Friday, September 9, 2011

Cash on Vote, LK Advani and Rajdeep Sardesai

आडवाणी जी… कांग्रेस और राजदीप सरदेसाई दोनों का गुनाह बराबरी का है…

कल संसद में जिस तरह से आडवाणी जी गरजे और बरसे उन्हें देखकर 1991 से 1999 के आडवाणी की याद हो आई। नोट फ़ॉर वोट के मुद्दे पर उन्होंने जिस तरह प्रणब मुखर्जी और चिदम्बरम को घेरा तथा कैश फ़ॉर वोट काण्ड में उन्हें भी गिरफ़्तार करने की चुनौती दी, उस समय उन दोनों की बेबसी देखते ही बनती थी। हालांकि बाकी के कांग्रेसी सांसद "अपनी वाली" पर आ गये थे और उन्होंने आडवाणी जैसे सदन के एक वरिष्ठतम सदस्य को बोलने नहीं दिया। ज़ाहिर है कि मामला आईने की तरह साफ़ है, जिन सांसदों ने वोट देने के लिए पाई गई रिश्वत को उजागर किया, वही जेल में हैं और उस रिश्वत का फ़ायदा जिन्हें मिला, और जिसने रिश्वत दी (यानी UPA सरकार बची) वे तो खुलेआम घूम रहे हैं। माना कि एक "दल्ला" अमरसिंह, लाख बहानों के बावजूद जेल में है, लेकिन अभी भी यह बात छुपी हुई है कि आखिर इतना पैसा दिया किसने? सरकार बचाई किसने? रिश्वत पहुँचाने वाला अभी तक दृश्य से बाहर है, जबकि रिश्वत को नकारकर उसे सरेआम लोकसभा में लहराने वाले जेल में हैं।


इस समूचे मामले में एक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है IBN-7 का राजदीप सरदेसाई। नोट फ़ॉर वोट के पूरे स्टिंग ऑपरेशन की उसे न सिर्फ़ पल-पल की खबर थी, बल्कि उसी चैनल ने यह पूरा स्टिंग किया था। राजदीप सरदेसाई के पास पूरे सबूत मौजूद हैं कि पैसा कहाँ से आया, किसने दलाली की, पैसा किसे दिया, कब दिया और क्यों दिया? परन्तु न तो उस दिन राजदीप के चैनल ने यह स्टिंग ऑपरेशन अपने चैनल पर दिखाया और न ही इतना समय बीत जाने के बाद आज तक कभी किया। ये कैसी पत्रकारिता है?

गलती तो भाजपा की भी है कि उसने राजदीप सरदेसाई जैसे "सुपर कांग्रेसी दलाल" पर भरोसा कर लिया, IBN-7 को इस स्टिंग की जिम्मेदारी सौंपने और सरदेसाई के साथ मिलकर जाल बिछाने की क्या जरुरत थी? क्या बाकी के सारे चैनल वाले मर गये थे जो इस चर्च के मोहरे पर भरोसा किया? योजना तो यही थी, कि भाजपा के सांसद सदन में नोट लहराएंगे और सदन के बाहर IBN-7 पर इन वीडियो टेपों को प्रसारित किया जाएगा। परन्तु आडवाणी जी… आपने जिस पर भरोसा किया उसी ने आपके पीठ में छुरा भोंक दिया और उस दिन से आज तक वह सारे टेप्स और वीडियो दबाकर बैठा है, वरना उसी दिन UPA सरकार रफ़ा-दफ़ा हो गई होती।


ज़ाहिर है कि ऐसा "कृत्य" राजदीप ने मुफ़्त में तो नहीं किया होगा? जब उसे लगा होगा कि इस स्टिंग के जारी होने पर, इस पूरे मामले में कांग्रेस के "ठेठ ऊपर तक" के नेता फ़ँसेंगे तो उसने परदे के पीछे "समुचित डीलिंग" कर ली। भले ही जाँच का मूल विषय तो यही है कि आखिर वे चार करोड़ रुपये किसने दिये, लेकिन आडवाणी जी… इस बात की भी जाँच करवाईये कि राजदीप सरदेसाई कितने में बिका, किसके हाथों बिका? वह वीडियो प्रसारित न करने के बदले वह पद्मभूषण लेगा, कुछ करोड़ रुपये लेगा या कुछ और? तथा वह वीडियो टेप्स अभी भी सही-सलामत हैं या गायब कर दिये गए हैं? कांग्रेस ने तो जो किया उसे शायद जनता सजा देगी, परन्तु आपसे अनुरोध है कि आप इस "पत्रकारनुमा दलाल" को छोड़ना मत…।

हम तो सिर्फ़ अनुरोध ही कर सकते हैं, क्योंकि इतना बड़ा धोखा खाने के बावजूद आज भी देखा जाता है कि भाजपा के नेता और प्रवक्ता आये दिन राजदीप के IBN या करण थापर के टॉक-शो में अथवा धुर-भाजपा विरोधी NDTV पर अपना मुखड़ा दिखाने के लिए मरे जाते हैं…। आडवाणी जी, आप तो इतने अनुभवी हैं… सो यह बात तो जानते ही होंगे, कि यदि आप इन "मीडिया दलालों" को अपनी गोद में बैठाकर अपने हाथों से भोजन भी करवाएं तब भी ये कांग्रेस के ही गुण गाएंगे, तो फ़िर इनका बहिष्कार करके इन्हें "किसी और तरीके" से सबक क्यों नहीं सिखाते?

आडवाणी जी, विगत कुछ वर्षों में देखने में आया कि अत्यधिक भलमनसाहत दिखाने के चक्कर में आप इन सेकुलरों और कांग्रेसियों से "मधुर सम्बन्ध" बना रहे थे, लेकिन अब आपने इसका नतीजा देख लिया है कि ये "सेकुलर्स" किसी के सगे नहीं होते। आप इनके साथ चाय पार्टियाँ मनाएंगे, ये लोग कर्नाटक में सरकार गिरा देंगे… आप इनके साथ इफ़्तार पार्टियों में शामिल होंगे, ये लोग गुजरात में मनमाना लोकायुक्त थोप देंगे… आप मध्यस्थता करके अण्णा आंदोलन की "आँच" से इन्हें बचाने में मदद करेंगे, ये संसद में आपको बोलने नहीं देंगे…।
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नोट :- माननीय आडवाणी जी, माना कि मैं आपके कई निर्णयों से नाखुश हूँ (जैसे कंधार मामले में आत्मसमर्पण या जिन्ना की मज़ार पर सजदा करके उसे धर्मनिरपेक्ष बताना एवं स्विस बैंक अकाउंट मुद्दे पर सोनिया से खेद व्यक्त करना इत्यादि), मैंने अपने लेखों में कई बार इन निर्णयों की आलोचना भी की है। परन्तु  आपका कट्टर विरोधी भी इस बात को मानेगा, कि कई-कई मनमोहनों, चिदम्बरों, सिब्बलों और दिग्गियों के मुकाबले आप कई गुना बेहतर हैं…। 83 वर्ष की आयु में भी कल जिस तरह से आप संसद में गरज रहे थे, बहुत दिनों बाद दिल खुश किया आपने…। सेकुलरों से दूरी बनाकर रखेंगे, कांग्रेसियों और दलालनुमा पत्रकारों को रगड़ेंगे, तो हम और भी अधिक खुश होंगे…

17 comments:

Anonymous said...

मीडिया के मुखौटे को उजागर करना चाहिये और एक चैनल तो चलाना ही चाहिये. जब अन्य पार्टियां अपने अपने चैनल चला सकती हैं तो फिर भाजपा क्यों नहीं. और यह सत्य है कि आडवाणी बाकियों से लाख गुना अच्छे हैं.

जितेन्द्र सिंह : राष्ट्रवादी भारतीय... said...

बिकाऊ व 'सिक-यु-लायर्स' मीडिया और खान्ग्रेस के 'चरित्र' को सब अच्छी तरह जानते हैं.. लेकिन अपने 'पाले' में गेंद तो २०१४ में ही आएगी.. लाखों करोडो के घोटाले वाले 'मंत्री' आज 'मज़े' में हैं तो ४-५ करोड़ के 'बिकाऊ' सांसदों का क्या बिगड़ेगा..??
सुरेश भाई.. आप आज 'इतने खुश' हुए कि लालकृष्ण आडवानी को पूरा ब्लॉग समर्पित कर दिया कि लोग खुश होंगे.. 'प्रशंसित टिप्पणिया' करेंगे..?? चारित्रिक ढांचा आडवानी जी का भी 'संदिग्ध' है वरना वो दुनिया के पहले 'पी.एम्.इन वेटिंग' नही होते.??
पाकिस्तान के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा 'गलतियाँ' भाजपा ही करती है..?? और हम 'विकल्पहीन' उम्मीद भरी नज़र से भाजपा की तरफ देखते हैं...
लेकिन जगीरा डाकू(खान्ग्रेस) वाला 'कमीनापन' और 'कुत्तापन' कहाँ से लाये संस्कारित भाजपा...
भगवान् भाजपा की 'सद्बुद्धि' दे कि वो राजनीति और कूटनीति को समझ सके...
वन्दे मातरम्..
जय हिंद.. जय भारत..

shri said...

लेख तो चिपलून्कारी था ही नोट का मजा आ गया। शिकायतें भी जम कर की तो खरी कहने में भी देर न लगाई। सुरेश जी टीम अन्ना को करतब देख कर एक बार सब कतरा रहे थे। आप तथा सतीश चंद्र मिश्रा, लखनऊ ने आरंभ से अंत तक पूरी पारी जैसे खेली वह सदा याद रखी जाएगी।

Neeraj Rohilla said...

सुरेश भाई,
आपकी सारी चिंता जायज हैं। देखिये आगे क्या होता है।

नीरज रोहिल्ला

राजन said...

आईबीएन की भूमिका तो इस मामले में पूरी तरह गलत ही रही है लेकिन मुझे ये नहीं समझ आता कि भाजपा सांसदों की गिरफ्तारी के पीछे कोर्ट के क्या तर्क रहे होंगे.और अमर सिँह के बारे में तो क्या कहा जाएँ.भारतीय राजनीति का वर्तमान में जो गन्दा चरित्र है उसे बनाए रखने का बहुत बडा श्रेय इस नेता को जाता है.भारतीय राजनीति के संदर्भ में जब भी दलाली या सौदेबाजी का जिक्र आएगा तो उसमें अमर सिँह का नाम जरूर आएगा.

Bhawna said...

Aadvani believed in rajdeep then it's completely a great blender in politics from him. Rajdeep is a congress dog everyone knows then what was the point to get this sting operation by him. BJP has week politicians I always felt. In the favor of nation BJP also should get killed some seculars like congress gets killed rashtrawadi normally then I can say BJP loves this nation & they know politics otherwise none can defeat this worst clever congress.

संजय बेंगाणी said...

आड़वाणी का मजाक बनाते देखता हूँ तो समझ नहीं आता.... आज भी आड़वाणी को नैपथ्य से वापस आगे आना पड़ा. भाजपा की दुसरी पांत करिश्माहीन है तो मोदी को केन्द्र में ले जाओ....

Anonymous said...

chiplu..doosra kon sa tarika hai channel walon ko sabak sikhane ka. bata ho do..

परमजीत सिँह बाली said...

कांग्रेस को मात देना आसान नही है उसकी जड़े बहुत गहरे तक जमीं हैं वह अपनी आदत से कभी बाज नही आयेगी....कुर्सी के लिए किसी हद तक भी जा सकती है।
भाजपा को बहुत सोच समझ कर ही अपनी चाल चलनी चाहिए।

rahul said...

जिस दिन भाजपा के सांसदों को सदन में नोटों की गड्डियाँ लहराते देखा, उस दिन लगा कि शायद बहुत बड़ा हंगामा होगा, बड़ा बदलाव आएगा..........जिस दिन अन्ना का आन्दोलन देखा, लगा कि अब देश में सुधार होगा..........जिस दिन मुंबई में आतंकी हमला देखा, उस दिन लगा कि अब सरकार जरूर कुछ बड़ा करेगी.........अभी हाल में दिल्ली में आतंकी हमला देखा, तों लगा कि अब बस, अब तों जरूर बदलाव आएगा.............परन्तु नहीं.........कुछ भी नहीं बदला......और अब लगता है कि बदलेगा भी नहीं..........देश की प्रकृति ही ऐसी है, या बना दी गयी है.........ये समझौतावादी आचरण हमारे दिमाग में आजादी के संघर्ष के समय से ही बो दिया गया........शायद विश्व युद्ध ना होता तों हम अब तक गुलाम भी होते...........अब इसी की फसल काटी जा रही है..........यथावत चलते रहो.........

Anonymous said...

badiya lekh. jitendra ji se anshik sahmati aur rajan ji ke sawal ka uttar janane ki ichha hai.

Anonymous said...

www.mediacrooks.com जरूर देखते रहें !!

Vishwarup said...

mai ek bangali hoon, aur mujhe is baat par sharam aati hai ki NDTV jo meri nazar me ek Pakistani channel hai, uska pramukh ek bangali hai.

Anonymous said...

Suresh Chiplunkar, it is sad to know that a person, some how connected to the beautiful town of Chiplun is such a fanatic extremist.

The people of Chiplun are so peaceful and simple, Hindus and Muslims live together like brothers.

Anonymous said...

suresh ji ram ram
advani ji aaj ke netoo me sabse behtrin neta he/ wo advani ji hi the jinone farji jain hawala diary me apna naam aane per sansad sadasyata se istifa de diya tha aur vapas jab tak sansad nahi gaye jab tak pak saf nahi ho gaye/
jaha tak kandhar viman kand ki baat he jab aprahat viman ke yatriyo ke parijano ne P.M. HOUSE KE samne pardarsan karke apne parijano ki rihai k nare lagaye yadi wo sarkar ka support karte to sayad sarkar ko wo sarmnak kaam (azhar masood ko chodna)na karna parta

Jeet Bhargava said...

क्या इस देश मे राजदीप दत्त बुर्का दत्त जैसे बिके हुए पत्रकारो की नकेल कसने के लिए कोई 'मीडिया लोकपाल' आयेगा?
जिस तरह कॉंग्रेस ने राजनीति दत्त संसद की गरिमा गिराई है, वैसे ही बुर्का-राजदीप जैसे 'फ़ाईवादी' पत्रकारो ने पत्रकारिता दत्त मीडिया की गरिमा धूल मे मिलाई है।

Ganesh Prasad said...

राजदीप ने मुफ़्त में तो नहीं किया होगा?

lakh take ka sawal

lekh ke liye badhai ..