Sunday, September 18, 2011

Mallika Sarabhai, Narendra Modi, Gujarat Riots 2002

मल्लिका जी… एक बार "पवित्र परिवार" से माफ़ी माँगने को कहिये ना…? (एक माइक्रो-पोस्ट)

मल्लिका साराभाई ने नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 2002 में साराभाई की जनहित याचिकाओं को खारिज करवाने के लिए उनके वकीलों को दस लाख रुपये की रिश्वत दी थी। अब जाकर 9 साल बाद मल्लिका साराभाई को इसकी याद आई है, इस आरोप के पक्ष में उन्होंने पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट के एफ़िडेविट का उल्लेख किया है, जो कि स्वयं सुप्रीम कोर्ट के समक्ष झूठे साबित हो चुके हैं। अब बताईये मल्लिका मैडम… ठीक नरेन्द्र मोदी के उपवास के समय, आपके कान कौन भर रहा है?

वैसे बार-बार "गुजरात नरसंहार", "मोदी की माफ़ी" इत्यादि शब्दों का लगातार उपयोग करने वाली मल्लिका जी समेत सारी की सारी "सेकुलर गैंग" और "सिविल सोसायटी गिरोह" जानती नहीं होंगी कि आधिकारिक सरकारी आँकड़ों (जिसे केन्द्र ने भी माना है) के अनुसार 2002 के दंगों में 760 मुस्लिम और 254 हिन्दू मारे गये थे, इन 254 हिन्दुओं में से 100 से अधिक पुलिस की गोली से मारे गये। क्या सेकुलरिस्ट बता सकेंगे कि यदि "नरसंहार"(?) हुआ था तो फ़िर 254 हिन्दू कैसे मरे? एक भी नहीं मरना चाहिए था? और यदि नरेन्द्र मोदी ने कोई "एक्शन" नहीं लिया और दंगों के दौरान निष्क्रिय बने रहे, तब 100 से अधिक हिन्दू पुलिस की गोली से कैसे मरे?

परन्तु ऐसे सवालों से "सेकुलरों और सिविलियनों" को उल्टियाँ होने लगती हैं, इनमें से किसी ने आज तक दिल्ली में 3000 सिखों के मारे जाने पर कांग्रेस से माफ़ी की माँग नहीं की… इनमें से किसी की हिम्मत नहीं होती कि कश्मीर से "जातीय सफ़ाये" और "नरसंहार" करके भगाये गये 2 लाख से अधिक कश्मीरी पण्डितों की दुर्दशा के लिए "पवित्र परिवार" से माफ़ी मांगने को कहे…। परन्तु चूंकि नरेन्द्र मोदी को गरियाने से बिना पढ़े ही "सेकुलरिज़्म की डिग्री" मिल जाती है इसलिए सब लगे रहते हैं।

भूषणों, तिवारियों, सिब्बलों इत्यादि में यदि हिम्मत है, तो वह "पवित्र परिवार" से भागलपुर दंगों, सिख विरोधी दंगों, कश्मीर से हिन्दुओं के सफ़ाये, वॉरेन एण्डरसन को सुरक्षित भगा देने जैसे "किसी भी एक मामले में" माफ़ी माँगने को कहे।

(कुछ मित्रों को "पवित्र परिवार" शब्द पर आपत्ति है, परन्तु यह शब्द मीडिया के "दोगलों और भाण्डों" के लिए है, जिन्हें इस परिवार में पवित्रता के अलावा कुछ और दिखाई नहीं देता)

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एक विशेष जानकारी :- मल्लिका साराभाई की एक रिश्तेदार मृदुला साराभाई, कश्मीर के शेख अब्दुल्ला (उमर अब्दुल्ला के दादा) की "घनिष्ठ मित्र"(?) थीं। मृदुला साराभाई ने 1958 में शेख अब्दुल्ला पर चल रहे देशद्रोह के केस में मुम्बई हाईकोर्ट में लगने वाला समूचा खर्च उठाया था। इस देशद्रोह वाले केस में शेख अब्दुल्ला को आजीवन कारावास हो सकता था, नेहरु नहीं चाहते थे कि शेख अब्दुल्ला को सजा मिले, इसलिए नेहरु सरकार ने अचानक 1964 में यह केस वापस ले लिया। इसमें मृदुला साराभाई की भूमिका महत्वपूर्ण थी…

पता नहीं ऐसा क्यों होता है, कि जब हम "सेकुलर बुद्धिजीवियों"(?) का इतिहास खंगालते हैं, तो उनकी "जड़ें और गहरी दोस्तियाँ" कभी कश्मीर से तो कभी पाकिस्तान से जा मिलती हैं। वैसे मृदुला साराभाई सम्बन्धी इस जानकारी का, मल्लिका साराभाई के "वर्तमान सेकुलर व्यवहार" से कोई लेना-देना नहीं है, परन्तु बात निकली ही है तो सोचा कि पाठकों का थोड़ा ज्ञानवर्धन कर दूँ… :) :)

32 comments:

Meenu Khare said...

inhe bhaunkne se koi rok nahi sakta suresh ji.ye zaat se majboor hain.

ankit said...

sir ji ,
aap wo baat kyon bolte hai jo bhula deni chahiye seccularism me hinduo ke nuksan ki baat bhula dene ka aur laghumati ke nuksan ki baat yad rakhne ka rule hai, ye humare desh ka seccularism ka rule hai, jisko ab modi ji virodh me hai, ab inko modi ji seccularism kya hai ye sikhane jayenge to taklif ke maare aise bayan to aane hi hai

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अभी भरतपुर में दंगे हुये हैं, उससे पहले मुरादाबाद में, उससे पहले बरेली में, लेकिन किसी सेकुलर ने कुछ कहा. बिल्कुल नहीं. क्योंकि बहुसंख्यक वोट बैंक नहीं हैं, इसलिये. और इसीलिये पिटते रहते हैं, मरते रहते हैं और चुपचाप झेलते रहते हैं. हिन्दू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद चिल्लाने वाले हाईकोर्ट में धमाकों के बाद अब रंग नहीं बता रहे. अब कहने लगे कि धर्म से न जोड़ा जाये आतंकवाद को. जागो अब तो जागो.

Manu Tripathi said...

very correct.

Avadh said...

चलनी कहे सूप से देख रे तेरे मे छेद! यही हो रहा है! अपनी पतलून संभलती नही और दूसरे की धोती खींचने पर जुटे हुये है! इन लोगों का बस एक ध्येय है किसी तरह से हिन्दुओं को आपस मे लडाओ! अपनी कुर्सी और पवित्र परिवार को बचाओ!

खरी-खरी said...

ye malika jee sekular कैबरे डांसर है इनसे yahee ummeed thee desh virodh inke khoon mei है. इनसे poochna chaheeye

kya in dango me bhee narendr modi ka hath hai ?

(1) 1964 Communal riots in Rourkela & Jamshedpur | 2000 Killed | Ruling party CONGRESS
(2) 1947 Communal riots in Bengal | 5000 Killed | Ruling party happened to be CONGRESS
(3) August 1967 | 200 Killed | Communal riots in Ranchi | Party ruling again CONGRESS
... (4) 1969 | Communal riots in Ahmedabad | More than 512 Killed | Ruling party happened to be CONGRESS
(5) 1970 | Bhiwandi communal riots in Maharashtra | Around 80 killed | Ruling party CONGRESS
(6) April 1979 | Communal riots in Jamshedpur , West Bengal | More than 125 killed | Ruling party CPIM (Communist Party)
(7) August 1980 | Moradabad Communal riots | Approx 2000 Killed | Ruling Party CONGRESS
(8) May 1984 | Communal riots in Bhiwandi | 146 Killed , 611 Inj | Ruling party CONGRESS | CM – Vasandada Patil
(9) Oct 1984 | Communal riots in Delhi | 2733 Killed | Ruling party CONGRESS
(10) April 1985 | Communal riots inAhmedabad | 300 Killed | Ruling party CONGRESS
(11) July 1986 | Communal violence in Ahmedabad | 59 Killed | Ruling party CONGRESS
(12) Apr-May 1987 | Communal violence in Meerut , UP | 81 killed | Ruling party CONGRESS
(13) Feb 1983 | Communal violence in Nallie, Assam | 2000 killed | PM – Indira Gandhi (CONGRESS)

अवनीश सिंह said...

क्या जिलानी के कुछ बोलने पर भी उन सब कश्मीरी पंडितों के बयान दिखाए गए थे ?सरकार की मोदी से खुन्नस तो समझ आती है मगर मीडिया का इतना गिरा स्तर देख के वाकई मन बहुत खिन्न है मोदी का उपवास यदि नाटक है तो दूसरा ड्रामा सड़कों पे बाघेला के द्वारा क्यूँ करवाया जा रहा है?यदि मोदी अपने पाप धोने की कोशिश कर रहे हैं तो बाघेला क्या धोने की कोशिश में हैं?



किसी भी चैनल पर जाओ, एक ही बात सुनाई दे रही है कि मोदी के दाग मिट नहीं सकते| अब इन गधों को कौन समझाए कि दाग अच्छे हैं|

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

अंकित ने सही कहा कि
(नकली) धर्मनिरपेक्षता में हिन्दुओं की मौत व नुकसान शामिल नहीं होता है।
अगर आज तक हुआ हो तो बता दे?
आज तक कुल कितने मुस्लिम आजादी के बाद मारे गये है और कुल कितने हिन्दु अन्तर साफ़ हो जायेगा,
रही बात पुलिस की गोली से मरने वाले वो हिन्दू नहीं थे कुछ और होंगे तभी तो किसी को नजर नहीं आये है?

अवनीश सिंह said...

मैंने ऐसा कोई अन्य राजनीतिक व्यक्ति नहीं देखा जिसे इतना बदनाम किया गया हो , जितना कि मोदी को। भारत के राजनीतिक इतिहास में किसी अन्य राजनीतिक नेता के विरूद्ध ऐसा दुष्प्रचार कभी नहीं हुआ।

अर्जुन शर्मा said...

सुरेश जी ,
धन्यवाद बहुत रोचक लेख आपके प्रयास सभी योग्य लोगो को सहायक होते है |
धन्यवाद एक बार और बार बार

Deepesh said...

कृपया महिलाएँ इसे अन्यथा न ले पर जब भी मै इस बड़ी सी लाल बिंदिया को देखता हूँ मेंरे मन में खतरे की घंटी बजने लगती है ।

एक भारतीय नागरिक said...

एक चैनल के पत्रकार ने आज एक बड़े अखबार में माननीय कोर्ट से भी ऊपर जाते हुये खुलासा किया है कि गोधरा में ट्रेन हादसा हुआ था जिसे साम्प्रदायिक दंगे की शक्ल दे दी गई. इन महोदय ने तो लोअर कोर्ट के फैसले को भी खारिज ही कर दिया एक तरह से.
उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों को आरक्षंण देने की योजना आने वाली है, फिर पूरे देश में. इन्तजार करो कि अल्पसंख्यक बन जाओ और फिर आरक्षंण का आनन्द मिल सके.

RAGHU said...

सुअर कहे गाय से - छि: तेरे पूंछ मे तो गोबर लगा है, खुद अपनें को नहीं देखती क्या-क्या खती है/

Man said...

सर वन्देमातरम ,
अंत में विशेष जानकारी बहुत अच्छी लगी ,सीधे घुटने पर चोट @सर में तो यही कहना चाहूँगा नस्ल तो रंग दिखती ही हे ,अब इन सेकुलरो की जेसी नस्ल होगी वेसे ही इनके कर्म होंगे ?

Anonymous said...

digvijay fir ujjain aa raha hai kale jhande dikha kar bhaga dena chahiye

संजय बेंगाणी said...

पीछले विधानसभा चुनावों में ये महोदया गाँधीनगर से चुनाव लड़ी थी. गाँधीनगर में सरकारी कर्मचारी रहते है जो कांग्रेस का वोटबैंक है. मुस्लिम बहुल क्षेत्र भी इसी सीट में आता है और धनाढ्य लोग जो सोसलाइट और मोमबत्ती छाप क्रांतिकारी वाला क्षेत्र भी यहीं पड़ता है. इसके बाद भी इनकी जमानत जप्त हो गई थी.

भगवा से खुन्नस. सेक्युलर बुद्दिजीवि कहलाने की लालसा, गरीबों के मसीहा बनने की इच्छा जिन पर कबुतरबाजी के आरोप भी लगे हैं, बकवास ही करेंगे. इन्हें यहाँ ही कोई गम्भीरता से नहीं लेते, मीडिया वालो के अनुकुल है तो इनकी बाइट दिखाते है...

यह भी विडम्बना है कि इनके पिता महान विज्ञानीक थे और भारत उनका ऋणी है.

Anonymous said...

अब मोदी जी ठहरे पूर्ण बर्ह्मचारी , ऐतराज तो इन जैसियोँ को होगा ही ।


अब जो इनपर मेहरबान हैँ उन्हीँ के हक मेँ बोलेँगी ये तो !!!!

Jeet Bhargava said...

मल्लिका साराभाई भी तीस्ता जावेद सेतलवाद और हर्ष मंदार जैसे लोगो मे हैं जिसने पाकिस्तानी गुलाम नबी फ़ाई से भारी धन पाकर हिंदूजन व हिन्दू संगठनो को बदनाम करने की सुपारी ले रखी है।
कॉंग्रेस राज मे खुद मल्लिका साराभाई ने दिल्ली दूर दर्शन पर अपनी दर्पण एकेडेमी के लिए कार्यक्रम (स्लॉट) हथियाकर लाखो-करोड़ो रुपये कमाए हैं। उसकी एनजीओ कॉंग्रेस से ही नही विदेशो से पैसा पाती है।
इसी तरह कहा जाता है कि, मल्लिका साराभाई ने विदेशो मे अपने डांस शो के नाम पर कई लोगो के लिए कबूतरबाजी भी की है। लेकिन केंद्र की कॉंग्रेस सरकार की मेहरबानी से वह किसी भी कानूनी कार्रवाई मे नही फंसी है।

मजे की बात है कि मोदी और हिंदूजन के खिलाफ जहर उगलने मे हमेशा तीस्ता आगे रहती थी लेकिन कोर्ट मे कई बार फर्जी हलफनामे पेश करने के कारण कई बार फटकार खाने और मुस्लिमो के नाम से विदेशो से फंड ऐंठने के कारण वह खुद मुस्लिमो मे भी अपना भरोसा खो चुकी है। लिहाजा उसने अपनी 'छोटी बहन' मल्लिका को आगे कर दिया है।

मल्लिका का हिन्दू द्वेष नया नही है। वह गुजरात दंगो से पहले से हिन्दू विरोध के लिए मुखर रही है। बूढ़ी होने के कारण अब वह डांस तो कर नही सकती। सोचती है चलो 'मानवाधिकार वादी' बनाकर ही कमाई की जाये। गुजरात दंगो मे उसने हिंदुओं के खिलाफ काफी बवाल किया था, नतीजन कॉंग्रेस ने उसे 'उपकृत' भी किया है।
मल्लिका ने करीब एक महीने पहले अन्ना आंदोलन के दौरान भी अंग्रेजी अखबार DNA मे एक लेखा लिखकर मोदी पर भ्रस्टाचार के आरोप लगाए थे। बिना किसी ठोसा सबूत के सिर्फ हवाबाजी कराते हुए..! मोदी से खुश अन्ना को मोदी के खिलाफ भड़काने का काम भी अग्निवेश के साथ मिलकर मल्लिका ने किया था। जबकि इससे पहले वह अन्ना आंदोलन के साथ थी ही नही, लेकिन मोदी का नाम आते ही कूद पड़ी..!!
हमेशा गुजरात दंगो मे मुसलमानो की रूडाली गाने वाली मालिका ने कभी भी गोधरा मे ट्रेन मे जलाए गए 62 हिन्दुओ के लिए कुछ नही कहा। ना ही कभी कश्मीरी पंडितो या असम-बंगाल-पूर्वोत्तर मे मुल्लाओ व मिशनरियो के जुल्मो के शिकार हो रहे हिंदुओं के लिए कुछ कहा/किया।

ऐसे मे मल्लिका का मोदी को बदनाम करके कॉंग्रेस के अहसान चुकाने जरूरी ही हैं। दर असल गुजरात मे इस औरत की कोई इज्जत नही है। यह सिर्फ अपने सरनेम साराभाई के लिए जानी जाती है।
मल्लिका-ए-कॉंग्रेस

त्यागी said...

मोदी का उपवास कांग्रेसी कबूतरों के बड़े में खलबली का सबब बना. तब जाकर कबूतरों ने मल्लिका को बिल्ली के गले में घंटी बंधने के लिए चुना. अब कुछ लोग कबूतरों को शेखचिल्ली या मम्मी के नवजात शिशु भी कह सकते है.
www.parshuram27.blogspot.com

Anonymous said...

Suresh ji ram-ram
modi ji ansan per jis kaaran se bethe ho parantu veghla jarur C.M. Ki kurshi ke liye ansan per bethe he/ parantu janta unki gaddar bali kartut ko bhuli nahi he jab keshu bahi ki peeth me khanjar ghopa tha aur B.J.P KE vidayako ko tod kar khangresh party sasit panchmadi(M.P) CHUP gay aur unki madam khangresh party ke nivartman dogi diggi ne ki thi

Vijender

राहुल पंडित said...

आज नरेन्द्र मोदी जी को मुस्लिम टोपी न पहनने पर मिडिया और तथाकथित धर्मनिरपेक्ष लोगों ने हो हल्ला मचाया.आखिर धर्मनिरपेक्ष होने का प्रमाण बार-बार हिन्दुओं को ही क्यों देना पड़ता है.आज आप कही भी किसी हिन्दू को मुसलमानों की टोपी पहने देख सकते हैं,हम मजारों पर चादर भी चढाते हैं.हम मस्जिदों के सामने भी आदरभाव से झुक जाते हैं.लेकिन कोई मीडिया या राजनेता है जो कहे की इमाम बुखारी या कोई भी मुस्लमान कभी भगवा पगड़ी बांध कर धर्मनिरपेक्षता का परिचय दे.
शर्म आती है इस बिकी हुई मिडिया पर और वोट बैंक की राजनीती करने वाले नेताओं पर.

Jeet Bhargava said...

सुनो, सुनो, सुनो...
अबा हिन्दुओं को खुद को सेकुलर साबित करने के लिए खतना कराना पडेगा, औरतो को बुर्का पहनना पडेगा और घर पर अफ़ज़ल गुरु/कसाब की तस्वीर लगाकर सुबह शाम आरती-पूजा-अर्चन करना पडेगा.
ऐसा नहीं किया तो आप सेकुलर नहीं बल्कि साम्प्रदायिक कहलायेंगे.
लेकिन यह बाते ईसाइयों और मुसलमान भाइयो पर लागू नहीं होती हैं.
१९९८ में उदयपुर में मशहूर सेकुलर एक्टर दिलीप कुमार (युसूफ खान) ने मेवाड़ी पगड़ी पहनने से इनकार कर दिया था. हालांकि वह किसी पंडित, पुजारी या हिन्दू संगठन ने नहीं पहनाई थी. लेकिन दिलीप साहब को उस पगड़ी में महाराणा प्रताप की देशभक्ति की बू आ रही थी, जिसने अकबर को उसकी नानी याद दिला दी थी. और दिलीप कुमार ये कैसे सहन कर सकता है. एक तरफ तो मुसलमान हिन्दू प्रतीकों को छोड़ो भारतीय प्रतीकों से भी नफ़रत करते हैं, वही दूसरी तरफ मुसलमान और सेकुलर चमचे पूरे दुनिया की 'मुसलमानी' करने पे तुले हुए हैं...इसे कहते हैं सेकुलरिज्म.

Anonymous said...

Suresh Ji Just look at this web site:
http://tajmahal.gaupal.in/badasahanama-ka-vislesana

Raj said...

espe kongres ko fast pe bethna chahiye,bharat ka bhugol fir badlneki tiyare,desh ka fir se tukada hone wala hy-http://www.pravakta.com/archives/30084

Raj said...

look at ths man and look at our hindu neta-http://youtu.be/aDXCwd65R5o

Pradeep Sharma said...

Sir, Undoubtedly you are the only person who says something to save hinduism in this country. keep it up. Ek na ek din aapka prayaas zaroor rang laayega.

Anonymous said...

jeet se purna sahmat.

Nikhil said...

congress ko bika hua hai bharat ka media...

Ganesh Prasad said...

मुझे तो आज तक वालो पे तरस आ रही ! जैसे उनके आका (पवित्र परिवार) ने उनको डंडा मार कर कहा हो निटनी नरेंद्र जी के खिलाफ उगल सकते हो उगलो वरना इस बार दीवाली की बोनस तुम्हारी गई.............

साली (आज तक) भांड समाचार !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

दिवाकर मणि said...

इस संदर्भ में अवनीश सिंह जी की टिप्पणी का यह अंश काफी अच्छा लगा...

किसी भी चैनल पर जाओ, एक ही बात सुनाई दे रही है कि मोदी के दाग मिट नहीं सकते| अब इन गधों को कौन समझाए कि दाग अच्छे हैं

Mahendra Gupta said...

Vande mataram,
Aise log to sirf gali ke layak hai.
Lekin Mera to dil inhe gali dene ka bhi nani kar raha hai. Kyo ki inhe gali dene se Gali ka bhi apman hoga.
Vande Mataram.

jay said...

ऊपर मीनू जी ने सही कहा है कि ये भूकने वालियां अपनी जात से मजबूर हैं. आपको सफाई देने की ज़रूरत क्यूं पड़ गयी सुरेश जी. गद्दार भी पीढ़ियों में तैयार हुआ करती है. सांप का बच्चा सपोला ही तो होगा. इस कथित सेक्युलर व्यवहार के चलते वो घिनौना माहौल भी तो जिम्मेदार है जिसमें इन नागिनों का लालन-पालन हुआ है. आपने अब्दुल्ला की रखैल होने का सही उदाहरण दिया है. और इसमें किसी सफाई की कोई ज़रूरत नहीं होनी चाहिए.
पंकज झा.