Monday, June 20, 2011

Rajiv Gandhi Foundation, Trusts, NGOs and Gandhi Family

सम्पत्ति का हिसाब माँगने का अधिकार सिर्फ़ कांग्रेस को है…(सन्दर्भ :- राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन)...... 

जब से बाबा रामदेव और अण्णा हजारे ने भ्रष्टाचार के नाम पर कांग्रेस की नाक में दम करना शुरु किया है, तभी से बाबा रामदेव कांग्रेस के विभिन्न मंत्रियों के निशाने पर हैं। आये दिन उन्हें “व्यापारी”, “ढोंगी”, “भ्रष्ट”, “ठग” इत्यादि विशेषणों से नवाज़ा जा रहा है। कांग्रेस के इस खेल में मीडिया का एक बड़ा हिस्सा और स्वयंभू बड़े पत्रकारों का वह दल भी शामिल है जिन्हें नियमित रूप से कांग्रेस द्वारा “हफ़्ता” पहुँचाया जाता है, कभी कागज के कोटे के रूप में, कभी प्रेस के लिये मुफ़्त (या सस्ती) जमीन के रूप में तो कभी “हो रहा भारत निर्माण…” के विज्ञापनों के नाम पर…


बाबा रामदेव के भारत स्वाभिमान ट्रस्ट (http://www.bharatswabhimantrust.org/bharatswa/)(Bharat Swabhiman Trust)और दिव्य योगपीठ (http://www.divyayoga.com/)(Divya Yog Mandir) के हिसाब-किताब और आय-व्यय का ब्यौरा माँगने में यह स्वनामधन्य और कथित “खोजी पत्रकार”(?) सबसे आगे रहे। इन पत्रकारों की “स्वामिभक्ति” को देखते हुए बाबा रामदेव ने अपने ट्रस्ट की सम्पत्ति घोषित कर दी, साथ ही यह भी बता दिया कि अन्य सभी जानकारी रजिस्ट्रार के दफ़्तर, आयकर विभाग एवं अन्य सभी सरकारी विभागों से प्राप्त की जा सकती है। ये बात और है कि “खोजी पत्रकारों” की, उन दफ़्तरों में जाकर कुछ काम-धाम करने की मंशा कभी नहीं थी, उनका असली काम था “कीचड़ उछालना”, “बदनाम करना” और “सनसनी फ़ैलाना”, इन तीनों कामों में बड़े-बड़े पत्रकार अपने करियर के शुरुआती दिनों से ही माहिर रहे हैं और उन्होंने अपने “मालिक” पर हुए हमले का करारा जवाब बाबा रामदेव को दिया भी… ठीक उसी प्रकार, जैसे उनके मालिक को जूता दिखाने भर से गुलामों ने उस बेचारे की धुनाई कर दी, जो बेचारा चाहता तो उतने समय में चार जूते मार भी सकता था। ऐसी प्रेस कान्फ़्रेंसों में अक्सर “गुलामों” को ही आगे-आगे बैठाया जाता है ताकि “असुविधाजनक” प्रश्नों को सफ़ाई से टाला (टलवाया) जा सके…।

खैर… बात हो रही थी सम्पत्ति का हिसाब माँगने की…। शायद इन बड़े पत्रकारों और स्वनामधन्य “सबसे तेज” चैनलों को इस बात से कोई मतलब नहीं है कि वे कभी यह पता लगाएं कि आज की तारीख में सोनिया गाँधी कितने फ़ाउण्डेशनों, कितने ट्रस्टों, कितने फ़ण्डों की अध्यक्ष, “मानद अध्यक्ष”(?), “ट्रस्टी”, “बोर्ड सदस्य” अथवा लाभान्वितों में हैं। सोनिया गाँधी के “निजी मनोरंजन क्लब” (यानी http://nac.nic.in/ - National Advisory Commission – NAC) में जो एक से बढ़कर एक “NGO धुरंधर” बैठे हैं, कभी उनकी सम्पत्ति और उन्हें मिलने वाले देशी-विदेशी अनुदानों के बारे में जानकारी निकालें, तो आँखें फ़ट जाएंगी, दिमाग हिल जाएगा और कलेजा अन्दर धँस जाएगा। इन पत्रकारों(?) ने कभी यह जानने की ज़हमत नहीं उठाई कि सोनिया गाँधी “अप्रत्यक्ष रूप से” उनमें से कितने NGOs की मालकिन हैं, उन NGOs की सम्पत्ति कितनी है, उन्हें कितना सरकारी अनुदान, कितना निजी अनुदान और कितना विदेशी अनुदान प्राप्त होता है? लेकिन बाबा रामदेव की सम्पत्ति के बारे में चिल्लाचोट करना उनका फ़र्ज़ बनता था…

ऐसा नहीं है कि किसी ने भी सोनिया गाँधी के “मालिकाना हक” वाले इन फ़ाउण्डेशनों और ट्रस्टों के हिसाब-किताब और सम्पत्ति के बारे में जानने की कोशिश नहीं की। सूचना का अधिकार से सम्बन्धित बहुत से स्वयंसेवी समूहों, कुछ “असली खोजी पत्रकारों” एवं कुछ स्वतन्त्र पत्रकारों ने कोशिश की। परन्तु आपको यह जानकर हैरानी होगी कि पिछले 3-4 साल से “माथाफ़ोड़ी” करने के बावजूद अभी तक कोई खास जानकारी नहीं मिल सकी, कारण – केन्द्रीय सूचना आयुक्त ने यह निर्णय दिया है कि राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन (http://www.rgfindia.com/)(Rajiv Gandhi Foundation) तथा जवाहरलाल मेमोरियल फ़ण्ड (http://www.jnmf.in/)(Jawaharlal Memorial Fund) जैसे संस्थान “सूचना के अधिकार” कानून के तहत अपनी सूचनाएं देने के लिये बाध्य नहीं हैं। मामला अभी भी हाइकोर्ट तक पहुँचा है और RTI के सक्रिय कार्यकर्ताओं ने “सूचना आयुक्त के अड़ियल रवैये” के बावजूद हार नहीं मानी है। RGF के बारे में सूचना का अधिकार माँगने पर अधिकारी ने यह जवाब देकर आवेदनकर्ता को टरका दिया कि “राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन सूचना देने के लिये बाध्य नहीं है। यह फ़ाउण्डेशन एक “सार्वजनिक उपक्रम” नहीं माना जा सकता, क्योंकि इस फ़ाउण्डेशन को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कोई सरकारी अनुदान नहीं मिलता है, न ही सरकार की इसमें कोई भागीदारी है और न ही इसके ट्रस्टी बोर्ड के चयन/नियुक्ति में सरकार का कोई दखल होता है… अतः इसे सूचना का अधिकार के कार्यक्षेत्र से बाहर रखा जाता है…”। उल्लेखनीय है कि 21 जून 1991 को पूर्व प्रधानमंत्री के “आदर्शों एवं सपनों”(?) को साकार रूप देने तथा देशहित में इसका लाभ बच्चों, महिलाओं एवं समाज के वंचित वर्ग तक पहुँचाने के लिये राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन की स्थापना की गई थी।

RTI कार्यकर्ता श्री षन्मुगा पात्रो ने सिर्फ़ इतना जानना चाहा था कि RGF द्वारा वर्तमान में कितने प्रोजेक्ट्स और कहाँ-कहाँ पर जनोपयोगी कार्य किया जा रहा है? परन्तु श्री पात्रो को कोई जवाब नहीं मिला, तब उन्होंने सूचना आयुक्त के पैनल में अपील की। आवेदन पर विचार करने बैठी आयुक्तों की पूर्ण बेंच, जिसमें एमएम अंसारी, एमएल शर्मा और सत्यानन्द मिश्रा शामिल थे, ने इस बात को स्वीकार किया कि राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन (RGF) की कुल औसत आय में केन्द्र सरकार का हिस्सा 4% से कम है, लेकिन फ़िर भी इसे “सरकारी अनुदान प्राप्त” संस्था नहीं माना जा सकता। इस निर्णय के जवाब में अन्य RTI कार्यकर्ताओं ने तर्क दिया कि राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन की स्थापना की घोषणा केन्द्र सरकार के वित्त मंत्री द्वारा बजट भाषण में की गई थी। सरकार ने इस फ़ाउण्डेशन के समाजसेवा कार्यों के लिये अपनी तरफ़ से एक फ़ण्ड भी स्थापित किया था। इसी प्रकार राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन जिस इमारत से अपना मुख्यालय संचालित करता है वह भूमि भी उसे सरकार द्वारा कौड़ियों के मोल भेंट की गई थी। शहरी विकास मंत्रालय ने 28 दिसम्बर 1995 को इस फ़ाउण्डेशन के सेवाकार्यों(?) को देखते हुए जमीन और पूरी बिल्डिंग मुफ़्त कर दी, जबकि आज की तारीख में इस इमारत के किराये का बाज़ार मूल्य ही काफ़ी ज्यादा है, क्या इसे सरकारी अनुदान नहीं माना जाना चाहिये? परन्तु यह तर्क और तथ्य भी “खारिज” कर दिया गया।

इस सम्बन्ध में यह सवाल भी उठता है कि राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन को तो सरकार से आर्थिक मदद, जमीन और इमारत मिली है, फ़िर भी उसे सूचना के अधिकार के तहत नहीं माना जा रहा, जबकि ग्रामीण एवं शहरी स्तर पर ऐसी कई सहकारी समितियाँ हैं जो सरकार से फ़ूटी कौड़ी भी नहीं पातीं, फ़िर भी उन्हें RTI के दायरे में रखा गया है। यहाँ तक कि कुछ पेढ़ियाँ और समितियाँ तो आम जनता से सीधा सम्बन्ध भी नहीं रखतीं फ़िर भी वे RTI के दायरे में हैं, लेकिन राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन नहीं है। क्या इसलिये कि यह फ़ाउण्डेशन देश के सबसे “पवित्र परिवार”(???) से सम्बन्धित है?

1991 में राजीव गाँधी के निधन के पश्चात तत्कालीन उपराष्ट्रपति ने राजीव गाँधी के सपनों को साकार करने और लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये एक ट्रस्ट के गठन का प्रस्ताव दिया और जनता से इस ट्रस्ट को मुक्त-हस्त से दान देने की अपील की। 1991-92 के बजट भाषण में वित्तमंत्री ने इसकी घोषणा की और इस फ़ाउण्डेशन को अनुदान के रूप में 100 करोड़ रुपये दिये (1991 के समय के 100 करोड़, अब कितने हुए?)। इसी प्रकार के दो ट्रस्टों (फ़ण्ड) की स्थापना, एक बार आज़ादी के तुरन्त बाद 24 जनवरी 1948 को नेहरु ने “नेशनल रिलीफ़ फ़ण्ड” का गठन किया था तथा दूसरी बार चीन युद्ध के समय 5 नवम्बर 1962 को “नेशनल डिफ़ेंस फ़ण्ड” की स्थापना भी संसद में बजट भाषण के दौरान ही की गई और इसमें भी सरकार ने अपनी तरफ़ से कुछ अंशदान मिलाया और बाकी का आम जनता से लिया गया। आश्चर्य की बात है कि उक्त दोनों फ़ण्ड, अर्थात नेशनल रिलीफ़ फ़ण्ड और नेशनल डिफ़ेंस फ़ण्ड को “सार्वजनिक हित” का मानकर RTI के दायरे में रखा गया है, परन्तु राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन को नहीं…।

राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन को सरकार द्वारा नाममात्र के शुल्क पर 9500 वर्ग फ़ीट की जगह पर एक बंगला, दिल्ली के राजेन्द्र प्रसाद रोड पर दिया गया है। इस बंगले की न तो लाइसेंस फ़ीस जमा की गई है, न ही इसका कोई प्रापर्टी टैक्स भरा गया है। RGF को 1991 से ही FCRA (विदेशी मुद्रा विनियमन कानून 1976) के तहत छूट मिली हुई है, एवं इस फ़ाउण्डेशन को दान देने वालों को भी आयकर की धारा 80G के तहत छूट मिलती है, इसी प्रकार इस फ़ाउण्डेशन के नाम तले जो भी उपकरण इत्यादि आयात किये जाते हैं उन्हें भी साइंस एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च संगठन (SIRO) के तहत 1997 से छूट मिलती है एवं उस सामान अथवा उपकरण की कीमत पर कस्टम्स एवं सेण्ट्रल एक्साइज़ ड्यूटी में छूट का प्रावधान किया गया हैआखिर इतनी मेहरबानियाँ क्यों?

हालांकि गत 4 वर्ष के संघर्ष के पश्चात अब 2 मई 2011 को दिल्ली हाइकोर्ट ने इस सिलसिले में केन्द्र सरकार को नोटिस भेजकर पूछा है कि राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन को RTI के दायरे में क्यों न लाया जाए? उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुम्बई में रिलायंस एनर्जी को भी RTI के दायरे में लाया गया है, इसके पीछे याचिकाकर्ताओं और आवेदन लगाने वालों का तर्क भी वही था कि चूंकि रिलायंस एनर्जी (http://www.rel.co.in/HTML/index.html)(Reliance Energy), आम जनता से सम्बन्धित रोजमर्रा के काम (बिजली सप्लाय) देखती है, इसे सरकार से अनुदान भी मिलता है, इसे सस्ती दरों पर ज़मीन भी मिली हुई है… तो यह जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिये। अन्ततः महाराष्ट्र सरकार ने जनदबाव में रिलायंस एनर्जी को RTI के दायरे में लाया, अब देखना है कि राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन और इस जैसे तमाम ट्रस्ट, जिस पर गाँधी परिवार कुण्डली जमाए बैठा है, कब RTI के दायरे में आते हैं। जब राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन सारी सरकारी मेहरबानियाँ, छूट, कर-लाभ इत्यादि ले ही रहा है तो फ़िर सूचना के अधिकार कानून के तहत सारी सूचनाएं सार्वजनिक करने में हिचकिचाहट क्यों?

बाबा रामदेव के पीछे तो सारी सरकारी एजेंसियाँ हाथ-पाँव-मुँह धोकर पड़ गई थीं, क्या राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन, जवाहरलाल मेमोरियल ट्रस्ट इत्यादि की आज तक कभी किसी एजेंसी ने जाँच की है? स्वाभाविक है कि ऐसा सम्भव ही नहीं है… क्योंकि जहाँ एक ओर दूसरों की सम्पत्ति का हिसाब मांगने का अधिकार सिर्फ़ कांग्रेस को है… वहीं दूसरी ओर अपनी सम्पत्ति को कॉमनवेल्थ, आदर्श, 2G और KG गैस बेसिन जैसे "पुण्य-कार्यों" के जरिये ठिकाने लगाने का अधिकार भी उसी के पास सुरक्षित है… पिछले 60 वर्षों से…
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नोट :- 
1) यह बात भी देखने वाली है कि बाबा रामदेव ने अपने कितने रिश्तेदारों को अपने ट्रस्ट में जोड़ा और लाभान्वित किया और राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन जैसे ट्रस्टों से गाँधी परिवार के कितने रिश्तेदार जुड़े और लाभान्वित हुए…

2) हाल ही में 8 जून से 11 जून 2011 तक गाँधी परिवार के सभी प्रमुख सदस्य, श्री सुमन दुबे एवं राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन के कुछ अन्य सदस्य स्विटज़रलैण्ड की यात्रा पर गये थे, जिनमें से कुछ ने खुद को "फ़ाइनेंशियल एडवाइज़र" घोषित किया था… है ना मजेदार बात?

3) श्री सुमन दुबे के पारिवारिक समारोह में शामिल होने ही राहुल गाँधी केरल गये थे जहाँ उन्हें सबरीमाला मन्दिर में हुई भगदड़ की सूचना मिली थी, लेकिन घायलों/मृतकों को देखने जाने की बजाय युवराज छुट्टी मनाने का आनन्द लेते रहे थे…

49 comments:

आशीष said...

धन्य है खानग्रेस

ROHIT said...

यह तो एक यूनीवर्सल सत्य है.
कि सोनिया गांधी एक बहुत ही चालाक लुटेरिन है. जो भारत मे अपने एक गंदे उद्देश्य के तहत आयी है. और उस गंदे उद्धेश्य को 50 % पूरा भी कर लिया है.
और अमूल बेबी एक चालाक अय्याश है. जो भारतीय जनता की मेहनत की कमाई पर
साल मे सात महिने विदेश मे रहकर अपनी महिला मित्र वेरोनिका के साथ
मौज करता है.


पर दुख की बात ये है कि ये यूनीवर्सल सत्य बहुत कम लोगो को मालूम है.
और भारत की आम जनता तक नही पहुच पा रहा है.

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

वह भाई साहब, क्या खूब कही है आपने...
RGF यदि RTI के अंतर्गत आ गया तो इस महान(?) परिवार की पोल नहीं खुल जाएगी...फिर ये किस मूंह से वोट मांगने आएँगे...
वैसे मैं जानता हूँ कि चाहे कितनी भी बदनामी हो जाए ये बेशर्म परिवार वाले फिर भी भारत निर्माण का नारा लगाते आपसे मुझसे वोट मांगने आ ही जाएंगे...और हम में से कुछ मुर्ख इन्हें जातिवाद व क्षेत्रवाद के नाम पर वोट दे भी देंगे...
बहरहाल आपने बड़ी बारीकी से अध्यन कर यह मुद्दा हमारे समक्ष रखा है...इसके लिए आपका आभार...धीरे धीरे ही सही किन्तु असर हो रहा है...
बेहतरीन पोस्ट...

ROHIT said...

जितनी बाबा रामदेव की कुल संपत्ति है . उतने रुपये तो ये गांधी परिवार की 6 महिने की अय्याशियो का खर्चा है.

Anonymous said...

सुरेश जी, गांधी परिवार के कुछ ट्रस्ट उनके संसदीय क्षेत्र अमेठी व रायबरेली में सक्रिय है तथा कुछ खास आम आदमी पर भारी रकम खच्र करते है इनके आय व्यय का ब्यौरा भी उजागर होना चाहिए यह भी देखा जाना चाहिए कि इनमें दान से मिली रकम काला धन तो नही क्या आयकर विभाग इस बात की जांच करेगा

दिवाकर मणि said...

भाई जी, सोनिया या खानग्रेस से जुड़ी हर चीज RTI से बाहर होनी ही चाहिए. ये सब पवित्र आत्माएं हैं जी...

संजय बेंगाणी said...

मान सकते है शुरूआत तीनमूर्ति भवन से हुई. वहाँ प्रधानमंत्री निवास होता, एक के बाद दुसरे प्र.मं. रह्ते. मगर महान नायक वहाँ रह लिया तो स्मारक बन गया.

सुलभ said...

क्या कीजयेगा कुछ कानो पर जूँ नहीं रेंगती.

पंकज said...

आप की एक और खोजबीन खबर के लिए धन्यवाद ...

BABA said...

AAJ DIVIJAY SING NEY KHA HAI KI>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>
राहुल के दूल्हा और पीएम बनने का समय: दिग्विजय
AAU TO ETNA HI NHI YEH BHI DEKIYE.....
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी रविवार को 41 साल के हो गए। इस अवसर भाजपा नेत्री उमा भारती ने भी राहुल को शुभकामनाएं दी हैं|
EN SAB KO DEKTEY HUA MUJHEY AAP KI BAT EKDAM DHIK LAGTI HAI KI UNMEY P.M. BANNEY KEY SAREY GUN HAI...........
श्री सुमन दुबे के पारिवारिक समारोह में शामिल होने ही राहुल गाँधी केरल गये थे जहाँ उन्हें सबरीमाला मन्दिर में हुई भगदड़ की सूचना मिली थी, लेकिन घायलों/मृतकों को देखने जाने की बजाय युवराज छुट्टी मनाने का आनन्द लेते रहे थे…

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

लगता है आयकर विभाग इस ट्रस्ट की भी जांच करेगा, क्योंकि आज ही अखबार में था कि सभी ट्रस्टों की जांच आयकर विभाग करेगा.

:P

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

मैं यही तो कहता हूं कि मीडिया भी एक पक्ष के रूप में खड़ा है.

Naman said...

POORA KA POORA NEHRU VANSH HI DESH KO BARBAD KARNE KE LIYE HINDUSTAN MEIN BANA HUA HAI YE DOGLE KISM KE INSAN HAI JINKI AATMA AANGRAJIAT MEIN BASTI HAI. JAINHIND

Naman said...

bahi ye parivaar desh ka bantadhar kar ke dam lega. Jiahind

shubhi said...

बहुत बायस्ड हैं आप लेकिन आपकी ऊर्जा और दक्षिणपंथ के साथ आपका जुड़ाव विलक्षण हैं। कृपया अन्ना को न बदनाम करें, रामदेव बाबा से ज्यादा ग्रेस हैं उनमें

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

आप का आभार एक बार फ़िर एक बेहतरीन लेख के लिये

ARUN said...

WE ARE COMMONLY BLAIM EVERYTHINGS TO THOSE BETRAYERS OF OUR BELOVED LAND OF BHARATVARSH LIKE SONIA, DICKVIJAY, KAPIL SUWWAR, MOHAMADN SIGH, CHIDDUBABER AND MANY MANY MORE BUT, ARE'T WE FORGETTING WHO'S BIGGEST CULPRIT OF OUR BHARATVARSH..???
THE PEOPLE OF BHARATVARSH, THOSE WHO WORSHIP,HONOR, DEDICATE AND COMPLETLY SURRENDER THEM SELVES TO THOSE BETRAYERS.... WE CAN NEVER GET TRANSPERANT, CLEAN, HONEST GOVERNMENT UNTIL OUR PEOPLE GET OF KNOWLEDGE AND RISE AT SAME TIME LEAVING ALL DISPUTE BEHIND...
JAI BHARAT...JAI SRI RAM....

अवनीश सिंह said...

आखिर भ्रष्टाचार और काले धन के मामले पर सत्ता में बैठे राजा-रानी और युवराज़ जनता की भावनाओं को कब तक कुचलेंगे। कब तक हम अन्ना और रामदेव रूपी बैसाखी के सहारे इनसे लड़ते रहोगे। उठो जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक लड़ते रहो...

Man said...

वन्देमातरम सर ,
देश के राजनितिक माफिया फेमिली के काली करतूतों और बद इरादों का सही और सटीक विश्लेष्ण करता लेख |स्वीटजरलेंड घूमने थोड़े ही गए थे अपने गुप्त खातो का मेनेजमेंट और सही जगह ठिकाने लगाने गए थे ये राजनितिक माफिया |

AK said...

mujhe lagta hai ki cong ka jo nuksan aapke lekh se hota hai o aur kisi ke khulase se nahi hota

katyayan mishra said...

ek ghar dan? kar ke motilal ne pure desh par pedion tak kabja jama liya kya labh ka sauda hai abhi apne samadhiyoun aur smarakon ke jameen ki keemat ka to andaja hi nahi lagaya ramdev baba ke kul sampati to inki ek samadhi ke hi barabar hogi

Anonymous said...

shandaar. is desh ki bholi bhaali janata kab jagegi.mera bas chale to in sab ko prashant mahasagar mein fek doon, rakta choosak kanhi ke.

Rajesh said...

Bahut hi badiya likha hai Suresh Ji. Aap ese hi likhte rahiye.

Anonymous said...

porwagrh se grsit hai aapka lekh.desh me jitne bhi logo ne bharstachaar ke bal par kala dhan jama kiya hai baba ramdev unme se ek hain.

Mahendra Gupta said...

Vande Ma Taram!
Too good sir. U R Great.
Lekin ye sab baten adhik se adhik logo tak pahuchani chahiya. Main to iska print nikal kar logo ko parne ke liye deta hun. Aap mitro se bhi request hai. aap bhi adhik se adhik logo tak in baton ko pahuchay.
Vande Ma taram!

Anonymous said...

http://visfot.com/home/index.php/permalink/3237.html

पर मायावती का कारनामा है। देखिए वेद खतरे में हैं।

रंजना said...

इन तथ्यों को सार्वजानिक मंच पर लाने के लिए साधुवाद !!!
भारत निर्माण कैसे हो रहा है, यह सबको जानना बहुत ही जरूरी है...

आशा said...

बहुत सार्थक लेख
आशा

Anonymous said...

मुजहे लगता है की ये जो कांग्रेस हे वो गाँधी परिवार को अपने फायदे के लिए प्रयोग करते हे और गांधी परिवार अपने फायदे के लिए कांग्रेस का प्रयोग करते हे.....ये ऐसे कमीने हे जो की किसी के भी सगे नहीं हे.......जब तक इनका आपस में काम निकल रहा हे ये साथ हे उसके बाद तो फिर इश्वर ही जाने..........

anand thebaria said...

सोनिया गाँधी एक कुटिल औरत है जो अपने कुटिल मकसद को पूरा करने के लिए हिंदुस्तान की छाती में बैठी हुई है.हिंदुस्तान जयचंद का देश है,यहाँ का इतिहास गद्दारों से भरा पड़ा है.ये गाँधी के नाम को अपने फायदा के लिए इस्तेमाल करते हैं.आपने अपने प्रयास के द्वारा हमारा जो ज्ञान बढाया है उसके लिए आपको धन्यवाद.

TEJPAL said...

यह तो एक यूनीवर्सल सत्य है.
कि सोनिया गांधी एक बहुत ही चालाक लुटेरिन है. जो भारत मे अपने एक गंदे उद्देश्य के तहत आयी है. और उस गंदे उद्धेश्य को 50 % पूरा भी कर लिया है.
और अमूल बेबी एक चालाक अय्याश है. जो भारतीय जनता की मेहनत की कमाई पर
साल मे सात महिने विदेश मे रहकर अपनी महिला मित्र वेरोनिका के साथ
मौज करता है.


lekin hindustani kab jagenge aur in luteron ko dandit karenge?

शंकर फुलारा said...

इस देश के लिए सबसे बड़ा खतरा कांग्रेस है। ये दीमक की तरह है जिसने देश को अन्दर ही अन्दर खोखला बना दिया है। जैसे उदरकृमि प्राणी को स्वस्थ नहीं रहने देती, जो भी वह खाता पीता है उसे चूस लेती है वैसे ही ये कांग्रेस हमारे देश के लिए हो गयी है।
ये स्थिति आज कल की नहीं अपितु सौ साल से भी अधिक की है। अंग्रेजों ने देश को दो-ढाई सौ साल गुलाम रखा उसमे से अगर, विश्लेषित करें तो १८८५ के बाद कांग्रेस की सहायता से ही वह इस देश पर अपना राज कायम रख सके।

अब; तथाकथित आजादी के बाद, इसने जो लूट मचाई है और आम जनता को मूर्ख बनाने की जो महारत हासिल की है वह अचंभित करने वाली है।
लेकिन अब देश के अधिकांश देशभक्तों को लगने लग गया है कि............

sandy said...

I really appreciate your word , but can u suggest how i can we spread this to many people , please write a post on this matter : how to spread the true word to the common man and at least to the internet using Indians

ePandit said...

ये गाँधी नामधारी ट्रस्ट अंधा बाँटे रेवड़ी फिर-फिर अपने को दे वाले फॉर्मूले पर काम करते हैं जिन्हें कॉंग्रेस ने देश लूटने के लिये ही बना रखा है।

PIYUSH MEHTA-SURAT said...

बहोत खूब ।
पियुष महेता ।
सुरत ।

Anonymous said...

चरैवेति चरैवेति
धेय्य मार्ग पर चले निरन्तर , धेय्य मार्ग पर चले
पृथ्वी सिँह,जिला प्रचारक ,कोटा (राज.)

SANJEEV RANA said...

dhanyawaad sab jaankari ke liye

Anonymous said...

Good Suresh Ji...
Lekin Hamare Desh ki upto 70% Janta illiterate aur garibi rekha ke neeche hai... Yehi Janta 100/- 200/- Rs. ke liye... ya 2-4 whisky ke peg ke liye apna Vote bech deti hai...
Inko nahi maloom ki next 5 years mein wo kaise kaise lutne wale hain..
Bas sidhi si baat hai... Hamare paiso (Jo bhi hum kitne hi prakaar se tax ke roop mein dete hai..) se hi hum par Raaj hota aa raha hai... Suresh Ji Inn logo ko kaise jagayaa jaaye???? Mai'n to apni tarf se Print out nikaal kar apne circle mein baant raha hoon.. iss yakeen ke saath.. ki ek Din to Apna Pura Desh Jaagega.. Aur Congress se Hamesh-2 ke liye chhutkara milega.

Arun said...

jaab Shri Ramchandra banvas ko jaa rahethe, pura ayodhya vasi unke pichhe jaarahe the, ayudhya nagari bahut hi door nikal chukithi, tub prabhu shri Ramchandra mudkar haath jodkar sambodhit kiya "bhaiyo" aur "baaheno" aap sabhi laut jaaiye, taabhi sare "bhai" aur "behno" rote hue vapas chalegaye, per kuchh log rah gaye aur prabhu ko rote hue puchh rahethe ki prabhu hamare liye kya aadesh hai, tabh prabhu ko lagaki unse yeh galti hui hai. prabhu Shri Ram thahre bade dayalu, tabhi prabhu Ramji ne ek vardaan diya ki aap log kalyug me thoda samai raj karenge, aap sabhi dekhle, Mahmodan singh ki team (Khangrace) Jai Hind, Jai Bharat
Jai Shree Ram

Mahender said...

Ye hai khangress ka Bharat looto fund

Anonymous said...

Suresh ji,

The situation of IGNCA (Indira Gandhi National Center of Arts) is worse.

Current value of land is ~ > Rs. 5,000 crores. The trust deed was simply changed and Sonia became owner of the trust.

Dr. MM Singh, our honest PM was a member of the board.

http://knowsoniagandhi.blogspot.com/2009/04/blog-post_9876.html

Lakshay said...

maza aa gaya ...............

Mahendra Gupta said...

Na rone ka dil karta hai no hasne ka dil karta hai.
Jo bacha hai kahin wo bhi n kho jai bas isse dar lagata hai.
Jo secular soye hain unka nind atank lagata hai.
Kangresi jo itli ke hato ki patang hai.
Ye patang Kab Katega bas isko soch kar umang lagta hai.

Aap ke prayas ko salaam.
Vandemataram.

Meenu Khare said...

ham common man kya kar skte hain? bas padh k

Anonymous said...

Hi i like your post very much & would like to read your article in news paper as it should reach to maximum num of ppl....thax...

yogesh sharma said...

mn mere bharat ki dasah dekh ke bahut vyatith hn hindustan ke lye kuch karna chahta hn but samajh nhi aata ki kya karu khn se shuruat karu mere desh aur dharam ko bachane ke lye kuch to karna padega

Ramji said...

Bhaiyaon.... Pichhle kuch samay se saari social networking websites per in so called Ghandi's ke kaale karnamo ka kachha chitta hai... Per ek sawaal maere mann main kaundh raha hai ke itna sab pata chalne ke baad bhi inko vote kaise mil jate hai????

RAJESH CHAUHAN said...

Kya aaj aap mera saath denge ya fir chup hi baithe rahenge, ek sc cast ke sarkari principal dwara banwaye 30000/- ke farzi aay praman patra ki jankari jab maine media ko di to ulta media dwara hi mujhe jaan se maarne ki dhamki di ja rahi hai aur kaha ja raha hai ki media wale hi mere khilaf koi jhoothi report/news banakar mujhe hi jail me dalwa denge.
Kya in reserved category ke logo ka hum khuchh bhi nahi bigaad sakte, ye jo chahe wo kare hamare khilaf yadi hum koi awaz bhi uthate hai to?
maine aapse pahle bhi kaha tha ki aapko har shahar me apna sangthan majboot karna hoga tabhi hum kuchh kar payenge, aaj main akela lad raha hoon aur jaan se maare jaane ki dhamkiya bhi sun raha hoon, lekin mere saath aaj koi bhi nahi hai.
main aaj aap sabhi se madad maang raha hoon yadi iske baad bhi aap meri madad nahi karenge to shayad bhavishya me koi bhi awaz uthane ki himmat nahi karega
dhanyavaad
rajesh chauhan-9479387032

Anonymous said...

Hello Rajesh, it's a sad situation due to most corrupt minds and people thinking for there own selves, to get the nation right either do the extortion/assasination practice on the ministers or follow a leader, a clean mind which cannot be diluted in the act of money. Ramdev baba wasn't able to create a fire a character which could raised any fire among the young blood, anna hazare did but failed to keep it up.
Today the nation wants a leader and not a spineless goon (gunda) who can sell his wife to get a seat in parliament.

We are being ruled by an italian mobster who is and has been stealing since a decade. Who gave her the right i wonder.

What right would she do to the rape victims when the minsiters are doing it in there own cabinets. Politics is dirty and so the law is manipulated.

Decide, what the nation wants today, we see no candidate who can be pure and reformed to run this country. Decide as one can make the commitment, there won't be much time to get the country follow you.