Thursday, October 20, 2011

Performance of Sonia-Rahul in Indian Parliament


युवराज की मर्जी के सामने संसद की क्या हैसियत…?

जैसा कि आप सभी ज्ञात है कि हम अपने सांसद चुनते हैं ताकि जब भी संसद सत्र चल रहा हो वे वहाँ नियमित उपस्थिति रखें, अपने क्षेत्र की समस्याओं को संसद में प्रश्नों के जरिये उठाएं, तथा उन्हें मिलने वाली सांसद निधि की राशि का उपयोग गरीबों के हित में सही ढंग से करें।

सूचना के अधिकार तहत प्राप्त एक जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को नियुक्त करने वाली सुप्रीम कमाण्डर, तथा देश के भावी युवा(?) प्रधानमंत्री, इस मोर्चे पर बेहद फ़िसड्डी साबित हुए हैं। 15वीं लोकसभा की अब तक कुल 183 बैठकें हुई हैं, जिसमें सोनिया की उपस्थिति रही 77 दिन (42%), जबकि राहुल बाबा 80 दिन (43%) उपस्थित रहे (मेनका गाँधी की उपस्थिति 129 दिन एवं वरुण की उपस्थिति 118 दिन रही)। इस मामले में सोनिया जी को थोड़ी छूट दी जा सकती है, क्योंकि संसद के पूरे मानसून सत्र में वे अपनी रहस्यमयी बीमारी की वजह से नहीं आईं। 

इसी प्रकार संसद में प्रश्न पूछने के मामले में रिकॉर्ड के अनुसार वरुण गाँधी ने 15वीं संसद में अब तक कुल 89 प्रश्न पूछे हैं और मेनका गाँधी ने 137 प्रश्न पूछे हैं, जबकि दूसरी ओर संसद के लगातार तीन सत्रों में मम्मी-बेटू की जोड़ी ने एक भी सवाल नहीं पूछा (क्योंकि शायद उन्हें संसद में सवाल पूछने की जरुरत ही नहीं है, उनके गुलाम उन्हें उनके घर जाकर रिपोर्ट देते हैं)। जहाँ तक बहस में भाग लेने का सवाल है, मेनका गाँधी ने कुल 12 बार बहस में हिस्सा लिया और वरुण गाँधी ने 2 बार, वहीं सोनिया गाँधी ने किसी भी बहस में हिस्सा नहीं लिया, तथा अमूल बेबी ने सिर्फ़ एक बार (अण्णा हजारे के वाले मसले पर) चार पेज का लिखा हुआ भाषण पढ़ा।

सांसदों के कामों को आँकने में सांसद निधि एक महत्वपूर्ण घटक होता है। इस निधि को सांसद अपने क्षेत्र में स्वविवेक से सड़क, पुल अथवा अस्पताल की सुविधाओं पर खर्च कर सकते हैं। जून 2009 से अगस्त 2011 तक प्रत्येक सांसद को 9 करोड़ की सांसद निधि आवंटित की गई। इसमें से सोनिया गाँधी ने अब तक सिर्फ़ 1.94 करोड़ (21%) एवं राहुल बाबा ने 0.18 करोड़ (मात्र 3%) पैसे का ही उपयोग अपने क्षेत्र के विकास हेतु किया है। वहीं मेनका गाँधी ने इस राशि में से 2.25 करोड़ (25%) तथा वरुण ने अपने संसदीय क्षेत्र के लिए 3.17 करोड़ (36%) खर्च कर लिए हैं।

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब सत्ताधारी गठबंधन की प्रमुख होने के बावजूद सोनिया-राहुल का व्यवहार संसद के प्रति इतना नकारात्मक और उपेक्षा वाला है तो फ़िर वे आए दिन अन्य राज्य सरकारों को नैतिकता का उपदेश कैसे दे सकते हैं? मनरेगा जैसी ना जाने कितनी योजनाएं हैं, रायबरेली-अमेठी की सड़कों की हालत खस्ता है, फ़िर भी पता नहीं क्यों राहुल बाबा ने यहाँ अपनी निधि का पैसा खर्च क्यों नहीं किया? जबकि मेनका-वरुण का परफ़ॉर्मेंस उनके अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में काफ़ी बेहतर है। परन्तु "महारानी" और "युवराज" की जब मर्जी होगी तब वे संसद में आएंगे और इच्छा हुई तो कभीकभार सवाल भी पूछेंगे, हम-आप उनसे इस सम्बन्ध में सवाल करने वाले कौन होते हैं…। जब उन्होंने आज तक सरकारी खर्च पर होने वाली विदेश यात्राओं का हिसाब ही नहीं दिया, तो संसद में उपस्थिति तो बहुत मामूली बात है…। "राजपरिवार" की मर्जी होगी तब जवाब देंगे… संसद की क्या हैसियत है उनके सामने?
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अब समझ में आया कि आखिर मनमोहन सिंह साहब सूचना के अधिकार कानून की बाँह क्यों मरोड़ना चाहते हैं। कुछ सिरफ़िरे लोग सोनिया-राहुल से सम्बन्धित इसी प्रकार की ऊलजलूल सूचनाएं माँग-माँगकर, सरकार का टाइम खराब करते हैं, सोनिया का ज़ायका खराब करते हैं और उनके गुलामों का हाजमा खराब करते हैं…

20 comments:

जितेन्द्र सिंह : राष्ट्रवादी भारतीय... said...

इस तरह की कडवी सच्चाइयों को सामने लाने का आपका काम सराहनीय है... सुरेश जी... धन्यवाद...
जब आप लोकसभा सदस्यों का बायो-प्रोफाइल देखेंगे तो बड़ा हास्यापद लगता है जब कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज से डेवलपमेंट इकोनोमिक्स में एम् फिल(??) गाँधी श्री राहुल का प्रोफेशन किसान ( FARMER )लिखा आता है... देश में कांग्रेस के सर्वनाश के लिए जनता की मानसिक गुलामी का नाश करना आवश्यक है वरना ये 'लंगूर' हमेशा 'अंगूर' ही खाते रहेंगे..
वन्दे मातरम्...
जय हिंद.. जय भारत...

Rajesh Kumar said...

ऐसे सिरफिरे लोगों से ही आज कल देश का कुच्छ भला हो रहा है बस :)

Ratan Singh Shekhawat said...

अब समझ में आया कि आखिर मनमोहन सिंह साहब सूचना के अधिकार कानून की बाँह क्यों मरोड़ना चाहते हैं। कुछ “सिरफ़िरे” लोग सोनिया-राहुल से सम्बन्धित इसी प्रकार की “ऊलजलूल” सूचनाएं माँग-माँगकर, सरकार का टाइम खराब करते हैं, सोनिया का ज़ायका खराब करते हैं और उनके गुलामों का हाजमा खराब करते हैं…

@ सही कहा आपने| यह भी एक कड़वी सच्चाई है|

sanjeev.teotia said...

suresh ji. nice post. जय हिंद.. जय भारत...

संजय बेंगाणी said...

भाईजी उनका व्यवहार नकारत्मक नहीं है. वास्तवम में उनकी बौद्धिक औकात ही नहीं कि बहस कर सके.

पवन said...

हमलोग कुछ समय और प्रतीक्षा करें | डॉ० स्वामी इन गांधियों के नकाब उतार देंगे |

Man said...

संसद में सवाल पूछना आएगा तो पूछेंगे ? जब सारे काम गुलाम कर रहे हे तो क्या जरूरत हे फोकट मेहनत करने की ?ये ही काम थोड़ी बचे राज परिवार के पास और भी विदेशो के कई गुप्त काम हे जिन्हें निपटाने होते हे |यदि महारानी जी ऐसे ही आम लोगो की हथाई संसद में उपलब्ध होती रही तो फिर उनके ""रहस्यमय गुप्त आभा मंडल "" का क्या होगा ?..................................................http://jaishariram-man.blogspot.com/2011/10/blog-post.html............

Anonymous said...

bechaara chiplu.....likh likh ker mara ja raha hai lekin koi sunta hi nahi...ha ha ha

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

भाईसाहब, कोई प्रश्न पूछना राहुल की बौद्धिक क्षमता के बाहर की बात है| उसे किसी विषय के बारे में कुछ पता ही नहीं होता, प्रश्न कहाँ से पूछेगा?
रही बात उसकी मम्मी की तो वह तो आपने भी स्पष्ट कर ही दिया है कि उसके गुलाम सारी बवासीर उसके घर जाकर छोड़ ही आते हैं| वरुण गांधी भले ही कितना ही काबिल क्यों न हो, भले ही "पवित्र परिवार" की ही पैदाइश क्यों न हो, वह हिंदुत्व की बात करके सदी का सबसे बड़ा पाप(?) कर चूका है|

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

राहुल,सोनिया की तुलना वरुण,मनेका से करना यही साबित करता है कि गांधी परिवार ही सर्वोपरि है भारत में . आप से तो यह उम्मीद है कि दूध का दूध और पानी पानी किजिये. मनेका या वरुण के दाग सिर्फ़ इस मारे नही मिटाये जा सकते कि वह भाजपा मे है . भाजपा मे वह इसलिये है कि उन्हे जीतने के लिये भाजपा का सहारा चाहिये . आज में मेनका के क्षेत्र में राजनाथ सिंह की यात्रा आई हुयी है लेकिन वह नदारत है

Anshu Prasad said...

सुरेश जी आप समय समय पर ऐसे पोस्ट लिखते रहते है इनसे सरकार की सोच तथा ऊँचे पदों पर बिराजमान निकम्मो की वास्तविकता एवं असलियत उजागर होती है...
धन्यवाद....

Anonymous said...

अबे बेनामी तेरी तो इतनी भी औकात नहीं की किसी का म्रत्यु सन्देश भी लिख सके, क्यों अच्छे लोगों में बद्जनावर(सूअर) की तरह घुसा चला आता है.

Rajesh said...

Bahut hi bdhiya Suresh Ji. Bahut Hi badhiya post likhi hai. Excellent.

s.k said...

गुजरात कुपोषण से लड़ने में सबसे बुरे राज्यों में शामिल है .

youth is ready for kranti said...

धीरू सिंह जी से पूर्णरूप से सहमत हैं.और कम से कम सुरेश जी से हम इन बातों कि उम्मीद नहीं करते.

Anonymous said...

Mr. Dhiru Singh Varun Menka r in BJP This is not the reason of comparing. Try to understand gentleman.

varun yadav said...

सुरेश जी जो लिखते हैं उनके पाठक सुनते भी हैं और दूसरों को बताते भी हैं. सुरेश जी का मजाक उड़ने वाले हमारे सुधि पाठक ... और तेजी से हंसिये अपने आप पर.. इस हंसी से लोगो में जागरूकता नहीं आयेगी.
सुरेश जी ने कितनी आसान भाषा में पर्दाफाश कर दिया कोंग्रेसी दल्लो का .....

I and god said...

राजा का इतना विरोध , देश द्रोह की श्रेणी में आता है .

Man said...

हमें इन नस्ल बिगाड़ो के समर्थन की आवश्यकता नहीं |
तथाकथित "'नस्ल बिगाड़ सेकुलर बुधिजिवियो ""के समर्थन की क्या आवश्य्कता हे ?|.....................http://jaishariram-man.blogspot.com/2011/10/blog-post_22.html..................जरूर पधारे

Anonymous said...

suresh ji ram-ram
bhondu yuvraj aur nithali soniya ki pol khol ne k liy hardik shubkamnay

suresh ji deep parav ki appko thatha app ke chahane balo ko hardik mangal kamnay/

vijender