Darul Islam, Melvisharam, Tamilnadu, Dr Subramanian Swamy
आईये… भारत के कई दारुल-इस्लामों में से एक, “मेलविशारम” की सैर पर चलें…
भारत का एक दक्षिणी राज्य है तमिलनाडु, यहाँ के वेल्लूर जिले की आर्कोट
विधानसभा क्षेत्र में एक कस्बा है, नाम है “विशारम”। विशारम कस्बा दो
पंचायतों में बँटा हुआ है, “मेलविशारम” (अर्थात ऊपरी विशारम) तथा
“कीलविशारम” (निचला विशारम)। मेलविशारम पंचायत की 90% आबादी मुस्लिम है,
जबकि कीलविशारम की पूरी आबादी हिन्दुओं (वन्नियार
जाति) की है। इन दोनों पंचायतों का गठन 1951 में ही हो चुका था, मुस्लिम
आबादी वाले मेलविशारम में 17 वार्ड हैं, जबकि दलितों वाले कीलविशारम में 4
वार्ड हैं। 1996 में “दलितों और पिछड़ों के नाम पर रोटी खाने वाली” DMK ने
मुस्लिम वोट बैंक के दबाव में दोनों कस्बों के कुल 21 वार्डों को आपस में
मिलाकर एक पंचायत का गठन कर दिया (स्वाभाविक रूप से इससे इस वृहद पंचायत
में मुस्लिमों का बहुमत हो गया)।
इसके बाद अक्टूबर 2004 में “वोट बैंक प्रतिस्पर्धा” के चलते जयललिता की
AIDMK ने नवगठित मेलविशारम का दर्जा बढ़ाकर इसे “ग्रेड-3” पंचायत कर दिया
(ताकि और अधिक सरकारी अनुदान रूपी “लूट” किया जा सके)। मेल्विशारम के
मुस्लिम जनप्रतिनिधियों(?) को खुश करने के लिए अगस्त 2008 में इसे वेल्लूर
नगर निगम के साथ विलय कर दिया गया…। जैसा कि पहले बताया गया मेलविशारम के
17 वार्डों में 90% मुस्लिम आबादी है, जिनका मुख्य कार्य चमड़ा निकालने और
साफ़ करने का है, जबकि कील्विशारम के 4 वार्डों के रहवासी अर्थात हिन्दू वर्ग के लोग मुख्यतः खेती और मुर्गीपालन पर निर्भर हैं। मेल्विशारम के साथ कील्विशारम के विलय कर दिये जाने से इन चार वार्डों
के दलितों का जीना दूभर हो चला है, उनका जीवनयापन भी गहरे संकट में आ गया
है। परन्तु स्वयं को दलितों, वन्नियारों और पिछड़ों का मसीहा कहलाने वाली
दोनों प्रमुख पार्टियों ने उनकी तरफ़ पीठ कर ली है। तमिलनाडु के एक पत्रकार
पुदुवई सर्वानन ने 2007 में मेल्विशारम का दौरा किया और अपनी आँखों देखी
खोजी रिपोर्ट अपने ब्लॉग पर डाली
(http://puduvaisaravanan.blogspot.com/2007/01/blog-post_685.html )। तमिल
पत्रिका “विजयभारतम” ने इस स्टोरी को प्रमुखता से प्रकाशित किया, परन्तु
मुस्लिम वोटों के लालच में अंधी हो चुकी DMK और AIDMK के कानों पर जूँ तक न
रेंगी। इस रिपोर्ट के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं –
1) मेलविशारम पंचायत की प्रमुख भाषा अब उर्दू हो चुकी है, पंचायत और
नगरपालिका से सम्बन्धित सभी सरकारी कार्य उर्दू में किये जाते हैं, सरपंच
और पंचायत के अन्य अधिकारी जो भी “सर्कुलर” जारी करना हो, वह उर्दू में ही
करते हैं। मेलविशारम नगरपालिका की लाइब्रेरी में सिर्फ़ उर्दू पुस्तकें ही
उपलब्ध हैं। सिर्फ़ मेलविशारम के बाहर से आने वाले व्यक्ति से ही तमिल में
बात की जाती है, परन्तु उन चार वार्डों में निवास कर रहे दलितों से तमिल
नहीं बल्कि उर्दू में ही समस्त व्यवहार किया जाता है। 17 वार्डों मे एक गली
ऐसी भी है, जहाँ एक साथ 10 तमिल परिवार निवासरत हैं, पालिका ने उस गली का
नाम, “तमिल स्ट्रीट” कर दिया है, परन्तु बाकी सभी दुकानों, व्यावसायिक
प्रतिष्ठानों एवं सरकारी सूचना बोर्डों को सिर्फ़ उर्दू में ही लिखा गया है,
तमिल में नहीं।
2) मेलविशारम नगरपालिका के अन्तर्गत दो कॉलेज हैं, “अब्दुल हकीम
इंजीनियरिंग कॉलेज”, तथा “अब्दुल हकीम आर्ट्स साइंस कॉलेज” जबकि “मेलविशारम
मुस्लिम एजूकेशन सोसायटी” (MMES) के तहत 5 मदरसे चलाए जाते हैं, इसके
अलावा कोई अन्य तमिल स्कूल नहीं है। 175 फ़ीट ऊँची मीनार वाली
मस्जिद-ए-खिज़रत का निर्माण नगरपालिका द्वारा करवाया गया है, जबकि उन 21
वार्डों में एक भी पुलिस स्टेशन खोलने की इजाज़त नहीं दी गई है, इस बारे में
पूछने पर एक फ़ल विक्रेता अमजद हुसैन ने कहा कि, “सभी विवादों का
“निपटारा”(?) जमात द्वारा किया जाता है”।
3) निचले विशारम अर्थात कील्विशारम के चार वार्डों का विलय मेलविशारम
में होने के बाद से अब तक वहाँ लोकतांत्रिक स्वरूप में चुनाव नहीं हुए हैं,
पंचायत का अध्यक्ष और उन चारों वार्डों के जनप्रतिनिधियों का “नामांकन”
जमात द्वारा किया जाता है, किसी भी दलित अथवा पिछड़े को चुनाव में खड़े होने
की इजाज़त नहीं है।
4) 2002 के पंचायत चुनावों में दलित पंचायत प्रतिनिधियों की मुस्लिम
पार्षदों द्वारा जमकर पिटाई की गई थी, और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होने के
विरोध में इन चार वार्डों के दलितों ने चुनावों का बहिष्कार करना प्रारम्भ
कर दिया था, लेकिन उन्हें मनाने की कोशिश करना तो दूर DMK ने उनकी तरफ़
झाँका भी नहीं।
(http://www.hindu.com/2005/04/21/stories/2005042108500300.htm)
5) मेलविशारम की जमात अपने स्वयं संज्ञान से “प्रभावशाली”(?) मुसलमानों
को नगरपालिका अध्यक्ष के रूप में नामांकित कर देती है। नगरपालिका की समस्त
सरकारी और विधायी कार्रवाई के बारे में हिन्दू दलितों को कोई सूचना नहीं दी
जाती। कई बार तो नगरपालिका की आमसभा की बैठक उस “प्रभावशाली” मुस्लिम नेता
के घर पर ही सम्पन्न कर ली जाती है। मेलविशारम नगरपालिका के सभी प्रमुख
कार्य और ठेके सिर्फ़ मुसलमानों को ही दिये जाते हैं, जबकि सफ़ाई और
कचरा-गंदगी उठाने का काम ही दलितों को दिया जाता है।
6) आर्कोट क्षेत्र में PMK पार्टी के एक विधायक महोदय थे
श्री केएल एलवाझगन, इनके पिता श्री के लोगानाथन की हत्या 1991 में कर दी गई
थी, उस समय इसे “राजनैतिक दुश्मनी” कहकर मामला रफ़ादफ़ा कर दिया गया था,
परन्तु जाँच में पाया गया कि जिस दलित नेता ने उनकी हत्या करवाई थी उसे एक
प्रभावशाली मुस्लिम नेता ने छिपाकर रखा, तथा अब उसने इस्लाम स्वीकार कर
लिया है एवं अब वह अपनी दो बीवियों के साथ मेलविशारम में आराम का जीवन बिता
रहा है… (चूंकि PMK पार्टी भी मुस्लिम वोटों पर बहुत अधिक निर्भर है,
इसलिए एलवाझगन की आपत्तियों को पार्टी ने “शांत”(?) कर दिया…)…
7) मेल्विशारम से कीलविशारम की ओर एक नदी बहती है, जिसका नाम है “पलार”।
यहाँ दलितों की श्मशान भूमि पर लगभग 300 मुस्लिम परिवारों ने अतिक्रमण
करके एक कालोनी बना दी है, इस अवैध कालोनी को मेल्विशारम नगर पंचायत ने
“बहुमत”(?) से मान्यता प्रदान करके इसे “सादिक बाशा नगर” नाम दे दिया है
तथा इसे बिजली-पानी का कनेक्शन भी दे डाला, जबकि दलित अपनी झोंपड़ियों के
लिये स्थायी पट्टे की माँग बरसों से कर रहे हैं।
8) मेलविशारम में “बहुमत” और अपना अध्यक्ष होने की वजह से कील्विशारम के
दलितों को डरा-धमका कर कुछ मुस्लिम परिवारों ने उनकी जमीन औने-पौने दामों
पर खरीद ली है एवं उस ज़मीन पर अपने चमड़ा उद्योग स्थापित कर लिए। चमड़ा सफ़ाई
के कारण निकलने वाले पानी को पलार नदी में जानबूझकर बहा दिया जाता है, जो
कि दलितों की खेती के काम आता है।
9) जब प्रदूषण अत्यधिक बढ़ गया और नदी में पानी की जगह लाल कीचड़ हो गया,
तब मेलविशारम की नगर पंचायत ने “सर्वसम्मति”(?) से प्रस्ताव पारित करके एक
वेस्ट-वाटर ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट लगाने की अनुमति दी। परन्तु जानबूझकर यह
वेस्ट-वाटर ट्रीटमेण्ट प्लांट का स्थान चुना गया दलितों द्वारा स्थापित
गणेश मन्दिर और बादाम के बगीचे की भूमि के पास (सर्वे क्रमांक 256/2 –
31.66 एकड़)। इस गणेश मन्दिर में स्थानीय दलित और पिछड़े वर्षों से ग्रामदेवी
की पूजा और पोंगल का उत्सव मनाते थे।
10) मेल्विशारम में हिन्दुओं को सिर्फ़ “हेयर कटिंग सलून” अथवा
“लॉण्ड्री-ड्रायक्लीनिंग” की दुकान खोलने की ही अनुमति है, जबकि कीलविशारम
के वे दलित परिवार जिनके पास न खेती है, न ही मुर्गियाँ, वे परिवार बीड़ी
बनाने का कार्य करता है।
11) मेलविशारम के 17 वार्डों, उनकी समस्त योजनाओं और सरकारी अनुदान
में तो पहले से ही मुस्लिमों का एकतरफ़ा साम्राज्य था, अब कील्विशारम के
विलय के बाद दलितों वाले चार वार्डों में भी वे अपना दबदबा कायम करने की
फ़िराक में हैं, इसीलिए नगर पंचायत में कील्विशारम इलाके हेतु बनने वाली
सीवर लाइन, पानी की पाइप लाइन, बिजली के खम्भे इत्यादि सभी योजनाओं को या
तो मेल्विशारम में शिफ़्ट कर दिया जाता है या फ़िर उनमें इतने अड़ंगे लगाए
जाते हैं कि वह योजना ही निरस्त हो जाए।
12) 10 नवम्बर 2009 के इंडियन एक्सप्रेस में समाचार आया था, कि नगर
पंचायत के दबंग मुसलमान कील्विशारम में पीने के पानी की योजनाओं तक में
अड़ंगे लगा रहे हैं, दलितों की बस्तियों में खुलेआम प्रचार करके गरीबों से
कहा जाता है कि इस्लाम अपना लो तो तुम्हें बिजली, पानी, नालियाँ सभी
सुविधाएं मिलेंगी…
(पुदुवई सर्वनन की रिपोर्ट के अनुसार, कमोबेश उपरोक्त स्थिति 2009 तक बनी रही…)
2002 से 2009 के बीच आठ साल तक दलितों, द्रविडों और वन्नियार समुदाय के
नाम पर रोटी खाने वाली दोनों पार्टियों ने "मुस्लिम वोटों की भीख और भूख" के
चलते कील्विशारम के दलितों को उनके बुरे हाल पर अनाथ छोड़ रखा था…। इसके बाद
इस्लाम द्वारा सताए हुए इन दलितों के जीवन में आया एक ब्राह्मण, यानी डॉ
सुब्रह्मण्यम स्वामी…। डॉ स्वामी ने पत्रकार पुदुवई सर्वनन की यह रिपोर्ट
पढ़ी और उन्होंने इस “दारुल-इस्लाम” के खिलाफ़ लड़ने का फ़ैसला किया।
डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी ने चेन्नै हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की
जिसमें अदालत से माँग की गई कि वह सरकार को निर्देशित करे कि कील्विशारम को
एक अलग पंचायत के रूप में स्थापित करे। मेल्विशारम नगर पंचायत के साथ
कील्विशारम के विलय को निरस्त घोषित किया जाए, ताकि कील्विशारम के निवासी
अपने गाँव की भलाई के निर्णय स्वयं ले सकें, न कि मुस्लिम दबंगों की दया पर
निर्भर रहें। हाईकोर्ट ने तदनुरूप अपना निर्णय सुना दिया…
परन्तु मुस्लिम वोटों के लिए “भिखारी” और “बेगैरत” बने हुए
DMK व AIDMK ने हाईकोर्ट के इस निर्णय को 16 जनवरी 2009 को सुप्रीम कोर्ट
में चुनौती दे दी (http://www.thehindu.com/2009/01/17/stories/2009011753940400.htm)
। जिस तरह मुस्लिम आरक्षण से लेकर हर मुद्दे पर लात खाते आए हैं, वैसे ही
हमेशा की तरह सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को लताड़ दिया और कील्विशारम के
निवासियों की इस याचिका को तीन माह के अन्दर अमल में लाने के निर्देश दिये।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा कि कील्विशारम पंचायत का पूरा
प्रशासन वेल्लोर जिले में अलग से किया जाए, तथा इसे मेल्विशारम से पूर्णरूप
से अलग किया जाए। चीफ़ जस्टिस केजी बालकृष्णन व जस्टिस पी सदाशिवन की बेंच
ने तमिलनाडु सरकार को इस निर्णय पर अमल करने सम्बन्धी समस्त कागज़ात की एक
प्रति, डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी को देने के निर्देश भी दिये।
पाठकों,
यह तो मात्र एक उदाहरण है, मेल्विशारम जैसी लगभग 40 नगर पंचायतें
हाल-फ़िलहाल तमिलनाडु में हैं, जहाँ मुस्लिम बहुमत में हैं और हिन्दू (दलित)
अल्पमत में। इन सभी पंचायतों में भी कमोबेश वही हाल है, जो मेल्विशारम के
हिन्दुओं का है। उन्हें लगातार अपमान के घूंट पीकर जीना पड़ता है और DMK हो,
PMK हो या AIDMK हो, मुसलमानों के वोटों की खातिर अपना “कुछ भी” देने के
लिए तैयार रहने वाले “सेकुलर” नेताओं और बुद्धिजीवियों को दलितों की कतई
फ़िक्र नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से अब इन लगभग 40 नगर पंचायतों
से भी उन्हें मुस्लिम बहुल पंचायतों से अलग करने की माँग उठने लगी है,
जिससे कि उनका भी विकास हो सके।
मजे की बात तो यह है कि दलित वोटों की रोटी खाने वाले
हों या दलितों की झोंपड़ी में रोटी खाने वाले नौटंकीबाज हों, किसी ने भी
मेल्विशारम के इन दलितों की हालत सुधारने और यहाँ के मुस्लिम दबंगों को
“ठीक करने” के लिए कोई कदम नहीं उठाया… इन दलितों की सहायता के लिए आगे आया
एक ब्राह्मण, डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी…। अब कम से कम कील्विशारम की ग्राम
पंचायत अपने हिसाब और अपनी जरुरतों के अनुसार बजट निर्धारण, ठेके, पेयजल,
नालियाँ इत्यादि करवा सकेगी… मेल्विशारम के 17 मुस्लिम बहुल वार्ड, शरीयत
के अनुसार “जैसी परिस्थितियों” में रहने के वे आदी हैं, वैसे ही रहने को
स्वतन्त्र हैं।
उल्लेखनीय है कि ऐसे “दारुल-इस्लाम” भारत के प्रत्येक राज्य
के प्रत्येक जिले में मिल जाएंगे, क्योंकि यह एक स्थापित तथ्य है कि जिस
स्थान, तहसील, जिले या राज्य में मुस्लिम बहुमत होता है, वहाँ की शासन
व्यवस्था में वे किसी भी अन्य समुदाय से सहयोग, समन्वय या सहभागिता नहीं करते,
सिर्फ़ अपनी मनमानी चलाते हैं और उनकी पूरी कोशिश होती है कि अल्पसंख्यक समुदाय (चाहे वे हिन्दू हों, सिख हों या ईसाई हों) पर बेजा दबाव बनाकर उन्हें शरीयत के मुताबिक चलने को बाध्य करें…। आज जो दलित नेता, मुस्लिम वोटों के लिए "तलवे
चाटने की प्रतिस्पर्धाएं" कर रहे हैं, उनके अनुयायी दलित भाई इस उदाहरण से
समझ लें, कि जब कभी दलितों की जनसंख्या किसी क्षेत्र विशेष में “निर्णायक”
नहीं रहेगी, उस दिन यही दलित नेता सबसे पहले उनकी ओर से आँखें फ़ेर लेंगे…
=============
उन पाठकों के लिए, जिन्हें “दारुल-इस्लाम” जैसे शब्दों का अर्थ
नहीं पता… इस्लाम की विस्तारवादी एवं दमनकारी नीतियों
सम्बन्धी चन्द परिभाषाएं पेश हैं -
1) उम्मा (Ummah) – एक अरबी शब्द जिसका अर्थ है Community (समुदाय) या
राष्ट्र (Nation), परन्तु इसका उपयोग “अल्लाह को मानने वालों” (Believers)
के लिए ही होता है… (http://en.wikipedia.org/wiki/Ummah)
2) दारुल इस्लाम (Dar-ul-Islam) – ऐसे तमाम मुस्लिम बहुल इलाके, जहाँ
इस्लाम का शासन चलता है, सभी इस्लामिक देश इस परिभाषा के तहत आते हैं।
3) दारुल-हरब (Dar-ul-Harb) – ऐसे देश अथवा ऐसे स्थान, जहाँ शरीयत कानून
नहीं चलता, तथा जहाँ अन्य आस्थाओं अथवा अल्लाह को नहीं मानने वाले लोगों
का बहुमत हो… अर्थात गैर-इस्लामिक देश।
(http://en.wikipedia.org/wiki/Divisions_of_the_world_in_Islam)
4) काफ़िर (Kafir) – ऐसा व्यक्ति जो अल्लाह के अलावा किसी अन्य ईश्वर में
आस्था रखता हो, मूर्तिपूजक हो। अंग्रेजी में इसे Unbeliever कहा जाएगा,
यानी “नहीं मानने वाला”। (ध्यान रहे कि इस्लाम के तहत सिर्फ़ “मानने वाले”
या “नहीं मानने वाले” के बीच ही वर्गीकरण किया जाता है)
(http://en.wikipedia.org/wiki/Kafir).
5) जेहाद (Jihad) – इस शब्द से अधिकतर पाठक वाकिफ़ होंगे, इसका विस्तृत
अर्थ जानने के लिए यहाँ घूमकर आएं… (http://en.wikipedia.org/wiki/Jehad)।
वैसे संक्षेप में इस शब्द का अर्थ होता है, “अल्लाह के पवित्र शासन हेतु
रास्ता बनाना…”
6) अल-तकैया (Al-Taqiya) – चतुराई, चालाकी, चालबाजी, षडयंत्रों के जरिये
इस्लाम के विस्तार की योजनाएं बनाना। सुन्नी विद्वान इब्न कथीर की
व्याख्या के अनुसार “अल्लाह को मानने वाले”, और “नहीं मानने वाले” के बीच
कोई दोस्ती नहीं होनी चाहिए, यदि किसी कारणवश ऐसा करना भी पड़े तो वह दोस्ती
मकसद पूरा होने तक सिर्फ़ “बाहरी स्वरूप” में होनी चाहिए…। और अधिक जानिये…
(http://en.wikipedia.org/wiki/Taqiyya)
बहरहाल, तमिलनाडु के मेल्विशारम और कील्विशारम के उदाहरणों तथा इन
परिभाषाओं से आप जान ही चुके होंगे कि समूचे विश्व को “दारुल इस्लाम” बनाने
की प्रक्रिया में अर्थात एक “उम्मा” के निर्माण हेतु “अल-तकैया” एवं
“जिहाद” का उपयोग करके “दारुल-हरब” को “दारुल-इस्लाम” में कैसे परिवर्तित
किया जाता है…। फ़िलहाल आप चादर तानकर सोईये और इंतज़ार कीजिए, कि कब और कैसे
पहले आपके मोहल्ले, फ़िर आपके वार्ड, फ़िर आपकी तहसील, फ़िर आपके जिले, फ़िर
आपके संभाग, फ़िर आपके प्रदेश और अन्त में भारत को “दारुल-इस्लाम” बनाया
जाएगा…।



32 comments:
सेकुलर गद्दारों की अच्छी पोल कोली आपने सुरेश जी। लगे रहिए हमारी शुभकामनायें हमेशा आपके साथ हैं ताकि हमारा मूर्खसेकुलर हिन्दू जाग सके।
aise halat to pure desh me hai
कल कुछ हिन्दू मुझे सेक्युलरिज्म का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे थे| उन्हें ये पोस्ट ज़रूर पढ़ाऊंगा| जब तक इनके ऊपर न बीते इन्हें अक्ल नहीं आती|
जब इनके घरों के आपसी निपटारे में शरिया क़ानून चलेगा या सुबह शाम अल्लाह(?) के नेक(?) बन्दे(?) अजान की हराम करेंगे तब शायद इनकी सेक्युलारी बीमारी दूर हो|
एक बेहद चिंताजनक विषय है| इस विषय पर आपकी बारीकी से लिखी पोस्ट पढ़कर मन में बेहद क्रोध है कि हिन्दुस्थान बचा कहाँ है?
MELVISHARAM KEE VISTRIT REPORT DENE KE LIYE DHANYWAAD!!
"Respect the honoured of every faith, however diverse he may be from you" -Prophet Mohammed (SAW)
भारत की दुखती राग पर हाथ रख दी आपने हम सेकुलर बनकर देश द्रोह कर रहे है इस्लाम तो मानवता बिरोध का ही नाम है ,बहुत अच्छा लेख बहुत-बहुत धन्यवाद
आँखें खोलने वाला लेख
क्या दलित इस बात को समझेंगे
वोट बैंक के इन सेकुलर भिखारियों को पता नहीं है कि वे अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे है जब ये चेतेंगे तब तक बहुत देर हो चुकी होगी|
Suresh ji aap bhi ek aise hibdu deepak hain jo ki buzhe hue gadhe hindu diyon ki lav ko prajjwalit kar rahe hain
पहले तो धर्म के आधार पर विभाजन हुआ था, अब धर्म के आधार पर शासन होगा.
सवर्ण-पिछड़ा-दलित के नाम पर लड़ने वाले बचेंगे ही नहीं.
Congress The gang of terrorists!
Congress leader and a former minister Mr Mohamad Surti was recently convicted by the TADA court for his role in 1993 Gujarat bomb blasts. He has been sentenced for twenty years of imprisonment. Thus now when it is proved that the leaders of Congress party are involved in anti-national activities, it is time to permanently ban this party by declaring it as a terrorist organization Just to advocate the cause of Muslims the Home Minister is making the capital of Babri and Gujrat riots !
One should take lessons from Central agriculture Minister Mr Sharad Pawar and his follower Mr R. R. Patil , home minister of Maharashtra regarding how to set a campaign for maligning someone.In fact the demand to ban Sanatan Prabhat is part and parcel of their election campaign.That is exactly the reason why both of them are interested in continuing the campaign further which was originally started by Muslims to defame such Hinduttvavadi organizations like Sanatan Prabhat and Bajrang Dal in order to please the Muslims.Mr R. R. Patil who seems to be advocate of the Muslims argues that because of Babri Masjid demolition and Gujrat riots the Muslims were provoked to do bomb blasts.But such as statement of his is based more on his ignorance about the history. ( It is our luck that Mr Patil has not held Sanatan Prabhat and Sangha Pariwar responsible for the bomb blasts at America,England, Pakistan and Afganistan!)
It has been repeatedly proved that since the establishment of Islam the Muslims are at loggerheads with Hindus.The history of Partition is full of Islamic cruelty and hence the ‘secular’ politicians did not mention about it in the History Text books of India.It is likely that Mr Patil is not aware of it. The Muslims slaughtered Ten lakh Hindus during the time of Partition. They even played the demoniacal game of slitting open the abdomen of pregnant women and tossing the foetus up in air and then cathing it on the tip of spear.The Hindus residing at Pakistan and BaglaDesh became extinct. Mr Home Minister, which Babri Masjid the Hindus had demolished then?Even prior to that in the past twelve hundred years 65000 Hindu temples were demolished, crores of Hindus not willing to embrace Islam were killed and there is no account of how many thousand Rajput women committed Johar to escape from being raped.Mr Minister, were then the riots triggered by Hindus? Just think over it and tellus so that let this Maharashtra’s Holy soil of Saints come to know your true colour!
If Mr Patil feels that because of 1992 Babri Masjid demolition and 2002 Gujrat riots has lead to increase of terrorism then it is intellectual blindness.That is because the terrorism is the problem of last 30 years.In the year 1989 the Muslims of Kashmir slaughtered 93000 Kashmiri Hindus and made 450000of them homeless.For your attention The Babri masjid was well standing that time and neither there were Gujrat riots.Therefore it is requested that Mr Patil should stop supporting Muslims by making capital out of such things and should honour his chair of Home Minister!
These are only speeches as inspite of being in power the lack of evidence discourages them to put a ban!
‘ If there is ban on SIMI there should also be a ban on Bajarang Dal and Sanatan Prabhat’. Some such misleading speeches are given by this duo of Mr Pawar and Mr Patil.Why misleading ? Because one of them is in Central Ministtry while the other one is in power at State level.If they had enough evidence they would not have kept quire by this time. Infact they would have easily put a ban and would be ready for a praise from the Muslims. However the fact is that there is no such evidence which can lead to a ban on Bajarang Dal then how come they are going to find them against Sanatan Prabhat?This appears to be cunning ploy to soften the anti national attitude of fanatic Muslims by making speeches at the least to gather the sympathy of Muslims.With the persecution of Sanatan Sanstha’s seekers, Congress’ pot of 100 crimes is full!
‘Hindus ! By persecuting and subjecting Sanatan Sanstha’s seekers to unnecessary interrogation in connection with the bomb blast which you never did, the heretic Congress and the anti-terrorism squad are only adding to their heap of sins. So the Congress will be defeated at both the centre and state level in the ensuing elections. That will be followed by a grand enquiry of the Congress’ sins for the last 100 years in general and for the 61 years of independence in particular which has lead Bharat to the nadir of regression. When that happens, the Congressmen will feel like fleeing to Pakistan!’
‘Though the Congress is going to die its own death after completion of 100 sins in the ensuing elections, convass against the Congress to root it out as a part of our duty towards Hindu Dharma, that is, your wilful actions!’‘The cases of defamation shall be filed against the Congress rulers and the police in the ensuing Divine Kingdom for defaming the Sanatan Sanstha!’
Taj Mahal - A Hindu Temple-Palace By now you all know through my previous articles, the irrefutable facts and deductive logic which prove that Islam is evil right at its very foundation. It is not a religion, but a means to legalize rape, murder, loot and destruction! Given what I have shown in these previous weeks, no one should have the slightest doubt that the true followers of such a "religion" can only be called dacoits! These dacoits have looted and raped many countries, but no country can tell a bloodier tale of muslim oppression than India! The muslim dacoits started their rule over India in 712 A.D. with the invasion of Mohammed Qasem and looking at the present situation of our country it still continues on today! During their rule they looted and destroyed hundereds of thousands of Hindu temples. Aurangzeb himself destroyed 10,000 Hindu temples during his reign! Some of the larger temples were converted into mosques or other Islamic structures. Ram Janmbhoomi(at Ayodhya) and Krishna Temple(at Mathura) are just two examples. Many others exist! The most evident of such structures is Taj Mahal--a structure supposedly devoted to carnal love by the "great" moghul king Shah Jahan to his favorite wife Mumtaz Mahal. Please keep in my mind that this is the same Shah Jahan who had a harem of 5,000 women and the same Shah Jahan who had a incestuous relationship with his daughter justifing it by saying, 'a gardner has every right to taste the fruit he has planted'! Is such a person even capable of imagning such a wondrous structure as the Taj Mahal let alone be the architect of it? The answer is no. It cannot be. And it isn't as has been proven. The Taj Mahal is as much a Islamic structure as is mathematics a muslim discovery! The famous historian Shri P.N. Oak has proven that Taj Mahal is actually Tejo Mahalaya-- a shiv temple-palace. His work was published in 1965 in the book, Taj Mahal -
अद्भुत पोस्ट...सदा की तरह आँख खोलने वाला. अशेष साधुवाद चिपलूनकर जी.
meje ek baat samaj nahi aarahi ke log hindu festival ko chhod ky ku dusre event manaty hy,ye jihadi or missnory ki chal ku samaj me nahi aati,hindu o naya saal patjud me nahai aata
क्रिकेट टीम की जीत पर उत्साहित होना,
विरोधी पक्ष को जीतते देख धीरज खोना,
ये भी देशप्रेम हो सकता है, लेकिन
देशप्रेम का मूल्य प्राण है, देखें कौन चुकाता है !
देखें कौन सुमन शैय्या तज, कंटक पथ अपनाता है !!
गांधी-नेहरु के गुण गाना, बोस-सावरकर को भूल जाना,
युगों युगों पुराने भारत को सन संतालिस में "खोजा" जाना,
ये भी इतिहास हो सकता है, लेकिन
विदेशी चश्मे से लिखे इतिहास को, देखें कौन जलाता है !
देखें कौन दबी हुई सच्चाई को, फिर से सतह पर लाता है !!
घर में बीवी बच्चों की अभिलाषाएं पूरी करना,
बाहर हो रहे अन्याय का प्रतिकार करने से डरना,
ये भी प्रेम स्वरूप हो सकता है, लेकिन
मातृभूमि की ममता के ऋण को देखें कौन चुकता है !
देखें कौन प्रेयसी का पल्लू तज, माँ का आँचल अपनाता है !!
तुम चले गए तो क्या, सौ राजीव(श्री राजीव दीक्षित)यहाँ जगा गए,
देशभक्ति क्या होती है, तुम हमको सिखा गए,
प्रेरित हो तुमसे, ये लिखता हूँ,
भा रत हो कर घोर तिमित को, देखें कौन हराता है !
देखें कौन विश्व पटल पर भारत का परचम लहराता है !!
मुर्दों को प्रेरित करने को उपन्यास भी कम है,
जो जीवित हैं उनके लिए दो शब्द ही काफी हैं,
जय हिंद !
- साहिल,,आज भारत मे हर कोई हॅप्पी ख्रिसमस बोल रहा है ,ये तो वही हुआ - बेगानी शादी मे अब्दूल्ला दिवाना.त्यौहार किसी और का ,मनाए हम-लानत है ऐसे हिन्दुओं पर जो ख्रिसमस की मुबारकबाद दे रहे है., भूल गए 4 दिन पहले ही एक ""ईसाई देश रूस"" ने हमारे श्री ""मदभगवत गीता पर प्रतिबन्ध"" लगाने की बात कर चूका है...?"
सुरेश जी इतिहास से कोई भी सबक नहीं लिया है हिंदुओं ने वोटों की राजनीति इस देश के पता नहीं कितने टुकड़े करवाएगी
@Raj Ji
Bhulne waale hinduon kee sankhya jyaada hai is Hindustaan me. Naya Saal aa raha hai, unhe jashn manaane dijye. Kyon Deshprem aur Bhartiyata kee karen...
rssta kya hai ki hindu ekjut h aur in deshdrohiyo se mukabala kare. rasta bataiye, hum chalne ko taiyar hai.
1600 salon se gulam rahne ke bad bhi hindu nahi jage to itni choti(ye inke liye choti h) bat se inko kya fark padta hai
fir bhi aap lage raho !!
दोस्तो हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है और राष्ट्रिय पंछी मोर है,इसके अलावा जो राष्ट्रीय चिन्ह है उसकी जानकारी निम्न प्रकार है......
राष्ट्रीय रोबोट…मनमोहन सिंह!
राष्ट्रीय गेम चेंजर…राहुल गांधी!
राष्ट्रीय समस्या…मनीष तिवारी!
राष्ट्रीय छिछोरा…एनडी तिवारी!
राष्ट्रीय सेल्समैन…एसआरके!
राष्ट्रीय संदेशवाहक…बरखा दत्त!
राष्ट्रीय रहस्य…सोनिया गांधी!
राष्ट्रीय नतमस्तक केंद्र…दस जनपथ!
राष्ट्रीय खुजली…महेश भट्ट!
राष्ट्रीय बाम…झंडू!
राष्ट्रीय चुगलखोर…स्वामी अग्निवेश!
राष्ट्रीय स्ट्रगलर…अभिषेक बच्चन!
राष्ट्रीय दामाद… कसाब, अफज़ल गुरू और रॉबर्ट वढेरा के बीच टाई!
राष्ट्रीय कोयल…मीरा कुमार!
राष्ट्रीय पुरुष…अर्चना पूरन सिंह!
राष्ट्रीय महिला…करण जौहर!
राष्ट्रीय गहनों की दुकान…बप्पी लहरी!
राष्ट्रीय ‘बाल’ कलाकार…अनिल कपूर!
राष्ट्रीय नायिका…नरगिस फाकरी!
राष्ट्रीय गायिका…डॉली बिंद्रा!
राष्ट्रीय गर्लफ्रेंड…दीपिका पादुकोण!
राष्ट्रीय रईसज़ादा..सिद्धार्थ माल्या!
राष्ट्रीय बकता…नवजोत सिंह सिद्धू!
राष्ट्रीय गधा…दिग्विजय सिंह!
राष्ट्रीय कुत्ता …कपिल सिब्बल!
राष्ट्रीय मसखरा… लालू यादव!
राष्ट्रीय इंतज़ार…सचिन का सौंवा शतक!
राष्ट्रीय दहशत…रा वन का सीक्वल!
राष्ट्रीय गाली…आम आदमी!
राष्ट्रीय शर्म…अरूंधति राय!
राष्ट्रीय कुकर्म…शक्ति कपूर!
राष्ट्रीय ख्वाहिश…सनी लिओन!
राष्ट्रीय हाथ…सनी देओल!
राष्ट्रीय चिंता…सलमान की शादी!
राष्ट्रीय चांटा प्रदायकर्ता- हरविंदर सिंह!
राष्ट्रीय शिशु…पार्थिव पटेल!
राष्ट्रीय ‘मैं होशियार’…अरिंदम चौधरी!
राष्ट्रीय गिरगिट… अजित सिंह!
राष्ट्रीय टेडीबीयर…नितिन गडकरी!
राष्ट्रीय रथ यात्री…लालकृष्ण आडवाणी!
राष्ट्रीय आलराउंडर…अजित अगरकर!
राष्ट्रीय असंतुष्ट..मेधा पाटकर!
राष्ट्रीय भुलक्कड़…एसएम कृष्णा!
राष्ट्रीय अतिथि…हिना रब्बानी!
राष्ट्रीय स्कूल…लवली पब्लिक स्कूल!
राष्ट्रीय ढीठ…राजा चौधरी!
राष्ट्रीय पागलखाना…बिग बॉस का घऱ!
राष्ट्रीय हंसी…राहुल महाजन!
राष्ट्रीय जासूस…दया!
राष्ट्रीय भोजन – कसम!
राष्ट्रीय टाइम पास…मूंगफली!
राष्ट्रीय पक्षी…ट्विटर!
राष्ट्रीय फिल्म..राम गोपाल वर्मा की आग!
राष्ट्रीय मैगज़ीन..मनोहर कहानियां!
राष्ट्रीय किसान – अमिताभ बच्चन!
राष्ट्रीय हाथ…हरविंदर सिंह!
राष्ट्रीय गाल…शरद पवार!
राष्ट्रीय एक्सप्रेशन..LOL!
राष्ट्रीय फ्रॉड…कंडीशन्स अप्लाई*!
राष्ट्रीय दवा – संधि सुधा!
राष्ट्रीय आईटी एक्सपर्ट…विश्वबंधु गुप्ता!
राष्ट्रीय बहन-मायावती!
राष्ट्रीय मां-बहन…राखी सावंत!
अगर कोई बाकी रह गया हो तो कृपया बताईयेँ!
Adarniya Suresh ji,
Ek Surendra sagar nam ka koi admi hai, uske hindutwa ke khilaf kai lekh deta hai... kuchh kijiye..
Vandemataram Sir,
Maine aapko Varanasi Mugalsarai ke paas Dulahipur ke bare me kuchh kaha tha. Mujha baad me waha ke bare me pata chala ki ye ghatana Muharram wale di ki thi. Waha par muslim log taajiye ko Kisi naye raste se lejane ki kosis kar rahe the. To us jagah ke hindu logo ne unka virodh kiya. To bawal ho gaya. Baad me we muslim log Ikttha hokar un virodiyo ke kai gharo ko phook diye. Lekin Isbaat ko daba diya gaya. Koi aag lagene wala nahi pakara gaya. na unke upar ko karywahi hui. Ye udahar UP ka hai jaha Hamlawaro ka haat kaat dene ki baat karne wale (Varun Gandhi) par Raasuka laga Diya jata hai. Lekin Hamlawaro ko Suraksha (ab arakshan bhi) diya ja rahai.
Lekin ye sab jankaari hote huwe bh hindu seculari ka hi gaana gaate rahte hai.
Aaapk ye lekh bahut kuchh kahata hi.
Lekin kisi ne bahut sahi kaha tha Baharo ko sunane ke liye dhamaake ke jarurt hoti.
Aap ka ye lekh bhi kisi dhamake se kam nahi.
Vandemataram!
Ram ram suresh ji
Mea ish secular naam ki bhimari kaa naas karna chata hu
Plz add mea fb== hitesh rajwani sanatan
सचमुच देश की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है....
योगेश जी की टिप्पणियों में लिखी बातों पर मनन करना ठीक होगा.
इसमें नया कुछ भी नहीं है . ऐसा तो देश के हर कोने में हो रहा है. रोकेगा कौन.????? vote बैंक के लिए इन सूअरों को सर पर चढ़ा रखे हैं. रोकने जाओगे तो बिना बेल के जेल मिलेगा.
हिंदू कब जागेंगे ?
suresh ji ram-ram
aap ka har lekh mann ko jhanjor dene bala hota he/jin uprokt samasyo ka jikar aapne kiya he wo sab samasye abb pure desh me mojood he/ hindo inse mukabla karne ki jagah bhag rahe he aur nai jagahe jakar purani bimmari nahi chodte/
uttam lekh ke liy haardik shubkamnay
Vijender
वाह सुरेश जी, क्या लेख है। लगे रहिये। जय हिंद।
जय हिंद ।
स्रुरेश जी
यह बहुत अफ़सोस की बात है कि लोग मज़हब के नाम पर नफ़रत फैलाते हैं... मज़हब इंसान को जोड़ने का काम करता है, तोड़ने का नहीं...जो लोग ऐसा करते हैं, दरअसल वो मज़हब को समझते ही नहीं.
Post a Comment