Monday, July 11, 2011

Hindu Temples in India, Swami Padmanabh Temple and Supreme Court of India

हिन्दू मन्दिरों को “सेकुलर लूट” से बचाने हेतु सुप्रीम कोर्ट को कुछ सुझाव…

यदि आप सोचते हैं कि मन्दिरों में दान किया हुआ, भगवान को अर्पित किया हुआ पैसा, सनातन धर्म की बेहतरी के लिए, हिन्दू धर्म के उत्थान के लिए काम आ रहा है तो आप निश्चित ही बड़े भोले हैं। मन्दिरों की सम्पत्ति एवं चढ़ावे का क्या और कैसा उपयोग किया जाता है पहले इसका एक उदाहरण देख लीजिये, फ़िर आगे बढ़ेंगे-

कर्नाटक सरकार के मन्दिर एवं पर्यटन विभाग (राजस्व) द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार 1997 से 2002 तक पाँच साल में कर्नाटक सरकार को राज्य में स्थित मन्दिरों से “सिर्फ़ चढ़ावे में” 391 करोड़ की रकम प्राप्त हुई, जिसे निम्न मदों में खर्च किया गया-

1) मन्दिर खर्च एवं रखरखाव – 84 करोड़ (यानी 21.4%)
2) मदरसा उत्थान एवं हज – 180 करोड़ (यानी 46%)
3) चर्च भूमि को अनुदान – 44 करोड़ (यानी 11.2%)
4) अन्य - 83 करोड़ (यानी 21.2%)
कुल 391 करोड़

जैसा कि इस हिसाब-किताब में दर्शाया गया है उसको देखते हुए “सेकुलरों” की नीयत बिलकुल साफ़ हो जाती है कि मन्दिर की आय से प्राप्त धन का (46+11) 57% हिस्सा हज एवं चर्च को अनुदान दिया जाता है (ताकि वे हमारे ही पैसों से जेहाद, धार्मिक सफ़ाए एवं धर्मान्तरण कर सकें)। जबकि मन्दिर खर्च के नाम पर जो 21% खर्च हो रहा है, वह ट्रस्ट में कुंडली जमाए बैठे नेताओं व अधिकारियों की लग्जरी कारों, मन्दिर दफ़्तरों में AC लगवाने तथा उनके रिश्तेदारों की खातिरदारी के भेंट चढ़ाया जाता है। उल्लेखनीय है कि यह आँकड़े सिर्फ़ एक राज्य (कर्नाटक) के हैं, जहाँ 1997 से 2002 तक कांग्रेस सरकार ही थी…

अब सोचिए कि 60-65 साल के शासन के दौरान कितने राज्यों में कांग्रेस-वामपंथ की सरकारें रहीं, वहाँ कितने प्रसिद्ध मन्दिर हैं, कितने देवस्थान बोर्ड एवं ट्रस्ट हैं तथा उन बोर्डों एवं ट्रस्टों में कितने कांग्रेसियों, गैर-हिन्दुओं, “सो कॉल्ड” नास्तिकों की घुसपैठ हुई होगी और उन्होंने हिन्दुओं के धन व मन्दिर की कितनी लूट मचाई होगी। लेकिन चूंकि हिन्दू आबादी का एक हिस्सा इन बातों से अनभिज्ञ है…, एक हिस्सा मूर्ख है…, एक हिस्सा “हमें क्या लेना-देना यार, हम तो श्रद्धा से मन्दिर में चढ़ावा देते हैं और फ़िर पलटकर नहीं देखते, कि उन पैसों का क्या हो रहा है…” किस्म के आलसी हैं, जबकि “हिन्दू सेकुलरों” का एक बड़ा हिस्सा तो है ही, जिसे आप विभीषण, जयचन्द, मीर जाफ़र चाहे जिस नाम से पुकार लीजिए। यानी गोरी-गजनवी-क्लाइव तो चले गए, लेकिन अपनी “मानस संतानें” यहीं छोड़े गए, कि बेटा लूटो… हिन्दू मन्दिर होते ही हैं लूटने के लिए…। पद्मनाभ मन्दिर (http://en.wikipedia.org/wiki/Padmanabhaswamy_Temple) की सम्पत्ति की गणना, देखरेख एवं कब्जा चूंकि सुप्रीम कोर्ट के अधीन एवं उसके निर्देशों के मुताबिक चल रहा है इसलिए अभी सब लोग साँस रोके देख रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस खजाने की रक्षा एवं इसके उपयोग के बारे में सुझाव माँगे हैं। सेकुलरों एवं वामपंथियों के बेहूदा सुझाव एवं उसे “काला धन” बताकर सरकारी जमाखाने में देने सम्बन्धी सुझाव तो आ ही चुके हैं, अब कुछ सुझाव इस प्रकार भी हैं –

1) सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक “हिन्दू मन्दिर धार्मिक सम्पत्ति काउंसिल” का गठन किया जाए। इस काउंसिल में सुप्रीम कोर्ट के एक वर्तमान, दो निवृत्त न्यायाधीश, एवं सभी प्रमुख हिन्दू धर्मगुरु शामिल हों। इस काउंसिल में पद ग्रहण करने की शर्त यह होगी कि सम्बन्धित व्यक्ति न पहले कभी चुनाव लड़ा हो और न काउंसिल में शामिल होने के बाद लड़ेगा (यानी राजनीति से बाहर)। इस काउंसिल में अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष का पद त्रावणकोर के राजपरिवार के पास रहे, क्योंकि 250 वर्ष में उन्होंने साबित किया है कि खजाने को खा-पीकर “साफ़” करने की, उनकी बुरी नीयत नहीं है।

2) इस काउंसिल के पास सभी प्रमुख हिन्दू मन्दिरों, उनके शिल्प, उनके इतिहास, उनकी संस्कृति के रखरखाव, प्रचार एवं प्रबन्धन का अधिकार हो।

3) इस काउंसिल के पास जो अतुलनीय और अविश्वसनीय धन एकत्रित होगा वह वैसा ही रहेगा, परन्तु उसके ब्याज से सभी प्रमुख मन्दिरों की साज-सज्जा, साफ़-सफ़ाई एवं प्रबन्धन किया जाएगा।

4) इस विशाल रकम से प्रतिवर्ष 2 लाख हिन्दुओं को (रजिस्ट्रेशन करवाने पर) अमरनाथ, वैष्णो देवी, गंगासागर, सबरीमाला, मानसरोवर (किसी एक स्थान) अथवा किसी अन्य स्थल की धार्मिक यात्रा मुफ़्त करवाई जाएगी। एक परिवार को पाँच साल में एक बार ही इस प्रकार की सुविधा मिलेगी। देश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर काउंसिल की तरफ़ से सर्वसुविधायुक्त धर्मशालाएं बनवाई जाएं, जहाँ गरीब से गरीब व्यक्ति भी अपनी धार्मिक यात्रा में तीन दिन तक मुफ़्त रह-खा सके।

5) इसी प्रकार पुरातात्विक महत्व के किलों, प्राचीन स्मारकों के आसपास भी “सिर्फ़ हिन्दुओं के लिए” इसी प्रकार की धर्मशालाएं बनवाई जाएं जिनका प्रबन्धन काउंसिल करेगी।

6) नालन्दा एवं तक्षशिला जैसे 50 विश्वविद्यालय खोले जाएं, जिसमें भारतीय संस्कृति, भारतीय वेदों, भारत की महान हिन्दू सभ्यता इत्यादि के बारे में विस्तार से शोध, पठन, लेखन इत्यादि किया जाए। यहाँ पढ़ने वाले सभी छात्रों की शिक्षा एवं आवास मुफ़्त हो।

ज़ाहिर है कि ऐसे कई सुझाव माननीय सुप्रीम कोर्ट को दिये जा सकते हैं, जिससे हिन्दुओं द्वारा संचित धन का उपयोग हिन्दुओं के लिए ही हो, सनातन धर्म की उन्नति के लिए ही हो, न कि कोई सेकुलर या नास्तिक इसमें “मुँह मारने” चला आए। हाल के कुछ वर्षों में अचानक हिन्दू प्रतीकों, साधुओं, मन्दिरों, संस्कृति इत्यादि पर “सरकारी” तथा “चमचात्मक” हमले होने लगे हैं। ताजा खबर यह है कि उड़ीसा की “सेकुलर” सरकार, पुरी जगन्नाथ मन्दिर के अधीन विभिन्न स्थानों पर जमा कुल 70,000 एकड़ जमीन “फ़ालतू” होने की वजह से उसका अधिग्रहण करने पर विचार कर रही है। स्वाभाविक है कि इस जमीन का “सदुपयोग”(?) फ़र्जी नेताओं के पुतले लगाने, बिल्डरों से कमाई करने, दो कमरों में चलने वाले “डीम्ड” विश्वविद्यालयों को बाँटने अथवा नास्तिकों, गैर-हिन्दुओं एवं सेकुलरों की समाधियों में किया जाएगा…। भारत में “ज़मीन” का सबसे बड़ा कब्जाधारी “चर्च” है, जिसके पास सभी प्रमुख शहरों की प्रमुख जगहों पर लाखों वर्गमीटर जमीन है, परन्तु सरकार की नज़र उधर कभी भी नहीं पड़ेगी, क्योंकि कांग्रेस के अनुसार “सफ़ेद” और “हरा” रंग पवित्रता और मासूमियत का प्रतीक है, जबकि “भगवा” रंग आतंकवाद का…।

जब से केरल के स्वामी पद्मनाभ मन्दिर के खजाने के दर्शन हुए हैं, तमाम सेकुलरों एवं वामपंथियों की नींद उड़ी हुई है, दिमाग पर बेचैनी तारी है, दिल में हूक सी उठ रही है और छाती पर साँप लोट रहे हैं। पिछले 60 साल से लगातार हिन्दुओं के विरुद्ध “विष-वमन” करने एवं लगातार हिन्दू धर्म व भारतीय संस्कृति को गरियाने-धकियाने-दबाने के बावजूद सनातन धर्म की पताका विश्व के कई देशों में फ़हरा रही है, बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में मन्दिर से निकले इस खजाने ने मानो सेकुलर-वामपंथी सोच के जले पर नमक छिड़क दिया है।

हिन्दू तो पहले से ही जानते हैं कि मन्दिरों में श्रद्धापूर्वक भगवान को अर्पित किया हुआ टनों से सोना-जवाहरात मौजूद है, इसलिए हिन्दुओं को पद्मनाभ स्वामी मन्दिर की यह सम्पत्ति देखकर खास आश्चर्य नहीं हुआ, परन्तु “कु-धर्मियों” के पेट में दर्द शुरु हो गया। हिन्दुओं द्वारा अर्पित, हिन्दू राजाओं एवं पुजारियों-मठों द्वारा संचित और संरक्षित इस सम्पत्ति को सेकुलर तरीके से “ठिकाने लगाने” के सुझाव भी आने लगे हैं, साथ ही इस सम्पत्ति को “काला धन” (http://www.iretireearly.com/1-4-trillion-indias-black-money-stashed-in-swiss-banks.html) (Black Money in India) बताने के कुत्सित प्रयास भी जारी हैं। एक हास्यास्पद एवं मूर्खतापूर्ण बयान में केरल के एक वामपंथी नेता ने, इस धन को मुस्लिम और ईसाई राजाओं से लूटा गया धन भी बता डाला… अतः इस लेख के माध्यम से मैं सुप्रीम कोर्ट से अपील करता हूँ कि वह “स्वयं संज्ञान” लेते हुए ताजमहल के नीचे स्थित 22 सीलबन्द कमरों को खोलने का आदेश दे, जिसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो ताकि पता चले कि कहीं शाहजहाँ और मुमताज सोने की खदान पर तो आराम नहीं फ़रमा रहे? इन सीलबन्द कमरों को खोलने से यह भी साफ़ हो जाएगा कि क्या वाकई ताजमहल एक हिन्दू मन्दिर था? इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करके यह माँग भी की जाना चाहिए कि ज्ञानवापी मस्जिद के नीचे, अजमेर दरगाह के नीचे एवं गोआ के विशाल चर्चों तथा केरल के आर्चबिशपों के भव्य मकानों की भी गहन जाँच और खुदाई की जाए ताकि जो सेकुलर-वामपंथी हिन्दू मन्दिरों के खजाने पर जीभ लपलपा रहे हैं, वे भी जानें कि “उधर” कितना “माल” भरा है। हिन्दुओं एवं उनके भगवान के धन पर बुरी नज़र रखने वालों को संवैधानिक एवं कानूनी रूप से सबक सिखाया जाना अति-आवश्यक है… वरना आज पद्मनाभ मन्दिर का नम्बर आया है, कल भारत के सभी मन्दिर इस “सेकुलर-वामपंथी” गोलाबारी की रेंज में आ जाएंगे…

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चलते-चलते :-

पद्मनाभ मन्दिर की सम्पत्ति को लेकर कई तरह के "विद्वत्तापूर्ण सुझाव" आ रहे हैं कि इस धन से भारत के गरीबों की भलाई होना चाहिए, इस धन से जनकल्याण के कार्यक्रम चलाए जाएं, बेरोजगारी दूर करें, सड़कें-अस्पताल बनवाएं… इत्यादि। यानी यह कुछ इस तरह से हुआ कि परिवार के परदादा द्वारा गाड़ी गई तिजोरी खोलने पर अचानक पैसा मिला, तो उसमें से कुछ "दारुकुट्टे बेटे" को दे दो, थोड़ा सा "जुआरी पोते" को दे दो, एक हिस्सा "लुटेरे पड़पोते" को दे दो… बाकी का बैंक में जमा कर दो, जब मौका लगेगा तब तीनों मिल-बाँटकर "जनकल्याण"(?) हेतु खर्च करेंगे … :) :)। जबकि "कुछ सेकुलर विद्वान" तो पद्मनाभ मन्दिर की सम्पत्ति को सीधे "काला धन" बताने में ही जुट गए हैं ताकि उनके 60 वर्षीय शासनकाल के "पाप" कम करके दिखाए जा सकें…। ये वही लोग हैं जिन्हें "ए. राजा" और "त्रावणकोर के राजा" के बीच अन्तर करने की तमीज नहीं है…

39 comments:

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

आपके हर लेख की तरह, इस पर भी नतमस्तक है हम तो।

Kanishka Kashyap said...

यह सेकुलरों की bhadvagiri है. पता नहीं ..इस सेक्युलर शब्द का भरम देश में इतना क्यूँ फैला हुआ है.
आपने इन आंकडो को रख कर ..इन सेक्युलरों की मुंह पर तमाचा मारा है. किसी में औकात और गुदा है तो निचे अपनी तर्क रखे .वर्ना मान ले की वह गज़नी के खून की मिलावट है .... !!
हे हे ..हम तो राष्ट्र -हिंदू हित के लिए खरा हीन बोलते हैं ..जिसको मुझसे नहीं बात करनी है मत करे ..

indian citizen said...

hindoo kabhi nahi jaagega... kitni bhi koshish kar lijiye, uski aankhon ki patti nahi utarati..

BLOGPRAHARI said...

एक ने उलझने की कोशिश की .. मुझसे ..फेसबुक पर ..देखिये क्या हश्र है ..

http://www.facebook.com/groups/141852605835803?id=232976533390076&notif_t=group_activity

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

आदरणीय सुरेश भाई, आपने जो ३९१ करोड़ का हिसाब बताया है, उससे तो अब सेक्युलर शब्द गाली से बदतर लग रहा है| एक तो इतना सारा धन विदेशी लुटेरों के हाथों लुटने से बचा लिया ऊपर से बचाने वाले को ही लुटेरा कह दिया| यह सब बेहद निंदनीय है|
किसी एक चर्च अथवा मस्जिद की संपत्ति का इस प्रकार हिसाब कर के देखिये, दिशा में कत्लेआम न मच जाए तो| mandir की संपत्ति तो राष्ट्रीय संपत्ति है किन्तु चर्चों व masjidon की संपत्ति पर केवल ईसाईयों व मुसलामानों का ही अधिकार है| और इतना कुछ होने के बाद भी हिन्दू आतंकवादी है|
सब बेहद शर्मनाक है|
आदरणीय सुरेश भाई, आपके सुझाव बेहद उचित लगे| यदि सुप्रीम कोर्ट इसे मानें तो जो संपत्ति विदेशी लुटेरों से बचाई थी, वह इन सेक्युलरों से बचाने में भी सफलता मिल जाएगी| इसके लिए हिन्दुओं को एक होना होगा| मुख्यत: उन हिन्दुओं को रास्ते पर लाना होगा जो अनभिज्ञ है, जो मुर्ख हैं, जिन्हें कुछ पड़ी ही नहीं है, एवं जो सेक्युलर हैं|
आभार...

Anonymous said...

इन बेशर्मों की जितनी भर्त्सना की जाए कम है, मंदिरों के धन को काला धन बता कर ये हर हिन्दू को बेईमान साबित करने पर तुले हुए हैं, जबकि ये कितने बेईमान है इसका अंदाजा संजीव भट्ट के साफ़ झूठे होने से लगाया जा सकता है मोदी जी के खिलाफ गवाही देने वाले संजीव भट्ट एकदम चुप्पी साध गए हैं, मोदी जी को झूटा साबित करने वाली कांग्रेस अब बगले झाँक रही है.

गिरीश"मुकुल" said...

सच्ची सलाह दी है दादा

Pratik Jain said...

सेकुलर शब्द से बडी गाली मेरी नजर में कोइ नहीं है

I and god said...

सुरेश भाई ,

क्या कभी लगता नहीं, कि किन के लिए लिख रहे हो जिनका केवल काम वाग्विलास या कहो तो ब्लोग्विलास है ,

आपको कोई हिंदू संगठन दिखाई दे रहा है , जहाँ से आपके अमूल्य सुझाव सीधे सुप्रीम कोर्ट में जज की मेज पर जा सकें ,

या मेरे जैसे लोग पढ़ कर वाह वाह कर के टिप्पणी लिख कर कर्त्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं.

चलो न से तो अच्छा ही है ,

आपके असंख्य प्रशंषकों में से कोई तो ऐसा भी हो सकता है जिस कि पहुँच सही जगह तक हो

अशोक गुप्ता
दिल्ली

Vivek Rastogi said...

आपकी बातें भारत में होने वाले सत्य का बोध करवा रही हैं, अब सोच रहा हूँ क्या वाकई में मंदिरों में आगे दान दूँ या चढ़ावा दढ़ाया जाये ? या फ़िर उन रूपयों को अपने उपर ही खर्च कर लिया जाये।

I and god said...

प्रिय ब्लॉग प्रहरी जी

क्यों इन बेवकूफों के मुह लग कर समय व उर्जा नष्ट कर रहे हो.

प्रयास करो कि सुरेश जी कि बात सुप्रीम कोर्ट तक प्रभावी तरीके से पहुँच जाये .

आपका
अशोक गुप्ता
दिल्ली

Anonymous said...

कृपया सुप्रीम कोर्ट की जगह उच्चतम न्यायलय लिखे |

सञ्जय झा said...

bhau ........... trasdi hi hai ye....


pranam.

Gautam Kashyap said...

अपने हर लेख मे आप बहुत ही सटीक ढंग से अपनी बात रखते हैं। मैं आपके ब्लॉग का नियमित पाठक हूँ । धन्यवाद ।

Jitesh Kumar said...

सुरेश जी मैं नहीं जनता आपने कितने लोगो को जागरूक किया है लेकिन फेसबुक पर आपसे प्रेरणा लेकर बहुत से लोग राष्ट्र वादी बन चुके है आपकी पोस्ट सच में आँखें खोलती है ऐसे ही लिखते रहे मैं करोडपति होता तो एक मीडिया संसथान बनाता और उसके directer आप होते

दिवाकर मणि said...

काश कि आपके द्वारा दिए गए सुझावों को स्वीकार कर लिया जाए... यदि ऐसा हो जाए तो शायद स्थिति कुछ दूसरी हो.

Desh Premi said...

आपकी बातें भारत में होने वाले सत्य का बोध करवा रही हैं, अब सोच रहा हूँ क्या वाकई में मंदिरों में आगे दान दूँ या चढ़ावा दढ़ाया जाये ? या फ़िर उन रूपयों को अपने उपर ही खर्च कर लिया जाये।
ye to darkar bhagne wali bat hui
samsya se vimukh hone wali bat h
hame apne aap ko or aapne bacho ko ye batana padega ki sach kya h or galat kya h
thanks

Anonymous said...

tajmahal wale baat bahut acchi hi sir ye hona hi chaiye

Anonymous said...

is lekh ko logo tak pahuchaye... sab tak.. print kar ke.. email se kaise bhi.. iska prachar karey.. sujhavo ko janhit mei daaley.. hindu murkh ho gayei hain..aaj ke.

suruat apne bado or bachho se karey aaspas se suruat karey

AnIndianFirst said...

सुरेश जी सादर प्रणाम , आप उत्तर-प्रदेश में राजा महमूदाबाद की संपत्ति का उल्लेक्ष करना भूल गए जिसको शत्रु-संपत्ति घोषित करने के विरुद्ध सारे "सिकुलरिस्ट" मुस्लिम संगठनों के साथ लामबंद हो गए थे ..शायद नवाब और मुस्लिम राजाओं की संपत्ति "सिकुलर" दृष्टि से पुण्य-कर्म से अर्जित की गयी है जबकि हिन्दू राजाओं की संपत्ति और मंदिरों का चढावा "काला-धन" है ...

Anonymous said...

चिपलूनकर जी

जय श्रीसीताराम
मै वेद प्रकाश पाण्डेय
अयोध्या का रहने वाला हूँ
आप के लेख सच मे आँख खोल देने वाले होते है
इसके लिए आपको साधुवाद
pls. mail me i wanna share somthing with u
vedlu94@gmail.com
8953535582
9807603381

Rajesh said...

Wah Suresh Ji Kya jankarai di hai...Excellent Dil Kush ho gaya hai. Aap har baar ek bahtrin jankari dete ho. Dhanywad.

Rajendra Kumar Singh said...

श्रीमान सुरेशजी, आपने बिलकुल ही सच कहा है, आपके सुझाव प्रसंशनीय और अनुकरणीय हैं, परन्तु हमारे इस देश का दुर्भाग्य है िक जिस एकता की आप बात कर रहे हैं वह इस देश में दुर्लभ है| अगर ऐसा होता तो हमारा देश १००० वर्ष लुटेरों (मुस्लमान और अंग्रेजो)का गुलाम न होता|

vishwajeetsingh said...

आदरणीय सुरेश जी नमस्कार
सैक्युलर गिद्धों की दृष्टि से अपने धन व अधिकारो को बचाने के लिए राष्ट्रवादी शक्तियों को साम दाम दण्ड भेद की नीतियों से काम लेना होगा ।
आपके सुप्रीम कोर्ट को सुझाव उत्तम है , कोशिश होने चाहिये कि किसी तरह ये विचार मान्य न्यायाधीशों तक प्रभावी तरीके से पहुँच जाये ।

Saffronization said...

usi sarkar ko support karo jo hindu ka sunti ho..agar aap ko lagta hai ki sabhi ek jaise hai ,galat hai,to jo kam galat hai use chune,badlav hoga., loktantra me hum yahi kar sakte hai..jab tak ki koi desh bhakt dectator na aa jaye..jo is mahan rashtra ko bachaye..hamare gujarat me ek kahavat hai...jab 10 me se 2 musalman ho...to wo apke sath achhe se rahenge.10 me se 4 ho gaye to dadagiri karenge..jab 10 me se 5 ho gaye to bolenge tera kuchh nahi sab hamara...

krishnakumarsoni (RAMBABU) said...

सुरेश जी,
यह हमारी ही कमजोरी है ,क्योकिं हम संघठित नहीं हैं.जिस दिन हम संघठित हो जायेंगे कोई सी भी पार्टी हो ,कोई सी भी सरकार हो उसे हमारे हित में ही निर्णय लेना पड़ेगा, इश्वर हमें संघठित होने की सदबुद्धी दे.हम हमरे तुच्छ निहित स्वार्थों से बाहर निकले.

Raj said...

hamesha court kehta hy vo christan is lower cast hy unko sahayta dene chahiye pur vo financialy kitne bady hy wo ku nahi dekhti,lugtahy ab gandhi ka dunda udhana pudega

Man said...

वन्देमातरम सर ,
फिर एक बार सेकुल्लर जोकरों को नंगा करता लेख ,इन भड्वो की मती ,इनके खून से चलती हे ,ये वर्णसंकर ओलादे दुःख तो देगी ही बीरबल की जेसे ,साले दासी पुत्र हे ये !@@

सुलभ said...

Perfect post. we need to forward it.

Mahendra Gupta said...

Vandemataram guruji!
Aapka sujhav bahut satik aaur sahi hai. Lekin ye sujhav Uchcha Nayayalaya tak jarur pahuchana chahiya iske liya sab koshihs karen. iske liye koi email address bana sakete hai jaha sab apana mat bhej kar samarthan kar sake.
Dhanvad.

सौरभ आत्रेय said...

सपने देखने से कुछ नहीं होगा यह सारा धन निश्चित तौर पर इन सेकुलर अजगरों के पेट में और देश विरोधी कार्यों में ही लगेगा.

Rupesh Mishra said...

supreme court me janhit yachika lagakar sureshji ke sujhov ko vaha tak pahuch sakte hain aur tajmahal ke tehkhano ko bhi kholne ki koshish usi se sambhav hai. kripya koi vakil ho to is par dhyan de. tabhi suresh ji ki mehnat sarthak hogi.ab is mudde ko thande baste me nahi dalna hai.

Rupesh Mishra said...

supreme court me janhit yachika lagakar sureshji ke sujhov ko vaha tak pahuch sakte hain aur tajmahal ke tehkhano ko bhi kholne ki koshish usi se sambhav hai. kripya koi vakil ho to is par dhyan de. tabhi suresh ji ki mehnat sarthak hogi.ab is mudde ko thande baste me nahi dalna hai.

P K SURYA said...

HUM HINDU HAI KHOON KHOL K THANDA PAD JATA HAI RTI KEWAL HUMARE WIRUDH HE USE KIYA JATA HAI HUM KAB RTI KA USE APNE HAQ K LIYE KARENGE SAMAJH SE PARE HAI, SURESH BHAIYA AP EK SACHE INSHAN (HINDU MARD)BAKIYON K BARE ME KYA KAHUN ETNA HE KAFI HAI AP APNA ZYAN BATTE HAIN TO HUME PATA BHI CHALTA HAI, (BAKI DESH KEE SURKSHA KA KACHRA YE SALE HARAMKHOR GADHI NEHRU PARI-WAR NE KAR HE RAKHA HAI)JAY BHARAT

Anonymous said...

यदि आपके पास इतनी जानकारी है तो कोर्ट क्यों नहीं जाते। आपके लेख पर जो लोग टिप्पणी करते हैं वे लोग ज़ुबानी देश प्रेम का दिखावा करते हैं और आँख बचाकर भ्रष्टाचार में आहुति देते हैं। डंडा भाँजने और वंदे मातरम् बोलने से राष्ट्र प्रेम नहीं गैदा होता है। रामदेव को विफल कांग्रेस ने नहीं भाजपा ने किया और उसके बाद जश्न मनाया, सुषमा स्वराज खुशी में ठुमका लगाया। ब्लॉग पर लेख लिखकर वाहलाही लूटना छोड़कर कुछ सारअथक करें और उसकी कहाना लिखें तो बाकी लोग इसका अनुसरण करेंगे। आतंकी हमलों के तार मोदी के गुजरात और भाजपा के मध्य प्रदेश से क्यों? अयोध्या के राम मंदिर के लिए गाँव-गाँव से भेजी गई ईंट और पैसे किस तरह भजपा खा गई इसका ज़िक्र तो कभी नहीं किया आपने। कभी भाजपा के भ्रष्टचार का भी ज़िक्र करें।

Neeraj नीरज نیرج said...

सुरेश जी,

कर्नाटक में आय और खर्च का जो ब्यौरा आपने दिया है. उसकी विश्वसनीयता पर कुछ संदेह है। यह आंकड़े तब सही और होंगे जब इसका स्रोत पता हो। वैसे जो रिसर्च मैंने की है उसके मुताबिक यह आलेख किसी अंजली पटेल का नहीं है। यह संध्या जैन का लेख है जो 12 मई 2005 को पायोनियर में प्रकाशित हुआ था। किंतु यह आनलाइन उपलब्ध नहीं है। जब कभी वहां जाना होगा तो पुष्टी की जाएगी।

Ganesh Prasad said...

सुरेश जी
सबसे पहले तो बहुत बहुत बधाई इतनी अच्छी लेखनी के लिए और सोये हुए हिन्दुयो को जगाने के लिए
ज्यादा कुछ नहीं कहूँगा मई अपने एड्रेस बुक में से तक़रीबन १००० ईमेल पते पर इस पुरे लेख को भेज दिया है और अनुरोध किया है की वो भी लोगो को जागरूक करे

ओह्ह्ह मेरे भगवन इतनी लूट और हिन्दुयो के प्रति इतनी गहरी साजिस .............

गणेश
9313176901

Anonymous said...

सुरेश जी आपका यह लेख सच में आंखे खोल देने वाला है, अब हम सब हिन्दुओ को जागना होगा नहीं तो आने वाले दिनों में गंभीर परिणाम भुगतने होंगे ! जय श्री राम

subhash chand said...

मंदिर मे दान देना बंद कर देना चाहिए!