Thursday, January 19, 2012

Cardinal George Alencherry, Indian Constitution and Vatican


अलेंचेरी की कार्डिनल के रूप में नियुक्ति और कुछ तकनीकी सवाल… (एक माइक्रो पोस्ट)

केरल के मूल निवासी 66 वर्षीय आर्चबिशप जॉर्ज एलेंचेरी को गत सप्ताह पोप ने कार्डिनल की पदवी प्रदान की। वेटिकन में की गई घोषणा के अनुसार सोलहवें पोप बेनेडिक्ट ने 22 नए कार्डिनलों की नियुक्ति की है। रोम (इटली) में 18 फ़रवरी को होने वाले एक कार्यक्रम में एलेंचेरी को कार्डिनल के रूप में आधिकारिक शपथ दिलाई जाएगी।

जॉर्ज एलेंचेरी, कार्डिनल नियुक्त होने वाले ग्यारहवें भारतीय हैं। वर्तमान में भारत में पहले से ही दो और कार्डिनल कार्यरत हैं, जिनका नाम है रांची के आर्चबिशप टेलीस्पोर टोप्पो एवं मुम्बई के आर्चबिशप ओसवाल्ड ग्रेसियस। हालांकि भारत के ईसाईयों के लिये यह एक गौरव का क्षण हो सकता है, परन्तु इस नियुक्ति (और इससे पहले भी) ने कुछ तकनीकी सवाल भी खड़े कर दिये हैं।


जैसा कि सभी जानते हैं, वेटिकन अपने आप में एक स्वतन्त्र राष्ट्र है, जिसके राष्ट्र प्रमुख पोप होते हैं। इस दृष्टि से पोप सिर्फ़ एक धर्मगुरु नहीं हैं, बल्कि उनका दर्जा एक राष्ट्र प्रमुख के बराबर है, जैसे अमेरिका या भारत के राष्ट्रपति। अब सवाल उठता है कि पोप का चुनाव कौन करता है? जवाब है दुनिया भर में फ़ैले हुए कार्डिनल्स…। अर्थात पोप को चुनने की प्रक्रिया में कार्डिनल जॉर्ज एलेंचेरी भी अपना वोट डालेंगे। यह कैसे सम्भव है? एक तकनीकी सवाल उभरता है कि कि, क्या भारत का कोई मूल नागरिक किसी अन्य देश के राष्ट्र प्रमुख के चुनाव में वोटिंग कर सकता है? इसके पहले भी भारत के कार्डिनलों ने पोप के चुनाव में वोट डाले हैं परन्तु इस सम्बन्ध में कानून के जानकार क्या कहते हैं यह जानना दिलचस्प होगा कि भारत के संविधान के अनुसार यह कैसे हो सकता है? यदि पोप सिर्फ़ धर्मगुरु होते तो शायद माना भी जा सकता था, लेकिन पोप एक सार्वभौम देश के राष्ट्रपति हैं, उनकी अपनी मुद्रा और सेना भी है…

क्या सलमान रुशदी भारत में वोटिंग के अधिकारी हैं? क्या चीन का कोई नागरिक भारत के चुनावों में वोट डाल सकता है? यदि नहीं, तो फ़िर कार्डिनल एलेंचेरी किस हैसियत से वेटिकन में जाकर वोटिंग करेंगे?
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नोट :- जिस प्रकार किसी सेल्समैन को 100% टारगेट प्राप्त करने पर ईनाम मिलता है, उसी प्रकार आर्चबिशप एलेंचेरी को कार्डिनल पद का ईनाम इसलिए मिला है, क्योंकि उन्होंने पिछले दो दशकों में कन्याकुमारी एवं नागरकोविल इलाके में धर्म परिवर्तन में भारी बढ़ोतरी की है। ज्ञात रहे कि एलेंचेरी महोदय वही सज्जन हैं जिन्होंने कन्याकुमारी में स्वामी विवेकानन्द स्मारक नहीं बनने देने के लिए जी-तोड़ प्रयास(?) किये थे, इसी प्रकार रामसेतु को तोड़कर सेतुसमुद्रम योजना को सिरे चढ़ाने के लिए करुणानिधि के साथ मिलकर एलेंचेरी महोदय ने बहुत मेहनत(?) की। हालांकि डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी के प्रयासों तथा हिन्दू संगठनों के कड़े विरोध के कारण वह दोनों ही दुष्कृत्य में सफ़ल नहीं हो सके।

http://in.christiantoday.com/articles/archbishop-george-alencherry-elevated-to-cardinal/6941.htm

20 comments:

Viral Trivedi said...

ये सब चिंताजनक है पर हमारे कबुतारो की आँखे बंद है

shailesh vyas said...

But in secular bharat minority having all right to brich of law and constitution.Minority community can do any thing as per their vimms.we mso called majority are in deep sleep like KUMBHAKARNA.

Agyaani said...

बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपैया :)

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बड़ा प्रश्न यह है कि हमारे यहाँ डा स्वामी जैसे और लोग क्यों पैदा नहीं हो रहे. इस आसन्न संकट से निपटने के लिए डा स्वामी जैसे सैकड़ों व्यक्तियों की आवश्यकता है.

Man said...

वन्देमातरम सर
एक जटील तकनीकी सवाल उठाया हे आप ने
जिस पर अब तक सभी आँखे मूंदे हुवे थे
सामन्य इसाई गतिविधि जानकार ...इन पोप महोदय लेकिन वेटिकन के लक्ष्य
में बढ़ोतरी करने के एवज में ये इनाम मिला हे !!
सेकुलर हिन्दू श्त्मुर्ख शाम को खाने और सुबह जाने में ही मशगुल हे !!
एक नई जानकारी देने के लिए धन्यवाद ||

अवनीश सिंह said...

kitni tarakki ho gai nhai desh ki ,
hamare yahan ke nagrik aur deshon ki sarkar bana rahe hain .

त्यागी said...

धरती पर किसी गैर हिन्दू के लिए कोई स्वर्ग है तो वो भारतवर्ष ही है. दुनिया के नपुंसक येही बसते है और अपनी नपुंसकता पर ठट्टे भी येही लगाते है. हमारे देश के पैसे, हमारे ही लोग का प्रयोग होता है और शासन भी हम पर ही होता है. देखा कितनी बड़ी डेमोक्रेसी है इटली यहाँ शासन होता है और यहाँ के लोग वेटिकन का नेता चुनते है. अभी तो इसाइओ की हेकड़ी देखि है अब १९४७ के बाद मुसलमान फिर से हेकड़ी दिखा रहे है. हिन्दू इस देश से बिना लंगोटी के भागने के लिए तयिआर हो जाये.
http://parshuram27.blogspot.com/2012/01/blog-post.html

missin my train said...

ek dharm yudh BHAGWAN SHRI RAM NE LADA THA....AUR AB HUMARI BAARI HAI. IS DHARM YUDH MEIN, IS DHARTI KO HUM PHIR SE LAAL KAR DENGE. ARIDAL K GHATAK CHRISTIAN AUR ISLAM KA HUM SARVA NASH KAR DENGE.

rashmi sharma said...

aaj humare desh ka sabse bada durbhagya yai hai ki - desh ka josh - yahan ka yuwa varg jis educational system ke under mai hai wo use kuch sochane ka mauka hi nahin deti, is tarah ki tarangon ka unhe pata hi nahin hota, to hum kaise soch sakte hai ki desh aage padhega, aaj har insaan ko jaagne ki jarurat hai, har acche kaa sath sena hai, humko apane aap ke prati imaandar banana hoga

hemant said...

jab pop bharat aaye the tab, airport per apna pair rakhte he unhone sonia Gandhi se kaha ke pure europ, africa ko cristian bana diya aab bharat ke bari hai......


aur aisa nahi hai ke yaha us ke tayariya suru nahi hui, hindu ka dhram parivartan karne ke liya soni gandhi naye naye law's la rahi hai.....

so sambhal jao bharat wasio....

Anonymous said...

sahi lekh

सुलभ said...

:( :(

Krishan Pahal said...

Excellent.
Good Angle, I did not think of it.

vipin kumawat said...

alencherry ki niyukti to vatican ki policy he lekin hamari policy to videsi mansikata wale log banate he atah takaniki sawal ka kya kam.

Anonymous said...

Thanks for drawing attention to a fact ignored by govt. and sickular media.
I shall appreciate if the editor, using some translator, converts comments written in Hindi but Roman script into Devnagari script before publishing?

hardeep rana said...

raam raam ji...sawaal to ye bhi ho sakta hai kijab ye waha vote daalte hai to daaale par yaha kyo inhe vote dalne ka adhikar mila huaa hai......

jisko rashtrpati chunte hai usi ke desh me kyo nahi jate ye....



kunwar ji

Anonymous said...

The only true religion was aryan culture known as vedic culture which spread with aryans migration. Why do not you try to find common words in sanskrit, Russian, slavic and many Europian languages? World's biggest businesses - 2 major religions have suppresssed any and all information that came to light as evidence of vedic culture...

dr.rajesh kapoor said...

सदा के सामान अति महत्वपूर्ण एवं सारगर्भित, राष्ट्र हित की जानकारी है. सुरेश जी के इन अनुपम प्रयासों के लिए उन्हें सादर नमन. सुरेश जी सुनिश्चित है की २३ मार्च के बाद शुरू होनेवाला अपना नव वर्ष आप जैसे देशभक्तों के लिए विजय का वर्ष बनेगा. शुभकामनाओं सहित, राजेश कपूर.

STUDENT ZONE said...

hmm

Anonymous said...

1947 मेँ मुसलमान और ईसाई कितने थे और आज कितने हो गये तो जवाब अपने आप मिल जाऐगा