Monday, October 17, 2011

Anti-National NGOs in India and AFSPA Act

देशद्रोही NGOs गैंग "जोंक और पिस्सू" की तरह हैं… (सन्दर्भ - AFSPA विरोध यात्रा) 

संदीप पाण्डे और मेधा पाटकर के नेतृत्व में NGO गैंग वाले, AFSPA कानून और भारतीय सेना के अत्याचारों(?) के खिलाफ़ कश्मीर से मणिपुर तक एक रैली निकाल रहे हैं। कुछ सवाल उठ रहे हैं मन में -

1) जब तक कोई NGO छोटे स्तर पर काम करता है तब तक तो "थोड़ा ठीक" रहता है, परन्तु जैसे ही उसे विदेशी चन्दा मिलने लगता है, और वह करोड़ों का आसामी हो जाता है तो वह भारत विरोधी सुर क्यों अपनाने लगता है? यह विदेशी पैसे का असर है या "हराम की कमाई की मस्ती"।

2) NGO वादियों की इस गैंग ने हज़रतबल दरगाह पर शीश नवाकर इस यात्रा की शुरुआत की…। मैं जानना चाहता हूँ कि ऐसे कितने मूर्ख हैं, जिन्हें इसके पीछे का "देशद्रोही उद्देश्य" न दिखाई दे रहा हो?

3) इस घोर आपत्तिजनक यात्रा के ठीक पहले प्रशांत भूषण का बयान किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा तो नहीं? "(अन) सिविल सोसायटी" के अधिकतर सदस्य गाहे-बगाहे ऐसे बयान देते रहते हैं, जिनके गहरे राजनैतिक निहितार्थ होते हैं, शायद इसी उद्देश्य के लिए इन "शातिरों" ने बूढ़े अण्णा का "उपयोग" किया था…?

देश में पिछले कुछ महीनों से NGOs प्रायोजित आंदोलनों की एक सीरीज सी चल रही है, आईये पहले हम इन हाई-फ़ाई NGOs के बारे में संक्षेप में जान लें…


NGOs की "दुकान" जमाना बहुत आसान है…। एक NGO का गठन करो, सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देकर रजिस्ट्रेशन एवं प्रोजेक्ट हथियाओ… अपने राजनैतिक आकाओं को की चमचागिरी करके सरकारी अनुदान हासिल करो… शुरुआत में 4-6 प्रोजेक्ट "ईमानदारी" से करो और फ़िर "अपनी असली औकात, यानी लूट" पर आ जाओ। थोड़ा अच्छा पैसा मिलने लगे तो एक PR एजेंसी (सभ्य भाषा में इसे Public Relation Agency, जबकि खड़ी बोली में इसे "विभिन्न संस्थाओं को उचित मात्रा में तेल लगाकर भाड़े पर आपकी छवि बनाने वाले" कहा जाता है) की सेवाएं लो… जितनी बड़ी "तलवा चाटू" PR एजेंसी होगी, वह उतना ही बड़ा सरकारी अनुदान दिलवाएगी। महंगी PR एजेंसी की सेवाएं लेने के पश्चात, आप मीडिया के भेड़ियों से निश्चिंत हो जाते हैं, क्योंकि यह एजेंसी इन्हें समय-समय पर उचित मात्रा में हड्डी के टुकड़े देती रहती है। जब PR एजेंसी इस फ़र्जी और लुटेरे NGO की चमकदार छवि बना दे, तो इसके बाद "मेगसेसे टाइप के" किसी अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार की जुगाड़ बैठाई जाती है। एक बार ऐसे किसी पुरस्कार की जुगाड़ लग गई तो समझो ये "गैंग" दुनिया की किसी भी सरकार को गरियाने के लाइसेंसधारी बन गई। इससे जहाँ एक ओर इस NGOs गैंग पर विदेशी "मदद"(???) की बारिश शुरु हो जाती है, वहीं दूसरी ओर सरकारों के नीति-निर्धारण में आए दिन टाँग अड़ाना, विदेशी आकाओं के इशारे पर सरकार-विरोधी मुहिम चलाना इत्यादि कार्य शुरु हो जाते हैं। इस स्थिति तक पहुँचते- पहुँचते ऐसे NGOs इतने "गब्बर" हो जाते हैं कि इन पर नकेल कसना बहुत मुश्किल हो जाता है…। भारत के दुर्भाग्य से वर्तमान में यहाँ ऐसे "गब्बर" टाइप के हजारों NGOs काम कर रहे हैं…।

संदीप पाण्डे जी के NGOs के बारे में और जानकारी अगले कुछ दिनों में दी जाएगी, तब तक इनकी "कलाकारी" का छोटा सा नमूना पेश है -

इन "सज्जन" ने 2005 में भारत-पाकिस्तान के बीच मधुर सम्बन्ध बनाने के लिए भी एक "पीस मार्च" आयोजित किया था (ज़ाहिर है कि "सेकुलरिज़्म का कीड़ा" जोर से काटने पर ही ऐसा होता है), यह पीस मार्च उन्होंने 23 मार्च 2005 से 11 मई 2005 के दौरान, दिल्ली से मुल्तान तक आयोजित किया था। इस पीस मार्च का प्रारम्भ इन्होंने ख्वाज़ा निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर शीश नवाकर किया (जी हाँ, वही सेकुलरिज़्म का कीड़ा), और यात्रा का अन्त मुल्तान में बहदुद्दीन ज़कारिया के मकबरे पर किया था (इसीलिए अभी जो AFSPA के विरोध में यह "यात्रा" निकाली जा रही है, उसकी शुरुआत हज़रत बल दरगाह से हो रही है, तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है…)।

खैर हम वापस आते हैं NGOs गैंग की कलाकारी पर…

दिल्ली से वाघा सीमा कितने किलोमीटर है? मेरे सामान्य ज्ञान के अनुसार शायद 450-500 किमी… यानी आना-जाना मिलाकर हुआ लगभग 1000 किमी। यदि एक घटिया से घटिया चौपहिया गाड़ी का एवरेज 10 किमी प्रति किमी भी मानें, तो 100 लीटर पेट्रोल में दिल्ली से वाघा की दूरी (आना-जाना) तय की जा सकती है। सन 2005 के पेट्रोल भाव को यदि हम 40 रुपये मानें तो लगभग 4000 रुपये के पेट्रोल खर्च में एक गाड़ी दिल्ली से वाघा सीमा तक आ-जा सकती है, यदि दो गाड़ियों का खर्च जोड़ें तो हुआ कुल 8000/-। लेकिन पीस मार्च के "ईमानदार" NGO आयोजकों ने दिल्ली-वाघा आने-जाने हेतु दो वाहनों का "अनुमानित व्यय" (Estimate) लगाया 1 लाख रुपये…। अब सोचिये, जो काम 8000 रुपये में हो रहा है उसके लिए बजट रखा गया है एक लाख रुपए, तो फ़िर बचे हुए 92,000 रुपए कहाँ जा रहे होंगे? ज़ाहिर है कि इस अनाप-शनाप खर्च में विभिन्न "एकाउण्ट्स एडजस्टमेण्ट" किए जाते हैं, कुछ रुपये विदेशी दानदाताओं की आँखों में धूल झोंककर खुद की जेब में अंटी भी कर लिया जाता है। अधिकतर NGOs का काम ऐसे ही मनमाने तरीकों से चलता है, इन "फ़ाइव स्टार" NGOs के उच्चाधिकारी एवं कर्ताधर्ता अक्सर महंगे होटलों में ठहरते हैं और हवाई जहाज़ के "इकोनोमी क्लास" में सफ़र करना इन्हें तौहीन लगती है… (विश्वास न हो, तो अग्निवेश के आने-जाने-ठहरने का खर्च और हिसाब जानने की कोशिश कीजिए)।

2005 में आयोजित इस "भारत-पाकिस्तान दोस्ती बढ़ाओ" वाली "पीस मार्च" में पोस्टरों पर 2 लाख रुपये, दो वाहनों के लिए एक लाख रुपये (जैसा कि ऊपर विवरण दिया गया), अन्य यात्रा व्यय ढाई लाख रुपये, उदघाटन समारोह हेतु 1 लाख रुपए, यात्रा में लगने वाले सामान (माइक, सोलर लाइट इत्यादि) हेतु 30 हजार तथा "अन्य" खर्च के नाम पर एक लाख रुपये खर्च किये गये…। ऐसे अनोखे हैं भारत के NGOs और ऐसी है इनकी महिमा… मजे की बात यह है कि फ़िर भी ये खुद को "सिविल सोसायटी" कहते हैं। एक बूढ़े को "टिशु पेपर" की तरह उपयोग करके उसे रालेगण सिद्धि में मौन व्रत पर भेज दिया, लेकिन इस "टीम (अण्णा)" का मुँह बन्द होने का नाम नहीं ले रहा। कभी कश्मीर पर तो कभी AFSPA के विरोध में तो कभी नरेन्द्र मोदी के विरोध में षडयंत्र रचते हुए, लगातार फ़टा हुआ है। यह बात समझ से परे है कि ये लोग सिर्फ़ जनलोकपाल, जल-संवर्धन, भूमि संवर्धन, एड्स इत्यादि मामलों तक सीमित क्यों नहीं रहते? "समाजसेवा"(?) के नाम पर NGOs चलाने वाले संदीप पाण्डे, मेधा पाटकर एवं प्रशांत भूषण जैसे NGOवादी, आए दिन राजनैतिक मामलों के फ़टे में टाँग क्यों अड़ाते हैं?

जनलोकपाल के दायरे से NGOs को बाहर रखने की जोरदार माँग इसीलिये की जा रही थी, ताकि चर्च और ISI से मिलने वाले पैसों में हेराफ़ेरी करके ऐसी घटिया यात्राएं निकाली जा सकें…। ये वही लोग हैं जिनका दिल फ़िलीस्तीनियों के लिए तो धड़कता है, लेकिन अपने ही देश में निर्वासितों का जीवन बिता रहे कश्मीरी पण्डित इन्हें दिखाई नहीं देते…।

मजे की बात यह है कि इसी सिविल सोसायटी टीम की एक प्रमुख सदस्या किरण बेदी ने AFSPA कानून हटाने का विरोध किया है क्योंकि वह एक पुलिस अफ़सर रह चुकी हैं और जानती हैं कि सीमावर्ती राज्यों में राष्ट्रविरोधियों द्वारा "क्या-क्या" गुल खिलाए जा रहे हैं, और सुरक्षा बलों को कैसी विपरीत परिस्थितियों में वहाँ काम करना पड़ता है, लेकिन अरुंधती, संदीप पाण्डे और गिलानी जैसे लोगों को इससे कोई मतलब नहीं है… उनकी NGO दुकान चलती रहे बस…!!!

बात निकली ही है तो पाठकों की सूचना हेतु बता दूँ, कि अफ़ज़ल गुरु को माफ़ी देने और "जस्टिस फ़ॉर अफ़ज़ल गूरू" (http://justiceforafzalguru.org/) नाम के ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में संदीप पाण्डे महोदय, अरुंधती रॉय, गौतम नवलखा, राम पुनियानी, हर्ष मन्दर इत्यादि सक्रिय रूप से शामिल थे…। ज़ाहिर है कि यह सिर्फ़ संयोग नहीं है कि अमेरिका में ISI के एजेण्ट गुलाम नबी फ़ई से पैसा खाकर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत विरोधी राग अलापने में भी इन्हीं NGOs की गैंग के सरगनाओं के नाम ही आगे-आगे हैं (यहाँ पढ़ें… http://blog.sureshchiplunkar.com/2011/07/ghulam-nabi-fai-isi-agent-indian.html इसी से समझा जा सकता है कि इन NGOs की डोर देश के बाहर किसी दुश्मन के हाथ में है, भारत के लोकतन्त्र में इन लोगों की आस्था लगभग शून्य है, भारतीय सैनिकों के बलिदान के प्रति इनके मन में कतई कोई श्रद्धाभाव नहीं है…। इस प्रकार के NGOs भारत की जनता की गाढ़ी कमाई तथा देश के भविष्य पर एक जोंक या पिस्सू की तरह चिपके हुए हैं…

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ज्यादा बड़ा न करते हुए, फ़िलहाल इतना ही…। NGOs की देशद्रोही तथा आर्थिक अनियमितताओं भरी गतिविधियों पर अगले लेख में फ़िर कभी…

विशेष :- "पिस्सू" के बारे में अधिक जानकारी हेतु यहाँ देखें… http://kudaratnama.blogspot.com/2009/08/blog-post_11.html

32 comments:

S Kumar goan said...

सुरेश भाई आप एकदम सही लिखा है. अण्णा जैसे समाज सेवकों को ये गद्दारों ने इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहै हैं. देश की गरीब जनता इसे जान ही नहीं पाती है. क्या इनको इतनी समझ नहीं है कि ऐसे समय पर इस तरह के ब्यान नही देना चाहिए. देश को बांटो और राज्य करो की नीति ये गद्दारों ने अपना रखी है. राष्ट्रीय एकता के हर मुद्दों पर ये प्रश्न खड़ा करते है? राष्ट्र को एक होने से इन्हें बहुत खतरा है. ऐसे शक्तियों के विरोद्ध जनता को आगे आना होगा.
एस के यादव गोवा.

Anonymous said...

दुर्भाग्य यह है कि पढ़ा लिखा हिन्दू भी इतिहास से अनभिज्ञ है या फिर इतिहास को जानना नहीं चाहता. अशिक्षितों को शिक्षित लोग बहका लेते हैं. जिस समय भारत को कुछ सोना गिरवी रखना पड़ा, उस के बाद के चुनावों में एक गांव के लोगों को एक बड़ी पार्टी के नेताजी ऊपर से गुजरता हुआ जहाज दिखाकर समझाने लगे कि कहीं गिरवी नहीं रखा है, इस जहाज में फलां जगह ले जाकर रख लिया है.

उपेन्द्र ' उपेन ' said...

prajatantra men ye gadar bhi sher hai. pakistan men jaker is tarah se apni bat kah ke dikhaye....

Ratan Singh Shekhawat said...

समाज सेवा के नाम पर ये सभी एनजीओ वीर देशद्रोही रंगे सियार है|

I and god said...

सब पैसा खिला रहे हैं , सारी गरीबी तो हिन्दुओं के , राष्ट्रवादियों के हिस्से में ही आई है .

Harsh Rastogi said...

अरे अपने को पता नहीं था कि एनजीओ अच्छा खासा धंधा है, इसके बारे में और पता करके यही धंधा क्यों ना खोल लिया जाये, क्या राय है सुरेश जी । बात की जाये...

सञ्जय झा said...

bhaw....

post padha....fir dubara padha.....
samne aap dikhe.....aur sallute kiya
...............

pranam.

Umesh Chaturvedi said...

ye NGO desh ko barbaad ka rahey hain..........

Naveen Tyagi said...

इतने मुखोंटे आदमी के पास रहते है यहाँ।
हर बार चेहरे और ही हर बार दीखते हैं यहाँ।
यूं आदमी को जिन्दगी के दर्द का अहसास है।
पर जी रहा है इसलिए क़ल पर उसे विश्वास है।
ये जिन्दगी के जीने का कैसा नया अंदाज है।
ये मेरे इस देश को हो गया क्या आज है।

Rameshwar Arya said...

Harsh Jainवर्त्तमान समय में देशद्रोह की बात करना समाज सेवा कहलाता है
आतंकवादियों को बचाना मानवाधिकारवाद कहलाता है
हिन्दू धर्म को गलियां देना सेकुलरवाद कहलाता है
राष्ट्रभक्त संगठनो को गलियां देना देश भक्ति कहलाता है
मुसलमानों की चमचागिरी धर्म निरपेक्षता कहलाती है
कश्मीर को आजाद कहना विचारों की स्वतंत्रता कहलाती है
शत्रु राष्ट्र को प्रोत्साहन देना अहिंसा कहलाता है
कायरता पूर्ण बयां देना अमन का सन्देश कहलाता है
समाज को जातियों में विभाजित करना दलित प्रेम कहलाता है
गो हत्या का विरोध करना साम्प्रदायिकता कहलाता है
इंट का जवाब पत्थर से देने की बात करना विद्वेष फैलाना होता है
बेवजह भूक हड़ताल पर बैठना गाँधी गिरी कहलाती है
बी जे पी का कोई भी बयान राजीति करना कहलाता है
मोदी के खिलाफ बोलने वाला सबसे इमानदार व्यक्ति कहलाता है
भारत माता की जय बोलने वाला संघी कहलाता है
वन्दे मातरम बोलने वाला भगवा आतंकवादी कहलाता है

ऐसे समय में हम इन महानुभाव दनावाधिकर्वादियो से इससे ज्यादा क्या उम्मीद कर सकते हैं ?
-
Indira Jaising ( इन्द्र जयसिंह )

S. A. R. GILANI ( एस.ऐ.आर.गिलानी )

Ghulam Nabi HAGRU ( गुलाम नबी हगरू )

Arundhati Roy ( अरुंधती रॉय )

N. D. Pancholi ( एन.डी.पंचोली )

Shubh Mathur (शुभ माथुर )

Sandeep Vaidya ( संदीप वैद्य )

Human Rights Watch (हमन रिघ्ट्स वाच )

Jagmohan Singh and Anand Patwardhan ( जगमोहन सिंह एंड आनंद पटवर्धन )

Colin Gonsalves ( कोलिन गोंसाल्वेस )

Nandita Haksar ( नंदिता हक्सर )

Nirmalangshu Mukherji ( निर्मालान्ग्शु मुखर्जी )

A.G. Noorani ( ऐ.जी . नूरानी )

Ram Jethmalani (रामजेठमलानी )

PUCL (पी.यू .सी.एल )

PUDR (पी.यू.डी .आर )

Hindusthan Times ( हिंदुस्तान टाईम्स )

Kashmir तिमेस ( कश्मीर टाईम्स )

Ram Puniyani ( राम पुनियानी )

Praful Bidwai (प्रफुल बिदवई )

Amnesty International Appeal ( अमनेस्टी इंटरनेश्नल अपील )

Mushtaq A. Jeelani ( मुश्ताक ऐ . जीलानी )

Inam ul Rehman ( इमाम उल रहमान )

Revolutionary Democracy ( रेवोलुश्नारी डेमोक्रेसी )

Join Chirag for Human Rights ( ज्वाइन चिराग फॉर हमन रैघ्ट्स )

Kashmir library ( कश्मीर लाइबरेरी )

JKCCS ( जे . के . सी . सी . एस )
Justice for Afzal गुरू ( अफसल गुरु को न्याय दो )
www.justiceforafzalguru.org

Meenu Khare said...

रंगे सियार....

Desh Premi said...

hindu currupt h to koi kya kar sakta h...

संजय बेंगाणी said...

एक महिला थी, ईर्ष्यालू. भयंकर ईर्ष्यालू. इसे कोई मानसिक बीमारी कह लें. वह जिस अन्य महिला से ईर्ष्या रखती थी, उसका बालक मर गया. नन्हे बच्चे के मौत और माँ के दुख... जो भी देखता आँखे भर आती. मगर ईर्ष्यालू महिला उस महिला के दुख पर खूश हो रही थी. उसे नन्हें कि मौत नहीं, उस महिला का दुख दिख रहा था. इसलिए खूश हो रही थी.

ऐसे ही कुछ लोग है जो देश का भला बूरा. मानवता का भला बूरा नहीं देखते, उन्हें हिन्दूओं से घृणा है अतः उन्हें दुख पहुँचाने वाला काम करना पड़ता है. इसी में उन्हें खूशी मिलती है. चाहे वह कितना ही अविवेकपूर्ण हो. अमानवीय हो.

Rajesh said...

Bahut Hi Badhiya Suresh Ji. Mann ko dhukh hota hai ki ye hindu aab bhi nahi jangege. Excellent.

Jeet Bhargava said...

भाई,
1)अग्निवेश ने बाल श्रम पर 10 हजार का सर्वे (फाइलों मे) करके दिल्ली की कॉंग्रेस सरकार से लाखो रुपये कमा लिए हैं। अन्ना आंदोलन के दूसरे चरण के दौरान ईसा बात का अखबारो मे भी खुलासा हुआ था।
2) शबनम हाशमी ने गुजरात चुनावो से पहले बकायदा कॉंग्रेस से लाखो रुपये लेकर नरेंद्र मोदी और हिंदुओं के खिलाफ जहरीला अभियायान छेड़ा था।
3) मध्यप्रदेश मे अपने शासन के दौरान DIRTY सिंह ने सरकारी घाटे का हवाला देकर अखबारो को विज्ञापन देना बंद कर दिया था। लेकिन उसे दौरान तीस्ता सेटलवाद की पत्रिका को लाखो के विज्ञापन देकर उसके वारे-न्यारे किए। यह रपट नवभारत टाइम्स मे अरुण दीक्षित ने दी थी। बाद मे यही तीस्ता नरेंद्र मोदी के खिलाफ कॉंग्रेस के लिए बहुत 'काम' आई।
4) अरुणा राय ने राजस्थान मे कई सरकारी अफसरो को ब्लैकमेल किया और पैसा नही देने पर उन्हे आरटीआई के जरिए फंसाया है।
5) मल्लिका साराभाई की दर्पण एकेडेमी ने कॉंग्रेस की मेहरबानी से दिल्ली दूरदर्शन से कई प्रोजेक्ट मोटे दाम पर गटक लिए हैं। यह पार्ट टाइम कबूतर बाजी भी करती हैं।
6) हाल ही मे मुंबई के मिशनरी कॉलेज सेंट जेवीयर्स ने बाकायदा अरुण परेरा और विनायक सेन जैसे नक्सलवादियो को बुलाकर अपने छात्रो मे 'मानवाधिकार' का 'ज्ञान' बांटा। अब सेंट ज़ेवियर के छात्रो पर अरुण परेरा की रिहाई के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाने का दबाव बना रहे हैं। (चर्च+नक्सल)।
7) यही नही कराई जैसे संगठनो ने भी नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी जहर उगला था।
8) पूर्व चुनाव आयुक्त नवीन चावला का जयपुर राजस्थान मे एनजीओ है। जिसमे कई कोंग्रेसी नेताओ ने मोटा 'चन्दा' दिया था। बदले मे चावला ने ईवीएम मशीनों मे गड़बड़ी करकी यूपीए-2 मे अपना योगदान दिया।
9) वर्ल्ड विजन नामक चर्च का एनजीओ बच्चो के नाम पे अकूत चन्दा एकत्र कर रहा है। और धर्माणतरण पर खर्च कर रहा है।
10) कानीमोई और तमिलनाडु के एक फादर व उसके एनजीओ के रिश्ते से तो आप वाकिफ ही हैं।

इन एनजीओ को सिर्फ गुलाम नबी फ़ाई से ही नही बल्कि चर्च से भी अकूत पैसा मिलता है। एनजीओ-चर्च-कॉंग्रेस-नक्सल का गठजोड़ भयंकर किस्म का है। ये लोग आम दलितो को शेष हिंदुओं के खिलाफ भड़का कर मिशनरियो के लिए धर्माणतरण की जमीन तैयार करते हैं।

इसलिए अपना तो एक ही नियम है कि ऐसे किसी भी देशद्रोही एनजीओ को मदद मत करो। समाज के लिए कुछ करना ही है तो 'सेवा भारती' या संघ प्रेरित किसी एनजीओ को आर्थिक-मानसिक-शारीरिक मदद करो।

सुलभ said...

ये सारे कुकर्मी हिन्दुस्तान में फल फूल रहे हैं.
इनके खिलाफ हल्ला बोल जारी रहे है.

जितेन्द्र सिंह : राष्ट्रवादी भारतीय... said...

बहुत शानदार, सटीक और सच्चे लेख के लिए शुभ कामनाएं..
अपने दम पर तो ये भारतीय सरकार या सेना को गरिया नहीं रहे...
ये आस्तीन के सांप केंद्रीय सरकार के रहमोकरम के बिना तो पनप नहीं सकते...
बस यही कह सकते हैं सेकुलरिज्म के नाम पर भेड़ियों (कांग्रेस) ने सियार( NGOs) पाले हुए हैं..
काम दोनों का ही भारत रुपी हरे-भरे उपवन का नाश करना है...
बड़े पिस्सू तो संसद में बैठकर सारे देश का खून पी रहे हैं...
ये तो खटमल हैं जो पिस्सू बनने की राह पर हैं...
अब क्या कर सकते हैं कीटनाशक का छिडकाव तो 2014 में ही होगा...
और अबकी बार कांग्रेस का प्लेग का समूल नाश जरूरी है...
वन्दे मातरम्...
जय हिंद... जय भारत..

J & K STUDY CENTRE said...

Suresh ji namaskar,
aapne in NGO's ki asliyat bhut hi theek dhang se samaj k samne rakhne ka pryas kiya he..vastav me ab desh ko in NGO's ki asliyat dhyan me karni chaiye...jo apne ko sudo secular dikha kar or 5star meetings me rhate he...ese NGO's ko J&k ki ABCD bhi nhi pata..or chand muthi bhar algawadion ko media k shyog se Hawa dene ka ye kaam karte rhate he..kashmir ki samsya ese logon ki vajha se bani hui he..nhi to whan ka awam to ab Algawadion ko achi tarh se samjhne lag gaya he..or pakistan ki to baat karna hi Befkuffi he... par in sab ko jo tavjo Media se mil rhi he vo bhi Chinta ka Vishey he...

संजय बेंगाणी said...

कश्मीर से हिन्दुओं का समूल नाश करने वालों के सूर में सूर मिलाने वाले केजरीवाल को थप्पड़ लगाए जाने के विरोध में "युवा-आजादी" वाले धरने पर बैठे हैं. शर्म आती है मुझे, इन्ही के साथ कुछ दिन पहले "वन्दे मातरम" के नारे लगाए थे.

संजय बेंगाणी said...

संगठन बनाओ, चलते मुद्दों से जुड़ जाओ और .... :)

Anonymous said...

behtar lekh. ab kuchh karna padega...sabse saral yahi lagta hai ki nath ram ki tarha der na karke sahi samaye par sampurna rup se gandhi pariwar ka safaya karna chahiye.

vikas mehta said...

suresh ji namskar apki har post damdar hoti hai is post ke lie bhi dhanyvad .....
अन्ना +मिडिया +तारीफ -बीजेपी
http://vikasmehta.jagranjunction.com/2011/10/19/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AB-%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AA/
janiye is post me kya midiyaa or church bjp or sangh ka tod dhundh rahe hai anna ki teem me

Anonymous said...

kuch navyuvak mil ke aisa fund banaye aur jo bhi aisi harkat karta hai usko jaan se mar de agar kuch log guide kare to hum bhi sab kuch chod ke apne desh ko bachane nikal jayenge hum bhi jihad khada kar denge

निर्झर'नीर said...

दोनों ही है ये बहुत सही नाम दिया है आपने सुरेश जी जोंक , पिस्सू

Krantikaari said...

Anonymous I' coming from US to Bharat. I will contact u all guys who wants to do something on real ground. Currently keep in touch by suresh bhai's blog. I'm writing from my cell phone so can't write in Hindi.

Man said...

वन्देमातरम सर ,
धारदार और तथाकथित फर्जी हाई प्रोफाइल विदेशी चंदे से पोषित भिखारियों के घुटने पर चोट करता लेख |जिस तरह भारत में फर्जी एन .जी.ओ की बाढ़ सी आयी हे ,उस से साबित होता हे की ये धंधा किस कदर फल फूल रहा हे ,जिसका मुख्य आधार येन केन रास्ट्रद्रोह हिन्दूद्रोह करके पैसा कमाना हे ! तथाकथित आदिवासियों और पिछड़े लोगो के नाम पर ये फर्जी मंगते चांदी काट रहे हे ,उसी पेसे को अपने एशो आराम और रास्ट्र विरोधी गतिविधियों में काम में ले रहे हे |

Sanat said...

Aap Jaise kuch log kitna accha kaam karte hain... Ye harami politician chhahte hain ki sadharan logon ko itna paresaan kar do ki apne bibi bachho ko palne me hi mar khap jaaye.. yuvaon ko sharukh ki Chhamak Chhalo dikhao.. 1 no. ka selfish banao, baaki jitna time mile usme woh keval yahi baat karen ki iski ye movie aayi uski woh aayi, isne usme itne dikhaye usme usne itne... Dhoni ne balla bhanjha.. ye chhaka lagaya woh chauka lagya.. isne ye catch pakda.. bas.. desh ke baare main sochne se poori tarah divert karo.. they bloddy only born to rule on us.. Ye harami media inke isaaron pe hi naachti hai..

सतीश सक्सेना said...

शुभकामनायें आपको !

Anonymous said...

बजाते रहिये तूती नक्कारखाने में सुरेश जी....कुछ नहीं बदलने वाला इससे. अब तो दो ही काम उपयुक्त होगा. पहला तो ये कि देश का आक्रोश सुरक्षित रहे और आम चुनाव में कांग्रेस को जूता दिखाने के लिए सब कमर कसे रहें और दूसरा निश्चित ही हमें कुछ इन्दर वर्माओं और बग्गाओं की ज़रूरत है. जब शासक ऐसा अन्यायी और राक्षस हो जाय तब भगत सिंह का मार्ग जी सामने बचता है. बाकी आप तो सदैव की तरह अभिनन्दन के पात्र हैं ही...बहुत-बहुत बधाई.
पंकज झा.

Anonymous said...

Suresh ji thanks a lot for keeping us well informed what is going on inside the nation........http://www.neerjasoftwares.com

Anonymous said...

Suresh ji ram-ram
AFSPA kanoon samapat to karbana cahate he parantu 20 aug2011 se charch ke attankvadiyo ne manipur ko jodne bale do rajmargo ki nakavandi kar rakhi he uska koi virodh na to ye sanghtan or na he dharamnirpacch dampanthi media kar rhai he or to or sikhandi P.M.OR home ministar cupechap neero ki tarh banshi baja rahe he/ akhir bajye bhi kiyo na catholic soniya jab tak issara na kare tab tak katputli sarkar kuch karne bali nahi/

vijender

Anonymous said...

sabhi anonymous ke sath mai bhi kuchh bhi karne ko taiyar hu. bus platform milna chahiye.