Monday, July 18, 2011

Dayanidhi Maran, 2G Scam, Manmohan Singh, Personal Telephone Exchange

दयानिधि मारन का “निजी टेलीफ़ोन एक्सचेंज” और मनमोहन का धृत “राष्ट्रवाद…” 

भारत में मंत्रियों, अफ़सरों एवं उनके रिश्तेदारों द्वारा सरकारी संसाधनों का स्वयं के लिये उपयोग एवं दुरुपयोग एक आम बीमारी बन चुकी है। सरकारी दफ़्तर में काम करने वाले बाबू द्वारा बच्चों के लिए कागज घर ले जाना हो या नागर-विमानन मंत्री द्वारा इंडियन एयरलाइंस के विमानों को अपने बाप की जागीर समझना हो, यह बीमारी नीचे से ऊपर तक फ़ैली हुई है। मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल के पहले पाँच साल “ईमानदार बाबू” की अपनी छवि गढ़ी, जिसके अनुसार चाहे जितने मंत्री भ्रष्ट हो जाएं, लेकिन मनमोहन सिंह (http://en.wikipedia.org/wiki/Manmohan_Singh) तो “ईमानदार” हैं… लेकिन यूपीए-2 के दूसरे कार्यकाल के दो साल के भीतर ही अब मनमोहन सिंह कभी बेहद मजबूर, तो कभी बेहद शातिर, तो कभी बेहद बहरे, कभी जानबूझकर अनजान बनने वाले, तो कभी परले दर्जे के भोले नज़र आये हैं। कलमाडी (http://en.wikipedia.org/wiki/Suresh_Kalmadi) से लेकर कनिमोझी (http://en.wikipedia.org/wiki/M._K._Kanimozhi) तक जैसे-जैसे UPA की सड़ांध बाहर आती जा रही है, मनमोहन सिंह की “तथाकथित ईमानदारी” अब अविश्वसनीय और असहनीय होती जा रही है…

ताजा मामला सामने आया है हाल ही में केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से बिदा किए गये दयानिधि मारन (http://en.wikipedia.org/wiki/Dayanidhi_Maran) का। द्रविड मुनेत्र कषघम (DMK) के “पिण्डारी दल” के एक सदस्य दयानिधि मारन ने अपने घर और कम्पनी के दफ़्तर के बीच 323 लाइनों का एक निजी एक्सचेंज ही खोल रखा था। खा गये न झटका??? जी हाँ, ए. राजा से पहले दयानिधि मारन ही “दूध देने वाली गाय समान” टेलीकॉम मंत्रालय में मंत्री थे। यह सभी लाइनें उन्होंने (http://www.bsnl.co.in/) के अधिकारियों को डपटकर और BSNL के महाप्रबन्धक के नाम से उनकी बाँह मरोड़कर अपने घर और सन टीवी के दफ़्तर में लगवाईं। टेलीकॉम मंत्रालय के मंत्री होने के नाते उन्होंने अपने “अधिकारों”(?) का जमकर दुरुपयोग किया, और मेरा भारत इतना महान है कि चेन्नै में मारन के घर से साढ़े तीन किलोमीटर दूर स्थित सन टीवी के मुख्यालय तक ऑप्टिकल फ़ाइबर के उच्च क्षमता वाली अण्डरग्राउण्ड लाइनें बिछाई गईं, सभी 323 टेलीफ़ोन नम्बर चीफ़ जनरल मैनेजर BSNL के नाम से लिए गये। हैरान हो गए ना??? लेकिन इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है, भारत में जो मंत्री और जो अफ़सर जिस मंत्रालय या विभाग में जाता है वहाँ वह “जोंक” की तरह उस विभाग और आम जनता का खून चूसने के “पावन कार्य” मे तत्काल लग जाता है।



अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर 323 टेलीफ़ोन लाइनों का मारन ने क्या किया? मारन के चेन्नई स्थित बोट क्लब वाले मकान से जो लाइनें बिछाई गईं, वे सभी ISDN लाइनें थीं। जैसा कि सभी जानते हैं ISDN लाइनें भारी-भरकम डाटा ट्रांसफ़र एवं तीव्रगति के इंटरनेट एवं टीवी सिग्नलों के संचालन में महत्वपूर्ण होती हैं। मारन ने शातिराना अन्दाज़ में शुरु के 23 टेलीफ़ोन नम्बर 24372211 और 24372301 के बीच में से लगवाए, परन्तु शायद बाद में यह सोचकर, कि “मेरा कोई क्या उखाड़ लेगा?” मारन ने अगले 300 टेलीफ़ोन नम्बर 24371500 से 24371799 तक एक ही नाम अर्थात चीफ़ जनरल मैनेजर BSNL के नाम से लगवा डाले, चूंकि सभी नम्बरों के शुरुआती चार अंक समान ही थे, तो मारन के घर और सन टीवी के दफ़्तर के बीच एक निजी टेलीफ़ोन एक्सचेंज आरम्भ हो गया। इसमें फ़ायदा यह था कि BSNL को चूना लगाकर मनचाहा और असीमित डाटा डाउनलोड-अपलोड किया गया एवं सन टीवी के सभी व्यावसायिक एवं आर्थिक कारोबार की सभी संचार व्यवस्था मुफ़्त हासिल की गई। दूसरा फ़ायदा यह था, कि इस निजी एक्सचेंज के कारण टेलीफ़ोन टैपिंग होने का भी कोई खतरा दयानिधि मारन को नहीं रह गया था।

जनवरी 2007 से दयानिधि मारन ने BSNL को “दुहना” शुरु किया और सन टीवी के कई कार्यक्रम विदेशों में ISDN लाइन के जरिये मुफ़्त में पहुँचाए। सीबीआई की जाँच में यह बात सामने आई है कि मारन ने अपना यह निजी टेलीफ़ोन एक्सचेंज कुछ इस तरह से डिजाइन और प्रोग्राम किया था कि BSNL महाप्रबन्धक और उच्च स्तरीय इंजीनियरों के अलावा किसी को भी इस बारे में भनक तक नहीं थी, क्योंकि इस एक्सचेंज के निर्माण, टेलीफ़ोन लाइनों को बिछाने, इनका कनेक्शन मुख्य एक्सचेंज में “विशेष राउटरों” के जरिये जोड़ने सम्बन्धी जो भी काम किए गये, इसमें “काम खत्म होते ही” उस कर्मचारी का तबादला चेन्नई से बहुत दूर अलग-अलग जगहों पर कर दिया जाता था। यदि कलानिधि मारन का सन टीवी यही सारी “सेवाएं” BSNL या एयरटेल से पैसा देकर लेता तो उसे करोड़ों रुपए का शुल्क चुकाना पड़ता और हर महीने का तगड़ा बिल आता, सो अलग…। लेकिन “ईमानदार बाबू” के धृतराष्ट्रवादी शासन में हर मंत्री सिर्फ़ चूसने-लूटने-खाने में ही लगा हुआ है तो दयानिधि मारन कैसे पीछे रहते?

(सभी स्नैप शॉट PMO को पेश की गई सीबीआई रिपोर्ट के अंश हैं - साभार श्री एस गुरुमूर्ति) 

सीबीआई की प्राथमिक जाँच में एक मोटे अनुमान के अनुसार सिर्फ़ एक टेलीफ़ोन क्रमांक 24371515 से मार्च 2007 (एक महीने में) 48,72,027 कॉल्स (सभी प्रकार का डाटा जोड़ने पर) किए गये। अब आप अनुमान लगाईये कि जब एक टेलीफ़ोन नम्बर से एक महीने में 49 लाख कॉल्स किए गए तो 323 लाइनों से कितने कॉल्स किये गये होंगे? यह सिलसिला जनवरी 2007 से अप्रैल 2007 तक ही चला (क्योंकि 13 मई को मारन ने दूरसंचार मंत्रालय से इस्तीफ़ा दिया)। परन्तु सीबीआई ने जो हिसाब लगाया है उसके अनुसार इस दौरान BSNL को लगभग 630 करोड़ टेलीफ़ोन कॉल्स का चूना लग चुका था, यदि 70 पैसे प्रति कॉल यूनिट भी मानें तो सन टीवी को 440 करोड़ रुपए का टेलीफ़ोन बिल नहीं चुकाना पड़ा, क्योंकि दयानिधि मारन की “दया” दिल्ली से चेन्नै की तरफ़ उमड़-उमड़कर बह रही थी। सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा है कि इस “निजी एक्सचेंज” की कुछ लाइनें मारन के अखबार “दिनाकरण” को भी दी गईं, जिसके द्वारा अखबार की रिपोर्टें लाने-भेजने का काम किया जाता था। (दयानिधि मारन जून 2004 से मई 2007 तक दूरसंचार मंत्री रहा, हालांकि जब उसे केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से धक्का देकर निकाला गया तब वह कपड़ा मंत्री था, जहाँ पता नहीं उसने देश के कितने कपड़े उतारे होंगे…)

आप सोच रहे होंगे कि आखिर सीबीआई ने यह मामला अपने हाथ में लिया कैसे? असल में दयानिधि मारन से एक गलती हो गई कि उसने अपने ही “अन्नदाता” के परिवार में फ़ूट डालने की हिमाकत कर डाली, हुआ यूँ कि अपने अखबार “दिनाकरण” (http://www.dinakaran.com/) में दयानिधि मारन ने एक सर्वे आयोजित किया कि करुणानिधि के दो बेटों अझागिरि और स्टालिन में कौन अधिक लोकप्रिय है?… बस इसी से नाराज होकर दयानिधि के बाप के मामू यानी करुणानिधि नाराज हो गये और अगले ही दिन उन्हें मंत्रिमण्डल से बाहर का रास्ता दिखाया गया, मारन की जगह ली ए. राजा ने, जो पहले से ही दयानिधि मारन से खार खाए बैठा था… सो उसने “मामू” की आज्ञा से “नीली पगड़ी वाले” से कहकर मारन के खिलाफ़ सीबीआई की जाँच तत्काल शुरु करवा दी…। इस तरह दयानिधि मारन नाम का “ऊँट”, अचानक करुणानिधि नामक पहाड़ के नीचे आ गया…।

अब हम आते हैं अपने “ईमानदार”, “सक्रिय और कार्यशील” इत्यादि सम्बोधनों से नवाज़े गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के “धृतराष्ट्रवाद” पर…। हाल ही में मुम्बई बम विस्फ़ोटों के बाद सोनिया गाँधी के साथ वहाँ दौरे पर गए इन महाशय ने “आतंकवादियों के खिलाफ़ त्वरित कार्रवाई” करने का बयान दिया… (ये और बात है कि इनकी त्वरित कार्रवाई, इतनी त्वरित है कि अभी तक अफ़ज़ल गुरू की मृत्युदण्ड की फ़ाइल गृह मंत्रालय से होकर सिर्फ़ 2 किमी दूर, राष्ट्रपति भवन तक ही नहीं पहुँची है)। यह तो आतंकवाद और अण्डरवर्ल्ड से सम्बन्धित अफ़ज़ल गुरु या दाऊद इब्राहीम से लेकर अबू सलेम या क्वात्रोची और एण्डरसन की सदाबहार कांग्रेसी कहानी है… लेकिन मनमोहन सिंह की यह खूबी है कि वे “आर्थिक आतंकवादियों” को भी भागने, सबूत मिटाने इत्यादि का पूरा मौका देते हैं, जैसे कि कलमाडी और राजा के मामले में हुआ। (ये और बात है कि डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी याचिकाएं लगाकर और सुप्रीम कोर्ट लताड़कर, इनकी बाँह मरोड़कर इनसे काम करवा लेते हैं)।

दयानिधि मारन के खिलाफ़ कार्रवाई की माँग करते हुए सीबीआई ने जाँच की अपनी पूरी रिपोर्ट मनमोहन सिंह को सितम्बर 2007 में सौंप दी थी। लेकिन पिछले 44 महीने से हमारे “ईमानदार बाबू” उस फ़ाइल पर कुण्डली मारे बैठे रहे। इस बीच 2009 के चुनाव में “मामू” करुणानिधि ने अपने बेटों और मारन बन्धुओं के बीच सुलह करवा दी, दयानिधि-कलानिधि ने नानाजी से माफ़ी माँग ली और 2009 के चुनाव में इन्होंने जयललिता को पछाड़कर लोकसभा की 18 सीटों पर कब्जा किया। दयानिधि मारन ने फ़िर से टेलीकॉम मंत्रालय पाने की जुगाड़ लगाई, लेकिन इस बार रतन टाटा ने “व्यक्तिगत” रुचि लेकर मारन की जगह राजा को टेलीकॉम मंत्री बनवाया, सो मजबूरन दयानिधि को कपड़ा मंत्रालय पर संतोष करना पड़ा (यह तथ्य नीरा राडिया और बुरका हसीब दत्त की फ़ोन टैपिंग में उजागर हो चुका है)। जब “परिवार” में ही आपस में सुलह हो गई और DMK के सांसदों की “ईमानदार बाबू” को सख्त आवश्यकता थी, इसलिए CBI की रिपोर्ट और दयानिधि के खिलाफ़ एक्शन लेने की माँग ठण्डे बस्ते में चली गई। नवम्बर 2010 में कपिल सिब्बल के टेलीकॉम मंत्रालय संभालने के बाद भी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया।

“ईमानदार बाबू” ने बाबा रामदेव के आंदोलन को कुचलने के बाद कहा था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ़ “गम्भीरता” से और “त्वरित कार्रवाई” करेंगे… सो इनकी “त्वरित कार्रवाई” का आलम यह है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लिया तब कहीं जाकर 44 माह बाद, सत्ता की मलाई और मंत्रालय को पूरी तरह निचोड़ने के बाद दयानिधि मारन की विदाई की गई। इसमें एक आश्चर्यजनक पहलू यह है कि अपनी “ईमानदार बाबू” वाली छवि बनाए रखने को चिन्तित एवं “भ्रष्टाचार के खिलाफ़ कड़े कदम उठाने” जैसी खोखली घोषणाएं करने वाले मनमोहन सिंह सितम्बर 2007 से अब तक न जाने कितनी बार “केन्द्रीय कैबिनेट” की बैठक में दयानिधि मारन के पड़ोस में बैठे होंगे… क्या उस समय नीली पगड़ी वाले साहब को जरा भी ग्लानि, संकोच या शर्म नहीं आई होगी? आएगी भी कैसे… क्योंकि असल में तो देश का सुप्रीम कोर्ट ही सारे प्रमुख फ़ैसले कर रहा है, माननीय न्यायाधीशों को ही बताना पड़ रहा है कि किसके खिलाफ़ केस शुरु करो, किसे जेल भेजो, किसे पकड़ो, क्या करो, क्या ना करो…। मनमोहन सिंह को तो सिर्फ़ आज्ञा का पालन करना है… सुप्रीम कोर्ट न होता तो राजा-कलमाडी-नीरा राडिया-मारन-कनिमोझि आदि सभी अब तक हमारी छाती पर मूंग दल रहे होते…

29 comments:

AMIT MISHRA said...

चिपलूनकर साहब यह हमारा दुर्भाग्य की हम कांग्रेस जैसी घिनौनी पार्टी से पीछा नहीं छुड़ा पा रहे हैं। कारण सिर्फ एक कि हमारे पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है जो है उसकी हालात और भी दयनीय है उन्हे आपस में लड़ने से ही फुर्सत नहीं है। और ये सियासी सियार देश को यूं ही बेंच खाते रहेंगे। आपका लेख बहुत ही अच्छा है जैसा कि आपसे हमेशा अपेक्षा रहती है।

टी.सी. चन्दर T.C. Chander said...

बेहद शर्मनाक स्थिति है, पर शर्म आती किसे है!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

कमाल है, हमारे मेहनत के पैसों पर इनकी ऐयाशी. और ऊपर से ईमानदारी का चोला ओढ़ रखा है इन मन्त्रियों ने. जय हो प्रधानमन्त्री जी, क्या खूब सहयोगी हैं आपके..

Jeet Bhargava said...

Manmohan & Sonia is equally culprit as Maran, Raja, Kalmadi, Kanimojhi. He is not a 'Imaandaar' PM.

Rajendra Kumar Singh said...

आपका यह लेख वाकई आँख खोल देने वाला है| लेकिन एक बात मैं यहाँ अवश्य कहना चाहूँगा कि इन सब घोटालों को देख कर हमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि चाहे कोई भी पार्टी हो या उसके नेता वो चुनाव क्यों लडते हैं? क्या समाजसेवा ये देशसेवा के लिए? कत्तई नहीं, उसे सिर्फ और सिर्फ पैसा और सत्ता चाहिए| करोंडो अरबों रुपये खर्च कर सालों साल हारने के बाद जब भी ये कभी गलती से जीत जाते हैं तो सबसे पहला उनका काम ये होता है कि जितना पैसा इतने वर्षों में खर्च हुआ है पहले उसे ब्याज सहित वसूल करो और फिर इन पांच सालों में इनता कम लो कि पूरी जिंदगी या कई पुस्तें आराम से खा सकें| तभी तो दो चार सीट जितने वाली पार्टी आपनी औकात दिखने लगती है कि मुझे फलां मंत्रालय चाहिए| क्यों वे अपने मन माफिक मंत्रालय में ही जाना चाहते हैं? कारण साफ है, उन्हें उसे मंत्रालय में अच्छी कमी करनी है, उसे लूटना है और देश को बर्बाद करना है|

Desh Bhakt said...

Mera to yahi manna hai ki ab is sarkar ko ukhad fekna chaiye. Sabse pehle digvijay singh ke muh par to kalikh potni chaiye, jo hindu hokar hinduo ko badnam karta hai. Jab bhi koi atankvadi hamla hota hai to yahi kaha jata hai ki atankvad ka koi dharam nahi hota. or yu kahe ki use muslim atankvad ka nam nahi diya ja sakta kyunki yeah ek secular desh hai lekin yaha yeah digvijay singh bhagwa atankwad bolta hai to khon kholta hai. aakhir dhamako mai muslim ka hath ho to bhi muslim atankvad ya jihad nahi. yeah kaisi dohri neeti hai. aaj sari duniya muslim atankvad se peedit hai or sare attank vadiyo ka prena bhi inhi atankvadiyo se milti hai. aakhir yeah sarkar is desh ke hindu ko atankvadi manti hai lekin hajar dhamake karne wale muslaman aatankvadi nahi ho sakte . Aakhir vote bank ki neeti hai.

Kuldeep Tyagi said...

क्या उस समय नीली पगड़ी वाले साहब को जरा भी ग्लानि, संकोच या शर्म नहीं आई होगी? आएगी भी कैसे… क्योंकि असल में तो देश का सुप्रीम कोर्ट ही सारे प्रमुख फ़ैसले कर रहा है, माननीय न्यायाधीशों को ही बताना पड़ रहा है कि किसके खिलाफ़ केस शुरु करो, किसे जेल भेजो, किसे पकड़ो, क्या करो, क्या ना करो…। मनमोहन सिंह को तो सिर्फ़ आज्ञा का पालन करना है… सुप्रीम कोर्ट न होता तो राजा-कलमाडी-नीरा राडिया-मारन-कनिमोझि आदि सभी अब तक हमारी छाती पर मूंग दल रहे होते…

Kuldeep Tyagi said...

मेरा भारत इतना महान है कि चेन्नै में मारन के घर से साढ़े तीन किलोमीटर दूर स्थित सन टीवी के मुख्यालय तक ऑप्टिकल फ़ाइबर के उच्च क्षमता वाली अण्डरग्राउण्ड लाइनें बिछाई गईं, सभी 323 टेलीफ़ोन नम्बर चीफ़ जनरल मैनेजर BSNL के नाम से लिए गये।

Kuldeep Tyagi said...

हाल ही में मुम्बई बम विस्फ़ोटों के बाद सोनिया गाँधी के साथ वहाँ दौरे पर गए इन महाशय ने “आतंकवादियों के खिलाफ़ त्वरित कार्रवाई” करने का बयान दिया… (ये और बात है कि इनकी त्वरित कार्रवाई, इतनी त्वरित है कि अभी तक अफ़ज़ल गुरू की मृत्युदण्ड की फ़ाइल गृह मंत्रालय से होकर सिर्फ़ 2 किमी दूर, राष्ट्रपति भवन तक ही नहीं पहुँची है)।

संजय बेंगाणी said...

कितनी अजीब बात है, हम सबसे बड़े लोकतंत्र होने का ढ़ोंग करते है और चुने हुए प्रतिनिधियों से ज्यादा सर्वोच्च अदालत के निर्णयों पर आशाएं लगाए रहते हैं. क्या अंतर है हम में और निष्फल राष्ट्र पाकिस्तान में जो सेना से आशाएं रखता है?

Deepesh said...

सुरेश जी बहुत ही खोज पूर्ण लेख लिखा है आपने । मीड़िया में इस तरह के लेख / संपादकीय कम ही पढने को मिलते है जिनमें तथ्यो के साँथ सीधे-सीधे जिम्मेदार लोगो के नाम लिए जाते है । इस लेख को पढने के बाद पहली बार "बुरका हसीब दत्त" का असली नाम पता चला । एक बात और, दयानिधि मारन ने BSNL को तो करोड़ो का चूना लगाया ही पर इसके अलावा विदेशो में सन टीवी की अप लिंक BSNL की लाईनो से कर करोड़ो बचाए भी ।

दिवाकर मणि said...

अपने इस शोधपरक-तथ्यपरक आलेख की अंतिम पंक्तियों में आपने शत-प्रतिशत सही लिखा है कि यदि सुप्रीम कोर्ट न होता तो राजा-कलमाडी-नीरा राडिया-मारन-कनिमोझि आदि सभी अब तक हमारी छाती पर मूंग दल रहे होते…
और आगे अभी ऐसे कितने लाइन में हैं, जो अभी भी हमारी छाती पर मूंग दल रहे हैं, और न जाने कब तक दलते रहेंगे, उसमें सिब्बल मियां भी एक हैं.

P K SURYA said...

JANTA BAIKUF HAI JO EN GADHI NEHRU PARI-WAR OR UNKE CHAMCHE KO VOTE DETI HAI, EN SALO KAMINO 420000 NETAWON KO EK LINE SE KHADA KAR GOLI MARNI CHAHIYE YE MARENGE TABHI KUCHH HOGA, PHIR SE HAR HAR MAHADEV KAH K ENKE UPR TOP CHALANE KA WAQT AA GAYA HAI, JAY BHARAT

Om said...

Dear Suresh Ji,

Aap BJP walo ki etni chinta kar rahe hai legin kya apne kabhi socha hai BJP walo ko aapki or Apke jaise unke chahne walo ki kitni fiqr hai.

sadhvi pragya or kai sadhu sant aaj bharat ki jailon me sad rahe hai or unko jhute case me fasaya gaya hai ye sab log jante huwe bhi kuchh nahi kar rahe, unko fasane walon me pahla admi digvijay hai. kyon BJP wale Isko nahi fasha sakte or esh admi ko fasane ke liye to jhute case ki jarurat hi nahi padegi, kaphi kuchh masala to ye admi roj ugalata rahata hai case banane ke liye. aaj BJP ki govt MP me rahte huye ye admi kai BJP workers ko thapad mar ker safe nikala gaya or ulta police ne pita BJP workers ko case banaya unke khilap so alag.

akpo yadi yad nahi hai to main aapko yad dila du jab pravin togdia rajasthan mein trisul bant raha tha, congress ki govt thi rajasthan me, Ashok gehlot CM tha, ushne togadia ko panch din tak under kiya or achhi tarah dhulai karwayi, aaj togadia ko bolte huye kabhi kabhar hi suntan huin.

Kya esh tarah ka koi jalwa Digvijay ke sath ye BJP wale kar sakte hai. Maje dekho Digi MP me jakar unke kan ke niche baja kar aaya or awaz Delhi me sunayi di, upper se dahar mar raha hai ki agli bar bhi aise hi dhounga, mera khuchh ukhad sakte ho to ukhad lo.

Sale BJP walo ko den eke liye mere pass koi gali bhi nahi hai. Mujhe BJP ko support karne me behad sarm aa rahi hai.

Om said...

Aap sab ko aaj main ek bat bata du. Mumbai blast me bhi koi na koi hindu hi fashaya jayega.i am sure about it.

दीपक बाबा said...

शर्म शर्म शर्म

शर्म शर्म शर्म


शर्म शर्म शर्म

शर्म शर्म शर्म

Rajesh said...

Kya kare Suresh Ji. Yahi Hamare desh ki Vidambana hai. Rastriya bhawna pata nahi kab jagrat hogi ish desh ke nagriko mein.

सागर नाहर said...

आर्थिक आतंकवादी
नया और बड़ा मजेदार शब्द पढ़ा आज।

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद said...

@ सुरेशजी,
आप से एक विनती है.. इन "हरामियों" को "पिंडारी" की संज्ञा देकर "पिंडारियों" को बदनाम मत कीजिये...
"पिंडारी" तो वो थे जो "अंग्रेजों" के मुह से देश को निकाल कर बचाने का माद्दा रखते थे... ये सब के सब " बाबर की मानस संताने" है.. जिसका नेतृत्व "उतेजक दवाओं के सेवन करने वाले" रंगे-सियार कर रहे है..

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मनमोहन को तो टीवी पर देखकर ही दया, शर्म का भाव उत्पन होता है... लेकिन समझ में ये नहीं आता की देश की जनता सब कुछ जानकर भी "अपनी इज्जत" इस कांग्रेस के हाथों बार बार क्यूँ लुटवाती रहती है...????????????????????

Ganesh Prasad said...

इतनी खोज खबर और पड़ताल के लिए बधाई

एक सलाह : क्यों नही आप कोई पत्रिका के ज़रिए लखो करोड़ो लोगो तक पहुचते है !

देश हित के लिए अच्छी बात होगी

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

ओम साहब की बात गौर-तलब है. कहीं भी बीजेपी की सरकार हो, तब भी पुलिस उन्हीं की पिटाई करती है. एक एक बात सही लिखी है ओम जी ने. इससे सबक लेने की जरूरत है..

सुलभ said...

KYA AISE HOTE HAIN DESK KE P.M.

:(
:(
:(

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

आदरणीय सुरेश भाईसाहब, हमेशा की तरह आज फिर आपके द्वारा एक और सनसनीखेज़ खुलासा आपके द्वारा ही हम तक पहुंचा|
एक एक बिंदु पर आपके द्वारा किया गया बारीकी अध्ययन व उसका निष्कर्ष काफी लाभप्रद रहा|
मनमोहन के लिए धृत राष्ट्रवाद का संबोधन बेहद सटीक लगा| खैर सरकार से इस विषय में किसी भी प्रकार की पारदर्शिता की अपेक्षा रखना व्यर्थ है| मीडिया भी अपने उत्तरदायित्वों का निर्वाह करने में चोर ही सिद्ध हुई|
अब तो हमारे लिए आप ही मीडिया बन गए हैं| इस प्रकार की ख़बरें जो किसी अखबार व चैनल पर नहीं आतीं, वे आपके द्वारा हम तक पहुँच रही हैं| और हम इसे और लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं|
इन सब के लिए आपका ह्रदय से आभार...

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

@हिंदुत्व और राष्ट्रवाद....मुझे तो ऐसा लगता है की मनमोहन सिंह का कोई MMS सोनिया गांधी ने बना रखा है और कहती होगी की यदि कुछ बोला तो सबको दिखा दूँगी...
सारा मर जाएगा लेकिन मरते मरते देश को डूबा जाएगा, जैसे भैरो सिंह शेखावत मरते मरते राजस्थान में भाजपा को डूबा गया...

shilpa mehta said...

खीज आती है पढ़ कर - पर होगा कब कुछ बदलाव - पता नहीं ...

Deora Chen Singh said...

good asha kaya aap na jo inka laka jhoka kol diya. baki UPA govt puri bath kabi bhi bhre nahi aana dathi.
aap ager P. N.Oak ki tajo mahalaya(taj mahal) ka bhi hindi anuvad kar datha tho asha rahta. mane ush padh hai, aur ya bath oura dahe ka budhi jevi logo ko batha chal tho asha hoga.
jai hind.

रंजना said...

सच है....

अब तो निष्पक्ष समाचार के लिए आपकी ही प्रतीक्षा रहती है...

धन्यवाद कह आपका कर्ज नहीं उतारा जा सकता...

विजय गुप्ता said...

अतीत बड़ा निर्लज्ज होता है पीएम साहब।उसके आइने में "नायक" और "खलनायक" का फर्क साफ झलकता है।आपकी "कृत्रिम ईनामदारी" ने देश को शर्मिंदगी के दलदल में धकेल दिया है।ईमानदारी का ताजमहल खड़ा करने के बजाय झूठ का पिरामिड खड़ा करने में मनमोहन सिंह जितनी दिलचस्पी ले रहे हैं।उतनी ही दिलचस्पी कालेधन के पहाड़ पर बैठे "भ्रष्टाचार के अंतर्यामी शुक्राचार्यों "के नाम बताने में करते तो उनकी "अविश्वसनीय छवि" पर कम से कम हम तो अफसोस नहीं करते।सत्ता के शिखरपुरूषों के आचरण पर मनमोहन सिंह शर्मिंदा हो या ना हो...देश को बहुत बड़ा आघात लगा है। पीएम के इस शर्मनाक ईमानदारी पर सिर्फ थू-थू कर सकते हैं।वरना कांग्रेस तो भ्रष्टाचारियों के पैर धोकर पीने का संकोच कबका छोड़ चुकी है।

Mrs. Asha Joglekar said...

मनमोहन सिंह को तो सिर्फ़ आज्ञा का पालन करना है… सुप्रीम कोर्ट न होता तो राजा-कलमाडी-नीरा राडिया-मारन-कनिमोझि आदि सभी अब तक हमारी छाती पर मूंग दल रहे होते…

सत्य वचन ।
पढे लिखे लोग वोट देने तो जाते नही अनपढों को कॉग्रेस खरीद लेती है और एम वाले तो ुन्हे ही वोट देगे जो उनके और सिर्फ उनके हित में काम करे । क्या कोई विकल्प है ?