Tuesday, August 16, 2011

Janlokpal, Team Anna, Conspiracy in Anti-Graft Movement

जनलोकपाल आंदोलन, टीम अण्णा, और धूल-गुबार के पीछे छिपे सवाल (एक त्वरित माइक्रो-पोस्ट)…… 

आज़ादी के दूसरे आंदोलन कहे जाने वाले आंदोलन में स्थितियाँ बड़ी गड्ड-मड्ड हो चली हैअण्णा के कट्टर समर्थक यह मानने लगे हैं कि जो व्यक्ति अण्णा के साथ नहीं है वह भ्रष्टाचार के खिलाफ़ नहीं है, यानी यदि आपने अण्णा के विरोध में कुछ कहा तो आपको कांग्रेस के समर्थन में मान लिया जाएगा। 

उधर संघ की धुर विरोधी शबनम हाशमी ने अण्णा की हँसी उड़ाते हुए कहा है कि "अण्णा एक बिगड़ैल बच्चे की तरह जिद कर रहे हैं कि मुझे तत्काल चॉकलेट चाहिए, जबकि चॉकलेट लाकर देने की एक निर्धारित प्रक्रिया हैअण्णा के आंदोलन को RSS के लोग आगे बढ़ा रहे हैं…" (कमाल है!!!)। 

जबकि कुछ दिन पहले ही अण्णा सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उनका संघ से कोई सम्बन्ध नहीं है, संघ और भगवा ताकतों से उन्हें जोड़ना उनका "अपमान"(?) है। जब कल मैंने अण्णा को घेरे हुए स्वार्थी तत्वों के खिलाफ़ लिखा तो किसी ने भी प्रतिक्रिया में यह बताने की ज़हमत नहीं उठाई, कि आखिर NGOs को लोकपाल के दायरे में लाने में क्या बुराई है? (जो कि मेरी पोस्ट का मूल मुद्दा था) बस, लगे मेरी आलोचना करने। 

आज टीवी पर सुबह से बड़े भूषण और छोटे भूषण वकील पिता-पुत्र छाए हुए हैं, ये साहब वही दलाल हैं जो पहले कारपोरेट अथवा भूमाफ़िया के खिलाफ़ जनहित याचिका लगाते हैं, फ़िर कोर्ट के बाहर जमीन का एक टुकड़ा लेकर "समझौता"(?) करवा देते हैं। परन्तु जैसा कि मैंने कहा, अभी "अण्णा गोली" का नशा ऐसा हावी है कि कोई कुछ समझना ही नहीं चाहता। जरा दो-चार दिन में यह धूल-गुबार बैठ जाए, फ़िर इस आंदोलन के पीछे छिपे असली चेहरे सामने आने लगेंगे यदि इस आंदोलन का फ़ायदा उठाने के लिए, भाजपा इसे पीछे से हवा दे भी रही है तो विपक्ष होने के नाते यह उसका काम ही है, परन्तु ऐसा लगता है कि इस हो-हल्ले की आड़ लेकर राहुल बाबा की ताजपोशी कर दी जाएगी, एक शानदार "इमेज" के साथ। (सोचिए क्या जोरदार सीन होगा यदि राहुल गाँधी स्वयं अपने हाथों से अण्णा हजारे को जूस पिलाएं… चहुँओर जयजयकार)

जो बात मैं काफ़ी समय से कहता आ रहा हूँ कि इस आंदोलन की परिणति क्या होगी… उसका समय अब धीरे-धीरे नज़दीक आ रहा हैचन्द विकल्प देखिये जैसे कि-

1) यदि अण्णा को गिरफ़्तार ही रखा जाएया कुछ दिन बाद छोड़ा जाए, तो फ़िर आगे क्या? फ़िर से आंदोलन या कांग्रेस से बातचीत? कुछ भी स्पष्ट नहीं…

2) एक रास्ता यह भी है कि सरकार अण्णा की सारी माँगें मान ले और जैसा बिल अण्णा चाहते हैं वैसा का वैसा संसद में पेश कर दे (लेकिन क्या ऐसा कोई बिल संसद से पास हो पाएगा?

3) मनमोहन इस्तीफ़ा दे दें, उनकी जगह कोई और प्रधानमंत्री बन जाए (हालांकि कारपोरेट लॉबी आसानी से ऐसा होने नहीं देगी, और हो भी जाए तब भी कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा)।

4) सरकार इस्तीफ़ा देकर आपातकाल लगा दे, (लेकिन सोनिया अमेरिका में बैठी हैं तो इतना बड़ा निर्णय लेना आसान नहीं होगा)।

5) मध्यावधि चुनाव हों, तो कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो (भाजपा यही चाहेगी), लेकिन भाजपा सत्ता में लौट भी आए तो न तो जनलोकपाल बिल और न ही भ्रष्टाचार पर कोई फ़र्क पड़ने वाला है?

कुल मिलाकर बात यह है कि अण्णा का आंदोलन बगैर किसी राजनैतिक समर्थन के "एक बिना पतवार वाली नाव" के समान हैलोकतन्त्र और समाज में कोई बड़ा बदलाव तभी आ सकता है, जब या तो स्वयं अण्णा (या रामदेव बाबा) अपना स्वतंत्र राजनैतिक दल बनाएं और चुनाव लड़ें (यह काम इतना आसान और जल्दी होने वाला नहीं है, इसमें समय लगेगा), या फ़िर ये दोनों एक होकर किसी स्थापित राजनैतिक दल का आधार लेकर "परिवर्तन" करेंपरन्तु चूंकि अण्णा हजारे और उनकी टीम(?) को संघ-भाजपा-हिन्दुत्व इत्यादि से "एलर्जी" है, तो गैर-भाजपा विपक्ष वाले अण्णा का साथ दें (यह भी मुश्किल लगता है, क्योंकि लालू-जयललिता जैसे नेता अण्णा को नेता क्यों मानेंगे?) देखा आपनेकैसी उलझी हुई स्थिति है।

किसी राजनैतिक ठोस आधार और समर्पित कार्यकर्ताओं के बिना कुछ भी बदलने वाला नहीं है, यह आंदोलन कहीं दिशाहीन, नैराश्यपूर्ण और अराजकता की ओर न चला जाए… खासकर तब तक, जब तक कि इस आंदोलन के पीछे "छिपे असली मास्टरमाइण्ड" खुलकर सामने नहीं आते। 

फ़िर भी फ़िलहाल कुछेक पक्ष अपनी स्थिति साफ़-साफ़ बना चुके हैं, जैसे कि -

1) अण्णा के अंध-समर्थक (जो भूषण जोड़ी और अग्निवेश जैसों तक के खिलाफ़ भी कुछ सुनने को तैयार नहीं हैं)

2) अण्णा के समर्थक, लेकिन दिल से कांग्रेसी (ये लोग चाहते हैं कि अण्णा को श्रेय तो मिले, लेकिन इस आंदोलन का फ़ायदा संघ-भाजपा परिवार को न मिलने पाए, सधी हुई भाषा में आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन साथ-साथ संघ परिवार को भी निशाना बनाते हुए)

3) अण्णा के विरोधी, लेकिन भ्रष्टाचार के भी विरोधी (जो यह समझ-बूझ रहे हैं कि इस आंदोलन के पीछे कोई न कोई चालबाजी अवश्य है, जो जल्दी ही सामने आएगी)…

अग्निवेश की विभिन्न स्थानों पर उपस्थितियों और उसके बयानों पर भी गौर से निगाह रखनी होगी (उसे फ़िलहाल गिरफ़्तार नहीं किया गया है), साथ ही जिस प्रकार अण्णा हजारे को बड़े ही प्यार-मोहब्बत से गिरफ़्तार किया गया एवं पुलिस वाले बाद में भी समर्थकों की भीड़ से भी नर्मी से पेश आए (जबकि बाबा रामदेव समर्थकों पर आधी रात को पुलिसिया कहर बरपाया गया था), उसने रामदेव समर्थकों के मन में आशंकाएं पैदा कर दी हैं। सोनिया गाँधी का ऐसे महत्वपूर्ण मौके पर देश से बाहर रहना, सभी घटनाक्रमों और बयानों से राहुल गाँधी का दूरी बनाए रखना महज संयोग नहीं है… क्योंकि सोनिया को अण्णा के आंदोलन की तारीख के बारे में एक माह पहले से ही पता था और राहुल गाँधी के साथ जो चार खास "दरबारियों" की टीम बनाई गई थी वह भी चैनलों और अखबारों से गायब है, आंदोलन की सारी तपिश मनमोहन सिंह, चिदम्बरम और कपिल सिब्बल जैसे बाकी के गवैये झेल रहे हैं।

अब एक और काल्पनिक दृश्य के बारे में सोचें (जो कभी भी हकीकत में बदल सकता है) कि अचानक सोनिया गाँधी अमेरिका से वापस आती हैं, त्याग और बलिदान की प्रतिमूर्ति तो हैं ही… भारत आते ही सोनिया गाँधी (या राहुल गाँधी) तिहाड़ पहुँचते हैं… अण्णा को जूस पिलाते हैं… सारे भाण्ड चैनलों को "इशारा" मिल चुका होगा कि युवराज की ताज़पोशी की घड़ी आ गई है… तड़ से मनमोहन सिंह का इस्तीफ़ा होता है और यूपीए के पाप का घड़ा अपने सिर पर लिए मनमोहन को घर भेज दिया जाएगा, युवराज गद्दीनशीन होंगे… त्याग-बलिदान के साथ-साथ सोनिया जी "लोकतन्त्र का विनम्र रखवाला" भी बन जाएंगी। (बड़ी भयानक कल्पना है, है ना!!!) 


खैर…… अभी तो पहला ही दिन है, आगे-आगे देखते हैं क्या होता है। कहने का मतलब ये कि इस आंदोलन में कई पक्ष अपनी-अपनी गोटियाँ फ़िट करने की जुगाड़ मे हैं, कुछ खुल्लमखुल्ला सामने हैं जबकि सूक्ष्म चालबाजियों के कर्ताधर्ता धूल का गुबार बैठने के बाद दिखाई देंगे… आम जनता सोच रही है कि रामराज्य बस आने ही वाला है। जबकि मैं इस धूल-गुबार के बैठने और माहौल के स्थिर होने का इन्तज़ार कर रहा हूँ ताकि चेहरे साफ़ दिखाई दें…

52 comments:

संजय बेंगाणी said...

इस देश में जो भी अच्छा होता है, कांग्रेस के कारण होता है. इस जो भी होगा, अच्छा, उसके लिए श्रेय अभी सोनियाजी को दे रहा हूँ. जो खराब होगा उसके लिए भगवा वाले, अन्ना, भाजपा वगेरे दोषी है.

भगवा वाले सदा गल्ति करते है, दोष किसे दें? लगंड़े घोड़े पर दाँव लगाया जो भाग खड़ा हुआ. ऐसा आदमी लाओ जो भक्कड़ हो. जनता जरूर साथ देगी. वह त्रस्त है. व न बाबा के पिछे है न अन्ना के, न केजरी वाल आदि के. वह नेता चाहती है... बस.

rahul said...

एकदम सच कहा सुरेश भईया.....यही सत्य है...मै भी अन्ना का समर्थक हू....परन्तु अब लग रहा है कि वकील पिता-बेटा और तम्माम ऐसे ही लोग अपना स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हैं.....सबसे भयावह कल्पना आपने दिखाई.....सोनिया गाँधी का साम्राज्य निरंकुश रूप से स्थापित होना और राहुल कि ताजपोशी...भगवान बचाए ऐसा होने से.....

peeyushik said...

mai apko bas yeh kahna chataho ki jay prakash narayan ke andolan khatam hone ke bad unhone ek samajwadiyon ki toli banane ki sochi the aur satah me ye sarth bhi rakhi thi wo log kabhi bhi chunav nahi larenge par us sapne ke pura hone se pehle hi wo mar gaye aur mujhe yeh lagta hai ki es bar waisa jaror ho ga
jai hind

हिन्दुस्तानी said...

एकदम सटीक सोचते हैं आप सुरेश जी ||

हो ना हो नहीं, यही होने वाला है, पहले बाबा रामदेव के पूरे देश में घूम घूम कर किये जा रहे आन्दोलन को दरकिनार करने के लिए अन्ना को जंतर-मंतर पर बैठा कर गहल्बाहियाँ की और प्रचार किया की सरकार झुक गई है और सारी मांगे मान ली है और सरकार के भी पांच सितारे जड़ दिए और बाबा का भी मुद्दा छोटा कर दिया (भ्रष्टाचार वाला).. अन्ना को बड़ा साबित कर दिया और रातों रात अन्ना को हीरो |

अब फिर वही कहानी दोहराई जायेगी और अन्ना को विजेता और सरकारी महकमे और सर्कार को हार हुआ और नए राजा के लिए सिंहासन खाली कर अन्ना की जीत में अन्ना द्वारा सेहरा पहनाते हुए दिखाया जाना तय है ||

सांप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी ||

दीपक बाबा said...

@यह आंदोलन कहीं दिशाहीन, नैराश्यपूर्ण और अराजकता की ओर न चला जाए



यही इस आंदोलन का और अन्ना का अंत होगा ..

MANGAL SENACHA said...

मझेदार है...आप की बोतों में दम है....

Bhawna said...

You are absolutly right Mr. Chiplunkar. Mr. Begani - Fakkad man can do nothing only Saksham can do something- why u guys iritate with Ramdev's SAKSHAMTA. Ramdev's Aandolan is far better & genuine than Anna this is crystal clear from the begining.

K.R.Baraskar said...

akhri me to yahi hona hai bhai sahab.. hamara durbhagya hai aur hame jhelna hai inhe..

jackasspired said...

अगर ये दिन आ गया तो भारत का सर्वनाश निश्चित है......... :(

ROHIT said...

अब क्या कहा जाये?
कालेधन से पोषित देशी विदेशी लोग बहुत गहरी साजिशे चल रहे है.
अब अगर भारत की जनता के कुछ पुण्य जाग्रत होँगे तो उस बेचारी जनता को अगले कुछ सालो मे कुछ सुख मिलेगा.
वरना वो अन्ना पन्ना के चक्कर मे ठगी रह जायेगी.
बेचारी जनता....

Unknown said...

आप जो पिछली 2 पोस्ट से लिख रहे हैं मै उससे बिल्कुल सहमत हूँ । मैंने सुरू से ही इस विषय पर लिखा तो इंडिया अगेन्स्ट करेप्शन के लोगों ने व्यक्ति गत मैसेज भेज कर मेरी देशभक्ति पर प्रश्न खड़े करने शुरू कर दिये । आप जिस दिशा मे लिख रहे हैं उसको मेरा समर्थन है !

Anonymous said...

I support Anna and I support RSS and Baba Ramdev. What about me? Where do I stand?

Do you there's only one of me?

I was at jail today, and every other guy I talked to was like me.

Why did you forget to categorize me? Where do you want to categorize me?

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

jab baba ka bharat swabhiman 2014 me aayega tabhi kuchh ummeed hai. aur nirash hone ki baat nahi, baba lage huye hain... poore josh se...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

abhi kahin paddha tha ki bharat aur switzerland me ek samjhauta ho gaya hai khatedaron ke naam batane ko lekar. lekin us lekh me ye tha ki kisi vishesh tithi se aage ke khatedaron ke naam bataye jaayenge. is par bhi nigah daudaaiye..

Anonymous said...

sahmat

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

What is infront of and what is behind of anna's movement, i don't want to go into that detail, but as far as good spirit of movement is concerned, I can't support your views Suresh ji.Lets give credit where credit is due and be thankful for his contribution .

Anonymous said...

तुम कुछ लिखो और सोनिया गाँधी और राहुल का नाम न लो ऐसा हो ही नहीं सकता
तुम सिर्री हो

Anonymous said...

bohot sochte ho bhai....
kuch karo abhi....ya toh kisi ka virodh karo ya saath do.... tathasth mat raho....

sab bakwaas baatein likhi hain.....sahi neeyat se karm karo bas ...result is always in God's hand...

hoga wahi jo raam rach raakha..ko kahi karat badhaawan saakha...

दूसरी आजादी dusriazadi said...

कांग्रेस भ्रष्टाचार के आरोपों में जैसी फंसी हुई थी और मार्च 11 में बाबा रामदेव अन्ना हजारे को साथ लेकर जिस तरह आगे बढ़ गए थे उससे लग रहा था कि भाजपा से अघाए उसके ही वर्ग को गैर राजनीतिक सहारा आंदोलन के लिए मिल गया है और वह वर्ग फिर से सक्रिय हो चला था। यहां सेक्यूलर बिरादरी ने वयोवृद्ध गांधीवादी को जिस तरह मीडिया मैनेजमैंट के माध्यम से ‘राष्ट्रवादी तत्व’ से हैक कर जनता का चेहरा बनाया वह देखते ही बनता है। कांग्रेस को वार्ता के लिए यह उचित चेहरा लगा और जन लोकपाल विधेयक पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध सारा माहौल समेटने का प्रयास किया गया। बिना नियम-कानून के प्रारूप संयुक्त समिति बनी। बाबा रामदेव ने पैंतरा बदलकर कि प्रधानमंत्री इसके अधीन नहीं आएं अपनी पारी फिर से खेलने की कोशिश की। घाघ काँग्रेसी मंत्रियों के कुचक्र में वे ऐसे फंसे कि अब तक गर्दन मसल रहे हैं। उनकी अनुभवहीनता, राजीव दीक्षित का न होना तथा आचार्य बालकृष्ण की नेतृत्व के संबंध में एकदम पोची स्थिति, साथ ही मीडिया मैनेजमेंट में रही बड़ी कमियां उनको नीचे ले जाने वाले कारणों में प्रमुख हैं। अब अन्ना की टीम सजग होकर खेलने लगी तथा अपने विषय तक सीमित रहकर कुशलता से आगे बढ़ने लगी। भ्रष्टाचार पर नेतृत्व मीडिया मैनेजमैंट के कारण उनके पास है और भाजपा से अघाए उसके ही वर्ग को अन्ना की कदम ताल पर चलने में कोई बड़ी बाधा नहीं लग रही है। आप देख सकते हैं कि काँग्रेसी, कम्यूनिस्ट व चाँद सितारा टोपियां वंदे मातरम् व भारत माता की जय करने नहीं आए हैं। जब अपना नेतृत्व विफल रहता है तो कार्यकर्ता जहां नेतृत्व व मीडिया कवरेज के साथ सीमित उत्कर्ष मार्ग पाता है निकल पड़ता है। भाजपा व बाबा रामदेव जब यह काम चाहे किसी कारण से भी न कर पाए हों तो मीडिया व सरकार को भरपूर स्थान मिल गया है व अन्ना हजारे सीमित मुद्दे पर गहरी चोट निरंतर करते रहना वर्तमान स्थिति तक पहुंच गए हैं। राष्ट्रवादी तत्व पिछले अनुभवों से सीख न लेकर हर बार नेतृत्व व जन विश्वास को खो देते हैं व क्षत्रप सत्ता की शक्तियों से युक्त कांग्रेस फिर से सत्ता पर क़ाबिज़ हो जाती है। राष्ट्रवादी तत्व सामाजिक-सांस्कृतिक जागरण गांव व कस्बों से बिना मीडिया के यदि शुरु कर अपना व्यापक जन आधार नहीं बनाएंगे तो इस बार भी यूपीए ही सरकार ‘एक करिश्मे’ से बना लेगा और कुछ बंदरबांट के बाद स्थिति जस की तस रह जाएगी।

MKPandey said...

I totaly agree with you Shuresh Ji. Hats of to your editorial.

Gyan vane said...

संजय बेंगाणी सरीखे कांग्रेस प्रेमियों के कारण ही आज ये स्थिति है कि वो अघोषित तानाशाह बन गई है।
फिर से विचार करिए ।

amit jhalani said...

lekh atyadhik gahan chintan se likha gaya hai...........parantu yah sthiti sochniya hai. Ab is sthiti me kya karna chahiye?

महफूज़ अली said...

मैं भी इसीलिए सिर्फ खामोश हूँ... और वैसे भी मुझे भेडचाल में चलने की आदत नहीं है... मैं वापस आ गया हूँ... अब इन कोंग्रेसियों की पोल खोलूँगा....


Now going to read your all posts that have been left....

Vijay Kr Singhal said...

आपकी आशंकाएँ सही हैं. लेकिन फिलहाल अन्ना के समर्थन के अलावा कोई रास्ता नहीं है. हमें लगातार यह भी देखना पड़ेगा की अन्ना रह से भटक ना जाएँ और कांग्रेस उनको पहले की तरह मूर्ख ना बना दे.

Alok Nandan said...

सुरेश जी अन्ना आंदोलन की व्याख्या आप जिस लाइन पर कर रहे हैं उसे मैं भी सहमत हूं....यह हाई क्लास का ड्रामा है, और इसका लाभ अंतत कांग्रेस को ही मिलने वाला है...मीडिया अन्ना को कांग्रेस का दुश्मन नंबर एक घोषित कर चुकी है, जो कांग्रेस चाह रही थी, अन्ना को सामने लाने से विपक्ष की भूमिक पूरी तरह से कमजोर हो चुकी है यहां तक विपक्ष के एजेंड में भी अन्ना शामिल हो चुके हैं, यूं कहा जाये कि अब अन्ना अपने एजेंडे में शामिल करना विपक्ष की मजबूरी है। मामला पूरी तरह से साफ है, अन्ना कांग्रेस की मिली भगत से ही कांग्रेस का दुश्मन बने हुये हैं, और मोमबत्ती छाप आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। इस आंदोलन की शुरुआत ही हुई है बिजली बत्ती गुल करने से, सीधे तौर पर शहरी लोगों को टारगेट किया जा रहा है, जिनके बच्चों को बचपन से ही स्कूलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ लेख लिखना सिखाया जाता है।

Desh Premi said...

धूल-गुबार के बैठने और माहौल के स्थिर होने का इन्तज़ार.....

जितेन्द्र सिंह : एक सच्चा भारतीय said...

सुरेश जी..आपका धन्यवाद निर्भय लेखन के लिए...निर्भय इसलिए कि जब सब अन्ना की 'लकीर के फ़कीर' बने हुए हैं वहां आप अन्ना के "पार्श्व में चेहरे" ढूंढ रहे हैं.?? बड़े भाई.. मेरी हार्दिक इच्छा है..उन 'अवसरवादी' शक्लों को जान लेने की.. मैं आपके उस ब्लॉग का इंतज़ार कर रहा हूँ जिसमे सत्य सामने आएगा.? अभी तो लोग दिवास्वप्न (कि भ्रष्टाचार हटाने की जादुई छड़ी अन्ना हजारे के पास है.?) देख रहे हैं.?? जाने कब सारे झूठे चश्मे जनता की आँखों से हटेंगे और सच्चाई सामने आएगी.?
जय हिंद... जय भारत...

टी.सी. चन्दर T.C. Chander said...

कुछ न होने से बेहतर है कुछ होना, सो फ़िलहाल जो हो रहा है, होने दीजिए और देखिए। कम से कम शुरूआत तो हुई। बस आप यह मान लीजिए कि जिस मैदा से मिठाई बनती है और जिस सूजी का स्वादिष्ट हलवा बनना है बस उसमें कुछ कीड़ या इल्लियां है...

suman choudhary said...

Dear Suresh,
i am a fan of your creative and knowledgeable writing which eventually supported by facts but its a deep sorrow in my mind after reading this blog.
1)Have u read jan Lokpal bill(Anna team) and Lokpal bill(Cong.team),if not..please read then comment
2)Second u said that Shri Anna ji(Here "Anna" means his team) dont want RSS or any hinduism support or they are feeling insult if they support them. is totally incorrect and different from facts.
It seems that you want to discredit Anna's effect in this corruption...We people demonstrating in road want to eradicate the corruption not Government.
3)Today Anna ji invited sri Ravishankar and Baba ramdev ji for talks...i am telling you why Anna team wants religion out of this context is "

Whenever anything happens which is giving pain to Congress,Congress seems it to be the conspiracy of RSS or Hindu related fronts..Whether it was a J.P movement or Blasts anything..."""Anna team do want this Fight of corruption to be a fight between BJP(Non-Secular-according to congress) and Congress(Super-duper Secular)..Rest i ll explain to you when u ll reply to it ..
Thanking you

vishnu mishra said...

suresh j,aapne ekdam theek likha h,

youth is ready for kranti said...

सुरेश जी नमस्ते,
आप जानते हैं की किसी भी संघठन में २०-३०% कमियां तो रह ही जाती हैं,पर हमें क्या यह देखते हुए इसका समर्थन नहीं करना चाहिए कि इस जन लोकपाल बिल से कुछ तो भ्रस्ताचार पर नकेल कासी जाएगी.
मैं आपके जवाब का इंतजार करूँगा.

youth is ready for kranti said...

सुरेश जी नमस्ते,
आप जानते हैं की किसी भी संघठन में २०-३०% कमियां तो रह ही जाती हैं,पर हमें क्या यह देखते हुए इसका समर्थन नहीं करना चाहिए कि इस जन लोकपाल बिल से कुछ तो भ्रस्ताचार पर नकेल कासी जाएगी.
मैं आपके जवाब का इंतजार करूँगा.

Anonymous said...

Suresh Ji,

Anna ka Jail jana bhee isee natak ka ek socha samgha hua ang hai. Anna maje se jail ke andar baithe hain..Koi laathee charge naheen , koi aansu Gas nahin.. Koi sardee garmee nahi..Jo baba Ramdev ko jhelani padi..

Letus see what happens next.. This anshan will not continue for long..Raajtilak ka samay aa gaya hai.


Youvraj ka rajyabhishek hoga..Ghee ke diye jalaye jayenge..Saare desh mein khushiyaan hee khushiyaan hongi.. Ram Rajya Aane wala hai..

ePandit said...

हमें अन्ना पर विश्वास करने का दिल होता है। किरण बेदी आदि के साथ होने से होता भी है पर अग्निवेश आदि के होने से संशय होने लगता है।

धूल-गुबार बैठने पर ही हालात साफ होंगे।

रचना said...

daekhiyae unt kis karvat baethtaa haen

bas dar haen ki kahin arajaktaa naa phaele

Anonymous said...

जैसे आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी को मूर्ख बनाकर कांग्रेस और व्यापारी वर्ग ने फायदा उठाया। शायद वही हाल दूसरे गांधी का भी होगा। यह सारा प्रहसन वादे-इरादे के बाद लगभग कुछ नहीं के साथ खत्म होगा।

Desh Premi said...

एक दिन सोनिया गांधी के सपने में महात्मा गांधीजी आकर बोले,"मैने मरते समय कॉंग्रेस को सादगी, ईमानदारी, टोपी, चश्मा और डंडा दिया था, कहॉं है वो?"
सोनिया ने अत्यंत विनम्रता से कहा,"टोपी तो राहुल लोगोंको पहना रहा है. सादगी मेरे और प्रियंका के पास है. चश्मा मनमोहन के पास है. ईमानदारी स्विस और ईटली के बैंक में सेफ है और डंडा आम आदमी की सेवा में लगा रखा है

Ravindra Nath said...

Dear Mr. Suman Choudhary,

When Anna gave public statement that BABA Ramdev has to clear his links with RSS, I send personal message to Shivendra Singh Chouhan (convenor India Against Corruption) about this & he replied in clear words that IAC don'r want any association with RSS.

Why is this approach towards RSS? you are ready to hob-nob with hurriyat & their allies, you are happy to have people on your stage who support killing of 76 security personal in dantewada, but you have problem with RSS, why?

Is this movement (IAC) is for anti-Nationals? Is it having no space for nationals? I was assosciated with IAC from Commonwealth Jhel days, but now I am cut off from it, because if IAC don't want any association with RSS then let me tell, I am a pakka swayamsevak.

They are fortunate enough that our leaders are not like me, & they still support movement else 50% base of movement will go just in seconds. Rest will leave when they will find such swallow support for movement.

manendra said...

why u people care about all the thing...
kuch achha ho raha he desh k liye ye kam he kya...

or tumne desh k liye kya kiya he jo tum dusron pe ungli utha rahe ho....
koi kuch kar raha he to uski tang peeche kheecho...bahut ghatiya post he yah

suman choudhary said...

Dear Ravindra ji
Whatever RSS and other hindu fronts have done for this country cant be questionable and give me a respect of being a hindu.
Now question is " why RSS should not to be a part of it"(As per "IAC")
--We all respect Baba Ramdev,RSS and all religion fronts who is supporting "ANNA" but please think if they("ANNA") will share same plateform then it will be easy for the "Super-duper Secular" party to reject the appeal of the people by saying it a " Bhagwa movement rather than a People's movement. We hindu (only in this world) secures the other religion to florish.This is in our blood ,we cant get out of it,and if u ll against this then u ll be summarily rejected by your own people(See our ancient History).
Second thing--Question is not about Why Swami Agniwesh not others? Question is ..Is this a right time to question this?...

भंडा न फोड़ो said...

अच्छे अन्ना, अच्छे गांधी जी, अच्छी congress government 126 वर्ष बाद भी वह कहते हैं भारत में ‘‘आम आदमी‘‘ वह है जो देश की प्रणाली से जुड़ा हुआ नहीं है। http://www.congress.org.in/new/hindi/
परंतु जब यह कहा जाता है कि ऐसा क्यों है तो वहां से आवाज आती है सांप्रदायिक शक्तियों से सावधान, इस्लाम खतरे में, Danger on Secularism, fundamentalists

उनकी तो यह स्थिति हो गई है पर देश के लिए, धर्म-नीति के लिए कोई आगे क्यों नहीं, एक ही कारण राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व देने में सक्षम नहीं, इसका कारण व्यक्तिगत स्वार्थ व अहम भाव में उलझाव, चरित्रगत मध्यम शहरी वणिक वर्गीय छवि में बंध चुका राष्ट्रवादी, ग्रामीण तथा कस्बाई जन से दूर तथा शक्तिशाली प्रशासनिक अधिकारी वर्ग व प्रचार माध्यमों पर कमजोर पकड़, अंत में हिंदू धार्मिक व सामाजिक शक्तियों का मनोरंजन मात्र तक सीमित रह जाना।
सुरेश जी गहरा काम कर रहे हो परंतु विस्तार-प्रचार न होने से ऊंट के मुख में जीरा, उनके हाथी तो मर कर भी सवा लाख के (अब तो करोड़ों के)
अन्ना के नाम पर कई चेहरे नई चमक ले लेंगे और बाबा रामदेव के साथ नाम जुड़ने से कई चेहरे बयान बदल देंगे। सच का कोई रूप नहीं होता विजेता का इतिहास बनता है। हारे को हरी नाम..

Ravindra Nath said...

Dear Mr. Suman Choudhry,

When Anna accepts 50 lakh rupee from naveen jindal, a prominent congress leader to help himself for fast at ramleela maidan (part -I) he don't get associated with corruption, but when baba accepts help from RSS he become communal, how?????

Can I know the difference between these two scenario?

Ravindra Nath said...

And dear Sir,

Regarding your second question (whether the time is right to ask questions) Is all sanctions are going to be imposed on us only???

Why don't someone go & tell to anna to not to raise dividing statements at this juncture.

Ravindra Nath said...

I am not at all impressed by the arguments given by you, it's look like as if we have to sacrifice hindutva in order to be part of anti corruption movement.

You are able to see Sadhvi ritambhara at stage of Baba ramdev but unable to see Mr. Madani at his stage at same time, people like this with partial disability in vision (seceltive problem) only are known as sharm-nirpexatawadi.

Are you one of them? I am sure you are not, then why are you shying from telling truth about your self & why are you shying from snaching mask from faces of agnivesh & kejriwals?

umesh said...

kya aajad bharat me kabhi kisi ek mudde par itana bada jan aandolan khada hua ? kya aaj jo jan manas sadko par aa raha he wah bhed he our anna teem ke isaro par sudh budh kho kar sadko par aa gaya he ? R S S ki vichardhara ne na pahle bharat ki janta ke man ko samjha na hi ab samjhna chahenge, R S S dvara poshit satta ki rajneti ka hissa banane wale anek netaoo ne bhi desh ke sansadhano our rastriya dhan ki loot me bharpoor hissa liya he jan lokpal bhi desh ke rajnetik prashasnik tantra ki loot ko niyantrit karne ka oopay khojne ka madhyam awshya ban raha he ANNA ke aandolan se jude logo par apne hisab se aaroop laga kar ham rastrahit nahi kar rahe he yah samay rashtra ke samman samrdhhi our vikash ke liye ek jut hone ka he . is ek jutta se desh me vyaapt samsyaon ko samjhane our oonka nirakaran dundne ke liye samaj ke alag alag tabko ke sochane vicharne wale ese vidhwano jo chunav evam rajnetik dalo ka hissa nahi banana chahte ke liye ek manch banane ki prasthbhumi ban sakti he jo vyavastha parivartan ke liye aavashyak he

shri said...

उमेश जी जिस ‘तमाशे’ को आप जन आंदोलन कह रहे हो उससे अधिक बड़े तमाशे देश ने देखे हैं आपने न देखे हों। अंग्रेजों की सत्ता में भी तथा काले अंग्रेजों के शासन में भी। जनता पार्टी की सरकार तथा विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार से पूर्व के आंदोलन उन दिनों चले थे जब वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक प्रचार माध्यम यानी मीडिया माफिया नहीं थी। मोकच गांधी की पुस्तकें तथा उनके समकालीन व्यक्तियों द्वारा लिखी गई उन पर पुस्तकें पढ़ लें, मात्र पाठ्य पुस्तकों व सरकारी प्रचार से व नोटों पर छपे चित्र से ही राय न बना लें। साथ ही गांधीवादी कहने वाले नेहरु से लेकर हर ‘गांधी’ के कार्य समझ लें यूं ही किसी संगठन या वैचारिक आंदोलन पर टिप्पणी न टांकते फिरें। आप जैसे टिप्पणी पोषित गांधी के आदर्शों पर चलने वाले नेहरु परिवार की सत्ता में वर्षों तक गुण नहीं देख पाने के बाद भी गांधीगिरी के गुण अण्णा पर टांक रहे हैं व विभोर हो रहे हैं वह दिवास्वप्न टूटे तथा यह बात समझ आए कि अंग्रेजों की सत्ता के 200 वर्षों में 2 लाख लोग ही युद्धों व शासन विरोध में मरे थे जबकि देश के विभाजन से 1 वर्ष पूर्व से 4 माह पश्चात तक चली हिंसा में 20 लाख धर्म विशेष के लोगों की मौत हुई थी। यही नहीं 1946 से 1948 के बीच 17 देश स्वाधीन हुए थे अकेला भारत नहीं जहां ‘भारत माता’ पर मोकच गांधी राष्ट्रपिता बनाए गए। 1946 में कांग्रेस के 30 लाख सदस्यों में 30 हजार पंथविशेष के थे जिसमें से 20 हजार सरहदी गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान के पख्तून क्षेत्र में थे जो क्षेत्र पाकिस्तान में जबरन शामिल किया गया। अण्णा के भारत माता के चित्र को हटाने तथा वंदे मातरम् के स्थान पर इंकलाब जिंदाबाद कहने तथा मुट्ठी भर पंथविशेष के आंदोलनकारियों को पंथ विशेष की प्रार्थना नाश्ता करवाने के बाद भी आप समझ नहीं पा रहे कि यह भोली भाली गलतियां एक विभाजन की विभीषिका दे चुकी हैं तथा आज भी 50 हजार करोड़ का पंथविशेष को इस पंथनिरपेक्ष देश में पंथिक अनुदान देना पड़ रहा है। भ्रष्टाचार कर भी यदि सत्ता पर किसी समीकरण से आया जा सकता है और प्रतिष्ठा बनी रहती है तो भ्रष्टाचार समाप्त नहीं हो सकता। भ्रष्ट विचारकों की सत्ता न बने तथा सत्ता पर जन का अंकुश रहे यह पहला विचार होना चाहिए तथा इस विचार से जो संघर्षरत हैं उनको सम्मान जननेता द्वारा दिया जाना चाहिए न कि मुट्ठी भर लोगों को तुष्ट करने का प्रयास अपने विचार सिद्धांत नारे बदल कर किया जाना चाहिए। जिस देश में एक प्रतियोगी परीक्षा में 20 लाख युवा आज भी शामिल होते हैं उससे दुगने लोग जिस दिन दिल्ली पहुंच जाएंगे तो समझिएगा कि यह जन आंदोलन की शुरुआत है। अभी तो परीक्षार्थियों जितनी भी जरूरत लोगों को नहीं लगी है जन आंदोलन कैसे कह सकते हैं। मत भूले कि यह देश 120 करोड़ लोगों को धारण करता है।

katyayan said...

i very strongly feel that this goverment and system is all rotten and unless this wlole thing is changed v will continue to suffer i have few suggestions all of us who want a change sholud stop paying income tax bcause unless money collection is affected the present lot of kings will not b affected then v can sit and talk to them othrwise aap ladate raho kuch nahi hoga

suman choudhary said...

Bahut Nirashjanak baatoan ki shurwaat aap mahanubhav ne ki hai..Ravindra ji evam Sri ji ki tippaniyon se to aisa hii lagta hai ki kisi Darm visesh ki "Jai" baki Darmo ki aahutiyon se hi ki ja sakti hai.

Ravindra ji ki baatoan ka main isliye jawab nahi de raha kyunki wo muddoo se bhatakar kahin aur ja rahe hai...(Jaise Jan lokpal Vs Lokpal bill ) ki bajai Anna Vs Ramdev...Isliye Maaf kar dijiye ravindra ji.

Sri ji....

Aapki ek-ek baatoan ka main yahan uttar dena chahta huin..:_

"""जनता पार्टी की सरकार तथा विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार से पूर्व के आंदोलन उन दिनों चले थे जब वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक प्रचार माध्यम यानी मीडिया माफिया नहीं थी"
Uttar- Wartmaan Sansarik paridrishiyon par apna dyaan aakrisht kare,jahan aaj kal bache apne mata-pita ke sath bhi rahna pasand nahi karte,evam parivarik ,nathik mulyoh ka sarvnash ho raha hai wahan "Anna" ji ki ek hunkar par Lakho Yuva,Vridh,Bache sadak par hai....Aaj kal ki peedi to "Bomb blast" ke baad bhi khud ke karyon mein leen hokar usse nazarandaaz kar deti hai.Kripya Gaur kare ki kyun yeh log sadak par hai,kyun nahi "RSS" ke hunkar par itni beed nikalti hai jabki "RSS" ke Desh-premi Karyon ke liye hum sab Nat-mastak hai.

अण्णा के भारत माता के चित्र को हटाने तथा वंदे मातरम् के स्थान पर इंकलाब जिंदाबाद कहने तथा मुट्ठी भर पंथविशेष के आंदोलनकारियों को पंथ विशेष की प्रार्थना नाश्ता करवाने के बाद भी आप समझ नहीं पा रहे कि यह भोली भाली गलतियां एक विभाजन की विभीषिका दे चुकी हैं

:- Vibhajan kisi ko swikarya nahi tha par Desh ki janta Bhagwaan Shiv bankar usse pi aur aaj bhi Rah-rah kar hame usme Jal arpan karna padta hai taki Vibhajan rupi Vish ki Rodra rup hame na dikhe....
Par aap ki tippaniyon se to aisa lagta hai ki galtiyon se seekhne ki bajai usme aur bhi Vish ghol rahe hai....Hum Hindu-Muslim-Sikh-Isai-Jain,Bodh sabhi issi bharat maa ke santaan hai aur agar Parivaar ka koi ladka bhatkta hai to usse marte nahi usse sudharte hai..Kripya Desh ko ek Parivar Samjhe koi Sabji ka Tokra nahi ...


जिस देश में एक प्रतियोगी परीक्षा में 20 लाख युवा आज भी शामिल होते हैं उससे दुगने लोग जिस दिन दिल्ली पहुंच जाएंगे तो समझिएगा कि यह जन आंदोलन की शुरुआत है।

Jis Desh ki sarkarein Matr 12 karore (kul 120 krore jansansakhya) ki mat se ban jati hai...Jahan Vote dena Exam,naukri dene se badkar nahi hai,jahan hum malik nahi balki naukar banee hai wahan aap kis tarah ki baat kar rahe hai....kripya agar ek swastha charcha karna chahte hai ki to yeh bataye"ANNA aur unki team" ki Lokpal Bill me kya Kamjoriyan hai warna Ithihaas kewal aap logo ki jagir nahi ki jab chahe ek naya Morh de de..

मेरी दास्ताँ: said...

यह सुनियोजित था कि जब अगस्त में अन्ना अनशन पर बैठेंगे तब सोनिया अपना इलाज़ कराने अमेरिका जाएँगी, राहुल परदे के पीछे से मम्मी की सलाह “MMS” (मनमोहन सिंह) तक पहुँचाते रहेंगे लेकिन सामने आ कर कुछ नहीं बोलेंगे. प्रियंका की तरफ से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जायेगी. जब तक आंदोलन की आंच धीमी नहीं हो जाती तब तक सोनिया अमेरिका में ही रहेंगी और पूरे देश में “MMS” की किरकिरी होती रहेगी. Finally देश के भले के लिए सोनिया जी अपना इलाज़ अधूरा छोड़ कर वापस आएँगी. शायद “MMS” इस्तीफ़ा भी देदें. अन्ना वाला जन-लोकपाल बिल छोटे-मोटे बदलाव के साथ संसद में पेश होगा लेकिन पास कभी नहीं होगा. सरकार को बहाना मिल जायेगा की संसद में बिल पास नहीं हुआ तो सरकार कुछ नहीं कर सकती क्योंकि बिल पास करने के लिए विपक्ष की वोट भी चाहिए. सरकार और विपक्ष में कमेंटबाज़ी चलेगी. उसके बाद अगर अन्ना तीबारा अनशन पर बैठे तो बाबा रामदेव वाला ट्रीटमेंट उनको भी दे दिया जायेगा.

जितेन्द्र गोस्वामी said...

सुरेश जी,
आपने सही लिखा है आज अन्ना कहते है कि मैं PMO या राहूल से ही बात करूंगा। राहूल क्या है जिससे इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर बात हो सकती है ,
आप वाकई दूर की सोच लेते है । धुल का गुबार शांत होने लगा है।

पवन said...

इस विषय में अधिक जानकारी के लिए यह लेख भी पढ़ें-
http://in.jagran.yahoo.com/news/opinion/general/6_3_8145613.html

Ek Hindustani said...

Bahut Acha Ji