Saturday, May 14, 2011

विधानसभा चुनाव परिणाम : हिन्दुओं के लिये निराशाजनक चित्र तथा भाजपा के लिये सबक…(विस्तारित विश्लेषण)…… Assembly Election Results, Position of BJP and Secularism

पश्चिम बंगाल :- ममता बनर्जी की आँधी में वामपक्ष उड़ गया, धुल गया, साफ़ हो गया… यह देश के साथ-साथ हिन्दुत्व के लिये क्षीण सी खुशखबरी कही जा सकती है। "क्षीण सी" इसलिये कहा, क्योंकि ममता बैनर्जी भी पूरी तरह से माओवादियों एवं इस्लामिक ताकतों (बांग्लादेशी शरणार्थियों) के समर्थन से ही मुख्यमंत्री बनी हैं… अतः पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं की दुर्दशा वैसी ही जारी रहेगी, जैसी अब तक होती आई है। (नतीजा : वामपंथ 5 साल के लिये बाहर = +1)
असम :- इस राज्य में कांग्रेस से अधिक निराश किया है भाजपा ने… दस साल के गोगोई शासन, मूल असमियों पर बांग्लादेशी गुण्डों द्वारा अत्याचार, कांग्रेसियों द्वारा खुलेआम बदरुद्दीन अजमल का समर्थन करने और अपना मुस्लिम वोट बैंक पक्का बनाये रखने का फ़ायदा कांग्रेस को मिला…। भाजपा यहाँ भी फ़िसड्डी साबित हुई। असम में धीरे-धीरे अल्पसंख्यक बनने की ओर अग्रसर हिन्दुओं के लिये अब उम्मीद कम ही बची है। (नतीजा : राजमाता के दरबार में दिग्गी राजा के कद में बढ़ोतरी और असम में हिन्दुओं की लतखोरी में बढ़ोतरी = (-) 1)

तमिलनाडु :- भाजपा तो कभी यहाँ थी ही नहीं, अब भी कोई प्रगति नहीं की। जयललिता की जीत से करुणानिधि कुनबा बाहर हुआ है, लेकिन अब जयललिता और शशिकला मिलकर तमिलनाडु को लूटेंगे…। चर्च की सत्ता वैसे ही बरकरार रहेगी, क्योंकि "सेकुलरिज़्म" के मामले में जयललिता का रिकॉर्ड भी उतना ही बदतर है, जितना करुणानिधि का। (नतीजा : कांग्रेस यहाँ एकदम गर्त में चली गई है… (+1)]

केरल :- नतीजे लगभग टाई ही रहे और जो भी सरकार बनेगी अस्थिर होने की सम्भावना है। कांग्रेस की सरकार बनी तो मुस्लिम लीग और PFI का आतंक मजबूत होगा। भाजपा को 2-3 सीटों की उम्मीद थी, लेकिन वह धूल में मिल गई…।

सकारात्मक पक्ष देखें तो - (अ) बंगाल से वामपंथी साफ़ हुए, जबकि केरल में भी झटका खाये हैं… (ब) तमिलनाडु से कांग्रेस पूरी तरह खत्म हो गई है…

समूचे परिदृश्य को समग्र रूप में देखें तो - (अ) दक्षिण और बंगाल में "हिन्दुत्व" की विचारधारा में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, (ब) भाजपा का प्रदर्शन बेहद निराश करने वाला रहा है…, (स) इन राज्यों में हि्न्दुओं की दुर्दशा में और वृद्धि होगी…। कुल मिलाकर निराशाजनक चित्र उभरा है। भाजपा निराश करती है, और कोई विकल्प है नहीं, जात-पाँत में बँटे हुए लतखोर हिन्दुओं ने शायद "नियति" को स्वीकार कर लिया है…।

एक नमूना पेश है, गौर कीजियेगा –

1) केरल की 140 सीटों में से 36 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार जीते हैं। (मुस्लिम लीग-20, सीपीएम-8, कांग्रेस-7 और RSP-1)

2) केरल में 20% ईसाई हैं, 25% मुस्लिम हैं और 30% कमीनिस्ट (यानी अ-हिन्दू सेकुलर)… यह 75% लोग मिलकर भाजपा को इतनी आसानी से जगह बनाने नहीं देंगे।

3) केरल कांग्रेस (जैकब गुट) नाम की “ईसाई सेकुलर” पार्टी ने 10 सीटें जीतीं, “सुपर-सेकुलर मुस्लिम लीग” ने 20 सीटें जीतीं, “हिन्दू सेकुलरों” ने वामपंथियों और कांग्रेस को विभाजित होकर वोट दिये… नतीजा - दोनों ही प्रमुख दलों को बहुमत नहीं मिला। अब अगले पाँच साल तक केरल कांग्रेस (ईसाई) और मुस्लिम लीग दोनों मिलकर अपना “एजेण्डा” चलाएंगे और कांग्रेस को जमकर चूसेंगे (कांग्रेस को इसमें कोई आपत्ति भी नहीं है)। मंत्रिमण्डल बनने में अभी समय है, लेकिन मुस्लिम लीग और जैकब कांग्रेस ने शिक्षा, राजस्व, उद्योग और गृह मंत्रालय पर अपना दावा ठोंक दिया है… (आगे-आगे देखिये होता है क्या…)

4) मुस्लिम बहुल इलाकों से मुस्लिम जीता, ईसाई बहुल इलाकों से ईसाई उम्मीदवार जीता… हिन्दू बहुल इलाके से, या तो वामपंथी जीता या बाकी दोनों में से एक… (मूर्ख हिन्दुओं के लिये तथा धोबी का कुत्ता उर्फ़ “सेकुलर भाजपा” के लिये भी एक सबक)

सकारात्मक पक्ष :- पिछले 5 साल में संघ कार्यकर्ताओं की ज़मीनी मेहनत का नतीजा यह रहा है कि केरल में पहली बार भाजपा का वोट प्रतिशत 6% तक पहुँचा, 19 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपाईयों को 10,000 से 15,000 वोट मिले, और तीन विधानसभा सीटों पर भाजपा दूसरे नम्बर पर रही। लेकिन यहाँ भी एक पेंच है – ईसाई और मुस्लिम वोटरों ने योजनाबद्ध तरीके से वोटिंग करके यह सुनिश्चित किया कि भाजपा का उम्मीदवार न जीते… कांग्रेस या वामपंथी में से जो मजबूत दिखा उसे जिताया… (मूर्ख हिन्दुओं के लिये एक और सबक) (यदि सीखना चाहें तो…)

असम में भाजपा की सीटें 10 से घटकर 4 हो गईं, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में कोई उपस्थिति दर्ज नहीं हुई…। हालांकि मेरी कोई औकात नहीं है फ़िर भी, भाजपा की इस वर्तमान दुर्दशा के बाद चन्द सुझाव इस प्रकार हैं -

1) भाजपा को सबसे पहला सबक ममता बनर्जी से सीखना चाहिये, विगत 20 साल में उस अकेली औरत ने वामपंथियों के खिलाफ़ लगातार सड़कों पर संघर्ष किया है, पुलिस से लड़ी, प्रशासन के नाकों चने चबवाए, हड़तालें की, बन्द आयोजित किये, हिंसाप्रेमी वामपंथियों को जरुरत पड़ने पर “उन्हीं की भाषा” में जवाब भी दिया। भाजपा “संकोच” छोड़े और कांग्रेसियों से “अन्दरूनी मधुर सम्बन्ध” खत्म करके संघर्ष का रास्ता अपनाये। हिन्दुओं, हिन्दू धर्म, मन्दिरों के अधिग्रहण, गौ-रक्षा, नकली सेकुलरिज़्म जैसे मुद्दों पर जब तक सीधी और आरपार की लड़ाई नहीं लड़ेंगे, तब तक भाजपा के ग्राफ़ में गिरावट आती ही जायेगी… वरना जल्दी ही एक समय आयेगा कि कोई “तीसरी पार्टी” इस “क्षुब्ध वोट बैंक” पर कब्जा कर लेगी। मायावती, ममता बनर्जी, जयललिता चाहे जैसी भी हों, लेकिन भाजपा नेताओं को इन तीनों का कम से कम एक गुण तो अवश्य अपनाना ही चाहिये… वह है “लगातार संघर्ष और हार न मानने की प्रवृत्ति”।

2) ज़मीनी और संघर्षवान नेताओं को पार्टी में प्रमुख पद देना होगा, चाहे इसके लिये उनका कितना भी तुष्टिकरण करना पड़े… कल्याण सिंह, उमा भारती, वरुण गांधी जैसे मैदानी नेताओं के बिना उत्तरप्रदेश के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने की बात भूल ही जाएं…

3) तमिलनाडु और केरल में मिशनरी धर्मान्तरण और बंगाल व असम में जेहादी मनोवृत्ति और बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर गुवाहाटी-कोलकाता से लेकर दिल्ली तक “तीव्र जमीनी संघर्ष” होना चाहिये…

4) जो उम्मीदवार अभी चुनाव हार गये हैं, वे अगले पाँच साल लगातार अपने विधानसभा क्षेत्र में बने रहें, सड़कों पर, खबरों में दिखाई दें, जनता से जीवंत सम्पर्क रखें। जो उम्मीदवार बहुत ही कम अन्तर से हारे हैं, वे एक बार फ़िर से अपने पूरे विधानसभा क्षेत्र का “पैदल” दौरा करें और “हिन्दुओं” को समझाएं कि अब अगले पाँच साल में उनके साथ क्या होने वाला है।

5) सबसे महत्वपूर्ण सुझाव यह है कि भाजपा को “सेकुलर” दिखने की “भौण्डी कोशिश” छोड़ देना चाहिये। मीडिया के दुष्प्रचार की रत्ती भर भी परवाह किये बिना पूरी तरह से “हिन्दू हित” के लिये समर्पण दर्शाना चाहिये, क्योंकि भड़ैती मीडिया के सामने चाहे भाजपा “शीर्षासन” भी कर ले, तब भी वे उसे “हिन्दू पार्टी” कहकर बदनाम करते ही रहेंगे। यह तो भाजपा को तय करना है कि “बद अच्छा, बदनाम बुरा” वाली कहावत सही है या नहीं। इसी प्रकार यही “शीर्षासन” मुस्लिमों एवं ईसाईयों के सामने नग्न होकर भी किया जाए, तब भी वे भाजपा को “थोक में” वोट देने वाले नहीं हैं, तब क्यों अपनी ऊर्जा उधर बरबाद करना? इसकी बजाय, इस ऊर्जा का उपयोग “सेकुलर हिन्दुओं” को समझाइश देने में किया जाये।

दिक्कत यह है कि सत्ता में आने के बाद जो “कीटाणु” अमूमन घुस जाते हैं वह भाजपा में कुछ ज्यादा ही बड़े पैमाने पर घुस गये हैं। राम जन्मभूमि आंदोलन के वक्त की भाजपा का जमीनी और सड़क का संघर्ष, उसके कार्यकर्ताओं की तड़प और आज देश की भीषण परिस्थितियों में भाजपाईयों का “अखबारी और ड्राइंगरूमी संघर्ष” देखकर लगता ही नहीं, कि क्या यह वही पार्टी है? क्या यह वही पार्टी और उसी पार्टी के नेता हैं जिन्हें 1989 में जब मीडिया “हिन्दूवादी नेता” कहता था, तो नेताओं और कार्यकर्ताओं सभी का सीना चौड़ा होता था, जबकि आज 20 साल बाद वही मीडिया भाजपा के किसी नेता को “हिन्दूवादी” कहता है, तो वह नेता इधर-उधर मुँह छिपाने लगता है, उल्टे-सीधे तर्क देकर खुद को “सेकुलर” साबित करने की कोशिश करने लगता है…। यह “संकोचग्रस्त गिरावट” ही भाजपा के “धोबी का कुत्ता” बनने का असली कारण है। समझना और अमल में लाना चाहते हों तो अभी भी समय है, वरना 2012 में महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश में, जहाँ अभी पार्टी “गर्त” में है, वहीं टिकी रहेगी… जरा भी ऊपर नहीं उठेगी।

रही हिन्दुओं की बात… तो पिछले 60 साल में वामपंथियों और सेकुलरों ने इन्हें ऐसा “इतिहास और पुस्तकें” पढ़ाई हैं कि “भारतीय संस्कृति पर गौरव” करना क्या होता है यह एकदम भूल चुके हैं। सेकुलरिज़्म(?) के गुणगान और “एक परिवार की गुलामी” में मूर्ख हिन्दू ऐसे “मस्त और पस्त” हुए पड़े हैं कि इन्हें यह भी नहीं पता कि उनके चारों ओर कैसे “खतरनाक जाल” बुना जा रहा है…

26 comments:

हिन्दुस्तानी said...

बहुत बढिया आंकलन और नसीहत(भाजपा को) है भाई साहब !

वैसे एक बात मोहन जी भगवत ने कहा था की भाजपा राख से भी उठ खड़ी होगी, मुझे राख का इन्तेजार है इस तरह तो ये एक बार राख ही होगी तब ही कुछ प्राण बच सकते हैं नहीं तो यूँ ही डायलसिस पर सिसकती रहेगी !!

एक बड़ा परिवर्तन होना चाहिए !!

Anonymous said...

भाजपा चुक गयी है... जितनी बुराईयां आना थीं आ गयी हैं फिर भी सबसे कम मैली माना जा सकती है...
हिन्दुओं की आंखें खुलने से रहीं और दिमाग भी. कम से आपको यह अफसोस तो न होगा कि बताया न था...
बाकी हिन्दुओं को तो अब भगवान भी बचाने से रहे..

अन्तर सोहिल said...

एक बेहतरीन पोस्ट के लिये आभार
आपसे इन्हीं सुझावों की उम्मीद रहती है।

प्रणाम स्वीकार करें

Ratan Singh Shekhawat said...

भाजपा अब तक संघ के कार्यकताओं की मेहनत का फल ही खाती आई है जब तक खुद संघर्ष नहीं करेगी इसकी हालत यही रहनी है | भाजपा नेताओं ने तो सोच रखा है सत्ता की मलाई वे खाएं और जमीनी स्तर पर मेहनत संघ के कार्यकर्त्ता करें |

त्यागी said...

एक नेपाल में मित्र थे, थे वो सांसद जब उनसे अपने संसदिए क्षेत्र के लोग अपने इलाके के विकास के बारे में प्रशन करते तो वो झल्ला जाते थे और बोलते थे की मुझ से राष्ट्रिय और अंतराष्ट्रीय घटनाओ के बारे में पूछा करो और ऐसे ही मीडिया को हडका देते थे, परिणाम यह निकला की अब उस संसदिए इलाके के विकास के प्रशन तो पूछे जाते परन्तु उनसे नहीं किसी और सांसद से, क्यूंकि अब वो शक्श सांसद नहीं रहा. उसी प्रकार बीजेपी से जब भी कोई उसके मूल मुद्दों पर बात करता है तो वो "अफगानिस्तान पर पाकिस्तान का प्रभाव कैसे कम हो" पर प्रवचन करने लगते है. जो बीजेपी वाले यह सोचते है की कांग्रेस के महंगाई राज और भ्रष्टाचार भरे शासन से नाराज वोटर उसको "ऑटोमेटिक" वोट दे देंगे और सड़क पर संघर्ष पर बचना चाहते है तो वो बहुत ही बड़े भ्रम में है. कांग्रेस २०१४ में भी सत्ता से बहार जाती नहीं दिखती है. अरे बीजेपी वालो तुम उस नरेंद्र मोदी के पीछे एक बार खड़े तो हो जाओ उसकी कुंडली में तो राहू छठे घर में बैठा है उसका तो साक्षात् "काल" भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता है. उसकी प्रचंडता में कोंग्रेस की परखच्चे न उड़ गए तो कहेना. यू पी में राहुल बाबा ने नॉएडा जा कर निश्चितरूप से बढ़त लेली है. बीजेपी वाले यह बात मेरी लिखले. दिग्विजेय जैसे "नंगे" नेता से दो दो हाथ करना सिर्फ और सिर्फ उमा जी को ही आता है. और वरुण गांधी जी को भी मेरी नम्र सलाह है ममता बेनर्जी से सीख कर कुछ संघर्ष करे खाली "शालीनता" से देश से दोरंगे देश द्रोही नहीं भागने वाले है. आज इन पांच राज्यों के चुनाव परिणाम देख कर दिल ही दहल गया, कांग्रेस इन परिणामो से उर्जा पाकर पेट्रोल और डीजल के दाम ६ रूपया बढ़ाने का प्लान कर रही है. बीजेपी वाले खाली शीला दीक्षित से भी नहीं लड़ पा रहे है, एक बात बीजेपी गाँठ बांधले की मीडिया से कुछ भी नहीं हासिल होगा. जो लोग शांति के समय, देश में आगे के लिए शांति बनाने के लिए युद्ध की तयारी करते है उनके ही घर और देश में शांति बनी रहेती है, और जो बिल्ली के आने पर कबूतर की तरह आंखे बंद करते है उनका हाल वो ही होता है जो आज बीजेपी का इन पांच राज्यों में हुआ है. मुझे शंका यूपी और महराष्ट्र की हो रही है. जागो बीजेपी जागो अब बीजेपी को अपने अन्दर भी "मैं" की जगह "हम" पर जोर देना होगा नहीं तो वामपंथियों की तरह "मीयूजीयम" में रख दिए जाओगे.
Tyagi
www.parshuram27.blogspot.com

Prem Yadav said...

BJP Ka Sabse Bura Hal Jharkhand Mein Hone Wala Hia. Agar Ajj Yahan Bidhan Sabha Chunaw Huwa To 80 Main Se 5 Seat Bhi Muskil Se Ayenge. RSS Ki Choukri Ke Alawe Sare Swayamsevak Inse Naraj HAi. Mithilesh Ji (Prant Pracharak) Satark Ho Jaie. Sakhaon Ki Sankhya In Choukri Ke karan KAm Ho Rahi Hai.

Gyandutt Pandey said...

भाजपाई कुन्द हो चले हैं!

Man said...

सर वन्देमातरम ,
सटीक विश्लेषण ,जब तक बी .जे.पी सेंटर में ऐसे ही पेराट्रूपर "" हाय "" प्रोफाइल नेता राज करेंगे तो ये ही हाल होगा |१४ मई सुबह भोर को करीब साढ़े चार बजे मेरे सवप्न में किसी शिव मंदिर की प्राण प्रतीसठा थी ,उस में लाल कृष्ण आडवानी ने भी हिसा लिया ,उन पे जूते चले तो वो बोले ज़माने के हिसाब से चेंज होना चाहिए ?ये बात सही हे !!!!!ये सब दगे बाज हे ?इनकी बेटी इन्तोरियेर डेकोरेटर ! हे इनका पुत्र भी सही जगह सेटल हे !!!फिर भी आज राम मंदिर को भूल गए ?दोगले साले !!!अभी गालिया निकूलांगा ना तो कान के कीड़े झड जायेंगे ?

yogesh saroya said...

BJP मे अब दम नहि रहा हे.... उसे भी congress कि बिमारि लग गयि हे,... समय आ गया हे हिन्दुओ के एकजुट होने का.. किसि आशा कि किरण का इन्तजार से अच्छा हे खुद कुछ ना कुछ करो...

PRITHVI said...

बंगाल केरल असम मे छः करोड़ बांग्लादेशियो ने घुस कर पूरा संतुलन बिगाड़ दिया है.
बंगाल मे मुस्लिम आबादी 35-40% हो गयी है
यही हाल केरल और असम का है.
और सेकुलरो की नीचता इस कदर हावी है कि कोई भी नेता पक्ष विपक्ष का इस सबसे आवश्यक और खतरनाक मुद्धा बांग्लादेशी घुसपैठ के बारे मे बात तक नही करता.

Anonymous said...

Thanks a lot for such a nice description, but the thing is that Hindus do not want to understand...............?
In Bengal, Bengali community thinking is totally different.....................................in the next 30 years Bengali community will never understand this things.............!!!!!!!!!

abhishek1502 said...

100% सटीक आंकलन
हिन्दू अपनी दुर्दशा के स्वयं जिम्मेदार है
अगर कोई आवाज उठती है तो उसे कितना संघर्ष करना पड़ता है नरेन्द्र मोदी जी इस का उद्दहरण है .
सबसे पहले इन नालायक मुर्ख स्वयंभू सेकुलरो का इलाज करना होगा . इस की जड़ कायरतावादी गाँधी और तुष्टिकरण की राक्षसी सोच है . जिसे जड़ से उखाड़ना होगा वर्ना हिन्दू भी अन्य सभ्यताओ की भाति इतिहास की बात ho जायेगा

PRITHVI RAJ said...

भाजपा कांग्रेस बनने के चक्कर मे न घर की रही न घाट की.बिल्कुल प्रभावहीन हो गयी है.
यूपी मे भी चुनाव के लिये सूर्य प्रसाद शाही जैसे लल्लू को कमान सौपी है जो बिल्कुल प्रभावहीन है जिसको कोई नही जानता है.
अगर भाजपा वरुण गांधी को यूपी का मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करके उतारे और वरुण गांधी धमाके दार रैलिया करे और गरीबो से जाकर मिले.
तो 100 % मै कह सकता हूँ कि यूपी मे बीजेपी की सरकार बन सकती है.
लेकिन बीजेपी ऐसा नही करेगी.
उसको भी सेकुलर रोग जो लग गया है.

दिवाकर मणि said...

सुरेश जी, आपका चुनाव पश्चात का विश्लेषण किसी की भी (खासकर हिन्दूओ की) आंख खोलने में समर्थ है लेकिन जिन्हें दिन में ही रतौंधी हो गई हो, उन्हें दिखाई भी दे तो कैसे दे. और सच्चाई यही है कि हिन्दू अपने अतीत या वर्त्तमान से कभी कुछ नहीं सीखने के लिए अभिशप्त है.

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

सुरेश चिप्लिनकर जी की बात से असहमत होने का सवाल ही नहीं होता...सही कहा है आपने...भाजपा को अपना मूल परिचय नहीं बदलना चाहिए...जिस उद्देश्य के लिए यह पार्टी बनाई गई थी उस पर टिके रहना चाहिए...
मुझे लगता है कि श्रीमान लाल कृष्ण आडवानी अपने व्यक्तिगत क्षुद्र स्वार्थों के लिए भाजपा का दुरूपयोग कर रहे हैं...इससे अच्छा तो उन्हें राजनीति से त्याग ले लेना चाहिए व नरेन्द्र भाई मोदी जैसे योग्य व्यक्ति को अवसर देना चाहिए जो न केवल भाजपा अपितु समस्त भारत देश का कल्याण करने में सक्षम हैं...

Anonymous said...

yah chunav ke nateeje BJP sahit sabhi sampardayik dalon ke liye sabak hai.logon ne bata diya hai ki ab yah nahi chalne wala hai.ummeed hai isse in dalon ko samajh aayegi...

katyayan mishra said...

dar asal BJP bhi kya kare hindu chutiye secular hote ja rahe hain verna digvijay singh jaise logon ka to muh kala kar ke hindu samaj se nikal dena chahiye bangladeshi musalmano ne sabhi metro cities ke demography hi change kar dee hai eis liye delhi cal mumbai aur chennai me bina musalmano ko khush kare koi chunav jeet hi nahi sakata hindu kabhi united nahi hoga fir gulam banega jute khayega ramdev baba ummid ki kiran hain agar hum log unka sath de to khul kar chunav lade hindu hiton ki aur desh hit ki taraf kadam badayen jai bharatmata kee

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

सारी पीली लाईनों की हम सराहना करते है, काश ऐसा ना हुआ होता?

Pranay Munshi said...

आप सुरेशजी ऐसा क्यों सोचते है की बीजेपी सदैव अच्छा ही करती है वह भी कही न कही भृष्ट लोगो से मिली हुई है वरना इंदौर में होने वाले IPL मैच में मनोरंजन कर में छुट क्यों देती ... इसका सीधा सा अर्थ है की मनोरंजन कर का पैसा भृष्ट नेताओ के जेब में ही जायेगा ... मैच के समय में stadium में शराब बेचने की खुली छुट दी गई ... ऐसा करके कौन सा हिंदुत्व बचने वाला है भाजपा केवल हिन्दुओ को एक आवेदन पत्र में धर्मं के रिक्त स्थान पर हिन्दू लिखना सिखाएगी ... यदि मध्य प्रदेश की जनता ने पूर्ण समर्पण एवं समर्थन के साथ बीजेपी को जिताया है तो उसके बदले में BJP ने मध्यप्रदेश को क्या दिया ... राज्य परिवहन निगम को बंद करके आम जनता को गुंडे मवालियो द्वारा परेशान होने के लिए छोड़ दिया ... आप भी MP से ही है और आप इसे भली भाँति प्रकार से जानते है ... MP का कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है जुआ सट्टा खुले आम न चलता हो इंदौर में जो विधि व्यवस्था की गत है वह भी आप जानते है .... निवेश के नाम पर बड़े बड़े builders को बुलाया है उपजाऊ भूमि पर व्यावसायिक निर्माण के लिए ...
यदि जिस जनता ने इतने उत्साह से जिताया है उनके लिए कुछ तो करके दिखाओ ... शिक्षण संस्थाओ में ABVP का हस्तक्षेप बहुत अधिक हो गया है ... ABVP एवं बीजेपी की सोच अच्छी है परन्तु क्रियान्वयन तथा नेतृत्व गलत हाथों में है ... आप कभी बीजेपी की निंदा करेंगे तो अच्छा लगेगा ... वैसे भी एक कहावत है निंदक नियरे राखिये ... आँगन कुटी ...
ऐसा लगता है की बीजेपी स्वयं दिग्गी रजा को मध्यप्रदेश में पुन्हा आमंत्रित करना चाहती है ...
मैं भी बीजेपी का घोर समर्थक हूँ परन्तु अब लगता है की अब यदि उससे भी अच्छा विकल्प रामदेवजी है तो क्यों न उन्हें समर्थन दिया जाये
मध्य प्रदेश की राजनीती में सबसे अच्छी बात यह है की वहा की जनता ने कभी भी राजनीति को त्रिशंकु नहीं होने दिया ...
अब यह बीजेपी का दायित्व है कि समर्थक जनता /vote bank को बनाये रखे या फिर कांग्रेस को सोंप दे ....
कही न कही MP कि जनता भी नागनाथ के हाथो से सांपनाथ के हाथो में चले गयी है.
आप लगे रहिये हमारे चक्षु खोलने के लिए ... हमारी राष्ट्र भक्ति बनाये रखने के लिए ..
धन्यवाद्.

P K Surya said...

jane kya hoga rama re.. BJP samah jao...

Anonymous said...

Suresh Ji,

As ever, this article was incisive. However, i have a question for you.

How do you expect BJP to function as a hindutvawadi party, whereas all hindus abhor that. The issue with hindu psychology is that they become liberal to the extent of being suicidal. And we have seen that time and again(including partition of India, branding Savarkar and RSS as communal etc etc).
They become hypocritical of anyone who talks about hindus and brand them as communal. It is the precise issue which all nationalists and RSS have been trying to counter (albiet with little effect).
I think these election results reflect nothing but the success rate of penetration of nationalistic ideology (by RSS/BJP et al)
Please let me know your thoughts.

Regards
Manu
manushreshtha@gmail.com

Rajesh said...

Bahut Hi Badhiya Lekh Likha hai Suresh Ji. Padhkar Bahut Acha laga. In Hinduo ko Sikhsa Ki Jarurat hai. Lekin vo lena nahi chahte hai.

Desh Premi said...

pata nahi in bhajpaiyon ko kab samajh ayegi ki secular sabit kar ye apna or desh ka mn bigad rahe h
Vande Matram !!!!

pramod sharma said...

Vande MATARAM,

BJP MAIN KUCH NAHI HO SAKTA JAB TAK NARENDRA MODI KO AAGE NAHI LAYA JAEEGA.

विभु said...

उत्तराखंड में भाजपा के निशंक की सरकार जिस प्रकार मुसलमानों को रिझाने में लगी है उस पर सुरेश जी के आलेख की प्रतीक्षा है

avenesh singh said...

इन परिस्थितियों में हालिया चुनाव परिणामों को किसी परिवर्तन का संकेत समझ लेना गलतफहमी से ज्यादा नहीं हो सकता । लेकिन इन परिणामों के निहितार्थ का केन्द्र की राजनीति के संदर्भ में विष्लेषण करने पर दो चेतावनियां उभरती हैं। पहली, केन्द्र में सत्ता संभाल रही कांग्रेस ने सारी सीमाएं तोड़ कर मुस्लिम तुष्टीकरण की जिस रणनीति पर काम किया उसके परिणाम अब दिखने लगे हैं। धुर दक्षिण में केरल से लेकर पूर्व में असम तक वह मुस्लिम समर्थन जुटाने और उसके बल पर सरकार बनाने में कामयाब रही है।