विकीलीक्स संबंधी पोस्ट का खण्डन एवं स्पष्टीकरण…
मित्रों…
विकीलीक्स द्वारा आधिकारिक ट्वीट में यह कहा गया है कि इस प्रकार की कोई सूची उसके द्वारा जारी नहीं की गई है (जैसा कि भाई नीरज ने अपनी टिप्पणी में बताया)। अतः इस पोस्ट को हटाने की बजाय मैं सबसे ऊपर स्पष्टीकरण देना अपना फ़र्ज समझता हूँ… चूंकि यह पोस्ट अपुष्ट सूचनाओं पर आधारित थी (पोस्ट करते समय), एवं रात होते-होते विकीलीक्स का खण्डन भी आ गया अतः इस पोस्ट को Null & Void समझा जाए…
मैं न तो इस पोस्ट को, न ही सभी टिप्पणियों को हटा रहा हूँ, क्योंकि अब इसकी कोई जरुरत नहीं रह गई है…। पाठकों एवं टिप्पणीकर्ताओं को हुई असुविधा के लिए मैं खेद व्यक्त करता हूँ… अपुष्ट और गलत सूचना के आधार पर हुई यह मेरी पहली गलती है, आशा है कि मित्रगण इसे समझने का प्रयास करेंगे (कई बार मुखबिर की गलत सूचना के आधार पर पुलिस एनकाउण्टर कर डालती है, वैसा ही कुछ हुआ)। चूंकि उल्लिखित सर्वर एवं आईपी पर विकीलीक्स का वह पेज खुल नहीं रहा है अतः जब तक विकीलीक्स स्वयं नहीं कहता, तब तक हमें मानना ही होगा कि यह लिस्ट कभी जारी नहीं की गई…
चूंकि मैं बड़े मीडिया हाउसों की तरह "अड़ियल", "जिद्दी" और "वकीलों की फ़ौज से सक्षम" नहीं हूं जो कि गुजरात दंगों में गर्भवती मुस्लिम युवती का पेट फ़ाड़ने जैसी झूठी व ऊलजलूल खबरों को भी जबरन दिखाता रहे या तीस्ता जावेद के झूठे हलफ़नामों को भी सुर्खियाँ बनाता रहे और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बावजूद न अपनी गलती माने और खेद भी व्यक्त न करे…। फ़िलहाल मैं खेद व्यक्त करता हूं। नीरज भाई की टिप्पणी रात्रि 9.19 पर की गई जिसे मैंने रात्रि 9.50 पर देखा, परन्तु बाद में लाइट जाने तथा घर पर इंटरनेट की सुविधा न होने की वजह से इस पोस्ट का खण्डन मैं तत्काल प्रकाशित न कर सका…
फ़िर भी मूल सवाल अपनी जगह पर कायम है कि सुप्रीम कोर्ट की लताड़ के बावजूद केन्द्र सरकार उन नामों का खु्लासा क्यों नहीं कर रही है जो उसे जर्मनी सरकार काफ़ी पहले बता चुकी है… अब हमें विकीलीक्स के "आधिकारिक" खुलासे का इंतज़ार करना होगा…
(बहरहाल, फ़िर भी आप चाहें तो मूल पोस्ट यहाँ क्लिक करके पढ़िए… जिसमें मैंने पहले मिनट से ही इसकी विश्वसनीयता को संदिग्ध माना है)
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