Wednesday, December 14, 2011

P Chidambaram, Internal Security and Mumbai Terror Attack

इतने काबिल और सक्षम गृहमंत्री का इस्तीफ़ा माँगना ठीक नहीं…

समुद्री रास्ते से आए हैवानों द्वारा 26/11 को मुम्बई में किये गये नरसंहार की यादें प्रत्येक भारतीय के दिलोदिमाग मे ताज़ा हैं (और हमेशा रहेंगी, रहना भी चाहिए)। उस समय भारत के अत्यन्त काबिल गृहमंत्री थे “सूट-बदलू” शिवराज पाटिल साहब। उस हमले के पश्चात देश की जनता और मीडिया ने अत्यधिक “हाहाकार” मचाया इसलिए मजबूरी में उनकी जगह एक और “मूल्यवान” व्यक्ति, अर्थात पी चिदम्बरम (Home Minister P. Chidambaram) को देश का गृहमंत्री बनाया गया। जिन्होंने मंत्रालय संभालते ही ताबड़तोड़ देश की सुरक्षा हेतु सफ़ेद लुंगी से अपनी कमर कस ली।

सीमा सुरक्षा, तटरक्षक दलों तथा नौसेना के कोस्ट गार्ड को आपस में मिलाकर एक “थ्री-टीयर” (त्रिस्तरीय) सुरक्षा घेरा बनाया गया, ताकि भविष्य में कोई भी छोटी से छोटी नाव भी देश की समुद्री सीमा में प्रवेश न कर सके। लेकिन कपिल सिब्बल के “मूल्यवान” सहयोगी यानी गृहमंत्री पी चिदम्बरम साहब की सख्ती और कार्यकुशलता का नतीजा यह हुआ कि, एक 1000 टन का “पवित” नाम का विशालकाय जहाज इस थ्री-टीयर सुरक्षा घेरे को भनक लगे बिना, अगस्त 2011 में, सीधे मुम्बई के समुद्र तट पर आ पहुँचा।



“पवित” नाम के इस पुराने मालवाहक जहाज़ पर चालक दल का एक भी सदस्य नहीं था, क्योंकि समुद्री सूचनाओं के अन्तर्राष्ट्रीय जाल के अनुसार इस जहाज़ को जुलाई 2011 में ही “Abandoned” (निरस्त-निष्क्रिय) घोषित किया जा चुका था और इसे समुद्र में डुबाने अथवा सुधारने की कार्रवाई चल रही थी। ओमान की जिस शिपिंग कम्पनी का यह जहाज था, उसने इस जहाज से अपना पल्ला पहले ही झाड़ लिया था, क्योंकि उस कम्पनी के लिए बीच समुद्र में से इस जहाज को खींचकर ओमान के तट तक ले जाना एक महंगा सौदा था… यह तो हुआ इस जहाज़ का इतिहास, इससे हमें कोई खास मतलब नहीं है…।

हमे तो इस बात से मतलब है कि इतना बड़ा लेकिन लावारिस जहाज, भारत की समुद्री सीमा जिसकी सुरक्षा, 12 समुद्री मील से आगे नौसेना के कोस्ट गार्ड संभालते हैं, 5 से 12 समुद्री मील की सुरक्षा नवगठित “मैरीटाइम पुलिस” करती है, जबकि मुख्य समुद्री तट से 5 समुद्री मील तक राज्यों की स्थानीय पुलिस एवं तटरक्षक बल देखरेख करते हैं… कैसे वह लावारिस जहाज 12 समुद्री मील बिना किसी की पकड़ में आये यूँ ही बहता रहा। न सिर्फ़ बहता रहा, बल्कि 100 घण्टे का सफ़र तय करके, इस “तथाकथित त्रिस्तरीय सुरक्षा” को भनक लगे बिना ही मुम्बई समुद्री तट तक भी पहुँच गया? वाह क्या सुरक्षा व्यवस्था है? और कितने “मूल्यवान” हमारे गृहमंत्री हैं? तथा यह स्थिति तो तब है, जबकि 26/11 के हमले के बाद समुद्री सुरक्षा “मजबूत”(?) करने तथा आधुनिक मोटरबोट व उपकरण खरीदी के नाम पर माननीय गृह मंत्रालय ने तीन साल में 250 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किये हैं।

अक्टूबर 2010 में केन्द्र सरकार के “मूल्यवान सहयोगी” चिदम्बरम ने मुम्बई के समुद्र तटों का दौरा किया था और फ़रमाया था कि समुद्री सुरक्षा में “उल्लेखनीय सुधार” हुआ है। ऐसा सुधार(?) हुआ कि एक साल के अन्दर ही तीन-तीन जहाज मुम्बई के समुद्री सीमा में अनधिकृत प्रवेश कर गये और किसी को कानोंकान खबर तक न हुई।

परन्तु जैसी कि भारत की शासन व्यवस्था की परम्परा है, इस गम्भीर सुरक्षा चूक की जिम्मेदारी सारे विभाग एक-दूसरे पर ढोलते रहे, निचले कर्मचारियों की तो छोड़िये… कार्यकुशल गृहमंत्री ने भी “पवित” जहाज की इस घटना को रक्षा मंत्रालय का मामला बताते हुए अपना पल्ला (यानी लुंगी) झाड़ लिया।

बात निकली ही है तो पाठकों को एक सूचना दे दूं… लद्दाख क्षेत्र में एक ऐसी झील है जो भारत चीन सीमा पर स्थित है। इस झील का आधा हिस्सा भारत में और आधा हिस्सा चीन में है। सीमा पर स्थित सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील इस विशाल झील में चौकसी और गश्त के लिए भारत की सेना के पास 3 (तीन) मोटरबोट हैं, जो डीजल से चलती हैं… जबकि झील के उस पार, चीन के पास 17 मोटरबोटें हैं, जिसमें से 6 बैटरी चलित हैं और दो ऐसी भी हैं जो पानी के अन्दर भी घुस सकती हैं…। आपको याद होगा इसी लद्दाख क्षेत्र के जवानों के लिए जैकेट और विशेष जूते खरीदी हेतु तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फ़र्नांडीस ने मंत्रालय के अधिकारियों का तबादला लद्दाख करने की धमकी दी थी, तब कहीं जाकर जैकेट और जूते की फ़ाइल आगे बढ़ी थी…। अब आप अंदाज़ा लगा लीजिये कि सुरक्षा की क्या स्थिति है…

बहरहाल, हम वापस आते हैं अपने “मूल्यवान” चिदम्बरम साहब पर…। गृह मंत्रालय के दस्तावेजों के अनुसार अप्रैल 2009 (यानी 26/11 के बलात्कार के चार महीने बाद) से अब तक गुजरात, महाराष्ट्र, गोआ, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप और दमण-दीव को तेज़ गति की कुल 183 मोटरबोट प्रदान की गई हैं। इन राज्यों में कुल 400 करोड़ रुपये खर्च करके 73 तटीय पुलिस स्टेशन, 97 चेकपोस्टें और 58 पुलिस बैरकें बनवाई गई हैं। इसके अलावा रक्षा मंत्रालय ने अपनी तरफ़ से 15 अतिरिक्त कोस्ट गार्ड गश्ती स्टेशन बनवाए हैं…। क्या यह सब भारत के करदाताओं का मजाक उड़ाने के लिए हैं? इसके बावजूद एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन-तीन बड़े-बड़े टनों वज़नी जहाज, बिना किसी सूचना और बगैर किसी रोकटोक के, मुम्बई के समुद्र तट तक पहुँच जाते हैं, 26/11 के भीषण हमले के 3 साल बाद भी देश की समुद्री सीमा में लावारिस जहाज आराम से घूम रहे हैं… तो देश की जनता को किस पर “लानत” भेजनी चाहिए? “मान्यवर और मूल्यवान गृहमंत्री” पर अथवा अपनी किस्मत पर?

तात्पर्य यह है कि हमारे समुद्री तटों पर खुलेआम और बड़े आराम से बड़े-बड़े जहाज घूमते पाए जा रहे हैं और “संयोग से”(?) सभी मुम्बई के तटों पर ही टकरा रहे हैं… ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि खतरा किस स्तर का है। ध्यान दीजिये, सन् 1944 में 7142 टन का एसएस फ़ोर्ट नामक एक जहाज जिसमें 1400 टन का विस्फ़ोटक भरा हुआ था उसमें मुम्बई के विक्टोरिया बंदरगाह पर दुर्घटनावश विस्फ़ोट हुआ था, जिसमें कुल 740 लोग मारे गये थे और 1800 घायल हुए थे… इस विस्फ़ोट से लगभग 50,000 टन का मलबा एकत्रित हुआ जिसे साफ़ करने में छः माह लग गये थे (यह आँकड़े उस समय के हैं, जब मुम्बई की जनसंख्या बहुत कम थी, विस्फ़ोट की भीषणता का अनुमान संलग्न चित्र से लगाया जा सकता है…)।



ऐसे में एक भयावह कल्पना सिहराती है कि “पवित” टाइप का 1000 टन का कोई जहाज सिर्फ़ 300 टन के विस्फ़ोटक के साथ भारत के व्यावसायिक हृदय स्थली “नरीमन पाइंट” अथवा न्हावा शेवा बंदरगाह से टकराए तो क्या होगा? इसलिये माननीय चिदम्बरम जी… अर्ज़ किया है कि शेयर और कमोडिटी मार्केट से अपना ध्यान थोड़ा हटाएं, और जो काम आपको सौंपा गया है उसे ही ठीक से करें…

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विशेष नोट – 1993 में दाऊद इब्राहीम द्वारा जो बम विस्फ़ोट किये गये थे, उसका सारा माल उस समय कोंकण (रत्नागिरी) के सुनसान समुद्र तटों पर उतारा गया था…। उस समय भी सरकार ने, 1) “हमारी समुद्री सीमा बहुत बड़ी है, क्या करें?”, 2) “समुद्री सुरक्षा को चाकचौबन्द करने के लिए बहुत सारा पैसा चाहिए…”, 3) “समुद्री सीमा की चौकसी रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी है, गृह मंत्रालय की नहीं…” जैसे “सनातन बहाने” बनाये थे।
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** - “मूल्यवान” शब्द की व्याख्या :- जिस प्रकार कपिल सिब्बल साहब ने 2G घोटाले में देश को “शून्य नुकसान हुआ” का “फ़तवा” जारी किया था, ठीक वैसे ही हाल में उन्होंने चिदम्बरम साहब को “मूल्यवान सहयोगी” बताया है… और जब कपिल सिब्बल कुछ कहते हैं, यानी वह सुप्रीम कोर्ट से भी ऊँची बात होती है… ऐसा हमें मान लेना चाहिए… :) :) :)

स्रोत :- http://oldphotosbombay.blogspot.com/2011/02/bombay-explosion-1944-freighter-ss-fort.html

17 comments:

संजय बेंगाणी said...

इतिहास गवाह है, चोर उच्चके आते रहे, हम उन्हें राजपाठ देते रहे. तो यह इतिहास है, चिदम्बरम पर हमला हमारी संस्कृति पर हमला है. इस लेख से कांग्रेस को दुख पहुँचा हो तो लेखक की तरफ से माफी मांगता हूँ. आप अपना काम जारी रखो, हम फिर से वोट देंगे मैडमजी.

Tarun Goel said...

laanat hai. mera ek dost hai 22 saal ka JE hai, usko kisi ne kaha ki bhai naukri chod de aur PWD mein aa ja, bhot kamai hai to usne jawab diya ki sahab jitni jarurat hai utna kama raha hun, yada chahiye nahin to idhar udhar kyun muhn marun, ye saala itni badi post pe baithe huye aadmi ko ye baat samajh nahin aati kya?

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

main to niraash ho chuka hoon. logon ke paas vision nahi hai. kuyen tak seemit..

रंजना said...

इस सब के बावजूद हमारा देश चल रहा है...आपको नहीं लगता भगवान् हैं...???????

रंजना said...

वैसे, सुरक्षा /रक्षा इत्यादि होते तो हैं ही...अब बात यह न पूछिए की "किसका"..??

सारे टेंडर इन माननीयों के रक्षार्थ ही तो पास होते हैं...

राजा रक्षित हैं न...बस !!! और क्या चाहिए...

Raj said...

ye desh bhagwan bhao se hy varna chian ya usa ka raaj hota,desh ke logo me itna gussa hy lakin ye sab rajneta jab thapad padty tab ek ho jatyhy inme desh bhakti hi nahi rahi,ya to lashkari sashan laya jaye jo desh ko sahi karke firse loksahi laye tabhi kuchh ho sakta hy nahi to anna or baba rmdev ko lathi padti rahygi or ye chor log raj karty rahygy

krishnakumarsoni (RAMBABU) said...

आप तो जबरदस्ती चिदंबरम जी के पीछे पड़े हैं,अरे भाई वो भी तो आदमी ही हैं,कोई भगवन तो नहीं.और आदमी से गलतियाँ तो होती ही हैं,फिर वो गलती भारत की सुरक्षा की हो या २-जी घोटाले की या बहुत सारी अन्य गलतियाँ . वो भारत के गृह मंत्री हैं और आप एक साधारण आदमी आपको सिर्फ और सिर्फ उनकी गलतियों के परिणाम भुगतने हैं.आपकी टिका-टिप्पणियों का कोई असर होने वाला नहीं है, और अगर ज्यादा बोले तो.... ?

दीर्घतमा said...

कितना सलोना चेहरा है चिताम्बरम साहब का चाहे टू जी का विषय चाहे सुरक्षा का ,इस सर्कार का कोई माई बाप नहीं है भगवन भरोसे यह देश है आखिर भगवन का देश है न .

जितेन्द्र सिंह : राष्ट्रवादी भारतीय... said...

उचित समय (जब 'लुंगी वाले' मंत्री अपना 'गृह' बचाने में लगे हैं) पर आया एक 'मूल्यवान' लेख... देश की सुरक्षा से हर रोज समझौते करने वाली 'मृत आत्माओं' को झकझोरता एक जागृत लेख... धन्यवाद सुरेश भाई जी...

राष्ट्रवादियों में 'भीष्म पितामह' का एक कथन बहुत प्रसिद्द है-- "राष्ट्र की सीमायें माँ के वस्त्रों की तरह होती हैं.. इनकी रक्षा करना पुत्र का प्रथम कर्तव्य है.."

और जब कथित 'देश को चलाने वाले पुत्र' ही राष्ट्र-द्रोही हो.. तो.??
दिल्ली ही सब लापरवाहियों की जननी है... दिल्ली में बैठे सबसे बड़े लोकतंत्र के छोटे छोटे 'दलाल' ही सब 'बेचने' पर आमादा हैं.. उनके लिए 'माँ के वस्त्र' (भारतीय सीमायें) कोई अहमियत नही रखते.??
न जाने कब पाप का घड़ा भरेगा.??. ना जाने कब..??

वन्दे मातरम्...
जय हिंद.. जय भारत...

Anonymous said...

kapil sibbal is ....intrested in probing other...if then what about probe against him.....
Sibal was a lawyer in New York when his wife was posted as a diplomat in New York. How did he get green card to get admission in New York state bar is a mystery. It needs to be investigated like Queen Baton Relay investigation against Suresh Kalmadi. If you dig out his bar admission application and follow the trail how he got green card, I have a strong feeling like Suresh Kalmadi and A Raja, he will join them too. When a person applies for green card, he has to sign application under oath stating he intends to abandon his foreign residence (in his case it is India) permanently and he intends to accept U.S. as his new permanent home. How can a person be made Union Cabinet minister who had expressed his intent to abandon India permanently. He is on a sensitive position with access to India's vital interests when in the past he had expressed intent to abandon India for ever. It needs to be investigated.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

@anon 3:56-is is so! explosive....

anand thebaria said...

aapke lekhon se urza nikalti hai. desh ko to desh k rahnumaon se hi dar hai.

Rajesh said...

Bahut Hi Badhiya Lekh likha hai Suresh Ji. In Kutto Ke bare mein ese hi likha karo. Dhanywad.

Suresh Chand said...

जितेंदर सिंह जी! , इन कांग्रेस्सियो के लिए माता के वस्त्र अब इटली की सीमाए है. भारत की सीमओं का तो भगवान ही मालिक है...

Bharatiya Bandhu said...

सुरेश जी,
खोज के उपरांत, तथ्य परक लेख लिखने के लिए साधुवाद.

Guru Bhakti said...

Bauhat achha likha hai, please continue on............ek ek baat facts par based hai.

lokendra singh said...

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आंखे खोल देने वाला आलेख। जब तक सत्ता नाकारा लोगों के हाथ रहेगी कुछ ठीक नहीं हो सकता। वैसे चिदम्बरम साहब के पास ऐसी गंभीर चूक पर ढेरों बहाने है। जैसे स्कूल देर से पहुंचने वाले बच्चे बनाते हैं। इस देश की विडम्बना यही है कि जिसे जो काम सौंपा गया है वह उसी में जी नहीं लगता बाकी सारे कामों में खुडपेच करता रहता है।