Monday, July 4, 2011

Padmanabha Swami Temple Kerala Wealth

पद्मनाभ स्वामी मन्दिर के खजाने पर वामपंथी-सेकुलर गठजोड़ की काली नीयत का साया…   

केरल के विश्वप्रसिद्ध स्वामी पद्मनाभ मन्दिर के तहखानों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत खोला गया, और जैसी कि खबरें छन-छनकर आ रही हैं (या जानबूझकर लीक करवाई जा रही हैं) उनके अनुसार यह खजाना लगभग 60 से 70 हजार करोड़ तक भी हो सकता है (हालांकि यह आँकड़ा अविश्वसनीय और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया प्रतीत होता है), परन्तु मन्दिर (http://en.wikipedia.org/wiki/Padmanabhaswamy_Temple)(Padmanabha Swamy Temple) के तहखानों से मिली वस्तुओं की लिस्ट में भगवान विष्णु की एक भारी-भरकम सोने की मूर्ति, ठोस सोने के जवाहरात मढ़े हुए नारियल, कई फ़ुट लम्बी सोने की मोटी रस्सियाँ, कई किलो सोने के बने हुए चावल के दाने, सिक्के, गिन्नियाँ, मुकुट एवं हीरे मिलने का सिलसिला जारी है (http://www.daijiworld.com/news/news_disp.asp?n_id=106959&n_tit=Kerala+Temple+Treasure%3A+Value+of+Wealth+Rises+to+1%2C00%2C000+Crore)(Wealth of Padmanabh Temple)
उल्लेखनीय है कि भगवान पद्मनाभ का यह मन्दिर बहुत प्राचीन काल से करोड़ों विष्णु भक्तों की आस्था का केन्द्र रहा है। त्रावणकोर के महाराजा मार्तण्ड वर्मन का राजवंश भगवान पद्मनाभ स्वामी का बहुत बड़ा भक्त रहा है, इस राजवंश ने अपनी सारी सम्पत्ति तथा भक्तों द्वारा भेंट की गई बहुमूल्य सामग्रियों को मन्दिर के नीचे 6 तहखानों में छिपा रखा था। इस मन्दिर का सारा प्रबन्धन एवं खर्च एक ट्रस्ट करता है, जिसका गठन त्रावणकोर राजवंश (http://en.wikipedia.org/wiki/Travancore_Royal_Family)(Travancore Royal Family) द्वारा ही किया गया है। (त्रावणकोर राजवंश ने सन 1750 में ही पूरे घराने को "पद्मनाभ दास" यानी भगवान पद्मनाभ के दास घोषित कर दिया था, इस घराने की रानियाँ "पद्मनाभ सेविनी" कहलाती हैं) कांग्रेस-सेकुलरों तथा वामपंथी सरकारों द्वारा जिस तरह से पिछले 10-15 सालों में लगातार हिन्दू आस्थाओं की खिल्ली उड़ाना, हिन्दू मन्दिरों की धन-सम्पत्ति हड़पने की कोशिशें करना, हिन्दू सन्तों एवं धर्माचार्यों को अपमानित एवं तिरस्कारित करने का जो अभियान चलाया जा रहा है, वह “किसके इशारे” पर हो रहा है यह न तो बताने की जरुरत है और न ही हिन्दू इतने बेवकूफ़ हैं जो यह समझ न सकें। कांची के शंकराचार्य जी को ऐन दीपावली की रात (http://intellibriefs.blogspot.com/2004/12/geopolitical-conspiracy-behind.html)(Kanchi Shankaracharya Arrest) को गिरफ़्तार किये जाने से लेकर, स्वामी लक्षमणानन्द सरस्वती की हत्या, नित्यानन्द को सैक्स स्कैण्डल में फ़ाँसना (http://zeenews.india.com/news/karnataka/court-summons-3-in-nithyananda-sex-scandal_710831.html)(Nityananda Sex Scandal fraud), असीमानन्द को बम विस्फ़ोट में घसीटना, साध्वी प्रज्ञा को हिन्दू आतंकवादी दर्शाना (Sadhvi Pragya Arrest) तथा बाबा रामदेव, आसाराम बापू, और सत्य साईं बाबा को “ठग”, “लुटेरा” इत्यादि प्रचारित करवाना जैसी फ़ेहरिस्त लगातार जारी है, इसी कड़ी में ताजा मामला है स्वामी पद्मनाभ मन्दिर का।
एक याचिकाकर्ता टीपी सुन्दरराजन (पता नहीं यह असली नाम है या कोई छिपा हुआ धर्म-परिवर्तित) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके स्वामी पद्मनाभ मन्दिर ट्रस्ट की समस्त गतिविधियों तथा आर्थिक लेनदेन को “पारदर्शी”(?) बनाने हेतु मामला दायर किया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार दो जज श्री एमएन कृष्णन तथा सीएस राजन, केरल के मुख्य सचिव के जयकुमार, मन्दिर के मुख्य प्रशासक हरिकुमार, आर्कियोलोजी विभाग के एक अधिकारी तथा त्रावणकोर राजवंश के दो प्रमुख सदस्यों की उपस्थिति में तहखानों को खोलने तथा निकलने वाली वस्तुओं की सूची एवं मूल्यांकन का काम शुरु किया गया। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश था कि जब तक सूची पूरी करके न्यायालय में पेश न कर दी जाए, तब तक किसी अखबार या पत्रिका में इस खजाने का कोई विवरण प्रकाशित न किया जाए, परन्तु सबसे पहले एक सेकुलर पत्रिका(?) मलयाला मनोरमा ने इस आदेश की धज्जियाँ उड़ाईं और भगवान विष्णु की मूर्ति की तस्वीरें तथा सामान की सूची एवं उसके मूल्यांकन सम्बन्धी खबरें प्रकाशित कीं। चटखारे ले-लेकर बताया गया कि मन्दिर के पास कितने करोड़ की सम्पत्ति है, इसका कैसे “सदुपयोग”(?) किया जाए… इत्यादि। हालांकि न तो याचिकाकर्ता ने और न ही मलयाला मनोरमा ने आज तक कभी भी चर्च की सम्पत्ति, उसे मिलने वाले भारी-भरकम विदेशी अनुदानों (http://dialogueindia.in/magazine/Article/tamil-tigers-tatha-father-gesper-avam-2g-spectram-ghotala)(Donations received by Church in India), चर्च परिसरों में संचालित की जा रही व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय तथा विभिन्न मस्जिदों एवं मदरसों को मिलने वाले ज़कात एवं खैरात के हिसाब-किताब एवं ‘पारदर्शिता’ पर कभी भी माँग नहीं की। ज़ाहिर है कि ऐसी पारदर्शिता सम्बन्धी “सेकुलर मेहरबानियाँ” सिर्फ़ हिन्दुओं के खाते में ही आती हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि- 1) सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त इस समिति में उपस्थित किसी “भेदिये” के अलावा मन्दिर का कौन सा कर्मचारी इन “हिन्दू विरोधी” ताकतों से मिला हुआ है? 2) क्या सुप्रीम कोर्ट मलयाला मनोरमा (Malayala Manorama) के खिलाफ़ “अदालत की अवमानना” का मुकदमा दर्ज करेगा? 3) इस विशाल खजाने की गिनती और सूचीबद्धता की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है? 4) मलयाला मनोरमा जैसी “चर्च पोषित” पत्रिकाएं मन्दिर और तहखानों के नक्शे बना-बनाकर प्रकाशित कर रहे हैं, ऐसे में सुरक्षा सम्बन्धी गम्भीर सवालों को क्यों नज़रअन्दाज़ किया जा रहा है, क्योंकि खजाने की गिनती और मन्दिर में हजारों दर्शनार्थियों के नित्य दर्शन एक साथ ही चल रहे हैं, धन-सम्पत्ति की मात्रा और मन्दिर में आने वाले चढ़ावे की राशि को देखते हुए, क्या किसी आतंकवादी अथवा माफ़िया संगठन के सदस्य दर्शनार्थी बनकर इस स्थान की “रेकी” नहीं कर सकते? तब इन “सेकुलर-वामपंथी” पत्रकारों एवं अखबारों को यह प्रकाशित करने का क्या हक है?

यहाँ एक बात ध्यान देने योग्य है कि त्रावणकोर राजवंश के सभी सदस्यों को इस खजाने के बारे में पीढ़ियों से जानकारी थी, परन्तु भारत के वर्तमान राजनैतिक राजवंशों की तरह, क्या मार्तण्ड वर्मा राजवंश ने इस सम्पत्ति को स्विस बैंक में जमा किया? नहीं। चाहते तो आराम से ऐसा कर सकते थे, लेकिन उन्होंने सारी सम्पत्ति भगवान पद्मनाभ मन्दिर को दान देकर, उसका कुछ हिस्सा भक्तों की सुविधा एवं सहूलियत तथा मन्दिर के विभिन्न धार्मिक संस्कारों एवं विकास के लिये उपयोग किया। इतने बड़े खजाने की जानकारी और कब्जा होने के बावजूद त्रावणकोर राजवंश द्वारा अपनी नीयत खराब न करना और क्या साबित करता है? ज़ाहिर है कि मार्तण्ड वर्मा राजवंश ने इस सम्पत्ति को पहले मुगलों की नीच दृष्टि से बचाकर रखा, फ़िर अंग्रेजों को भी इसकी भनक नहीं लगने दी… परन्तु लगता है वर्तमान “सेकुलर-वामपंथी गठजोड़ की लूट” से शायद इसे बचा पाना सम्भव नहीं होगा। आप खुद ही सोचिये कि यदि आप अपनी श्रद्धानुसार कोई बहुमूल्य वस्तु अपने भगवान को अर्पित करते हैं, तो वह मन्दिर की सम्पत्ति होना चाहिए, परन्तु ऐसा है नहीं…। मन्दिरों-मठों की विशाल सम्पत्ति पर सेकुलरिज़्म और वामपंथी-मिशनरी की “काली नीयत” का साया पड़ चुका है, ये लोग सत्य साँई ट्रस्ट (http://www.srisathyasai.org.in/)(Satya Sai Trust) पर भी नज़रें गड़ाये हुए हैं और मौका पाते ही निश्चित रूप से उसे “सरकारी ट्रस्ट” बनाकर उसमें घुसपैठ करेंगे। यह काम पहले भी मुम्बई के सिद्धिविनायक ट्रस्ट में कांग्रेसियों एवं शरद पवार की टीम ने कर दिखाया है।

तात्पर्य यह कि आप जो भी पैसा मन्दिरों में यह सोचकर दान करते हैं कि इससे गरीबों का भला होगा या मन्दिर का विकास होगा… तो आप बहुत ही भोले और मूर्ख हैं। जो पैसा या अमूल्य वस्तुएं आप मन्दिर को दान देंगे, वह किसी सेकुलर या वामपंथी की जेब में पहुँचेगी… अथवा इस पैसों का उपयोग हज के लिए सब्सिडी देने, नई मस्जिदों के निर्माण में सरकारी सहयोग देने, ईसाईयों को बेथलेहम की यात्रा में सब्सिडी देने में ही खर्च होने वाला है। रही मन्दिरों में सुविधाओं की बात, तो सबरीमाला का हादसा अभी सबके दिमाग में ताज़ा है… केरल में हमेशा से सेकुलर-वामपंथी गठजोड़ ही सत्ता में रहा है, जो पिछले 60 साल में इन पहाड़ियों पर पक्की सीढ़ियाँ और पीने के पानी की व्यवस्था तक नहीं कर पाया है, जबकि अय्यप्पा स्वामी के इस मन्दिर से देवस्वम बोर्ड को प्रतिवर्ष करोड़ों की आय होती है। लगभग यही स्थिति तिरुपति स्थित तिरुमाला के मन्दिर ट्रस्ट की है, जहाँ सुविधाएं तो हैं परन्तु ट्रस्ट में अधिकतर स्वर्गीय(?) “सेमुअल” राजशेखर रेड्डी के चमचे भरे पड़े हैं जो धन का मनमाना “सदुपयोग”(?) करते हैं।

देश की आजादी के समय पूरे देश में चर्चों के संचालन-संधारण की जिम्मेदारी पूरी तरह से विदेशी आकाओं के हाथ मे थी, जबकि यहाँ उनके “भारतीय नौकर” चर्चों का सारा हिसाब-किताब देखते थे। 60 साल बाद भी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया है और सभी प्रमुख बिशपों का नामांकन सीधे वेटिकन से होता है तथा चर्च व मिशनरी की अधिकांश सम्पत्ति पर नियन्त्रण विदेश से एवं विदेशी बिशपों द्वारा ही होता है। ज़ाहिर है कि चर्च की अकूत सम्पत्ति एवं कौड़ियों के मोल मिली हुई खरबों रुपये की जमीन पर जो व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित होती हैं, उसकी जाँच अथवा बिशपों के घरों में बने तहखानों की तलाशी जैसा “दुष्कृत्य”(?), सेकुलरिज़्म के नाम पर कभी नहीं किया जाएगा।

इस सम्बन्ध में सुझाव यह है कि इस तमाम सम्पत्ति का एक ट्रस्ट बनाया जाए जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश करें एवं इसके ब्याज से प्राप्त आय के समस्त खर्चों पर एक समिति निगरानी रखे जिसमें CVC भी शामिल हो। फ़िलहाल इस फ़ण्ड के कुछ हिस्से से भारत की पूरी सीमा पर मजबूत इलेक्ट्रानिक बाड़  लगाई जाए, 50 ड्रोन विमान खरीदे जाएं, 400 स्पीड बोट्स खरीदी जाएं जो सभी प्रमु्ख समुद्र तटों और बन्दरगाहों पर तैनात हों, सीमा पर तैनात होने वाले प्रत्येक सैनिक को 50,000 रुपये का बोनस दिया जाए, पुलिस विभाग के सभी एनकाउंटर ATS दलों के सदस्यों को 25,000 रुपये दिए जाएं, देश के सभी शहरी पुलिस थानों को 4-4 और ग्रामीन थानों को 2-2 तेज और आधुनिक जीपें दी जाएं, तथा एके-47 के समकक्ष रायफ़ल बनाने वाली भारतीय तकनीक विकसित कर बड़ा कारखाना लगाया जाए। इतना करने के बाद भी बहुत सा पैसा बचेगा जिसे सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कें बनाने, वॉच टावर लगाने, प्रमुख नदियों में नहरों का जाल बिछाने, नक्सल प्रभावित इलाकों में बिजली-सड़क पहुँचाने जैसे कामों में लगाया जाए, शर्त सिर्फ़ एक ही है कि इन खर्चों पर नियन्त्रण किसी स्वतन्त्र समिति का हो, वरना सेकुलर-वामपंथी गठजोड़ इसका उपयोग "कहीं और" कर लेंगे…

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चलते-चलते एक विषयान्तर नोट :- मैकाले की संतानें अक्सर भारत को “पिछड़ा” और “अज्ञानी” बताते नहीं थकतीं, परन्तु सैकड़ों साल पहले बने पद्मनाभ मन्दिर के सुव्यवस्थित तहखाने, इनमें हवा के आवागमन और पानी की व्यवस्था तथा बहुमूल्य धातुओं को खराब होने से बचाये रखने की तकनीक, ऐसे मजबूत लॉकरों की संरचना, जिन्हें खोलने में आज के आधुनिक विशेषज्ञों को 6-6 घण्टे लग गये… क्या यह सब हमारे पुरखों को कोई अंग्रेज सिखाकर गया था? पता नहीं किस इंजीनियरिंग की दुहाई देते हैं आजकल के “सो-कॉल्ड” आधुनिक (यानी भारतीय संस्कृति विरोधी) लोग। क्या ये लोग कभी बता पाएंगे कि राजस्थान में बड़े और भारी पत्थरों से बने हुए आमेर के किले को बनाने में कौन सी पश्चिमी इंजीनियरिंग का इस्तेमाल हुआ? वे महाकाय पत्थर इतनी ऊँची पहाड़ी पर कैसे पहुँचे? चूने की जुड़ाई होने के बावजूद इतने सालों से कैसे टिके हुए हैं? ज़ाहिर है कि उनके पास कोई जवाब नहीं है…। लेकिन हाँ, अंग्रेजी किताबें पढ़कर… हिन्दुओं, हिन्दू संस्कृति, भगवा रंग, मन्दिरों-मठों की परम्पराओं इत्यादि को गरियाने जितनी अक्ल अवश्य आ गई है।

27 comments:

sagar said...

wah sir ji...kya khub khangala hai apne m apki har bat se sahmat hu...bahut sahi kam kar rahe hai aap...

Anonymous said...

bahut shaandar lekh hai mast aaj aankh khuli

दिवाकर मणि said...

भाई सुरेश जी, भारत में बहुत समय से ही खासकर स्वतंत्रता के बाद एक खास प्रवृत्ति काम कर रही है, जिसका एक ही मकसद है येन-केन-प्रकारेण हिंदू मूल्यों पर कुठाराघात करना, और कुछ इस प्रकार और उन लोगों द्वारा करना कि कोई भी बेवकूफ यह न समझ पाए कि इसे करने वाले कौन लोग हैं, और इससे हिंदू और हिंदू मूल्यों को क्या क्षति होने वाली है...

खैर, पद्मनाभ मंदिर का किस्सा तो उसी शृंखला एक उदाहरण मात्र है, अभी आगे-आगे देखिए, होता है क्या...

जय शर्मनिरपेक्ष भारत देश के मूर्ख हिंदू जनता की.

Rajesh said...

Bahut hi badhiya likha hai Suresh Ji. Aapke sabhi lekh bahut hi ache hote hai.

Neeraj नीरज نیرج said...

नारायण गहनों से लदे हैं.. भक्त दरिद्र है.. भक्त को आस है कि उसकी दरिद्रता नारायण दूर करेंगे। भगवान अस्त्र-शस्त्रों से लैस हैं.. लेकिन भक्त कायर है, अहिंसक है क्योंकि उसे भरोसा है कि भगवान ही बचाएंगे। सुनता आया है ''यदा-यदा ही धर्मस्य..''दुनिया में किसी और धर्म के देवी-देवताओं को इतना सजाया-संवारा जाता है क्या?
मुझे नहीं लगता कि हमारे मंदिरों के खज़ाने भरे होने चाहिए और भक्त फटेहाल घूमे। कम से कम हमारे मठाधीश इसे उत्पादक पूंजी बनाकर विकास कर लेते तो अच्छा होता। हमें हिन्दू बचाने होंगे तो देवता बचेंगे। अब आपने जो सुझाव दिए हैं वे राष्ट्र सर्वोपरी की भावना से ओत-प्रोत हैं। मैं इनसे सहमत हूं।

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

बाबा रामदेव के ट्रस्ट की संपत्ति है करीब ११०० करोड़ रुपये, जिसकी सरकार को बार बार जांच करनी है|
श्री श्री रविशंकर जी महाराज के आर्ट ऑफ लिविंग की संपत्ति है करीब २५०० करोड़ रुपये| बाबा रामदेव का समर्थन करने के कारण इनका भी नंबर लगने वाला है|
माता अमृतान्दमयी की संपत्ति है करीब ६००० करोड़ रुपये| इनकी भी बारी लग रही है|
पुट्टपर्थी के सत्य साईं बाबा की संपत्ति को लेकर अभी कुछ दिन पहले बवाला मच चूका है|

वही दूसरी ओर
Brother Dinakaran जो कि एक Self Styled Christian Evangelist हैं (कभी नाम सुना है?) की संपत्ति ५००० करोड़ से ज्यादा है|
Bishop K.P.Yohannan जिन्होंने २० वर्षों में एक Christian Sector बना दिया, की संपत्ति १७००० करोड़ है|
Brother Thanku (Kottayam, Kerela) एक और Christian Evangelist, की संपत्ति ६००० हज़ार करोड़ से अधिक है|


कोई पूछे मायनों से या उसकी चमचागिरी करते हुए उसके तलवे चाटने वाले दिग्विजय से कि इन तीन पादरियों (जिनका नाम शायद कुछ सौ लोग ही जानते होंगे) के पास इतनी संपत्ति कहाँ से आई? क्या कभी इनकी भी जांच होगी?

आदरणीय सुरेश भाई, इन भ्रष्ट सेक्युलरों की नज़र में केवल मंदिरों में जमा धन ही काला धन है| इन्हें मंदिरों में पड़ा हमारी प्राचीन विरासत का धन तो दिखाई दे रहा है, किन्तु विदेशी बैंकों में जमा भ्रष्टों का पैसा नहीं दीखता|

और साथ ही ये सेक्युलर भारत के विज्ञान को क्या समझ सकेंगे, इसकी तो एक लम्बी सूची है मेरे पास...इनके लिए तो भारत और हिन्दू हमेशा ही पिछड़े रहेंगे...

patheykan said...

black mani jo bahar jama kiya hua hai use to bahar lane ki nahhi sochte mandiro me jama dhan ko or khana chahte hai

आशुतोष की कलम said...

Suresh ji..
sekular shwano ki ye pidhi hindu dharm ko gart men le jane ka jal bun rahi hai..usi kadi men uthaya gaya ye ek aur kadam hai

ROHIT said...

भारत ऐसे ही सोने कि चिड़िया नही कहलाता था.
सोना चाँदी हीरे जवाहारत ये सब हिँदुओ के लिये बहुत मामूली सी चीजे थी.

लेकिन जब भारत से कोसो दूर के भिखारी देशो के जंगली नंगे मलेच्छ लोग.
जिनके पास पहनने को कच्छा तक नही था.
भारत की अकूत दौलत देखकर पगला गये.
और कुत्तो की तरह लार टपकाते हुये भारत पर हमला कर दिया.
और यहाँ के जयचंदो के कारण भारत का खजाना एक बार नही बल्कि सैकड़ो बार भर भर कर अपने भिखारी देशो मे ले गये.
और जब वो सारा खजाना नही ले जा पाये.
तो अपने मलेच्छ वंशजो को यही छोड़ दिया.
उन्ही मलेच्छो को हिँदु आज तक झेल रहा है.
त्रावणकोर राजाओ ने जिस धन को मुगल भिखारियो और अंग्रेजो से आज तक बचाये रखा.
उसको इटालियन सरकार के शासन काल मे उन भिखारियो के वंशजो से बचाना बहुत मुश्किल है.
मुझे बहुत गर्व होता है कि मै सनातन धर्मी हूँ.
और उस भारत का वासी हूँ
जहाँ डाल डाल पर सोने कि चिड़िया बैठती थी.
और जिस दिन इस इटालियन सरकार का समूल विनाश होगा.
उसी दिन से सोने की चिड़िया पुनः भारत की डाल डाल पर बैठेगी.
सोना चाँदी हीरे जवाहारत ये सब हिँदुओ के लिये बहुत मामूली सी चीजे थी.

लेकिन जब भारत से कोसो दूर के भिखारी देशो के जंगली नंगे मलेच्छ लोग.
जिनके पास पहनने को कच्छा तक नही था.
भारत की अकूत दौलत देखकर पगला गये.
और कुत्तो की तरह लार टपकाते हुये भारत पर हमला कर दिया.
और यहाँ के जयचंदो के कारण भारत का खजाना एक बार नही बल्कि सैकड़ो बार भर भर कर अपने भिखारी देशो मे ले गये.
और जब वो सारा खजाना नही ले जा पाये.
तो अपने मलेच्छ वंशजो को यही छोड़ दिया.
उन्ही मलेच्छो को हिँदु आज तक झेल रहा है.
त्रावणकोर राजाओ ने जिस धन को मुगल भिखारियो और अंग्रेजो से आज तक बचाये रखा.
उसको इटालियन सरकार के शासन काल मे उन भिखारियो के वंशजो से बचाना बहुत मुश्किल है.
मुझे बहुत गर्व होता है कि मै सनातन धर्मी हूँ.
और उस भारत का वासी हूँ
जहाँ डाल डाल पर सोने कि चिड़िया बैठती थी.
और जिस दिन इस इटालियन सरकार का समूल विनाश होगा.
उसी दिन से सोने की चिड़िया पुनः भारत की डाल डाल पर बैठेगी.

सञ्जय झा said...

o kya hai bhau ...... ke secularon ka chasma kanch ke nahi ispat ke hote hain ....... jahir hai '..lon' ko...
dikhna band hai........

aisaich kantap lagate rahen....

pranam

भारतीय नागरिक said...

इस सबसे क्या लाभ हुआ जानते हैं, अब काले धन की बात पर विराम लगा दिया और इस बचाये गये खजाने को ऐसे प्रोजेक्ट कर रहे हैं कि अब इसके आगे कुछ करने की आवश्यकता नहीं. ऐसे ही सब मंदिरों और मठों की सम्पत्ति का अधिग्रहण कर लिया जाये तो गरीबी दूर हो जायेगी और नेताओं, अफसरों, व्यापारियों के कालेधन की बात खत्म हो जायेगी.
जागो, भारतीयो और खासकर हिन्दुओ, जागो. दिवस जी की बात बहुत पते की है. कोई इन संगठनों की सम्पत्ति की बात भी नहीं करता.

सुलभ said...

सवाल बहुत है
बवाल बहुत है
सोने की चिड़िया
कंगाल बहुत है

विदेशी लूट अब तक जारी है.
--
दिवस जी, इन आकड़ों के लिए धन्यवाद आपका.

ePandit said...

सुरेश जी भारत जैसा वैभवशाली देश दुनिया में कहीं नहीं था। यहाँ के मन्दिरों और राजाओं के खजानों की अकूत सम्पदा का कोई हिसाब नहीं था। मन्दिरों की तो सम्पदा मुस्लिम अक्रान्ता लूट ले गये और राजाओं की अंग्रेज। इतिहास की किताबें उठाकर देखो तो छोटे-छोटे राजाओं को हराकर भी अंग्रेज उनसे उस जमाने में भी करोड़ों रुपये हड़प लेते थे।

इतना होने पर भी भारत का अस्तित्व बचा रहा यही गनीमत है। अरबों और अंग्रेजों की लूटने की विरासत अब इन वामपंथी-सेकुलर वालों ने सम्भाल ली है।

Desh Premi said...

कांग्रेस मुस्लिम वोट के लिए कितना नीचे गिर ***ती है उ***ा खुलासा मै राष्ट्रपति भवन से एक R T I से कर रहा हूँ ..शर्म आती है कांग्रेस पर........... !! थू थू !!एक पत्रकार ने R T I से राष्ट्रपति भवन से पूछा की कसब और अफजल गुरु की फाइल की status क्या है ??जबाब बहुत ही शर्मनाक आया .. द...रअसल अफजल और कसब की फाइल आज तक गृह मंत्रालय में ही है ..राष्ट्रपति भवन भेजी ही नहीं गयी है ..विकिलिस ने भी खुलासा किया है की सोनिया गाँधी मुस्लिम वोट के लिए हर हाल में अफजल को बचाना चाहती है ..अब जरा इस डाटा पर भी नज़र डालिए :
नाम ......................... धर्म ..... .......फाइल पर फासी की मुहर लगाने में लगा समय
नाथू राम गोडसे ........ हिन्दू ............ 125 दिन
धनञ्जय कुमार ........ हिन्दू .............. 34 दिन
रंगा और बिल्ला......... हिन्दू.............. 28 दिन
जिन्दा और सुच्चा...... सिख............... 76 दिन
बेअंत सिंह................ सिख............... 87 दिन
केहर सिंह................. सिख.............. 87 दिन
अफजल गुरु........... मुस्लिम........ 5,967 दिन से बिरयानी खा रहा हैवाह रे कांग्रेस वोट के लिए आतंकवादियो को अपना दामाद बना कर रखती है
हिन्दुओं को प्रताड़ित करना इस देश के नेताओं का परम कर्त्तव्य है,फिर वो देश के हित की बात ही क्यों न हो?.

Ganesh Prasad said...

wah sir ji, wah !

bahut hi bistar se likha hai aapne... badhai.

congress ke CHAL sab ko samajh me aa jaye.. AAMIN

Devang Dave said...

Hi,
Please fill the form and press 'SUBMIT' below.

###This form is an effort to collect contact details of all nationalist bloggers and active people on Internet.
It will be used to send some important updates or invitation of conferences. Note: Your contact details will be kept confidential.###Narendra Modi For PM

http://www.sanghparivar.org/nationalist-bloggers-register-here

Kartikey Kumar said...

सुरेश भाई इन सब को मुक्ति देदो !

Raj said...

lakin hum hindu in kristan ki tarah dharm ka felawa ku nahi karty ye sali humare desh me aake hum ko aakh di khaty hy,koi court me ku nahi case karta ki church ki sampati or trust ko sab sarvajanik karna hoga

अनुपम said...

Aaj ke samay ke sabse mahatvapoorn aur chintaniya muddo me se hai ye.
Sahi bindu par prakash dala hai Suresh ji ne!

राहुल पंडित said...

यह मंदिर अदभूत है | हम गये थे तब एक दिन ओर रुके थे | सामान्य मंदिर की तरह तोड़ा चलने पर गुंबज शुरू होता है ऐसा नही है | लंबा रास्ता करीब 10 मिनट चलो तब गुंबज आता है | तब तक अंधेरा बढ़ते जाता है | प्रकाश व्यवस्था कुदरती है पर अंधेरा अंधा नही बनाता | धीरे धीरे हम नीचे जा रहे है ऐसा प्रतीत होता है पर कोई स्टेप उतरने का नही है आसान ढलान है | ढलने से मंदिर की उंचाई बढ़ती जाती है | स्वच्छ हवा दिमाग़ को ताज़ा कर देती है | हम कब समंदर के अंदर है यह पता नही चलता जब तक ठंड न लगे | शेषनाग पर लेटे काले विष्णु की तसवीर सभी ने पुस्तको मे देखी होगी वो यही की है | एक ही स्टोन से 18 मंज़िल जितना आड़ा विष्णु लेटा है | मंत्रमुग्ध या वशीकरण लगता है | सब शांत हो जाता है | हार्ड्ली किसी को डर लगता है | ध्यान से सुनो तो समंदर की टकराती लहरो के बीच आप हो यह एहसास होता है | दो पत्थरो के बीच कोई मिट्टी या सीमेंट नही लगाया है बस यू ही पत्थर पे पत्थर चढ़ाया है फिर भी लीकेज नही है | सभी को धोती पहननि ज़रूरी है .धोती बहार फ्री पहने मिलती है बाद मे लौटा दो | महिलाए यू ही जा सकती है | कुछ मुस्लिम ईसाई लोग भी दिखे थे जो रेगयुलर भक्त थे | कोई डोनेशन नही देना पड़ता न कोई टिकट लेना पड़ता है | जूते संभालने टोकन प्रथा है पर वो भी मुफ़्त है | सेवको ने मंदिर को सॉफ रखा है | वास्तु के देव मानसारा, मयामंतम ओर विश्वकर्मा ने यही भगवान से दीक्षा ली थी जो छोटे स्टोन का मुल मान कर यह मंदिर बनाया है|किसी ने समुद्रमंथन यही हुवा था ऐसी जानकारी दी |विष्णु जो तत्व के देव है उन्हो ने मनु को पदार्थ (मिनरल्स) का ग्यान यही दिया है|आसपास की दीवारे भी मूर्तियो से लदी है|एक कछुआ भी है जो विष्णु की राह मे पत्थर बन गया था| कोई पैसो का दिखावा नही है सब सादे पुजारी है कोई पूजा का आग्रह नही है पर पास के झरने पर 100 लोग शांति से पूजा करते दिखाई देते है|पूजा फीज़ का आग्रह नही है|पैसे कम हो तो भी पूजा मे बैठ सकते है |प्रसाद मे पूरा खाना मिलता है वो भी फ्री है|ज्योतिष् भी फ्री मे देखी जाती है|रोज की तकलीफे लोग यहां भूल जाते है|

swati budholiya said...

Sahi bindo par prakash dala hai Suresh bhai ji ne!thanx a lot.

Niraj said...

सुरेश जी, आपका लेखन से भाजपाई/संघी राजनीति की बू आती है... नित्यानंद, आसाराम और साध्वी ऋतंबरा की असलीयत वैसे तो अधिकांश लोग समझते हैं. जिस तरह से आपने अपने लेख में सुन्दरराजन को धर्म परिवर्तित कह कर संबोधित किया है उसी से आपकी मंशा का पता चल जाता है. ऐसी biased लेखनी से दूर रहें और समाज में फैसे हुए मतभेदों को और बढ़ाने का प्रयास ना करें यही आपसे गुजारिश है.

Anonymous said...

sureshji
Hamane 800 saal mughalon se,250 saal britania sarkar se bachaya he ,parantu en congressee kutton se kaishe is pnamnabhsawami mandir ko bachayange
kamal chhangani

Anonymous said...

fatwa--soniya maino aur man mohan ka murder karana jarooree hai. aisa karane wale ko rupees one crore.

anuraag tyagi said...

Swami Padamnabh Maharaj ji ke Mandir ki sampurn sampatti Mandir ki hai, Hindu Dharm ki hai, Hinduon ki hai, Aur kis Gaddar ki Maut aayi hai jo iss per gandi nazar dale, Aap sab aage badho iss ki raksha ka dayitva kisi sarkar ka nahi balki Hindu samaj ka hai, Sarkar kya kisi court ko bhi adhikar nahi hai iske baare mein bolne ka, Aise aage aao ki sabko piche hatna pade. Chahe kuch bhi karna jaruri ho, karo.....Apne adhikar ko jara bhi kamzor nahi padne dena. Puri taqat se bolo ye Hamare Bhagwan ki Sampatti hai, Hamari Sampatti hai, Hame har samay ye dikhana hai ki iske Rakshak Hum sab mojud hain. Secular ho ya vampanthi kisi harami ko iske baare mein baat karne ka bhi aadhikar mat do. Kisi Non-Hindu ko koi aadhikar nahi hai ispar bolne ka. Koi bolne ki koshish bhi kare to use chir- faad denge. Vande Matram !

indhu M said...

Thanks for sharing!! Nice Post!
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benedict dilton said...

Rs 1040 Crores collected from all over the world in name of charity and rehabilitation of orphans used to purchase 2800 acres of land.

According to Kerala home minister Kodiyeri Balakrishnan, the church, formed under a trust called Gospel for Asia, has received Rs 1,044 crore in foreign donations in the last 15 years. Using that money, the home minister says the church has bought nearly 2,800 acres of land, including a 2,200-acre rubber estate. Worse, the seven-member Gospel for Asia trust is found to have been packed with Yohannan’s family members, including his wife, children and brothers. “It’s all highly irregular and unlawful,” Balakrishnan says, explaining that under the law, a family can hold only 15 acres. The revenue department has been asked to “take over” 580 acres, pending an inquiry into how the “church had bought the 2,200-acre rubber estate from a private company when the estate was on leasehold and thus not saleable,” he says.

http://bishopkpyohannan.blog.com/