Friday, March 11, 2011

ब्लॉगरों का दमन करने और गरीब बीमारों को खसोटने सम्बन्धी दो खबरें… Proposed Ban on Blogging, Health Tax on Indians

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र कहे जाने वाले भारत में हम एक बार पहले भी सन 1975 में देख चुके हैं कि किस तरह एक निरंकुश महिला ने पूरे देश को आपातकाल के नाम पर बंधक बना लिया था, कारण सिर्फ़ एक ही था… कैसे भी हो सत्ता अपने हाथ में रखी जाये। भारत के ज्ञात इतिहास की अब तक की सबसे भ्रष्ट यूपीए-2 (Most Corrupt Government of India)  की वर्तमान सरकार भी कमजोर विपक्ष और “पालतू मीडिया” की वजह से धीरे-धीरे निरंकुशता की ओर बढ़ती नज़र आ रही है। विगत 5-7 वर्षों में, जब से भारत में इंटरनेट का प्रचार-प्रसार तेजी से बढ़ा है, आम आदमी मुख्य मीडिया की चालबाजियों और गाल-बजाऊ प्रवृत्ति को जान-समझकर अपनी आवाज़ ट्विटर, फ़ेसबुक और ब्लॉग (Hindi Blogging in India)  के जरिये मुखर कर रहा है, और यही बात सरकार को पसन्द नहीं आ रही। सरकार को इस बात की परेशानी है कि आखिर “आम आदमी” सरकारी नीतियों की खुल्लमखुल्ला आलोचना क्यों कर रहा है? क्यों विभिन्न प्रकार के न्यू मीडिया द्वारा सरकार के मंत्रियों की पोल खोली जा रही है? क्यों “कथित ईमानदार बाबू” को गरियाया जा रहा है, क्यों समूची सरकार की नाक मोरी में रगड़ी जा रही है…? आम आदमी को ऐसा करने के लिये जो साधन (इंटरनेट) मिला है, अब उस माध्यम पर नकेल कसने की तैयारी शुरु हो चुकी है। साफ़ है कि सरकार ब्लॉग और इंटरनेट की बढ़ती लोकप्रियता से घबरा गई है…

1) प्राप्त समाचार के अनुसार भारत के आईटी कानून 2008 (IT Act 2008)  में संशोधन करने की तैयारियाँ चल रही हैं। प्रस्तावित संशोधन में न सिर्फ़ ब्लॉगर्स, बल्कि नेट सेवाएं देने वाली कम्पनियाँ, वेबसाइटों एवं उपयोगकर्ताओं तक भी शिकंजा मजबूत बनाने की जुगाड़ का प्रावधान है। इस प्रस्तावित कानून में सरकार की पकड़ मजबूत बनाने हेतु, अमेज़न (Amazon) और ई-बे (E-bay)  जैसी नीलामी साइटों, पेपाल (PayPal)  जैसी पैसा ट्रांसफ़र करने वाली साइटों सहित, BSNL, एयरटेल जैसे सेवा-प्रदाता और सायबर कैफ़े, ब्लॉग लेखक, ट्वीट करने वाले और फ़ेसबुक पर बतियाने वाले सभी शामिल हैं। सरकार किसी को कभी भी धर कर जेल में ठूंस सकती है।


सरकार ने कानून की शब्दावली में ऐसे शब्द डाल दिये हैं जिनकी मनमानी व्याख्या की जा सकती है, जैसे कि ब्लॉगर या फ़ेसबुक/ट्विटर लेखक 'हानिकारक', 'धमकी', 'अपमानजनक', 'परेशान करना', 'निंदा करना', 'आपत्तिजनक'(?), 'अपमानजनक', ‘अश्लील', ‘दूसरे की गोपनीयता भंग करने वाला', 'घृणित'(?), 'नस्ली टिप्पणी’, 'काले धन को वैध/अवैध करने की सलाह या जुआ से संबंधित' सामग्री होने पर सरकार कार्रवाई कर सकती है। कोई बेवकूफ़ भी समझ सकता है कि “आपत्तिजनक”, “घृणित” और “निंदा करने वाला” जैसे शब्दों की आड़ लेकर सरकार किसका मुँह दबाना चाहती है।

वरिष्ठ सायबर लॉ विशेषज्ञ पवन दुग्गल (Cyber Law Expert Pawan Duggal)  ने भी इस प्रस्तावित कानून संशोधन को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और कहा है कि ब्लॉगर्स की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पहले से ही काफ़ी कानूनी अंकुश हैं ऐसे में एक और कड़ा कदम लोकतंत्र का गला घोंट देगा। चौतरफ़ा विरोध और आलोचना के बाद सरकार थोड़ी पीछे हटी है, एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि “…अभी हमने इस कानून को अन्तिम रूप नहीं दिया है और अभी हम विभिन्न क्षेत्रों और विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा कर रहे हैं, आप निश्चिन्त रहें जनभावना का पूरा सम्मान किया जायेगा…”। परन्तु सरकार के कदमों और चुनाव आयुक्त से लेकर सीबीआई निदेशक और सीवीसी की नियुक्ति में हुई मनमानी और तानाशाही को देखते हुए साफ़ लगता है कि इंटरनेट पर सरकार की तिरछी नज़र है और नीयत गंदी है।

प्रस्तावित कानून में ब्लॉगर या सेवा प्रदाता ISP पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना अथवा तीन साल से लेकर आजन्म कारावास तक का खतरनाक प्रावधान है, जो कि निश्चित रुप से “आम आदमी” की मुखर होती आवाज़ को तोड़ने के लिये, डराने के लिये पर्याप्त है।

तात्पर्य यह है कि हमारी सरकार चीन से आर्थिक तरक्की और बेहतर इंफ़्रास्ट्रक्चर निर्माण तो सीख न सकी, लेकिन अभिव्यक्ति का गला दबाने का यह काम बखूबी कर गुज़रेगी। चिदम्बरम साहब, आप आम आदमी को सुरक्षा तो दे नहीं पा रहे हैं, कसाब, अफ़ज़ल और अब हसन अली को दामाद बनाकर पालने-पोसने में आपको गुरेज नहीं है… जबकि आम आदमी के पास ले-देकर एक अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता ही तो है, उसे भी आप छीन लेंगे तो वह भ्रष्टाचार, आतंकवाद, महंगाई इत्यादि के खिलाफ़ कहाँ लिखेगा, कहाँ बोलेगा? क्या उन अखबारों में जो सरकारी कागज के कोटे और विज्ञापन के लिये “कुछ भी” कर गुज़रते हैं? या उन चैनलों में, जिनके मालिकान मुनाफ़ाखोर उद्योगपतियों की गोद में बैठे हुए हैं या वेटिकन और अरब देशों से संचालित हैं?

स्वाभाविक है कि आपके पास सत्ता की ताकत है… और आप ब्लॉगर्स-ट्विटर्स-फ़ेसबुकर्स को धमका कर खामोश तो कर लेंगे, लेकिन याद रखियेगा कि “खामोशी का अर्थ शान्ति कभी नहीं होता…”

http://economictimes.indiatimes.com/tech/internet/bloggers-call-content-regulation-a-gag-on-freedom/articleshow/7659593.cms

2) दूसरी खबर एक पत्र के रूप में है जिसका हिन्दी अनुवाद पेश कर रहा हूं… पत्र लिखा है भारत के प्रसिद्ध नारायण हृदयालय के प्रमुख डॉ श्री देवी शेट्टी ने…(Dr. Devi Shetty) । इस पत्र में डॉ शेट्टी ने सभी भारतवासियों से अपील की है कि वे इस बजट में सरकार द्वारा प्रस्तावित “हेल्थ टैक्स” (स्वास्थ्य कर) का पुरज़ोर विरोध करें…

(उस पत्र की इमेज यहाँ पेश है) और मुख्य लिंक यह है… (Narayan Hrudayalaya)  


पाठकों की सुविधा के लिये मैं डॉ शेट्टी द्वारा पेश किये गये बिन्दुओं को रख रहा हूं…

a) सरकार ने इस बजट में “हेल्थ टैक्स” के नाम से 5% सर्विस टैक्स (Service Tax on Health and Hospitals)  लगाने का प्रस्ताव किया है।

(b) जनता को मूर्ख बनाने के लिये कहा गया है कि सिर्फ़ AC (वातानुकूलित) अस्पतालों और वहाँ इलाज करवाने वाले अमीर मरीजों पर ही यह टैक्स लगाया जायेगा, लेकिन डॉ शेट्टी के अनुसार किसी भी प्रकार का ऑपरेशन करने वाला अस्पताल अथवा ब्लड बैंक हमेशा AC ही होता है। अर्थात यदि अब से किसी भी व्यक्ति की हार्ट सर्जरी हुई और उसमें 1 लाख का खर्च हुआ तो उस मरीज से 5000 रुपये सरकार और अधिक छीन लेगी, जबकि यदि दुर्भाग्य से आपका कैंसर से सम्बन्धित ऑपरेशन हुआ तो सरकार आपकी जेब से अतिरिक्त लगभग 20,000 रुपये हड़प लेगी।

डॉ शेट्टी (जो कि चेरिटेबल अस्पताल चलाते हैं और न्यूनतम शुल्क में हार्ट सर्जरी करते हैं) ने आँकड़े पेश करते हुए बताया है कि भारत सरकार अपने कुल बजट का सिर्फ़ 1% ही स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करती है, दुनिया में सिर्फ़ पाकिस्तान ही ऐसा देश है जो इससे कम खर्च करता है… जबकि बांग्लादेश से लेकर अफ़्रीकी गरीब से गरीब देश भी अपनी जनता के स्वास्थ्य पर इससे अधिक खर्च करते हैं (यह भी 60 साल के कांग्रेस शासन की “उपलब्धि” है)। देश की 80% से अधिक स्वास्थ्य सेवाएं निजी अस्पतालों के जरिये चलती हैं, जिन से सरकार सेल्स टैक्स, कस्टम ड्यूटी (महंगे विदेशी उपकरणों पर), VAT, लक्ज़री टैक्स (कहीं-कहीं) एवं भारी-भरकम बिजली की दरें सब कुछ एक साथ वसूलती है… अब सरकार की नज़रे-इनायत निम्न और मध्यम वर्ग के मरीजों पर भी पड़ गई है।

डॉ शेट्टी आगे कहते हैं, “हमारे देश की सिर्फ़ 10% जनता ही इस स्थिति में है कि वह हार्ट, ब्रेन अथवा कैंसर के ऑपरेशन का खर्च उठा सके… जबकि दूसरी तरफ़ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों द्वारा करवाये जा रहे जन-स्वास्थ्य बीमा योजनाओं से भी 8% सर्विस टैक्स वसूल रही है…”। प्रत्येक सरकार का फ़र्ज़ है कि वह अपने नागरिकों को उच्च दर्जे की स्वास्थ्य सुविधाएं भले ही मुफ़्त न सही, लेकिन कम से कम दामों और शुल्क पर उपलब्ध करवाये…। यहाँ तो उल्टा ही हो रहा है कि, सरकार उसका कर्तव्य तो पूरा कर ही नहीं रही, बल्कि जैसे-तैसे अपना पेट काटकर, मंगलसूत्र-चूड़ी बेचकर, ज़मीन-मकान गिरवी रखकर दूरदराज इलाके से आने वाले मरीजों से, पहले बीमा पॉलिसी में 8% (Service Tax on Medical Insurance)  और फ़िर अस्पताल के बिल में 5% सर्विस टैक्स से नोच खा रही है… यह बेहद अमानवीय कृत्य है और जनता को इसका विरोध करना ही चाहिये…। जनता के जले पर नमक तब और मसला जाता है, जब कोई निकम्मा नेता महीनों तक AIIMS (http://www.aiims.edu/) जैसे महंगे अस्पताल में सरकार ही तरफ़ से मुफ़्त इलाज करवाता रहता है, या हर हफ़्ते मुफ़्त डायलिसिस करवाकर खामखा देश पर बोझ बना घर बैठा रहता है…

डॉ शेट्टी ने अपील की है कि यह खबर अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाएं व धरना-प्रदर्शन-ज्ञापन-विरोध-काले झण्डे जैसा जो भी लोकतांत्रिक तरीका, आम आदमी अपना सके… उससे सरकार का विरोध करना चाहिये।

उक्त दोनों खबरें बेचैन करने वाली हैं, एक टैक्स प्रस्ताव से आपकी फ़टी हुई जेब का छेद और बड़ा की तैयारी है, जबकि अन्य प्रस्ताव से “विरोध करने वाली स्वतन्त्र आवाज़ों” को कुचलने का कार्यक्रम बनाया जा रहा है…। लेकिन दूसरी बार सत्ता में आये मदमस्त प्रधानमंत्री से दोबारा वही कहूंगा कि… “खामोशी का अर्थ शान्ति नहीं होता, ऐसा समझने की भूल कभी न करें कि जनता खामोश है यानी सब अमन-चैन है…”

37 comments:

संजय बेंगाणी said...

सत्ता का नशा जब सर चढ़ कर बोलता है तब यही होता है.
कहीं राजकुमार के नारी-उद्धार की खबर मुक्त माध्यम से लीक न हो जाए उसकी व्यवस्था तो नहीं हो रही?

अपन तो लिखेंगे. ज्यादा मुखर हो कर लिखेंगे. यही विरोध का सही तरीका होगा.

vivek said...

sureshji lagta hai congress sarkaar misra jaise kranti ki neev rakh rahi hai

aaj nahi kal is sarkaar ko ukhadne ki taiyari karni hi padegi

दिवाकर मणि said...

संजय बेंगाणी जी की बात में सच्चाई है, कहीं "भोंदू युवराज वाली बात का प्रसारण" तो इसके पीछे का कारण नहीं है।

खैर, "सच कहना अगर बगावत है, तो समझो हम भी बागी हैं।"

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जाते-जाते : सुरेश जी और अन्य बंधुओं से अब 29 मार्च को मुलाकात होगी। पुत्रमिलन को जिया बेताब है...

तब तक के लिए सबको राम-राम

सुलभ said...

भ्रष्ट सरकार लोकतंत्र में जबरदस्ती बने रहने के लिए जोड़ लगा रही है.

कोई फर्क नहीं पड़ता, अच्छा है जल्द लगाये इन्टरनेट पर पाबंदी. आज तो लोग सिर्फ बोल के, गालियाँ देकर, भड़ास निकाल शांत बैठ जाती है.
पर इसके बाद जो कुछ होगा, वो सरे आम सडको पर होगा. तब असली लोकतंत्र का नज़ारा देखने को मिलेगा.
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दूसरी घटना हेल्थ टैक्स को लेकर है, इस पर फिलहाल विरोध जरुरी है.

rohit said...

भाऊ कहीं ऐसा तो नहीं की निजी क्षेत्र की स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को लाभ पहुचने की द्रष्टि से ऐसा किया गया हो ताकि लोग डर कर ज्यादा से ज्यादा स्वास्थ्य बीमा कराये. जैसा अमेरिका में ओबामा ने करवाया था

vedvyathit said...

videshiyon kee sarkaar kuchh bhi kr skti hai

Suresh Chiplunkar said...

सरकार द्वारा जारी नोटिफ़िकेशन में अंग्रेजी का शब्द "Blasphemy" (यानी ईशनिन्दा) भी है… क्या कोई इसका मतलब बता सकता है कि यह भारत जैसे देश में क्या मायने रखता है? ब्लॉगरों पर नकेल कसने में "ईशनिन्दा" शब्द? कुछ समझ नहीं आया…
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(कहीं इसका मतलब ये तो नहीं कि गाँधी-नेहरु परिवार की आलोचना करना "ईशनिन्दा" माना जायेगा?) ha ha ha ha ha

पद्म सिंह said...

“खामोशी का अर्थ शान्ति नहीं होता, ऐसा समझने की भूल कभी न करें कि जनता खामोश है यानी सब अमन-चैन है…”

घड़ा भरने दीजिये... इलाज सब का है

सम्वेदना के स्वर said...

सरकार को लैपटाप वाले ब्लोगर्स नहीं
लैपडाग मीडिया चाहिये!

हमारा अनुमान है कि इस बार सत्ता हस्तानांतरण इतनी आसानी से नहीं होगा। 2009 वाली चाल से आगे बढ़्कर कुछ होना चाहिये।

honesty project democracy said...

वास्तव में इस UPA सरकार ने बेशर्मी की सभी हदें पार कर ली है.....जन और सामाजिक सरोकार से कोई वास्ता नहीं है इस सरकार का ,ना ही इनके भ्रष्ट मंत्रियों का और ना ही उनके पार्टनर धनपशु उद्योगपतियों का .......अब जनता को जान की परवाह किये वगैर सत्ता से इन कुकर्मियों को उतारने के लिए कुछ ना कुछ करना ही होगा.....

Chandan said...

ये मुल्क है अमन का... यहाँ पे सब शांति शांति है... यहाँ पे सब शांति शांति है.

हजारों सालों से लुट रहे हैं फिर भी शांत हैं तो अब कैसे उठेंगे? सोचने वाली बात है, लकीर के फकीर कठमुल्ले इस्लामिक मुल्क तक जागने लगे हैं, पर हम सोए हुए हैं.

kumarbiswakarma said...

समझ में ही नहीं आ रहा क्या कहे ? पढ़ कर मस्तिस्क सन्न हो गया ! ये हराम के पिल्ले देश की गरीबी नहीं देश के गरीबों को खत्म करना चाहते है ! जनता के ऊपर टैक्स के ऊपर टैक्स ले रहे है ! अब कोई बीमार हो तो उसपे भी टैक्स देना होगा ! इन कमीनो को ज़रा सी सीने में दर्द हो जाये तो हमारे ही पैसे से अमेरिका जा कर अपना इलाज करवाएंगे वो भी पुरे परिवार के साथ ! वह..... क्या देश है और क्या सरकार हमारे ही पैसे पे ऐश कर रहे है और हमे ही धमका रहे है !............... और हम सब भी निट्ठलों और कायरों की तरह सब कुछ सुन और सह रहे है ! अब तो लगता है यहाँ भी मिस्र और लीबिया की तरह आन्दोलन होना चाहिए ............अब बरदास्त के बाहर हो रहा है ये सब .........

सम्वेदना के स्वर said...

your comment on our latest post is awaited>

JANARDAN MISHRA said...

जब परिवार में बुजुर्ग ही निकम्मे हों ते बाकि लोग उन्न्मादी ही होंगे, हम हिन्दुओं का एक कहने के लिए परिवार है बीजेपी, और संघ, ये हमारे बुजुर्ग हैं, अभी अडवानी (जन्मस्थल: करांची) ने, माइनो को ख़त लिख कर काले धन के बारे में माफ़ी मांगी, कुछ दिन पहले पाकिस्तान जाकर जिन्नाह कि तारीफ भी कर आये हैं, अब इन "बुढऊ" से हम क्या उम्मीद करें गें, येभी बिना पेंदे के लोटे जैशे हैं, और यही बीजेपी के सर्वे सर्वा कहे जाते हैं, जहाँ तक संघ कि बात करें तो, सुदर्शनजी के सोनिया माइनो वाली टिपण्णी पे संघ ने और बीजेपी ने साथ ना देकर अपनी नियत साफ कर दी, अब अगर ऐशे लोग हिन्दुओं के ठेकेदार रहेंगे तब तो माइनो और उश्के पालतू कुत्ते हम पर अंकुश लगायेंगें, लेकिन हमें पहले अपने ही घर कि साफ सफाई करनी पड़ेगी, और जहाँ तक सवाल हेल्थ टेक्स का है तो हमलोग तो माध्यम वर्ग से है, किसी तरह भगवन भरोशे जी लेंगे, लेकिन कुछ लोंगों {?????} के पास भरपूर धन होने के बाद भी क्या होता है, अमरसिंग चार कदम चलने के बाद बैठना पड़ता है, शरद पवार भगवान ने जैशी दानत थी वैशा ही मुह बना दिया है,

रंजना said...

जन मन क्षुब्ध और आक्रोशित है...
उम्मीद है हमारे सब्र का और उनके पाप का यह घड़ा जल्द ही फूटेगा...

चलिए जबतक अभिव्यक्ति का गला पूर्णतः घोंट न दिया जाए हम अधिकाधिक इस माध्यम का उपयोग कर जनचेतना जगाएं....जिस दिन यह राह बंद कर दिया जाएगा,उसदिन कोई दूसरा रास्ता खोल लेंगे हम...

कुछ लिंक आज मैंने भी अपने ब्लॉग पर डाले हैं,आपसे अनुरोध है कि उनको भी अधिकाधिक प्रचार दें..केवल हम आप कुछ कहेंगे तो हो सकता है कि लोगों को यह लगे कि हम बायस्ड हैं...जिन्हें लोग बड़े लोग मानते हैं,उनके विचार भी लोग सुन लें और अपने विवेक से विचार कर फैसला करें कि क्या सही है क्या गलत...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

आपातकाल का नया माडीफाइड वर्जन जैसा कुछ ? ...

अजय सिंह said...

हमें किसी की कारगुजारिया उधेडने को गलत कहा रहा है और उसे प्रतिबंधित करने के लिए सोचा जा रहा है है तो ऐसो गलती बार-बार करना होगा वर्ना वो दिन दूर नही जब हम भारतीय-तालिबानियों से घिरे होंगे |

इनकी आर्थिक निति हमेशा ही अमीरों को और आमिर , गरीबो को और गरीब करने की रही है | हमे इनकी गन्दी निति को आम जनता के बीच में रखना होगा ताकि इन्हें जब गलती का एहसास हो तो पैर के निचे जमीं और सर के ऊपर आकाश न हो |

जय जय भारत

Kajal Kumar said...

पड़ोसी अरब से भी कोई कुछ न सीखे तो हमारे ठेंगे से.

krishnakumarsoni (RAMBABU) said...

कृष्ण कुमार सोनी(रामबाबू)
यू.पी.ए.सरकार अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर आमजन से उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को छिनने के दुष्कृत्य का पूर्ण विरोध व निंदा की जानी चाहिए.यू.पी.ए.सरकार के इस कार्य को भी आपातकाल लगाने जेसी ही श्रेणी में माना जायेगा, समय आने पर देश का आमजन पूर्व की भांति ही इसका जवाब भी देगा

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद said...

@ सुरेशजी, नारायण हरुद्याल्या के डॉक्टर शेट्टी को मैं अच्छी तरह से जनाता हूँ, हौसुर रोड पर या यूँ कहिये बंगलोरे के दक्षिणी क्षेत्र में सबसे "लग्जरी अस्पतालों" में से एक होने के बाद भी डॉ शेट्टी शालीन हृदय इंसान है.. दो दिन पहले जब उनसे बात हुई तो उनका अच्छा व्यक्तित्व सामने आया, उन्होंने फौरी तौर पर बताया की " केंद्र सरकार" शराब तम्बाकू और दृग्स जैसी चीज़ों पर टैक्स बढाने के बजाय गरीब लोगों के जेबों की सर्जरी कर रही है... और लोगों को मुर्ख बना रही है..
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दूसरी दुःख की बात है की पहले हम "विस्फोट.कॉम " को निष्पक्ष वेब पोर्टल समझते थे.. लेकिन संजय तिवारी को भी लगता है कांग्रेस की या यूँ कहिये "नारायण दत्त तिवारी" की दलाली वाली बीमारी लग गयी. रात को आठ बजे पोर्टल पर शीर्षक था..// कांग्रेस का "बलात्कारी युवराज". राहुल घान्धी के बारे में ऐसी न्यूज़ पहले बार सुनी तो झटका लगा. लेकिन उससे भी बड़ा झटका तब लगा जब सुबह आते ही "विस्फोट.कॉम" पर गया तो खबर भूत के मानीन्द गायब हो चुकी थी.. लेकिन गडकरी के "मुतने की खबर" ६ -६ महीनो से चिपका के रखा है.. इसे कहते है "फट्टू या दलाल संजय तिवारी" . आजकल ये भी इतना "सेक्युलर" हो गया है की "आपके साम्प्रदयिक (?) लेख भी विस्फोट पर नहीं लाता है.... वह रे दल्ले...वाह...

राजेंद्र जांगिड

viral trivedi blogspot.com said...

sureshjee namaskar, viral trivedi from Gujarat. I want to trancelat in Gujarati your article about sonia and post my blog Hindu vichardhara.

sunil patel said...

आदरणीय सुरेश जी, इस खबर के लिए धन्यवाद. वाकई सर्कार आम जनता के साथ विश्वश्घात करने जा रही है.

* आजादी के बाद से सच्चा इतिहास पढाया ही कहाँ जाता है. जो निजी लेखक लिखते है उनमे से अधिकतर अंग्रेजी में होता है और वोह भी बहुत महंगा होता है सो आम व्यक्ति की पहुँच से दूर होता है. वाह रे अंग्रेजी नियमो की कापी पेस्ट कर के बनी हमारी न्याय व्यवस्था. आज के स्नातक बल्कि स्नातकोत्तर के पाठ्य क्रम में भी आपातकाल के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती है. १९७५ ka आपातकाल क्या था, क्यों लगाया था, किनसे लगाया था, क्या हुआ था, क्या वोह वाकई नाज़ी सासन से भी ज्यादा निर्दय समय था आदि. आम जनता को सही इतिहास पता चला है उसका कारन ही इन्टरनेट है. अगर यह जरिया बंद हो जायेगा तो आम आदमी को कुछ पता ही नहीं चलेगा. यह समय तो आपातकाल से भी ज्यादा खतरनाक है.

* लार्ड मैकाले ने भारत में साड़े तिन (३.५) साल के प्रवास में हमें हजारो साल के लिए मानसिक गुलाम बना दिया है.

* हमारे देश का दुर्भाग्य है की इस देश की नीतिया नियम ऐसे लोग बनाते है जिन्हें यह नहीं मालुम होता है की गुड तेल का भाव क्या है, या गुड तेल बोतल या पन्नी में मिलता है (अर्थात इतने अमीर या उच्छ बल्कि अति उच्छ वर्ग से होते है). या फिर २२-२३ साल के नौजवान नवयुवती होती (अर्थात आई, ए. एस.) जिन्हें जीवन का कोई भी ठोस अनुभव नहीं होता है.

* यह समय हजारो सालो तक भ्रष्टाचार का युग कहलायगा. यह भ्रष्टाचार, घोटालो का परचम है, पराकास्था है

Menaria Bablu said...

खामोशी का अर्थ शान्ति नहीं होता, ऐसा समझने की भूल कभी न करें कि जनता खामोश है यानी सब अमन-चैन है…

indian said...

यह लेख उन लोगों की नीन्द खोलने के लिए काफी हैं जो अभी भी जुल्म सहन कर रहे हैं और कहते हैं की हम लोग क्या कर सकते हैं मैं उन लोगों से ये पूछना चाहता हूँ की वो अपनी प्रतिक्रिया कब जाहिर करेंगे जब ये सरकार हम से हमारे जीने के सारे हक छीन लेगी नहीं हम लोग यूं ही सरकार को कोसते हुएँ अपने साथ अत्याचार होते रहने नहीं दे सकते हमें संगढ़ित होकर इस सरकार और सभी भ्रष्ट लोगों को उखाड़ फेकना होगा .मैं ये मानता हूँ की ये एक दिन मैं नहीं हो सकता पर हम अगर हम सुरुआत ही नहीं करेंगे तो कुछ नहीं होगा तो सुरुआत तो करो फिर देखेंगे कुछ होता हैं की नहीं.जब भी अगले चुनाव होगे तो ये संकल्प ले की हम किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को अपना बहुमूल्य वोट नहीं देंगे हम स्वछ और इमानदार लोगो को वोट देंगे.

जय हिंद

Bhagat Singh Panthi said...

इस खबर के लिए धन्यवाद

Man said...

वन्दे मातरम सर ,
इस कांग्रेस और यु.पि .ए सरकार की नेट पर पूरी तरह से "नथ उतराई" जनता दुआरा की जा रही हे जिनमे सबसे ज्यादा संख्या युवावो की हे ,इसी से घबरा कर महाचोर कांग्रेस सरकार सकते में आ गयी हे |सोनिया और युवराज ,और नेहरु गाँधी साम्राज्य के भी काले कारनामे इन दिनों नेट पर हॉट सीट पे हे |लोगो के मन की भड़ास छप्पन भोग की तरह विभिन्न गालियों से इस परिवार और कांग्रेस्सियो पर निकल रही हे |साले कांग्रेसी नेट पर कूत्तिया के पिल्ले तरह दडबे में दुबके हुवे हे |इसी का बदला लेने की लिए सरकार ये निरुंकश कानून ला रही हे |रही बात स्वास्थ सेवा पर टेक्स बढ़ाने की तो नेट पर इस मुद्दे पर भी सरकार को नंगा किया जाये और iska मूह काला किया जाये बारी बारी ?

O.L. Menaria said...

Chupchap bardast karne ke banispat pratyek ko apna virodh prakat karna chahiye jis se nirankush shashkon ko janta ka daar bana rahe.

Deepesh said...

इन मादर*** कांग्रेसियों ने तो हद बहुत पहले ही पार कर दी थी ये हरामी भारत को इस्लामिस्तान बनाने की पूरी कोशिश करेंगे. इन हराम के पिल्ले कांग्रेसियों की नसबंदी बहुत जरूरी हो गई है.

P K Surya said...

UPA सरकार ने बेशर्मी की सभी हदें पार कर ली है..... jawahar kal nehr, indira gadhi ho ya soiya gadhi, rajiv gadha ho ya rahu gadha jab enka janam he ajeebo garib tarike se he hua hai bole to videshi tariko se hua hai, en gadha ya gadhi family jinka koi eman dharam nahi hai to desh bhi waise he chalayenge na,,,, sala ye jawala kal nehr us samay apne kapre vides se press karwata tha jab desh or garib thi to ab to ye sale apne jarurat k liye kitne bhi nichi gir sakte hai ye puri family anaconda ajgar se bhi jaharili hai jo vish bhi degee or nigle ge bhi... jai bharat

vijender said...

suresh ji ram-ram, appke blog ke madyam se talibani congresh Duara janta ki abhiviyakti per hamle (bandisho) ke samacchar pada? ye talibani congresh apne khilap utne bali aawaj ko bardasht nahi kar pate he ,media(eletronic& print)to inka pahle se hi bhand ban chuka he(ekk doo ko chorkar)blog hi janta ki abhiviyakti ka madyam bacca he jis per talibani congresh ki nazar tadi ho gai he/ inko deshdrohi arundhati, vinashak sen, azam,gilani, abdula,harsh mandar,sitla, hussain(khukiyat painter)ki abhiviyakti ki azadi to manjur he per apne virodhiyo ki nahi, suresh ji aggar ye talibani congresh hmare per partinbandh lagye gi to hum appna channel satapit karne per gambhirta se bichar karange(haat badane ki der bhar he log sahyog ke liye tayar behte he / Bharat mata ki jai

rohit said...

भाई सरकार ऐसा कर रही है तो इतनी चिल्ल पों क्यों मचा रहे हो. करने दो ब्लॉग को बंद लगाने दो इंटरनेट पर पहरा हमारा क्या हम तो पहले भी सो रहे थे अब थोडा और चैन से सो लेंगे .
जो यह आदमी है ना सुरेश चिपलूनकर नीद भी ढंग से नहीं लेने देता जाने क्या क्या ब्लॉग पर लिखता रहता है. सरकार सही कर रही है ऐसे लोगो के साथ ऐसा ही होना चाहिए जो दूसरो को जगा जगा कर उनकी नीद ख़राब कर देते है अरे भाई हम सोना चाहते है सोने दो ना.
हमारी नीद तो कुम्भकर्ण को भी शर्माने पर मजबूर कर दे फिर क्यों यह हमें उठा रहे है.
सरकार को सलाह और समर्थन देता हूँ की लगादो पहरा इस इन्तार्नेतौर ब्लॉग पर ताकि युवराज भी आराम से खुले आम सडको पर घूम सके

rohit said...

कुछ लोग कहते है की ख़ामोशी को शांति ना समझे इसका मतलब में तो यह निकलता मुर्दे बोला नहीं करते

Manu said...

Suresh Ji,

As i said before, your writings do have an inspiring impact. But people need direction w.r.t. specific actions to be performed. I guess the whole thread is revolving around how do we wake up from the slumber.

If you can suggest some forums etc which people can join to do some ground work, it will be a great help.
I would also request people thronging Suresh Ji's blog to be determined to spare time and be action oriented. Times have gone wherein mere expression of frustation is enough. We need to hit the ground and DO some positive deeds.

Mrs. Asha Joglekar said...

Aapki chetawani sahee hai. Sarkar aisa kadam utha sakti hai par imergency laga kar warna abhiwyakti kee swatantrata ka kya ?
स्वास्थ्य़ सेवाओं पर सर्विस टैक्स लगाने के बजाय सरकार को चाहिये कि मुफ्त खोर सांसद, विधायक और मंत्रियों से कम से कम १० प्रतिशत खर्च वसूल करे । इस सर्विस टैक्स की जरूरत ही नही रहेगी । शराब सिगरेट पानमसाला आदि पर ५० प्रतिशत टैक्स लगाये ।

गलती से ये टिप्पणी पिछले लेख पर हो गई थी, क्षमा प्रार्थी हूँ ।

viral trivedi blogspot.com said...

कृपया जवाब दिजीए।

Anonymous said...

एक ठोस उपाय झूठ पर प्रहार का - गिरीश नागड़ा
एन डी टीवी और तुिष्टकरण मे लगे हुए अन्य मीडिया और राजनीति के ऐसे तमाम लोगो से निपटने का सबसे अच्छा और प्रभावशाली एक उपाय यह हो सकता है कि हर इस तरह की घटनाओ पर उनके खिलाफ तथ्यात्मक आक्रामक याचिकाये दायर की जाये और संबधित झूठे और निहित स्वार्थी मक्कार तत्वो को जो अपने कुत्सित उद्श्यो को इस प्रकार से पूर्ण करना चाहते है उनको किसी भी एंगल से कानून के दायरे में लाया जाये और इन्हे बताया जाये कि ये लोग निहीत स्वार्थो के चलते बदनीयती से भरा जो झूठ बोलते है और इसके द्वारा देश के हितो को सच्चाई को जो भारी आघात पहुचाने का दुस्साहस करते है वह बेहद गलत है एक दंडनीय अपराध है और इसकी उन्हे सजा भुगतना ही पढ़ेगी इससे वे अब बच नही सकते। ऐसे लोग अगर यह समझते है कि किसी भी बारे मे कुछ भी तथ्यहीन झूठ उछालने का इन्हे जन्म सिद्ध अधिकार मिल गया है और कोई इसके लिए इनकी गर्दन पकडने वाला नही है और न ही कोई इनका कुछ बिगाडने वाला है तो यह उनकी गलतफहमी सिद्ध हो। और अब इसे और नजरअंदाज नही किया जाए।
इसके लिए उन्हे जवाबदेही स्वीकारने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए । क्याकि राष्ट्र के प्रति मानवता के प्रति इस प्रकार के कृत्य एक गंभीर अपराध है प्रकारांतर से यह देशद्रोह जैसा ही गंभीर मामला है और इसके लिए उन्हे कदापि माफ नही किया जाना चाहिए । इसकी उन्हे कठोरतम सजा अवश्य मिले ऐसा हमारा प्राणपण से प्रयास होना चाहिए ताकि फिर चाहे वह दिग्विजयसिंह जैसा नेता हो विनोद दुआ कुलदीप नैयर जैसा पत्रकार हो या समाजसेवा का मुखौटा लगाये तिस्ता शितलवाड़ जैसी समाजसेवक हो कोई भी हमारे देश धर्म के साथ मनचाही खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।
हमारे यहां प्रेस और अभिव्यक्ति की नि:संदेह आजादी है परन्तु उसकी आड़ में अपने कुत्सित उद्देश्यो को पूरा करने की राष्ट्र के हितो को स्वच्छन्दता पूर्वक चोट़ पहुचाने की अनुमति तो हरगिज किसी को भी नही है। अगर एक एक इस तरह की घटना या हरकतो पर कम से कम दस दस तथ्यपूर्ण याचिकाये न्यायालयो में दायर होने की स्थिति अगर हम बनाने मे सफल हो जाते है तो मेरा दावा है कि इन्हे जवाब देते ही नही बनेगा और ये सारी चौकडी भूल जायेगे और फिर अंततः ये झूठे गंदे लोग ऐसे गायब हो जायेगें जैसे गधे के सिर से सिंग । बस इसके लिए संकल्प और कुछ समर्पित बुद्धिजीवी वकीलो की आवश्यकता है । न्यायिक स िक्रयता का यह ऐसा एक सौ टंच ठोस उपाय साबित होगा जो न केवल बेहद व सुनिश्चित सकारात्मक परिणाम देगा बल्कि इस गंदी बीमारी कुत्सित दुस्साहस को जड़ से ही खत्म कर देगा ।

Devdoot said...

अब इन हरामियो को बाबा रामदेव की तरह मंच पर चढ़ कर और चोहरायो पर खड़े होकर गालिया देनी होगी| सभी ब्लागरो को एक साथ इन पर हमला बोलना होगा| सर फरोसी की तमन्ना दिल में हमारे है| देखना है कितना जोर बाजुए कातिल में है| इन्कलाब ज़िंदाबाद, सरदार भक्त सिंह जिंदाबाद, महान क्रातिकारी के बलिदान दिवस पर से ही शुरू कर दो ये अभियान|