Wednesday, September 7, 2011

Narendra Modi, Lokayukta in Gujrat and Congress

नरेन्द्र मोदी से निपटने के "दूसरे तरीके" ढूँढ रही है कांग्रेस…

विगत तीन चुनावों से गुजरात में बड़ी ही मजबूती से जमे हुए भारत के सबसे सफ़ल मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को वहाँ से उखाड़ने के लिए कांग्रेसी हथकण्डों का कोई अन्त नज़र नहीं आ रहा। गुजरात के चुनावों में लगातार जनता द्वारा नकारे जाने के बावजूद कांग्रेसी चालबाजियों में कोई कमी नहीं आई है। याद नहीं पड़ता कि भारत के किसी भी मुख्यमंत्री के खिलाफ़ कांग्रेस ने इतनी साज़िशें रची हों… कुछ बानगियाँ देखिये -

1) जैसा कि सभी को याद है, 2002 के गुजरात दंगों के बाद नरेन्द्र मोदी के खिलाफ़ सतत एक विशिष्ट "घृणा अभियान" चलाया गया। मीडिया के पालतू कुत्तों को लगातार मोदी पर भौंकने के लिए छोड़ा गया।

2) तीस्ता सीतलवाड ने तो सुप्रीम कोर्ट में झूठे हलफ़नामों (Teesta Setalvad Fake Affidavits) की झड़ी ही लगा दी, रईस खान नामक अपने ही सहयोगी को धोखा दिया, प्रमुख गवाह ज़ोहरा को मुम्बई ले जाकर बन्धक बनाकर रखा, उससे कोरे कागज़ों पर दस्तखत करवाए गये… लेकिन सभी दाँव बेकार चले गये जब स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता को लताड़ लगाते हुए फ़र्जी हलफ़नामे दायर करने के लिए उसी पर केस करने का निर्देश दे दिया।

3) नरेन्द्र मोदी को "राजनैतिक अछूत" बनाने की पूरी कोशिशे हुईं, आपको याद होगा कि किस तरह बिहार के चुनावों में सिर्फ़ एक बार मंच पर नीतीश कुमार और नरेन्द्र मोदी को हाथ मिलाते देखकर कांग्रेस-राजद और मीडिया के कुछ स्वयंभू पत्रकारों(?) को हिस्टीरिया के दौरे पड़ने लगे थे। इस घृणा अभियान के बावजूद नीतीश कुमार और भाजपा ने मिलकर बिहार में सरकार बना ही ली…

4) सोहराबुद्दीन एनकाउण्टर के मामला भी सभी को याद है। किस तरह से एक खूंखार अपराधी को पुलिस द्वारा एनकाउण्टर में मार दिये जाने को मीडिया-कांग्रेस और सेकुलरों(?) ने "मानवाधिकार" (Soharabuddin Encounter Case) का मामला बना दिया। अपराधी सिर्फ़ अपराधी होता है, लेकिन एक अपराधी को "मुस्लिम मज़लूम" बनाकर जिस तरह से पेश किया गया वह बेहद घृणित रहा। ये बात और है कि पिछले 5 वर्ष के आँकड़े उठाकर देखे जाएं तो उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र में सबसे अधिक "पुलिस एनकाउण्टर" हुए हैं, लेकिन चूंकि वहाँ भाजपा की सरकारें नहीं हैं इसलिए अपराधियों को "सताये हुए मुसलमान" बताने की कोशिश नहीं की गई। बहरहाल, नरेन्द्र मोदी को "बदनाम" करने में कांग्रेस और मीडिया सफ़ल रहे… ("बदनाम" अर्थात, उन तटस्थ और दुनिया से कटे हुए लोगों के बीच बदनाम, जो लोग मीडिया की ऊलजलूल बातों से प्रभावित हो जाते हैं), परन्तु अन्त-पन्त कांग्रेस का यह खेल भी बिगड़ गया और नरेन्द्र मोदी एक के बाद एक चुनाव जीतते ही जा रहे हैं।

5) हाल ही में कांग्रेस ने एक कोशिश और की, कि 2002 के दंगों के भूत को फ़िर से जिलाया जाए… इस कड़ी में संजीव भट्ट नामक पुलिस अधिकारी (जो कि कांग्रेसी नेताओं के नज़दीकी हैं और जिनके आपसी ईमेल से उनकी पोल खुल गई) के जरिये एक शपथ-पत्र दायर करके नरेन्द्र मोदी को घेरने की कोशिश की गई…। लेकिन मामला तीस्ता सीतलवाड की तरह फ़िर से उलट गया और संजीव भट्ट कोर्ट में झूठे साबित हो गये।


यह तो थे चन्द ऐसे मामले जहाँ बार-बार गुजरात में 2002 में हुए दंगों को "भुनाने"(?) की भद्दी कोशिशें हुई, क्योंकि कांग्रेस-मीडिया और वामपंथी सेकुलरों का ऐसा मानना है कि भारत के 60 साल के इतिहास में सिर्फ़ एक ही हिन्दू-मुस्लिम दंगा हुआ है और वह है गुजरात 2002। इससे पहले के सभी दंगों, एवं कांग्रेसी सरकारों के कालखण्ड में हुए मुरादाबाद-बरेली-मालेगाँव-भागलपुर-मुम्बई-भिवण्डी जैसे हजारों भीषण दंगों को "भुला दिया जाना" चाहिए।

खैर… अब जबकि कांग्रेस के सभी "धार्मिक और साम्प्रदायिक" दाँव उलटे पड़ चुके, तो अब कांग्रेस ने नरेन्द्र मोदी को अपदस्थ करने के लिए, "कर्नाटक में आजमाई हुई चाल" सोची है… जी हाँ सही समझे आप, लोकायुक्त-लोकायुक्त रिपोर्ट का कार्ड खेलकर नरेन्द्र मोदी को 2014 के आम चुनावों से पहले हटाने की साज़िशें शुरु हो गई हैं। फ़िलहाल देश में "ब्राण्ड अण्णा" की बदौलत भ्रष्टाचार के विरुद्ध माहौल बना हुआ है, इसी का फ़ायदा उठाकर कांग्रेसी राज्यपाल ने गुजरात में श्री मेहता को एकतरफ़ा निर्णय करके लोकायुक्त नियुक्त कर दिया। इस बात पर संसद की कार्रवाई कई बार ठप भी हुई, लेकिन कांग्रेस अड़ी हुई है कि यदि लोकायुक्त रहेंगे तो मेहता साहब ही।

पहले हम नियम-कानूनों, प्रक्रिया और परम्परा के बारे में जान लें, फ़िर मेहता साहब के बारे में बात करेंगे…। भारत एक संघ-राज्य है, जहाँ कोई सा भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय जिसमें राज्यों पर कोई प्रभाव पड़ता हो… वह निर्णय केन्द्र और राज्य सरकार की सहमति से ही हो सकता है। केन्द्र अपनी तरफ़ से कोई भी मनमाना निर्णय नहीं ले सकता, चाहे वह शिक्षा का मामला हो, पुलिस का मामला हो या किसी नियुक्ति का मामला हो। किसी भी राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति राज्य सरकार की सहमति से ही हो सकती है, जिसमें राज्य का मंत्रिमण्डल रिटायर्ड जजों का एक "पैनल" सुझाता है, जिसमें से एक जज को आपसी सहमति से लोकायुक्त चुना जाता है। (उदाहरण के तौर पर संतोष हेगड़े को कर्नाटक का लोकायुक्त बनवाने में आडवाणी जी की सहमति महत्वपूर्ण थी)।

गुजरात के वर्तमान मामले में जो हुआ वह "आश्चर्यजनक" है -

1) विपक्ष और मुख्य न्यायाधीश ने "पैनल" की जगह सिर्फ़ एक नाम (यानी श्री मेहता का) ही भेजा, बाकी नामों पर विचार तक नहीं हुआ।

2) नरेन्द्र मोदी ने चार जजों के नाम भेजे थे, लेकिन राज्यपाल और नेता प्रतिपक्ष सिर्फ़ मेहता के नाम पर ही अड़े रहे, मामला लटका रहा और अब "अण्णा इफ़ेक्ट" का फ़ायदा उठाने के लिए राज्यपाल ने एकतरफ़ा निर्णय लेते हुए मेहता की नियुक्ति कर दी, जिसमें मुख्यमंत्री की सहमति नहीं थी।

3) नवनियुक्त लोकायुक्त श्री मेहता 1983 में जज बनने से पहले वरिष्ठ कांग्रेसी नेता केके वखारिया के असिस्टेंट हुआ करते थे, वखारिया जी गुजरात कांग्रेस के "लीगल सेल" के प्रमुख हैं।

4) जस्टिस मेहता की सबसे बड़ी क्वालिफ़िकेशन यह बताई गई है कि "अण्णा हजारे" जो कि फ़िलहाल "भ्रष्टाचार हटाओ के चकमक ब्राण्ड" बने हुए हैं, वे जब गुजरात आए थे तो श्री मेहता के यहाँ रुके थे… (यानी अण्णा हजारे जिसके यहाँ रुक जाएं, वह व्यक्ति एकदम "पवित्र" बन जाएगा)।

5) नेता प्रतिपक्ष को गुजरात में उपलब्ध 40 अन्य रिटायर्ड जजों के नाम में से कोई नाम सुझाने को कहा गया, लेकिन नहीं… कांग्रेस सिर्फ़ जस्टिस मेहता के नाम पर ही अड़ी है।

6) इससे पहले 2006 से 2009 के बीच एक अन्य रिटायर्ड जज श्री केआर व्यास का नाम भी, लोकायुक्त पद के लिए कांग्रेस ने खारिज कर दिया था, जबकि यही सज्जन महाराष्ट्र के लोकायुक्त चुन लिए गये। क्या कोई कांग्रेसी यह बता सकता है कि जो जज गुजरात में लोकायुक्त बनने के लायक नहीं समझा गया, वह महाराष्ट्र में कैसे लोकायुक्त बनाया गया?

एक बात और भी गौर करने वाली है कि गुजरात से सम्बन्धित कई मामलों पर न्यायालयों ने अपने निर्णय सुरक्षित रखे हैं या रोक रखे हैं, लेकिन जब भी कोई NGO गुजरात या नरेन्द्र मोदी के खिलाफ़ याचिका लगाता है तो उसकी सुनवाई बड़ी तेज़ गति से होती है, ऐसा क्यों होता है यह भी एक रहस्य ही है।

कुल मिलाकर तात्पर्य यह है कि गुजरात दंगों की फ़र्जी कहानियाँ, गर्भवती मुस्लिम महिला का पेट फ़ाड़ने जैसी झूठी कहानियाँ मीडिया में बिखेरने, तीस्ता "जावेद" सीतलवाड द्वारा झूठे हलफ़नामों में पिट जाने, सोहराबुद्दीन मामले में "मानवाधिकारों" का गला फ़ाड़ने, संजीव भट्ट द्वारा एक और "कोशिश" करने के बाद, अब जबकि कांग्रेस को समझ में आने लगा है कि "धर्म", "साम्प्रदायिकता" के नारों और गुजरात दंगों पर "रुदालियाँ" एकत्रित करके उसे चुनावी लाभ मिलने वाला नहीं है तो अब वह नरेन्द्र मोदी को अस्थिर करने के लिए "दूसरा रास्ता" पकड़ रही है।

ज़ाहिर है कि यह दूसरा रास्ता है "अपना लोकायुक्त" नियुक्त करना, अब तक मोदी के खिलाफ़ भ्रष्टाचार का एक भी मुद्दा नहीं है, इसलिए लोकायुक्त के जरिये भ्रष्टाचार के मुद्दों को हवा देना। यदि मुद्दे नहीं हों तो "निर्मित करना", उसके बाद हो-हल्ला मचाकर "अण्णा हजारे ब्राण्ड" के उपयोग से नरेन्द्र मोदी को अपदस्थ या अस्थिर किया जा सके…। कांग्रेस को यह काम 2013 के अन्त से पहले ही पूरा करना है, क्योंकि उसे पता है कि देश में 2014 का अगला आम चुनाव "राहुल गाँधी Vs नरेन्द्र मोदी" ही होगा, इसलिये कांग्रेस में भारी बेचैनी है। यह बेचैनी, "अण्णा आंदोलन" के दौरान मुँह छिपाए बैठे रहे, और फ़िर संसद में लिखा हुआ बकवास भाषण पढ़कर अपनी भद पिटवा चुके "युवराज" के कारण और भी बढ़ गई है…

21 comments:

संजय बेंगाणी said...

कांग्रेस की चिंता अगला विधानसभा चुनाव नहीं हैं, क्योंकि वह सत्ता में नहीं आएगी यह वह खूद जानती है. असली मामला उसके बाद का लोकसभा चुनाव है, जिसमें सीधा मुकाबला मोदी-राहुल ने बीच होना है. राहुल युवा और साफ सुथरा है(?) मगर मोदी भी इमानदार और कुशल प्रसाशक है. ऐसे में मोदी को (जो कि साम्प्रदायिक तो रहे नहीं क्योंकि मुस्लिम वोट देने लगे है) भ्रष्ट बनाना जरूरी है. तो एनजीओ, सरकारी एजेंसियाँ, राज्यपाल, स्थानीय अखबार सभी को काम पर लगा दिया गया है.

Deepesh said...

सुरेश जी आप इस सूची में सांप्रदायिक हिंसा निरोधक बिल को भी जोड़ सकते है जिसे मुख्य रूप से श्री मोदी को ही ध्यान में रख कर बनाया गया है

Man said...

वन्देमातरम सर ,
भाई सहाब नरेंद्र मोदी जी को गुजरात में अवेध लोकायुक्त नियुक्ति से घेरने का दांव खेल कर कांग्रेस ने अन्ना और बाबा रामदेव के बाद फिर अपने गले में मरा हुवा सांप लटका लिया हे !!
जो निकालते बन रहा ना लटकाते |कांग्रेस के आला नेता दिशा सूल हो गए और उसके नीति निर्धारक अक्ल और मती से अंधे |कांग्रेस को सबसे बड़ी चोट राजनितिक , जनरल नोलेज नवजात राहुल गाँधी के इस स्टेज पर राजनितिक फेलियर के कारण पडी हे |अब तक कांग्रेस उस के खिलाफ सभी मुद्दों का नकटाई और बेशर्मी से मुकाबला करते आयी थी ,इसके प्र्वक्तावो के उलूल जुलूल बयान सिद्ध कर देते थे |लेकिन यंहा तो पके हुवे धान के खेत में आग लग गयी ,ये सदमा कांग्रेस को कतई सहन नहीं हो रहा हे |यंही कांग्रेस कमला के माध्यम से आत्मघाती गोल कर गयी ,अब इस वक्त कांग्रेस उलझ चुकी हे |राहुल गाँधी "आई क्यू "लेवल के मामले में नंगा हो चूका हे ,लिखा हुवा भाषण पढ़ कर खुद की चड्डी खुद ने उतार दी हे |अगले साल छह राज्यों के चुनावो में कांग्रेस के बोरिया बिस्तर सिमटने वाले हे ,क्योकि राहुल गाँधी को कांग्रेस अपना ""मोमिनो क्रिश्चना ""अवतार समझ रही थी |@@जय हो

Rastra Premi said...

Bharat ke partek Jan Jan ke Labj par netratv ki darti se ek hi nam hai NARENDRA MODI. Sawarth se koso dur ki soch jiske pas ho uske koi kitna hi kar le muh hi khani padegi. jako rakhe saenya mar saken koy ............ jiske sath Parbhu uska koi Bal bhi banka naih kar sakta . NARENDRA BHAI ne vastv me Nar se narayan banne or banane kam kiya hai .Tbhi to Jan Jan ke liye pujniy Hai. Bhart ka netratv inke pass ho yah Sabki ecsha hai.

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

ये कांगेस इस देश का बंटाधार कर के रहेगी।

सजय भाई की बात से सहमत हूँ।

पवन said...

नरेन्द्र मोदी पर कोई भी वार कांग्रेस के काम नहीं आने वाला है | अब तो सभी २०१४ का ही इंतजार कर रहे हैं |

Ratan Singh Shekhawat said...

कांग्रेस जितने हथकंडे अपनाएगी मोदी उतने ही मजबूत होकर उभरेंगे|
पर इस सेकुलर गिरोह द्वारा अपनाये जा रहे हथकंडे जरुर उजागर होने चाहिए|
इन्हें सामने लाने के लिए आपको हृदय से साधुवाद|

भरतसिंह बावरला said...

भाई लेखक का होसला बढ़ना स्वाभाविक है..बहुत हि शानदार खजाना पेश किया है आपने इसके लिये आपको तह दिल से प्रणाम..। गुजरात में भा.ज.पा. कि लोकप्रियता के चलते कांग्रेस दब गई है..और उपर दिल्ली से आदेश आते है कि आप लोग (कांग्रेस) गुजरात में कर क्या रहे हो...? पर इस मुर्ख कांग्रेस को कोन समझाये कि सोनार जितनी बार सोने पर हथोड़ा मारती है सोना उतना ही रुप निखार पेश करता है...। एक बात सब ध्यान रखना कि इस देश कि राजनिती इच्छा शक्ति वो सांम्प्रदायक कि और बढ़ रही है..उसकी जिम्मेदार पुरी कांग्रेस पार्टि है....ये कोई में मजाक नही कर रहा हु..ये एक कड़्वी हकिकत है...भले आप लोग सुरेश भाई से सम्पर्क करके इस बारेमें लेख मगां सकते हो.......।

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद said...

@ सुरेशजी आपने लिखा...??,
कांग्रेस को यह काम 2013 के अन्त से पहले ही पूरा करना है, क्योंकि उसे पता है कि देश में 2014 का अगला आम चुनाव "राहुल गाँधी Vs नरेन्द्र मोदी" ही होगा, इसलिये कांग्रेस में भारी बेचैनी है।
______

आपको क्या लगता है सुरेशजी,, कांग्रेस अपनी चाल में कामयाब होगी...??

कभी नहीं...
"अगर ऐसा हुआ तो "अमूल बेबी" और "माइनो मैडम" दोनों ही मुंह की खाएँगे."

मुझे डर इस बात का लग रहा है.. फिर उनके "अभियान 2014 " का क्या होगा...?? :)))

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

गुजराती जनता ने तो कांग्रेस को पिछले तीन विधानसभा चुनाव में सबक सिखा दिया है, पर मोटे तौर पे इस सबक का कोई ख़ास असर कांग्रेस पे हुआ नहीं. अब समय ऐसा आया है कि पुरे देश कि जनता एक जुट होकर भ्रष्टाचार और घिनौनी निति की जननी कांग्रेस को सत्ता से दूर करे.

देखने वाली बात ये है कि आखिर हमारी जनता जनार्दन कुछ करेगी या नहीं ? नहीं तो फिर वही रात है ...

विजयपाल कुरडिया said...

अच्छी और सच्ची पोस्ट ,
युवा भारत नरेन्द्र मोदी के साथ हे |
कांग्रेस मोदी का बाल भी बांका नहीं कर पायेगी |

Lokesh said...

bhai saab shri mehta ka background clear karne ke liya bahut dhanyvad.app unn sab baaton ko bhi batate hain jise media ko aam admi ko batana chaiye.taki sansad mein vipakh lokayukt ka virodh kyon kar raha hai wah clear ho. jai hind

दिवाकर मणि said...

कांग्रेसी चालबाजियों की परत-दर-परत पोल खोलते हुए "अज्ञान रूपी तिमिर से सब जग अंधमय" की सोच वाले लोगों की आंखे भी खोल रहे हैं, आप!

Mahendra Gupta said...

Vande ma taram
aap ka kahana ekdam sahi hai. Congress satta me rahate huwe har wo kam kar lena chahati hai jisase har virodhi parti ko satta me aane se rok sake. Congress satta ke bina nahi rah sakati. Jaise machhali pani ke bina. Kyonki wo itne kand kar chuki hai ki koi dusari parti satta me aai to uski saari pol patti khol kar rakh degi.

Kash BJP yahi kam satta me rahate huwe kar li hoti. Lekin usme badle ki bhawana nahi thi. Use nahi malum raha hoga ki Congress is taraha ke galat tarike se bhi satta par kabij ho sakti hai.

Aab sahi yahi hona chhahiye ki satta me BJP jab aaye to wo congress ke sari purani kar Gujariyo ka pata lagay.
Aur BJP jaha bhi satta me hai waha wo congress ki purani kar gujariyo ka pata lagaye jo usne apne shasan kal me kiya hai. Uski bahut si kali kartuto ka jarur pata chalega. Jo Congress ki pol kholega.

Vande ma taram

Anonymous said...

apka lekhan bemisal hai

Anonymous said...

जागो, भारत वासियों जागो..

Raj said...

koi baat nahi chahy bjp modi ji ko nikal de,hum unko open election ladwakye fir se cm fir pm bhe banadegy

Anonymous said...

suresh ji ram-ram
jab bhi koi N.G.O.aur thathakthit secular gang Gujrat ya modi ke khilap yachika dayar karte he to Court me sunbai bahut tej gati se hoti he parantu yadi Tista Sitlavad ke khilap koi case ho to stay bhi mil jata he thatha giraftari per rok bhi lag jati he/

Vijender

Anonymous said...

कोग्रेस, और ये कोग्रेस भारत को ले डुबी है और कितना डुबोयेगी पता नही.

जीत भार्गव said...

God Is Great!
Modi Is Best!

जिंदा कॉंग्रेस मे तो मोदी से लड़ने का दम नही है, लेकिन वो अपने मरे हुये सांसद एहसान जाफरी की लाश पर सत्ता हासिल करने के लिए बेताब है।

Anonymous said...

कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य क्या है ? कि भारत के लोगो को बांटकर रखो और उनका धन लुटते रहो ! यह एक दीर्घकालीन प्रक्रिया है, भारत को इस सदी के अन्त तक ईसाई राष्ट्र मे परिवर्तित करना ! और यह तभी हो सकता है कि जब यह के लोग जाति-संप्रदाय में बंटे हुये हो! वेटिकन के पोप ने भी तो यही कहा था भारत आकर कि हमरा मिशन भारत को ईसाई बनाना है किसी भी तरह से !

भगत सिंह जी ने कहा था कि " poverty is the biggest sin of the world".
वेदो में लिखा है कि अर्थ से धर्म की रक्षा करनी चाहिये !