Thursday, November 17, 2011

Dubai Port World Kochi, Red Sander Smuggling and Anti- National Activities


रक्त चन्दन तस्करी, दुबई पोर्ट वर्ल्ड की सांठगांठ और SEZ एवं बंदरगाहों की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह… 

भारत सरकार की सब कुछ निजी हाथों में बेचो की नीति(?) के तहत कोच्चि बंदरगाह पर दुबई पोर्ट वर्ल्ड (DPW) नामक एक निजी कम्पनी, अंतरराष्ट्रीय कंटेनर टर्मिनल चलाती है। बंदरगाहों जैसे नाज़ुक सुरक्षा स्थानों पर देश के साथ कैसा खिलवाड़ किया जा रहा है, यह पिछले कुछ दिनों में कोच्चि बंदरगाह की घटनाओं से साफ़ हो जाता है। देशद्रोहियों एवं तस्करों की आपसी सांठगांठ को दुबई पोर्ट वर्ल्ड जैसी कम्पनियाँ अपना मूक या अंदरखाने सक्रिय समर्थन दे रही हैं।

मामला कुछ यूँ है कि खुफ़िया राजस्व निदेशालय (Directorate of Revenue Intelligence DRI) ने कुछ दिनों पहले दुबई पोर्ट वर्ल्ड (Dubai Port World) द्वारा नियंत्रित एवं संचालित कोच्चि बंदरगाह पर छापा मारा एवं रक्तचन्दन की बेहद महंगी लकड़ियों से भरा एक कंटेनर जब्त किया, जिसकी कीमत करोड़ों रुपए है। DRI के अधिकारियों ने पाया कि इस चन्दन तस्करी के पीछे एक पूरा तंत्र काम कर रहा है जिसे आंध्रप्रदेश में कार्यरत माओवादियों का भी सक्रिय समर्थन हासिल है।

(चित्र :- दुबई पोर्ट वर्ल्ड के कोच्चि टर्मिनल उदघाटन का) 

जब DRI अधिकारियों ने इस मामले में सबूत जुटाने शुरु किए तो उन्हें पता चला कि इस चन्दन तस्करी गैंग के प्रमुख कर्ताधर्ता कन्नूर निवासी शफ़ीक एवं चेन्नई निवासी शाहुल हमीद हैं, जो कि दुबई में रहते हैं और वहीं से इस रैकेट को संचालित करते हैं। आंध्रप्रदेश और कर्नाटक के जंगलों से रक्त चन्दन के बहुमूल्य पेड़ों को काटकर इसे दुबई पोर्ट वर्ल्ड के बंदरगाह द्वारा दुबई पहुँचाया जाता रहा है, जहाँ से शफ़ीक और हमीद इसे हांगकांग एवं चीन भेज देते हैं, जहाँ महंगे फ़र्नीचरों तथा बहुमूल्य वाद्य यंत्रों के निर्माण में इस लकड़ी का प्रयोग किया जाता है। DRI की जाँच में पता चला है कि यह एक अंतर्राष्ट्रीय गैंग है जिसके तार केरल, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, दुबई व चीन तक फ़ैले हुए हैं। DRI ने इस मामले में इंटरपोल की मदद भी माँगी है, ताकि शफ़ीक एवं हमीद को भारत लाया जा सके।

समूचे मामले का भण्डाफ़ोड़ उस समय हुआ जब DRI के अधिकारियों ने शक के आधार पर पलक्कड निवासी अनिल कुमार के एक कण्टेनर को पकड़ा जिसे रबर की चटाईयों के नाम पर देश के बाहर भेजा जा रहा था, जबकि उसमें रक्त चन्दन की लकड़ियाँ भरी पड़ी थीं। इसके बाद राजस्व अधिकारियों के कान खड़े हुए और उन्होंने तत्काल एक अन्य कंटेनरों में भरी 17 टन लकड़ियाँ (मूल्य ढाई करोड़) तथा एक अन्य कण्टेनर में 10 टन लकड़ियाँ जब्त कीं, मजे की बात यह है कि दुबई पोर्ट वर्ल्ड के कर्मचारियों द्वारा इन कण्टेनरों को रबर चटाई कंटेनर कहकर कस्टम से पास कर दिया गया था। पूछताछ में अनिल कुमार ने बताया कि उसे यह लकड़ियाँ कडप्पा और चित्तूर से प्राप्त हुई हैं, यह इलाका नक्सलियों का गढ़ माना जाता है, जहाँ उनकी मर्जी के बिना कोई भी ट्रक न बाहर जा सकता है, न अन्दर आ सकता है। अब DRI के खुफ़िया अधिकारी इसकी जाँच कर रहे हैं कि रक्त चन्दन की तस्करी की आड़ में नक्सली सिर्फ़ करोड़ों रुपया कमाने में लगे हैं अथवा इनकी सांठगांठ दुबई स्थित डी-कम्पनी से भी है और दुबई पोर्ट वर्ल्ड कम्पनी तथा SEZ की आड़ में नक्सली हथियार भी प्राप्त कर रहे हैं।

जिस प्रकार छत्तीसगढ़, झारखण्ड जैसे राज्यों में नक्सलियों की आय बॉक्साइट एवं अयस्क खदान ठेकेदारों से वसूली द्वारा होती है, उसी प्रकार आंध्रप्रदेश में नक्सलियों की आय लकड़ी तस्करों एवं रेड्डी बंधुओं जैसे महाकाय खनिज माफ़िया से चौथ वसूली के जरिये होती है, वरना 2-2 लाख रुपये में मिलने वाली AK-47 जैसे महंगे हथियार उन्हें कहाँ से मिलेंगे, चीन और पाकिस्तान भी नक्सलियों को फ़ोकट में हथियार कब तक देंगे? वीरप्पन की मौत के बाद रक्त चन्दन तस्करी पर माफ़िया एवं नक्सलियों का कब्जा हो रहा है।

इस घटना से यह स्पष्ट हुआ है कि वल्लारपदम (कोच्चि) स्थित एवं दुबई पोर्ट वर्ल्ड कम्पनी द्वारा संचालित यह बंदरगाह अंतर्राष्ट्रीय तस्करों, नक्सलियों एवं अवैध व्यापार करने वालों का स्वर्ग बन चुका है। सबसे खतरनाक बात यह है कि SEZ के नाम पर इस कम्पनी को विशेषाधिकार(?) प्राप्त हैं, तथा बंदरगाह के अधिकांश इलाके में कस्टम विभाग, DRI अधिकारियों एवं भारत सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। दुबई पोर्ट वर्ल्ड कम्पनी, पहले भी एक-दो बार कस्टम अधिकारियों को उनके इलाके(?) से दुत्कार कर भगा चुकी है। इसके बाद यह तय किया गया कि दुबई पोर्ट वर्ल्ड द्वारा जहाजों पर लादे जाने वाले माल एवं सभी कण्टेनरों की जाँच कस्टम विभाग इस बंदरगाह से कुछ किलोमीटर दूर स्थित विलिंग़डन द्वीप पर करेगा, एक बार यह जाँच पूरी होने के बाद कस्टम एवं DRI का इस पर कोई नियंत्रण नहीं होता। सब कुछ बेचो नीति के तहत भारत सरकार इस अपमानजनक स्थिति में फ़ँसी हुई है, जबकि उस विलिंग़डन द्वीप से लेकर दुबई पोर्ट वर्ल्ड संचालित बंदरगाह तक बीच के चन्द किलोमीटर के रास्ते में तस्कर और अंतर्राष्ट्रीय अपराधी अपना खेल कर जाते हैं, और या तो पूरा का पूरा कण्टेनर ही बदल देते हैं या कण्टेनर के अन्दर का माल रबर चटाई की जगह रक्त चन्दन मे बदल जाता है।

दुबई पोर्ट वर्ल्ड कम्पनी के प्रवक्ता का कहना है कि हमारा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है, हमारी अपनी सुरक्षा व्यवस्था(?) है जो पूरी तरह चाक-चौबन्द है। यदि भारत सरकार एवं कस्टम अधिकारियों को कोई शिकायत है तो वे नियमों में परिवर्तन करके पूरे बंदरगाह की स्थायी सुरक्षा केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को सौंप सकते हैं।

केरल में काम कर रहे इस्लामी जिहादियों तथा अपराधियों के खाड़ी देशों से काफ़ी पुराने मधुर सम्बन्ध हैं, ऐसे में अल्लाह ही जानता है कि दुबई पोर्ट वर्ल्ड कम्पनी के इस बंदरगाह से न जाने किस कण्टेनर में कौन सा माल आया और कौन सा माल भारत से बाहर गया। जैसा कि कई रिपोर्टों में बताया जा चुका है, केरल में मलप्पुरम नामक एक मुस्लिम बहुल जिला है, जहाँ केरल सरकार और पुलिस की औकात दो कौड़ी की भी नहीं है, वहाँ समानांतर इस्लामी शरीयत सरकार चलती है। ऐसा बताया जाता है कि मलप्पुरम, कासरगौड़, कन्नूर जिलों के अन्दरूनी इलाके में डी-कम्पनी द्वारा भारी मात्रा में पाकिस्तानी करेंसी खपाई गई है तथा गुटों के आपसी लेनदेन में इस करेंसी को स्वीकार भी किया जाता है। लगता है कि अब धीरे-धीरे हम कासरगौड जिले से लेकर त्रिवेन्द्रम तक समूचे समुद्री तट पर एक अन्य समानान्तर व्यवस्था कायम कर देंगे, जिसे संचालित करने वाली दुबई पोर्ट वर्ल्ड जैसी कम्पनियाँ होंगी, जिन पर खुली अर्थव्यवस्था एवं SEZ के नियमों के कारण भारत सरकार का नहीं, बल्कि खाड़ी देशों के अपराधियों का नियंत्रण होगा।
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स्रोत :-
http://www.deccanchronicle.com/channels/cities/kochi/red-sanders-worth-crore-seized-revenue-officials-745
http://www.haindavakeralam.com/HKPage.aspx?PageID=14942&SKIN=B
http://www.haindavakeralam.com/HKPage.aspx?PageID=14927&SKIN=B

14 comments:

Raj Mittal said...

बहुत ही शर्मनाक बात है ये हमारे देश और इसकी निकम्मी सरकार के लिए |
जब,
हर डाल पे उल्लू बैठा हो तो
अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा |

संजय @ मो सम कौन ? said...

हम नहीं सुधरेंगे। देश के साथ कुछ हो, देशवासियों के साथ कुछ हो लेकिन हमें अपने स्वार्थ के आगे कुछ नहीं दिखेगा।
वोटों और नोटॊं की हवस जो न कराये थोड़ा है।

Man said...

वन्देमातरम सर

सीमा सुरक्षा चाहे वो जलीय हो या थलीय भारतीय महादीप की कमजोरी ही रही हे एतिहासिक काल से ही इसी का फायदा देशद्रोही और जिहादी उठाते आये हे |और उस पर कांग्रेस जेसी सेकुलर सरकार हो तो इनकी पो बाहरे हो जाती हे |देश की सुरक्षा और शांति के लिए आजादी के बाद ही नेहरु की क्या नीति रही थी इस बात से स्पष्ट हो जाता हे |
आदतन विदेशी स्त्रियों का रसिया नेहरु कितना अदूरदर्शी और स्वप्न लोक में खोये रहने वाला अवसरवादी व्यक्ती था इस वाकये से पता चल जाता हे____________________देश की स्वतन्त्रता के पश्चात् भारत की तीनो सेनावो के प्रमुख प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के पास गये और सेना की आगामी दस वर्ष की आवश्यकता उस के समक्ष रखी !!@मेजर जनरल ""अजीत रूद्र "" के अनुसार इस ओरत रसिया पि.एम ने कहा की ;;;;की हमें सेना की क्या आवश्यकता हे ,क्योकि हमें किसी पर आक्रमण नहीं करना हे |सेना को भंग कर दो |आंतरिक व्यवस्था हम पुलिस के बल बूते पर संभल लेंगे |"" ये सुन कर तीनो सेना नायक हतप्रभ रह गये |
शीघ्र ही पाकिस्तान के कश्मीर पर आक्रमण के कारण सेना भंग होने से बच गयी |
इस सरकार की सब कुछ बेचो नीति इतनी जिम्मेदार नही जितनी इनकी "'जिहादी ताकतों को अनदेखा करने की और उन्हें बढ़ावा देने की नीति हे |बंगलादेश से इनके जमाई भाइयो का निर्बाध आगमन जगजाहीर हे |पाकिस्तानी समर्थित जिहादियो को ये वाया दुबई और खाड़ी देशो के "'जंवारी "'दे कर उपकृत करते हे |

जितेन्द्र सिंह : राष्ट्रवादी भारतीय... said...

लूट मची है.. चारों तरफ... हर कोई मौका तलाश रहा है लूट का.. चाहे फिर देश भाड़ में जाये या ईमान आग में.. कोई फर्क नहीं पड़ता इन बेईमान, बेगैरत देशद्रोहियों को... दिल्ली में बैठे 'जय चंद' इसके लिए प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेवार हैं... लेकिन किसे कहें.?? सब 'एक बेल के तूमड़े' हैं...
अति-प्रशंसनीय लेख सुरेश जी... आपका हार्दिक धन्यवाद... इस तरह के सत्य को उजागर करने के लिए..
वन्दे मातरम...
जय हिंद.. जय भारत...

Raj said...

ye sab lato ke bhut hy jabtak lat nahi padegi tab tak nahi sudhrne waly or rahibaat मलप्पुरम, कासरगौड़, कन्नूर जिलों के अन्दरूनी इलाके ki to use army ko dedo ya kasmir me jo kanun hy Armed Forces Special Powers Act(afspa)vo laga ke search operation suru karo or sab terorist ko khatam karo encounter my

Anonymous said...

यदि "हिन्दू" नहीं चेते तो पूरे देश का यही हाल होने वाला है. ऐसे ही स्यूडो सेकुलर ही सब गड़बड़ किये हैं.

तरुण भारतीय said...

जी बिलकुल सत्य बात है कि हर शाख पे उलू बैठा है ....

संजय बेंगाणी said...

अवैध कारोबार अपने रास्ते बना ही लेता है. सभ्य सरकारों को व्यापक हितों में उन पर लगाम लगानी होती है. जहाँ जहाँ रिसाव है वहाँ नट-बोल्ट कसने की जरूरत है. समस्या तब होती है जब वैध तंत्र अवैध को संरक्षण देने लगे.

श्रीयंत्र said...

जब भी इस प्रकार की घटना होती है तो पता चलता है कि देशद्रोही शक्तियां द्वारा देश के कानून व सत्ताधारियों के खुलेपन का लाभ लेकर राष्ट्र को ही नहीं कमजोर किया जा रहा अपितु समानान्तर राष्ट्र को पनपाने के कार्य को किस प्रकार शक्तिशाली किया जा रहा है। इनकी तुलना सामान्य वैयक्तिक भ्रष्ट व्यक्ति या कंपनी से की जाती है और सामान्य भ्रष्टाचार के अंतर्गत इन्हें शामिल कर "सभी भ्रष्ट हैं" कहकर बचाव किया जाता है। इसका दूसरा प्रभाव यह है कि रोजगार तथा अर्थव्यवस्था के साथ "दीन" की सत्ता स्थापित होने व इस्लामिक बैंक द्वारा राष्ट्रीय बैंकों को दरकिनार करने स्वयं की शैक्षणिक संस्थाएं चलाने और राष्ट्रीय व दीनी राजनीति, सामाजिक नीति व अर्थव्यवस्था में प्रभावी स्थान बनाने में सुविधा हती है। केरल से हाइकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में जजों के नामन में यह स्पष्ट दिखाई दिया है। यही कारण है कि 55 प्रतिशत केरल के हिंदुओं की जमाएं 9 प्रतिशत रह गई हैं व सरकार, शिक्षा तंत्र, जमीन तथा व्यापार में वे बेहद पिछड़ चुके हैं तथा वामपंथी व दलित राजनीति के प्रभाव से धर्मांतरण की समस्या से भी जूझ रहे हैं। ऐसी स्थिति में सही रणनीति व राजनीतिक जागरण वहां तो अनिवर्चनीय है ही साथ ही अन्य नक्सली समस्या प्रभावित राज्यों में सामाजिक नैतिक जागरण सही आर्थिक नीतियों से करना अनिवार्य है अन्यथा इस बार विभाजन नीचे से ऊपर होना दृष्टव्य है।

MKPandey said...

Mera to dimag hi kaam nahi kar raha hai ki in kute Psedo-Secular ki aulad ko kya kare? Jinhe kuchh dikhai nahi deta. Ye haramkhor log to hamare desh ko bech ke kha jayenge.

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

बहुत गहरी बात कही हिया आपने|
निजी हाथो में देश के संसाधनों को बेचना क्या सीधा सीधा देश बेचना नहीं है? और कोई विदेशी व्यापारी (विशेषकर मुल्ले देशों का) क्या अपने व्यापार के साथ साथ भारत की सेवा कैगा| बल्कि वह तो व्यापार की आड़ में देश में आतंकवाद को ही प्रोत्साहन देगा|

Rahul Agrawal said...

kamal ki baat to ye bhi hai ki suresh bhai ke alawa ye baat abhi tak kahin bhi aur kisi bhi media ke dwara nahi dikhayi gayi hai ................... kya kahain ise ................media ka dogla pan

राहुल पंडित said...

कुछ हाँथ से उसके फिसल गया,
वह पलक झपक कर निकल गया.
फिर लाश बिछ गई लाखो की,
सब पलक झपक कर बदल गया,
जब रिश्ते राख में बदल गए,
इंसानों का दिल दहल गया,
में पूँछ पूँछ कर हार गया,
क्यों मेरा भारत बदल गया,
जय हिंद जय माँ भारती .

ePandit said...

भारत में कई मिनी पाकिस्तान हैं जहाँ भारत का नहीं बल्कि शरियत कानून चलता है। सरकार इस ओर से आँखें मूँदे हुये है।