Monday, October 24, 2011

Kumar Ketkar, Anti-Sangh Activist and Judiciary

कुमार केतकर साहब "नमक का कर्ज़" उतारिये, लेकिन न्यायपालिका को बख्श दीजिये…

संघ-भाजपा-हिन्दुत्व के कटु आलोचक, बड़बोले एवं "पवित्र परिवार" के अंधभक्त श्री कुमार केतकर के खिलाफ़ दापोली (महाराष्ट्र) पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बाद मामला दर्ज कर लिया है। अपने एक लेख में केतकर साहब ने सदा की तरह "हिन्दू आतंक", "भगवा-ध्वज" विरोधी राग तो अलापा ही, उन पर केस दर्ज करने का मुख्य कारण बना उनका वह वक्तव्य जिसमें उन्होंने कहा कि "भारतीय न्यायपालिका में संघ के आदमी घुस गये हैं…"।


इस लेख में केतकर साहब ने अयोध्या मामले के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस, प्रशासन, प्रेस और न्यायपालिका में "संघ के गुर्गे" घुसपैठ कर गये हैं। पहले तो सामाजिक कार्यकर्ता श्री एन आर शिगवण ने केतकर से पत्र लिखकर जवाब माँगा, लेकिन हेकड़ीबाज केतकर ऐसे पत्रों का जवाब भला क्यों देने लगे, तब शिगवण जी ने कोर्ट में केस दायर किया, जहाँ माननीय न्यायालय ने लेख की उक्त पंक्ति को देखकर तत्काल मामला दर्ज करने का निर्देश दिया…। लेख में अपने "तर्क"(???) को धार देने के लिए केतकर साहब ने महात्मा गाँधी के साथ-साथ राजीव गाँधी की हत्या को भी "हिन्दू आतंक" बता डाला, क्योंकि उनके अनुसार राजीव के हत्यारे भी "हिन्दू" ही हैं, इसलिए… (है ना माथा पीटने लायक तर्क)। यह तर्क कुछ-कुछ ऐसा ही है जैसे दिग्विजय सिंह साहब ने 26/11 के हमले में संघ का हाथ होना बताया था। केतकर साहब का बस चले तो वे अजमल कसाब को भी संघ का कार्यकर्ता घोषित कर दें…।

जहाँ अपने इस लेख में कुमार केतकर ने ठेठ "रुदाली स्टाइल" में संघ-भाजपा के खिलाफ़ विष-वमन किया, वहीं इसी लेख में उन्होंने "पारिवारिक चरण चुम्बन" की परम्परा को बरकरार रखते हुए सवाल किया कि "RSS के "प्रातः स्मरण" (शाखा की सुबह की प्रार्थना) में महात्मा गाँधी का नाम क्यों है, जबकि जवाहरलाल नेहरु का नाम क्यों नहीं है…" (हो सकता है अगले लेख में वे यह आपत्ति दर्ज करा दें कि इसमें जिन्ना का नाम क्यों नहीं है?)। इससे पहले भी कुमार केतकर साहब, बाल ठाकरे को "मुम्बई का अयातुल्लाह खोमैनी" जैसी उपाधियाँ दे चुके हैं, साथ ही "अमूल बेबी" द्वारा मुम्बई की लोकल ट्रेन यात्रा को एक लेख में "ऐतिहासिक यात्रा" निरूपित कर चुके हैं…

इन्हीं हरकतों की वजह से कुछ समय पहले केतकर साहब को "लोकसत्ता" से धक्के मारकर निकाला गया था, इसके बाद वे "दिव्य भास्कर" के एडीटर बन गये… लेकिन लगता है कि ये उसे भी डुबाकर ही मानेंगे…। (पता नहीं दिव्य भास्कर ने उनमें ऐसा क्या देखा?)।

उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले माननीय प्रधानमंत्री "मौन ही मौन सिंह" ने पूरे देश से चुनकर जिन "खास" पाँच सम्पादकों को इंटरव्यू के लिए बुलाया था, उसमें एक अनमोल नगीना कुमार केतकर भी थे, ज़ाहिर है कि "नमक का कर्ज़" उतारने का फ़र्ज़ तो अदा करेंगे ही…, लेकिन न्यायपालिका पर "संघी" होने का आरोप लगाकर उन्होंने निश्चित रूप से दिवालिएपन का सबूत दिया है।

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नोट :- सभी पाठकों, शुभचिंतकों एवं मित्रों को दीपपर्व की हार्दिक शुभकामनाएं, आप सभी खुश रहें, सफ़ल हों…। इस दीपावली संकल्प लें कि हम सभी आपस में मिलकर इसी तरह हिन्दुत्व विरोधियों को बेनकाब करते चलें, उन्हें न्यायालय के रास्ते सबक सिखाते चलें…हिन्दुओं, हिन्दू संस्कृति, हिन्दू संतों, हिन्दू मन्दिरों के द्वेषियों को तर्कों से ध्वस्त करते चलें…

स्रोत :- http://en.newsbharati.com//Encyc/2011/10/21/Kumar-Ketkar-saving-face-on-Court-action-for-his-defamatory-article-.aspx?NB&m2&p1&p2&p3&p4&lang=1&m1=m8&NewsMode=int

24 comments:

सुमंत said...

आपको भी दीपावली पर अनेक शुभकामनाएँ...आपने बहुत अच्छी बात लिखी है, हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि राष्ट्र-विरोधियों को लगातार बेनकाब करते रहें और सत्य को सामने लाने में योगदान दें.

vishwajeetsingh said...

आदरणीय श्री आपके द्वारा प्रज्वलित राष्ट्रभक्ति की ज्योति हमें राष्ट्रभक्ति के पथ पर चलने की प्रेरणा देती है , परमात्मा करे कि यह ज्योति सदा ऐसे ही प्रज्वलित होती रहें । आपको भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं राम राम ।
वन्दे मातरम्

पवन said...

न्यायालय के माध्यम से ही ऐसे राष्ट्रविरोधियों पर नकेल कसी जा सकती है | ईश्वर ऐसे वीरों को डॉ० स्वामी जैसी शक्ति दे जो न्यायालय के माध्यम से सब कलियुगी दैत्यों की बत्ती गुल कर रहे हैं |

अनूप शुक्ल said...

आपको भी दीपावली की मंगलकामनायें।
बाकी कुछ जरा ज्यादा ही कड़ा बयान दिया केतकर साहब ने। :)

lokendra singh rajput said...

बहुब बढ़िया आलेख.... महतवपूर्ण जानकारी के लिए शुक्रिया.... साथ ही दीपोत्सव की शुभकामनाएं....

Ratan Singh Shekhawat said...

सही लिखा आपने कि केतकर साहब दिमाग रूप से दिवालिया हो चुके है|
दरअसल ये लोग सोनिया को देश से ऊपर समझने लगे है इसलिए उसे खुश करने के चक्कर में यह भी भूल जाते है कि क्या बकवास कर रहे है|

महफूज़ अली said...

आपको दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनायें....

संजय बेंगाणी said...

अगर समाचारपत्र निकला एक व्यवसाय है तो केतकर को सम्पादक बनाना व्यवसायिक कुशलता (बदमाशी भी कह सकते है) है. केन्द्र सरकार से अनुग्रह प्राप्ति का फंडा.

Anonymous said...

सुरेश जी कृपया कुमार केतकर को भारतीय रुपये के प्रतीक चिन्ह के चयन में हुई बेईमानी से सम्बन्धित इस लिंक को http://www.saveindianrupeesymbol.org/ भेजकर उनसे कहीये की अपनी सकारात्मक उर्जा और दिव्य दृष्टी इधर लगाकर देश के गौरव के रच्छा करे.

जितेन्द्र सिंह : राष्ट्रवादी भारतीय... said...

सुरेश जी आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभ-कामनाएं... हमेशा की तरह एक श्रेष्ठ लेख...

इस 'कूतकूकर' जैसे बेशुमार हैं जो सिर्फ चापलूसी और कमीनेपन की बदौलत और अपने मालिकों के दुश्मनों पर भौंक कर 'हड्डी' पाने की फिराक में रहते हैं...

Man said...

वन्देमातरम सर ,शुभ दीपोत्सव
ये महाशय भी "'तथाकथित नस्ल बिगाडू सेकुलर "'बिरादरी से ही तो तालुक रखते हे |इस बिरादरी को संघ नामक मोतियाबिंद की खानदानी बीमारी शुरू से ही लगी हुयी हे |तडके ये ना कह दे की सेकुलरो के बच्चे पैदा करने में भी संघ का हाथ हे ,इसलिए ये हमारी बात नही मान रहे हे |
आप ने मशाल थाम रखी हे तो इस हिन्दू विरोधी अभियान की कमर तोड़ने में कोई कसर नहीं आने देंगे जेसे भी जंहा भी संभव हो पायेगा अभियान चलता रहेगा |

Ganesh Prasad said...

happy diwali sir,

vipin said...

Suresh ji Namashkar

AApko Dipawali ki hardik subhkamna aap deepak ki tarah se hame isee parkar se roshni dikhate rahe.


OM

दीपक बाबा said...

"ये तो नू ही चालेगी"

ये शब्द दिल्ली में चलनेवाली ब्लू लाईन बस के पीछे लिखे होते थे - यानी आप जो मर्ज़ी कर लें, ये तो नू ही चलेगी..

यही देश का हाल है जी,

फिलहाल दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें स्वीकार करें...

Rajesh said...

Suresh Ji Apko bhi Deepwali ki dher sari subh kamnaye. Bahut hi badhiya likha hai. Dhanywad.

सुलभ said...

जैसे दिग्विजय सिंह साहब ने 26/11 के हमले में संघ का हाथ होना बताया था। केतकर साहब का बस चले तो वे अजमल कसाब को भी संघ का कार्यकर्ता घोषित कर दें…।

थोड़ी देर के लिए खुल कर हंस लेते हैं बाकी २०१४ तक तो रोना ही है.

सुलभ said...

दीपोत्सव पर सभी संकल्पों के लिए
शुभकामनाएं !!

sujeet si. said...

Wish you very happy Diwali sir.

दीर्घतमा said...

अपने बिलकुल ठीक कहा ,लेकिन देखिये न हम कैसे निरीह के समान देखते जा रहे है एक बिदेशी नारी के सामने कैसे बिबस है ,गोरो की ताकत अब समझ में आई जब एक गोरा हमें गुलाम बना सकता है तो वे तो बहुत जाड़े थे .

Raj said...

sabhi log google pe -rajiv dixit expose nehru-search karo fir dekhna kya milta hy-jai hind

Raj said...

muje ek baat samjna hi aati ye log RSS se darty ku hy,kahi esa to nahi agr RSS ki desh bhakti se daar rahy hy

rakesh said...

ये तो नू ही चालेगी"

ये शब्द दिल्ली में चलनेवाली ब्लू लाईन बस के पीछे लिखे होते थे - यानी आप जो मर्ज़ी कर लें, ये तो नू ही चलेगी..

यही देश का हाल है

Pranay Munshi said...

lage raho...

I am part of "Nationalist Group of Tweeples" said...

KLatest on this case: http://t.co/Zdsu7o6A

Journalist Kumar Ketkar crawls for mercy as RSS sues him for defamation