Sunday, November 27, 2011

Conversion in Kashmir, Islam and Conversion, Missionary Activity in India


ईसाई धर्मांतरण को रोकने का इस्लामी तरीका… हिन्दुओं के बस की बात नहीं ये… (सन्दर्भ - कश्मीर में धर्मान्तरण)

घटना इस प्रकार है कि, कुछ समय पहले श्रीनगर स्थित चर्च के रेव्हरेंड (चन्द्रमणि खन्ना) यानी सीएम खन्ना(?) (नाम पढ़कर चौंकिये नहीं… ऐसे कई हिन्दू नामधारी फ़र्जी ईसाई हमारे-आपके बीच मौजूद हैं) ने घाटी के सात मुस्लिम युवकों को बहला-फ़ुसलाकर उन्हें इस्लाम छोड़, ईसाई धर्म अपनाने हेतु राजी कर लिया। जब यह मामला खुल गया, तो 19 नवम्बर को रेव्हरेण्ड खन्ना को श्रीनगर स्थित मुख्य मुफ़्ती बशीरुद्दीन ने खन्ना को शरीयत कोर्ट(?) में जवाब-तलब के लिए बुलवाया। खन्ना साहब से चार घण्टे तक पूछताछ(?) की गई। उन सभी सात मुस्लिम युवकों की पुलिस ने जमकर पिटाई की, जिन्होंने ईसाई धर्म स्वीकार किया था, फ़िर उन युवकों से रेव्हरेण्ड खन्ना के खिलाफ़ कबूलनामा लिखवा लिया गया कि उसने पैसों का लालच देकर उन्हें ईसाई धर्म के प्रति बरगलाया (यही सच भी था)।(Know more about Shariah Court... http://expressbuzz.com/opinion/columnists/sharia-courts-rule-in-jk-secularists-keep-mum/337356.html)

इतना सब हो चुकने के बाद राज्य की धर्मनिरपेक्ष सरकार ने अपना रोल प्रारम्भ किया। बशीरुद्दीन की धमकी(?) के बाद सबसे पहले तो रेव्हरेण्ड खन्ना को गिरफ़्तार किया गया…। चूंकि गुजरात, तमिलनाडु, मध्य्रप्रदेश की तरह जम्मू-कश्मीर में धर्मान्तरण विरोधी कानून नहीं है (क्योंकि कभी सोचा ही नहीं था, कि मुस्लिम बहुल इलाके में कोई पादरी इतनी हिम्मत करेगा), इसलिये अब उस पर 153A तथा 295A की धाराएं लगाई गईं अर्थात धार्मिक वैमनस्यता फ़ैलाने, नस्लवाद भड़काने और अशांति फ़ैलाने की, ताकि चन्द्रमणि खन्ना को आसानी से छुटकारा न मिल सके… क्योंकि उसने इस्लाम के अनुसार मुस्लिमों का धर्म परिवर्तन करवा कर सिर्फ़ अपराध नहीं बल्कि पाप किया था। मौलाना बशीरुद्दीन ने कहा है कि शरीयत अपना काम करेगी, और सरकार को अपना काम करना होगा…, यह एक गम्भीर मसला है और इस्लाम में इससे निपटने के कई तरीके हैं। 

इन मुस्लिम युवकों के धर्मान्तरण की वीडियो क्लिप यू-ट्यूब पर आने के बाद पादरी खन्ना और वेटिकन के खिलाफ़ घृणा संदेशों की मानो बाढ़ सी आ गई, जिसमें वादा किया गया है कि यदि खन्ना को उचित सजा नहीं मिली तो कश्मीर से मिशनरियों के सभी स्कूल, इमारतें और चर्च इत्यादि जला दिए जाएंगे… मजे की बात यह है कि धमकी भरे ईमेल कश्मीर के साथ-साथ पाकिस्तान से भी भेजे जा रहे हैं। 

समूचे मामले का तीन तरह से विश्लेषण किया जा सकता है, और तीनों ही विश्लेषण तीन विभिन्न समूहों को पूरी तरह बेनकाब करते हैं…

1) सबसे पहले बेनकाब होते हैं तमाम ईसाई संगठन तथा सजन जॉर्ज एवं जॉन दयाल जैसे स्वघोषित ईसाई बुद्धिजीवी… (लेकिन असलियत में धर्मान्तरण के समर्थक घोर एवेंजेलिस्ट)। भाजपा शासित राज्यों सहित पूरे देश में मिशनरी गतिविधियों के जरिये दनदनाते हुए दलितों-आदिवासियों और गरीब हिन्दुओं को ईसाई धर्म में खींचने-लपेटने में लगे हुए ईसाई संगठन, कश्मीर के इस मसले पर शुरुआत में तो चुप्पी साध गये, फ़िर धीमे-धीमे सुरों में इन्होंने विरोध शुरु किया। प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति और सोनिया गाँधी के समक्ष, धर्मान्तरण की गतिविधि संविधान सम्मत है…, कश्मीर में जो हुआ वह गलत और असंवैधानिक तथा धार्मिक स्वतन्त्रता का हनन है… तथा कश्मीर के तालिबानीकरण पर चिंता जताते हैं… जैसे वाक्यों और घोषणाओं से शिकायत करते रहे। लेकिन इस्लामिक मामलों में और खासकर कश्मीर के मामले में प्रधानमंत्री की क्या औकात है कि वे कुछ करें… सो कुछ नहीं हुआ। फ़िलहाल डायोसीज़ चर्च और वेटिकन के उच्चाधिकारी रेव्हरेण्ड खन्ना के साथ हुए सलूक पर सिर्फ़ प्रलाप भर कर रहे हैं, कुछ कर सकने की उनकी न तो हिम्मत है और न ही औकात…। यह बात पहले भी केरल में साबित हो चुकी है, जब एक ईसाई प्रोफ़ेसर का हाथ, कुछ इस्लामिक पागलों ने काट दिया था… तब भी भारतीय चर्च, हिन्दुओं को सरेआम ईसाई बनाते एवेंजेलिस्ट और वेटिकन के सारे गुर्गे, सिमी द्वारा संचालित इस्लामी जेहाद के सामने दुम दबाकर घर बैठ गये थे…। तात्पर्य यह कि ईसाई संगठनों द्वारा किये जाने वाले धर्मान्तरण सम्बन्धी सारे संवैधानिक अधिकार(?) और दादागिरी सिर्फ़ हिन्दुओं पर ही चलती है, जैसे ही कोई इस्लामी जेहादी इन्हें इनकी औकात बताता है तो ये चुप्पी साध लेते हैं या मन मसोसकर रह जाते हैं…

पता कीजिये कि गरीबों की सेवा(?)  के नाम पर चल रही कितनी मिशनरियाँ, मुस्लिम बहुल इलाके में अपना कामकाज कर रही हैं?  क्या मुसलमानों में गरीबी नहीं है? तो फ़िर मिशनरी संस्थाओं को "सेवा" के लिए दलित-आदिवासी बस्तियाँ ही क्यों मिलती हैं?

2) इस घटना से इस्लाम के तथाकथित स्वयंभू ठेकेदार भी बेनकाब होते हैं, क्योंकि जहाँ एक तरफ़ उन गरीब मुस्लिम नौजवानों (जो पैसे के लालच में ईसाई बने), उन पर फ़िलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जा रही, जबकि रेव्हरेण्ड खन्ना को रगड़ा जा रहा है। इसी प्रकार इस्लाम की अजब-गजब परिभाषाओं के अनुसार जो भी व्यक्ति पवित्र इस्लाम में प्रवेश करता है, उसका स्वागत है… इसमें आने वाले और लाने वाले दोनों को ईनाम दिया जाता है (जैसा कि लव-जेहाद के कई मामलों में कर्नाटक व केरल पुलिस ने पाया है कि मुस्लिम लड़कों को हिन्दू लड़की फ़ँसा कर लाने पर दो-दो लाख रुपये तक दिये गये हैं)। वहीं दूसरी ओर, पाखण्ड की इन्तेहा यह है कि बशीरुद्दीन साहब फ़रमाते हैं कि इस्लाम छोड़कर जाना गुनाह-ए-अज़ीम (महापाप) है…। यानी इस्लाम में आने वाले को ईनाम और इस्लाम छोड़कर जाने वाले को कठोर दण्ड… यह है शांति का धर्म (Religion of Peace)?

3) बेनकाब होने की श्रृंखला में तीसरा नम्बर आता है, हमारे सुपर ढोंगी सेकुलरों और वामपंथी बुद्धिजीवियों(?) का…। पाठकों को याद होंगे दो मामले, पहला कोलकाता के रिज़वानुर रहमान और उद्योगपति अशोक तोडी की लड़की का प्रेम प्रसंग (Search - Ashok Todi and Rizvanur Rehman Case) एवं कश्मीर में अमीना और रजनीश का प्रेम प्रसंग (Search - Ameena and Rajneesh Love story of Kashmir)। झोला छाप वामपंथी बुद्धिजीवियों एवं पाखण्ड से लबरेज धर्मनिरपेक्षों ने रिज़वानुर रहमान की हत्या पर कैसा रुदालीगान किया था, जबकि कश्मीर में इस्लामी उग्रवादियों द्वारा रजनीश की हत्या पर चुप्पी साध ली थी…। ये लोग ऐसे ही गिरे हुए होते हैं, उदाहरण - गोधरा ट्रेन जलाने पर कपड़ा-फ़ाड़ चिल्लाना, लेकिन मुम्बई की राधाबाई चाल में हिन्दुओं को जलाने पर चुप्पी…, फ़िलीस्तीन के मुसलमानों के लिये बुक्का फ़ाड़कर रोना, लेकिन कश्मीरी पण्डितों के मामले में चुप्पी…, गुजरात के दंगों को नरसंहार बताना, लेकिन सिखों के नरसंहार के बावजूद कांग्रेस की गोद में बैठना इत्यादि-इत्यादि। इनका ऐन यही रवैया, कश्मीर के इस धर्मान्तरण मामले को लेकर भी रहा… आए दिन भाजपा-संघ को अनुशासन, संविधान, अल्पसंख्यकों के अधिकारों आदि पर भाषण पिलाने वाले महेश भट्ट, शबाना आज़मी और तीस्ता नुमा सारे बुद्धिजीवी अपनी-अपनी खोल के अन्दर दुबक गये…। किसी ने भी बशीरुद्दीन और उमर अब्दुल्ला सरकार को पाठ पढ़ाने की कोशिश नहीं की, क्योंकि उन्हें मालूम है कि यदि वे इस्लाम के खिलाफ़ एक शब्द भी बोलेंगे तो उनका पिछवाड़ा लाल कर दिया जाएगा…। जॉन दयाल, सीताराम येचुरी अथवा सैयद शहाबुद्दीन साहब ने एक बार भी नहीं कहा, कि कश्मीर में पादरी खन्ना के खिलाफ़ जो भी कार्रवाई हो वह भारत के संविधान के अनुसार हो… शरीयत कोर्ट कौन होता है फ़ैसला करने वाला? लेकिन ज़ाहिर है कि जिसके पास ताकत है, उसी की बात चलेगी और ठोकने-लतियाने तथा हाथ काटने की ताकत फ़िलहाल इस्लाम के पास है, जबकि हिन्दू ठहरे नम्बर एक के बुद्धू, सेकुलर और गाँधीवादी…, उनके खिलाफ़ तो कुछ भी (जी हाँ, कुछ भी) किया जा सकता है…। क्योंकि भाजपा में भी अब कांग्रेस बी टीम बनने की होड़ चल पड़ी है, तो रीढ़ की हड्डी सीधी करके धार्मिक मामलों पर भाजपा के नेता खुलकर क्यों और कैसे बोलें? जबकि स्थापित तथ्य यह है कि विशेष परिस्थितियों (गुजरात एवं मध्यप्रदेश के चन्द चुनावों) को छोड़कर चाहे भाजपाई नेता, सार्वजनिक रूप से मुस्लिमों के चरण धोकर भी पिएं तब भी वे भाजपा को वोट देने वाले नहीं हैं… फ़िर भी भाजपा को यह पूछने में संकोच(?) हो रहा है कि शरीयत बड़ी या भारत का संविधान?

प्रस्तुत घटना यदि किसी भाजपा शासित राज्य में हुई होती तथा बजरंग दल अथवा श्रीराम सेना ने इस घटना को अंजाम दिया होता, तो अब तक भारत के समूचे मीडियाई भाण्डों, नकली सेकुलरिज़्म का झण्डा उठाये घूमने वाले बुद्धिजीवियों सहित प्रगतिशील(?) वामपंथियों ने कपड़े फ़ाड़-फ़ाड़कर, आसमान सिर पर उठा लिया होता… परन्तु चूंकि यह घटना कश्मीर की है तथा इसमें इस्लामी फ़तवे का तत्व शामिल है, इसलिए दोगले सेकुलरों और फ़र्जी वामपंथियों के मुँह पर बड़ा सा ताला जड़ गया है… राष्ट्रीय(?) मीडिया की तो वैसे भी हिम्मत और औकात नहीं है कि वे इस घटना को कवरेज दे सकें…।

वाकई, सेकुलरिज़्म और गाँधीवाद ने मानसिक रूप से भारतवासियों (सॉरी… हिन्दुओं) को इतना खोखला और डरपोक बना दिया है, कि वे वाजिब बात का विरोध भी नहीं कर पाते… 
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नोट :- ताज़ा समाचार यह है कि "शरीयत कोर्ट" ने कश्मीर विवि के कुछ प्रोफ़ेसरों को भी उसके समक्ष पेश होने का नोटिस जारी किया है, क्योंकि खन्ना ने स्वीकार किया है कि मुस्लिम युवकों का धर्मान्तरण करवाने में इन्होंने उसकी मदद की थी…। दूसरी तरफ़ पादरी खन्ना की पत्नी और बेटे ने उनके "गिरते स्वास्थ्य" को देखते हुए उमर अब्दुल्ला से उन्हें रिहा करने की अपील की है। पत्नी ने एक बयान में कहा है कि कश्मीर में आए भूकम्प के दौरान पादरी खन्ना और चर्च ने सेवाभाव से गरीबों की मदद की थी, उनके पुनर्वास में विभिन्न NGOs के साथ मिलकर काम किया था… (इस स्वीकारोक्ति का अर्थ समझे आप? थोड़ा गहराई से विचार कीजिए, समझ जाएंगे)। 

फ़िलहाल तो इस मामले में "धर्मनिरपेक्षों" और "स्वयंभू मानवाधिकारवादियों" की साँप-छछूंदरनुमा हालत, दोगलेपन और पाखण्ड पर तरस खाईये और मुस्कुराईये…। 

27 comments:

Anonymous said...

Sureshji, how to share this on facebook directly from here?

ePandit said...

जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला मामला है। वे अल्पसंख्यक होने पर भी हावी हो जाते हैं, कश्मीर में तो खैर बहुसंख्यक हैं। हिन्दुओं को इस वाकये से सबक सीखना चाहिये।

"जाटदेवता" संदीप पवाँर said...

जोरदार सच लेकिन इसका असर किसी पर नहीं होने वाला है?

Vishwarup said...

vaah sureshji!! bilkul dho dala.. keep it up..

Man said...

वन्देमातरम सर
छद्दम सेकुलर जोकरों ,वामपंथी भांडो मीडियाई नाइयो के दोगलेपन की पोल खोलता एक और जबर्दस्त आलेख @ये जानकारी सिर्फ इसी ब्लॉग की बदोलत मिली हे ||
अनुवांशिक रूप से भ्रस्ट विकृत नेहरु गाँधी खानदान की सत्ता सारथि तत्व "'छद्दम सेकुलरता""का रंग रोशन अब पपड़ी बन के विकृत रूप से उतर रहा हे , इसमें न्यू मिडिया बड़ा रोल अदा हो रहा हे जिसमे भांडपना और पाखंड की कोई जगह नही हे ||तिस पर आप जेसे अन्वेषी हिंदुत्व के पुरोधा हो तो हथोड़े की चोट के साथ छद्दम सेकुलरता और इनके पाखंड का हरा सफ़ेद रंग हथोड़े के ही चिपक के आ जाता हे ||
युवा वर्ग में तेजी से ये बछड़े की खाल ओढ़े सियार नंगे होते जा रहे हे ,इनकी ओखात अब इनके खरीदे हुवे मीडियाई भांडो तक ही सिमित रह गयी हे ||
बेहतरीन और जागरूक जानकारी के लिए आप को धन्यवाद और बधाई सर ||

Man said...

अब इसी तथाकथित सेकुलर और श्रेष्ठी कहलाने वाले ""नस्ल बिगाड़ "" हाईप्रोफाइल वर्ग ने बाकी सभी जनता को आर्थिक सामाजिक ,राजनितिक ,बोधिक ,शेक्षणिक ,सभी कारको और विषयों पर बंधक बना लिया हे |
बाकी बचे जो लोग सही और सच्ची भावना से रास्ट्र और धर्म के बारे में सोचते हे ,जो इन विषयों पर रास्ट्रवादी भावना का जन जन में प्रसार करना चाहते हे |जो लोग अपने धर्म के हास और उसके पतन से चिंतित होते हे |जो रास्ट्र और धर्म का हास और नुक्सान करने वाली शक्तियों का विरोध करना चाहते हो |वो लोग और वो संघटन्न भी इन्ही छद्दम सेकुलर रास्ट्र द्रोही ,धर्म द्रोही व्यक्तियों के भंवरजाल में फंस चूके हे |
भारत वर्ष में ये स्थिति आ चुकी हे की आज बात बात पर, हर रास्ट्र धर्म के पक्ष वाले मुद्दे पर ,कदम कदम पर रास्ट्रवादी संघटन और व्यक्ती इन छद्दम सेकुलर नस्ल बिगाड़ लोगो से समर्थन की अपेक्षा लगाये रखते हे ,जो की रात भर साथ सो जाये तो भी नहीं देने वाले हे

|आज चाहे भारत के अभिन्न अंग कश्मीर की बात हो ,चाहे कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्य में सेना के अधिकारों की बात हो .चाहे तिरस्कृत और बलात्कृत कश्मीर से निकाले गये कश्मीरी पंडितो की बात हो |चाहे भ्रसटाचार काले धन के मुद्दे पर बाबा रामदेव के आन्दोलन अभियान की बात हो ,और उस पर किया गया सरकारी वहशी तांडव हो या अन्ना दुआरा छेड़े गये आन्दोलन की बात हो ,भर्स्ट सरकार के नकटेपने और कमीनेपन का मुद्दा हो ,भले ही अपनी अस्मिता और सनातन धर्म के आधार तत्व रामसेतु का मुद्दा हो ,राममन्दिर जेसे आन्दोलन का मुद्दा हो ,भले ही साम्प्रदायिक निरूपण बिल का मुद्दा हो ,चाहे अमरनाथ यात्रा को पाखंड कह देने की हिम्मत किसी ने कर ली हो ?चाहे भारत में अधिसंख्य हिंदुवो की अस्मिता से बलातकार होता हो ,उनकी मुख्य धार्मिक यात्रावो पर २० २० गुना टेक्स बढा दिया गया हो ???..............______________________?
क्या होता हे इन मुद्दों पर ?आम हिन्दू और बाकी अपने को रास्ट्रवादी कहलाने वाले संघटन्न क्या करते हे सब से पहले इस सभी बातो और मुद्दों पर ?

Man said...

एक उम्मीद की ""हमारे ही देश के जाने पहचाने ,यंही की खा के उसी की बजाने वाले छद्दम सेकुलर नस्ल बिगाड़ हमारा समर्थन करेंगे ?बस यंही मात खा जाते हे|जो लोग इन्ही बातो के लिए जाने जाते हे ,जिनका मूल धंधा ही धर्म विरोध और देश के खिलाफ काम करना हे और पेट भरना हे तो क्या उम्मीद लगा कर उन से समर्थन की उम्मीद लगा बैठते हे हम लोग ?
मिडिया भी उन्ही में से हे |फिर हम उन्हें लानत मानत भेजते हे बुरा भला कहते हे ,उनकी भर्त्सना करते हे |मिडिया को पक्षपाती कहते हे ,वो तो होगा ही पक्षपाती क्योकि उसे गुलामी करने के पेसे मिलते हे ,और इन्ही उपरी उल्लेखित २०% लोगो की नट विद्या से मिडिया चलता हे |ताजुब्ब की बात तो तब होती हे की अच्छी तरह से संघटित संघटन्न भी इनके फेर में पड़ कर इन्ही की पूंछ पकड़ने की कोशीश करते हे |आर .एस.एस विश्व का सब से बड़ा अनुशासित संघटन्न हे ,उसे प्रचार की भूख भी नहीं हे ,लेकिन वो अपनी मान्यताये और हिन्दू कल्याण की बात हिंदुवो में ही स्पष्ट रूप से नहीं रख पायेगा तो जाहीर हे हिंदुवो के खिलाफ काम करने वाली शक्तिया उन्हें जल्दी ही मानसिक रूप से बहका सकेगी |एक हद तक अपनी अपनी लाइन में चलना सही हे ,लेकिन कोई चुनोती दे तो फिर ,अपने धर्म रास्ट्र को गाली दे तो फिर ?क्या इन्हें पत नहीं हे की किस तरह हिन्दू देवी देवता और उनकी मन्य्तावो के खिलाफ विषवमन किया जा रहा हे ?क्या उनकी युवा काडर में इतना दम नहीं की ऐसे लोगो की
थोड़ी सर्विस कर दी जाये ग्रीस पानी .आयल पानी कर दिया जाये जिस से ये थोडा स्मूथ चले |
यंहा धन्यवाद देना चाहूँगा शिवसेना की स्पष्टता और दिलेरी को जिन्होंने प्रशांत भूषण की ""जंवारी ""करने वाले तीनो वीरो तेजेंद्र सिंह जी और उनके साथियों का खुल के अभिनन्दन किया हे जबकि किसी भी अन्य हिन्दू संघटनों और देशभक्ती रखने वाले लोगो ने बिलकुल आवाज नहीं उठाई !! उलटे एक अपराधिक चुप्पी साध ली की जेसे इन शेरो ने बहुत बड़ा अनर्थ कर दिया हो ,श्री राम सेना तो साफ तोर पर गोल बोल गयी की हमारे आदमी ही नहीं थे ,होना ये चाहिए था की ये संघटन्न ऐसे वीर युवावो का अभिनन्दन करते उनकी होसला अफजाई करते ,उनके स्पष्ट और त्वरित नजरिये की सराहना करते ,लेकिन ये भी तो इन्ही छद्दम सेकुलरो के भंवर जाल में ही तो फंसे हुवे हे ,की छद्दम सेकुलर लोगो के सामने हम आँख नहीं मिला पाएंगे ,मीडिया नाराज हो जायेगा ,सेकुलरो अभिव्यक्ती की आजादी नाम का तूफ़ान उठा लेंगे |इसी भीरुता और छद्दम सेकुलरता के माथा देने के कारण आज आडवानी देश का प्रधान मंत्री बनने का सपना दिल में ही ले कर इस इस दुनिया से विदा हो जायेंगे |हमें अब ऐसे ही स्पष्ट नजरिये की आवश्यकता हे ,ज्यादा सीधे सच्चे हिन्दू बन के जीने की अवश्यकत नहीं हे ,ज्यादा जेंटल बन के रहने से फायदा कम नुकसान ही ज्यादा हुवा हे |हमें इन छद्दम सेकुलरो से अपने नम्बर बढवाने की कतई आवश्य्कता नहीं हे ,ना ही हमें इस बात की परवाह करनी हे की सो काल्ड सभ्य समाज हमे क्या कहेगा ?छद्दम सभ्य बनने के चक्कर में हम बहुत खो चूके हे ,इसी बात का फायदा उठा के हमारी कोई भी बजा के चला जाता हे |हमें अपने धर्म और रास्ट्र के मान अपमान पर खुला एवं स्पष्ट दृसटीकोण प्रस्तुत करना होगा |

Man said...

हमें इन छद्म सेकुलर ""नस्ल बिगाड़ो " के समर्थन की कतई आवश्यकता नही हे ,ना ही हमें उम्मीद लगनी चाहिए के ये लोग कभी पक्ष में भी बोले |हमें आवश्यकता हे तेजेंद्र पाल जी जेसे नवयुवको की और जेसे को तेसा प्रदान करने वाली त्वरीत प्रतिक्रिया की |हमे उन छद्दम सेकुलर और रास्ट्रद्रोही धर्मद्रोही लोगो और उनके पालतू मिडिया को ऐसे ही जवाब देना हे जेसा तेजेंद्र पल जी ने दिया और अग्निवेश को गुजरात में एक महात्मा ने दिया |यदि किसी को अभिव्यक्ती की आजादी हे तो हमे भी हमारे गोरव प्रतीकों रास्ट्र और धर्म की रक्षा का अधिकार हे |कानून अपनी जगह हे ,यदि कोई किसी को गोली मारता हो तो खाने वाला ये सोच के निश्चिन्त नहीं हो जायेगा की कानून पाना काम करेगा .कानून तो काम करता रहेगा पहले जो अपना फर्ज बनता हे वो पूरा करेंगे |
जय हिंद वन्देमातरम

http://jaishariram-man.blogspot.com/2011/10/blog-post_22.html

त्यागी said...

हिन्दुओ को सिर्फ और सिर्फ हिजड़ा बनने की इजाजत है कोई भी तो नहीं रोकता पता नहीं हिन्दू क्यूँ देश को मुसलमानों और इसाइओ को सौप कर हिंजड़े बन जाते. भाई आज नहीं तो कल ५० साल बाद यह २० करोड़ मेरे प्रिये अलाप्संख्यक भाई ५० करोड़ हो जायेंगे तब भी तो भारत पर शरियत लागु होगी. तो अब कश्मीर में यह हो रहा है तो इस में इतनी दारुणता क्यूँ. जब एक न चुना प्रधानमंत्री देश पर दो बार हेकड़ी से हकुमत कर सकता है, विदेश सत्ता देश की सबसे बड़ी पार्टी की नेता है. तो देश में शरियत कानून लागु हो तो बुराई क्या है. मुझे तो १९३५ के हालत साफ दिखाई दे रहे है.
"अलाप्संख्यको को एक बार मारोगे एक हजार साल तक याद रखा जायेगा (सौजन्य मीडिया) और तुम्हे दिन में हजार बार मारा जायेगा और रोने भी नहीं दिया जायेगा"
कश्मीर पकिस्तान और चीन को कब का बेच दिया गया है. अब तो बचे भारत पर शरियत कानून की तयारी है मित्रो. यूपी चुनाव में देखना की हिन्दू के मुह पर यह धर्मनिरपेक्ष नेता मु....... देंगे .
तुम तो यार पोर्न स्टार देखो (बिग बोस) और मस्त रहो बिना मतलब इन चक्करों में पड़ रहे हो. कितने क्रांतिकारी थे १९४७ से पहेले क्या घंटा उखाड़ लिए तब भी हिन्दू के हाथो से दो देश छीन लिए. और आज फिर डंके चोट पर हर चीज करते जा रहे है.
१२० करोड़ हिन्दू को मूर्खो के संसार में रहेने की आदात है. और इस ध्रुव सत्य को कोई भी नहीं बदल सकता. देख नहीं रहे हो यूपी में हिन्दू अभी भी लुटने पीटने के बाद भी जात को सर पर हटाये घूम रहे है. जात के नेता गुंडे, मोटे, भ्रष्टाचारी, दुर्गुणी है तब भी उन्ही की जये जये कार है. तो भैया शरीयत तो १९४७ के बाद लागु होई ही जानी चाहिए थी पता नहीं अब भी क्यूँ इन्तजार किया जा रहा है. जबकि यहाँ लोग सुन्नत के लिए तयिआर खड़े है.
http://parshuram27.blogspot.com/2011/11/blog-post_25.html

दीपक बाबा said...

“शरीयत कोर्ट”

आज शब्द पता चला ... कुछ दिन बाद दिल्ली में भी तीसहजारी और जामा मस्जिद के बीच में होगा ये “शरीयत कोर्ट”... या हो सकता है हो भी..

दूसरी बात...
कश्मीर में अल्पसंख्यक लोगो की सुनवाई क्यों नहीं होती गर पुरे हिन्दुस्तान में होती है तो ?

श्रीयंत्र said...

अण्णा को पुजाने के लिए, संजीव भट्ट - महेश भट्ट को सही साबित करने के लिए, कश्मीर से सेना हटाने के लिए व जनमत संग्रह की सलाहकारी व्यवस्थाओं के लिए, राहुल से लेकर दिग्विजय सिंह तक के प्रचार के लिए सदा तत्पर मीडिया पर कोई समाचार इस संबंध में हुमक के साथ दिखाई नहीं दिया। न तरह - तरह के बुद्धिजीवियों के गिरोह दिखाई दिए, न सिनेमा कलाकार, निर्देशक, संगीत, कला की उजली आकृतियां "हम आतंक के साथ नहीं हैं संविधान सर्वोपरी है " कहती नजर आई। न भाजपा, न संघ, न विश्व हिंदू परिषद के स्वनामधन्य पदाधिकारी व प्रवक्ता किसी वक्तव्य के साथ दिखाई दिए। हर रोज बढ़ती अज़ान के मूर्खतापूर्ण प्रलाप के बीच मुसलिम नवयुवकों के बढ़ते 'हाव' हर राज्य में सरकारी अनुदान व अल्पसंख्यक बोर्डों के बढ़ते अधिकार के बीच आपकी यह पोस्ट और इस पर ईसाई शास्त्री की चुप्पी। कई जगह यह प्रसंग बताने पर मेरे बच्चे के 95 प्रतिशत, फलां कंपनी में साक्षात्कार, उस शहर में कोई सैटिंग, बच्चे के साथ हवाई यात्रा के प्रसंग सुनने के बाद भोजन छोड़ चाय पीने तक का मन नहीं है। सड़क किनारे सूने पड़े कब्जे के "मंदिर" जिन घरों के विस्तार में मदद के लिए बने हैं चिढ़ाते हैं 10 प्रतिशत बिक्री कर देने वाला एस्टीमेट स्लिप को बिल कह कर देता है तथा एक दाम तथा कभी भी वापिस लाने पर हमारी पहचान की दुहाई देता है तो उस हिंदू को प्रसंग बताने का हक ही खो जाता है। विभिन्न प्रकार के नेता व अफसर नुमा प्रसंग चर्चा के बीच जम्हाई लेते हुए दिख रहे हैं। फलां समुदाय ने फलां मंडी कब्जा ली है, फलां ने मॉल बनवा दिए हैं, ढिकाणों के होटल व बसें तथा बड़ी कारों का जिक्र कर सफाई दी जा रही है। 50-100 लोग जुटाकर नगरों की समस्या पर सबको हिला देने वाले समाजसेवक, दूर की सोचो गरीब जनता की समस्याएं और भी बहुत हैं, यह क्या प्रसंग ले आए, यहां पर कोई मजदूर 800 रुपए में नहीं मिल रहा गांव से फसल चुग कर मंडी बेचने के लिए, कहीं नहीं है बेरोजगारी, मुखियाओं की यह बात सुनने के बाद लगता है कि जिस कुएं से ये पानी पी आए हैं उसका पता पूछ लें ताकि हम पर सुरेश जी के कहे शब्दों की पीड़ा असर न करे।

डॉ. मनोज शर्मा said...

धर्म, धर्मान्तरण और धर्मनिरपेक्षता के नाम पर जारी विश्वव्यापी पाखण्ड की भारत में पराकाष्ठा हो गयी है.
अफ़सोस, इसे ठीक से समझने वाले लोग भी चुप हैं. सुरेश जी को साधुवाद, अभिनन्दन.

संजय बेंगाणी said...

एक नन की हत्या हुई थी, कुछ दिन पहले. रोना-धोना हुआ. अखबार में पाठकों के पत्र पढ़ने को मिले. निंदा-निंदा-निंदा. इस बीच एक गोवा वासी ने लिखा हम क्या गलत कर रहे हैं? उन्हे खाना खाना, पढ़ना सिखा रहे हैं... हमें क्यों मारा जा रहा है? ये मानते है हमें खाना खाना नहीं आता. गंदा खेल चल रहा है. एक दिन भारत में सम्प्रदाय संघर्ष होगा. ईसाई व मुसलमानों के बीच. हिन्दू तो तब तक खत्म हो चुके होंगे...

दिवाकर मणि said...

फ़ालतू में आप सभी परेशान हो रहे हैं, आखिर इसमें गलत क्या है!!
आप लोग भी ना....सच्ची बताउं तो मुझे निरा भोले एवं इतिहास से अनजान लगते हैं...
क्या नया है इसमें!! बाबर, लादेन, तैमूर की औलादें जहां भी अच्छी खासी संख्या में होती हैं, क्या वहां देश के संविधान से भी ऊपर बकरे की दाढ़ वाले कठमुल्लों की "शरीयत" का राज चलता है कि नहीं चलता!!
फिर...

Rajesh said...

Bahut badhiya Suresh Ji. Ase hi jagate raho. Dhanywad.

सुलभ said...

पानी इतना साफ़ है कि किसी को गहराई नजर नहीं आ रही है. सब अपना चेहरा देख खुश हैं कि भई मेरा मुखौटा सलामत है.
असल में लोगों को कम्प्लेक्स रिपोर्ट पढने और चर्चा करने की आदत है. साफ़ साफ़ और सीधी बात बकवास लगती है.

Raj said...

hindu is sleping,lakin humko jawab dena chahiye ,harbar hindu sirf atack jelta hy kabhi atack ku nahi kiya agr vo love jihad chula sakty hy to hum bhi unke baap hy or islam ki ladkiya hindu me kafi khus bhi rahy gi,aaj subramaniam swamy or baba ramdev ko chhod ke koi bhi jordaar tariky se hindu ka suport ku nahi karta,hum sirf khud ko dos dety rahy to sarvanas humar hona hi hy to ku na isko fight de jaye

A.L.Rawal said...

We have to Hinduise the Hindus first before we can hope for a dignified survival in India.

Jeet Bhargava said...

अजीब बात ये है कि, चर्च की रखवाली और धर्माणतरण की सुपारी लेकर हिंदुस्तान आई राजमाता सोनिया और उसके दरबारी क्यो खामोश है। जाहिर सी बात है..मुस्लिम वोट की नाराजगी नाही मोल लेना चाहती!! ये है वोट की ताकत। जो निकम्मी हिन्दू प्रजा कभी नही समझेगी। उसे तो बस यही बात दिखेगी कि हमारे इलाके के बीजेपी विधायक ने मेरे गली मे नाली नही बनवाई, मेरे कॉलोनी मे सड़क दुरुस्त नही कराई। जबकि एक मुसलमान वोट देने जाता है तो सिर्फ 'हिन्दू पार्टी' को हराने के लिए। चाहे हिन्दू पार्टी ने कितनी भी सेवा क्यो ना की हो.

सौरभ आत्रेय said...

हिन्दुओं की इस कायरता, निष्क्रियता के पीछे धर्म की आढ़ में घोर अंधविश्वास , हजारों पाखण्डी धर्मगुरुओं के बे सर पैर के प्रवचनों में शांति के नाम पर नपुसक और घोर कायरता का पाठ पढाना भी एक मुख्य कारण है. सबकुछ ईश्वर  और आज की बकवास ज्योतिष विद्या के भरोसे अपने मूल्यवान जीवन  और राष्ट्र  को नष्ट करने के अलावा हिन्दू कुछ नहीं कररहे हैं सिवाय अपना धर्म भ्रष्ट और अपना समूल सर्वनाश  करने के अलावा.

Anonymous said...

Suresh ji ram-ram
aaj hindu samaj apne tak hi simit ho kar rahe gaya he/ na usko desh ki fikar he, na samaj ki/usko lagta he ki marne wala hindo samaj dusri jagah ka he mere yaha per to koi samasya nahi he / y amm soch aaj har gali,har mohale ki ho gai he/wo ya jante huye bhi anjan bane huye he ki khatra aaj pure samaj ,desh per he/
suresh ji logo ki y mansikta bann gai he ki yadi yaha musalman abadi jayada ho gaygi to ghar bach kar (sell)dusri jagah le lenge/ lakin bhag kar akhir jao ge kha y samasya to bhoot ki tarh pure desh me fail chuko he/mukawla kar k hi iss se chutkara mil sakta he/
vijender

रंजना said...

खलिश खुशफहमी है यह कि हिन्दू- मुस्लिम या हिन्दू -इसाई प्रतिद्वंदी हैं...विश्व के मुख्य प्रतिद्वंदी मुस्लिम और इसाई ही हैं..हिन्दू समेत बाकी छुटुर पुटुर समस्त समुदायों का अपने पंथ में विलय कर संख्या बढ़ाने का विश्वव्यापी अभियान रिकार्ड प्रगति पर है.. एक दिन वर्चस्वा/प्रभुत्व स्थापना के लिए यही दो गुट धरती का सीना लाल करेंगे...

abhishek said...

sureshji,
you need to expose the pseudo secularists in bjp, so that we can understand them better and filter the garbage.

all hindus should form a virat hindutva to get clear majority in the next parliament elections. we need more than 350 seats to implement our own systems.

Anonymous said...

Human being is great living in god's creation. He knows everything like he has brain to think, n take wise decision, no animal on the earth has like this power, just for the sake of god people are fighting n getting down from the tracks....

there's a true way of finding a good thing is to think when u doing any act... for a while.. then take the decision.. all these religions are created by human beings.....

the almighty god knows everything.. its not in the form of idols, read the puranas, vedas, scriptures, everything is shown in it. but no 1% is following it.. thats the true way of leading a good life here n hereafter...

Anonymous said...

hindoo khud apni jaden khod raha hai....
bahut jald hi samapt ho jaayega is tarah...

ritesh said...

suresh ji mein aapka lekhon ko khub man se padta hoon bahut hi jaankari purn lekh likhte hain aap ik chupi hui jaankari jo sab ke samne aani chahiye wo aap ke jariye hum jaante hai humko aapke lekh ka intzaar raheta hai dhanywaad

akram ahamad said...

mera naam ikramahmad hai mai 15 saal ka hun mujhe bolna nahi chahiye lekin post aur comment padhne ke baad mujhe aashchya hai kyonki main to u.p mai rahta hun aur kabhi aisi khabar nahi padhi news aur akhbar mai bh aisa nahi dekha.lekin u.p mai jyada tar hindu party hi hai bhale wo police ho ya bda adhikari aur maine g.k mai bhi dekha hai bharat mai 100% mai se 80% adhikari hindu hai ..to aap log kyon aisa likh rahe hai ...apne bare mai to khoob chada bada kar likh liya .. jab gujrat mai musalmano ko teen tukdo mai kata ja raha tha tab aap kahan the aur yah kisne karwaya aaj tak pata nahi wahan ke musalmano ko lut kar kangaal bana diya to aap kahan the 3000 jawan muslim ladkiyo ka aaj tak pata nahi.....jab apne par padti hai tab samajh mai aata hai ...khoon mera bhi khaulta hai us din ko yaad karke kyonki mere mama ke sath bhi yahi huwa tha.............