Tuesday, November 1, 2011

Kulpi Police Attack, Hindu-Muslim Clashes, CPIM and TMC

24 परगना जिले में कुल्पी थाने पर हमला :- वामपंथी सेकुलरिज़्म का विकृत रूप अब उन्हीं के माथे आया…  

यह बात काफ़ी समय से बताई जा रही है और "सेकुलरों" को छोड़कर सभी जानते भी हैं कि पश्चिम बंग के 16 जिले अब मुस्लिम बहुल बन चुके हैं। इन जिलों के अन्दरूनी इलाके में "शरीयत" का राज चल निकला है। विगत 30 साल के कुशासन के दौरान वामपंथियों ने मुस्लिम चरमपंथियों की चरण-वन्दना करके उन्हें बांग्लादेश से घुसपैठ करवाने, उनके राशनकार्ड बनवाने और उनकी अवैध बस्तियों-झुग्गियों को वैध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पिछले 2-3 साल में पश्चिम बंग की आम जनता के साथ-साथ मुस्लिम भी वामपंथियों से नाराज़ हो गये, जिसका फ़ायदा ममता बैनर्जी ने उठाया और "सेकुलरिज़्म" की नई चैम्पियन बनते हुए तृणमूल कैडर के साथ, मुस्लिम चरमपंथियों को खुश करने, मदरसे-मदरसे और मस्जिद-मस्जिद जाकर चरण-चम्पी करके उन्हें अपने पक्ष में किया… इन मुस्लिम बहुल इलाकों में अब आये दिन की स्थिति यह है कि कोई "टुच्चा सा लोकल इमाम" भी सरकारी अधिकारियों को धमकाता है।


24 अक्टूबर 2011 की रात को को चौबीस परगना जिले के डायमण्ड हार्बर स्थित, कुल्पी थाने पर 3000 से अधिक मुसलमानों की भीड़ ने हमला कर दिया, BDO स्तर के अधिकारी को बंधक बनाकर रखा, कई पुलिसकर्मियों के सिर फ़ोड़ दिये एवं महिलाओं से बदतमीजी की। मामला कुछ यूँ है कि 23 अक्टूबर की रात को जेलियाबाटी गाँव में हिन्दू ग्रामीणों ने कुछ मुस्लिमों को हिन्दुओं के घरों में तोड़फ़ोड़ करते और महिलाओं को छेड़ते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। आपसी संघर्ष में दो मुस्लिम अपराधियों की मौत हो गई, जबकि तीन मुस्लिमों को ग्रामीणों ने कुल्पी पुलिस थाने के हवाले कर दिया। बस फ़िर क्या था… हजारों मुस्लिमों की हथियारों से लैस भीड़ ने कुल्पी थाने तथा स्थानीय BDO के दफ़्तर को घेरकर तोड़फ़ोड़ व आगज़नी कर दी। इस दौरान प्रशासन को रोकने के लिए, राष्ट्रीय राजमार्ग 117 को हथियारों से लैस मुस्लिमों ने रोककर रखा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस हमलावर भीड़ में तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ता भी शामिल थे।
(चित्र में :- कुल्पी थाने में घायल ASI समीर मोडक)



असल में हिन्दू-बहुल दो गाँवों उत्तर नारायणपुर एवं गोमुखबेरिया लगातार 24 परगना जिले के चरमपंथी मुस्लिमों के निशाने पर हैं। इन दोनों गाँवों की (किसी भी आयु की) महिलाओं का गाँवों से बाहर निकलना मुश्किल है, क्योंकि बाहरी क्षेत्र में अक्सर इनके साथ मुस्लिम युवक छेड़छाड़ और गालीगलौज करते हैं, परन्तु 23 अक्टूबर को बात बढ़ गई, इसलिए हिन्दुओं ने ऐसे शोहदों की धुनाई करने का फ़ैसला कर लिया, इसी दौरान दो मुस्लिमों की मौत हुई और तीन पुलिस के हवाले हुए।

इस घटना के बाद बेशर्म वामपंथियों ने (जिन्होंने पिछले 30 साल तक इन अपराधियों को पाल-पोसकर बड़ा किया) इसका राजनैतिक फ़ायदा लेने की भौण्डी कोशिश शुरु कर दी। CPI वालों ने इस हमले को राजनैतिक संघर्ष का रंग देने का प्रयास किया और आरोप लगाया कि तृणमूल कार्यकर्ताओं ने, CPIM के नेता लालमोहन सरदार के घर पर हमला किया और लूटने का प्रयास किया (जबकि यह अर्धसत्य है, खबरों के अनुसार पूर्ण सत्य यह है कि लूटने आये तीनों मुस्लिम व्यक्ति तृणमूल कार्यकर्ता जरुर थे, लेकिन उन्हें CPIM-Trinamool से कोई लेना-देना नहीं था, वे तो एक "हिन्दू नेता" को सबक सिखाने आये थे, चाहे वह जिस पार्टी का भी होता…)। परन्तु अपनी झेंप मिटाने के लिए वामपंथी इसे दूसरा रूप देने में लगे रहे, क्योंकि वे यह स्वीकार कर ही नहीं सकते थे कि जिन मुस्लिमों को उन्होंने 30 साल तक शरण देकर मजबूत बनाया, आज वही उन्हें आँखें दिखा रहे हैं। वामपंथियों को देर से अक्ल आ रही है, वह भी तब जबकि अब उनको निशाना बनाया जाने लगा है…।

यदि यह पूरा मामला राजनैतिक होता, तो आसपास के गाँवों कंदरपुर, रामनगर-गाजीपुर, कंचनीपारा, हेलियागाछी, रमजान नगर आदि से 7000 मुस्लिमों की भीड़ अचानक कैसे एकत्रित हो गई? (यदि राजनैतिक मामला होता तो हमलावरों में सभी धर्मों के लोग शामिल होते, सिर्फ़ मुस्लिम ही क्यों?), CPIM वाले यह नहीं बता सके कि यदि मामला तृणमूल-वामपंथ के बीच का है तो थाने पर हमला करने वाले लोग "नारा-ए-तकबीर…" के नारे क्यों लगा रहे थे?


धीरे-धीरे यहाँ मुस्लिम आबादी बढ़ती जा रही है, हिन्दू या तो अपनी ज़मीन-मकान छोड़कर मजदूरी करने दिल्ली-मुम्बई जा रहे हैं या मुस्लिमों को ही बेच रहे हैं। मुस्लिम चरमपंथियों द्वारा यह एक आजमाया हुआ तरीका है… और यह इसीलिए कारगर है क्योंकि "सेकुलरिज़्म" और "वामपंथ" दोनों का ही वरदहस्त इन्हें प्राप्त है…। "सेकुलर" नाम की मूर्ख कौम को यह बताने का कोई फ़ायदा नहीं है कि हिन्दू मोहल्लों से कभी भी मुस्लिम व्यक्ति अपनी सम्पत्ति औने-पौने दाम पर बेचकर नहीं भागता।

नारायणपुर-गोमुखबेरिया क्षेत्र के हिन्दुओं को पहले लाल झण्डा उठाये हुए मुस्लिमों का सामना करना पड़ता था, अब उन्हे तृणमूल के झण्डे उठाये हुए मुस्लिम अपराधियों को झेलना पड़ता है…। कुल मिलाकर इन 16 जिलों में हिन्दुओं की स्थिति बहुत विकट हो चुकी है, जहाँ-जहाँ वे संघर्ष कर सकते हैं, अपने स्तर पर कर रहे हैं…। 30 साल तक इन अपराधियों को वामपंथ से संरक्षण मिलता रहा, अब तृणमूल कांग्रेस से मिल रहा है… तो इन स्थानीय हिन्दुओं की स्थिति "दो पाटों के बीच" फ़ँसे होने जैसी है…।


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मामले की समूची पृष्ठभूमि को ढंग से समझने के लिए निम्नलिखित लिंक्स वाले लेख अवश्य पढ़ियेगा…

1) लाल झण्डे का इस्लाम प्रेम विकृत हुआ - http://blog.sureshchiplunkar.com/2010/11/muslim-appeasement-communists-kerala.html

2) पश्चिम बंग में बजरंग बली की मूर्ति प्रतिबन्धित - http://blog.sureshchiplunkar.com/2010/10/communist-secularism-and-islamic.html

3) ममता बैनर्जी का सेकुलरिज़्म - http://blog.sureshchiplunkar.com/2010/09/deganga-riots-trinamool-cpm-and-muslim.html

स्रोत :- http://bengalspotlight.blogspot.com/2011/10/kulpi-ps-attacked-muslim-criminals-took.html

17 comments:

Ratan Singh Shekhawat said...

इतिहास साक्षी है जिसने भी भस्मासुरों को पाला आखिर वे खुद ही उनके हत्थे चढ़े है| जिस तरह से मुस्लिम आब्दी बढ़ी है आने वाले दिन में न तो सीपीएम को पूछेंगे और न तृणमूल को|

Anonymous said...

HINDOO DOESN'T HAVE PROPER VISION. HE IS BOUND TO BE SLAVE AGAIN.

Anonymous said...

सुरेश जी सादर प्रणाम ,और ज़रा अहमदाबाद वाली घटना पर भी अपनी लेखनी चलायें जहां कसाइयों की भीड़ ने तोड़फोड़ की जब हिंदुओं ने गोवध का विरोध किया ...

Anonymous said...

सुरेश जी, मालेगांव विस्फोट के आरोपों में गिरफ्तार नौ आरोपियों की जमानत याचिका का एनआईए अब विरोध नहीं करेगी। गृहमंत्री पी चिदंबरम ने ये जानकारी दी है।
लेकिन जब उनसे पूछा गया कि ये लोग निर्दोष हैं तो उन्होंने कहा है कि जब तक मामले में कोई अन्य पकड़ा नहीं जाता और उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं हो जाते.. तब तक इनके बारे में निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं है।
चिदंबरम को असीमानंद के कथित कबूलनामे में हिंदू आतंकवाद की संभावना दिख रही है।

मुकुल मिश्रा said...

आज जिस घटना का जिक्र कर रहे हैं, वह कोलकाता से सता हुआ क्षेत्र है. कह सकते हैं उपनगरीय क्षेत्र. अब यदि कोलकाता से सटे गावों और कस्बों या कहें कि कोलकाता के भीतर हीं ऐसी स्थिति बन गई है तो बांग्लादेशी सीमा से सटे क्षेत्रों में क्या परिस्थिति होगी यह अकाल्पनिक है.
लेकिन एक बात मैं साफ़ कर दूँ, इस लतखोरी के लिए ये लोग स्वयं ही जिम्मेवार हैं. जिन क्षेत्रों में ये घटनाये घाट रही हैं,वहाँ पूर्वी बंगाल अर्थात बंगलादेशी हिंदुओं की संख्या निर्णायक है. ये पहले हीं इन मुसलमानों से लात खाकर इस पार आये हैं. क्या इन्हें ये समझ नहीं थी कि इस पार आकार इन कुत्तों कि पूंछ सीधी नहीं होगी और पश्चिम बंगाल को भी वे दारुल-उल-इस्लाम बना कर हीं छोरेंगे.
विवेकानंद, अरविंदो घोष और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के भूमि को, वामपंथियों ने कैसे नपुंसक बनाया यह शोध का विषय है. विस्तार से फिर कभी.

दिवाकर मणि said...

इस भयावह स्थिति को समझने के लिए तस्लीमा का लिखा "लज्जा" उपन्यास पढ़ने लायक है। देश के दोगले नेताओं को इससे कोई मतलब नहीं कि देश का भविष्य क्या होने वाला है, उन्हें तो सिर्फ़ वर्तमान में कुर्सी पर आसीन रहने से मतलब है। विश्व का हर छठा जहां भारत से है, और इस बात पर अपनी चिंता से जहां संयुक्त राष्ट्र ने भारत को अवगत करा दिया है, फिर भी देश के लादेन के वंशजों की प्रेमी खानग्रेसी सरकार और अन्य मुलायम सरीखे नाजायज पैदाइश वाले नेताओं को इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। इनका बस चले तो अल्लाह के फ़जल वाले "हम पांच और हमारे पच्चीस" वालों के लिए अपना तशरीफ़ ही बिछा दें।

इन सभी लादेन-बाबर-तैमूर के नाजायज संतानों के लिए तो बस @%$$765*^*&^&*^#@#%#^%R^&%%^% यही मुंह से निकल रहा है...

पवन said...

कल मेरे दो मित्र मुझसे बहुत बहस कर रहे थे कि मुस्लिमों के साथ संघ ऐसा क्यों करता है, वैसा क्यों करता है ? क्यों मोदी ने मुसलमानों को मरवाया? आदि आदि |

तब मैंने बहुत चिंतन किया की भारत के दुश्मनों से निबटने की क्षमता देशभक्तों में है पर ये दिमाग से खाली सेकुलर से कैसे निबटा जाए ? जब तक ऐसे सेकुलरों से निबटने का उपाय नहीं सूझता, तब तक हिन्दू इन परिस्थितियों को झेलने के लिए अभिशप्त है |

मेरे वे दो मित्र है-
https://www.facebook.com/nahakprabhakar
https://www.facebook.com/luvdbyhatd

सुलभ said...

पं.बंगाल के आकड़े चौंकाने वाले हैं. फिर भी वोटबैंक की राजनीति जारी है.

सुलभ said...

LOG TO TAB HEE SAMJHENGE JAB UNKE APNE GHAR JALENGE. CHETAWANI KA ASAR BAHUT KAM HOTA HAI (VISHESH KAR APNE HINDUSTAAN ME)

dinesh kumar said...

jab tak congress sarkar me hai ye to hona hi hai

Rajesh said...

Nameste Suresh Ji. Aapne bahut acha likha hai. Is desh ke hinduo yehi sathithi chal rahi hai. Agar ham apne hinduo se ye kahta hai ki ham sabne milkar is desh ko bachana hai. To ve kahte hai hame kya jarurat hai. Aur uske bad baat aati hai Jat-pat ki. Jat-pat ke naam par sbhi hindu ek dusre ke dushman bahe hue hai. Aur uske bad baat aati hai bhin-bhin bhagwano aur bhin-bhin devi-devtao mein bata hua hindu. Jab tak unki ye trutiya door nahi hogi. Hindu kabhi nahi ek hoga. Aapka lekh Avishmarinya hai. Aur ek bat aur ki ek aapki tarah hi B.N. Sharma ji blog likte hai. Lekin unki ab vo website chal nahi rahi hai. Mein jab unki website Bhandafodu.blogspot.com open karta hoo to likha aa jata hai ki Blogs not found. Isiliye aapse niwedan hai ki Unki website ke band hone ke karno ka pata chale to Jaroor Bataye. Dhanywad.

Anonymous said...

Suresh ji ram-ram
Suresh ji y Islam ke pujari kissi ke sage nahi hote,na un padosiyo ke jo dukh sukh me inka saat dete he, na un poltical partyio k jo inko khad panni dekar palti posti he/(appbad chodkar)In logoo ke liye islam ko manne bala inka sagga he fir wo chahe kitna bhi galat kiyo na ho/ isska taja udaharan Afghanistan k rasthpati Kargai he jinno ne Zio T.V. Per kaha ki yadi Pakistan ka kissi bhi desh(Bharat Bhi)se yud hotta he to wo pakistan ka saat dege kiyoki pakistan unka chotta bhai jesa he/ jabki wha paisa aur manpower bharat lagga raha he/

Vijender

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

स्थिति भयंकर है| जब कोलकाता शहर के आस पास यह हाल है तो बांग्लादेश से सटी बंगाल सीमा पर क्या हो रहा होगा, इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं है|
आश्चर्य है कि अब कोई सबसे तेज़ चैनल यह माजरा नहीं दिखा रहा| गुजरात वाली घटना को दस साल होने को हैं किन्तु अब भी सेक्युलर चैनलों ने मोदी जी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है|
मेरे आस पास बहुत से सेक्युलर हिन्दू हैं| सेक्युलर शब्द पर बड़ा गर्व है उन्हें| इश्वर न करे किन्तु पता नहीं उस समय इस गर्व को कहाँ घुसेड़ेंगे जब पश्चिम बंग जैसे हालात राजस्थान में हो जाएं| यहाँ भी गहलोत ने एडी चोटी का जोर लगा रखा है|

Raj said...

muje ye samaj nahi aaraha kub hindu jagy gy kya shila ki jawani or muni badnam ke song pe nachty rahy gy taki kafi der hojaye,kuchh jordar step uthna hoga

Unknown said...

abe oye anonymous,tujhe godhara kand ke baare mat bol,pahle suaat ksine ki thi ye bata,1000-2000 mullo ne jab hinduo ko jlaya tab kuch ni aur saja kitno ko mili sirf 7-8 ko fanshi hui,to kya in 7-8 logo ne milke 3 dabbe jala diye....aur ek baat koi bhi aag me kitni jaldi badal jati hai,tujhe achche se malum hoga....koi baat bolne se pahle uske suaat ko jaan samajha...jab mulle maro to kuch ni aur usi ka javab diya jaye to bahot bura.....

Unknown said...

1 more thing A great sentenced by PAKISTANI WRItTEr,JOURNALISt HAMID NISAR --who is fighting 4 pakistani people and try to awake to paksitani people from wrong direction of some provoking politics,people from last 14 yrs..he said 'ALL MUSLIM WORLD PLAYED WITH HISTORY,THAT's WHY NOW HISTORY IS PLAYING WITH ISLAM AND MUSLIM WORLD'...u can see very easily what is condition of MUSLIM IN WHOLE WORLD....& about bangladeshi MUSLIM they r doing wrong,& history will teach to them in future in dirty picture ..

Anonymous said...

This is not only one case. Hundred of cases happened till date. Just before Deganga, Barasat, West Bengal case happened and regular Bengalies are suffer anti Hindu riots in West Bengal. 3 milions Bengali Hindus suffered and come to India. Then why Bengalis support CPI(M) & TMC (Mamta)???? Why not support to BJP, RSS, VHP, Bajrag dal???? Then who are faulty for this problem? Bengalies itself. After all this they still support CPM & TMC not to BJP and RSS. So how can others help them without their own support????