Tuesday, September 20, 2011

Narendra Modi, Next PM of India (A Micro Post)

क्या नरेन्द्र मोदी का विरोध करने वाले, वर्तमान यूपीए सरकार से खुश हैं? (Micro Post)


तीन दिवसीय उपवास और सदभावना मिशन प्रारम्भ करके नरेन्द्र मोदी ने 2012 के गुजरात चुनावों और 2014 के लोकसभा चुनावों का बिगुल फ़ूँक दिया है। 2012 में तो गुजरात में उनकी चौथी बार वापसी होगी ही, इसमें कोई शंका नहीं है… परन्तु 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में उनकी ताजपोशी थोड़ा मुश्किल सफ़र है, सेकुलर काँटों भरी राह है…

मैं नरेन्द्र मोदी के विरोधियों से कुछ पूछना चाहता हूँ -

1) यदि वे नरेन्द्र मोदी के विरोधी हैं तो इसका मतलब यह लगाया जाए कि वे कांग्रेस के समर्थक हैं?

2) यदि कांग्रेस समर्थक नहीं हैं तो "भोंदू युवराज" के इस सशक्त विकल्प को अपना समर्थन क्यों नहीं देते?

3) यदि मोदी को समर्थन नहीं दे सकते इसका मतलब तो यही है कि आप महंगाई, कुशासन, आतंकवाद, भ्रष्टाचार से पीड़ित नहीं हैं।

4) मीडिया के जो मित्र हैं, क्या वे यह बता सकते हैं कि यदि भोंदू युवराज नहीं, नरेन्द्र मोदी भी नहीं तो फ़िर कौन?

5) क्या मोदी विरोधियों के पास नरेन्द्र मोदी से बेहतर प्रशासक, प्रधानमंत्री के पद हेतु उपलब्ध है?

6) यदि उनके पास मोदी का विकल्प नहीं है, और वे सपने बुन रहे हैं कि शायद कांग्रेस में कोई चमत्कार हो जाएगा और यह पार्टी एकदम सुधर जाएगी… या फ़िर तीसरे मोर्चे नामक "भानुमति के कुनबे" द्वारा कांग्रेस को समर्थन देने से देश में सुशासन आ जाएगा तो निश्चित ही वे लोग मुंगेरीलाल हैं…

तात्पर्य यह है कि नरेन्द्र मोदी के विरोधी स्पष्ट जवाब दें कि 2014 में यदि मोदी नहीं, तो फ़िर कौन? यदि मोदी नहीं, तो क्या वे लोग कांग्रेस की सत्ता लगातार तीसरी बार सहन करने की क्षमता रखते हैं? राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री स्वीकार कर सकते हैं? दस साल तक सोनिया, मनमोहन, चिदम्बरम, पवार, सिब्बल, लालू को झेलने के बाद अगले पाँच साल भी इन्हें झेलने की क्षमता है? यदि नहीं… तो फ़िर मोदी का विरोध क्यों? विरोध करना ही है तो सकारात्मक विरोध करो… मोदी का कोई अन्य "सशक्त और व्यावहारिक विकल्प" पेश करो… कब तक सेकुलरिज़्म का घण्टा बजाते रहोगे?

27 comments:

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

सही कह रहे हो सुरेश जी,
लेकिन लग रहा है कि तीसरी बार भी किसी ना किसी तिकडमबाजी से सत्ता में कांग्रेस ही आयेगी।

देख लेना ये हमारे देश की भोली जनता है जल्द ही सब भूल जायेगी,
चुनाव से तीन महीने पहले देखना क्या गजब दाँव चला जायेगा, जिसका तोड किसी के पास नहीं होगा,

जय हिन्द, जय भारत, वन्दे मातरम।

aativas said...

2014 is still a long way to go. Within days things change in India. Political leaders need to have long term vision ... but a politician in a hurry never would appeal masses. I am sure Mr. Modi knows the reality better than me.

bharat pandey said...

जाट देवता (संदीप पवाँर)@.......aapki baat 101% sahi hai. lakh ghtale, dhamake aur bhukhmari kar le ye sarkar fir last ball par six maar ke match jeet hi legi.

Abhishek said...

जब अटल जी 1999 में प्रधान मंत्री बने थे और बीजेपी तीसरी बार पॉवर में आई थी तब इंडिया की ग्रोथ रेट 3.23 थी और जब गयी थी बीजेपी गयी थी तब 8.16 थी. आज 2011 में यही ग्रोथ रेट 10 के आसपास है लास्ट ७ साल में कांग्रेस ने केवल 2% जादा की ग्रोथ दी है. वही बीजेपी ने ग्रोथ रेट को dubble से जादा कर दिया था. उसके बाद भी बीजेपी हार गयी कारण सिर्फ इतना है की इंडिया की अनपढ़ जनता को ग्रोथ रेट का फंडा समझ नहीं आता है और जिनको समझ आता है बोले तो मिडल क्लास वो तो किसी को वोट देने में इंट्रेस्टेड ही नहीं रहते है. देख ली जियेगा अनपढो को फिर कांग्रेस कोई न कोई लुभावने वादे करके पटा लेगी, मुस्लिम को तो पंजे के अलावा कुछ दीखता नहीं है. और फिर अगली बार यही कांग्रेस जनता के सीने में मूंग दरने के लिए आ जाएगी.

संजय बेंगाणी said...

जो विरोध है वह अपनी अपनी दुकाने बचाने की कवायत मात्र है. निर्णय वोट से ही होना है. मीडिया अब सत्ता परिवर्तन कर सके उतना विश्वसनीय नहीं रह गया है.

मोदी आज के दिन तक "मास्टर रणनीतिकार" है. तीन दिन तक मीडिया और विरोधियों ने वही किया जो मोदी ने चाहा.

Accordis Healthcare said...

Ab ki bar yadi aapko is bharath sarkar se mukti chahiye to 2010 ko chunavo ko nakar de aur jab tak koi sahi vayakti nahi aata tab tak vote na kare.

सुलभ said...

JO LOG YE SAPNE DEKHTE HAIN KI BHAARAT MAHASHAKTI BANEGA, UNHE KAM SE KAM MODI KA SWAAGAT KARNA CHAAHIYE. KARYKAAL ASAFAL HONE PAR, AGLE CHUNAAV ME BAHAR KA RAASTA DIKHA SAKTE HAIN. ISME SAMASYA KYA HAI. HAR 5 SAAL ME CHUNAAV TO HOTE HEE HAIN.

प्रतुल वशिष्ठ said...

sandeep panwaar jii, yadi aap bhool gaye to baakii bhii bhool jaayenge...
yadi jantaa bholii-bhaalii hai to usmen aap bhii shaamil hain... aap apne aas-paas jot jalaaye rakhiyegaa aur ham apne aas-paas.

suresh ji... aapkii niymittaa kaabile-taarif.

राहुल पंडित said...

janta jaag chuki hai,wo sab samajhti hai ki muslim tushtikaran matalab dharmnirpekshata nahi hota

JAI HIND said...

जय हिन्द
वन्देमातरम
बहुत समय बाद आप का ब्लाग पढ रहा हु फ़िलहाल तो पुरानी छुटी हुइ ब्लाग पढने मे व्यसत हु भाइ प्रधानमंत्री तो मोदी ही बनेगे ओर रही कुत्तों के भोंकने कि बात तो आधे तो भोंकते भोंकते तिहाड जा चुके है बाकी भी अपने पापो की सजा काटने जा चुके होगें

Ashish Shukla said...

राहुल गांधी से मोदी जी बेहतर हैं इसमे कोई शक नही है परन्तु रा० ज० ग० के सहयोगी दल उन्हे कभी भी प्रधानमन्त्री नही बनने देंगे, शरद यादव और नीतिश कुमार कभी भी इसके लिये तैयार नही होंगे क्योंकि वे मुस्लिम वोट पाने के लिये मोदी जैसे व्यक्ति का समर्थन कर अपने उपर सम्प्रदायिक होने का ठ्प्पा किसी भी हालत मे नही लगाना नही चाहेंगे।
हमारा देश वह देश है जंहा कोई भी मुस्लिम नेता वन्देमातरम कहने को तैयार नही होता, फ़िर भी देश मे कोई राजनैतिक दल, समाजिक संस्था यह नही कह्ती कि यह देश का अपमान है। कोई भी मुस्लिम नेता चन्दन, तिलक लगाने को तैयार नही हो तो कोई हिन्दू संस्था यह नही कह्ती कि यह हिन्दुओं का अपमान है पर मोदी ने टोपी नही पहनी तो इनमे से कई मुस्लिमों के साथ मिलकर चिल्लाते हैं कि यह इस्लाम का अपमान है।

Anonymous said...

Suresh ji Ram-Ram
giribo ki hamdard khangresh(Soniya) Party k netartab bali sarkar ne suprem court me halpnama dayar kar k kaha he ki sahri ilako me rahne bale log jinki income Rs 40 aur gramin ilako me jinki income Rs 24 per day he wo Garibo ki Hamdard Bharat sarkar ke anusar garib nahi mane ja sakte/ yani unki wo income jiwan yappan ke liye prayapt he/ye garibo ki hamdard sarkar ne garibo ke chahre per jor ka chanta mara he

Modi ne islamic topi na pahankar sahi kiya he/ jab islam k pujario ko tilak lagane ki to baat chodiy Jis desh ka ann(Food)Jal,vayu grahan karte he us desh ki jay bolne me unhe parasani he to hum unki islami topi kiyo pahne sath hi jo hindo islami topi pahne ta he uska bahiskar kare

Vijender

आशा जोगळेकर said...

काश ऐसा ना हो और अण्णा हजारे के आव्हान को लोग अच्छा प्रतिसाद दै और अपने हित को ध्यान में रख कर वोट करें ।

Mahendra Gupta said...

Vande Mataram!
Aap Sahi kah rahe hai. Vastava me yadi koi imandari se jawab de to Modi ji ka ko vikalp nahi hai.
Mai Abhishek ji se bhi sahmat hu. Congress sayad isi over confident me hai. Ki use muslim vote, narega vote, Lal Fita Sahi Vote aur Congress ke andh bhakt Secularo ka vote jarur milega. Yahi Ye wote hai jo modi ji ke raste me rora hai.
Ye baat jarur kahane layak hai ki
jab ek musalman tika lagene se mana karta hai to use non-sekular kyo nahi kaha jata.
Iska jawab sabhi secular aur aur congresiyo se puchhana chahta hu.
Iske jawab we kabhi nahi denge.

Neeraj नीरज نیرج said...

कुदरत का अनोखापन उसके संतुलन में है। सभ्यताओं के संघर्ष में भारत को मज़बूत नेतृत्व चाहिए क्योंकि यह देश पिलपिलों का देश कहला रहा है और अब अति हो चुकी है। पानी सिर से ऊपर बह रहा है। मोदी अभी नहीं तो कभी नहीं। 2012 में गुजरात के लोग मोदी को मुख्यमंत्री नहीं चुनेंगे बल्कि वे देश को प्रधानमंत्री देंगे। उधर, यूपी में अगर 2012 में राहुल थोड़ी-सी भी सफलता हासिल करें तो पिलपिलों के हौसलों में ऊभार आएगा। राहुल को चुनौती केवल मोदी दे सकते हैं। ये बात अलग है कि दोनों की तुलना बेमानी और हास्यास्पद है।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

मैं तो हमेशा आशावादी ही हूं, अच्छे दिन आने चाहिये और उसके लिये २०१४ का इन्तजार भी करेंगे.

Anonymous said...

hamesh ki tarah achha lekh par kafi chhota laga

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

भाईसाहब, मुझे तो पूरा विश्वास है की अगले प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ही होंगे| मैं तो २०१४ की प्रतीक्षा भी नहीं कर रहा| अब तो ऐसा विश्वास होने लगा है की अभी कुछ महीनों में ही वर्तमान सरकार गिरेगी और दुबारा चुनाव होने पर नरेंद्र भाई मोदी सिंहासन पर बैठेंगे|

Anonymous said...

अतिशिक्षित व्यक्तियों से हमेशा सावधान रहे. और हो सके तो थोडा दूर रहें

एक नमूना, ..................."शहरी इलाकों में 32 रुपये और ग्रामीण इलाकों में 26 रुपये खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं माना जाएगा"............., और ये आकलन मूर्खों का नहीं अपितु अतिशिक्षित अर्थशास्त्रियों द्वारा किया गया, जिन्होंने पता नहीं विश्व के कितने बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों से कितनी बड़ी-बड़ी डिग्रीयां ली होगी, जिसको समझना मेरे जैसे साधारण पड़े व्यक्तियों के लिए तो संभव ही नहीं है, तो फिर हमारे अनपद भाई-बहनों के बारे में तो कुछ कहा ही नहीं जा सकता.

यदि किसी मनुष्य का आधा शरीर ओवन के अंदर है, और आधा फ्रीज़ के अंदर, और कोई व्यक्ति यदि ये बोले की, ये मनुष्य बहुत आरामदायक स्थिती में है, तो बेझिझक ये मान ले कि यह व्यक्ति अतिशिक्षित बहुत बड़े-बड़े डिग्रीधारी वाला सांख्यिकी विज्ञानं का विशेषज्ञ है (SPECIALIST OF STATISTICAL SCIENCE).

Raj said...

http://www.wikileaks.org/wiki/NDTV_censored_blogger_over_criticism_of_Mumbai_terrorist_attack_reporage,_27_Nov_2008

Anonymous said...

अगले प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ही होंगे|

Anonymous said...

यदि अडवाणी ने टांग नहीं अड़ाई|

मैं और मेरा परिवेश said...

मोदी नागनाथ हैं और राहुल साँपनाथ। कुछ लोग नागनाथ को फालो कर रहे हैं और कुछ साँपनाथ को। देशहित चाहने वाले तो अण्णा के साथ हैं।

Man said...

वन्देमातरम सर ,
बाकि तो अपनी जगह हे ही लेकिन इस बूढ़े भाऊ को पता नहीं पि.एम् वाटिंग का क्या शोक लगा हे ?ये जरूर टांग फसाता नजर आ रहा हे |.................................................................http://jaishariram-man.blogspot.com/2011/09/blog-post_23.html.........................................जरूर पधारे

भरतसिंह बावरला said...

कशमीर में मुस्लमानो ने तिरंगा जलाया था...पर कुछ नही बोले कांग्रेस....हर मुस्लमान वदें मातरम और भारतमाता के नारो से परहेज रखते है और कहते है कि ये तो इस्लाम में हराम है...इतनी बडि. बात कोइ देश के खिलाप कहता है तो वो देशद्रोही होता है...पर मजाल है किसी ने कुछ नही कहां इस टिप्प्णी पर.....ओर यही टिप्प्णी अगर कोई हिन्दु या बी.जे.पी. वाले कर देते तो पुरे देश में बवाल खड़ा कर देते थे.....क्योकि मुस्लमानो के वोट कांग्रेस को चाहिये है इसलिये वो चुप है....
तब इस देश का मीडिया कहाँ था "? १- याद करो कांग्रेस वालो जब इंदिरा गाँधी के घर मे एक प्रसंग मे श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य सबको तिलक लगा रहे थे लेकिन तत्कालीन केबिनेट रेल मंत्री अब्दुल रहमान अंतुले ने शंकराचार्य का हाथ पकड लिया और कहा की इस्लाम मे तिलक हराम है वो नहीं लगवाएंगे .. तब तुम्हारी सम्भावना कहा थी ?? २- अभी जब अन्ना का अनसन चल रहा था तो जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी ने मुसलमानों को अन्ना के आन्दोलन से दूर रहने का फ़तवा दिया . उन्होंने कहा की वहा "वंदेमातरम" गया जाता है और भारत माता की जय के नारे लगाये जाते है . ३- जब इस पर एक पत्रकार ने कांग्रेस के प्रवक्ता रशीद अल्वी की टिप्पणी ली तो उन्होंने कहा की बुखारी ठीक कह रहे है इस्लाम मे अल्लाह के सिवा किसी की भी इबादत नहीं की जा सकती चाहे वो अपना राष्ट्रगान या अपना देश ही क्यों ना हों .!!!

Dr.Ashok Choudhary said...

प्रिय सुरेशजी,
आपकी हेट मेल पढाते पढाते ऊब गया हूँ. मेरे मोबाइल की कालर ट्यून में बरसों से एक ही गीत बजता है-वंदे मातरम और मुझे वह दुनिया का सबसे खूबसूरत गान लगता है.लेकिन में केवल आलोचना के लिए मुसलमानों या कोंग्रेस को चुनूं, इसके लिए मेरे पास समय नहीं है. क्योंकि मैं जनता हूँ कि केवल आलोचना से काम चल जाता तो, अब तक नेहरू परिवार या कोंग्रेस की विदाई हो जाती और भारत एक समृद्ध देश बन जाता. परन्तु ऐसा कहाँ हो पाया है.अब तो भाजपा भी इन टोटकों में कोंग्रेस से आगे निकल रही है. मैं मुसलमानों के पक्षधरों का भी इतना ही विरोधी हूँ जितना उनके विरोधियों का. दोनों एक ही रस्ते पर चल रहे हैं. एक नों इस्सु को इस्सु बना रहे हैं. १९०५ में अंग्रेजों ने जो फोर्मुला हिंदू-मुस्लिम विवाद का बनाया था उसी पर सब काम कर रहे हैं. नरेन्द्र मोदी भी पता नहीं क्यों अपराध भाव से मुसलमानों को गले लगा रहे थे.बड़ा ढोंग लगा मुझे उसमें भी. आप उनसे काफी प्रभावित हैं तो उन तक यह बात भी पहुंचाहिये कि क्या नेहरू परिवार की तरह ही तो वह कार्य नहीं कर रहे हैं. वे कुर्सी से चिपक गए हैं, जैसे उनके बिना गुजरात खत्म ही हो जायेगा. क्यों नहीं नए आदमी को मौका देते हैं. और क्यों वे मुसलमानों को बेवकूफ बनाने के घृणित कार्य में कोंग्रेस की तरह लगे हैं.
सुरेशजी, आपनी अप्रोच बदलिए, आपके विचारों का प्रवाह नियंत्रित कीजिये, समाज को फायदा होगा, क्योंकि आप जैसे विद्वान कम ही पैदा हो पाते हैं.

Shayari said...

Modi is fittest candidate for PM and he will do the justice to post,but is he allowed to do so??