Tuesday, March 8, 2011

क्या भारत का अंतरिक्ष और मिसाइल कार्यक्रम सुरक्षित है? (सन्दर्भ – ईरान)…… India’s Satellite Missile Programme Security

कल्पना कीजिये कि पावरग्रिड सिस्टम फ़ेल होने से अचानक पूरे भारत की बिजली गुल हो जाये, सभी प्रमुख बैंकों के सर्वर ठप होने से आर्थिक गतिविधियों में अफ़रातफ़री मच जाये, बाँधों में पानी की क्षमता पर नज़र रखने वाला सिस्टम फ़ेल हो जाये और सभी गेट अपने-आप खुल जायें, हवाई अड्डों पर ट्रेफ़िक नियंत्रण प्रणाली खराब हो जाये और सभी हवाई जहाज आकाश में एक-दूसरे से टकराने लगें… तो इन प्रलयंकारी घटनाओं से किसी देश को तबाह होने में कितना समय लगेगा?

उपरोक्त काल्पनिक घटनाएं मैं आपको डराने के लिये नहीं कह रहा हूं, और न ही भारत के सायबर विशेषज्ञों की क्षमता पर कोई सवाल खड़ा कर रहा हूँ, परन्तु आज जिस तेजी से समूची दुनिया कम्प्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर निर्भर होती जा रही है उसमें ऐसी किसी (कु)संभावना को खारिज़ भी नहीं किया जा सकता। चीन, अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों ने गुप्त रुप से भविष्य में होने वाले “सायबर महायुद्ध” (Cyber War and Third World) की गुपचुप तैयारियाँ काफ़ी पहले शुरु कर दी हैं।

पिछले 1-2 वर्षों में कुछ ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे यह शक गहराता जा रहा है कि क्या भारत जैसे देशों की तरक्की में अड़ंगा लगाने के लिये “सीमित सायबर हमले” किये जा रहे हैं? ताज़ा मामला है ईरान के परमाणु संयंत्र का… उल्लेखनीय है कि जब से ईरान ने परमाणु कार्यक्रम हाथ में लिया है तभी से इज़राइल समेत समूचा पश्चिमी विश्व उसे रोकने और उसके इस कार्यक्रम में रुकावटें पैदा करने की लगातार कोशिशें कर रहा है। हालांकि ईरान कह चुका है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ़ ऊर्जा के लिये है (Iran’s Atomic Programme), हथियारों-मिसाइलों के लिये नहीं, पर किसी को भी अहमदीनेजाद पर भरोसा नहीं है। चूंकि ईरान किसी के रोके नहीं रुक रहा और उसे रूस और चीन का मूक समर्थन भी हासिल है तो अब उसके परमाणु कार्यक्रम को पीछे करने और खेल बिगाड़ने के लिये “सायबर युद्ध” का सहारा लिया जा रहा है।



हाल ही में जिस परमाणु संयंत्र से ईरान को सर्वाधिक बिजली उत्पादन मिलने की सम्भावना बनी थी, उस रिएक्टर (Iran’s Nuclear Power Reactor) में कुछ खराबी आ गई। ईरान के वैज्ञानिकों द्वारा गहन जाँच में सामने आया कि पिछली बार और इस बार आई दोनों खराबियों का कारण “बशर परमाणु रिएक्टर” के प्रमुख कम्प्यूटरों में “स्टक्सनेट” (Stuxnet Virus)  नामक वायरस है। यह वायरस इस रिएक्टर के नेटवर्क में फ़ैला है और इसने चुन-चुनकर उन्हीं सिस्टम को फ़ेल किया है जो परमाणु रिएक्टर को चालू करने में आवश्यक हैं। इस वायरस की वजह से ईरान का परमाणु कार्यक्रम फ़िर से बाधित हो गया है और इसे चालू करने में अब और देर होगी।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु एजेंसी (IAEA)  के सदस्य ईरान में सतत मौजूद रहते हैं और परमाणु रिएक्टरों की निगरानी करते हैं कि कहीं ईरान गुपचुप परमाणु हथियार तो नहीं बना रहा। ईरान ने इन परमाणु इंस्पेक्टरों को बताया है कि निश्चित रुप से कोई बाहरी शक्ति उसके शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम में खलल पैदा कर रही है। रुस ने, जो कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कच्चा माल सप्लाय कर रहा है, ने इसकी जाँच की माँग की है और कहा है कि यदि यह बात सच निकली तो चेरनोबिल जैसी किसी बड़ी परमाणु दुर्घटना या सीमित परमाणु युद्ध की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। ईरान के बशहर में स्थित इस परमाणु संयंत्र की लागत अब तक 2 अरब डालर तक पहुँच गई है, इसके आसपास एंटी-मिसाइल तकनीक सहित बेहद कड़ी सुरक्षा है, क्योंकि इसे सबसे अधिक खतरा इज़राइल से है। 1979 की इस्लामिक क्रान्ति (Islamic Revolution in Iran)  के बाद से ही ईरान परमाणु कार्यक्रम में लगा हुआ है, लेकिन किसी न किसी “कारण” से यह अटकता-टलता जा रहा है। लेकिन Stuxnet वायरस का यह नया पेंच बेहद गम्भीर है और भारत सहित तमाम विकासशील देशों के लिये खतरनाक संकेत भी है।

इस वायरस की शंका गत अक्टूबर में ही ईरानी अधिकारियों को लगी थी, परन्तु उस समय उन्होंने अपने कम्प्यूटरों को वायरस-मुक्त करके इस मुद्दे को अधिक तूल नहीं दिया, परन्तु दिसम्बर और फ़रवरी में जब बार-बार ऐसा हुआ तब उन्होंने विश्व में सभी को इस बारे में बताया।

नॉर्टन (Norton) एंटी-वायरस की कम्पनी सिमाण्टेक (Symantec)  ने अपने रिसर्च में पाया कि Stuxnet वायरस का 60% ट्रेफ़िक ईरान की तरफ़ से आ रहा है, 18% इंडोनेशिया की तरफ़ से जबकि 8% भारत की तरफ़ से। इस रिपोर्ट ने भारत के अन्तरिक्ष कार्यक्रम और मिसाइल तकनीक के महारथियों ISRO  (Indian Space Research Organization) और DRDO (Defense Research Development Organization)  में खलबली मचा दी है। अब इस बात की गम्भीरता से जाँच की जा रही है कि कहीं ISRO एवं DRDO के कम्प्यूटरों में Stuxnet वायरस तो नहीं है? जापान द्वारा यह स्वीकार करने के बाद, कि उसके तीन उपग्रह “अचानक किसी अज्ञात वजह” से खराब हो गये हैं, भारत में भी उच्च स्तर पर यह सोच हावी होने लगी है कि गत जुलाई में INSAT-4B के धराशायी होने के पीछे कहीं Stuxnet वायरस तो नहीं था? सन 2010 के अन्तिम छ्ह माह में चीन, भारत और जापान तीनों देशों को अपने-अपने अन्तरिक्ष कार्यक्रमों में भारी नुकसान सहना पड़ा है, क्या यह मात्र संयोग है? जिस उच्च तकनीक और सुरक्षा के साथ सैटेलाइटों का प्रक्षेपण किया जाता है, और जिन देशों को इसका अनुभव भी हो, उसमें ऐसी किसी दुर्घटना की सम्भावना न के बराबर होती है, फ़िर ऐसा कैसे हुआ कि चीन, जापान और भारत के प्रमुख उपग्रह प्रक्षेपण फ़ेल हो गये? भारत भी विश्व के “उपग्रह बाज़ार” का तेजी से उभरता हुआ खिलाड़ी है और इस तरक्की को रोकने के लिये अमेरिका और चीन किसी भी हद तक जा सकते हैं। वैसे देखा जाये तो इसमें कोई गलत बात भी नहीं है, हर देश चाहेगा कि उसका प्रतिद्वंद्वी अपनी समस्याओं में उलझा रहे और हम उसे कैसे रोकें। यह तो भारत पर निर्भर है कि वह अपने सिस्टम और उपकरणों की सुरक्षा किस प्रकार करता है। (ये और बात है कि हम अपने गाँधीवादी(?) इंजेक्शन की वजह से न तो बांग्लादेश की गर्दन मरोड़ते हैं, न पाकिस्तान को सबक सिखाते हैं, न ही श्रीलंका की स्थिति का फ़ायदा उठाते हैं…)

अप्रैल 2010 में भी ISRO का GSAT-4 नामक संचार उपग्रह नष्ट हो गया था, उससे पहले भी GSLV-D3 नामक रॉकेट प्रक्षेपण फ़ेल हुआ था (ISRO GSLV Launch failed), इस तरह देखा जाये तो 2 साल में तीन प्रमुख उपग्रह/रॉकेट किसी न किसी वजह से फ़ेल हुए हैं, और अब जापान और ईरान की इस आशंका के बाद यह शक गहराना स्वाभाविक है कि भारत के साथ भी कोई “बरबादी का गेम” खेला जा रहा है। छोटे-छोटे देश अपने-अपने उपग्रह को भारत में सस्ती दरों पर प्रक्षेपण करवाना चाहते हैं, बजाय चीन या अमेरिका के महंगी दरों के मुकाबले… और यह उन महाशक्तियों को कैसे रास आ सकता है? कुछ माह पहले ही चीन ने प्रमुख देशों के भारतीय दूतावासों और मंत्रालयों के कम्प्यूटरों में घुसपैठ की थी (Virus Attack by China on Indian Embassy) जिसे चीन समर्थित वामपंथी मीडिया द्वारा दबा दिया गया था। जबकि ईरान के IT मंत्री मोहम्मद लियाई ने साफ़ आरोप लगाया है कि “ईरान के खिलाफ़ सायबर युद्ध छेड़ा गया है… और इसके नतीजे गम्भीर होंगे”। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इस कारनामे के लिये अमेरिका, ब्रिटेन और इज़राइल पर शक ज़ाहिर किया है। इस झमेले में भारत को जल्दी से जल्दी सबक लेना चाहिये, क्योंकि चीन तो खैर खुल्लमखुल्ला दुश्मन है ही, अमेरिका भी कभी नहीं चाहेगा कि हम अपनी हिम्मत के बल पर “अपने पैरों पर मजबूती” से खड़े हों इसलिये Stuxnet जैसे पता नहीं कितने वायरस उसने भारत के विभिन्न कम्प्यूटर सिस्टमों में छोड़ रखे होंगे… जिनके जरिये तमाम गुप्त जानकारियाँ तो उसे मिलेंगी ही और वक्त पड़ने पर किसी महत्वाकांक्षी उपग्रह या मिसाइल कार्यक्रम में अड़ंगा लगाने में भी आसानी होगी।

पाठकों को शायद याद होगा कि गत वर्ष चीन की सबसे बड़ी दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कम्पनी “हुआवै” (Huawei) को भारत सरकार ने बीएसएनएल में प्रतिबन्धित कर दिया था (Huawei banned in BSNL), क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जाँच करने पर पाया गया कि देश के विभिन्न शहरों के दूरसंचार दफ़्तरों में जो अरबों रुपये के चीनी सर्वर, सॉफ़्टवेयर और मोडम लगाये जा रहे हैं, उनमें “खास किस्म” के मालवेयर, ट्रोजन और वायरस हैं। ऐसा भी नहीं कि ऐसी आशंका सिर्फ़ भारत को ही हुई हो, इससे पहले अमेरिका और ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसियों और कम्प्यूटर विशेषज्ञों ने पाया कि चीन सरकार और सेना द्वारा समर्थित Huawei कम्पनी पर भरोसा किया जाना मुश्किल है, तथा अमेरिका और ब्रिटेन ने भी इस कम्पनी के बड़े-बड़े सौदे रद्द किये।

संक्षेप में तात्पर्य यह है कि अपने लालच के लिये, अपने फ़ायदे के लिये दूसरों को बरबाद करने और अन्य देशों की अन्दरूनी सूचनाओं को पाने के लिये यह जो “वायरस-वायरस का गंदा खेल” खेला जा रहा है उसके परिणामस्वरूप “अचानक कहीं परमाणु अस्त्र चल जाने” और फ़िर “आत्मघाती तीसरा विश्व युद्ध छिड़ने” जैसे बुरे नतीजे पूरी दुनिया को भी भुगतने पड़ सकते हैं। दूसरों के लिये गढ्ढा खोदने वाला खुद भी उसमें गिरता है यह कहावत सभी देशों और सभी भाषाओं में लागू होती है… सीखना या न सीखना बुद्धिमानों पर निर्भर है…। भारत को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिये कि अमेरिका या ब्रिटेन हमारे दोस्त हैं और न ही इस मुगालते में कि “हम कोई IT या सॉफ़्टवेयर सुपरपावर हैं… भारत की लचीली और लचर सुरक्षा व्यवस्था में ही हमें सुधार करना होगा, महत्वपूर्ण संस्थानों की आंतरिक सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा।

ये बात और है कि जिस महान भारत देश में कोई भी व्यक्ति कहीं से भी घुस सकता है, बरसों तक नागरिक बनकर रह सकता है (बल्कि एक घुसपैठिया सांसद भी बन सकता है), एक ही नाम-पते से 2-4 पासपोर्ट बनवा सकता है, कोई विदेशी व्यक्ति हथियार गिराकर चलता बनता हो, किसी भी सुनसान समुद्री तट पर दुबई में बैठे-बैठे माफ़िया अपने हथियार गाहे-बगाहे उतरवाते रहते हों, बहुराष्ट्रीय और देसी कम्पनियाँ सारे नियम-कानून ताक पर रखकर घातक रसायन बना रही हों, रिश्वतखोरी की चर्बी से सने हुए अधिकारी व नेता बगैर सोचे-समझे, कमीशन के लालच में विदेशी तकनीक और उपकरणों को भारत में बनाने की बजाय, आयात करने में अधिक रुचि रखते हों… वहाँ पर “सायबर सुरक्षा” के बारे में अधिक उम्मीद करना थोड़ा अजीब लगता है…
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विभिन्न सन्दर्भ –

http://www.nytimes.com/2011/02/26/world/middleeast/26nuke.html?_r=1&ref=global-home&pagewanted=all

http://articles.economictimes.indiatimes.com/2010-05-24/news/28441165_1_chinese-vendors-lines-contract-kuldeep-goyal

http://www.sify.com/news/brit-security-experts-raise-concern-over-huawei-s-links-to-chinese-military-news-international-ldgqudjaadh.html

http://en.wikipedia.org/wiki/Huawei

http://www.computerweekly.com/Articles/2011/02/25/245613/Huawei-asks-US-to-investigate-it-for-threats-to-national.htm

http://www.atimes.com/atimes/China/LJ09Ad01.html

http://www.dnaindia.com/opinion/column_if-we-aren-t-ready-for-cyberwar-we-will-lose-the-next-war_1447690

28 comments:

सुलभ said...

“सायबर युद्ध”- इसे सभी को समझना होगा. वैसे भी भारतीय विशेषज्ञ या कम्पनियां अपने सोफ्टवेयर उत्पाद को तुरंत बेचने के लिए तैयार रहती है. सावधानी बहुत जरुरी है.

smshindi By Sonu said...

अन्तरार्ष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ|

जय हिंद जय हिंद जय हिंद

P K Surya said...

Bus ek essi chij kee kami thi jai ho jai ho Bharat hum to waise bhi BHAGWAN bharose baithe hain or jab tak congres kee sarkar rahegee or kuchh ukhar bhi nahi sakte hain,,,

रघुराज प्रताप सिँह said...

इस सायबर युद्ध की तरह ब्लाग जगत मे भी कुछ कमीने कई सालो से जेहादी युद्ध कर रहे है.
ये हिँदु धर्म ग्रन्थो के बारे मे गलत सलत लिखकर यहाँ के हिन्दुओ को फसा रहे है
और कुछ मूर्ख हिन्दु उनके जाल मे फस भी रहे है

इस जेहादी गैँग का लीडर जमालगोटा है
और दूसरा बिन पेँदी का लोटा सलीम खान है.
अतः ब्लाग जगत के लोगो से मेरा निवेदन है कि अब समय आ गया है कि ऐसे जेहादियो को सजा दी जाये.
इनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही तो बहुत जल्द की जायेगी ही. लेकिन उससे पहले आप लोगो को भी एक काम करना होगा.
आप लोगो को इन जेहादियो जैसे जमालगोटा, सलीम खान, अयाज अहमद ,कैरानवी आदि का पूर्णतया वहिष्कार करना होगा.
न इनके ब्लाग पर जाईये . न इनको अपने ब्लाग पर आने दीजियेँ.
और जो आप लोगो के मित्र भी इन जेहादियो के ब्लाग की सदस्यता लिये बैठे है
उनको भी इनकी असलियत और मंशा बताकर तुरंत इन जेहादियो के ब्लाग को छोड़ने को कहे.
अर्थात इन कमीनो को ब्लाग जगत मे पूरी तरह से अलग थलग कर दिया जाये.
और रही बात कानूनी कार्यवाही की वो बहुत जल्द की जायेगी लेकिन तब तक आप लोग इतना जरुर करे जैसा मैने बताया है
धन्यवाद

दिवाकर मणि said...

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आपने एक अति ही समसामयिक मुद्दे को उठाया है। भारत सरकार को चाहिए कि वह अपने विभिन्न प्रासंगिक माध्यमों से इस "साइबर हमले" का मुकाबला करने में अपने को सक्षम बनाए। इसके लिए अधिकाधिक साइबर विशेषज्ञों/नैतिक हैकरों आदि का नियोजन एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में किया जा सकता है।
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सम्वेदना के स्वर said...

फिलहाल तो भ्रष्टाचार के वाईरस से पीड़ित है यह देश, उसको निष्क्रिय किये बिना आगे कुछ नहीं हो सकता।

एंट्रिक्स और देवास घोटाले में जिस तरह अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के चरित्र उभर कर आये हैं, उसके बाद हमें तो शक है कि यह जो सैटेलाइट फेल हो जाते है अपने साथ करोड़ो रुपये के खर्चे पानी को भी बट्टे-खाते में ले जाते हैं।

याद करें कि 2009 के चुनाव से ठीक पहले 200 करोड़ के चन्द्रयान मिशन का आगाज़ हुआ था और चुनाव समाप्त होते होते खबर आ गयी कि कुछ तस्वीरे भेजने के बाद वह खराब हो गया। आपको उसके खराब होने पर विश्वास न हो तो स्वम अंतरिक्ष में जाकर देखलें या सीएजी को भेज दें!

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

जागृत करता लेख है आपका, मगर हम भ्रष्ट तब तक नहीं जागेगे जब तक .......

@रघुराज प्रताप सिँह;
भाई साहब, सूंअर से अगर यह उम्मीद करो कि वह जहा पर लेटना/लोटना चाहता है, वहा पहले अपने थोबड़े से फूक मार-मार कर उस जगह को साफ़ करेगा और फिर लेटेगा/लोटेगा, तो गलती किसकी है, सूंअर की या फिर उम्मीद रखने वाले की ?

Anil Pendse अनिल पेंडसे said...

अत्यंत महत्वपूर्ण सुचना है यह हम सभी के लिए , नागरिकों को चाहिए की अपने सभी महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट्स को फिजिकल रूप में रखें | जैसे बैंक की पासबुक को हमेशा अपडेट (प्रिंटेड) रखे , डीमेट अकाउंट का प्रिंट आउट आदि, अगर किसी भी प्रकार का डाटा है तो उसका डबल बेक अप (कंप्यूटर से बाहर) , डबल ईमेल आइ डी , मोबाइल की तुलना में लैंड लाइन ज्यादा सुरक्षित है आदि आदि |

Satish Chandra Satyarthi said...

भारत में साइबर सुरक्षा!!!! इससे बड़ा चुटकुला कुछ हो नहीं सकता.. देश की सबसे बड़ी आपराधिक जांच संस्था सीबीआई की आधिकारिक साईट पाकिस्तान के कुछ लौंडे हैक कर लेते हैं और वो कई घंटों तक हैक रहती है और हम कहते हैं कि हम आईटी गुरु हैं.....
उपन्यासकार समीर लाल 'समीर' को पढ़ने के बाद

चन्द्र प्रकाश दुबे said...

इस अति ज्वलंत मुद्दे को जन साधारण तक पहुचाने के लिए आपको साधुवाद. जिनके हाथों में देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी हो, वही हाथ जब अपने घृणित स्वार्थपूर्ति के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हो तब ऐसे भ्रामक स्थिति मे आप हम , उनसे क्या आशा रख सकते हैं? इस देश मे"सब कुछ चलता है " वाली मानसिकता जब तक तिरोहित नहीं होगी तब तक ऐसे अंदेशे और खतरे बने रहेंगे. निश्चित रूप से अगला विश्व युद्ध (अगर हुआ तो) साइबर युद्ध ही होगा . पुनश्च धन्यवाद

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

यहां सब अपने अपने स्वार्थपूर्ति में लगे हैं, देश की परवाह किसे..

Ratan Singh Shekhawat said...

आपकी आशंकाएं बिलकुल सही है पर हमारे भ्रष्ट अफसर और राजनेता जागे तब ना !!

Man said...

न्देमातरम सर ,
आपने एक नए और सम्स्म्यक रास्ट्रीय खतरे के बारे में सचेत किया ,ये बाते पिछले ८ सालो से चली आ रही थी ,क्योकि सारा सिस्टम ऑन लाइन नेट working पर आधारित हे |हेकर कुछ भी कर सकते हे |अमेरिका के पास २००० ,चाइना के पास ५००० साइबर सैनिक हे ,लेकिन भारत तेयार नहीं ,सरकार के सभी चम्मच"' सरकारी सायबर सांड हे "'?

JANARDAN MISHRA said...

इश के बारे में सोचने का समय ही किश के पास है, अभी तो हमारे देश में एक ही होड़ लगी है, देश को जितना जल्दी और जिश तरह लुटा जा सकता है, उतना जल्दी लुटलो,

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!!

Patali-The-Village said...

अन्तरार्ष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ|

Prabhat Kr. Rajan-Ranchi said...

Kya Ab Bhi Bhartat KE log Kahenge Ki Hum IT Guru Hain. Apni Kami Ko switar Kar Sabhi Log Yyaktigat Aur Samuhik Prayas Kaen. Chahe Jaise Bhi Ho

Prabhat Kr. Rajan-Ranchi said...

Sri Anand Lat Ji,
anandl@starnews.co.in
Sadar Vande Matram, Mera Nam Prabhat Kumar Rajan Hai. Ranchi-Jharkhand Ka Rahne Vala Hoon. Mob.No 08987506944. Aj 9 March 2011 Ko 20.30 PM par Apke Star News Channel Ka Kahna Tha Ki Baba Ramdev Ka Bada Khulasa Baba Ramdev Ne BJP Ko 11 Lacs RS Diye. Kya Unohne Galat Kiya Ya Sahi Ye Main Nahi Janta. Lekin Unhone Rs.Cheque Ke Madhyam Se diya. Jo ki Galat Tarika Nahi hai.Apne Jish Tarah Ise Highligh Kiya Koi Bhi Admi Ya Sangthan Kishi Bhi Party Ko Cheque Ke Madhyam Se Chanda Nahi Dega. App Khud Curruption Ko Badha Rahe Hain.
Sayad Apko Ek Bat Dhyan Me ho Baba Ramde Aur BJP Me Samanta Ka. BJP Ki Rally Mein Bharat Mata Ki Jai AurVende Matram Ke Nare Lagaye JAte Hain. Baba Ramdev Bhi Bharat Mata Ki Jai Aur Vande Matram ke Nare LAgvate Hain. Congress Ki Kisi Bhi Rally Ya Bathak Me Yeh Nare Nahi Lagte. Ohan to Lagta Hai Vande Mata Rome.
Dusri Bat Kuchh Din Pahle Delhi Ke Ramlila Maidan Me Baba Ram Ki Raili Hui Thi. Jishme Rt. Income Tax Commisionor B.B.Gupta Ne Kuchh Khlasha KiyaTha. Quatrochi Ke bete ki company ko andaman nikobar me Oil Search Karne Ka Licence Diya Gaya. Uska Office Delhi Mein Hai. O Apke Liye Sansanikhej Nahi Hai, RamJeth Malani Ne Usi Rally Mein Rahul Gandhi Ke bare mein Bhi Kha Tha.Subramanyam Swami Ne Bhi Kafi Khulasa Kiya Tha.
In Sari Baton Ka Highligh Sayad App Isliye Nahi Karte Ki Apka Channel Congress se Chanda Leti Ho. Bura Mat Maniyega.

rohit said...

बंधू आप कितना जानते है देश के विज्ञानं और प्रोधोगिकी के बारे में यह आपके इस लेख से समझ में आ गया है . यानी आप इस विषय में सिफर है आप ने जो कुछ लिखा है वो सिर्फ पत्रिकाओं को देखकर लिखा है और जो आपने शुरुआत में लिखा है वो भी discovery चेनल से प्रेरित है यह मैंने discovery पर देखा था. रही बात हमारे अंतरिक्ष अभयान की तो भाई इसमे रूस के sahyog के बिना कुछ भी संभब नहीं है हम तो अच्छे से अस्सेम्ब्ल भी नहीं कर पाते. फिर चंद्रयान तो दूर की बात है . क्रायोजेनिक इंजिन तो छोड़ो हम कावेरी इंजिन तक नहीं बना पाए और तो और इसमे क्या मटेरिअल उपयोग होता है हमें आज तक पता नहीं चल पाया है.अब आ जाओ आई टी पर तो भाई कोई मुझे बताये की भारतीयों ने कितनी कंप्यूटर language बनायीं है ( C ++, जावा आदि ) कितने OPERATING सिस्टम बनाये है. हम सिर्फ एक सस्ते और SKILLED लेबर है आई टी FIELD के और कुछ ज्यादा नहीं. ज्यादा लिखूंगा तो बहुत बड़ा हो जायेगा

chandan said...

पाकिस्तान साईबर मामले मै अभी हिन्दुस्तान के सामने बच्चा है और चाईना को साईबर के बारे मैं अभी उतना समझ आया नही है नकली समान बनाने से फुरसत नही मिल रहा है उसको

Thakur said...

@ Rohit भाई मुद्दा बहुत ही संवेदनशील है और आप मुझे थोड़े से आईटी क्षेत्र से सम्बंधित ही लगते हो!

लेखक का मजाक उडाना एक बात है और उस मुद्दे को लोगों के सामने रखना और चर्चा करना दूसरी बात!

आप जैसे एम् एन सी में काम करने वाले लोगों से प्रार्थना है की कुछ ऐसा इजाद किया जाए जिससे दुनिया वालों को भी थोड़ी मुश्किल पेश आये! क्यूँ न एक ऐसा कंप्यूटर लैंग्वेज बनाया जाए जो अब तक उपलब्ध लेंग्वेज से अलग हो और हिंदी में हो तो और भी बढ़िया क्यूंकि इसका तोड़ धुंडने में कुछ तो मेहनत लगेगी हैकरों की!

उम्मीद करता हूँ की आप जैसे लोग अगले ५ सालों में ऐसा कुछ करने में कामयाब होंगे और अपनी टिपण्णी सोच समझ कर ही देंगे!

लेखक को हमेशा की तरह खोज कर ले अच्छे विषय पर लिखने / चेताने के लिए धन्यबाद

rohit said...

@ठाकुर बंधू मुद्दा आप समझ रहे है उतना पेचीदा नहीं है. भारत में विज्ञानं और प्रोधोगिकी उतनी विकसित नहीं है जितना दिखाई जाती है एक छोटा सा अदना सा देश इजराइल हमसे ५० साल आगे है इस क्षेत्र में. रही बात आई टी की तो बंधू आप को शायद यह जानकारी ना हो की पाकिस्तान और चीन के हेकर हमसे बहुत आगे है चीन के लोगो के साथ अंग्रेजी की समस्या है और पाकिस्तानी के पास एक्सपोजर की कमी है. आप किसी एक विज्ञानं की अच्छी किताब का नाम मुझे बताये जो किसी भारतीय ने लिखी हो और उसे international स्तर पर पढाया जाता हो या रेफरेंस बुक के तोर पर उपयोग में लिया जाता हो. मैं भाऊ का बहुत ही बड़ा पंखा हूँ लेकिन जो सही नहीं है उसे गलत ही कहूँगा. आई टी क्षेत्र में हम सिर्फ skilled और सस्ते लेबर है और ज्यादा कुछ नहीं. चीनी लोगो को अंग्रेजी आने दो फिर आप देखना की वह कहाँ पहुँच जाते है.

rohit said...

मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ की हम गलत ही अपने श्रेष्ठ होने का मुगालता पालते है इसकी जगह हमें खुद को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए चीनी लोगो से उनका देश के प्रति समर्पण सीखना चाहिए जापानियों से तकनिकी और प्रबंधन. इजराइल से कठिन परिस्तिथियों में भी आगे बढ़ने की अदम्य क्षमता और ना झुकने का साहस. तभी हम आगे बद सकेंगे और ये तभी होगा जब हम अपनी सत्यता जानेंगे की हम कहाँ है और कहाँ पहुँचाना है

Chandan said...

भारतीय अपने श्रेष्ठ होने की खुशफहमी में इतने खोए रहते हैं की अपनी सही आलोचना भी सहन नहीं कर पाते. यह सही है की पाकिस्तानी और चीनी धुरंधर आईटी में हमसे कई गुना आगे हैं. खुद सीडेक और इसरो के युवा इंजीनियरों से सुना है की इन संस्थओं में सरकारी ढर्रे पर काम होता है, बस नाम ही है. सीडेक के डिज़ाइन किये हुए सुपरकंप्यूटर काम नहीं करते, डीबगिंग और टेस्टिंग जैसे ज़रूरी काम अनुभवहीन फ्रेशर्स को सौंप रखे हैं. खुद वहां के इंजीनियर्स भारतीय सुपरकम्प्यूटर्स की हंसी उड़ाते हैं. इसरो रूस के सहयोग के बिना लड़खड़ा जाएगा.

हम इतने गलत हैं की अपनी सही आलोचना भी सहन नहीं कर पाते.

सुलभ said...

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This was in response of few bulk emails blindly forwarded by modern youths (sub: Say proudly, I AM AN INDIAN.)

Sorry, India is a mix of two country one is POOR BHARAT and second is HALF RICH INDIA.

We can produce technology but don't know how to manage it. We don't have skills of Entrepreneurship. We have lack of business and marketing skills. how to sell our local products through all over the world. We are just admirer of foreign nations. Indian youths are confused under media attack. Sorry friend.

Majority of Indian youth want to know only "How to get job in Abroad with High package."

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I myself going to start a venture very soon. Even though I don't have resources but have a big hope.

Regards,

Sulabh jaiswal

Anonymous said...

चिपलूनकरजी,

आप उत्तम कार्य कर रहे हैं | आशा है आप आगे भी इसे जारी रखेंगे | मैं आपके ब्लॉग के माध्यम से एक बात सभी पाठको को बताना चाहता हुं | अभी हाल ही मैं एक पुस्तक प्रकाशित हुई है जिसका नाम है Breaking India.

इस पुस्तक को ज्यादा से ज्यादा लोग पड़ें अथवा कम से कम इसका सन्देश आपके हिंदी ब्लॉग के माध्यम से हिंदी जगत में भी पहुंचे तो बहुत ही बढ़िया होगा |

पुस्तक के बारें मैं और जान ने के लिए यहाँ क्लिक करें- http://breakingindia.com/

पुस्तक से सम्बंधित विडियो भी उक्त लिंक पर हैं | आप सभी से अनुरोध है की एक बार अवश्य उक्त लिंक पर सारांश पड़ लेवें |

मेरा इस पुस्तक से कोई किसी प्रकार का सम्बन्ध नहीं है, और मैं ये संदेश राष्ट्र हित में सबको देना चाहता हुं | आशा है आप इस बारें में ज़रूर कुछ लिखेंगे |

वन्दे मातरम |

Thakur said...

rohit ji आपसे पूरी तरह सहमत हूँ मुझे आपके कहने का तरीका पसंद नहीं आया फिर भी सयंमित और अच्छे जवाब के लिए आपको बधाई. किसी को टिप्पणी कर के चोट ना पहुंचाते हुए अपनी बात कहने में जो आनंद है वो किसी बेसिर पैर के गाली गलोच में नहीं. आप मुझे अधिक समझदार लगते हैं अभी तक भारत तकनिकी क्षेत्र में बहुत पीछे है इसमें कोई दो राये नहीं है. आप इसका अंदाजा सरकारी बाबुओं के रवय्ये से लगा सकते हैं जिनको सरकार ने कंप्यूटर तो लगा कर दे दिए हैं पर उनको चलाना और काम करना काला अक्षर भैंस बराबर लगता है.

हमारी सरकारी वेबसाइट कई कई दिनों तक हैक रहती हैं और हमारे तथाकथित साइबर विशेषज्ञ हाथ पर हाथ धरे रहते हैं.

तो क्यूँ न एक ऐसी शुरुआत की जाए और आने वाले ५ से १० सालों में ऐसा कुछ किया जाए जो ये साबित कर सके की हम किसी से कम नहीं?

Mrs. Asha Joglekar said...

Aapki chetawani sahee hai. Sarkar aisa kadam utha sakti hai par imergency laga kar warna abhiwyakti kee swatantrata ka kya ?