Sunday, September 4, 2011

Jagan Reddy, Gandhi Family and AP Congress

जगन रेड्डी :- "पवित्र परिवार" से पंगा लिया है तो अब भुगतना ही पड़ेगा…

"सेमुअल" राजशेखर रेड्डी की दूसरी पुण्यतिथि(?) पर उसके बेटे जगन रेड्डी का उतरा हुआ और रुँआसा चेहरा देखकर सभी को समझ जाना चाहिए कि "सोनिया मम्मी" से पंगा लेने का क्या नतीजा होता है। दो साल का समय ज्यादा नहीं होता, सिर्फ़ दो साल पहले सेमुअल राजशेखर रेड्डी, सोनिया के, चर्च के और वेटिकन के आँखों के तारे थे। आंध्रप्रदेश और कर्नाटक की सीमा पर इन पिता-पुत्रों ने जमकर अवैध खनन किया। केन्द्र की सारी एजेंसियाँ (जिन्होंने येद्दियुरप्पा को हटाकर ही दम लिया), उस समय इन पिता-पुत्र रेड्डियों तथा कर्नाटक के दोनों रेड्डी बन्धुओं पर मेहरबान थीं। यह चारों रेड्डी उस पूरे इलाके के बेताज बादशाह थे।


किस्मत ने पलटा खाया, सेमुअल रेड्डी एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में ईसा को प्यारे हो गये, जिनकी लाश की खोज में भारत सरकार ने सेना सहित अपनी पूरी मशीनरी झोंक दी थी। जगन रेड्डी की गलतियों की शुरुआत यहाँ से हुई कि उसने आंध्रप्रदेश में अपनी पिता की राजनैतिक विरासत पर सोनिया गाँधी के सामने (उनसे पूछे बिना) ही दावा ठोंक दिया। अब भला गाँधी परिवार को यह बात कैसे मंजूर होती, क्योंकि "राजगद्दी" पर विरासत का दावा ठोंकने का हक तो कांग्रेस पार्टी में सिर्फ़ एक ही परिवार को है। यदि किसी को "राजनैतिक विरासत" चाहिये भी हो तो वह "पवित्र परिवार" की कृपा से ही ले सकता है (जैसे सिंधिया, पायलट, जतिन प्रसाद इत्यादि)।

जगन रेड्डी ने खामख्वाह "मैडम" से पंगा ले लिया, अपनी राजनैतिक ताकत दिखाने के चक्कर में ललकार भी दिया, पार्टी भी छोड़ दी, आंध्र में कांग्रेस को नुकसान भी पहुँचाया, स्वयं के अकेले दम पर कडप्पा की सीट भी जीत ली, अपने पैसों और पिता के नाम के बल पर 25 विधायक भी जितवा लाये… यानी कि खुद को "असली युवराज" साबित करने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी। यही बात "मैडम" को अखर गई, और उन्होंने अवैध खनन के मुद्दे पर इतने सालों से चुप्पी साध रखी थी, अचानक उन्हें जगन बाबू में सारी बुराईयाँ नज़र आने लगीं और उन्होंने अपनी सभी पालतू एजेंसियों (सीबीआई, फ़ेमा, आयकर इत्यादि) को जगन रेड्डी के पीछे छोड़ दिया…। फ़िलहाल तो जगन बाबू मैदान में खम ठोंके खड़े हैं, लेकिन कितने दिन मैदान में टिकेंगे कहना मुश्किल है क्योंकि आंध्रप्रदेश विधानसभा के मौजूदा 100 से अधिक कांग्रेसी विधायक जो कि "सेमुअल" राजशेखर का नाम और फ़ोटो लेकर चुनाव जीतते रहे, उन्होंने भी "मैडम" के आतंक के सामने घुटने टेक दिये हैं और जगन से पीछा छुड़ाने की फ़िराक में हैं।

"पवित्र परिवार" भी इस बात को आसानी से भूल गया कि सारे अनुमानों को ध्वस्त करते हुए "सेमुअल" राजशेखर रेड्डी ने अकेले दम पर चन्द्रबाबू नायडू और भाजपा को पटखनी देते हुए आंध्रप्रदेश में कांग्रेस को जितवाया था… उस समय तो "सेमुअल", उनका बेटा जगन और उनका "एवेंजेलिस्ट" दामाद अनिल सभी के सभी "पवित्र परिवार" को बेहद प्यारे थे। अब अचानक ही जगन रेड्डी की सम्पत्तियों, उसके महलनुमा मकान और खदानों के स्वामित्व के बारे में अखबारों में बहुत कुछ छपने लगा है, मानो यह सब कुछ जगन रेड्डी ने पिछले दो साल में ही खड़ा किया हो… जबकि (मीडिया वालों का माई-बाप) "पवित्र परिवार", सेमुअल रेड्डी के इन सभी "कारनामों" से पहले से ही अवगत था…। यह "पवित्र परिवार" द्वारा पाले हुए मीडिया का दायित्व बनता है कि देश और कांग्रेस में जो भी "अच्छा-अच्छा" हो रहा हो वह उसे "पवित्र परिवार" की महिमा बताए, जबकि देश में जो भी "बुरा-बुरा" हो रहा हो उसके लिए "साम्प्रदायिक", "जातीय" और "क्षेत्रीय" राजनेताओं को दोष दें… मीडिया की भी कोई गलती नहीं है, उन्हें भी तो "उनके सामने डाली गई बोटी" का फ़र्ज़ अदा करना पड़ता है।

वैसे इस घटनाक्रम से कुछ बातें तो निश्चित रूप से सिद्ध होती हैं -

1) राजनीति में कोई भी सगा नहीं होता, न बाप, न भाई…

2) राजनीति में "अहसान" नाम की भी कोई चीज़ नहीं होती…

3) मैडम और पवित्र परिवार से पंगा लेने की कीमत चुकानी ही होगी…

4) किस्मत पलटने के लिए 2 साल का समय तो बहुत ज्यादा होता है…

5) जब "पवित्र परिवार" को चुनौती दी जाती है, तब वे न तो "पुरानी वफ़ादारियाँ" देखते हैं, न ही "पुराने सम्बन्ध" देखते हैं और तो और ये भी नहीं देखते कि सामने वाला बन्दा भी उनके "अपने चर्च" का ही है…

अब जगन बाबू के सामने दो ही रास्ते हैं, पहला यह कि कड़ा संघर्ष करें, जैसे कडप्पा लोकसभा सीट और 20-25 विधायक जितवाए हैं, वैसे ही और भी जनाधार बढ़ाएं, आंध्रप्रदेश कांग्रेस में दो-फ़ाड़ करवाएं… अपनी राजनैतिक स्थिति मजबूत करें। क्योंकि मजबूत क्षेत्रीय कांग्रेसियों के सामने दिल्ली के "पवित्र परिवार" को झुकना ही पड़ता है (उदाहरण शरद पवार और ममता बैनर्जी) लेकिन यह रास्ता लम्बा है।

दूसरा आसान रास्ता यह है कि वे "मैडम" के समक्ष नतमस्तक हो जाएं, कर्नाटक सीमा पर चल रहे अवैध खनन में से "उचित हिस्सा" ऊपर पहुँचाएं, पिता की गद्दी पर विरासत का दावा न करें (करना भी हो, तो तभी करें जब "मैडम" अपनी चरणचम्पी से खुश हों)…

17 comments:

Rajesh Kumar said...

"पवित्र परिवार", तेरी महिमा अप्रम पार!

Ratan Singh Shekhawat said...

वाह रे पवित्र परिवार तेरी महिमा न्यारी !!!!!!

Rastra Premi said...

suresh ji
Apke blog par kuch pad raha tha. new lekh ka intzar tha. Pawitra pariwar or Adhra ke jagan ki pashampesh parstuk ki . behad satik vishleshn diya . lekin sureshji mera manna hai ki yah chor - chor mouchere bhai hai . aaj soniya power me hai isliye vo kar rahi hai. jagan ke pas hota to wo konse kam utrte. rahi bat midiya ki wo to jidhar ghas dikhegi udhar muh dalegi hi......!
ant me mera apse anurodh hai ki sarkar davar prayojit sampardayik or lashit hinsa adhiniyam 2011 ik sampardayik kanun ka vishleshan kar apne pathko avgat karaye or iske virodh ka aavahan kare to desh hit me rahega.
VANDE - MATRAM !!

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

वाह रे मेरा देश, सौ में से निन्यानवे बेईमान।

Neeraj नीरज نیرج said...

ये पवित्र परिवार ना जाने कितनों की बलि ले चुका है। नागरवाला से लेकर सिंधिया, माकन और वाईएसआर तक। मैं उन तथ्यों पर भी ध्यान दिलाना चाहूंगा जो भयंकर संदेह पैदा करते हैं। याद कीजिए अनिल अंबानी के हेलीकॉप्टर के इंजन में एक बोल्ट मिला था। जिस बंदे ने इसका पता लगाया था उसकी रेल फाटक पर दो दिन के भीतर मौत हो गई थी। बाद में एक ख़बर और आई थी कि वाईएसआर की हत्या भी गोदावरी बेसिन गैस विवाद की वजह से हुई थी।

Neeraj नीरज نیرج said...

@Suresh जी. जो पांच बातें सिद्ध की है वे एकदम सटीक हैं। राजनीति शास्त्र में शामिल करने योग्य।

AMIT MISHRA said...

हाल की बात करें लो लगता नहीं है कि पवित्र परिवार से हमारा पीछा छूटने वाला है। सोनिया कि महिमा अपरम्पार है, पचास सालों से अधिक कांग्रेस हमें नोंच खा रही थी और हम खुद को उसके सामने बिछाते आ रहे थे। ऐसे में सवाल ये उठता था कि क्या देश में सारे मूर्ख ही बसते है लेकिन अन्ना अंदोलन महाकाल पर नजर डालें तो ये बात पुष्ट हो जाती है कि यहां सब मूर्ख ही बसते हैं। हमारा कभी कुछ भला नहीं हो सकता। हमें काला धन वापस नहीं बल्कि लोकपाल चाहिए और वो भी वह जो अन्ना जी के इशारे पर आसमान से अवतरित हो।

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

हा हा...वाह सर, क्या तेल पिलाकर पीटा है|
इतनी जुर्रत कि सोनिया मम्मी से पंगा लिया, अब भुगतो|
सच में बेहद सार्थक...दुःख तो इस बात का है कि अभी भी लोगों को बात समझ नही आ रही| यहाँ तक कि खुद कांग्रेसी भी, पता नही क्यों गुलामों की तरह जी रहे हैं? जो अपने आत्मसम्मान की रक्षा न कर सके वे देश का मान क्या बढ़ाएंगे?

Vivek Rastogi said...

अब समझ में आई कहानी |

Man said...

वन्दे मातरम सर ,
भारतीय राजनितिक पारिवारिक माफियावाद पर अगर कोई होलिवुड फिल्मकार मूवी बनाना चाहे तो ..इस पवित्र खानदान से ?अच्छी स्टोरी कंही नहीं मिलेगी !!क्योकि बोलिबुड निर्माता निर्देशक इस विषय के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे क्योकि अधिकतर फिल्मकारों को सेकुलरता कीड़ा काट खाता हे या प्रकाश झा की जेसे विरोध झेलना पड़ता |यदि होलिवुड में मूवी बने तो ""गोंड फादर १,२,३ को भी पीछे छोड़ देगी राजनितिक माफियावाद की ये मूवी |हमें तो आप छोटे छोटे ट्रेलर वेसे ही दिखा देते हे बाईस्कोप में |जय हो

जितेन्द्र सिंह : एक सच्चा भारतीय said...

लाशों की विरासत पर सियासत तो कांग्रेस का मनपसन्द खेल है...
कांग्रेस राजनीति की सबसे बड़ी 'व्यवसायी' है...
चुनाव टिकट से लेकर 'मंत्रालय' तक सब बिकाऊ है??
व्यवसाय तभी चलता है जब उसमे 'निर्लज्जता' होती है..
शर्म करके कोई व्यापारी पैसे नहीं कमा सकता??
शर्म की होती तो आज 'स्विस बैंक माफिया' थोड़े ही होते..
शर्म होती तो 'घोटालों के बेताज शहंशाह' थोड़े ही होते..
अपनी पालतू एजेंसियां दुश्मनों के पीछे लगाना साधारण काम है 'कुटिलों की खान्ग्रेस' का..
जगन रेड्डी हो या बालकृष्ण-स्वामी रामदेव या फिर अभी 'अन्ना टीम'.. छोड़ते किसी को नहीं..
2014 तक का लाइसेंस भी तो है देश की इज्जत को तार-तार करने का...
कोई क्या बिगाड़ लेगा..और क्या उखाड़ लेगा...???
वन्दे-मातरम्...
जय हिंद...जय भारत....

आशा जोगळेकर said...

जब "पवित्र परिवार" को चुनौती दी जाती है, तब वे न तो "पुरानी वफ़ादारियाँ" देखते हैं, न ही "पुराने सम्बन्ध" देखते हैं और तो और ये भी नहीं देखते कि सामने वाला बन्दा भी उनके "अपने चर्च" का ही है

सही कहा ।

सोनू said...

शीर्षक हिंदी में भी दिया कीजिए ना।

Ajit Singh said...

Suresh Chiplunkar jaise log is desh ko barbad kar rahe hai. Agar desh ki itni chinta hai to Anna Hajare ki tarah andolan karo or desh ko sudharo. Janta ko gumrah karne se koi fayda nahi hai.

Anonymous said...

satik baat

Anonymous said...

अजित सिंह आन्दोलन करने जा रहे हैं, कल से आमरण अनशन करेंगे.

Anonymous said...

Suresh ji ram-ram
soniya ke parivar ko pavitar bolkar iss pavitar sabdh ki mahima kam mat karo/ ya to wo parivar he jo jis desh ka namak kha raha he us desh se namak harami kar raha he/ desh ko varvad kar raha he/
church mulla gatjor ke issare per
laksit hinsa bill pass karakar apne liy khula madan chatae he taki
ye vina roktok dharmantran ka kam kar sake yadi koi hindu in ka virodh karyga to us per pratarit karne ka iljam laga kar usko jail bhej dege/

Vijender