Monday, May 23, 2011

केरल विधानसभा का खरा-खरा “साम्प्रदायिक” चित्र पेश है… Kerala Assembly Elections, Muslim League and Secularism

केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं, और कांग्रेस मोर्चे की सरकार मामूली बहुमत से बन चुकी है। जीते हुए उम्मीदवारों एवं मतों के बँटवारे के आँकड़े भी मिलने शुरु हो चुके हैं… कुल मिलाकर एक भयावह स्थिति सामने आ रही है, जिस पर विचार करने के लिये ही कोई राजनैतिक पार्टी तैयार नहीं है तो इस समस्या पर कोई ठोस उपाय करने के बारे में सोचना तो बेकार ही है। आईये आँकड़े देखें…

कांग्रेस मोर्चे ने 68 हिन्दुओं, 36 मुस्लिमों और 36 ईसाईयों को विधानसभा का टिकिट दिया था, जिसमें से 26 हिन्दू 29 मुस्लिम और 17 ईसाई उम्मीदवार चुनाव जीते। राहुल बाबा भले ही दिल्ली में बैठकर कुछ भी मुँह फ़ाड़ें, हकीकत यही है कि तमिलनाडु में कांग्रेस पूरी तरह साफ़ हो गई है, जबकि केरल में जिस “कांग्रेस” सरकार के निर्माण के ढोल बजाये जा रहे हैं, असल में उम्मन चाण्डी की यह सरकार “मुस्लिम लीग” (ज़ाहिर है कि “सेकुलर”) और केरल कांग्रेस (ईसाई मणि गुट) (ये भी सेकुलर) नामक दो बैसाखियों पर टिकी है।

अब वर्तमान स्थिति क्या है यह भी देख लीजिये – केरल विधानसभा के कुल 140 विधायकों में से 73 हिन्दू हैं (शायद?), 37 मुस्लिम हैं और 30 ईसाई हैं, यह तो हुई कुल स्थिति… जबकि सत्ताधारी पार्टी (या मोर्चे) की स्थिति क्या है?

सामान्य तौर पर होता यह है कि किसी भी विधानसभा में विधायकों का प्रतिनिधित्व राज्य की जनसंख्या को प्रतिबिंबित करता है, सत्ताधारी मोर्चे यानी सरकार या मंत्रिमण्डल में राज्य की वास्तविक स्थिति दिखती है… लेकिन केरल के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि “सत्ताधारी मोर्चा” केरल की जनसंख्या का प्रतिनिधित्व नहीं करेगा… कैसे? 140 सीटों के सदन में कांग्रेस मोर्चे को 72 सीटें मिली हैं, इन 72 में से 47 विधायक या तो ईसाई हैं या मुस्लिम… यानी केरल मंत्रिमण्डल का 65% हिस्सा “अल्पसंख्यकों” का हुआ, जबकि केरल में 25% जनसंख्या मुस्लिमों की है और 20% ईसाईयों की। इसका मोटा अर्थ यह हुआ कि 45% जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करने के लिये 65% विधायक हैं, जबकि 55% हिन्दुओं का प्रतिनिधित्व करने के लिये सिर्फ़ 35% विधायक (जिसमें से पता नहीं कितने मंत्री बन पाएंगे)… ऐसा कैसे जनता का प्रतिनिधित्व होगा?


आँकड़ों से साफ़ ज़ाहिर है कि विगत 10-15 वर्ष में मुस्लिमों और ईसाईयों का दबदबा केरल की राजनीति पर अत्यधिक बढ़ चुका है। इस बार भी सभी प्रमुख मंत्रालय या तो मुस्लिम लीग को मिलेंगे या केरल कांग्रेस (मणि) को… मुख्यमंत्री चांडी तो खैर ईसाई हैं ही। एक निजी अध्ययन के अनुसार पिछले एक दशक में मुस्लिम लीग और चर्च ने बड़ी मात्रा में जमीनें खरीदी हैं और बेचने वाले अधिकतर मध्यमवर्गीय हिन्दू परिवार थे, जो अपनी सम्पत्ति बेचकर कर्नाटक या तमिलनाडु “शिफ़्ट” हो गये…। एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि केरल के सर्वाधिक सघन मुस्लिम जिले मलप्पुरम की जन्मदर में पिछले और वर्तमान जनगणना के अनुसार 300% का भयानक उछाल आया है। केन्द्रीय मंत्री ई अहमद ने दबाव डालकर, मलप्पुरम में पासपोर्ट ऑफ़िस भी खुलवा दिया है। मदरसा बोर्ड के सर्टीफ़िकेट को CBSE के समकक्ष माने जाने की सिफ़ारिश भी की जा चुकी है, अलीगढ़ मुस्लिम विवि की एक शाखा भी मलाबार इलाके में आने ही वाली है, जबकि शरीयत आधारित इस्लामिक बैंकिंग को सुप्रीम कोर्ट द्वारा झटका दिये जाने के बावजूद उससे मिलती-जुलती “अण्डरग्राउण्ड बैंकिंग व्यवस्था” मुस्लिम बहुल इलाकों में पहले से चल ही रही हैं।

हालात ठीक वैसे ही करवट ले रहे हैं जैसे किसी समय कश्मीर में लिये थे। ज़ाहिर सी बात है कि जब सत्ताधारी गठजोड़, राज्य की जनसंख्या के प्रतिशत का वास्तविक प्रतिनिधित्व ही नहीं करता, तो अभी जो नीतियाँ दबे-छिपे तौर पर जेहादियों और एवेंजेलिस्टों के लिये बनती हैं, तब वही नीतियाँ खुल्लमखुल्ला बनेंगी…। ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के विधायकों और कार्यकर्ताओं में इसे लेकर “बेचैनी” नहीं है, लेकिन वह भी सत्ता का लालच, वोट बैंक की मजबूरी और केंद्रीय नेतृत्व के चाबुक की वजह से वही कर रहे हैं जो वे नहीं चाहते…। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA), अब्दुल नासेर मदनी और PFI के आतंकी नेटवर्क की सघन जाँच कर रही है, इसकी एक रिपोर्ट के अनुसार त्रिवेन्द्रम हवाई अड्डे के समीप बेमापल्ली नामक इलाका सघन मुस्लिम बस्ती के रूप में आकार ले चुका है। विभिन्न सुरक्षा एवं प्रशासनिक एजेंसियों की रिपोर्ट है कि एयरपोर्ट के नज़दीक होने की वजह से यहाँ विदेशी शराब, ड्रग्स एवं चोरी का सामान खुलेआम बेचा जाता है, परन्तु विभिन्न मुस्लिम विधायकों और मंत्रियों द्वारा जिला कलेक्टर पर उस इलाके में नहीं घुसने का दबाव बनाया जाता है। वाम मोर्चे के पूर्व गृहमंत्री कोडियरी बालाकृष्णन ने एक प्रेस कान्फ़्रेंस में स्वीकार किया था कि PFI और NDF के कार्यकर्ता राज्य में 22 से अधिक राजनैतिक हत्याओं में शामिल हैं। यह स्थिति उस समय और विकट होने वाली है जब केन्द्र सरकार द्वारा “खच्चर” (सॉरी सच्चर) कमेटी की सिफ़ारिशों के मुताबिक मुस्लिम बहुल इलाकों में मुसलमान पुलिसकर्मी ही नियुक्त किये जाएंगे।

2011 के चुनाव परिणामों के अनुसार, 55% हिन्दू जनसंख्या के होते हुए भी जिस प्रकार केरल का मुख्यमंत्री ईसाई है, सभी प्रमुख मंत्रालय या तो मुस्लिमों के कब्जे में हैं या ईसाईयों के… तो आप खुद ही सोच सकते हैं कि 2015 और 2019 के चुनाव आते-आते क्या स्थिति होगी। जिस प्रकार कश्मीर में सिर्फ़ मुसलमान व्यक्ति ही मुख्यमंत्री बन सकता है, उसी प्रकार अगले 10-15 साल में केरल में यह स्थिति बन जायेगी कि कोई ईसाई या कोई मुस्लिम ही केरल का मुख्यमंत्री बन सकता है। जब यह स्थिति बन जायेगी तब हमारे “आज के सेकुलर” बहुत खुश होंगे… ये बात और है कि केरल में सेकुलरिज़्म को सबसे पहली लात मुस्लिम लीग और PFI ही मारेगी…। क्योंकि यह एक स्थापित तथ्य है कि जिस शासन व्यवस्था अथवा क्षेत्र विशेष में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व 40 से 50% से अधिक हो जाता है, वहाँ “सेकुलरिज़्म” नाम की चिड़िया नहीं पाई जाती…

http://blog.sureshchiplunkar.com/2011/04/kerala-elections-assembly-elections-in.html

जबकि इधर, “सेकुलरिज़्म और गाँधीवाद का डोज़”, हिन्दुओं की नसों में कुछ ऐसा भर दिया गया है कि हिन्दू बहुल राज्य (महाराष्ट्र, बिहार) का मुख्यमंत्री तो ईसाई या मुस्लिम हो सकता है…… देश की 80% से अधिक हिन्दू जनसंख्या पर इटली से आई हुई एक ईसाई महिला भी राज कर सकती है, लेकिन कश्मीर का मुख्यमंत्री कोई हिन्दू नहीं… जल्दी ही यह स्थिति केरल में भी दोहराई जायेगी…।

फ़िलहाल इन “ताकतों” का पहला लक्ष्य केरल है। जातियों में बँटे हुए हिन्दुओं को रगड़ना, दबोचना आसान है, इसीलिये समय रहते “चर्च” पर दबदबा बनाने की गरज से ही ईसाई प्रोफ़ेसर के हाथ काटे (Professor hacked in Kerala by PFI) गये थे (और नतीजा भी PFI के मनमुताबिक ही मिला और “चर्च” पिछवाड़े में दुम दबाकर बैठ गया)। ज़ाहिर है कि केरल के “लक्ष्य” से निपटने के बाद, अगला नम्बर असम और पश्चिम बंगाल का होगा…जहाँ कई जिलों में मुस्लिम जनसंख्या 60% से ऊपर हो चुकी है… बाकी की कसर बांग्लादेशी भिखमंगे पूरी कर ही देंगे…

सेकुलरिज़्म की जय हो… वामपंथ की जय हो… “एक परिवार” के 60 साल के शासन की जय हो…। यदि केरल के इन आँकड़ों, कश्मीरी पंडितों के बुरे हश्र और सेकुलरों तथा वामपथियों द्वारा उनके प्रति किये गये “बदतर सलूक” से भी कुछ नहीं सीखा जा सकता, तब तो हिन्दुओं का भगवान ही मालिक है…

28 comments:

संजय बेंगाणी said...

असम में "राष्ट्रवादी" तत्त्व बड़ी संख्या में हैं. मैं वर्षों वहाँ रहा हूँ. मगर कोई नेता नहीं है. भाजपा को "ममता" की तरह काम करना होगा. गअगर ऐसा होता है तो वहाँ गोगाई की जमानत जप्त हो जाए. मगर भाजपा सत्ता की जिम्मेदारी चाहती ही नहीं. न असम में न दिल्ली में.

योगेन्द्र सिंह शेखावत said...

राष्ट्रीय सुरक्षा के हिसाब आने वाले दिनों में केरल में हालात बदत्तर हो सकते हैं और भारत की राजनीति और सुरक्षा नीति निर्धारकों के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है | ये सब तो अलगाववाद के इशारे हैं क्योंकि यह भी एक सीमान्त प्रदेश है, और शायद ISI इसके लिए कुछ खिचड़ी पका भी रही हो खालिस्तान की दबी इच्छा यहाँ से पूरी करने की फिराक में हो |

shilpa mehta said...

अब प्रोब्लम यह है कि - जो आप समझे ही नहीं कि चल क्या रहा है - तो तो ठीक है | और जो आप समझ कर नासमझ बन सकें , तो भी चलेगा | लकिन कहीं आप समझ कर कुछ कहने लगते हैं - तो फिर तो आप " साम्प्रदायिक" और "देश को बांटने की मानसिकता वादी" इत्यादि लेबल कर दिए जाते हैं - यूँ कि - चित भे मेरी और पट भी मेरी वाली राजनीति है हमारी | सेकुलरिस्म का अर्थ अब बदल चला है | यह वह समय है - जिसमे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को सिमी का पर्याय बताया जाता है - और कोई कुछ खास आपत्ति भी नहीं करता |

P K Surya said...

so jao hinduwon phir se so jao,, mujhe to lagta hai jo hindu Bharat se bahar baste hain wo Hindu kahlane k jayda layak hain kam se kam har parv tyohar or etne Mandir puri duniya me banti ja rahi hai or wahan k sarkar me bhi hinduwon kee bhumika hai or humare desh me bura hal har prakar se.. :(

Deepesh said...

सही कहा आपने "हिन्दुओं का भगवान ही मालिक है…" जब तक हिन्दु स्वयं के हितों के प्रति जाग्रत नही होंगे, राष्ट्रीय हित के लिए संघर्ष के स्थान पर आरक्षण जैसे छणिक एवं तुच्छ मुद्दों के लिए रेल रोकने में अपनी पूरी ताकत झोंकते रहेंगे इसी तरह लतियाते रहेंगे । आज जम्मु-काश्मीर में हुआ है कल केरल में होगा और शायद हमारे जीवन काल में ही संपूर्ण भारत में हो जाए ।

avenesh singh said...

कुल मिलाकर इतना कहा जा सकता है कि तमिलनाडु में जहां इन चुनावों में भ्रष्टाचार सबसे बढ़ा मुद्दा था और यूपीए जिस तरह जयललिता की आंधी में उड़ गया है, उससे ममता बनर्जी के कंधों पर सवार होकर बंगाल का किला जीत लेने की उसकी सफलता की चमक जरूर मद्धिम पड़ गयी है। वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में ‘लाल किला’ ढह जाने और केरल में कांटे की टक्कर के बावजूद सत्ता गंवा देने के बाद लेफ्ट फ्रंट, खासकर उसकी अगुआ पार्टी सीपीएम को अब राष्ट्रीय राजनीति में अपने वजूद के सवालों से रू-ब-रू होना पड़ेगा।
सच तो यह है कि दिल्ली में सांप्रदायिकता को गाली देने वाली कांग्रेस केरल में मुस्लिम लीग के साथ गठजोड़ कर चुनाव लड़ती है। अपने दम पर बहुमत के लिये आवश्यक 71 सीटों से कांग्रेस बहुत पीछे है किन्तु 2006 में 7 सीटों के मुकाबले 2011 में 20 सीटें पाकर मुस्लिम लीग ने गठबंधन को सत्ता तक पहुंचा दिया।

पृथ्वीराज said...

केरल पश्चिम बंगाल और असम तो जाने कबके हिँदुओ के हाथ से निकल गये.हिँदुओ का कितना दुर्भाग्य है?
असम मे पौने तीन करोड़ जनसंख्या मे एक करोड़ मुस्लिम है.
अब कांग्रेस सत्ता मे रहे या न रहे उसका इस देश मे हिँदु संस्क्रति मिटाने का मिशन 50 % तो पूरा ही हो गया है.

हल्ला बोल: हिँदूओ की निष्क्रियता का दुष्परिणाम

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

दीपेश व पृथ्वीराज की बात से सहमत हूं,

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

ऐसी इस्थिति देख मुझे केरल के हिन्दुओं पे तरस नहीं आता और ना ही उनके लिए कोई साहनुभूति होती है. और साहनुभूति हो भी क्यूँ ? ज्यादातर केरल के हिन्दू बीफ (गो मांस) बड़े चाव से खाते हैं. आज भी बहुसंख्यक केरल के हिन्दू अपने हिन्दू अधिकारों के प्रति सोया हुआ है, इन्हें अपने धर्म से कोई मतलब ही नहीं.

इश्वर ऐसे अकर्मण्य हिन्दुओं की क्या और क्यूँ कर रक्षा करें ?

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

आदरणीय सुरेश भाई यदि सब इसी प्रकार चलता रहा तो बड़ा ही विकत समय आने वाला है...आपने गहन शोध कर इस आलेख को प्रस्तुत किया है...आपकी भाषा में भी गज़ब का जोश है...आपके एक एक शब्द से सहमत होना ही है... अभी तो केरल में हालत बदल रहे हैं...शायद dheere dheere yah भी kashmeer बन जाए...इसके बाद पश्चिम बंगाल, असम, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व उत्तर प्रदेश का भी नंबर शायद लगने वाला है...ये सेक्युलर साले एक दिन पूरे भारत को खा जाने के मूड में हैं| आपसे सौ प्रतिशत सहमत...

संजय @ मो सम कौन ? said...

कल अजीत गुप्ता जी के ब्लाग पर एक प्रख्यात वकील और स्थापित ब्लागर महोदय का कमेंट पढ़ा, भारत विकास परिषद के द्वारा चलाये जा रहे अस्पताल के अवैध होने की बात थी और ऐतराज इस बात पर ज्यादा फ़ोकस्ड था कि ये संघ और भाजपा द्वारा चलाया जा रहा है और इससे उनकी राजनैतिक तृष्णायें पूरी हो रही हैं।
हम हिन्दुओं की ’भगवान ही मालिक है’ वाली मानसिकता की क्या तारीफ़ करें।

katyayan mishra said...

hum hindu hi apani durdasha ke liye jimmedar hain. diggi,agnivesh ,arundhati roy ,rajdeep sardesai,barakha dutta jaise hindu jaichand jab tak honge tab tak baki log kya kare lalo,mulayam sabhi rajnatik logo ko malum hai hindu befkoof hai aur sashakt leadership ke abhav mein sangharh kar raha hai vote kise de ye samajhata nahi muslim league secular usko gale lagane ke liye sab taiyar aur BJP communal unke sath sansad me sahi muddon par bhi voting nahi karate jaise BJP agar roti khane ka prastav laye to use thukarakar secular log shit kha lenge aur khush honge kahenge communal forces ka virodh kar diya

Prem Yadav said...

Jharkhand BJP ko hya Ho Gaya Hai, Aj BJP ke SSamarpit Karyakarta Aur Sangh Ke swyamsewak Sanjay Seth Ji BJP chordkar JVM Me Samil Ho GAye Hain. Nitin Gadkari JI. Agle Chunav Me BJP Jharkhand men apni Jamanat Bhi Nahi Bacha Papegi.

Prem Yadav said...

Jharkhand BJP ko hya Ho Gaya Hai, Aj BJP ke SSamarpit Karyakarta Aur Sangh Ke swyamsewak Sanjay Seth Ji BJP chordkar JVM Me Samil Ho GAye Hain. Nitin Gadkari JI. Agle Chunav Me BJP Jharkhand men apni Jamanat Bhi Nahi Bacha Papegi.

abhishek1502 said...

पता नही क्यों अधिकतर हिन्दू आंख और कान बंद किये हुए है या फिर सिर्फ तमाशा देख रहे है .

Man said...

सादर वन्दे सर .
सटीक विश्लेषण किया आपने ,धीरे धीरे केरल भी कश्मीर घाटी बनने की और अग्रसर हे |हिन्दू स्वयम अपने अकर्मण्यता की वजह से आने वाले भविष्य में अभिशप्त होंगे |कलयुग में संघटन ही सबसे बड़ी शक्ती मना गया हे लेकिन हिंदुवो के लिए कोनसी चिड़िया हे पता नहीं ?,हिंदुवो को संघटीत करना मेंढको को तोलना हे |

Rajesh said...

Suresh Ji Bahut Acha lika hai. Apke mein har post padhta hoo. Aap bahut acha likhte hai. Ye Hindu Nahi Samjhenge. Kyoki Ye to soye hue hai. Musalmano ki ye ek chal ke anusar sab kuch ho raha hai. ve dheere dheere harek rajya mein apni jansankya badha rahe hai. Unki kartuto ke karan apne ek post likhi hui hai. Kitne percent musalnman kab kahan kya karte hai. Lekin phir bhi ye hindu nahi samajhte. Agar ase hi chalta raha to vo din door nahi jab musalman 100% ho jayenge. Is Rastar ko ek ese Tanashah ki Jaroot hai Jo Is Desh ki Mitti Se juda ho. Tabhi kuch ho sakta hai.

Anonymous said...

as per me these election results are based on EVM and diverted accordingly..
1. DMK was problem to kongress hence aiadmk put in the govt and sonia is now with jj.
2. keral also shows the clear picture, as muslim brought up and communist just below to show the voting effect..but its evm effect.
3. assam also taken by kongress and bjp goen , evm shows no where bjp got any seat .
con: in wb mb in and cpi out..
its complete EVM effect.

Mahendra Gupta said...

Vande Ma Taram. Sir
Mai ye sab dekh kar bahut kunthit ho gaya hun. Kuch kahene ka jee nahi karta.

Bas sabse yahi kaheta hun sab log in sab ke bare me apne mitro, sathiya, parchito, ristedaro etc. ko jarur bataye aur samjhhaye. aur apna sujhav bhi apne comments ke sath dete rahe. Keval Baate karne se kaise chalega. Hame kuch Karna hi hoga. Har log apne seema ke andar jo ho sake vo prayas karen aur karte rahen. bina logo ko jagruk kiye kuch nahi hoga.
Jai HIND.

blogtaknik said...

अच्छा लेख अपना ब्लॉग सनातन अग्रीगेटर में रजिस्टर कराएँ..देश भक्त भारतियों के चिट्ठों का मंच

katyayan mishra said...

adhik se adhik logon tak bat pahunchana chahiye ki congress hindu aur desh virodhi party hai jab jis group mein baat kare koshish kare ki congress ka ye chehara logon ke samane aye

सञ्जय झा said...

post se hatke......

anna ne gujrat me 'lokpal' lane ke liye.......modi ka virodh....u-turn?

swami nityanand ne 'swami agnivesh' ko thappar mara....ye kya?

p.s....apka subscribe reader....har post ko jore me padhnewala.....lekin
aaj-kal upasthiti nahi darshata hoon....

ant me mera pranam swikaren....

satpanthi said...

भा.जा.पा. से जुड़े बंधुओं से एक निवेदन वे अपने अपने क्षेत्र के भा.जा.पा. कार्यालय में सूचना दे दें सभी राष्ट्रवादियों की मांग है कि श्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में घोषित कर दें और देश के अधिकांश युवाओं का वोट ले लें मित्रों क्या कहते हो आप लोग क्या मेरा कहना सही है यह बात सिर्फ लाइक करने से नहीं फैलेगी ऐसी और पोस्ट बनायें और भर दें अपनी अपनी वाल को शायद कुछ तो आवाज़ पहुंचेगी गडकरी जी और संघ तक

Anonymous said...

kasam se sach kha hai hindo ne itihaas se kabhi sabak nahi liya. ye desh jab tk hai jab tak hindo adhk hai ,thoda sa bhi km hue to bhut se mulim desh me bharat badal jayega aur inhi sekular hinduo ko hinduo ko muslim bnaane me lga diya jayega aue phir ye saare hindu kutto ki maut maare jayenge

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

हिन्दुओं के धर्मगुरु भी इसके लिये जिम्मेदार हैं और पुरोहित भी. किसी हिन्दू धर्मगुरु और पुरोहित को धर्म के बारे में बात करते देखा है कभी. कभी नहीं, अपनी दुकाने चलाते हैं लेकिन अपने जजमानों से कभी नहीं कहते कि अपने धर्म की रक्षा करो, उसे देखो....
और हिन्दू तो शुतुरमुर्ग बनने में ही भलाई समझते हैं...

AK said...

http://youtu.be/NRhEGm7-TQY
@satpanthi jee link ko play kare or all 3 part dekhe
kewal modi kyon modi akele nahi hai ager aap modi ko support karte hai to
us modi ko lekar chale wala party or log bhi saath lena hoga modi ko modi banane me bahuto ka haath hai

arya said...

यह सत्य है की हमारा मन हमेशा बहाने बनाकर हमारे अस्तित्वा के सत्य से हमें दूर रखने का प्रयास करता है और हमें वही अच्छा लगता है| अतः हम जब विचार करते हैं तो हमें अजीब लगता है परन्तु हम विचार भी नहीं करना चाहते यही सत्य है| जब हम सत्य की गहेरायी में जब उतारते हैं तो ये साडी चीजी बेईमानी लगती हैं| और सत्य के गहेराई में उतरने के लिए हमें अपने गातिविधियों का स्वयं गवाह, स्वयं न्याय करता , स्वयं अपराधी भी बनाना पड़ता है| और स्वयं में शाक्षी भाव युक्त होना पड़ता है| और इसे १ तमाशे की तरह देखने की क्षमता का विकास होना आवश्यक है| सरे धर्म कर्म, सरे कर्म कांड, सरे फसाद हैं क्यों की यहाँ हर कोई अपने आप को देखा देने वाले है यहाँ किसी से उम्मीद करो| और स्वयम को धोखा देना छोड़ दो सरे दुखो का अंत होजायेगा | यही है सनातन धर्म का सिन्धात जिसे मुहम्मद ने इस्लाम और उपनिषद निरपेक्षता कहा है | न कोई मुहम्मद को समझ सका और नहीं उपनिषद के ऋषियों को समझ पाया और नहीं कृष्ण के कर्मयोग सन्यास को, ऊपर से इश्वर के अस्तित्वा और सन्देश को लड़ना चालू करदिया|
अगर गहेरायी में जाकर देखे तो यह भी मन का सबसे शक्तिशाली सस्त्र है स्वयं को धोखा देने का और हमें इतना सत्य लगता है की हम अपने जीवन को इतनी छोटी चीज के पीछे समाप्त करदेते हैं जिसका कोई अस्तित्वा ही नहीं है | जीवन जितना मूल्यवान है की हम इसकी तुलना ब्रह्मांड में किसिचिज से नहीं करसकते| हमें इसका सदुपयोग करना चाहिए और वो है स्वयं को जानना और जीवन तथा प्रकिरती का सम्मान करना| हमने इश्वर को नहीं देखा परन्तु हम उसे जिव के भावनावो को समझने के बाद देखने लगते हैं सबके हृदयमे, हर उस अदा में जिसमे कोई स्वार्थ नहीं होता है, कोई प्रदर्शन नहीं होता, स्वयम के अस्तित्वा काभाव गौण होता है, तब वह दिखने लगता है, खुद में भी वही दीखता है| जब सबको ऐसा हो जाये तो सारी लडाई ख़त्म हो जाती है| तब धरती पे स्वर्ग होता है, तब मनुष्य इतना प्यारा होजाता है की प्रकिरती की भिन्न भिन्न शक्तिया शारीर धारण करके मनुष्य का साथ पाने के लिए उसके साथ नाचती हैं| जिन्हें प्राचीन सस्त्र में देवता कहा गया है| मनुष्य इतना अन्धकार में चला गया है की वोह अपने मूल स्वरुप प्रकिरती से अत्यंत दूर चला गया है| अतः उसके जीवन में अत्यंत क्लेश, पीड़ा, और वेदना का वाश होगया है |

आप को लगता होगा की मई आज इतनी गहेराई की बात क्यों कर रहा हूँ तो मुझे लगता है की जब मुझे इस सत्य का ज्ञान है तो मुझे आप लोगो को भी अपनी अनुभूति का लाभ सबको बांटू| अगर आप सबको यदि यह पसंद नहीं है तो मै भी आप लोगो की तरह ही सारी बाते करूँगा जो हलकी फुल्की और स्वयं को धोखा देने में सहायक होंगी, जो बिलकुल हमें सकरात्मक उर्जा से भर देंगी परन्तु हमें दिग्भ्रमित करने वाली होंगी| ------
------------------- शुभ रात्रि

Praveen Kushwaha said...

इन सब की लिए कांग्रेस और हिंदू सेकुलर पूरी तरह से जिम्मेदार हैं... और युवाओं के तो क्या कहने... उन्हें तो सलमान खान और शाहरुख खान से फुर्सत ही नही मिलती, और जब हिंदुत्व की बात करो तो वो कहते है हिंदू मुश्लिम भाई भाई...अकल के अंधे साले मूर्ख युवाओं को अब क्या कोई समझाए. सबसे ज्यादा तो बॉलीवुड ने बिगाड़ा है युवाओं को, हिंदुत्व को बचने के लिए बहके हुए युवाओं को सही रस्ते पे लाना जरुरी है, युवा ही बचा सकते है हिंदुत्व को....