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Tuesday 24 January 2012

Five Years in Hindi Blogging - An Overview


ब्लॉगिंग एवं इंटरनेट लेखन के पाँच वर्ष पूर्ण : कुछ हिसाब-किताब एवं एक ब्रेक का वक्त…

आगामी 26 जनवरी 2012 को मेरे इंटरनेट लेखन के पाँच वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस अवसर पर मैं आप सभी शुभचिंतकों, पाठकों, मित्रों एवं सहयोगियों का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन करना चाहता हूँ कि आप सभी के प्रेम एवं विश्वास के चलते मैं आज यहाँ तक पहुँच सका। 26 जनवरी 2007 को ब्लॉगिंग आरम्भ करते समय सोचा नहीं था कि इस मुकाम तक पहुँचूंगा, क्योंकि आज से 5 वर्ष पहले तक इंटरनेट की ताकत का अंदाज़ा नहीं था, सिर्फ़ मौज-मजे, नई तकनीक सीखने एवं मन की बात खुलकर कहने के एक माध्यम को आजमाने का ही एक भाव मन में था, परन्तु धीरे-धीरे विगत पाँच वर्ष में कैसे यह मेरा जुनून बन गया, मुझे पता ही नहीं चला।

ब्लॉगिंग की सालगिरह के इस अवसर मैं पिछले एक-डेढ़ वर्ष में जिन सहयोगियों ने इस ब्लॉग एवं मेरे लेखन को जारी रखने में मदद की मैं उनका विशेष आभार व्यक्त करना चाहता हूँ। भारतीय संस्कृति में माना जाता है कि दान देने के बाद नाम की इच्छा नहीं रखनी चाहिए, इसलिए मैं यहाँ किसी का नाम तो नहीं लूंगा, परन्तु आभार व्यक्त करना मेरा कर्तव्य है…। सबसे पहला एवं महत्वपूर्ण आभार मैं अपने दो मित्रों का करना चाहूँगा, इनमें से एक मित्र ने मुझे लैपटॉप प्रदान किया है, जबकि दूसरे मित्र ने 12 माह तक सतत प्रतिमाह 3000 रुपये के चेक दिये…। मित्रों एवं पाठकों को याद होगा कि लगभग दो वर्ष पहले मैंने अपने ब्लॉग पर पे-पाल का कोड एवं SBI बैंक अकाउण्ट नम्बर लगाकर, इस ब्लॉग को सुचारु रूप से चलाने हेतु डोनेशन की अपील की थी। मुझे आपको यह बताते हुए हर्ष है कि इसके जवाब में कई पाठकों ने दो वर्ष की अवधि में छोटी-छोटी सहयोग राशियाँ भी भेजीं, जिनका कुल योग लगभग 50,000 रुपये हुआ (इसमें तीन मित्रों ने 5000 रुपये की राशि भेजी है, जबकि बाकी के 35,000 रुपये अन्य योगदान रहा)। इस प्रकार कुल मिलाकर दो वर्ष की अवधि में मुझे डोनेशन (आप इसे सहयोग राशि भी कह सकते हैं) के रूप में एक लैपटॉप एवं 86,000 रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा मेरे जैसे गैर-तकनीकी व्यक्ति को ब्लॉग संचालन में लगने वाली तकनीकी सलाह देने वाले कई-कई शुभचिंतक भी रहे… मैं इस हेतु आप सभी का दिल से आभारी हूँ। महत्वपूर्ण यह रहा कि यह सब कुछ आपसी सहयोग से ही हुआ, किसी राजनैतिक पार्टी या संस्था से कोई चन्दा नहीं लेना पड़ा…

इन 86,000 रुपए में से लगभग 40,000 रुपए पिछले एक-डेढ़ वर्ष के दौरान एक-दो हिन्दी टाइपिस्ट (तथा अनुवादकों) को आउटसोर्स करने में खर्च हुए (लगभग मासिक 3000 रुपये)। बाकी के 46,000 रुपए में से लगभग 32,000 रुपये कुछ पुस्तकें खरीदने, कुछ पैसा ब्लॉगिंग सम्बन्धी यात्राओं-सेमिनार, कुछ पैसा विभिन्न पत्रिकाएं खरीदने, तथा कुछ एक अस्थायी इंटरनेट कनेक्शन इत्यादि में खर्च हुआ है। यानी कि इस Donation में से लगभग 14,000 रुपये अभी भी मेरे पास बचे हुए हैं।

मित्रों को यह भी याद होगा कि एक राष्ट्रवादी विचारों वाली न्यूज़ वेबसाइट बनाने का एक प्रोजेक्ट भी मैंने प्रस्तुत किया था जिसमें 500 लोगों द्वारा प्रतिवर्ष 1200 रुपये सहयोग देने सम्बन्धी विचार दिया था, इस विचार के समर्थन में लगभग 100 मित्रों की ओर से हाँ भी हो गई थी, तथा संख्या लगातार बढ़ रही थी… परन्तु मेरी व्यस्तता (या नाकारेपन) की वजह से वह प्रोजेक्ट सिरे न चढ़ सका। फ़िर भी यह एक बड़ी बात थी कि जिस जमाने में लोग अपने सगे भाई तक को 1000 रुपये देने में आनाकानी करते हों, वहाँ सिर्फ़ मेरे कहने पर, एक विचारधारा को विस्तार देने के लिए 100-150 लोग 1200 रुपये प्रतिवर्ष देने को तैयार हो गये हैं। ये बात अलग है कि मैंने इन मित्रों की सहमति को होल्ड पर रखा और उनसे कहा है कि जब भी ऐसा कोई प्रोजेक्ट धरातल पर उतरेगा, तभी उनसे यह सहयोग राशि ली जाएगी…। क्योंकि यदि मैं यह राशि उनसे मंगवा भी लेता, तो इस 1 लाख रुपए का मैं करता भी क्या?

भले ही देने वाला मुझ पर विश्वास करके उसका हिसाब न ले, परन्तु नैतिकता यह कहती है कि हिन्दुत्व के नाम पर मुझे जो भी सहयोग राशि मिली है, उसका उपयोग सिर्फ़ उसी कार्य के लिए होना चाहिए, व्यक्तिगत उपयोग नहीं। जब इस सहयोग राशि में से मैंने 14,000 रुपये अभी बचाकर रखे हैं तो स्वाभाविक है कि ऐसी किसी योजना के संभावित 1-2 लाख रुपये लेकर मैं क्या करता, जो योजना अभी धरातल पर है ही नहीं?

संक्षेप में कहने का तात्पर्य यह है कि मेरी निष्ठा और मेरे लेखन कर्म को देखते हुए मित्रों-पाठकों ने आपसी सहयोग से मुझे जो धनराशि भेजी, उसके कारण मैं 2010-2011 के दो साल तक ब्लॉगिंग एवं लेखन की गाड़ी खींच सका…वरना यह रईसी शौक मेरे बस के बाहर हो चला था। मेरे आलोचकों के लिए, डेढ़ साल में सिर्फ़ 86,000 रुपये…!!! कहकर इसकी खिल्ली उड़ाना आसान है, परन्तु वे यह ध्यान में रखें कि यह राशि किसी पार्टी, समूह अथवा संस्था ने नहीं दी है, बल्कि व्यक्तियों ने अपनी खून-पसीने की कमाई में से एक पवित्र उद्देश्य के लिए दी है, और मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात है।

खैर… एक ब्लॉग चलाने हेतु जितना पैसा, सहयोग एवं समर्थन आवश्यक है, वह मिलता गया और मैं एक जुनून के तहत लिखता गया। पिछले वर्ष मेरे ब्लॉग के लगभग 1200 सब्स्क्राइबर्स थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब लगभग 2000 तक हो गई है, इसी प्रकार पिछले एक वर्ष में (जबसे मैंने फ़ेसबुक पर सक्रियता बढ़ाई) फ़ेसबुक पर भी 5000 मित्र एवं 2000 सब्स्क्राइबर हो गये हैं, जिनकी वजह से मैं "विचारधारा" को काफ़ी लोगों तक पहुँचाने में सफ़ल रहा। बहरहाल… ये तो हुई आभार प्रदर्शन एवं हिसाब-किताब की बात… अब आते हैं मूल मुद्दे पर…

पाठकों ने नोट किया होगा कि पिछले एक वर्ष में मेरे लेखों की संख्या में कमी आई है (2010 में 116 लेख एवं 2011 में सिर्फ़ 90), हालांकि इसका एक कारण फ़ेसबुक पर सक्रियता बढ़ाना तो है ही, परन्तु दूसरा कारण व्यवसाय में बढ़ी हुई व्यस्तता भी है। पाँच वर्षों की जुनूनी ब्लॉगिंग के चलते मेरा ध्यान मेरे मूल व्यवसाय से थोड़ा छिटक गया था, जिसकी वजह से गलाकाट प्रतियोगिता के इस दौर में मैं वहाँ पिछड़ गया। हालांकि इस क्षेत्र (अर्थात पैसा कमाने) में मैं शुरु से ही फ़िसड्डी साबित हुआ हूँ, परन्तु महंगाई के बढ़ते दौर ने मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अब मुझे ब्लॉगिंग/फ़ेसबुक/लेखन इत्यादि को दरकिनार करके अपने मूल व्यवसाय की ओर ध्यान देना जरुरी है। राष्ट्रवादी ब्लॉगिंग के पाँच साल, 600 से अधिक लेख, 2000 सब्स्क्राइबर और कुछ शिष्य तैयार करने के बाद, अब इस जुनून को सीमित करने का समय आ गया है…। सीमित शब्द का उपयोग इसलिए, कि मेरी अन्तरात्मा और संस्कार मुझे लेखन कार्य पूरी तरह से बन्द करने नहीं देंगे… ज़ाहिर है कि सन्यास या टंकी पर चढ़कर आत्महत्या जैसी कोई बात तो नहीं है, लेकिन हाँ प्राथमिकताएं बदलना जरुरी हो गया है…। कुछ पारिवारिक कार्य, कुछ व्यावसायिक प्रतिबद्धताएं एवं विस्तारीकरण बहुत दिनों से टल रहा है, जिसे अब और नहीं टाला जा सकता, ब्लॉगिंग और लेखन के अलावा भी एक और दुनिया है, जिसमें हम रहते हैं… 
(मेरे कुछ चाहने वाले इस निर्णय की "टाइमिंग" पर भी सवाल उठा सकते हैं, लेकिन कभी न कभी तो यह होना ही था, बल्कि पिछले डेढ़-दो साल अधिक चल गया)…

अब इस स्थिति से निपटने के लिए मेरे पास तीन विकल्प हैं

1) कि मैं ब्लॉगिंग पूरी तरह छोड़ दूं (जो कि सम्भव नहीं है)

2) कि मैं अपना व्यवसाय बन्द करके पूर्णकालिक ब्लॉगर बन जाऊँ… (लेकिन तब मैं अपने परिवार को क्या खिलाऊंगा? क्योंकि अभी हिन्दी ब्लॉगिंग उस स्तर पर नहीं पहुँची है, कि कोई इंसान सिर्फ़ ब्लॉगिंग करके कमाई कर सके।)

3) कि विगत पाँच वर्षों में मित्रों व लेखकों का जो विशाल नेटवर्क तैयार हो गया है, उसमें से 15-20 श्रेष्ठ, विश्वसनीय एवं राष्ट्रवाद हेतु पूर्णतः समर्पित लोगों की एक टीम बनाकर मेरे ब्लॉग को एक कम्युनिटी ब्लॉग (अथवा न्यूज़ वेबसाइट) का स्वरूप दे दिया जाए… जिसमें मेरी भूमिका सिर्फ़ Supervision एवं Coordination की हो…

4) इसी वेबसाइट में मेरी ब्लॉगिंग (लेखन) को बेहद सीमित कर दिया जाए (अर्थात सिर्फ़ हफ़्ते-पखवाड़े में मैं एक लेख लिखूं)…


खैर…व्यक्तिगत बातों को यहाँ लिखने का कोई औचित्य नहीं है। सिर्फ़ इतना कहना चाहूँगा कि, ब्लॉगिंग करते-करते कहीं ऐसा हो, कि बुढ़ापे में किसी अस्पताल से मुझे इसलिए बाहर फ़िंकवा दिया जाए, कि मैं इलाज के लिए 8-10 लाख रुपए जुटा सका…। भले ही सुनने में यह मजाक की बात लगे, लेकिन यदि मैं ऐसे ही व्यवसाय की तरफ़ ध्यान न देकर, सिर्फ़ और सिर्फ़ लिखता रहा तो, इस सम्भावना से इंकार भी नहीं किया जा सकता। तात्पर्य… दोनों कार्य एक साथ चलना दिनोंदिन मुश्किल होता जा रहा है…। गत पाँच वर्ष में जिस निष्ठा, समर्पण और मेहनत से राष्ट्रवादी ब्लॉगिंग की है, उसी मेहनत से अगले पाँच वर्ष व्यवसाय को देने की इच्छा है, ताकि जब मैं वापस पूर्ण सक्रियता के साथ लौटूं तो मुझे सहयोग राशि लेने की भी जरुरत न महसूस हो… 

बहरहाल… बात को और लम्बा न खींचते हुए, उन सभी सहयोगकर्ताओं का पुनः आभार जिन्होंने गत डेढ़ वर्ष तक इस ब्लॉग को जारी रखने में मदद की, तथा पिछले पाँच वर्ष तक लगातार मेरा लेखन पढ़ने एवं सराहने हेतु आप सभी पाठकों का पुनः एक बार आभार व्यक्त करता हूँ…। बीच-बीच में कभीकभार आपसे मिलने आया करूंगा… यहीं इसी स्थान पर…
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नोट :- 
1) मित्रों द्वारा भेजी गई सहयोग राशि में से बचे हुए 14,000 रुपये के यथोचित उपयोग के बारे में भी विचार जारी है… अतः मित्रों से अनुरोध है कि फ़िलहाल अब वे कोई राशि न भेजें…

2) जिस टीम के गठन की बात मैंने ऊपर कही है, उसका मूल खाका तो लगभग वही है जो मैंने पिछले वर्ष बयान किया था। यदि यह टीम कोई संस्थागत स्वरूप ग्रहण करती है, तो बचे हुए 14,000 रुपये उस संस्था को दे दिए जाएंगे, इस सम्बन्ध में विस्तार से अगले किसी लेख में…

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