Monday, December 19, 2011

Illegal Liquor Death in Bengal, Shariat and Liquor

जहरीली शराब वालों को शरीयत के मुताबिक सजा मिले, या भारतीय कानून के अनुसार???

जब से ममता “दीदी”(?) ने बंगाल की सत्ता संभाली है तब से पता नहीं क्या हो रहा है। शपथ लेते ही सबसे पहले एक अस्पताल में इंसेफ़िलाइटीस (मस्तिष्क ज्वर) से 62 मासूम बच्चे मारे गये… कुछ दिनों बाद ही एक “सो कॉल्ड” प्रतिष्ठित बड़े लोगों के अस्पताल में आग लग जाने से 70 से अधिक असहाय मरीज अपने-अपने बिस्तर पर ही जल मरे… और अब ये जहरीली शराब काण्ड, जिसमें 171 लोग मारे जा चुके हैं। इन घटनाओं में विगत 30 साल का वामपंथी कुशासन तो जिम्मेदार है ही, क्योंकि जो शासन 30 साल में कोलकाता जैसी प्रमुख जगह के अस्पतालों की हालत भी न सुधार सके, उसे तो वाकई बंगाल की खाड़ी में डूब मरना चाहिए, परन्तु साथ-साथ इसे ममता बनर्जी का दुर्भाग्य भी कहा जा सकता है।


परन्तु बंगाल के मोरघाट में जहरीली शराब की जो ताज़ा घटना घटी है, वह न तो ममता का दुर्भाग्य है और न ही वामपंथी कुशासन… यह तो सीधे-सीधे वामपंथी और तृणमूल का मिलाजुला “आपराधिक दुष्कृत्य” है। आपने और मैंने अक्सर “ऊँची आवाज़” में सुना होगा कि इस्लाम में शराब को “हराम और सबसे बुरी शै” कहा गया है और ऐसा “कहा जाता है”(?) कि पैगम्बर मोहम्मद ने शराब पीने और बेचने वाले के लिए कड़ी से कड़ी सज़ा मुकर्रर की हुई हैं। जान लीजिये कि बंगाल में हुई इस दुर्घटना(?) में मारे गये 171 लोगों में से अधिकांश मुसलमान हैं, जबकि इस जहरीली अवैध शराब को बनाने और बेचने वाला है नूर-उल-इस्लाम नामक शख्स जिसे स्थानीय लोग “खोका बादशाह” भी कहते हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार मोराघाट इलाके में नूर-उल-इस्लाम और इसके दाँये हाथ सलीम खान की तूती बोलती है, यह दोनों यहाँ एक समानान्तर सत्ता हैं। पिछले 25 साल से ये दोनों और इनकी गैंग वामपंथी कैडरों तथा प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत अथवा रिश्वत देकर अवैध शराब का यह धंधा बेरोकटोक चलाते रहे। इस बीच तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनी तो भी इनके धंधे में कोई फ़र्क नहीं पड़ा, क्योंकि अब वामपंथियों का यह मुस्लिम वोट बैंक खिसककर ममता दीदी की गोद में जा बैठा था। इतने सालों से इस शराब माफ़िया की राजनेताओं से साँठगाँठ के चलते इलाके की पुलिस भी सोचती है कि इन पर कार्रवाई करके क्या फ़ायदा, क्यों न इनकी गतिविधियों से पैसा ही बना लिया जाए, सो उसने भी आँखें मूंदे रखीं, जबकि सभी जानते हैं कि कच्ची शराब बनाने के लिए नौसादर कहाँ से आता है।


 नूर-उल-इस्लाम ने पहले कई चुनावों में CPI, CPM, से लेकर तृणमूल, फ़ारवर्ड ब्लॉक और RSP तक को चन्दा और बूथ हथियाने के लिए “मैन-पावर” सप्लाई की है, सो अब 171 व्यक्तियों की मौत के बावजूद कुछ दिनों तक हो-हल्ला मचा रहेगा, मुख्य आरोपी कभी भी पकड़ा नहीं जाएगा, क्योंकि एक तो उसे वामपंथियों और तृणमूल दोनों का आशीर्वाद प्राप्त है, दूसरे यह कि वह “अल्पसंख्यक”(?) समुदाय से है। कुछ दिनों बाद हालात अपने-आप सामान्य हो ही जाएंगे…

इस हादसे(?) के बाद ममता बनर्जी का स्वाभाविक इस्लाम प्रेम उमड़ पड़ा, और उन्होंने अवैध शराब पीने वालों के “पवित्र और शहीदाना कर्म” की इज्जत करते हुए आपके और हमारे खून-पसीने के टैक्स की कमाई में से, प्रत्येक परिवार को दो-दो लाख रुपए का मुआवज़ा दिया है, मानो कच्ची दारू पीकर मरने वालों ने देश की बहुत बड़ी सेवा की हो। (कौन कहता है, कि भारत से जज़िया खत्म हो गया!!!)

इस मामले में एक कोण “धार्मिक” भी है, जैसा कि सभी जानते हैं पश्चिम बंग के 16 जिले लगभग मुस्लिम बहुल बन चुके हैं (कुछ जनसंख्या बढ़ाने से, जबकि कुछ बांग्लादेशी “मेहमानों” की वजह से)। इन जिलों से आए दिन हमें विभिन्न अपराधों के लिए स्थानीय तौर पर “शरीयत” अदालत के अनुसार सजाएं सुनाए जाने के फ़रमान जानने को मिलते हैं… जबकि ये बात ज़ाहिर हो चुकी है कि मोराघाट इलाके में खुद नूरुल इस्लाम, शरीयत के नियमों को ठेंगे पर रखता था। अतः मैं ममता जी से सिर्फ़ यह जानना चाहता हूँ कि “यदि” नूर-उल-इस्लाम और सलीम पकड़े जाएं (संभावना तो कम ही है), तो उन पर शरीयत के मुताबिक कार्रवाई होगी या भारतीय दण्ड संहिता के अनुसार? क्योंकि हम पहले भी देख चुके हैं कि दिन-रात इस्लाम-इस्लाम और शरीयत-शरीयत भजने वाले इमाम, मौलवी, विभिन्न इस्लामिक संगठन तथा “मुस्लिम बुद्धिजीवी”(?) कभी भी मुस्लिम अपराधियों (कसाब, अफ़ज़ल, करीम तेलगी, अबू सलेम, हसन अली इत्यादि) के लिए शरीयत के अनुसार सजा की माँग नहीं करते, उस समय भारतीय दंड संहिता के प्रति इनका प्रेम अचानक जागृत हो जाता है…।

ज़ाहिर है कि शरीयत के अनुसार सजा तभी तक अच्छी लगती है, जब तक कि वह दूसरों (खासकर कमजोरों और काफ़िरों) के लिए मुकर्रर हो… इसलिए दारू बेचने वाले नूरुल इस्लाम और सलीम आश्वस्त रहें, ममता “दीदी” के राज में उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा…

13 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

हम नहीं सुधरेंगे. जब भी हिंदू हितों की बात करो, तुरंत कोई आकार दलित-सवर्ण-पिछड़ा का पत्थर उछल देगा.
अगर हिंदुओं की आँखों पर ये पट्टी न चढ़ी होती तो सैकड़ों साल गुलाम ही क्यों रहते.

Man said...

वोट बेंक , तुस्टीकरण की राजनीती का एक और ""घातक छद्दम मुस्लिम "" प्रेम का नमूना !!
ममता के सत्ता में आ जाने से वंहा की दशा कतई नही सुधरने वाली हे ,क्योकि ममता ने भी उसी कडवी बेल का ""तूम्बा ""तोडा हे जिस से वामपंथी पिछले पचास सालो से खेलते आये हे @उपर से नक्सलवाद का नमक भी लगा लिया हे |बंगाल के भाग्य में शायद एक और विभाजन लिखा हे जिसकी परनीती खूनी ही होनी हे |शायद हजार सालो से वर्णसंकरता ,छद्दम सेकुलरता,इस्लामिक जिहादिता , की प्रयोगभूमि रहे भारतवर्ष के भाग्य में अभी स्थिरता कतई नही लिखी हे |ये वोटबेंक के भ्रस्ट एंव सत्ता के भूखे ""पिस्सू "जोंक अभी और खून चूसेंगे |
जागो हिंदुवो जागो |नही तो नींद में ही हमेशा के लिए सुला दिए जावोगे |

Latest Bollywood News said...

Very very Nice post our team like it thanks for sharing

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Ratan Singh Shekhawat said...

ज़ाहिर है कि शरीयत के अनुसार सजा तभी तक अच्छी लगती है, जब तक कि वह दूसरों (खासकर कमजोरों और काफ़िरों) के लिए मुकर्रर हो
@ सत्य वचन|

मेरी राय में तो भारत के मुस्लिमों के लिए शरियत ही लागु कर देनी चाहिए !!

Gyan Darpan
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sanjeev.teotia said...

bhai smajh nhi aata kya hoga bharat ka. jai hind

Anonymous said...

Bahut achcha lekh hai.

संजय बेंगाणी said...

कुरान के आदेश वन्दे मातरम कहने पर ही आड़े आते है. शेष.... :)

पवित्र सिंह रावत said...

सुरेश भाई नमस्‍कार। सही मायने मैं आपको एक सच्‍चा हिन्‍दू और देशभक्‍त मानता हूँ। यदि भारत के सभी हिन्‍दूओं की सोच आपके जैसी हो जाये तो हमारे देश तथा धर्म की ओर कोई आँख उठाकर भी नहीं देख सकता मगर क्‍या करें जब अपना ही सिक्‍का खोटा हो तो? चलिए आप अपना काम करते रहिये, हम जैसे कुछ ही सही मगर होगें तो जिन पर आपके लेखों का गहरा असर होता है। आपके काम के लिये धन्‍यवाद।। देश तथा हिन्‍दु धर्म आपका आभारी रहेगा।

Rajesh said...

Bahut Badhiya Sureshji. Padhkar Man ko acha lagta hai ki hamara apna itne ache lekh likhta hai. Bahut hi badhiya.

सुलभ said...

शरीयत के हिसाब से चलने वाला देश सउदी अरब एक सुरक्षित देश है.
मगर पाकिस्तानी, बांगलादेशी मुस्लिमो की स्थिति हास्यास्पद है भारत में आतंक इन्ही लोगों के वजह से है.
वामपंथ हो या कांग्रेस उनके लिए ये सिर्फ वोटबैंक हैं.
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२० रूपये की दारु और मुआवजा २-२ लाख. इतने में तो २-४ दारु भट्टी और खुल जायेंगे.
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रही बात हिन्दुओं की वे पलायनवाद में ज्यादा यकीन रखते हैं.
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बांग्लादेशी घुसपैठ जारी रहे वोटबैंक बढ़ता रहे ममता दीदी को और क्या चाहिए.

lokendra singh said...

मुझे तो इसी बात पर क्रोध आ रहा है की शराबियों के लिए आम जनता के गाड़े खून की कमाई क्यों दी....

dr k said...

Article is quite informative, but it seems to be a part of antimuslim compaign, Friends you can gain nothing except to poise your own mind, Be positive, muslims are not so bad creatures, what you can aspect more from this deprived, downtrodden class? ---dr khan