Monday, February 28, 2011

“साम्प्रदायिक” तो था ही, अब NDTV द्वारा न्यायपालिका पर भी सवाल… NDTV Communal TV Channel, Anti-Judiciary, Anti-Hindu NDTV

विगत एक-डेढ़ माह में दो प्रमुख न्यायिक घटनाएं हुई हैं, जिनका जैसा व्यापक और सकारात्मक प्रचार होना चाहिये था वह हमारे महान देश के घृणित (यानी सेकुलर) चैनलों द्वारा जानबूझकर नहीं किया गया। इसके उलट इन दोनों न्यायिक निर्णयों को या तो नज़र-अन्दाज़ करने की अथवा इन्हें नकारात्मक रूप में पेश करने की पुरज़ोर कोशिश की गई। हमेशा की तरह इस मुहिम का अगुआ “चर्च-पोषित” चैनल NDTV ही रहा…

पहला महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय आया था कर्नाटक में, जहाँ जस्टिस सोमशेखर आयोग ने यह निर्णय दिया कि 2008 में कर्नाटक के विभिन्न इलाकों में चर्च पर हुए हमले में संघ परिवार का कोई हाथ नहीं है… यह घटनाएं एवेंजेलिस्टों द्वारा हिन्दू देवताओं के गलत चित्रण के कारण उकसाये जाने का परिणाम हैं एवं इसमें शामिल लोगों का यह कृत्य पूर्णतः व्यक्तिगत था, जस्टिस सोमशेखर (Justice Somshekhar Report of Karnataka Church Attack) ने स्पष्ट लिखा है कि “ऐसा कोई सबूत नहीं है कि इन हमलों में राज्य सरकार अथवा इसके किसी मुख्य कार्यकारी का सीधा या अप्रत्यक्ष हाथ हो…” । परन्तु वह “सेकुलर” ही क्या, जो भाजपा या हिन्दुओं के पक्ष में आये हुए किसी फ़ैसले को आसानी से मान ले… जस्टिस सोमशेखर की रिपोर्ट आने के तुरन्त बाद NDTV ने अपना घृणित खेल खेलना शुरु कर दिया…

उल्लेखनीय है कि बिनायक सेन (Binayak Sen Verdict) के मामले में भी “लोअर कोर्ट” और “हाईकोर्ट” के निर्णय की सबसे अधिक आलोचना और हायतौबा NDTV ने ही मचाई थी… बिनायक सेन और चर्च का नापाक गठबन्धन भी लगभग उजागर हो चुका है…। बहरहाल बात हो रही थी NDTV द्वारा चलाई जा रही घटियातम पत्रकारिता की…(NDTV Hate and False Campaign)

जस्टिस सोमशेखर की आधिकारिक रिपोर्ट (जिन्हें राज्य सरकार ने नियुक्त किया था और जिन्होंने 2 साल में 754 गवाहों, 1019 आवेदनों और 34 वकीलों की जिरह-बहस और बयानों के आधार पर सुनवाई की) आने के तुरन्त बाद NDTV ने अपने चैनल और साईट पर एक अन्य रिटायर्ड जज एमएफ़ सलधाना की रिपोर्ट प्रकाशित करना और प्रचारित करना शुरु कर दिया। स्वयं NDTV और जस्टिस सलधाना के अनुसार चर्च पर हुए हमलों की यह जाँच “पूर्णतः व्यक्तिगत और स्वतन्त्र” थी… यानी एमएफ़ सलधाना साहब ने खुद ही अपने “विवेक”(?) से चर्च पर हुए इन हमलों की जाँच करने का निर्णय ले लिया और कर भी ली…। रिटायर्ड जस्टिस सलधाना साहब अपनी इस “व्यक्तिगत” रिपोर्ट में फ़रमाते हैं, “चर्च पर हुए इन हमलों में राज्य की पुलिस भी शामिल थी, तथा बजरंग दल के नेता महेन्द्र कुमार ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर चर्चों पर हमले किये…” (यह अजीबोगरीब निष्कर्ष जस्टिस सलधाना साहब ने किस गवाह, बयान आदि के आधार पर निकाले, यह बात NDTV ने अभी तक गुप्त रखी है)।

लेकिन कर्नाटक सरकार को बदनाम करने और हिन्दूवादी संगठनों को निशाना बनाने की अपनी इस घृणित कोशिश में NDTV ने जानबूझकर कुछ तथ्य छिपाये, क्यों छिपाये… यह आप इन तथ्यों को पढ़कर ही समझ जायेंगे –


1) जस्टिस एमएफ़ सलधाना यानी जस्टिस “माइकल एफ़ सलधाना”

2) जस्टिस माइकल सलधाना दक्षिण कन्नडा जिले के कैथोलिक एसोसियेशन के अध्यक्ष हैं… (अब खुद ही सोचिये कि कैथोलिक एसोसियेशन के अध्यक्ष द्वारा की गई “व्यक्तिगत” जाँच कितनी निष्पक्ष हो सकती है)। मजे की बात तो यह है कि जस्टिस सलधाना खुद कहते हैं कि “सरकार द्वारा बनाये गये आयोग के नतीजे निष्पक्ष नहीं हो सकते…” (क्या यह नियम उन पर लागू नहीं होता…? वे भी तो कैथोलिक एसोसियेशन के अध्यक्ष हैं, फ़िर उन्हें न तो ढेर सारे गवाह उपलब्ध थे और न ही कागज़ात, फ़िर भी उन्होंने अपनी “व्यक्तिगत निष्पक्ष” रिपोर्ट पेश कर दी?… न सिर्फ़ पेश कर दी, बल्कि उनके सेकुलर चमचे NDTV ने वह तुरन्त प्रसारित भी कर डाली?) 


(चित्र में जस्टिस माइकल सलधाना Justice Saldhana in Christian Association Programme, उडुपी जिले के यूनाइटेड क्रिश्चियन एसोसियेशन के कार्यक्रम में एक पुस्तिका का विमोचन करते हुए)


जस्टिस “माइकल” सलधाना की निष्पक्षता की पोल तो उसी समय खुल चुकी थी, जब कर्नाटक सरकार ने गौ-हत्या का बिल विधानसभा में पेश किया था। माइकल सलधाना ने उस समय एक “ईसाई-नेता” की हैसियत से गौहत्या बिल (Karnataka Cow Slaughter Bill Opposed) का विरोध किया था और कहा था कि “कर्नाटक सरकार द्वारा यह कानून अल्पसंख्यकों की भोजन की आदतों को बदलने की साजिश है, और यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन है कि वे क्या खाएं और क्या न खाएं…”। 

जस्टिस माइकल की “कथित निष्पक्षता” का एक और नमूना देखिये – “इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर रिलिजीयस फ़्रीडम” (International Institute of Religious Freedom) की भारत आधारित रिपोर्ट में “जस्टिस माइकल सलधाना लिखते हैं – “मंगलोर एवं उडुपी जिले के उच्चवर्णीय हिन्दू ब्राह्मण समूचे कर्नाटक में हिन्दुत्व की विचारधारा के प्रसार में सक्रिय हैं, चूंकि ब्राह्मण जातिवादी व्यवस्था बनाये रखना चाहते हैं और ईसाई धर्मान्तरण का सबसे अधिक नुकसान उन्हें ही होगा, इसलिये वे “हिन्दुत्व” की अवधारणा को मजबूत रखना चाहते हैं, और इसी कारण वे “क्रिश्चियानिटी” से लड़ाई चाहते हैं, जबकि ईसाई धर्म एक पवित्र और भलाई करने वाला धर्म है…”।

एक हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से ऐसी “साम्प्रदायिक” टिप्पणी की आशा नहीं की जा सकती, एक तरफ़ तो वे खुद ही “ईसाई धर्मान्तरण” की घटना स्वीकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ ब्राह्मणों को गाली भी दे रहे हैं कि वे दलितों-पिछड़ों को ईसाई बनने से रोकने के लिये “हिन्दुत्व” का हौआ खड़ा कर रहे हैं… क्या एक “निष्पक्ष” जज ऐसा होता है? और NDTV जैसा घटिया चैनल इन्हीं साहब की रिपोर्ट को हीरे-मोती लगाकर पेश करता रहा, क्योंकि…

1) कर्नाटक में भाजपा की सरकार है, जो इन्हें फ़ूटी आँख नहीं सुहा रही,

2) हिन्दूवादी संगठनों को जस्टिस सोमशेखर ने बरी कर दिया, जबकि NDTV की मंशा यह है कि चाहे जैसे भी हो, संघ-भाजपा-बजरंग दल-विहिप को कठघरे में खड़ा रखे… न्यायपालिका का इससे बड़ा मखौल क्या होगा, तथा इससे ज्यादा नीच पत्रकारिता क्या होगी?

दूसरी महत्वपूर्ण न्यायिक घटना थी गोधरा ट्रेन “नरसंहार” (Godhra Massacre Judgement) के बारे में आया हुआ फ़ैसला… लालू जैसे जोकरों और यूसी बैनर्जी (U.C. Banerjee Commission on Godhra) जैसे भ्रष्ट जजों की नापाक पुरज़ोर कोशिशों के बावजूद जो “सच” था आखिरकार सामने आ ही गया। सच यही था कि “जेहादी मानसिकता” वाले एक बड़े गैंग ने 56 ट्रेन यात्रियों को पेट्रोल डालकर जिन्दा जलाया। गोधरा को शुरु से सेकुलर प्रेस और मीडिया द्वारा “हादसा” कहा गया… “गोधरा हादसा”… जबकि “हादसे” और “नरसंहार” में अन्तर होता है यह बात कोई गधा भी बता सकता है। इसी NDTV टाइप के सेकुलर मीडिया ने गोधरा के बाद अहमदाबाद और गुजरात के अन्य हिस्सों में हुए दंगों को “नरसंहार” घोषित करने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी। तीस्ता सीतलवाड द्वारा सुप्रीम कोर्ट में फ़र्जी केस लगाये गये, नकली शपथ-पत्र (Fake Affidavit by Teesta Setalvad) दाखिल करवाये गये, तहलका, NDTV से लेकर सरकार के टुकड़ों पर पलने वाले सभी चैनलों ने पत्रकारिता को “वेश्या-बाजार” बनाकर बार-बार गुजरात दंगे को “नरसंहार” घोषित किया। पत्रकारिता को “दल्लेबाजी” का धंधा बनाने वाले इन चैनलों से पूछना चाहिये कि यदि गुजरात दंगे “नरसंहार” हैं तो कश्मीर से हिन्दुओं का सफ़ाया क्या है?, मराड में हुआ संहार क्या है? दिल्ली में कांग्रेसियों ने जो सिखों (Anti-Sikh Riots in Delhi) के साथ किया वह क्या था? भोपाल का गैस काण्ड और बेशर्मी से एण्डरसन को छोड़ना (Anderson Freed by Rajiv Gandhi) नरसंहार नहीं हैं क्या? इससे पहले भी भागलपुर, मेरठ, बरेली, मालेगाँव, मुज़फ़्फ़रपुर के दंगे क्या “नरसंहार” नहीं थे? लेकिन सेकुलर प्रेस को ऐसे सवाल पूछने वाले लोग “साम्प्रदायिक” लगते हैं, क्योंकि आज तक किसी ने इनके गले में “बम्बू ठाँसकर” यही नहीं पूछा कि यदि गोधरा न हुआ होता, तो क्या गुजरात के दंगे होते? लेकिन जब भी न्यायपालिका ऐसा कोई निर्णय सुनाती है जो हिन्दुओं के पक्ष या मुस्लिमों के विरोध में हो (चाहे वह बाबरी मस्जिद केस हो, रामसेतु हो या शाहबानो तलाक केस) NDTV जैसे “भाड़े के टट्टू” चिल्लाचोट करने में सबसे आगे रहते हैं…। गोधरा फ़ैसला आने के बाद सारे सेकुलरों को साँप सूँघ गया है, उन्हें समझ नहीं आ रहा कि अब इसकी व्याख्या कैसे करें? हालांकि तीस्ता सीतलवाड और बुरका दत्त जैसी “मंथरा” और “पूतना”, गोधरा नरसंहार और गुजरात दंगों को “अलग-अलग मामले” बताने में जुटी हुई हैं।



गोधरा काण्ड के फ़ैसले के बाद भी NDTV अपनी नीचता से बाज नहीं आया, विनोद दुआ साहब अपनी रिपोर्ट में (वीडियो देखिये) 63 “बेगुनाह”(?) (जो सिर्फ़ सबूतों के अभाव में बरी हुए हैं) मुसलमानों के लिये चिंता में दुबले हुए जा रहे हैं, लेकिन विनोद दुआ साहब ने कभी भी उन 56 परिवारों के लिये अपना “सेकुलर सुर” नहीं निकाला जो S-6 कोच में भून दिये गये, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। शायद जलकर मरने वाले 56 परिवारों का दुख कम है और इन नौ साल जेल में रहे इन 63 लोगों के परिवारों का दुख ज्यादा है। यह ठीक वैसा ही है, जैसे कश्मीर से खदेड़े गये लाखों हिन्दुओं का दुख-दर्द उतना बड़ा नहीं है, जितना फ़िलीस्तीन में इज़राइल के हाथों मारे गये मुसलमानों का…, यही NDTV की “साम्प्रदायिक मानसिकता” है। (Atrocities and Genocide of Kashmmiri Hindus)

दूसरों को “साम्प्रदायिक” कहने से पहले NDTV और प्रणब रॉय को अपनी गिरेबान में झाँकना चाहिये कि वह खुद कितनी साम्प्रदायिक खबरें परोस रहा है, बुरका दत्त जैसी सत्ता-कारपोरेट की दलालों को अभी भी प्रमुखता दिये हुए है। चैनल चलाने के लाइसेंस और तथाकथित पत्रकारिता करने के गरुर में उन्होंने देशहित और सामाजिक समरसता को भी भुला दिया है…
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चलते-चलते - "वेटिकन के मोहरे NDTV" को यह तो पता ही होगा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन (KGB) (जो अपने बेटों और दामाद के कारनामों और बेवकूफ़ी की वजह से अब भ्रष्टाचार के मामलों में घिर गये हैं) खुद को दलित कहते नहीं थकते, जबकि केरल की SC-ST फ़ेडरेशन के अध्यक्ष वी कुमारन के खुल्लमखुल्ला आरोप लगाया है कि KGB साहब एक फ़र्जी ईसाई हैं और वेटिकन द्वारा भारतीय न्याय-व्यवस्था में घुसेड़े गये हैं। KGB की बेटी और दामाद श्रीनिजन को लन्दन में उच्च शिक्षा हेतु वर्ल्ड काउंसिल ऑफ़ चर्च ने "प्रायोजित" किया था, श्रीनिजन ने SC/ST सीट पर "अजा" बताकर चुनाव लड़ा, जबकि वह "खुल्लमखुल्ला" ईसाई है…।  भारत के सारे दलित-ओबीसी संगठन और नेता मुगालते में ही रह जाएंगे, जबकि KGB तथा श्रीनिजन जैसे "दलित से ईसाई बने हुए लोग", असली दलितों का हक छीन ले जाएंगे…

37 comments:

Amit Singh said...

आप एनडीटीवी को इतना भाव क्यों दे रहे हैं? क्या आपको इसकी कोई विश्वसनीयता बची हुई दिखती है?
बुरी तरह घबराई सरकार ने सारे चैनल को भरपूर विज्ञापन इश्यू किये हैं. लगभग हर तीसरा विज्ञापन सरकारी है. अब ये सरकार की खायेंगे तो कहे पर नाचेंगे नहीं?

Anonymous said...

Jab apna hi sikka khota ho to Media, Neta, Atankvadiyo ko kyo gaali dete ho? log aise hi jeena chahte hain. Sirf NDTV hi nahi channel aur bhi hain. Sarkar dwara big boss par bann lagane par saare samajseviyo ke pet me itna dard hua ki channelo par 4 din tak din raat bahas hui thi.

vishwajeetsingh said...

एनडीटीवी जैसे महाभ्रष्ट झूठे चैनल और अरूंधति रॉय, तीस्ता जावेद सीतलवाड, दिग्विजय, नेहरू ( वर्तमान गांधी ) परिवार , मौलाना मदनी और अन्य देशद्रोही शक्तियोँ के विरूद्ध हम हिन्दू संगठित होकर राष्ट्रवादी आन्दोलन प्रारम्भ क्यो नहीँ करते ! हम हिन्दू के नाम पर मन्दिरोँ, धर्मशालाओँ आदि मेँ तो खुब खर्चा कर देते है लेकिन क्या इतनी भी सार्मथ्य हममेँ नहीँ है कि हम हिन्दुत्व की रक्षा के लिये एक ऐसे मीडिया चैनल की स्थापना करेँ जो हिन्दुत्व विरोधियोँ का न केवल प्रतिकार करेँ अपितु हिन्दुत्व समर्थक राष्ट्रीय - अंतरराष्ट्रीय समाचारोँ को जनता तक पहुंचायेँ ।

सुलभ said...

विदेशी इसाईयों के दान के पैसों को ऐसा ही उपयोग होता आया है.
दिक्कत बस यही है सरकार का सह मिला हुआ है.

सम्वेदना के स्वर said...

NDTV और इससे अलग हुआ CNN-IBN महाभष्ट चैनल हैं, सुविधाभोगी इंडिया की अय्याश मानसिकता के पोषक!

इन चैनलों की असलियत से पर्दा उठाता एक ब्लोग पढने लायक है, http://www.mediacrooks.com/

अपनी पिछली पोस्ट में इस ब्लोग पर खुलासा हुआ कि NDTV के प्रणव राय पर CBI जांच चल रही थी 1998 में, और उसके बाद मामला कहाँ है किसी को नहीं पता।
http://www.mediacrooks.com/2011/02/ndtv-we-poodles-crime-pays.html

बरखा दत्त और विनोद दुआ को 2009 की "चुनावी विजय" के बाद पधम श्री दिया था इसी सरकार नें! सब मौसेरे भाई हैं!

दीर्घतमा said...

सुरेश जी एन,डी.टी.वी. ही नहीं अधिकांस चैनल विदेशी लगनी से चल रहे है ये सब अपनी विस्वसनीयता खो चुके है सभी भारत व हिन्दू बिरोधी है रहा गोधरा की बात तो मुसलमानों को सोचना होगा की दुबारा गोधरा न हो नहीं तो आक्रोशित हिन्दू गुजरात करेगा ही तब तिश्ता जावेद, स्वामी अग्निवेश या अरुंधती राय काम नहीं आयेगी अब मानवाधिकार वादियों का चेहरा बेनकाब हो रहा है इनके खातो की जाच होनी चाहिए.

दिवाकर मणि said...

एनडीटीवी, आजतक आदि ये ऐसे हिंदी के समाचार चैनल हैं, जिनका एक ही काम है- चाहे जैसे भी हो हिन्दू-हित से जुड़ी बात को दरकिनार करना और अपने मक्का और वेटिकन के आकाओं के हित के लिए जिहादी और धर्मांतरण के लिए प्रसिद्ध संप्रदायों को अधिकाधिक अच्छे रूप में दिखलाना।

विश्वजीत सिंह जी की बात से मेरी सहमति है कि हिन्दू हित की बात करने वाले अधिकाधिक चैनलों का जाल पूरे भारत और विश्व में फैलना चाहिए। हिन्दुओं के पास पैसे की कमी नहीं है लेकिन वैसे धनाढ्य हिन्दू और संस्थाएं पता नहीं क्यों इस दिशा में नहीं सोच रहीं ! एक-आध चैनल यथा- "सुदर्शन" (जहां तक मेरी जानकारी है) नामक एक चैनल है लेकिन पता नहीं यह कितने घरों में प्रसारित होता है।

उम्दा सोच said...

विनोद दुआ कुत्ता है उसे रोटी देता है उसके सुर में भौकता है , जिसदिन आप उसे रोटी देंगे वो आप के सुर में भौकेगा ! पत्रकारिता धंधा नहीं ये किसने कहा आप से ??? और हर धंधे का उसूल एक है जो रुपया फेके तमाशा उसको खुश करने के लिए !!!

राज भाटिय़ा said...

अब कुत्ते को जो भी रोटी डालेगा, वो तो उसी के सामने दुम हिलयेगा ना...बहुत सुंदर, धन्यवाद

honesty project democracy said...

कोई भी चेनल हो सत्य,न्याय और ईमानदारी को अगर अपने प्रभाव से मजबूत करता है तब तो ठीक है लेकिन अगर कमजोर करता है तो देश की जनता को ऐसे चेनल में आग लगा देना चाहिए......सत्य,न्याय और ईमानदारी को हर में जिन्दा किया जाना चाहिए चाहे उसके लिए अपने कुकर्मी भाई का भी बध क्यों ना करना परे.....क्योकि कुकर्मी आपका भाई भी है तो वो आपका और पूरी इंसानियत का दुश्मन है.....

Ratan Singh Shekhawat said...

अब कुत्ते को जो भी रोटी डालेगा, वो तो उसी के सामने दुम हिलयेगा ना.
@ भाटिया जी की यह टिप्पणी हमारी भी मानी जाय

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

क्या होगा देश का...

JANARDAN MISHRA said...

हम लोग किन लोंगो कि चर्चा कर रहें हैं, जिनका कोई इमान ही नहीं है, अरे ये तो वो पालतू प्राणी हैं, जिन्हें अपने मालिक के आलावा और कुछ नहीं दिखता, और इनके मालिक और मालकिन (मेडम) को सब जानते है, "रामतेरी गंगा मैली" फिल्म का एक डायलोग है, "कुत्ता लाख बुरा हो वफ़ादारी नहीं छोड़ता" अब इन्हें हम लाख बुरा कहें तो भी क्या फर्क पड़ता है, ये अपनी वफ़ादारी नहीं ही छोड़ेंगें, हाँ मेरा एक सुझाव है, हिंदुस्तान में बहुत हिन्दू अमीर हैं, तो उनसे मेरा निवेदन है कि, वो भी अब कुत्ता पालनेका शौक सुरु करदें, यहाँ तो टुकड़ों पे पलने वाले बहुत कुत्ते मिलेंगें, और चंद टुकड़े खाकर हिदुओं का गुंड गान सुरु कर देंगें, और हिन्दुओं के सामने अपनी दुम हिलायेंगें, याफिर दूशरा उपाय है, सारे हिन्दू मिलकर इनके पिछवाड़े पेट्रोल डाल दो, खुजाते खुजाते इटली भाग जायेंगे.....

Meerutfse said...

log jaagrook ho rahe hai....... koi inse ye pooche ki itne virodh ke baad bhi shri naraendra modi teesri baar bhi c.m kyon bane....
ndtv ka sach sabke saamne hai ... nokri jayegi in sab ki or jaan bhi agar paise ke liye desh droh karenge...

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

ताज्जुब की बात है की NDTV इतना खुल्लम-खुल्ला हिन्दू विरोधी होने के बावजूद हिन्दू ही इसे आज भी देखता और Quality चेनल बता रहा है.

जय हो हमारी जनता और NDTV जैसे मीडिया की!

प्रतुल वशिष्ठ said...

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आपने केंडल के नीचे बसे घनघोर अँधेरे को दिखा दिया.
इस केंडल की आर्टिफिशियल रोशनी में जो नीच मानसिकता सेकुलर चादर के भीतर अपने गदले पाँव पसार रही थी ...... उसकी चादर हटा दी.
— ऎसी निर्भीक पत्रकारिता ही लगाएगी बेलगाम मीडिया पर लगाम.

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krishnakumarsoni (RAMBABU) said...

कृष्ण कुमार सोनी(रामबाबू)
सरकारी विज्ञापनों से अकूत धन कमाने वाला मिडिया सरकारी भोंपू बन गया है,भ्रष्ट व तुष्टिकरण करने वाली सरकार जो चाहेगी मीडिया भी वही दिखायेगा.इससे कुछ निष्पक्षता की अपेक्षा (उम्मीद) रख्नना बेकार है.

P K Surya said...

Mahabharast BAde bade surma mare gayen hai ye bhul jate hain puri duniya k bade bade murkho ka hal bahut bura hua hai ye bhul jate hain, mujhe to ye samajh nahi ata ye Sardaro sikh logo en kamini congres sarkar k sath kaise rah pati hai manmohan singh ko to en congresiyon pr ultiyan karni chahiye thi to sale en k samne dum hila rahe hain kahte hain hindu darpok hain to ye sardar manmohan kya kar raha hai, congres ka sath kyon nahi de raha hai sikh danga kaise bhul jate hain,ishai mushalmano k pillo k same dum kyon hilate hai, kya rupya paisa etna mahatwapurn hai kee humare desh kee janta en kutte videsiyon k samne ghutne tekti rahti hai,... sab saale narak mai jalenge..

Man said...

kkootto ko janha tukda milega vanhi poonchh hilayenge ,or vafadaari sabit karenge ,lakin internet ne inki pol chodee kar di ab inki halt patli pad gayee he.....log ab inke pichhvade pe petrol dalne lage he |

RAJ SINH said...

sambhalke rahna hoga bharat , AASTEEN KE SANPON SE !

Anonymous said...

is blog ka prachar karen

PRABHAT KUMAR RAJAN said...

Prabhat Kumar Rajan, Ranchi : Kuchh na Kuchh to Karna hi Padega in Desdrohion ko sabak sikhane ke lia

PRABHAT KUMAR RAJAN said...

Binod Dua Desh ke liye nahi Desh Ko Hi Kha Rahe Hain. Mob-08987506944

संजय बेंगाणी said...

जिन्हे लगता है हिन्दु कुछ नहीं कर रहे उन्हें मात्र रास्वस की ही संस्थाओं की संख्याँ पता करनी चाहिए. हाँ समस्या यह है कि कुछ समस्याएं ऐसी मूँह बाये खड़ी है जिन्हें हिन्दु समस्या ही नहीं मान रहा.

आप अच्छी जानकारी खोद कर लाए है. सोचता हूँ यह चिट्ठा न होता तो?

Amrit Lal said...

Ham To Kahte Hain Danke Ki Chot Par Agar Ganga Ko Godhra Banaoge to Gujrat Bhi Apne App BAn Jayega

Anonymous said...

मीडिया को उस सलमान खान नाम के भान्ड का गुणगान करने से फुरसत मिले तब ना.
रोज यही बताया करता है कि उस अधेड़ भान्ड ने कौन सी नयी हीरोईन फसायी ?

भारत said...

जिस तरह से किसीई रोग के कारणों को जाने बिना उसका इलाज नहीं हो सकता ,उसी तरह अपने शत्रुओं की नीतिओं और चालों को समझे बिना उसे परास्त नहीं किया जा सकता .उसी तरह हम जब तक अपनी सेकुलर विचारधारा को नहीं बदलते हम अपने असली शत्रुओं को नहीं पहचान सकते .सेकुलर विचारों के कारण हम केवल आधा सत्य ही जान सकते हैं .हम सब जानते हैं ,कि सिम्मी ,लश्करे तय्यबा ,हूजी ,इंडियन मुजाहिदीन ,अल कायदा जैसे संगठन इस्लाम से प्रेरित हैं .और स्थानीय मुसलमानों का उनको समर्थन है .लेकिन बड़े ताज्जुब की बात है कि हम इस बात को स्वीकार नहीं करते कि आतंकवाद इस्लाम का धार्मिक कार्य है .

चन्द्र प्रकाश दुबे said...

लोकतंत्र के स्तभों का चाटुकारिता का ये आलम है की " अपना काम (माल है मिलता ) है बनता ,भाड़ में जाये जनता. लेख के लिए साधुवाद

Ratan Ekka said...

Church Ke Kihalf Ranchi Jharkhnad Mein Sanghash Kar Rahe Sri Megha Oraon Ko Samarthan Karen. Unka No. Hai 09430139593

Prem Jiwal said...

Ek Hindu Jab Kisi Masjid Ya Mandir Ke Pas Se Gujarta Hai to Shradha Se Uska Sar Jhuk Jata Hai Aisa Kisi Muslim Ya Isai Ke sath Kyon Nahi Hota. Agra Hota Bhi Hai To Ginti Me.

Prem Jiwal said...

Ek Hindu Jab Kisi Masjid Ya Church Ke Pas Se Gujarta Hai to Shradha Se Uska Sar Jhuk Jata Hai Aisa Kisi Muslim Ya Isai Ke sath Kyon Nahi Hota Jab O Mandir ke Pas se gujarta hai. Agra Hota Bhi Hai To Ginti Me.

रंजना said...

अभी विडिओ देखकर दिमाग इतना भुना हुआ है कि संयत रूप में कुछ कहने के हाल में नहीं...

इन समाचार चैनलों को तो देखना हमने कब का छोड़ दिया,क्योंकि इनके पास या तो ये प्रायोजित प्रोजेक्ट्स होते हैं या फ़िल्मी मसाले...समाचार जानने कहाँ जाएँ...बिलकुल समझ नहीं आता...

आपके हम बहुत बहुत आभारी हैं कि आपके सहयोग से कुछ जान पाते हैं...


साधुवाद !!!

प्रवीण शाह said...

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आदरणीय सुरेश जी,

सही कह रहे हैं आप NDTV की कोई साख अब नहीं बची रही है २जी मामले में इसके पत्रकार शामिल थे यह राडिया टेपों से जाहिर है... कुछ तो फायदा लिया ही होगा चैनल ने... बरखा दत्त को कोई नेता या मंत्री भाव इसीलिये तो देगा क्योंकि वह अपने चैनल में मनमाफिक खबरें लगाने व असहज करती खबरें हटाने का दम रखती थी... भारत के हिन्दू बाहुल्य चरित्र को बदलने की जो साजिशें दो दूसरे धर्मों द्वारा की जा रही हैं वह यदि कामयाब हो गई तो भारत का कोई भविष्य नहीं बचेगा सिवाय किसी दूसरी महाशक्ति का उपनिवेश बन जाने के...

इस आंखें खोलते लेख के लिये आपका आभार...


...

सञ्जय झा said...

जिन्हे लगता है हिन्दु कुछ नहीं कर रहे उन्हें मात्र रास्वस की ही संस्थाओं की संख्याँ पता करनी चाहिए. हाँ समस्या यह है कि कुछ समस्याएं ऐसी मूँह बाये खड़ी है जिन्हें हिन्दु समस्या ही नहीं मान रहा.

आप अच्छी जानकारी खोद कर लाए है. सोचता हूँ यह चिट्ठा न होता तो?

ISE MERI BHI BAAT MANI JAI

JANARDAN MISHRA said...

ये विनोद दुआ और उश्के (एन डी टी वि) के निकम्मे रिपोर्टरों को क्या साबरमति एक्सप्रेश में जिन्दा जलने वाले के परिवार का दुःख दर्द नहीं दिखाई देता, बेशर्मी कि कोई हद नहीं होती ये एन डी टी वि ने साबित कर ही दिया..

sidhesh said...

जो पत्रकारिता निजी सरक्षण में अथवा विदेशी सरक्षण से चलता है उससे स्वतन्त्र निष्पक्ष पत्रकारिता की उमीद करना बेकार है !

shreshthbharat....se

विरल त्रिवेदी गुजरात said...

अब चेनलोके निशाने पे बाबा रामदेवजी है। हमले शुरु हो गए है।
अब इनको मुहतौड जवाब देना होगा।