Saturday, June 4, 2011

अत्यधिक व्यस्तता की वजह से ब्लॉगिंग से कुछ दिनों की दूरी, लेकिन फ़ेसबुक पर सक्रिय हूँ……

प्रिय पाठकों, मित्रों एवं शुभचिन्तकों…

विगत 10-12 दिनों से कोई पोस्ट नहीं लिख पाया इसलिये क्षमाप्रार्थी हूँ…। व्यवसायगत व्यस्तताएं, कम्प्यूटरों की तकनीकी खराबी, अनुवाद के कुछ "समय-बाध्य" प्रोजेक्ट्स एवं अन्य कई कारणों से पिछले कुछ दिनों से ब्लॉगिंग दुनिया से दूर हूँ… आशा है कि आप सभी मुझे माफ़ करेंगे…

हालांकि इस दौरान मैं फ़ेसबुक पर सतत सक्रिय रहा हूँ, इसकी एकमात्र वजह यही है कि फ़ेसबुक पर लिखते समय अधिक गहन विश्लेषण, अत्यधिक रिसर्च इत्यादि की आवश्यकता नहीं होती। साथ ही किसी भी समाचार अथवा विचार के दिमाग में आते ही तड़ से चार लाइनें टाइप करके फ़ेसबुक पर डाली जा सकती हैं, जबकि ब्लॉग के साथ ऐसा नहीं है। ऐसा कहा जा सकता है कि यदि ब्लॉगिंग अचार-दाल-रोटी है, तो फ़ेसबुक हॉट-डॉग, 2 मिनट नूडल्स है…

ब्लॉगिंग के मेरे कतिपय फ़ालोवर्स एवं पाठक फ़ेसबुक पर सक्रिय नहीं हैं, जबकि फ़ेसबुक के कुछ मित्रों को मेरा ब्लॉग पढ़ने का समय नहीं मिलता है…। मेरे ब्लॉग के कुछ ऐसे नियमित पाठक जो कि फ़ेसबुक पर या तो हैं ही नहीं, या निष्क्रिय हैं… उनके लिए मैं पिछले 8-10 दिनों में फ़ेसबुक पर लिखे गये छोटे-छोटे (माइक्रो) नोट्स एवं टिप्पणियाँ यहाँ पेश कर रहा हूँ, ताकि उनकी नाराज़गी कुछ कम हो सके…

24 मई - प्रसिद्ध हस्तियों(?) की तिहाड़ यात्रा पर नोट --

सरकार चाहे तो तिहाड़ से भारी मात्रा में राजस्व प्राप्त कर सकती है, कैसे? टिकट लगाकर और प्रचार का तरीका बदलकर - जैसे :-

1) आईये, आईये… कनिमोझी को ज़मीन पर बैठे देखिये, सिर्फ़ 10 रुपये में…। जो बच्चा सलाखों के पीछे कनिमोझी के मुँह पर निशाना लगाकर मूंगफ़ली फ़ेंकेगा, उस परिवार का टिकिट फ़्री…

2) आईये… आईये… भाईयों-बहनों… यूनीटेक के सीईओ को झाड़ू लगाते देखिये, मात्र 5 रुपये…

3) जी हाँ… वन्स अपॉन अ लाइफ़टाइम मौका - आईये, सुरेश कलमाडी को ब्रेड और आलू की सब्जी खाते देखिये, मात्र 3 रुपये, 3 रुपये…

ऐसे कई आकर्षक स्लोगन बनाकर तिहाड़ को एक "विशिष्ट पर्यटन स्थल" बनाया जा सकता है… आप क्या सोचते हैं, एक महीने में सरकार की कितनी इनकम होगी? और इस तरह एकत्रित पैसे का उपयोग क्या किया जाना चाहिये… :)
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साम्प्रदायिक हिंसा रोकथाम बिल पर दिनांक 28 मई को लिखा हुआ नोट -

सोनिया गाँधी के "निजी मनोरंजन क्लब" यानी नेशनल एडवायज़री काउंसिल (NAC) द्वारा सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विधेयक का मसौदा तैयार किया गया है जिसके प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैं-

1) कानून-व्यवस्था का मामला राज्य सरकार का है, लेकिन इस बिल के अनुसार यदि केन्द्र को "महसूस" होता है तो वह साम्प्रदायिक दंगों की तीव्रता के अनुसार राज्य सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप कर सकता है और उसे बर्खास्त कर सकता है…

(इसका मोटा अर्थ यह है कि यदि 100-200 कांग्रेसी अथवा 100-50 जेहादी तत्व किसी राज्य में दंगा फ़ैला दें तो राज्य सरकार की बर्खास्तगी आसानी से की जा सकेगी)…

2) इस प्रस्तावित विधेयक के अनुसार दंगा हमेशा "बहुसंख्यकों" द्वारा ही फ़ैलाया जाता है, जबकि "अल्पसंख्यक" हमेशा हिंसा का लक्ष्य होते हैं…

3) यदि दंगों के दौरान किसी "अल्पसंख्यक" महिला से बलात्कार होता है तो इस बिल में कड़े प्रावधान हैं, जबकि "बहुसंख्यक" वर्ग की महिला का बलात्कार होने की दशा में इस कानून में कुछ नहीं है…

4) किसी विशेष समुदाय (यानी अल्पसंख्यकों) के खिलाफ़ "घृणा अभियान" चलाना भी दण्डनीय अपराध है (फ़ेसबुक, ट्वीट और ब्लॉग भी शामिल)…

5) "अल्पसंख्यक समुदाय" के किसी सदस्य को इस कानून के तहत सजा नहीं दी जा सकती यदि उसने बहुसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के खिलाफ़ दंगा अपराध किया है (क्योंकि कानून में पहले ही मान लिया गया है कि सिर्फ़ "बहुसंख्यक समुदाय" ही हिंसक और आक्रामक होता है, जबकि अल्पसंख्यक तो अपनी आत्मरक्षा कर रहा है)…

इस विधेयक के तमाम बिन्दुओं का ड्राफ़्ट तैयार किया है, सोनिया गाँधी की "किचन कैबिनेट" के सुपर-सेकुलर सदस्यों एवं अण्णा को कठपुतली बनाकर नचाने वाले IAS व NGO गैंग के टट्टुओं ने… इस बिल की ड्राफ़्टिंग कमेटी के सदस्यों के नाम पढ़कर ही आप समझ जाएंगे कि यह बिल "क्यों", "किसलिये" और "किसको लक्ष्य बनाकर" तैयार किया गया है…। "माननीय"(?) सदस्यों के नाम इस प्रकार हैं - हर्ष मंदर, अरुणा रॉय, तीस्ता सीतलवाड, राम पुनियानी, जॉन दयाल, शबनम हाशमी, सैयद शहाबुद्दीन… यानी सब के सब एक नम्बर के "छँटे हुए" सेकुलर… । "वे" तो सिद्ध कर ही देंगे कि "बहुसंख्यक समुदाय" ही हमलावर होता है और बलात्कारी भी…

अब यह विधेयक संसद में रखा जाएगा, फ़िर स्थायी समिति के पास जाएगा, तथा अगले लोकसभा चुनाव के ठीक पहले इसे पास किया जाएगा, ताकि मुस्लिम वोटों की फ़सल काटी जा सके तथा भाजपा की राज्य सरकारों पर बर्खास्तगी की तलवार टांगी जा सके…। यह बिल लोकसभा में पास हो ही जाएगा, क्योंकि भाजपा(शायद) के अलावा कोई और पार्टी इसका विरोध नहीं करेगी…। जो बन पड़े उखाड़ लो…

फ़िलहाल अति-व्यस्तता एवं कम्प्यूटर की खराबी की वजह से विस्तृत ब्लॉग नहीं लिख पा रहा हूँ, परन्तु इस विधेयक के प्रमुख बिन्दु आपके सामने पेश कर दिये हैं… ताकि भविष्य में होने वाले दंगों के बाद की "तस्वीर" आपके सामने स्पष्ट हो सके…

सबसे बड़ी और खतरनाक बात यह है कि NAC के सदस्य देश की जनता द्वारा चुने हुए सदस्य नहीं हैं और उनकी एकमात्र स्वयंसिद्ध "योग्यता" यह है कि वे "सेकुलर" हैं और सोनिया गाँधी के चमचे हैं…। संविधान और चुनी हुई लोकसभा से "ऊपर" की ऐसी शक्तियाँ देश के लिये बेहद घातक हैं…
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काले धन एवं मन-मौन सिंह के सम्बन्ध में (दिनांक 1 जून)

1) काले धन की वापसी के मुद्दे को लेकर जब पिछले दो साल से बाबा रामदेव भारत की हजारों किमी की यात्रा कर रहे थे, तब "मन"मौन सिंह हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे…

2) जब मामला थोडा गरमा गया तो एक गाँधी टोपी को अपने NGO इंडस्ट्री के मोहरों के जरिये आगे बढ़ाकर रामदेव बाबा को नेपथ्य में धकेलने की असफ़ल कोशिश भी हुई…

3) दिमागी रूप से दीवालिया हो चुके "पिग्गी बैंक" की तरफ़ से एक बयान आया कि, अन्ना का अनशन तुड़वाने की तो कोशिश भी की गई, लेकिन रामदेव बाबा को जूस पिलाने कोई भी नहीं आने वाला, वे अनशन का इरादा छोड़ ही दें तो बेहतर…

4) अब जबकि अनशन की दिनांक (4 जून) एकदम सिर पर आन पहुँची है, तो "कर्मठ"(?) और "ईमानदार"(?) मन"मौन" सिंह चिठ्ठी-पत्री का खेल खेल रहे हैं…

5) आखिर आज जब बाबा दिल्ली में उतर ही गये तो सिब्बल, बंसल, प्रणब बाबू सहित कैबिनेट सेक्रेटरी उनसे मिलने और मान-मनौव्वल करने एयरपोर्ट पर चले आये… (अभी तो 4 जून में काफ़ी समय बाकी है, फ़िर भी इतनी घबराहट?)…

"तथाकथित" ईमानदार बाबू से सिर्फ़ इतनी ही अपील है कि काले धन पर कोई "ठोस"कदम(?) तो उठाने की हिम्मत आपमें दिखती नहीं है, सिर्फ़ इतना ही कर दें कि हसन अली के साथ जिन अन्य 16 लोगों के नाम स्विस बैंक ने सरकार को दिये हैं, वही जनता के सामने उजागर कर दें… हम इसी को "पहली किस्त" मान लेंगे…

(हम जानते हैं कि यह पहला कदम उठाने हेतु आपको सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, विश्व बैंक, IMF के अध्यक्ष इत्यादि से अनुमति लेनी पड़ेगी, फ़िर भी…)
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बाबा रामदेव के खिलाफ़ बयानबाजियों और विरोध पर एक नोट -

बाबा रामदेव भगवा पहनते हैं, सभाओं में वन्देमातरम के नारे लगवाते हैं, भारत स्वाभिमान संगठन के झण्डे में "ओ3म" का निशान है - क्या इतने कारण पर्याप्त नहीं हैं दिग्विजय सिंह, लालू यादव इत्यादि को "सुलगने" के लिये?

अतः बाबा रामदेव समर्थकों से अनुरोध है कि - कांग्रेस, दिग्गी, लालू, सिब्बल इत्यादि की "शारीरिक", "भौगोलिक", "सामाजिक", "धार्मिक", "राजनैतिक", "आर्थिक" - सभी प्रकार की मजबूरियों को समझते हुए उनसे सहानुभूति रखें।
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भाजपा की अकर्मण्यता को लेकर लिखा गया नोट -

भाजपा की अकर्मण्यता, निकम्मेपन, मुद्दों को भुनाने की असफ़लता, हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद को क्रमशः भूलते चले जाना तथा "अपने कोर वोट बैंक की उपेक्षा", इन वजहों से उसका "वोट बैंक" काफ़ी खिसक चुका है… जो अन्ततः रामदेव बाबा की झोली में जा गिरेगा। आज भारत के कई जिलों एवं तहसीलों में भारत स्वाभिमान मंच के तहत जो समितियाँ बनी हुई हैं (या बन रही हैं) वही आगे चलकर एक राजनैतिक दल के रुप में परिणत होंगी…। साथ ही मुझे एक क्षीण सी संभावना नजर आ रही है, वह यह है कि बाबा रामदेव जब एक "ठोस राजनैतिक जमीन" बना लेंगे, तब संघ उनका पिछलग्गू बनकर उनकी नाव पर सवार हो जाएगा। हालांकि मेरी मंशा तो यह है कि नरेन्द्र मोदी, बाबा रामदेव, गोविन्दाचार्य और RSS का "समर्पित कैडर" जैसे जमीन से जुड़े लोग मिलकर "एक बड़ी शक्ति" बनें, जिसमें भाजपा के "व्यापारी" और "ड्राइंगरूमी" नेताओं को कतई जगह न मिले…। तात्पर्य यह है कि कांग्रेस तो रसातल में है ही, परन्तु जैसे-जैसे रामदेव बाबा "ऊपर" चढ़ेंगे, वैसे-वैसे भाजपा "नीचे" जाएगी… आपकी क्या राय है?

बाबा रामदेव ने कांग्रेस के लिये जितनी जोर से खतरे की घण्टी बजाई है, वह घण्टी उससे पहले भाजपा के लिये है… यदि अब भी नहीं सुन पाते हैं, तो यह उन दोनों की मर्जी…। भले ही देर से हो, लेकिन जनता तो अपना विकल्प चुन ही लेती है …
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शाहरुख खान द्वारा बाबा रामदेव को "बिन मांगे दी गई सलाह" के अवसर पर -

"श्वानमुख" खान (सॉरी शाहरुख खान) ने रामदेव बाबा को जो नसीहत दी है, तात्कालिक रुप से उसके दो कारण समझ में आते हैं -

पहला तो यह कि उसे प्रियंका गाँधी के बच्चों (यानी भारत के भविष्य के शासकों) को खुश करना है और दूसरा यह कि फ़िल्मों से सन्यास के बाद मुरादाबाद, आजमगढ़ या मालेगाँव की लोकसभा सीट के लिये कांग्रेस से अपना दावा मजबूत करना…।

शाहरुख खान ने - "जिसका जो काम है वह वही काम करे…दूसरे के काम में टांग न अड़ाये" ऐसा इसलिये कहा है ताकि वह स्वयं पाकिस्तान की मदद के लिये लन्दन में कमर मटकाए, तथा KKR टीम में शोएब फ़कतर और शाहिद फ़करीदी तथा वसीम फ़करम को भर सके…।

तात्पर्य यह कि, श्वानमुख खान के अनुसार "अपना-अपना काम" का मतलब यही है कि कांग्रेस भ्रष्टाचार करती रहे…, प्रियंका के बच्चों को प्रधानमंत्री बनवाए…, विजय माल्या पूरे भारत को दारु में नहलाए तथा नंगी-पुंगी लड़कियों के कैलेण्डर बनाए…, भाजपा सिर्फ़ बयान जारी करे और चिंतन बैठक करे…, ममता बैनर्जी मुस्लिम वोटों को तेल लगाकर बंगाल को मुस्लिम-बहुल बनाने में मदद करें…, इसी प्रकार रामदेव बाबा सिर्फ़ योग करें…, आदि-आदि-आदि…।
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सेकुलरों द्वारा बाबा रामदेव के आंदोलन को समर्थन देने या न देने के सोचविचार के सम्बन्ध में कमेण्ट्स

1) यह इतना आसान नहीं है, जैसा कि मैने कहा "भगवा कपड़ा", "वन्देमातरम का उदघोष" और "ओम" का निशान देखकर कुछ लोग वैसे ही भड़कते हैं जैसे लाल कपड़े को देखकर……………। अन्ना हजारे को जो "मीडिया प्रायोजित" और "मोमबत्ती ब्रिगेड" का समर्थन मिला था वह तभी और जोर पकड़ा, जब उनके मंच के पीछे स्थित भारत माता के चित्र में से भगवा झण्डा और "अखण्ड भारत के नक्शे" को हटा दिया गया…। अब आप ही सोच लीजिये, क्या स्थिति है, कितना बिखराव है, क्या मानसिकता है और कितने गहरे मतभेद हैं…। अन्ना द्वारा नरेन्द्र मोदी की तारीफ़ करते ही सेकुलरों के जो "पेटदर्द" उठा था, उसे देखते हुए रामदेव बाबा को समर्थन मिलना मुश्किल है… कारण वही हैं जो पहले बताये… भगवा-वन्देमातरम और ओम निशान… :) :) 


2) वैसे एक बात अच्छी हो रही है, कि रामदेव बाबा के आंदोलन के कारण कई चेहरे, भारत के ठेठ ग्रामीण स्तर तक बेनकाब होते जा रहे हैं… जैसे दिग्विजय सिंह, अब अग्निवेश… कल कोई और होगा…। रामदेव बाबा का आंदोलन भले ही असफ़ल हो जाए, लेकिन "सेकुलरिज़्म" बड़ा मुद्दा, या भ्रष्टाचार बड़ा, यह बात यदि आम जनता के दिलो-दिमाग में बैठ जाये तो आगे का काम आसान हो… :) :) बस दिग्विजय, लालूप्रसाद, अग्निवेश इत्यादि की बयानबाजी अगले कुछ दिन और जारी रहे… तो इसमें 2-4 लोग और कूदेंगे तब फ़िर सेकुलरिज़्म Vs भ्रष्टाचार के बीच ध्रुवीकरण करना आसान होगा…
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तो मित्रों… समय की कमी की वजह से फ़ेसबुक पर छोटे-छोटे टीप लिखना आसान है, इसलिये फ़िलहाल उधर सक्रिय हूँ… थोड़ा फ़ुर्सत मिले तो फ़िर इधर भी विस्तार से कुछ लेख डालने हैं। ब्लॉग के जो पाठक फ़ेसबुक पर नहीं हैं, वे चाहें तो मुझसे उधर इस पते पर मिल सकते हैं… 


https://www.facebook.com/home.php#!/profile.php?id=604822887 




16 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बाबा ने बजा दिया तूम्बा... असली सेकुलर तो बाबा है बाकी सब नाटक करते हैं, सेकुलर का लेवल चिपकाकर घोर साम्प्रदायिक नीतियां बनाते हैं. हिन्दुओं की आंखें कभी खुलेंगी?

shilpa mehta said...

अब अनशन के ड्रामे करने वाले द ग्रेट कोंग्रेसी नेता - जो गाँधी जी के तरीकों की तारीफें करते थकते ना थे - उनके दिग्गी जी कहते हैं कि यदि हम डरते होते तो बाबा को जेल में डाल देते | बाबा ने भी खूब चुटकियाँ लीं !! इसी विषय पर दीपक बाबा के ब्लॉग पर भी पोस्ट है - वहां भी कमेन्ट लिख आये हम सब - लेकिन होगा कुछ?? पता नहीं !! हमारे सरकारी पदों पर बैठे लोग ग्रेट हैं | अन्ना जी के अनशन के बाद कमिटी पर राजी हो गए | फिर - उन सभी कमिटी मेम्बर्स पर आरोपों की बौछारे बरसीं जैसे कमिटी में शामिल वे लोग अचानक कल ही प्रकटे हों | क्यों - यदि वे लोग सच में गड़बड़ी कर रहे थे - तो आपकी सरकार अब तक सोई थी क्या ? और नहीं कर रहे थे - तो यह आरोपों की वर्षा क्यों? दिग्गी जी इलज़ाम लगाने लगे | एक ड्रामा हुआ के सत्ता पार्टी की अध्यक्ष जी ने फटकारा है - तो दिग्गी जे ने कहा - कि "मैंने थोड़े ही कहा कि .... ये , और , मैंने थोड़े हे कहा कि .... वो " और यह कह कह कर क्या क्या ना कह दिया ! कोइ बोले " अन्ना चुनाव लड़ें - फिर मनमर्जी करें " अर्थात - कहने वाले महाशय चुनाव मन मर्जी करने के लिए ही लड़ते हैं, घपले करने का लाइसेंस पाने के लिए | किसी ने कहा - भगवा पहन कर बाबा रामदेव पोलिटिक्स क्यों करते हैं - इससे परहेज़ करें | क्यों ? संविधान में लिखा है क्या कि यदि आप हिन्दू भगवा धरी हैं तो राजनीति नहीं कर सकते? सिर्फ भ्रष्ट लोग ही आ सकते हैं इस लाइन में? राईट टू इक्वालिटी का क्या हुआ?

मेरा सूरतगढ said...

इस पुरे विधेयक को पढ़ कर तन-मन में आग लग गई इस विधेयक ने तो पुरे हिंदू समाज, सेना. पुलिस और यहाँ, तक की संविधान तक की ऐसी-तैसी कर दी है अब तो बात बर्दास्त से बाहर वाली है......................... जय हो माता सोनिया !!!!!!!!!!

Kajal Kumar said...

ट्विट्टर में तो फ़ेसबुक से भी कम में ही काम चल जाता है :)

दीपक बाबा said...

सिर्फ़ 10 रुपये में…

सुरेश जी रेट कम लगा दिया .......... लोग एक बखत का खाना नहीं खायेंगे पर इनको देखने के लिए १०० रुपे का टिकट भी लेंगे....... सरकार पहल तो कर ....


@"श्वानमुख" खान
:)


@मन"मौन" सिंह चिठ्ठी-पत्री का खेल खेल रहे हैं…
जितनी इज्जाजत मिलेगी .. उतना ही तो खेलेंगे ........ दिल्ली में कहा जाता है : मोम बोयज़


भगवा पहन कर बाबा रामदेव पोलिटिक्स क्यों करते हैं - इससे परहेज़ करें | क्यों ? संविधान में लिखा है क्या कि यदि आप हिन्दू भगवा धरी हैं तो राजनीति नहीं कर सकते? सिर्फ भ्रष्ट लोग ही आ सकते हैं इस लाइन में? राईट टू इक्वालिटी का क्या हुआ?

इ सब अपनी पोस्ट में लिखे हैं... --

Udan Tashtari said...

बड़ी तसल्ली मिली जानकर कि फेसबुक पर सक्रिय रहोगे...यहाँ भी जल्दी ही आ जाना लौट कर. शुभकामनाएँ.

Inder singh said...

Suresh ji, lot of thanks for such a important and national value having post.
Aaj ki news padhkar itihas yaad aa gaya, lag raha hai, HISTORY REPEATS ITSELF. Itihas mein padha tha power ke nashe mein chur magadh ke raja ne chankya ko INSULT kiya tha, wahi chankya NANDA vansh ka vinash bana tha. Aaj Baba Ramdev k apman ne Soniya and congress ke andhe shashan ke khatm hone ki patkatha likh di hai. Bharatvash mein jab jab sanyashi samaj ka margdarshan karne aage aayen hai tab tab Bharatvash ne unnati ka shikhar chhua hai.

Anonymous said...

Aapki post last 2 months se padh raha hun kafi new knowledge mili hai.
Main ek Rasthrawadi Hindu, aur mujhe garv hai ki main Hindu hun. Main abhi medical(mbbs final yr) ka student hun काशी हिन्दु विश्वविद्धालय mein, proper pokharan, jaisalmer, rajasthan ka rahne wala hun.

सुलभ said...

फेसबुक मैसेज सबस्क्राइब कर रखा है. अत: आपका सन्देश मिलता रहा. फिर भी ब्लॉग पर सम्पूर्ण सारगर्भित पोस्टों का इंतज़ार रहता है.
यहाँ उल्लेखित सभी मुद्दे गंभीर हैं और दूर दूर तक जनता को समझने की जरुरत है.

Shyam Arya said...

Before I could read your blog, under the instruction of Soniya, Sibbal has cheated Baba Ram Dev and by using police force attacked and assaulted Satyagrahi & arrested Baba Ram Dev in mid night.The Congress Govt. left behind the British Govt.It is black day and bloody spot on Congress.There is huge black money of Soniya, Rahul and Priyanka in Itali.As such Soniya is against the demand of declaring black money as of the Nation Asset, because she never acted as Bhartiya. She was ready to left the country in 1977 but under the direction of her foreign "Aaka" she remained here. Shyam Arya

Samir Jain said...

Suresh Ji,AApke Face book account ko shyaad watch kiya jaa raha hai..kyunki maine face book mai aapke page ko poadhna chaha tou browser error show kerta hua band ho gaya aur msg details mei aaya shyad
IP address treck ho raha hai?????

चन्द्र प्रकाश दुबे said...

हमारे देश के लिए इससे बुरी बात और क्या हो सकती है है की एक विक्षिप्त राजनेता ( दिग्विजय सिंह) के लिए ओसामा "जी " है जबकि रामदेवबाबा ठग हैं. ये तुष्टिकरण की चमचागिरी देश को रसातल में ले जा चुकी है , फिर भी हम चेत नहीं रहें है. आज बाबा एक सोच है , एक प्रतीक हैं. देर सबेर उन्हें भी कांग्रेस के घटिया षड़यंत्र का शिकार होना पड़ेगा.

चन्द्र प्रकाश दुबे said...

हमारे देश के लिए इससे बुरी बात और क्या हो सकती है है की एक विक्षिप्त राजनेता ( दिग्विजय सिंह) के लिए ओसामा "जी " है जबकि रामदेवबाबा ठग हैं. ये तुष्टिकरण की चमचागिरी देश को रसातल में ले जा चुकी है , फिर भी हम चेत नहीं रहें है. आज बाबा एक सोच है , एक प्रतीक हैं. देर सबेर उन्हें भी कांग्रेस के घटिया षड़यंत्र का शिकार होना पड़ेगा.

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

आदरणीय सुरेश भाई आपके लगभग यह सभी पोस्ट मैंने फेसबुक पर पढ़े हैं...
और अभी दिल्ली में तानाशाही कांग्रेस की बर्बरता भी अपनी आँखों से देखता आ रहा हूँ...
६ जून की शाम ही पुन: जयपुर पहुंचा हूँ...आन्दोलन में मैंने अपने शरीर पर तीन लाठियां खाई हैं...
इस आन्दोलन का आँखों देखा हाल मैंने अपने ब्लॉग पर लिखा है...समय मिले तो कृपया एक दृष्टि अवश्य डालें...
http://pndiwasgaur.blogspot.com/2011/06/blog-post_07.html

Anonymous said...

बाबा रामदेव प्रकरण पर कुत्तो का भौकना जारी है.
क्रपया आप एक धमाकेदार लेख लिखकर कुत्तो का मुहँ बंद करे.

katyayan mishra said...

suresh ji hindu santo ko marana aur osama ko samman dena hi congress ki ranniti hai kyon ki hindu to gadhon ki tarah vote deta hai musalman use hi vote dega jo hinduon ke ahit ki baat karega kal chidu home minister kah raha tha ki baba ke andolan ki bhumika nagpur mein bani thi rss aur vhp unke saath hain jaise nagpur nahi koi pakistan mein yogana bani ho aur rss nahi lashkar ne baba ka sath de diya ho jo hindu hit ki deshbhakti ki bat bhi karega uska hal baba jaisa hoga jo sansad par hamala karega mumbai mein nirdosh logon ko marega uski ye sarkar awbhagat karegi aur jaise chne hue pratinidhi ke alawa kise ko apani baat kahene ka adhikar hi nahi hai ek bar chun liya to raja ji kuch bhi karen ap virodh nahi karenge baba sena banayen aur corrupt politicians ko sabak sikhayen