Friday, June 10, 2011

अब अन्ना के आंदोलन को निपटाने की बारी आई है… Anna Hajare, Baba Ramdev, Anti-Corruption Movement

जैसी कि उम्मीद थी, राजघाट पर अन्ना ने 8-10 घण्टे का "दिखावटी अनशन" करके वापस बाबा रामदेव के आंदोलन को पुनः हथियाने की कोशिश कर ली है। "टीम अन्ना"(?) के NGO सदस्यों ने अन्ना को समझा दिया था कि बाबा रामदेव के साथ "संघ-भाजपा" हैं इसलिये उन्हें उनके साथ मधुर सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए, रही-सही कसर साध्वी ॠतम्भरा की मंच पर उपस्थिति ने पूरी कर दी, इस वजह से अन्ना ने बाबा रामदेव के मंच पर साथ आने में टालमटोल जारी रखी…। 8 जून को भी राजघाट पर अन्ना के सहयोगियों ने अन्ना को “समझा” कर रखा था कि, वे सिर्फ “रामलीला मैदान की बर्बर घटना” का विरोध करें, रामदेव का समर्थन नहीं… (अप्रैल की घटनाएं सभी को याद हैं जब अन्ना हजारे ने बाबा रामदेव को लगभग उपेक्षित सा कर दिया था और मंच के पीछे स्थित भगवा ध्वज थामे भारत माता का चित्र, अखण्ड भारत का लोगो भी हटवा दिया था, क्योंकि वह चित्र "संघ" से जुड़ा हुआ है) यहाँ पढ़ें… http://blog.sureshchiplunkar.com/2011/04/anna-hazare-jan-lokpal-bill-secularism.html। अतः राजघाट पर अन्ना ने रामदेव के साथ हुए व्यवहार की घोर निंदा तो की, लेकिन रामदेव का समर्थन करने या न करने की बात से कन्नी काट ली।


वैसे तो पहले ही कांग्रेस, जन-लोकपाल के लिए गठित साझा समिति की बैठकों में अन्ना हजारे के साथियों को अपमानित करने लगी थी और फ़िर सरकार के अंदर साझा सहमति बन गयी थी कि पहले रामदेव बाबा को अन्ना हजारे के जरिये "माइनस" किया जाए, वही किया गया, मीडिया के जरिये अन्ना हजारे को "हीरो" बनाकर। फ़िर बारी आई रामदेव बाबा की, चार-चार मंत्रियों को अगवानी में भेजकर रामदेव बाबा को "हवा भरकर" फ़ुलाया गया, फ़िर मौका देखकर उन्हें रामलीला मैदान से भी खदेड़ दिया गया। भ्रष्टाचार और काले धन के मुद्दे पर घिरी तथा एक के बाद एक “प्रभावशाली” व्यक्तियों की “तिहाड़ यात्रा” की वजह से कांग्रेस “कुछ भी कर गुज़रने” पर आमादा है, अतः पहले अण्णा को मोहरा बनाकर आगे करने और फ़िर बाबा रामदेव को “संघ-भाजपा” की साजिश प्रचारित करने की इस “कुटिल योजना” में सरकार अब तक पूरी तरह से सफल भी रही है। ये बात और है कि "सेकुलरजन" यह बताने में हिचकिचाते हैं कि यदि इस आंदोलन के पीछे संघ का हाथ है तो इसमें बुराई क्या है? क्या संघ को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का समर्थन करने का भी हक नहीं है???

वैसे कांग्रेस, मीडिया और NGO गैंग के हाथों की कठपुतली बनकर अण्णा हजारे ने रामदेव बाबा के आंदोलन को पलीता लगा दिया है। जनवरी-फ़रवरी में जब बाबा रामदेव ने अन्ना सहित सभी वर्गों को दिल्ली में एक मंच दिया था, तब उन्हें नहीं पता था कि यह अन्ना जिन्हें महाराष्ट्र के बाहर कोई पहचानता भी नहीं है, और जिसे "अत्यधिक भाव देकर" वे राष्ट्रीय मंच दिलवा रहे हैं, वही एक दिन पीठ में छुरा डालेंगे, लेकिन ऐसा ही हुआ। भले ही इसके जिम्मेदार व्यक्तिगत तौर पर अन्ना नहीं, बल्कि अग्निवेश और भूषण-केजरीवाल जैसे सेकुलर NGO वीर थे, जिन्होंने अन्ना को बरगला कर रामदेव के खिलाफ़ खड़ा कर लिया, परन्तु हकीकत यही है कि पिछले एक साल से पूरे देश में घूम-घूमकर बाबा रामदेव, जो जनजागरण चलाये हुए थे उस आंदोलन को सबसे अधिक नुकसान अन्ना हजारे (इसे "सेकुलर" सिविल सोसायटी पढ़ें) ने पहुँचाया है। ज़ाहिर है कि कांग्रेस अपने खेल में सफ़ल रही, पहले उसने अन्ना को मोहरा बनाकर बाबा के खिलाफ़ उपयोग किया, और अब बाबा को ठिकाने लगाने के बाद अन्ना का भी वही हश्र करेगी, यह तय जानिए। जैसा सिविल सोसायटी वाले चाहते हैं, वैसा जन-लोकपाल बिल अब कभी नहीं बनेगा… और काले धन की बात तो भूल ही जाईये, क्योंकि यह मुद्दा "भगवाधारी" ने उठाया है, और संघ-भाजपा-भगवा ब्रिगेड जब 2+2=4 कहती है तो निश्चित जानिये कि कांग्रेस और उसके लगुए-भगुए इसे 2+2=5 साबित करने में जी-जान से जुट जाएंगे…

यह सब इसलिये भी हुआ है कि एक भगवाधारी को एक बड़ा आंदोलन खड़ा करते और संघ को पीछे से सक्रिय समर्थन देते देखकर कांग्रेस, वामपंथियों और "सो कॉल्ड सेकुलरों" को खतरा महसूस होने लगा था, और रामदेव बाबा के आंदोलन को फ़ेल करने के लिये एक "दूसरों के कहे पर चलने वाले गाँधीटोपीधारी ढपोरशंख" से बेहतर हथियार और क्या हो सकता था…। अब अण्णा हजारे को “निपटाने” की पूरी पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी है, अव्वल तो कांग्रेस अब अण्णा को वैसा “भाव” नहीं देगी जो उसने अप्रैल में दिया था, यदि जन-दबाव की वजह से मजबूरी में देना भी पड़ा तो जन-लोकपाल के रास्ते में ऐसे-ऐसे अड़ंगे लगाये जाएंगे कि अण्णा-केजरीवाल-भूषण के होश फ़ाख्ता हो जाएंगे, अग्निवेश तो “दलाल” है सो उसको तो “हिस्सा” मिल चुका होगा, इसलिये उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा। (भगवा पहनने वालों का क्या हश्र होता है, यहाँ पढ़ें… http://blog.sureshchiplunkar.com/2011/04/sadhvi-pragya-malegaon-bomb-blast-sunil.html

बाबा रामदेव का विरोध करने वालों में अधिकतर इसलिये विरोध कर रहे थे, क्योंकि वे “भगवाधारी” हैं, जबकि कुछ इसलिये विरोध कर रहे थे कि उनके अनुसार बाबा भ्रष्ट हैं और वे भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन का नेतृत्व नहीं कर सकते।

पहली श्रेणी के “सेकुलर” तथा “भगवा-रतौंधी” के शिकार लोग दरअसल कांग्रेस को विस्थापित करना ही नहीं चाहते, वे यह बात भी जानते हैं कि वामपंथियों और कथित तीसरी शक्ति की हैसियत कभी भी ऐसी नहीं हो पाएगी कि वे कांग्रेस को विस्थापित कर सकें… परन्तु कांग्रेस ने “शर्मनिरपेक्षता” की चूसनी उनके मुँह में ऐसी ठूंस रखी है कि वे भाजपा-संघ-हिन्दूवादी ताकतों का कभी समर्थन नहीं करेंगे चाहे कांग्रेस देश को पूरा ही बेच खाए। जबकि दूसरी श्रेणी के लोग जो बाबा रामदेव का साथ इसलिये नहीं दे रहे क्योंकि वे उनको भ्रष्ट मानते हैं, वे जल्दी ही यह समझ जाएंगे कि अण्णा को घेरे हुए जो NGO गैंग है, वह कितनी साफ़-सुथरी है। यह लोग कभी नहीं बता पाएंगे कि कांग्रेस से लड़ने के लिये “राजा हरिश्चन्द्र” अब हम कहाँ से लाएं? बाबा की सम्पत्ति की जाँच करवाने वालों और उन पर धन बटोरने का आरोप लगाने वालों को संसद में शहाबुद्दीन, पप्पू यादव, फ़ूलन देवी जैसे लोग भी स्वीकार्य हैं, साथ ही शकर माफ़िया और क्रिकेट माफ़िया का मिलाजुला रूप शरद पवार, विदेशी नागरिक होते हुए भी सांसद बन जाने वाला एम सुब्बा और अमरसिंह जैसा लम्पट और दलाल किस्म का व्यक्ति भी स्वीकार्य है, परन्तु बाबा रामदेव के पीछे समर्थन में खड़े होने पर पेटदर्द उठता है।

रामदेव बाबा को निपटाने के बाद अब कांग्रेस अण्णा और सिविल सोसायटी को निपटाएगी…। फ़िर भी अण्णा के साथ वैसा “बुरा सलूक” नहीं किया जाएगा जैसा कि रामदेव बाबा के साथ किया गया, क्योंकि एक तो अण्णा हजारे “भगवा” नहीं पहनते, न ही वन्देमातरम के नारे लगाते हैं और साथ ही उन्होंने बाबा रामदेव के आंदोलन को भोथरा करने में कांग्रेस की मदद भी की है… सो थोड़ा तो लिहाज रखेगी।

यदि गलती से भविष्य में किसी “गाँधीटोपीधारी” या “वामपंथी नेतृत्व” में कांग्रेस के खिलाफ़ कोई बड़ा आंदोलन खड़ा होने की कोशिश करे (वैसे तो कोई उम्मीद नहीं है कि ऐसा हो, फ़िर भी) तो हमारा भी फ़र्ज़ बनता है कि उसे टंगड़ी मारकर गिराने में अपना योगदान दें…। क्योंकि यदि उन्हें “भगवा” से आपत्ति है तो हमें भी “लाल”, “हरे” और “सफ़ेद” रंग से आपत्ति करने का पूरा अधिकार है…। यदि उन्हें बाबा रामदेव भ्रष्ट और ढोंगी लगते हैं तो हमें भी उनके गड़े मुर्दे उखाड़ने, “सेकुलरिज़्म” के नाम चल रही दुकानदारी और देशद्रोहिता तथा उनकी कथित “ईमानदारी”(?) और “लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं” की असलियत जनता के सामने ज़ाहिर करने का हक है…

37 comments:

anusoni said...

kya bat he suresh ji pura ka pura live telicast kar diya ..............



kher abhi bhi kuch umid bachi he

Shyam Verma said...

One more point to be added -
http://parshuram27.blogspot.com/2011/06/blog-post_06.html

anusoni said...

अब कांग्रेस अण्णा और सिविल सोसायटी को निपटाएगी…। फ़िर भी अण्णा के साथ वैसा “बुरा सलूक” नहीं किया जाएगा जैसा कि रामदेव बाबा के साथ किया गया, aankh khol di

Ratan Singh Shekhawat said...

बैठक में न जाने का फैसला करने वाला अन्ना सरकार की एक घुड़की मैं ही बैठक में जाने को तैयार हो गया अब १६ अगस्त से भी देख लेते है कैसा आन्दोलन करता है अन्ना अपनी मण्डली के साथ |

जितन सिंह said...

सुरेशजी सिर्फ एक ही प्रश्न यह राज ठाकरे (एमएफ़ हुसेन को याद करने वाले) का फोटो किस लिए ?

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

यदि जनता अभी नहीं चेती तो कभी नहीं चेत पायेगी. ऐसे महामानव कई सदियों में जन्म लेते हैं.

मनोज भारती said...

उम्मीद की जानी चाहिए सत्य की जीत होगी। कांग्रेस सरकार जो खेल खेल रही है...उसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा। देश के बुद्धिजीवियों से अपेक्षा की जानी चाहिए कि वे किसी भी वाद को छोड़ कर सत्य का साथ दें और सत्य को इस स्तर तक उठाने में बाबा रामदेव का बहुत बड़ा हाथ है...उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे न केवल सार्थक हैं, बल्कि देश के आखिरी नागरिक से जुड़ें हैं और वह बाबा के साथ है...अब जरूरत है तो मीडिया को उस आखिरी नागरिक की ध्वजा लहराने वाले बाबा के साथ खड़े होकर...उसकी बात को जन-जन तक पहुँचाने की...ताकि यह आन्दोलन तब तक जारी रहे जब तक कि देश का धन देश में नहीं आ जाता। ...हमारा मीडिया बहुत खराब हो चुका है...यह भी ताकतवर के साथ खड़ा होता है...मीडिया का काम सत्य की रिपोर्ट करना होना चाहिए न कि ताकतवर की सपोर्ट ...मीडिया लोगों को बरगलाने में सरकार के साथ खड़ा दिखाई देता है...

ROHIT said...

जो बात मेरे मन मे थी वो आपने सही तरीके से कह दी.
कांग्रेस से
ज्यादा गुस्सा तो मुझे अन्ना हजारे पे आ रहा है.

जिस अन्ना हजारे एण्ड कंपनी को बाबा रामदेव अपने योग शिविरो और रैलियो मे ले जा जाकर जनता से रुबरु करवाते रहे.

महाराष्ट्र से बाहर मंच दिया.
उस अन्ना हजारे ने बाबा रामदेव को धोखा दे दिया.

बाबा रामदेव ने पूरे देश मे दिन रात घूम घूम कर कितनी मेहनत की थी.
लेकिन उस मेहनत को पहले शक्ल से ही धूर्त और चालाक अग्निवेश के बहकावे मे आकर अन्ना ने पानी फेरा. उसके बाद इस कांग्रेस ने महाषडयंत्र रचा. और बाकि कसर इस बिके मीडिया ने पूरी की.

बाबा रामदेव की केवल इतनी गलती है कि वो भोले भाले बहुत है. उनमे चालाकी नही है. इसीलिये न वो अन्ना एण्ड पार्टी को समझ पाये और न कांग्रेस के महाषडयंत्र को.
अन्ना एण्ड पार्टी कितनी चालाक है.
आठ जून को जो अनशन रामलीला मैदान मे हुयी बर्बरता के खिलाफ किया था.
उस पूरे अनशन मे एक बार भी बाबा रामदेव का नाम नही लिया.

ROHIT said...

और जो अन्ना पार्टी मंच पर त्रतम्भरा के बैठने से बहुत नाक सिकोड़ रही थी.

उससे कोई पूछे कि वो 27 फरवरी की बाबा की रामलीला मैदान मे हुयी रैली मे त्रतंम्भरा के साथ कैसे मंच पर बैठ गये.

क्यो कि तब इन लोगो को बाबा रामदेव के सहारे अपनी पहचान बनानी थी.

संजय @ मो सम कौन ? said...

किसी पोस्ट पर एक कमेंट देखा था जिसमें कहा गया कि हरिद्वार में लाठीचार्ज नहीं होगा जब तक वहाँ बाबा भक्त मुख्यमंत्री हैं। कितने व्यथित हैं लोग बाग?
रामदेव के बहाने धर्मनिरपेक्ष, पगतिशील, उदारवादी लोगों को एक और मौका मिल गया अपने संघ, भगवाधारियों को गरियाने का।

PADMSINGH said...

आपने तो पोल ही खोल के रख दी...
जिस समय दिल्ली की सेकुलर सरकार बाबा को तडीपार कर के हरिद्वार भेज रही थी, पुलिसिया बर्बर कार्यवाही के प्रति देश की लगभग सभी प्रमुख पार्टियाँ इसकी भर्त्सना कर रही थीं, स्वामी अग्निवेश कपिल सिब्बल के घर पर चाय की चुस्कियाँ ले रहा था, अब सरकार और रामदेव बाबा के बीच दलाली करने के लिए चिदंबरम को तेल लगा रहा है...जिस तरह से सरकार बाबा के पीछे हाथ धो कर पड़ी हुई है और अनशन को लेकर बेशरम बनी हुई है उससे सरकार की मंशा तो साफ़ है ही, लेकिन भीतर भीतर कई और गुल खिलाए जा रहे हैं...मै अन्ना के अनशन में पूरा दिन रहा लेकिन एकबार भी बाबा के स्वास्थ्य और और अनशन के बारे में बातें नहीं हुई... मीडिया भी आज तक सिब्बल से यह पूछने नहीं गयी कि आखिर उन वादों का क्या हुआ जो तुमने बाबा से किया था... सोनिया, राहुल,मनमोहन की चुप्पी आश्चर्यजनक है, भट्टा पारसौल पर घड़ियाली आँसू बहाने वाले राहुल बाबा की जुबान तालू में चिपक गयी है और डिग्गी कहते हैं राहुल की ज़रूरत नहीं मै अकेला ही काफी हूँ (काँग्रेस की नाव डुबाने को)...
समय इन सब से हिसाब तो लेगा ही.. लेकिन दोगली नीतियों वालों और छुपे हुए गद्दारों से जनता को सावधान रहने की ज़रूरत है

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

आदरणीय सुरेश जी
सादर वंदे मातरम्!

आपके लेख के लिए यही कहूंगा -
सबको सन्मति दे भगवान …

मन बहुत उदास है ,
4 जून की काली रात की बर्बर सरकारी दमन कार्यवाही से हर ईमानदार भारतीय की तरह मेरा भी मन अभी तक द्रवित है ,व्यथित है , आहत है !


कवि हूं न ! मां सरस्वती ने इस वीभत्स घटना पर भी मेरी लेखनी से बहुत रचनाएं लिखवा डाली … कुछ मेरे ब्लॉग पर लगाई हैं , आप अवश्य देखें , और अपनी बहुमुल्य प्रतिक्रिया दें -
अब तक तो लादेन-इलियास
करते थे छुप-छुप कर वार !
सोए हुओं पर अश्रुगैस
डंडे और गोली बौछार !
बूढ़ों-मांओं-बच्चों पर
पागल कुत्ते पांच हज़ार !

सौ धिक्कार ! सौ धिक्कार !
ऐ दिल्ली वाली सरकार !

पूरी रचना के लिए उपरोक्त लिंक पर पधारिए…
आपका हार्दिक स्वागत है … और प्रतीक्षा भी … … …

शुभकामनाओं सहित
- राजेन्द्र स्वर्णकार

संजय बेंगाणी said...

मैं कुछ दशको बाद एक पत्रकार द्वारा यह लिखा हुआ देख रहा हूँ. (संजय हूँ, कभी का भी देख सकता हूँ.)


"लोकपाल बिल हो या कालाधन वापस लाना, जब गाँधीवादी व कांग्रेस सरकार प्रयास कर रही थी यह भगवा वाले क्या कर रहे थे? क्यों खामोश थे."

सञ्जय झा said...

bhau der aayad durust aayad.........

jo kuch ho raha thik nahi ho raha....


pranam.

प्रतुल वशिष्ठ said...

अन्ना की टीम भी ठीक नहीं? यह जानकार क्षोभ हुआ....
आखिर ठीक लोग धूर्त लोगों से क्यों घिर जाते हैं? क्या वे उनकी पहचान-क्षमता क्षीण होती है?
शायद मुझे भी अपनी आँखें और अकल तेज करानी होंगी... उजाले में रख दिये व्यक्तियों का अतीत कितना स्याह है.. जानता न था.
भूषण-द्वय के बारे में क्या अन्ना जानते न थे? या फिर अन्ना कान के कच्चे हैं... अरविन्द कनखजूरा बनकर उनके मस्तिष्क को भ्रमित किये रहता है.
लेकिन मुझे उनके कभी-कभी 'लोक-जनपाल' पर दिये बयान क्यों सही लगते हैं ? क्या मुझे उनकी नियत का सही-सही बोध नहीं?
सुरेश जी इसी प्रकार आप सचेत करते रहियेगा. आभार.

Deepesh said...

मै अण्णा और मनमौन सिंग में कुछ समानताएँ देखता हूँ, दोनो ही व्यक्तिगत रूप से इमानदार है और दोनो ही को दुसरों के हाथो कठपुतली बनने में कोई आपत्ती नही है । अब यहाँ कमेट्स करने वाले विद्वानों में से कोई मुझे व्यक्तिगत और सार्वजनिक इमानदारी में अंतर बताएगा ?

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

अन्ना के टीम और कांग्रेसियों कि पोल खोल दी आपने ...

मैं भी ऐसा ही कुछ अपने मित्रों के कहता आ रहा हूँ पर वो ऐसा मानाने को तैयार नहीं .... दुर्भाग्यवास बहुसंख्यक भारतीय जनता अन्ना और उनके टीम को ही कमान सौंपने के मुड में दिखती है

Ashish Chugh said...

very nice...
Me bhi yahi sochta tha par mjhe l;agta tha ki kahi me galat to nahi...
Baba Ramdev ne jis cheesz ko shuru kia .. anna ne use bekaar kar dia..
ANNA Gandhi hain jo Baba RAMDEV JESE BHAGAT SINGH ko kewal apne fayde k liye apni zarurat bhar ka samarthan dete hain...
Aur ek baar phir azaadi ki sthitiyaaan aengi jab bhagat gingh desh k liye lad rahe honge aur gandhi bhagat singh se....

ROHIT said...

-----------------------
इंडिया टी वी के वरिष्ठ
पत्रकार रजत
शर्मा जो आप की अदालत
के एंकर भी है. उनका ये लेख
कांग्रेस की बाबा रामदेव
के प्रति घिनौनी साजिश
को उजागर करता है.
.............,.................,.......
4जून को स्वामी रामदेव
ने मुझसे
पूछा था कि क्या ऐसा हो सकता है
कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार
करने की कोशिश करे? मैंने
उनसे कहा कि कोई
भी सरकार इतनी ब़ड़ी
गलती नही करेगी “ आप
शांति से अनशन कर रहे
हैं,आपके हज़ारो समर्थक
मौजूद हैं, चालीस TV
Channels की OB Vans
वहां खड़ी हैं.” .. मैंने उनसे
कहा था
'सोनिया गांधी और
मनमोहन सिंह
ऐसा कभी नहीं होने
देंगे'...मेरा विश्वास
था कि कांग्रेस ने
Emergencyके अनुभव से
सबक सीखा है...पिछले 7
साल के शासन में
सोनिया गांधी और
मनमोहन सिंह ने
ऐसा कोई काम
नहीं किया जिससे ये
लगा हो कि वो पुलिस
और लाठी के बल पर
अपनी सत्ता की ताकत
दिखाने का कोशिश करेंगे
लेकिन कुछ ही घंटे बाद
सरकार ने मुझे गलत
साबित कर दिया..मैंने
स्वामी रामदेव से
कहा था कि आप निश्चिंत
होकर सोइये... देर रात
मुझे इंडिया टीवी के
Newsroomसे फोन आया :
"सर, रामलीला मैदान में
पुलिस ने धावा बोल
दिया है"...फिर उस रात
टी वी पर जो कुछ
देखा,आंखों पर विश्वास
नहीं हुआ कोई ऐसा कैसे कर
सकता है...कैमरों और
रिपोर्ट्स की आंखों के
सामने पुलिस ने
लाठियां चलाईं, आंसू गैस के
गोले छोड़े, बूढ़े और
बच्चों को पीटा,
महिलाओं के कपड़े फाड़
दिए...मैंने स्वामी रामदेव
को अपने सहयोगी के कंधे
पर बैठकर बार-बार
पुलिस से ये कहते सुना-
"यहां लोगों को मत मारो
, मैं गिरफ्तारी देने
को तैयार हूं"...लेकिन जब
सरकार पांच हजा़र
की पुलिस फोर्स को
कहीं भेजती है
तो वो फोर्स ऐसी बातें
सुनने के लिए तैयार
नहीं होती...पुलिस
वालों की Training
डंडा चलाने के लिए
होती है, आंसू गैस छोड़ने
और गोली चलाने के लिए
होती है पुलिस ये
नही समझती कि जो लोग
वहां सो रहे हैं वो दिनभर
के भूखे हैं, अगर
वहां मौजूद भीड़ उग्र
हो जाती है तो पुलिस
गोली भी चला देती
...वो भगवान का शुक्र है
कि स्वामी रामदेव के
Followersमें ज्यादातर
बूढ़े, महिलाएं और बच्चे थे
या फिर उनके चुने साधक थे
जिनकीTraining उग्र
होने की नहीं है
जब दिन में
स्वामी रामदेव ने मुझे
फोन
किया था तो उन्होंने
कहा था- कि किसी ने
उन्हें पक्की खबर दी है कि
''आधी रात
को हजारों पुलिसवाले
शिविर को खाली कराने
की कोशिश करेंगे'' और ये
भी कहा कि ''पुलिस
गोली चलाकर या आग
लगाकर उन्हें मार
भी सकती है''...मैंने
स्वामी रामदेव से
कहा था कि
''ऐसा नहीं हो सकता-
हजारों पुलिस शिविर में
घुसे ये कभी नहीं होगा और
आप को मारने की तो बात
कोई सपने में सोच
भी नहीं सकता''...रात एक
बजे से सुबह पांच बजे तक
टी वी पर पुलिस
का तांडव देखते हुए मैं
यही सोचता रहा कि रामदेव
कितने सही थे और मैं
कितना गलत...ये मुझे बाद
में समझ
आया कि स्वामी रामदेव
ने महिला के कपड़े पहनकर
भागने की कोशिश
क्यों की...उन्होंने
सोचा जब पुलिस घुसने
की बात सही है
लाठियां चलाने की बात
सही है तोEncounter
की बात भी सही होगी
...मैं कांग्रेस
को अनुभवी नेताओं
की पार्टी मानता हूं...मेरी हमेशा मान्यता रही है
कि कांग्रेस को शासन
करना आता है...लेकिन 5
जून की रात
की बर्बरता ने मुझे हैरान
कर दिया...समझ में नहीं आ
रहा कि आखिर सरकार ने
ये किया क्यों?...उससे
भी बड़ा सवाल ये
उठा कि कांग्रेस
को या सरकार को इससे
मिला क्या?

ROHIT said...

उम्मीद है अब लोगो को पूरी बात समझ मे आ जायेगी.

कि उस रात स्वामी रामदेव गिरफ्तारी देने के लिये तो खुद ही तैयार थे.
लेकिन गिरफतार तो वो तब होते न जब वाकई पुलिस उन्हे गिरफ्तार करने आयी होती.

पुलिस उनको दो तरीको से मारना चाहती थी.
पहला तरीका था कि आग लगाकर भगदड़ मे उनको दम घोटकर या कुचल कर मार दिया जाये.

दूसरा तरीका था कि स्वामी रामदेव के समर्थको को उग्र उत्तेजित कर दिया जाये.
जिससे पुलिस गोलियाँ चलाये और उसी मे एक गोली रामदेव को लग जाये.

लेकिन स्वामी जी ने पुलिस की दोनो गन्दी रणनीतियो पर पानी फेर दिया .

I and god said...

जिस देश में भगवे वस्त्र का अपमान हो वह देश रहने लायक नहीं है. ऐसा शाश्त्रों का कहना है.

तुलसी पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज : (अप्रैल में रामलीला मैदान की कथा में, संस्कार पर दिखाया गया )

१ जैसे शीतला माता द्वारा ली हुई आँख वापिस नहीं आती , सांप के मुख मेंऔर नेताओं के मुख में गया पैसा वापिस आना असंभव है.

२ आकाश के तारे गिने जा सकते हैं. पर नेताओं के घोटाले नहीं गिने जा सकते .

त्यागी said...

मित्रो देखना है की कब तक कांग्रेस कोई भी बात कहे तो देश हित में और कोई दूसरा कहे तो देश विरोधी, गाँधी सही वीर सावरकर गलत की मानसिकता यह देश ढोएगा. जब तक यह मानसिकता रहेगी तब तक देश का कुछ भी भला नहीं होगा. काला धन का मतलब सिर्फ और सिर्फ सोनिया गाँधी को देश से भगाना है, देश में असली भ्रष्टाचार की अधिष्टात्री देवी जो है वो १० जनपथ में विराजित है. हमने बोला भी था की अडवानी जी ने जब इस आम चुनाव से पहेले काले धन को वापस लाने के लिए कहा था जब ही उन्होंने चुनाव हारने के नतीजे लिख लिए थे. अरे यार समझो जिसके ४०० लाख करोड़ रूपये काले धन के हो वो यदि अपने आप को "किसी भी कीमत" पर बचाने के लिए १% भी खर्च कर दे तो आप अनुमान लगा लो की नतीजे क्यां होंगे. बाबा राम देव तो इस क्रांति के सिर्फ सूत्र पात है. ईस्ट इंडिया कंपनी से तो आप बचगए थे परन्तु इस इटली मदर एंड संस से आसानी से सवतंत्रता नहीं हांसिल कर पाओगे. अन्ना और पन्ना की तो औकात ही क्या है. देश को बचाना है तो है तो हर हाल में हिन्दुओ को एकजुट होना ही पड़ेगा, इसको जो लोग हलके में ले रहे है वो जान ले की आने वाली पीढ़ी कुत्ते के माफिक जिंदगी जियेगी और तुम बूढ़े होकर सड़ोगे, जब तो जवानी भी नहीं होगी मित्रो. प्रधानमंत्री का उमीदवार ऐसा खोजो जो "आँखों में आंखे डाले कर इन सेकुलर गुंडों से बात करे"
आप इनकी शक्ति का अंदाज इसी बात से लगा सकते हो जब विरोधी राजनीति के पुरोधा श्री अडवानी जी भी सोनिया गाँधी को चिठ्ठी लिख कर काले धन के उन पर आरोप पर माफ़ी मांगते है. तो मित्रो कुछ तो बात है. एक बात लिख लो आपकी उर्जा का जर्रा जर्रा इस पर खर्च होने वाला है. एक बाबा के आई सी यु में पड़ने से इस गैर भारतीय मानसिकता पोषक श्री मति सोनिया गाँधी पर कुछ भी असार होने वाला नहीं. यह शक्तिया बहुत ही मजबूत है. हलके में लेना का मतलब अपने को मूर्खो के संसार में रखना है.
www.parshuram27.blogspot.com

सुलभ said...

एक बात लोगों को समझ लेना चाहिए, कि अन्ना नाम के आन्दोलन के पीछे जो टीम है वो एक मैनेजमेंट एक्सपर्ट टीम है. बहुत कुछ आज के मीडिया ग्रुप की तरह.
उनके एस.एम्.एस सब्सक्रिप्शन से बस यही पता चलता है IAC (इंडिया अगेंस्ट करप्शन) एक प्रोमोशनल कैम्पेन है. आमूलचूल परिवर्तन के लिए प्रतिबद्ध नहीं दिखाई देती है जैसा रामदेव के भारत स्वाभिमान में दिखता है. खैर...

आज मुझे एक जनकवि शायर श्री सर्वत जी के शेर याद आ गए..

लुटेरा कौन है, पहचान कर खामोश रहती है
रिआया जानती है, जान कर खामोश रहती है.

बगावत और नारे सीखना मुमकिन नहीं इससे
ये बुजदिल कौम मुट्ठी तान कर खामोश रहती है.

गरीबी, भुखमरी, बेइज़्ज़्ती हमराह हैं जिसके
वो बस्ती भी मुकद्दर मान कर खामोश रहती है.

:(

HAPPY ARYA {HARPAL{ said...

pahale to aap baba ko hathyog chhodane k liye kahiye jisase sare andolan ki hawa nikal gai........
unase kahe ki subah kahi hui bat ko sham ko na badale.
dusara apako bolane to adhikar h par kichad uchhalne ka nhi h


tisara- baba bhi to anna ji k andolan me aane ko razi nhi the, ab b byan sahi nhi diye the.

I and god said...

इस ब्लॉग के बुद्धिजीवी ब्लोगिस,

आप सब सही हैं.

प्रत्येक व्यक्ति इस भ्रष्टाचार से कैसे आज़ादी पाए , वह रास्ता भी तो सुझाये , प्लीज़ .

अशोक गुप्ता
दिल्ली

सौरभ आत्रेय said...

आपने सत्य ही कहा अपने लेख में किन्तु कुछ गलती योगाचार्य रामदेव जी ने भी की हैं जैसे की अपने मंच पर फालतू के कुछ बकवास सेकुलर लोगो को बिठाना, अन्ना को बिना मतलब अत्यधिक महत्व देना, प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से ईमानदार बताना (इस सदी का सबसे बड़े असत्यों में से एक), चुगलखोर घोर धर्मनिंदक भेड़ की खाल में भेडिया अग्निवेश को अपने साथ बिठाना और अभियान में रखना – क्या रामदेव जी को इन सब के बारे में पता नहीं है ऐसा तो मुझे नहीं लगता.

फिर भी मैं मन से रामदेव जी के साथ हूँ किन्तु इन लोगो को इनके साथ देखकर मुझे इस अभियान की असफलता प्रारम्भ से ही दिखाई देने लगी थे. रामदेव जी का श्रम निश्चित ही प्रशंसा के योग्य है किन्तु जिस प्रकार गाँधी के सत्याग्रह से अंग्रेजों को कोई फर्क नहीं पड़ता था उसी प्रकार इस तरह के सत्याग्रह से भी यह अंग्रेज सरकार नहीं हिलने वाली.

यदि एक चोर राजा हो और उसका पूरा मंत्री-मण्डल भी चोर हो और उस चोर राजा की बागडोर भी शत्रुओं के हाथ में हो और अब तुम उस चोर सरकार के विरुद्ध यह सत्याग्रह करो की आप चोरी के विरुद्ध संविधान बनाओ तो क्या किसीको लगता है वह अपने ही कुकर्मो के विरुद्ध सविधान को बनाने के लिए मान जायेंगे. नहीं वो ऐसा ही व्यवहार करेंगे जैसा की रामलीला मैदान में किया गया है. यह ब्रिटिश राज हिन्दुओं की एकता और महाक्रांति से बदलेगा अन्यथा हिन्दू ही विलुप्त हो जायेंगे इस दुनिया से और अब रामदेव जी को भी यही प्रयास करने चाहियें. जिस दिन हिन्दू अपनी महामूर्खता को त्याग कर राष्ट्र को सर्वोपरि मानते हुए एक हो जायेगा उसी दिन ही इस ब्रिटिश राज का अन्त निश्चित हो जायेगा अन्यथा ऐसे ही हिन्दू आपस में ही जातिगत और साम्प्रदायिक गिरोह बनाकर लड़-मरता रहेगा और ये लगभग २ लाख के आस-पास के वर्तमान अंग्रेज और मुग़ल अपनी धूर्त चालों में सवा-अरब की जनता पर मजे से राज करते रहेंगे.

अवनीश सिंह said...

अन्ना दूसरे गाँधी बनना चाहते हैं बाबा रामदेव को दूसरे भगत सिंह की तरह मरने के लिए छोड़कर |
व्यक्तिगत तौर पर मैं दोनों का सम्मान करता हूँ पर अन्ना के इर्द-गिर्द जो नेहरू सदृश सलाहकार हैं वही उनकी लुटिया डूबोयेंगे जैसे गांधीजी की कांग्रेस डुबो रही है |

chirag said...

sab dhong hain kaladhan to har kisi ka atka hain chahe vo BJP ka ho ya Congress ka to ye kanun to nhi banana hain

I and god said...

बाबा जी , आप शोर्य वाले हो , कायर नहीं , अनशन छोरो , तलवार पकरो

बाबा जी,

किसके लिए अनशन कर रहे हो ,

आप कहीं यह तो नहीं सोच रहे कि यह देश महात्मा गाँधी के अनशनों से आज़ाद हुआ था.

यह तो भगत सिंग, राजगुरु, मदन लाल , सुभाष से आजाद हुआ था .

अंग्रेजों ने कोई पाप नहीं किया.

हिंदुस्तान पर राज करके , वो अपने देश की सेवा कर रहे थे. वे सच्चे थे , उनके दिल में मानवता थी .

ये सरकार और नेता , तो अपने उसी देश के नमक हराम हैं , उस माँ की विष्ठा हैं , जिसका दूध पिया उसी के साथ बलात्कार कर रहे हैं.

इनकी बाला से आप या पूरा देश मर जाये तो भी इन पर असर नहीं होगा.

शेष जैसा इस्वर चाहें.



जिस देश में भगवे वस्त्र का अपमान हो वह देश रहने लायक नहीं है. ऐसा शाश्त्रों का कहना है.

तुलसी पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज : (अप्रैल में रामलीला मैदान की कथा में, संस्कार पर दिखाया गया )

१ जैसे शीतला माता द्वारा ली हुई आँख वापिस नहीं आती , सांप के मुख मेंऔर नेताओं के मुख में गया पैसा वापिस आना असंभव है.

२ आकाश के तारे गिने जा सकते हैं. पर नेताओं के घोटाले नहीं गिने जा सकते .

अफ़सोस कि बात है , कि हमारे देश में ऐसे भी लोग बुधिजिविओं में हैं , जो बाबा के पावों कि धूल के बराबर भी न होते हुए भी , उनसे इर्ष्या रखते हैं.

वे लोग सोचते हैं कि बाबा को गालियाँ देने से, हम सुर्ख़ियों में आ जाएँगे .

अफ़सोस है कि हमारा सुरेश चिपलूनकर परिवार भी ऐसे मानसिक रोगिओं से अछूता नहीं है.

जरा बताएं, कि बाबा सिर्फ एक बात कहा रहा है कि भ्रस्ताचार पर रोक लगाओ, इसमें गलत क्या है. यदि वह खुद भ्रष्टाचारी है तो , यह क़ानून तो उस पर भी लागू होगा.

तुलसी पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज जी ने ऐसे लोगों के लिए बरी अच्छी उपाधि दी है :
मूर्खाधिराज चक्रचूड़ामणि और दूसरी उपाधि है धूमकेतु .

ajit bhosle said...

मै त्यागी जी की बात से सौ प्रतिशत सहमत हूँ , लेकिन मित्रों मेरी तरह आप लोगों का भी ऐसे लोगों से सामना होता होगा जो बाबा रामदेव को ढोंगी बताते नहीं थकते, इन कमीनों को कौन समझाए की शुतुरमुर्ग की तरह अपने आप को सुरक्षित समझने से हमारी आने वाली नस्लें शाश्वत नरक भोगने वाली हैं, अरे मूर्खों एक बार ज़रा सोच कर देख लो की अगर शाही इमाम इस मुहीम में बाबा रामदेव के साथ बैठा होता (यह एक कल्पना मात्र है) तो क्या पुलिस की भी लाठी भांजने की हिम्मत हो पाती क्या क्या इन कमीन मंत्रियों की ऐसा आदेश देने की हिम्मत हो पाती, यानी की हर अत्याचार सहने के लिए बस हिन्दू ही बचा है, जो लोग बाबा रामदेव को ठग या साम्प्रदायिक कहते हैं क्या उनकी आँखे फूट गयी है की उनके मंच पर सभी धर्मो के अच्छे एवं सच्चे लोग थे (दो चार बुरे लोग तो हर जगह टी.वी.पर अपना चेहरा दिखाने आ ही जाते है)
हो सकता है मेरी सोच साम्प्रदायिक हो पर फिर भी मैं बाबा रामदेव को एक बेहतरीन इंसान मानता हूँ और उनके मंच पर अलग-अलग धर्मों के लोगो देख कर भले ही मैं थोड़ा असहज महसूस कर रहा हूँ लेकिन बाबा का जो उद्देश्य है, उसकी पवित्रता को देखते हुए मै कम से कम इस समय अपने ये विचार अपने मन से दूर रख रहा हूँ आओ इस समय हम रामदेव बाबा के दीर्घायु होने की कामना सच्चे मन से करें.

PADMSINGH said...

बाबा ने अनशन तोड़ दिया है... अच्छा हुआ... लेकिन मन व्यथित और विकल है... जिस जनता के लिए बाबा ने अपने प्राणों को दाँव पर लगाया वही बाबा को कटघरे में खड़ा कर रही है... वहीँ सोनिया के कुत्ते खुलेआम घूम रहे हैं... 8 जून को सोनिया राहुल, वढेरा सहित 12 लोग स्विट्जरलैंड गए हैं..संभवतः कालाधन ठिकाने लगाने का विकल्प खोजने ... सरकार अपनी मनमानी पर है... कोई स्पष्ट राह नज़र नहीं आती
अंततः , मन विकल है... क्या आन्दोलन का हश्र यही होना था

ePandit said...

अंग्रेजों द्वारा स्थापित कॉंग्रेस ने उनसे एक बात सीखी हुयी है कि फूट डालो और राज करो। वही हुआ है, अन्ना को रामदेव से अलग करके।

आपके लेख जन-जागरण का पुनीत कार्य कर रहे हैं। इस महायज्ञ को जारी रखें।

katyayan said...

suresh ji bahut sare logon ko laga ki baba ne bhagne ki koshish kar galat kiya lekin jab manch par aag lagi ho to baba kya jal kar mar jate anshan toda kyonki angreg bi appeal karate the jabaran anshan tuthate the lekin ye sarkar to usase bi kamini hai congress ko iske durgami parinam bhugatana padenge kam se kam pahali bar sonia expose to hui aur pahali bar khul kar logon ne sonia ko gali dee warana to shikhandi (manmohan) sab war jhel leta tha pahali bar awaran hata hai ise dhwast hone digiye congress ke pas khuch nahi hoga yadi u.p. ka chunav uma bharati ke netratva mein jeeten tab maja aye

vivek said...

Ab hamari bari yadi is desh ke hinduo me tanik bhi laj sharm vaki bachi ho to aane wale chunaavo me congress ko ek ek vote ke liye tarsa de chahe vote kisi kutte ko ya suar ko bi deni pade to de par congress ke kisi bhi pratyashi ko vote na de

hamara yahi yogdaan shayad is desh ko itli wali ki gulami se mukti dila sakta hai

निर्झर'नीर said...

mai bhi aapse poorn sahmat hun

"I and god said...

जिस देश में भगवे वस्त्र का अपमान हो वह देश रहने लायक नहीं है. ऐसा शाश्त्रों का कहना है.

तुलसी पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज : (अप्रैल में रामलीला मैदान की कथा में, संस्कार पर दिखाया गया )

१ जैसे शीतला माता द्वारा ली हुई आँख वापिस नहीं आती , सांप के मुख मेंऔर नेताओं के मुख में गया पैसा वापिस आना असंभव है.

२ आकाश के तारे गिने जा सकते हैं. पर नेताओं के घोटाले नहीं गिने जा सकते ."

I and god said...

अरे ब्लोगी भाइयो ,

कुछ कह रहे हैं अन्ना गलत हैं. कुछ रामदेव की गलतियाँ बताते हैं.

कोई भ्रस्ताचार को हटाने का कोई तरीका भी सुझाओ यारो .

अशोक गुप्ता
दिल्ली

Chandan-"The Voice Of An Indian" said...

मई इतना ही कहना चाहूगा की लेखक का काम किसी पूर्वाग्रह से उपर उठकर विचार रखना होता है.उपर दिए गये चित्रो और लेख से ये प्रतीत है की माननीय सुरेश जी किसी पार्टी विशेष का पक्ष ले रहे है अथवा उनको पूरी घटना का बोध नही है.ऊन्से अनुरोध है की पहले अन्ना के बारे मे तथा उनकी टीम के बारे मे जान ले तब अपनी प्रतिक्रिया दे.....