिका सिर्फ़ Supervision एवं Coordination की हो…
4) इसी वेबसाइट में मेरी ब्लॉगिंग
(लेखन) को बेहद सीमित कर दिया जाए (अर्थात सिर्फ़ हफ़्ते-पखवाड़े में मैं एक लेख लिखूं)…
खैर… “व्यक्तिगत बातों” को यहाँ लिखने का कोई औचित्य नहीं है। सिर्फ़ इतना कहना चाहूँगा कि, ब्लॉगिंग करते-करते कहीं ऐसा न हो, कि बुढ़ापे में किसी अस्पताल से मुझे इसलिए बाहर फ़िंकवा दिया जाए, कि मैं इलाज के लिए 8-10 लाख रुपए न जुटा सका…। भले ही सुनने में यह मजाक की बात लगे, लेकिन यदि मैं ऐसे ही व्यवसाय
की तरफ़ ध्यान न देकर, “सिर्फ़ और सिर्फ़ लिखता” रहा तो, इस सम्भावना से इंकार भी नहीं किया जा सकता। तात्पर्य…
दोनों कार्य एक साथ चलना दिनोंदिन मुश्किल होता जा रहा है…। गत पाँच वर्ष में जिस
निष्ठा, समर्पण और मेहनत से राष्ट्रवादी ब्लॉगिंग की है, उसी मेहनत से अगले पाँच
वर्ष व्यवसाय को देने की इच्छा है, ताकि जब मैं वापस “पूर्ण सक्रियता” के साथ लौटूं तो मुझे “सहयोग राशि” लेने की भी जरुरत न महसूस हो…
बहरहाल… बात को और लम्बा न
खींचते हुए, उन सभी सहयोगकर्ताओं का पुनः आभार जिन्होंने गत डेढ़ वर्ष तक इस ब्लॉग
को जारी रखने में मदद की, तथा पिछले पाँच वर्ष तक लगातार मेरा लेखन पढ़ने एवं सराहने
हेतु आप सभी पाठकों का पुनः एक बार आभार व्यक्त करता हूँ…। बीच-बीच में कभीकभार आपसे मिलने आया करूंगा… यहीं इसी स्थान पर…
==================
नोट :-
1) मित्रों द्वारा भेजी गई सहयोग राशि में से बचे
हुए 14,000 रुपये के यथोचित उपयोग के बारे में भी विचार जारी है… अतः मित्रों से
अनुरोध है कि फ़िलहाल अब वे कोई राशि न भेजें…
2) जिस “टीम” के गठन की बात मैंने ऊपर कही है, उसका मूल खाका तो लगभग
वही है जो मैंने पिछले वर्ष बयान किया था। यदि यह टीम कोई “संस्थागत” स्वरूप ग्रहण करती है, तो बचे
हुए 14,000 रुपये उस संस्था को दे दिए जाएंगे, इस सम्बन्ध में विस्तार से अगले
किसी लेख में…



68 comments:
अब तक का आपका साथ बहुत सुखद रहा और आपके लेख मार्गदर्शन करने वाले रहे हैं जिसके लिए ब्लॉग जगत, राष्ट्र और हिन्दुत्व आपके आभारी हैं। यह सच है कि ब्लोगिंग के साथ साथ परिवार और व्यक्तिगत जीवन पर ध्यान देना भी अति आवश्यक है। परन्तु प्रयास ऐसा हो कि जो कारवाँ चल पड़ा है वह मंज़िल से पहले ठहर न जाय। सक्षम और योग्य लोगों को साथ लेकर इस अभियान को जागृत रखें यही हमारी अभिलाषाशा है। आपके पिछले लेखों को संकलित करते हुए एक पुस्तक का रूप देने के विषय मे भी विचार करें। अपनी सुविधानुसार आगे भी समय समय पर आपका सनीध्य मिलता रहेगा ऐसी अभिलाषा के साथ... बहुत बहुत आभार और शुभ कामनाएँ
Your decision to limit blogging and focus on your business and personal growth is very correct Suresh bhai.
आपको बधाई... मैंने बहोत से कमीने देखे है जो अपनी जेबे गरम करने के लिए 'हिंदुत्व' शब्द का इस्तमाल करते है और ऐसा दंभ करते है की इनकी वजह से ही हिन्दूओ का कल्याण हो रहा है और समय आते ही अपना रंग दिखने लगते है. गुजरात में भी ऐसे बहोत से लेखक है जो सरकार के पैसो से मटरगस्ती करते है और मतलब निकल जाने के बाद हिंदुत्व को कोशाना शुरू कर देते है. अपने आपको लिबरल कहकर पल्ला जाड देते है ...एक और आप है जो हिंदुत्व के लिए अपना करियर तक डाव पर लगा देते है....जय हो...
आपका जीवन और कवन सूर्य की भाती चमकता रहे ऐसी शुभकामनाए....
Your decision is very good for your family....Please keep updating your blog atleast once in month ...All the best Sir :)
श्री चिपलूणकर जी,
कलम रुकनी नही चाहिए, तथा व्यापार भी। आपकी लेखनी मुझे बहत प्रिय है। कृपया लिखना बंद मत कीजिएगा।
ढ़ेर सारी शुभकामनाएं !
भैया !!!! हमें आपकी बहुत याद आएगी । हमारे पास तो कहने को कुछ शब्द नहीं है लेकिन हम आशा करते हैं की पाँच सालों के बाद आप फिर से आकर हम युवाओं का मार्गदर्शन करेंगे । और खाली समय निकाल कर बीच बीच में हम लोगों से फेसबुक और ब्लाग के माध्यम से बात करते रहिएगा .....
आपका बहुत बहुत धन्यबाद !!!!
Ok...Best luck and best wishes for the rest of life.
आपको ढेरों शुभकामनाएँ.
जो योग्यता,अनुभव और प्रखरता आप में है - काश आप सेकुलर-कम्युनिष्ट-कांग्रेसी - कुछ भी होते - तो न तो ब्लॉग्गिंग के बारे में और न ही व्यापार के बारे में सोचना पड़ता.
बाकि पदमसिंह जी की बात का अनुमोदन करता हूँ.
This is my first post and I think this comes at the most inopportune time. Agreed I have been a silent spectator and have not even contributed to the noble cause you have undertaken other than reading posts on the blog. But I did make my small contribution by informing as many people about this blog as possible. I am disappointed to see that this blog is being discontinued or say stopped for a while. This is not done. Hindus need to be informed about facts that otherwise are hidden by the biased and peseudo secular media. I agree about you having family responsibilities but please do not stop blogging. Please do not forget there are people who look forward to this blog and the information contained therein.
once a hindu is always a hindu
you do what you think is best for you and family
you can do more things at ground level , even NM appreciated your writing so its time also to think if you can join some party and then keep the flag flying
we need more people like you and it was a pleasure knowing you there are some differences in our opinion but that apart i salute your mission
मेरे विचार से यह सही निर्णय है। कुछ ऐसा ही निर्णय मैंने भी किया था,हाँ आपकी तरह सार्वजनिक नहीं किया।
आपको भविष्य के लिये शुभकामनायें।
कभी-२ ज़िन्दगी में कुछ ऐसा होता है की हमें ऐसा लगता है बस ये आगे भी होते रहने वाला है. और उसमे कुछ व्यवधान आता है तो हमें पता चलता है की कुछ भी स्थायी नहीं है. पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते आपका ब्लॉग्गिंग सीमित करने का इरादा ठीक है लेकिन मन स्वार्थवश लालच कर रहा है काश ऐसा न हो. Padamsinghji की बात से सहमती रखते हुए केवल इतनी प्रार्थना करना चाहूंगी की आपके पाठक भी आपको इतनी ज़िम्मेदारी तो देंगे ही की ऐसा न हो, जो जागरूकता की जो अलख आपने जलाई है, वो कहीं मंदी पड़ जाये. isliye आप अपनी समान विचारधारा के अन्य लोगों की मदद आपके इस पावन कार्य के लिए ले सकें तो अच्छा होगा (फिर से स्वार्थ)
जय महाकाल जय भवानी
मुझे पूरा विश्वास है कि आप यूं ही असीम ऊर्जा के साथ कार्य करते रहेंगे. ईश्वर करे कि कुछ ऐसा हो जिससे कि आप का व्यवसाय भी खूब तरक्की करे और आप हिन्दुत्व की विचारधारा को बचाने में लगे रहें.
सुरेश जी आपके व्यक्तिगत निर्णयों की क़द्र करते हुए बस केवल इतना ही कहना चाहूँगा .
मेरे जैसे सकडो हजारो लोगो को जो आज इंटरनेट की दुनिया से जुड़ रहे है तथा राष्ट्रवाद से परिचित हो रहे है उन्हें हतोत्साहित मत होने देना .
समय समय पर अपनी लेखनी की तीव्र फुहारों से राष्ट्रवाद की उर्वरता को बचाए रखना .
ईश्वर आपकी मनोकामना पूर्ण करें .
suresh bhaiya,
anam se sahmat hoon. maine bhi apke blog ka bahut prachar kiya hai aur facts ke liye mai is par depend hone laga hoon. lekian mai apke is baat ka samarthan nahi karta hoon ki daan ki rashi ka aap vyaktigat prayog nahi kar sakte. aakhir apke samaya ke karan hi ye suchnaye mil rahi hain. wo samaya ap business me lagate to paise kamate aur pariwar ko dekhte. ab agar wo samaya ap vichardhara me lagate hain to hum sabka ye kartvya hai ki hum apke kharcho ko pura karein. kyonki apki jaisi soch, yogyata aur lekhan pratibha sabke pass nahi hoti. ap jis 100-100 rs/month ki baat karke ek website khada karna chah rahe hain uski jagah ap inhe paiso se apne business ki kshtipurti kar sakte hain. taki apka blog na ruke.ap jab iske liye taiyar honge mai filhal 2000 rs prativarsh bhej sakta hoon. Umeed aur apeel karta hoon baaki log bhi is tarah ki sahmati apko bheje.
apka shubchintak
rupesh mishra
sitapur
chhattishgarh
Please do not stop writing, we will help you monthly for your business. Whatever donation you have received is for you and use that for your own purpose (at least some part of it for your time). In future whenever we should donate, that should be in 2 transaction one for blog, and another for your time.
Good luck for future endeavors.
family and business is also important consideration, which can not be ignored.
but you are a "Torch Bearer" of a noble cause, so plz try to squeeze out at least 3-4 articles in one month.
AS far i think your conscience will force you write regular and deepening articles.
Jai Hind
मुझे तो तीसरा विकल्प सबसे उचित लगता है ....इसके पीछे एक तर्क और है कि कोई भी आंदोलन अकेले अपने दम पर बहुत दिनों तक नहीं चलाया जा सकता है!
भविष्य पर भी निगाह रखनी चाहिए .....कारण कि अधिकतर ऐसे लोग अकारण या सकारण ही लोगों के निशाने पर आ ही जाते हैं ! ऐसी परिस्थितियों में यह टीम स्थानापन्न के रूप में कार्य कर सकेगी !
मेरी शुभकामनाएं ......ब्लॉग्गिंग ही जीवन तो नहीं है ....यारों !
सिर्फ़ पाँच साल, वैसे यह अवधि कम भी नहीं है, आप अपने नेक कार्य में लगे रहे, देशभक्ति की यह भी एक मिशाल बन गयी है, अब यह रुकनी तो किसी भी सूरत में नहीं चाहिए। जय हिन्द, जय भारत, बन्दे मातरम।
जो औरों के लिखते हैं वे थकते हैं. जो अपने लिए लिखते हैं वे आनंद में रहते हैं.
आपकी ईमानदारी की तारीफ की जानी चाहिए. लेकिन इस देश का दुर्भाग्य यह है कि वह बौने लोगों का देश बनकर रह गया है. जो बड़ा होने चलता है लोग उसे काटकर बौना बना देते हैं और फिर जोर से ठहाके मारकर हंसते हैं.
@ संजय तिवारी जी - आपने सही कहा। इसीलिए मैं पिछले पाँच वर्ष आनन्द में रहा, क्योंकि मैं अपनी संतुष्टि के लिए लिखता रहा, अपनी विचारधारा के लिए लिखता रहा…
तारीफ़ का शुक्रिया… यह तो सिद्धांतों की बात है कि मैं अपने ब्लॉग के संचालन हेतु आई हुई सहयोग राशि का निजी उपयोग करना अनैतिक मानता हूँ…। यदि ईश्वर ने चाहा, और मैं इस लायक बन सका, कि किसी राष्ट्रवादी व्यक्ति की आर्थिक मदद कर सकूं, तो यह मेरे लिए बड़े हर्ष का विषय होगा…। देखते हैं क्या होता है…
वैसे तो लोगो ने कोई बहुत बड़ी धनराशि आपको नहीं दी है जिससे आपके खर्चें चल सकें फिर भी एक बात कहता हुं -लोग आपको पारितोष और सच्चाई जानने के लिये धनराशि देते हैं। मन्दिर में आये दान से ही मन्दिर के पुजारी का घर भी चलता है तो कहने का मतलब यह है कि राष्ट्र सेवा के लिये मिले अनुदान से आपको व्यक्तिगत व्य करने का पूर्ण अधिकार है इसमें किसी को भी आपत्ति नहीं है। क्योंकि यदि आप स्वस्थ और पारिवारिक प्रसन्न रहेंगें तभी आप अपना लेखन कार्य ढगं से कर पायेंगे-हमारी सलाह ये है कि आप थोड़ा विराम लें और इन १४००० रुपयों से अपने परिवार के साथ किसी प्राकृतिक सुन्दर पहाड़ी क्षेत्र में घूमकर आयें और फिर से नई ऊर्जा के साथ आप अपने व्यवसाय पर ध्यान दें साथ में लेखन कार्य भी थोड़े-२ विराम के साथ चालू रखें।
सुरेश जी, आपकी कलम बड़ी ओजस्वी है और खरा लिखती है...इसे बंद न होने दीजियेगा..जितनी मुश्किलें है, उससे ज्यादा उनके समाधान भी हैं, अगर मिलेंगे तो बात होगी..आपसे संपर्क होगा तब बात करेंगे.......
सुरेशजी कृपया लिखना जारी रखें
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आदरणीय सुरेश जी,
बहुत से मसले हैं जिन पर मेरा मत आपसे भिन्न है, और शायद हमेशा रहेगा... पर आपके मत को जानना सुनना हमेशा ही अच्छा लगता रहा है... आपकी एक अलग सी, निर्भीक आवाज जो है... आप जो भी फैसला लेंगे उसका सम्मान करूंगा, फिर भी भविष्यवाणी कर रहा हूँ कि किसी न किसी मंच पर आपकी सक्रियता बनी ही रहेगी... अगर हम लोग अपने दिल-दिमाग की सोच को अपने तक ही रख पाते तो ब्लॉगिंग में आते ही क्यों... अभिव्यक्त होना हमारे लिये हवा-पानी जितना ही जरूरी है... और ब्लॉगिंग सबसे आसान व सुलभ मंच है इस काम के लिये... :)
...
भैया जी सच बात है की ब्लोगिंग के साथ परिवार भी देखना जरुरी है, फिर भी कृपया आप अपना कीमती समय निकल कर के जरुर लिखने की कोशिश कीजियेगा क्यूँ की आप का लिखा हुवा हर एक लेख मुझे बहुत पसंद लगता है, धन्यबाद.
आपका लेखन राष्ट्रवाद का पोषण करता है... आशा है आपके भीतर का जोश आपको लेखन से दूर नहीं जाने देगा... परिवार की चिंता सहज है... बीच का रास्ता निकालिए परिवार भी सुख से रहे हो राष्ट्र आराधना भी चलती रहे... शेष शुभ...
भगवान् करे जोर-ऐ-कलम और भी ज्यादा. शुभकामनाएं
यह समाचार पढ़ कर बहुत कष्ट हुआ कि आप अपने ब्लॉग को सीमित करने पर विचार कर रहे हैं. बेजोड़ तथ्यों और तर्कों को जोड़ कर जिन लेखों को आप इतनी दिलेरी एवं दिलचस्प तरीके से प्रस्तुत करते रहे हैं वह सहसा अब लुप्त या लगभग लुप्त हो जायेंगे यह विचार मात्र कष्ट दे रहा है . एक तो आप लिखते इतना अच्छा हैं. उसपर से यह मौसम भी क्रांति का है , शांति का नहीं. परन्तु परिवार को बलि चढ़ा कर समाज सेवा नहीं कि जा सकती यह भी सच है. तो कोई ना कोई रास्ता तो निकालना कि पड़ेगा. क्यों ना आप द्वारा प्रस्तुत तीसरे सुझाव पर पाठकों कि राय लेकर एक खाका तैयार किया जाये? मेरा सुझाव यह होगा कि आप महीने में एक लेख स्वयं लिखें और २- ३ लेख हर मॉस दूसरे पाठकों द्वारा समर्पित और आप द्वारा सम्पादित हों. पता है कि संपादन अपने आप में बहुत समय ले लेता है परन्तु अगर आप लेखकों कि संख्या सीमित रखें, guidelines पहले से तैयार कर लें ( जैसे लेख में दिए गए सब data का source देना अनिवार्य है, अभद्र भाषा का प्रयोग वर्जित है, लेख में तथ्य अधिक और opinions कम हों आदि आदि) तो शायद आपका बोझ कुछ कम हो सके. पाठकों को कम से कम हर हफ्ते या दस दिन में एक अदद लेख तो मिलना ही चाहिए ना? चाहें तो इसे प्रयोगात्मक तौर पर कुछ दिनों तक करके देखें फिर पुनर्विचार करें. आशा है आप और दूसरे पाठक इसपर विचार करेंगे.
आपका हाल वैसा ही है जैसा मेरा ! मेने व्यापार चुना है कुछ सालो के लिये । पर अपने जूनून को पूरी तरह छोडा नही है ।
शुभचिंतको की सुची में मेरा नाम भी जोड दिजिये ! पैसो से थोडी मदद कर पाँउगा । IIT से जो Technical Knowledge मिला है उससे भी मदद कर पाँउगा । और आपके साथ काम करने का जरूर अवसर देना ।
अभी मैं नया नया ही जुड़ा था आपके ब्लॉग से और आपने ये धमाका कर दिया, खैर प्राथमिकतायें अपनी जगह हैं. इन्तजार रहेगा आपके ब्लोग्स का. शुभ कामनाएं
--
सादर,
शिवेंद्र मोहन सिंह
बहुत शुभकामना....अशेष बधाई.
suresh ji ram-ram
suresh ji aap k iss nirnay se bahut jayda dukh hua. aap ka ye nirnay rasthvadiyo ko bahut akhrega khastoor per jinme appne rasth, Hindu samaj ke parti jimmadario ka ahsash karya .parantu y bhi sacchai he ki grahast ashram ki jimmedario ko poora karna bhi grahast ashram ke mukhiya ka dharam he isliye app ka y nirnay hame swaikar he/ yadi appko appne viypar(kaam) me madad ki jarurat ho to aapne in pathakoo ko awasya yaad kar lijiyaga, jasa bhi baan padega app ke liye hazir he/
bhavisy me aap ki kirti surya bhagvan ki roshni ki tarah charo aur fele inhi shubkamnoo ke sath
app ka
Vijender
आपको नई प्राथमिकताओं के लिए नए समय प्रबंधन की शुभकामनाएँ!
आपसे बहुत प्रेरणा मिली है.
समर अभी शेष है.
आप तीसरे विकल्प को ही मूर्तरूप देने का विचार करें, तो उचित रहेगा.
सौरभ आत्रेय जी के सुझाव का मैं भी समर्थन करता हूँ.
आप प्रेरणा स्रोत बने रहिएगा, हम लोग प्रयासरत रहेंगे ताकि शून्यता न उत्पन्न हो.
इस राष्ट्रकार्य के लिए अल्पमात्र ही सही, आप एक निश्चित समय तय कर लीजिएगा, तो सब प्रयास सफल सिद्ध होंगे.
प्रमाण!
आपको शुभकामनाएँ.
BHAW JAI SHRI RAM
aap k iss nirnay se bahut jayda dukh hua. aap ka ye nirnay rasthvadiyo ko bahut akhrega khastoor per jinme appne rasth, Hindu samaj ke parti jimmadario ka ahsash karya .parantu y bhi sacchai he ki grahast ashram ki jimmedario ko poora karna bhi grahast ashram ke mukhiya ka dharam he isliye app ka y nirnay hame swaikar he/ yadi appko appne viypar(kaam) me madad ki jarurat ho to aapne in pathakoo ko awasya yaad kar lijiyaga, jasa bhi baan padega app ke liye hazir he/
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app ka
PRANAM.
अरे........ ये क्या......
सुरेश जी अपने पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करते है हुए, आप लिखते भी रहिये..बंद मत कीजिये (एक आग्रह) विगत वर्षो का आपका सानिध्य बना रहे..आप राष्ट्रवादी विचारधारा को पोषित करते रहे..शुभकामनाओ के साथ
सबसे पहले ढेर सारी शुभकामनाएं !
आपका निर्णय उचित है.
मेरे विचार बहुतों से अलग हो सकते हैं - मेरा मानना ये है कि यदि कोई कोई व्यक्ति (राष्ट्रवादी लेखक या अन्य सेवी) गृहस्थ एवं व्यवसायी रहते हुए भी अपना कुछ समय
ब्लॉग लेखन या किसी अन्य रूप में अलख जगाये रखने की कोशिश करेंगे तो निश्चित ही समाज व राष्ट्र का सुधार दिशा पा लेगा. और इससे एक महत्वपूर्ण सन्देश ये भी निकलेगा कि हम जैसे आम व्यक्ति हमेशा किसी लौह पुरुष की प्रतीक्षा में नहीं रहेंगे थोडा थोडा अंशदान (मूलत: समय का योगदान सबसे बड़ा होता है) जिनसे जो भी बन पड़े नियमित दें. सुरेश चिपलूनकर से निरंतर अबाध लेखन की कामना करना अपनी कमजोरी दिखाना भी है.
आपने जिस निष्ठा से पिछले ५ साल सेवा कार्य किया है उससे बहुत बहुत भला हुआ है और तो और नए युवाओं को दिशा भी मिली है. इससे ज्यादा की उम्मीद आपसे नहीं रखता हूँ.
मैंने भी अपनी योजनाओं में थोड़ा परिवर्तन किया है अब उसमे परिवार भी शामिल करना जरुरी समझता हूँ. मैं नौकरी करते हुए व्यवसाय का रास्ता इसलिए भी चुना है कि भविष्य में अपने मन मुताबिक़ सामाजिक गतिविधियों को अपने खर्चे से चला सकूँ. किसी राष्ट्रवादी और समाज सेवा के प्रति समर्पित व्यक्ति की सहायता कर सकूँ. हमें दूसरों पर कभी आश्रित नहीं रहना चाहिए.
aapke dwara banaye gaye pichhle saal kee yojnaon par mera mat aaj bhee wahi hai "jab tak 500 sadasya niyamit rup se vaarshik sahyog krte hain tab hee aap abhiyaan ko dharataal par laana"
baharhaal mahine me 1-2 lekh aap bina maange jarur likhenge itna vishwaas hai. itna bhee bahut hoga paathakon ke liye.
भगवान करे कि आपको दिन में ४८ घंटे मिलें और गिने जायें केवल २४ घंटे :)
आपको शुभकामनाएँ।
पांच वर्ष पूरे होने पर बधाई आपको।
आपका जुनून वाकई काबिलेतारीफ है 'प्रभु'
I am crying REALY
bahut dukh ho raha hai. kuchh rasta nikaliye.
मेरे विचार से ये सही समय है विकल्प ३ को क्रियान्वित करने का |
ऐसे लोग जो प्रेरित हुए हैं उन्हें आगे आकर अब इस कार्य को आगे बढ़ाना चाहिए |
आप भी समयानुसार लेख उस पर लिखते रहे और उस टीम का मार्गदर्शन करते रहे |
प्रिय सुरेश जी,
एक विकल्प और भी है , कि आप, अपने विचारों से मेल खाते किसी व्यक्ति को ये धरोहर सौंप दें.
क्या इतने लोगों में एक व्यक्ति भी नहीं मिलेगा ?
क्या ये सब ब्लॉग-बुद्धि विलास है , रहा .
दासानुदास
अशोक गुप्ता , दिल्ली
क्या कहें भाई जी ! बस इतना ही ...
जब याद तुम्हे आये क्रंदन
जब हूक उठे, टूटे बंधन
जब मन की माला टूट टूट
बिखरे यौवन के कण कण पर
हे बैरागी! तुमको याद आये
उस वक्त राष्ट्र का हित चिंतन
तब तोड़ मोह के बंधन को
तुम करना! राष्ट्र वंदन .........
वन्देमातरम !
सुरेश जी मेरे मस्तिष्क में कुछ बाते बहुत समय से प्रकाश के वेग से चल रही है ।इस से पहले की अत्यधिक वेग और घर्षण से दिमाग फट जाये में इनको बाहर निकाल देना चाहता हूँ ।
मैने बहुत से ब्लोग पर धर्म ,हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के बारे में बहुत कुछ पढा है … खास तौर पर हिन्दुवादी राष्ट्रवादी विचार धारा पर कुछ शंकाये व विचार है …वो मै यहां लिखना चाहूंगा और आशा करता हूँ प्रबुद्ध पाठक इन्हे पढ्कर शंकाओ का समाधान करेंगे।
प्रथम प्रश्न तो यह है की ........क्या सघ का राष्ट्रवाद सिर्फ इस्लाम विरोध पर टिका है ?
मै पूछ्ना चाहता हूँ …। उग्र हिन्दु राष्ट्रवादी धर्म को बचाना चाहते है या राष्ट्र को????
एक बात तो हमे स्वीकार करनी होगी , हमारे देश मे जो मुस्लिम है वो भी इस देश के नागरिक है , यद्यपि कुछ भटके हुए है , उनको कानून सुधारेगा ,
लेकिन वितृष्णा व नफ़रत से कुछ भी हासिल नही कर सकते …इस तरह नफरत और कट्टरवाद ये लोग एक और पकिस्तान के निर्माण की राह प्रशस्त कर रहे है । अगर इतिहास को ठीक से पढा जाये तो पता चलता है की पाकिस्तान और विभाजन की त्रासदी के लिये हिन्दू कट्टरवाद भी इतना ही उत्तरदायी है जितनी मुस्लिम संकिर्णता।
मुस्लिम लोग इस देश की समस्या का एक हिस्सा है , ये पिछ्डे है ,संकीर्ण है , रुढिवादी है , पर हमारे देश के है …अगर उग्र राष्ट्रवादी हिन्दुत्व सोच के अनुसार चला जाये तो दो ही रास्ते है ….…
1 या तो हम नर संहार का सहारा लेकर सारे मुस्लिमो को मार दें अथवा एकछ्त्र तानाशाही शासन के द्वारा इनको नारकीय जीवन जीने पर मजबूर कर दें
2 एक दुसरा रास्ता भी है .…सभी मुस्लिमो को बल पूर्वक पाकिस्तान भेज दे ।
मुझे नही लगता उक्त दोनो बाते इस सभ्य मानव समाज में और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में संभव है । तो फिर ये जायेंगे कहां ?
संघ और उग्र हिन्दु राष्ट्रवादियों के लिए तो ये अछूत , बर्बर ,नरपिशाच समझे जाते है …
रही धर्म की बात तो एक बात बता दूँ …मानवता सबसे बडा धर्म है। …
और उस नाथूराम गोडसे और हिन्दुत्व के बारे में भी कुछ कहना चाहता हूँ जिसका बखान कट्टरपन्थी हिन्दू बहुत करते है …
एक अहिंसानिष्ठ निःशस्त्र व्यक्ति की हत्या करना कोई मर्दानगी नहीं, कोरी नपुंसकता है। जो लोग तार्किक रीति से अपनी बात दूसरों को समझा नहीं सकते, वे ही लोग हिंसा का सहारा लेते हैं। हिंसा बुजदिलों का मार्ग है, शूरवीरों का नहीं। अपनी निष्फलता और हताशा में ही हिन्दुत्ववादियों ने गांधीजी की हत्या की थी। नाथूराम ने गांधीजी की हत्या करने के प्रयास अधिकतर प्रार्थना-सभाओं में ही किये। जब सब लोग प्रार्थना में लीन हों, उस वक्त ये 'नरबा!कुरे' गांधीजी की हत्या करना चाहते थे। पूजा-प्रार्थना कर रहे आदमी पर हमला नहीं करना चाहिए, ऐसा हिन्दुत्ववादियों के प्रिय हिन्दू-युद्ध शास्त्र में कहा गया है। ये नामर्द तो अपनी संस्कृति का भी अनुसरण नहीं कर सकते। हजारों लोगों की उपस्थिति वाली, गांधीजी की प्रार्थना-सभा में बम फेंकने में भी इन लोगों को शर्म नहीं आयी। जिन लोगों के लिए निर्दोष व्यक्तियों की जान की कोई कीमत नहीं, उनको क्या प्रामाणिक, बहादुर और देशभक्त कहा जा सकता है ?
मै दावे के साथ कह सकता हूँ जिस तरह मुल्ले मौलावी नादान मुस्लिमो के दिमाग का सफ़ाया कर रहे है ना उसी तरह , ये संध के लोग कट्टर पंथी देश के नौजवानो का भगवा तालिबानीकरण कर रहे है …कोई अन्तर नही…।
आशा करता हूँ ध्यान से पढा होगा , उत्तर की प्रतिक्षा में …………योगेश गर्ग
प्रिय भाई सुरेश जी,
आशा तो यही थी कि आप अपने नाम सुरेश से आगे बढ़ते हुए सूर्येश बनेंगे और अपनी अलौकिकता को यूँ ही निस्तेज नहीं होने देंगे. आजीवन व्रती सदैव कंटक- कीर्ण मार्ग का अनुसरण करते हुए
अपने पवित्र लक्ष्य की ओर एकनिष्ठ होकर सतत चलते रहते हैं और यूँ बीच मार्ग में धैर्य खोकर निराश नहीं होते.
आपके पास जो कई विकल्प उपलब्ध हैं, उनमें से आप वही चुनिए जो नदी को महासागर की ओर ले जाए (जिसके लिए पिछले 5 साल तक आपका यह अनुपम प्रयास चलता रहा है) न कि वापस तालाब की ओर. बड़ा सोचिए और बड़ा ही अपनाइये. शुरूआती कठिनाइयां ज़रूर सर उठाएंगी किंतु ब्लॉग हेतु कुछ लेखन-सहयोगी भी जोड़िए और मित्रों से इस यज्ञ में आहुति देने के लिए निस्संकोच थोड़ी सी सामग्री(अर्थ)एवं अन्य यथावश्यक सहयोग भी लीजिए. अपने स्वप्न को बड़ा बनाइये और आगे बढ़ते रहिए. बहुत सारे सहयोगी आपकी इस निष्काम और पवित्र यात्रा में आपके साथ हैं जिन्हें आपके गले निर्देश की प्रतीक्षा है. आपके परिवार के लिए भी इससे बेहतर रास्ते ही खुलेंगे. आप सिर्फ अगुआई कीजिए. कलम उठाइये और चलिए.
आपका ही
प्रदीप्त
सुरेश जी सादर प्रणाम,
मुझे ज्यादा दिन नहीं हुए हैं आपके ब्लाग को पढते हुए लेकिन इतना तो पता चल ही गया है कि बहुत ही प्रेरणाशील और आँखें खोल देने वाले लेख हैं आपके। मगर ये क्या? अभी तो रंग चढना चालू ही हुआ था कि आपका ऐसा निर्णय लेकिन क्या कह सकते हैं,यह आपका व्यक्तिगत मामला है और आपका फैसला अनुचित भी नहीं है, चलिए दुख तो बहुत हो रहा है मगर फिर भी भविष्य के लिए आपको बहुत-2 शुभकामनाएं।
आपके फिर से लौट आने की उम्मीद में आपका-
पवित्र रावत
आपके 'सीमित' होने के संकल्प से सिर्फ सेकुलर खुश होंगे और आपके परिजन!!
बाकी मेरे जैसे पाठक को तो आपने दुखी ही कर दिया है। और हम जैसे पाठको की हाय से बचना है तो हफ्ते-पखवाड़े मे कम से कम एक बार लिखकर 'हाया-बाय' जरूर कीजिएगा। वरना आपकी खैर नही है:)
दोस्त, महाकाल की नगरी उज्जैन का कलम का सिपाही कभी हार नही सकता, और शायद इसीलिए आप एक ब्लॉगर से बढ़ाकर एक जीता-जागता संस्थान बन चुके हैं। आपको देखकर हम जैसे कई लोगो का हौंसला बंधा है। और कई सोये हौओ को जगाया है। (शायद आपको भी इसका इल्म नही होगा).
इसलिए हमारे हौंसले के लिए लिखते रहना (थोड़ा कम ही सही)।
निर्बाध ब्लॉगिंग की बधाई
कार्य ऊर्जा बनी रहे शुभकामनाएँ
सुरेश जी सादर वन्दे आपकी इस पोस्ट ने मेरी आँखे नम कर दी....आपकी बाते हमेशा ही मेरे मन को छूती हैं..मेरा निवेदन हैं की आप लेखन बंद नहीं करे.....व्यवसाय में ऊपर निचे होता रहता हैं...फिर भी आपके मन के कोई संशय हैं तो मैं आपका गुजरात मैं स्वागत करता हु.....यहाँ आइये गुजरात व्यावसायिक नजरिया से सबसे उत्तम राज्य हैं और यहाँ के तो मुख्यमंत्री भी आपके प्रशंषक हैं.... और हम भी हैं यहाँ आपके हितार्थ
Suresh Miyaan,
Chanda Ikhatta Karane ki ye Kaunsi Nayee Skeem Laye ho...
Kahi aisa to na ho ki aapke patak aapse door bhag jaaye..
aur baaki sab aapko maloom hi hai...
Adbul Rahim Khankhana
rahim saale, apni bakwas apne paas rakh. teri jaisi niyat hai tu vaisa hi soch sakta hai. chanda ikattha hi karna rahta to isase badhkar secular tarike hain. tum sankira soch wale kya samjhoge.
Ekbal
Unfortunately we people want to become multi purpose not professional. In my view it is not so good.
One should reach at last in his own profession by making source of income. This is the business/charity with name, fame and matter.
Jis prakar bina bhairav baba ki pooja kiye Devi Mata prasanna nahi hoti, thik usi prakar bina daan(chanda) liye/Diye koi yaghya samproon nahi hota hai.
Ye chanda mukhya poorohit(Jo sabako ek sutra me badhata hai) ke liye hi hota hai,taki woh karya/quality/art ko kewal apane tak simit na kar paye varan ise aage badhate rahe.
aapka likhate rahna bahut jaroori hai.hinduon me jagrookta ki kami hai unhe aap jaise log hi jaga sakte hain . der ho sakti hai lekin parinam aayenge.
dhirendra singh
बधाई ब्लॉगिंग में पांच साल पूरे करने के लिये!
आगे के लिये मंगलकामनायें।
Blogging ki duniya mai 5 Saal pure karne ki Apko Badhai......Apke ye 5 Varsh mai likhe gaye Lekh hamare margdarshak Bane......AAsha hai aage bhi aap hamara Margdarshan karte Rahege......
Hardik Badhai....
निर्णय आपका है और आपने जो बातें हम लोगों के साथ साझा की हैं, बहुत ही वाजिब और ईमानदार हैं। उम्मीद है कि आपकी बेबाक राय समय-समय पर जाहिर होती रहेगी। मुझे लगता है कि अब आप और भी बेहतर सामग्री दे पायेंगे, क्योंकि कम लिखने से ज्यादा धार आता है, ऐसा मेरा मानना है।
राजनैतिक रूप से ही सही बने रहने की परवाह न करने वाले,अपनी धुन के पक्के और अपनी बात को निडर होकर कहने वाले यहाँ तीन चार लोग ही दिखे जिनमें से एक आप भी हैं.सबसे खास बात कि आपके पास केवल विचार ही नहीं होते बल्कि तथ्य भी होते हैं.यही बात आपको विचारधारा आधारित लेखन करने वाले बाकी लोगों से अलग करती हैं.
ब्लॉगिंग में पाँच साल पूर्ण होने पर बधाई व भविष्य के लिए शुभकामनाएँ !
Abhi na jao chhod kar.......ki dil abhi bhara nahiiiii......
मै तो यही कहूँगा की साहब लिखते रहे ! लिखते रहे ! लिखते रहे..! इससे हमें साहस मिलेगा पढ़ने और हिंदुत्वा को बनाये रखने में. ! प्रणाम !
एक ईमेल आईडी दे रहा हूँ बाकि आप स्वय समझ जाये इस आईडी से मुझे कई धमकाने वाले मेल आये है
Abdulatef ali
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