मुम्बई और हैदराबाद प्रवास से वापस काम पर…
पाठकों, मित्रों… पारिवारिक मंगल कार्यों में सम्मिलित होकर वापस काम पर आ गया हूँ। यह 8-9 दिनों का प्रवास बेहद प्रफ़ुल्लित करने वाला रहा…
हैदराबाद में सागर नाहर जी से मुलाकात न हो सकी, क्योंकि उज्जैन से हैदराबाद का सैकड़ों किमी का प्रवास जितना आसान है, उतना ही हैदराबाद में होली के दिन 40-50 किमी का प्रवास बेहद मुश्किल… खासकर उस स्थिति में जबकि आपके पास खुद का वाहन उपलब्ध न हो… विश्वास है कि सागर भाई बुरा नहीं मानेंगे…
इसी प्रकार मुम्बई में भी कुछ “समविचारी” मित्रों के साथ मिलन आल्हादकारी रहा, साथ बैठे, लज़ीज़ डिनर लिया, लम्बी चर्चा हुई और पहली बार रूबरू मिलने का मौका मिला।
वादा करने के बावजूद नहीं मिलने के कारण डॉ अनिता कुमार जी की झिड़की भी सुनने को मिली, इसी प्रकार कई अन्य महत्वपूर्ण मित्रों और शुभचिंतकों के भी फ़ोन आते रहे, कुछ मनुहार भरे तो कुछ उलाहने और शिकायत भरे… ज़ाहिर है कि सभी की शिकायत यही थी कि मुम्बई आये और मिले बिना चले गये… इस स्नेह से मैं अभिभूत हूं…
लम्बी अनुपस्थिति के कारण अब पुनः अपने व्यवसाय पर ध्यान केन्द्रित करके, जल्दी ही अपनी चिरपरिचित पोस्ट के साथ जल्द ही वापसी करूंगा…
एक बार पुनः उन सभी मित्रों से खेद व्यक्त करता हूं, जिनसे समयाभाव के कारण व्यक्तिगत रुप से मिलना सम्भव न हो सका…
वन्देमातरम…


