Wednesday, August 3, 2011

Indian Army Personnel, Mental Atrocities and Tough Conditions

वीर जवानों से ऐसा बर्ताव करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकता है… 

अपनी जान पर खेलकर देश के दुश्मनों से रक्षा करने वाले सैनिकों के प्रति सरकार और नौकरशाही का संवेदनहीन रवैया जब-तब सामने आता रहता है…

1) संसद पर हमले को नाकाम करने वाले जवानों की विधवाओं को चार-पाँच साल तक चक्कर खिलाने और दर्जनों कागज़ात/सबूत मंगवाने के बाद बड़ी मुश्किल से पेट्रोल पम्प दिये गये…

2) लद्दाख में सीमा पर ड्यूटी दे रहे जवानों हेतु जूते खरीदने की अनुशंसा की फ़ाइल महीनों तक रक्षा मंत्रालय में धूल खाती रही, जब जॉर्ज फ़र्नांडीस ने सरेआम अफ़सरों को फ़टकार लगाई, तब कहीं जाकर जवानों को अच्छी क्वालिटी के बर्फ़ के जूते मिले…

ताज़ा मामला आया है केरल से… आपको याद होगा कि कैसे न्यायालय के आदेश पर कर्नाटक के एक रिसोर्ट में कोयम्बटूर बम धमाके के मुख्य आरोपी अब्दुल नासेर मदनी का “सरकारी खर्च पर पाँच सितारा आयुर्वेदिक इलाज” चल रहा है…(यहाँ पढ़ें Abdul Naser Madni Getting VIP Treatment)। जबकि 26/11 के मुम्बई हमले के समय बहादुरी दिखाने वाले जाँबाज़ कमाण्डो शौर्य चक्र विजेता पीवी मनेश को भारत की सरकारी मशीनरी और बड़े-बड़े बयानवीर नेता आयुर्वेदिक इलाज के लिये प्रतिमाह 4000 रुपये की “विशेष स्वीकृति” नहीं दे रहे हैं…।

हजार लानत भेजने लायक किस्सा यूं है कि 26/11 के मुम्बई हमले के समय पीवी मनेश, ओबेरॉय होटल में आतंकवादियों से भिड़े थे। उन्हें अहसास हुआ कि एक कमरे में कोई आतंकवादी छिपा हुआ है, जान की परवाह न करते हुए मनेश गोलियाँ बरसाते हुए उस कमरे में घुसे, परन्तु अंधेरा होने की वजह से वे तुरन्त भाँप नहीं सके कि आतंकवादी किधर छिपा है। इस बीच आतंकवादी ने एक ग्रेनेड मनेश की ओर उछाला, जो कि मनेश के हेलमेट के पास आकर फ़टा, हालांकि मनेश ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उस आतंकवादी को मार गिराया, लेकिन हेलमेट पर अत्यधिक दबाव और धमाके की वजह से पीवी मनेश को अंदरूनी दिमागी चोट लगी और उनके शरीर की दाहिनी बाजू पक्षाघात से पीड़ित हो गई। ग्रेनेड की चोट कितनी गम्भीर थी इसका अंदाज़ा इसी बात से लग सकता है कि हेलमेट के तीन टुकड़े हो गये और मनेश चार माह तक कोमा में रहे…।

दिल्ली एवं मुम्बई के विभिन्न सेना अस्पतालों में इस वीर का इलाज चलता रहा, परन्तु एलोपैथिक दवाईयों से जितना फ़ायदा हो सकता था उतना ही हुआ। अन्त में लगभग सभी डॉक्टरों ने मनेश को आयुर्वेदिक इलाज करवाने की सलाह दी। मनेश बताते हैं कि उन्हें उनके गृहनगर कन्नूर से प्रति पंद्रह दिन में 300 किमी दूर पलक्कड जिले के एक विशेष आयुर्वेदिक केन्द्र में इलाज एवं दवाओं हेतु जाना पड़ता है, जिसमें उनके 2000 रुपये खर्च हो जाते हैं इस प्रकार उन्हें प्रतिमाह 4000 रुपये आयुर्वेदिक दवाओं पर खर्च करने पड़ते हैं।

रक्षा मंत्रालय के नियमों के अनुसार आयुर्वेदिक इलाज के बिल एवं दवाओं का खर्च देने का कोई प्रावधान नहीं है... सैनिक या तो सेना के अस्पताल में इलाज करवाए या फ़िर एलोपैथिक इलाज करवाये। इस बेतुके नियम की वजह से कोई भी अफ़सर इस वीर सैनिक को लगने वाले 4000 रुपये प्रतिमाह के खर्च को स्वीकृत करने को तैयार नहीं है। जबकि उधर अब्दुल नासेर मदनी पाँच सितारा आयुर्वेदिक मसाज केन्द्र में मजे कर रहा है, क्योंकि उसके पास वकीलों की फ़ौज तथा “सेकुलर गैंग” का समर्थन है।

हालांकि पीवी मनेश के पास शौर्य चक्र विजेता होने की वजह से रेल में मुफ़्त यात्रा का आजीवन पास है, परन्तु फ़िर भी एक-दो बार टीसी ने उन्हें आरक्षित स्लीपर कोच से बेइज्जत करके उतार दिया था। रूँधे गले से पीवी मनेश कहते हैं कि भले ही यह देश मुझे भुला दे, परन्तु फ़िर भी देश के लिए मेरा जज़्बा और जीवन के प्रति मेरा हौसला बरकरार है…। मेरी अन्तिम आशा अब आयुर्वेदिक इलाज ही है, पिछले एक वर्ष में अब मैं बिना छड़ी के सहारे कुछ दूर चलने लगा हूँ तथा स्पष्ट बोलने और उच्चारण में जो दिमागी समस्या थी, वह भी धीरे-धीरे दूर हो रही है…।

इस बहादुर सैनिक के सिर में उस ग्रेनेड के तीन नुकीले लोहे के टुकड़े धँस गये थे, दो को तो सेना के अस्पताल में ऑपरेशन द्वारा निकाला जा चुका है, परन्तु डॉक्टरों ने तीसरा टुकड़ा निकालने से मना कर दिया, क्योंकि उसमें जान का खतरा था…। दिलेरी की मिसाल देते हुए, पीवी मनेश मुस्कुराकर कहते हैं कि उस लोहे के टुकड़े को मैं 26/11 की याद के तौर पर वहीं रहने देना चाहता हूँ, मुझे गर्व है कि मैं देश के उन चन्द भाग्यशाली लोगों में से हूँ जिन्हें शौर्य चक्र मिला है… और मेरी इच्छा है कि मैं अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार ओबेरॉय होटल में पत्नी-बच्चों समेत लंच लूं और उसी कमरे में आराम फ़रमाऊँ, जिसमें मैने उस आतंकवादी को मार गिराया था…।

परन्तु जिस तरह से अब्दुल नासेर मदनी, अजमल कसाब और अफ़ज़ल गुरु की “खातिरदारी” हमारे सेकुलर और मानवाधिकारवादी कर रहे हैं… तथा कश्मीर, असम, मणिपुर और नक्सल प्रभावित इलाकों में कभी जवानों को प्रताड़ित करके, तो कभी आतंकवादियों और अलगाववादियों के “साथियों-समर्थकों” से हाथ मिलाकर, उन्हें सम्मानित करके… वीर जवानों के मनोबल को तोड़ने में लगे हैं, ऐसे में तो लगता है कि पीवी मनेश धीरे-धीरे अपनी जमापूँजी भी अपने इलाज पर खो देंगे… क्योंकि नौकरशाही और सरकार द्वारा उन्हीं की सुनी जाती है, जिनके पास “लॉबिंग” हेतु पैसा, ताकत, भीड़ और “दलाल” होते हैं…। मुझे चिंता इस बात की है कि देश के लिए जान की बाजी लगाने वाले जांबाजो के साथ नौकरशाही और नेताओं का यही रवैया जारी रहा, तो कहीं ऐसा न हो कि किसी दिन किसी जवान का दिमाग “सटक” जाये और वह अपनी ड्यूटी गन लेकर दिल्ली के सत्ता केन्द्र नॉर्थ-साउथ ब्लॉक पहुँच जाए…

27 comments:

Ranjan Jain said...

Bhagwaan kare koi dimaag satak jawaan waha pahuch hi jaaye....

MALLHARI RAJENDRA KUTMULGE said...

नही कसब के ऊपर करोडो खर्च कर देगी यह गांडू कांग्रेस फिर एक जाबांज सिपाही को क्यू करेगी ! क्या करेगे मै तो कांग्रेस के हार एक की मौत देखना चाहता हूँ !

Abhishek Srivastava said...

bahut hi hriday vidarak lekh hai.. sach hai aisa kewal is desh me hi ho sakta hai... Ishwar aise bahudoron ko lambi aayu aur ayushya pradan karen in netaon se to ab hame koi ummeed nahi hai sab ke sab ek jaise hain chahe wo kisi bhi party ke kyon na ho..............

Desh Premi said...

ऐसा शुभ दिन कब आएगा जब इन लालची कुत्तो(खास कर के इन खान्ग्रेसियों) को कोई जवान लाइन में लगा कर भुन दे
ऐसे दिन के इंतजार में हूँ
और शायद नहीं आया तो हो सकता हम में से किसी को ये शुभ काम करना पड़े
जय हिंद ,जय हिंदुस्तान !!

दिवाकर मणि said...

बिलकुल सही कहा आपने कि कहीं ऐसा न हो कि किसी दिन किसी जवान का दिमाग “सटक” जाये और वह अपनी ड्यूटी गन लेकर दिल्ली के सत्ता केन्द्र नॉर्थ-साउथ ब्लॉक पहुँच जाए…

ईश्वर हमें ऐसा दिन हमें शीघ्रातिशीघ्र दिखाए....ॐ

P K Surya said...

bade bhai suresh g, mere anusar 10 - 20 cammando ka dimag satak he jana chaihiye jisse 10 janpath se le kar sansad k dalal netawon ko goliyon se bhuj den tab ja k kuchh shanti milegi. Jay Bharat

vijender said...

khangresh soniya party ka asli cahera samane aa hi gaya/ un muslim atankvadiyo ko kiyo nahi bharibharkam subhia de/ akhir congresh party k purvaj aur atankbadio ka sambandh isalm se jo he/

Man said...

वन्देमातरम सर ,
ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन ये भी हो जायेगा ,की कोई जवान अपनी ड्यूटी गन का ओरिजनल यूज ले लेगा @भगवान जल्दी ही वो दिन आये |यु.पि.ऐ पार्ट 1and सेकंड में सेना के खिलाफ और उसका मनोबल तोड़ने की भरपूर साजिशे की गयी |ये तो सेना इतनी मजबूत ना हो कब का ही ये विभाजनकारी सरकार देश में आंतरिक युद्ध करवा के कब के ही इसके टुकड़े करवा देती |और इसकी माफिया लेडी का मिशन भी यही था ,कश्मीर घटी में और मावो वादियों के खिलाफ सेना का मनोबल तोड़ने की भरपूर कोशीशे की गयी लेकिन धन्यवाद हे हमारे पूर्व सेनापति को की उन्होंने द्रढता इस माफिया का विरोध किया |

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

लालफीताशाही और असंवेदना का नायाब नमूना है यह प्रकरण। काश कोई अधिकारी इसपर निगाह डाल लेता।

Dhananjay said...

एक भूतपूर्व सैनिक होने के नाते में मनेश की पीड़ा को बहुत अच्छे से समझ सकता हूँ. मद्नियों और कसाबों के लिए सारे कायदे क़ानून में कोई न कोई तोड़ निकल आता है लेकिन देश के वीरों के लिए यही कानून पत्थर की लकीर बन जाते हैं. जो देश अपने वीरों पर गर्व नहीं करता वो या तो गुलाम होता है या नहीं ही होता. और यहाँ तो वीरों को लतियाने के साथ साथ देशद्रोहियों को सुविधाएँ दी जाती हैं. तो खुद ही सोच सकते हैं कि देश के पतन की रफ़्तार क्या होगी.

सुनील दत्त said...

न जाने देश कब गद्दार नेताओं व अधिकारियों के चुंगल से मुक्त होगा और देशभक्तों सैनिकों को मान-सम्मान मिल पाएगा...

Pratik Jain said...

जब तक माफ करने और चुपचाप सहन करने की संस्कृति इस देश से नहीं जाएगी यही सब कुछ चलता रहेगा। आखिर ये सैनिक इस प्रकार सहने की बजाय क्यों नहीं मीडिया में आकर सीधे-2 सरकार पर हमला बोलते हैं। इनका अधिकार है कि ये जी भरकर इस गन्दी व्यवस्था के खिलाफ बोलें और हर प्रकार से इसका विरोध करें। और मेरा विश्वास है कि इनकी आवाज अवश्य सुनी जायेगी और अगर ये चाहें तो इन्हें मीडिया कवरेज भी भरपूर मिलेगा, लेकिन अगर ऐसा कहेंगे कि देश मेरे साथ कुछ भी करें मैं तो हमेशा देश को समर्पित रहूंगा तो हो चुका कल्याण

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

अरे इन देश भक्तों ने ही तो कर दी थी, गडबड इन्हे बचा कर, नहीं तो हो गया था काम तेरह दिसम्बर संसद पर हमला जब हुआ था?

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

देश भक्ति की डगर थोड़ी कठिन रही है, पर आज देशभक्तों के लिए सम्मान से इस राह पे चलना दूभर होता जा रहा है. अपने सरकार, ख़ास करके कोंग्रेस, से देशभक्तों की सेवा की आशा ही व्यर्थ है. पर आम जनता (कुछ गिने चुने देश भक्तों को छोड़ कर) भी देश भक्तों की कुछ आर्थिक/शारीरिक/सामाजिक सहायता के बजाय Cricket, Movie, Club Party और ना जाने क्या क्या में व्यस्त है. हम ४-५०० रुपये का मल्टीप्लेक्स टिकट कारिड सकते हैं पर ४-५०० रुपिया किसी देश भक्त को नहीं दे सकते ...

bhartiya naagrik said...

please get his account no and display on your blog....

nitin tyagi said...

Kya kahen ab ye isi desh main hota hai

यदि आप बटुकेश्वर दत्त(batukeshvar datt) हैं तो प्रमाण लाइए?
http://satyarthved.blogspot.com/2011/07/batukeshvar-datt.html#comments

Ratan Singh Shekhawat said...

लानत है इस सरकार पर| वैसे भी इस छद्म सेकुलर सरकार से कोई क्या उम्मीद कर सकता है?

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

सुरेश भाई, यदि कोई जांबाज़ अपनी ड्यूटी गन के साथ दिल्ली के सत्ता केन्द्र नॉर्थ-साउथ ब्लॉक पहुँच जाए तो यह देश के लिए तो अच्छा ही होगा...जिस दिन सेना विद्रोह कर देगी, उस दिन पूरा भारत विद्रोह के लिए खड़ा हो जाएगा...
सही कहा आपने इं सेक्युलरों को हज़ार लानतें भी कम हैं...इस देश के वीरों के साथ दुर्व्यवहार व आतंकियों को घर जमाई बनाकर रखना सच में निंदनीय है...
वीर पी वी मनेश के जज्बे को नमन:...

Anonymous said...

Hum sub Hindustanis ko bahut garab he i hamare javano per. jo apni jaan ki baji laga ker bum sub ki hifajat karte hei. satta me i koi bhi party ho un subko milkar kuch karna chayiye nahi to bo din door nahi jub koi bhi aadmi jisko jara bhi apni matrabhoomi ke prati lagab hei bo in sattadhaiyo ka kam tamam ker dega.

Rajesh said...

Bahut Sahi Kaha Apne Suresh Ji. Aap bahut badiya lekh likte hai. Mun mo bahut thesh pahuchti hai ese lekho se. Jee chahta hai ki kaas koi esi super power mere paas hoti to mein sab dusto ko khtam kar deta. Lekin akela kya kar shakta hoo. Main to chahta hoo koi ek jawan nahi balki Poora sena bal ka dimag khatak jay aur wo apne duty gun lekar delhi pahuch jay. Aur khanjresiyo ko khatam kar de. Dhanywad.

blogtaknik said...

में और मेरे मित्र उनकी मदत करना चाहते है क्या आप उनका बेंक खाता न. बता सकते है. अथवा उनके घर का पता बताने की कृपा करें

aativas said...

Whenever I read such information, my heart sinks! Where are we leading to? If the bureaucratic system does not value such brave person, we citizens can help. Is there any way that we can help the person? Of course the government system should change so that every such person does not have to fight!

हरीश सिंह said...

जब तक लोग उदारता का ढोंग करके कायर बने रहेंगे तब तक यही हालात होंगे. देशभक्तों को अपनी आंखे खोलनी होगी.

ePandit said...

कॉंग्रेसी सरकार को आतंकवादियों के तलुवे चाटने से फुर्सत हो तब जवानों की सुध ले। आतंकवादियों, घोटालेबाजों को वीआइपी ट्रीटमेंट और देशभक्त जवानों की अनदेखी।

भविष्य पुराण में कलियुग का वर्णन आता है। सुरेश जी कभी वह पढ़ें, आप देखेंगे कि आज देश, समाज का जो हाल है वह उसमें लाखों वर्षों पूर्व बताया जा चुका है। ईमानदार धक्के खायेंगे, बेईमान मौज करेंगे।

सुलभ said...

लानत है इस सरकार पर !

Anonymous said...

Dada, har bar ki tarah karara joota maru lekh...dhany hai ve veer aur unaki veerata...sadar naman...aur haramkhor netao aur officers ko sharm aani chahiye...jai hind...(anurag, toronto)

Shastri JC Philip said...

जब तक भारत के नागरिक क्रिकेट खिलाडियों एवं फिल्म स्टारों के पीछे दीवानों के समान भागता रहेगा तब तक देश के असली हीरो इस तरह तिल तिल मरने पर मबूर रहेंगे. इसे मरना नहीं तो और क्या कहेंगे.

सस्नेह -- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है.
हर महीने कम से कम एक हिन्दी पुस्तक खरीदें !
मैं और आप नहीं तो क्या विदेशी लोग हिन्दी
लेखकों को प्रोत्साहन देंगे ??

http://www.Sarathi.info