Sunday, January 9, 2011

मुम्बई स्टॉक एक्सचेंज में शरीयत आधारित इंडेक्स शुरु… सच्चर कमेटी की सिफ़ारिशें रंग लाने लगीं … Sharia Index, Islamic Bank, Sachchar Committee Reports

भारत में इस्लामिक बैंक की स्थापना के प्रयासों में मुँह की खाने के बाद, एक अन्य “सेकुलर” कोशिश के तहत मुम्बई स्टॉक एक्सचेंज में एक नया इंडेक्स शुरु किया गया है जिसे “मुम्बई शरीया-इंडेक्स” नाम दिया गया है। बताया गया है कि इस इंडेक्स में सिर्फ़ उन्हीं टॉप 50 कम्पनियों को शामिल किया गया है जो “शरीयत” के अनुसार “हराम” की कमाई नहीं करती हैं, यह कम्पनियाँ शरीयत के दिशानिर्देशों के अनुसार पूरी तरह “हलाल” मानी गई हैं जिसमें भारत के मुस्लिम बिना किसी “धार्मिक खता”(?) के अपना पैसा निवेश कर सकते हैं।



एक इस्लामिक आर्थिक संस्था है “तसीस” (TASIS) (Taqwaa Advisory and Shariat Investment Solutions)। यह संस्था एवं इनका शरीयत बोर्ड यह तय करेगा कि कौन सी कम्पनी, शरीयत के अनुसार “हलाल” है और कौन सी “हराम”। इस संस्था के मुताबिक शराब, सिगरेट, अस्त्र-शस्त्र बनाने वाली तथा “ब्याजखोरी एवं जुआ-सट्टा” करने वाली कम्पनियाँ “हराम” मानी गई हैं।

भारत में इस्लामिक बैंक अथवा इस्लामिक फ़ाइनेंस (यानी शरीयत के अनुसार चलने वाले संस्थानों) की स्थापना के प्रयास 2005 से ही शुरु हो गये थे जब रिज़र्व बैंक ने “इस्लामिक बैंक” की उपयोगिता एवं मार्केट के बारे में पता करने के लिये, आनन्द सिन्हा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था। इसके बाद राजिन्दर सच्चर की अध्यक्षता में आयोग बनाया गया, जिसने निष्कर्ष निकाला कि भारत के 50% से अधिक मुस्लिम विभिन्न फ़ायनेंस योजनाओं एवं शेयर निवेश के बाज़ार से बाहर हैं, क्योंकि उनकी कुछ धार्मिक मान्यताएं हैं। इस्लामिक बैंक की स्थापना को शुरु में केरल के मलप्पुरम से शुरु करने की योजना थी, लेकिन डॉ सुब्रहमण्यम स्वामी ने केरल हाईकोर्ट में याचिका दायर करके एवं विभिन्न अखबारों में लेख लिखकर बताया कि “इस्लामिक बैंक” की अवधारणा न तो भारतीय रिजर्व बैंक के मानदण्डों पर खरा उतरता है, और न ही एक “सेकुलर” देश होने के नाते संविधान में फ़िट बैठता है, तब “फ़िलहाल” (जी हाँ फ़िलहाल) इसे ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया है, परन्तु शरीया-50 इंडेक्स को मुम्बई स्टॉक एक्सचेंज (लिस्ट यहाँ देखें…) में लागू कर ही दिया गया है।

स्वाभाविक तौर पर कुछ सवाल तथाकथित शरीयत आधारित इंडेक्स को लेकर खड़े होते हैं – जैसे,

1) भारत एक घोषित धर्मनिरपेक्ष देश है (ऐसा संविधान में भी लिखा है), फ़िर “शरीयत” एवं धार्मिक आधार पर इंडेक्स शुरु करने का क्या औचित्य है? क्या ऐसा ही कोई “गीता इंडेक्स” या “बाइबल इंडेक्स” भी बनाया जा सकता है?

2) भारत या विश्व की कौन सी ऐसी प्रायवेट कम्पनी है, जो “ब्याजखोरी” पर नहीं चलती होगी?

3) पाकिस्तान व सऊदी अरब अपने-आप को इस्लाम का पैरोकार बताते फ़िरते हैं, मैं जानने को उत्सुक हूं (कोई मुझे जानकारी दे) कि क्या पाकिस्तान में सिगरेट बनाने-बेचने वाली कोई कम्पनी कराची स्टॉक एक्सचेंज में शामिल है या नहीं?

4) कृपया जानकारी जुटायें कि क्या सऊदी अरब में किसी अमेरिकी शस्त्र कम्पनी के शेयर लिस्टेड हैं या नहीं?

5) क्या शराब बनाने वाली कोई कम्पनी बांग्लादेश अथवा इंडोनेशिया के स्टॉक एक्सचेंज में शामिल है या नहीं? या वहाँ की किसी “इस्लामिक” व ईमानदारी से शरीयत पर चलने वाली किसी कम्पनी की पार्टनरशिप “ब्याजखोरी” करने वाले किसी संस्थान से तो नहीं है?


इन सवालों के जवाब इस्लामिक जगत के लिये बड़े असहज सिद्ध होंगे और शरीयत का नाम लेकर मुसलमानों को बेवकूफ़ बनाने की उनकी पोल खुल जायेगी। भारत में शरीयत आधारित इंडेक्स शुरु करने का एकमात्र मकसद सऊदी अरब, कतर, शारजाह जैसे खाड़ी देशों से पैसा खींचना है। अभी भारत में अंडरवर्ल्ड का पैसा हवाला के जरिये आता है, फ़िर दाउद इब्राहीम एवं अल-जवाहिरी का पैसा “व्हाइट मनी” बनकर भारत आयेगा। ज़ाहिर है कि इसमें भारतीय नेताओं के भी हित हैं, कुछ के “धार्मिक वोट” आधारित हित हैं, जबकि कुछ के “आर्थिक हित” हैं। भारत से भ्रष्ट तरीकों से जो पैसा कमाकर दुबई भेजा जाता है और सोने में तब्दील किया जाता है, वह अब “रुप और नाम” बदलकर वापस भारत में ही शरीयत आधारित इंडेक्स की कम्पनियों में लगाया जायेगा। बेचारा धार्मिक मुसलमान सोचेगा कि यह कम्पनियाँ और यह शेयर तो बड़े ही “पवित्र” और “शरीयत” आधारित हैं, जबकि असल में यह पैसा भारत में हवाला के पैसों के सुगम आवागमन के लिये होगा और इसमें जिन अपराधियों-नेताओं का पैसा लगेगा, उन्हें न तो इस्लाम से कोई मतलब है और न ही शरीयत से कोई प्रेम है।

कम्पनियाँ शरीयत आधारित मॉडल पर “धंधा” कर रही हैं या नहीं इसे तय करने का पूरा अधिकार सिर्फ़ और सिर्फ़ TASIS को दिया गया है, जिसमें कुरान व शरीयत के विशेषज्ञ(?) लोगों की एक कमेटी है, जो बतायेगी कि कम्पनी शरीयत पर चल रही है या नहीं। यानी इस बात की कोई गारण्टी नहीं है कि भविष्य में देवबन्द से कोई मौलवी अचानक किसी कम्पनी के खिलाफ़ कोई फ़तवा जारी कर दे तो किसकी बात मानी जायेगी, TASIS के पैनल की, या देबवन्द के मौलवी की? मान लीजिये किसी मौलवी ने फ़तवा दिया कि डाबर कम्पनी का शहद खाना शरीयत के अनुसार “हराम” है तो क्या डाबर कम्पनी को शरीया इंडेक्स से बाहर कर दिया जायेगा? क्योंकि देवबन्द का कोई भरोसा नहीं, पता नहीं किस बात पर कौन सा अजीबोगरीब फ़तवा जारी कर दे… (हाल ही में एक फ़तवे में कहा गया है कि यदि शौहर अपनी पत्नी को मोबाइल पर तीन बार तलाक कहे और यदि किसी वजह से, अर्थात नेटवर्क में खराबी या लो-बैटरी के कारण पत्नी “तलाक” न सुन सके, इसके बावजूद वह तलाक वैध माना जायेगा, अब बताईये भला… पश्चिम की आधुनिक तकनीक से बना मोबाइल तो शरीयत के अनुसार “हराम” नहीं है लेकिन उस पर दिया गया तलाक पाक और शुद्ध है, ऐसा कैसे?)

बहरहाल, बात हो रही थी इस्लामिक बैंकिंग व शरई इंडेक्स की – हमारे देश में एक तो वैसे ही बैंकिंग सिस्टम पर निगरानी बेहद घटिया है एवं बड़े आर्थिक अपराधों के मामले में सजा का प्रतिशत लगभग शून्य है। एक उदाहरण देखें – देश के सर्वोच्च पद पर आसीन प्रतिभादेवी सिंह पाटिल के खिलाफ़ उनके गृह जिले में आर्थिक अपराध के मामले पंजीबद्ध हैं। प्रतिभा पाटिल एवं उनके रिश्तेदारों ने एक समूह बनाकर “सहकारी बैंक” शुरु किया था, प्रतिभा पाटिल इस बैंक की अध्यक्षा थीं उस समय इनके रिश्तेदारों को बैंक ने फ़र्जी और NPA लोन जमकर बाँटे। ऑडिट रिपोर्ट में जब यह बात साबित हो गई, तो रिज़र्व बैंक ने इस बैंक की मान्यता समाप्प्त कर दी। रिपोर्ट के अनुसार बैंक के सबसे बड़े 10 NPA कर्ज़दारों में से 6 प्रतिभा पाटिल के नज़दीकी रिश्तेदार हैं, जिन्होंने बैंक को चूना लगाया… (सन्दर्भ- The Difficulty of Being Good : on the Subtle art of Dharma, Chapter Draupadi -- Page 59-60 – लेखक गुरुचरण दास)

ऐसी स्थिति में अरब देशों से शरीयत इंडेक्स के नाम पर आने वाला भारी पैसा कहाँ से आयेगा, कहाँ जायेगा, उसका क्या और कैसा उपयोग किया जायेगा, उसे कैसे व्हाइट में बदला जायेगा, इत्यादि की जाँच करने की कूवत भारतीय एजेंसियों में नहीं है। असल में यह सिर्फ़ भारत के मुसलमानों को भरमाने और बेवकूफ़ बनाने की चाल है, ज़रा सोचिये किंगफ़िशर एयरलाइन्स के नाम से माल्या की कम्पनी किसी इस्लामी देश के शेयर बाज़ार में लिस्टेड होती है या फ़िर ITC होटल्स नाम की कम्पनी शरीयत इंडेक्स में शामिल किसी कम्पनी की मुख्य भागीदार बनती है तो क्या यह शरीयत का उल्लंघन नहीं होगा? विजय माल्या भारत के सबसे बड़े शराब निर्माता हैं और ITC सबसे बड़ी सिगरेट निर्माता कम्पनी, तब इन दोनों कम्पनियों के शेयर, भागीदारी, संयुक्त उपक्रम इत्यादि जिस भी कम्पनी में हों उसे तो “हराम” माना जाना चाहिये, लेकिन ऐसा होता नहीं है, देश के कई मुस्लिम व्यक्ति इनसे जुड़ी कम्पनियों के शेयर भी लेते ही हैं, परन्तु शरीया इंडेक्स, अरब देशों से पैसा खींचने, यहाँ का काला पैसा सफ़ेद करने एवं भारत के मुस्लिमों को “बहलाने” का एक हथियार भर है। मुस्लिमों को शेयर मार्केट में पैसा लगाकर लाभ अवश्य कमाना चाहिये, भारतीय मुस्लिमों की आर्थिक स्थिति सुधरे, ऐसा कौन नहीं चाहता… लेकिन इसके लिए शरीयत की आड़ लेना, सिर्फ़ मन को बहलाने एवं धार्मिक भावनाओं से खेलना भर है। हर बात में “धर्म” को घुसेड़ने से अन्य धर्मों के लोगों के मन में इस्लाम के प्रति शंका आना स्वाभाविक है…

एक अन्य उदाहरण :- यदि तुम जिन्दा रहे तो हम तुम्हें इतना पैसा देंगे, और यदि तुम तय समय से पहले मर गये तो हम तुम्हारे परिवार को इतने गुना पैसा देंगे…। या फ़िर ऐसा करो कि कम किस्त भरो… जिन्दा रहे तो सारा पैसा हमारा, मर गये तो कई गुना हम तुम्हें देंगे… जीवन बीमा कम्पनियाँ जो पॉलिसी बेचती हैं, वह भी तो एक प्रकार से “मानव जीवन पर खेला गया सट्टा” ही है, तो क्या भारत के मुसलमान जीवन बीमा करवाते ही नहीं हैं? बिलकुल करवाते हैं, भारी संख्या में करवाते हैं, तो क्या वे सभी के सभी शरीयत के आधार पर “कुकर्मी” हो गये? नहीं। तो फ़िर इस शरीयत आधारित इंडेक्स की क्या जरुरत है?

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की शाखाएं चुन-चुनकर और जानबूझकर मुस्लिम बहुल इलाकों (बंगाल के मुर्शिदाबाद, बिहार के किशनगंज  एवं केरल के मलप्पुरम ) में खोलने की कवायद जारी है, कांग्रेस शासित राज्यों में से कुछ ने नौकरियों में 5% आरक्षण मुसलमानों को दे दिया है, केन्द्र सरकार भी राष्ट्रीय सिविल परीक्षाओं में मुसलमानों के लिये 5% आरक्षण पर विचार कर रही है, केरल-बंगाल-असम के अन्दरूनी इलाकों में अनधिकृत शरीयत अदालतें अपने फ़ैसले सुनाकर, कहीं प्रोफ़ेसर के हाथ काट रही हैं तो कहीं देगंगा में हिन्दुओं को बस्ती खाली  करने के निर्देश दे रही हैं…। ये क्या हो रहा है, समझने वाले सब समझ रहे हैं…

“एकजुट जनसंख्या” और “मजबूत वोट बैंक” की ताकत… मूर्ख हिन्दू इन दोनों बातों के बारे में क्या जानें… उन्हें तो यही नहीं पता कि OBC एवं SC-ST के आरक्षण कोटे में से ही कम करके, “दलित ईसाईयों”(?) (पता नहीं ये क्या चीज़ है) और मुसलमानों को आरक्षण दे दिया जायेगा… और वे मुँह तकते रह जायेंगे।

बहरहाल, सरकार तो कुछ करेगी नहीं और भाजपा सोती रहेगी… लेकिन अब कम से कम हिन्दुओं को यह तो पता है कि शरीयत इंडेक्स में शामिल उन 50 कम्पनियों के शेयर “नहीं” खरीदने हैं… शायद तंग आकर कम्पनियाँ खुद ही कह दें, कि भई हमें शरीयत इंडेक्स से बाहर करो… हम पहले ही खुश थे…। बड़ा सवाल यह है कि क्या मुनाफ़े के भूखे, “व्यापारी मानसिकता वाले, राजनैतिक रुप से बिखरे हुए हिन्दू” ऐसा कर पाएंगे?


चलते-चलते : मजे की बात तो यह है कि, हर काम शरीयत और फ़तवे के आधार पर करने को लालायित मुस्लिम संगठनों ने अभी तक यह माँग नहीं की है कि अबू सलेम को पत्थर मार-मार कर मौत की सजा दी जाये अथवा अब्दुल तेलगी को ज़मीन में जिन्दा गाड़ दिया जाये… या सूरत के MMS काण्ड के चारों मुस्लिम लड़कों के हाथ काट दिये जायें…। ज़ाहिर है कि शरीयत अथवा फ़तवे का उपयोग (अक्सर मर्दों द्वारा) सिर्फ़ “अपने फ़ायदे” के लिये ही किया जाता है, सजा पाने के लिये नहीं… उस समय तो भारतीय कानून ही बड़े “फ़्रेण्डली” लगते हैं…।
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40 comments:

nitin tyagi said...

Kya hoga is desh ka ??

P.N. Subramanian said...

बड़ा ही गंभीर मामला है. अब हमें लोकतंत्र से मुक्ति पाकर कोई और तंत्र अपनाना होगा.

Dev said...

jabardust iska prachaar jaruri hain...aam jan main...

vedvyathit said...

abhi poora islami krn hona thoda baki hai jldi yh srkar use poora kr degi

JANARDAN MISHRA said...

हम और आप इन कंपनियों के सेयर नहीं ख़रीदे गें, लेकिन लालू, मुलायम, पासवान, दिग्विजय, जैशे,, और इनके गुर्गे, इन कंपनियों को जरुर मुनाफा करवाएं गें, हमें ते अब ये सोचना है के अब हम लोग कब तक नपुंसकता में जीते रहें गें......

sudesh sharma said...

tushtikaran ki disha me ek aur kadam
*mera bharat mahan*

सुलभ § Sulabh said...

हाय रे तुष्टिकरण !
हिन्दुस्तान को आगे कौन कौन से दिन देखने होंगे...??

P K Surya said...

भारतीय मुस्लिमों की आर्थिक स्थिति सुधरे, ऐसा कौन नहीं चाहता… लेकिन इसके लिए शरीयत की आड़ लेना, सिर्फ़ मन को बहलाने एवं धार्मिक भावनाओं से खेलना भर है। हर बात में “धर्म” को घुसेड़ने से अन्य धर्मों के लोगों के मन में इस्लाम के प्रति शंका आना स्वाभाविक है… Mera Bharat Mahan parantu (Muslim or isai)k bina to kadapi nahi, wah mera desh or uske kanun banane wale ab to Hindu ko chhod kar sabhi dharmo k liye alag alag kanun banega wo bhi hunduo ko dabane k liye Par Hindu b ek bahut bhari spring he jada daba to ushse kahi jada reverse marega bus Waqt ka intazar he, jai Bharat

I and god said...

this all is happening because , we hindus think, we are intelligent by birth. we do not have any need to read , listen any scripture, know about our relegion, and just shout when other person is strong in his covictions, bad or good.

even if 50 % hindus are real hindus ( not by surname and they go go temple sometime) how any body can dare to do such kind of things in india.

you can send me your direct comments to me on my mail ashok.gupta4@gmail.com

I and god said...

be a true hindu, and make others hindus also true hindu.

the other people who want to harm this nation and its people , will not dare to do that.

Mahen said...

When B.J.P. or any other Hindu sanstha work for Hindu they are called as Dharmik (non-secular) but when Congress work for only muslims whether it is worng or right, Congress is called secular. What is this? While Congress works only in favour of muslim. I think that Congress is the Biggest Dharmik (Non-secular) Party. It works only for muslim vote not for this country.

kaverpal said...

Dear Suresh ji aapne jo ye kaha hai ki fatwa kya hai to ye sahi baat hai magar nitin ji aap itne mayoos na ho haqeeqat ke saath itna kuchha hua fir bhi ye desh chala aage bhi chalega aur achha chalega bus aap himmat rakhiye aur jarurat padne par himmat dikhao udaharan ke taur par yahudiyon ko dekh lo kitne hain aur kya kar rahen hain . aap mujhse milna aap ko mai himmat dunga

I and god said...

on the comment of kaverpal.

he says nothing should be done on this issue.
it will finish by itself.

radhey radhey

Anonymous said...

hehehe..

inmeins se ek shriya 50 wali company Wipro ke bade client hai Bacardy, British Tobacco Comany aur Foster Beer.. TCS ka bhi kuch aisa hi haal hai..

संजय बेंगाणी said...

मुसलमान शरियत पर अपनी जान देतें है, आपको कोई हक नहीं इस तरह के प्रयासों पर उँगली उठाएं. क्या आपने कभी किसी मुसलमान को दारू पीते या बेचते देखा है? किसी मुसलमान को ब्याज पर लोन लेते या देते देखा है? क्या किसी मुसलमान को अफिम उगाते या बेचते देखा है? किसी मुसलमान को अंडरवर्ड से रिश्ता रखते देखा है? अगर देखा भी है तो उस पर फतवा निकलते देखा है? फिर?.....

Neeraj नीरज نیرج said...

विचारोत्तेजक आलेख.. महामूढ़ हैं हम लोग जो बर्दाश्त करते हैं. इसे अपने सभी मित्रों को भेज दिया है. पाठकगण इसका भरपूर प्रचार करें.
धन्यवाद सुरेश भाई.

Anonymous said...

अच्छा लेख
अब उस गददार कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का बयान सुनिये

भाजयुमो कार्यकर्ता के श्री नगर के लाल चौक पर 26 जनवरी को तिरंगा फहराने के कार्यक्रम पर ये गददार उमर अब्दुल्ला कहता है कि इससे राज्य मे शांति भंग हो जायेगी
कितना कमीना है ये अब्दुल्ला
ऐसे ही कमीने मुसलमानो के कारण ये देश बर्बाद है जो साले खाते यहाँ कि है बजाते पाकिस्तान की है
सबसे कमीनी कांग्रेस है

Man said...

वन्दे मातरम सर ,
सर जबरदस्त पोल पट्टी उघाड़ी हे आप ने इस शरियत के नकली टोटके की ,उधर शर्मा जी ने भी इनको नगा कर दिया हे भंडाफोडू में ,एक पागल ने मुझे बहकाने की कोशीश की ,साथ में ,और मानवतावादी होने दावा किया ?पता नहीं इनका जाल अभी भी चलता हे |ये सभी नकारारात्म्क शक्तियों के मालिक हे |बी के शुआन्न?

Ajit said...

http://ajitpratapsingh.blogspot.com/2011/01/blog-post.html

प्रतुल वशिष्ठ said...

...

अरे .. जहाँ देखते हैं वहीं इस्लाम और उसके कायदों को नंगा कर देते हैं आप.
वाकई .. इन मजहबी खोल में की जाने वाली नापाक कोशिशों की कलई खुलनी ही चाहिए.

.

Anonymous said...

is desh ko ab islamick hone se koi mai ka lal nahi rok sakta?

kongress tatha uske goon is kaam main lage hain
raajmata aur bhondu ko chiristinity ko badhava dene ka kaam de rakha?
islam ke bahane ye side se doosara business kar rahe hain??

उम्दा सोच said...

इनको समझने के लिए ज़रा घुटने से सोचना पडेगा ... बहरहाल इनकी कथनी और करनी का फर्क यहाँ भी जल्द दिखाई दे जाएगा !

राहुल पंडित said...

तुष्टिकरण....

Anonymous said...

बहुत खराब समय आ गया है..

Dr. Manoj Sharma said...

धर्म-निरपेक्षता के दोगले मापदंड अर्थात छद्म धर्म-निरपेक्षता नितांत निधर्मी, धर्महीन, अधर्मी लोगों के स्वार्थपूर्ण विकृत मानस की उपज है.
देश को कट्टरपंथियों से ज्यादा खतरा छद्म सेकुलरों से है.

Kunal Singh Dabi said...

New counting describe by Congress...
1 Crore = 1 Khoka
500 Crore = 1 Koda
1000 Crore = 1 Radia
10000 Crore = 1 Kalmadi
100000 Crore = 1 Raja
10 Kalmadi + 1 Raja = 1 Pawar
10 Pawar = 1 Sonia

Sikh lo ...Kam aaye gi

I and god said...

this is the acceptance of indian government, of two laws for two community.

if the trend continues, we will see the further making of one more pakistan from this remaining india.

i am sure. what do you think.

Man said...

http://jaishariram-man.blogspot.com/2011/01/blog-post_12.html

सुलभ § Sulabh said...

@ कुनाल सिंह जी आपने सही फरमाया
अब हमलोग बातें कुछ इस तरह कह सुन सकते हैं..

"हमारे कंपनी का इस साल टर्नओवर रहा 20 कोड़ा "
"फलानी कंपनी 3 राडिया में नीलाम हुई"
"इस राज्य का सकल घरेलु उत्पाद अभी तक १ सोनिया से नीचे है"
इत्यादि...इत्यादि..

I and god said...

we will continue writing in blogs and internet or some body has some practical solutions to save the country and hindu from this army of traitors and agents of muslims, and other vested interests.
yours
ashok gupta

Anonymous said...

लाख समस्याओ की जड़ ये मुसलमान है.
1400 साल पहले एक अपराधी किस्म के वयक्ति मुहम्मद ने अपने अपराधो को मान्यता प्रदान करने के लिये इस्लाम नाम की पार्टी बनायी{धर्म नही कहूंगा}. और ये मुसलमान पूरी दुनिया का जीना हराम किये है. लेकिन हिँदुस्तान मे ये सब नही चलेगा. जल्दी ही समय आयेगा. इनके कुकर्मो का एक एक हिसाब होगा

दिवाकर मणि said...

शरीयत, शरीयत की हुआं-हुआं आजकल बेकार में ही जोरों पर है...
होना तो यह चाहिए कि इस देश को पूरा का पूरा मुस्लिम राष्ट्र बना दिया जाए...फिर देखिए कैसे सारी समस्याएं अपने आप समाप्त हो जाती हैं...
जैसे ही ऐसा होगा फिर देखिए.... बाबर, तैमूरलंग, और आधुनिक समय के महान इस्लामी पुरोधा लादेन के भारतीय वंशज, हमारे गद्दीनशीनों का नामोनिशान नहीं मिटा दिया तो कहियेगा....या तो मुसलमान बनो या फिर....?????
(नोट:- समस्याएं=देश के ढपोरशंखी धर्मनिरपेक्षता के वाहक राजनेता)

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said...

आदाब अर्ज़ है सुरेश जी,

कैसे हैं? आपका लेख अच्छा था लेकिन आपने इसका इस्लामीकरण अच्छे से नहीं किया। ये लेख मुसलमानों की आखों से अंध्विश्वास (जो वो अपने मौलवीयों और नेताओं पर करते है) की मिट्टी को साफ़ करने में मददगार हो सकता है।

लेकिन आपका लिखने का अंदाज़ बहुत तंज़िया होता है इसलिये ये बुरा लगता है। अपनी बात कहे लेकिन थोडा प्यार से।

आप मुसलमानों के लोन लेने, इंशोरेन्स कराने और शेयर खरीदने के बारे में बात कर रहे हैं....आज के दौर में बहुत से मुसलमान ये काम करते है लेकिन आपने शायद इन मुसलमानों की दिनचर्या नही देखी है..

एक बार गौर से देखियेगा...ये लोग सिर्फ़ नाम से मुस्लमान मिलेंगे। हफ़्ते में सिर्फ़ जुमे की नमाज़ पढ्ने वाले....ईद और बकरीद पर नमाज़ पढने वाले...

दुनिया के सारे शिर्क और बिदअत आपको उनके घर में मिलेंगे...दुनिया की हर बुराई मिलेगी....सिर्फ़ एक चीज़ नही मिले्गी....

इस्लाम....सच्चा इस्लाम

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said...

5 दिसम्बर को मैनें अपने रिटेल स्टोर की शुरुआत की है....इसकी तैयारियों की वजह ही से मैं ब्लोगिंग से दुर था..

ये स्टोर अक्टुबर में खुलना था..शादियों के सीज़न से पहले लेकिन पैसे की कमी की वजह से नहीं हो पाया...मैनें अपनी payment का इन्तेज़ार किया...फ़िर स्टोर खोला...

मेरा थोडा नुक्सान हुआ लेकिन मैने लोन नही लिया...और अल्लाह का शुक्र है और उसका एहसान है कि लोग सीज़न में जितनी सेल करते है मैनें उतनी आफ़ सीज़न में की है...वो भी जब तब मैनें अभी Advertisement पर कोई खर्चा नहीं किया है और ना ही अभी किसी भी तरह का कोई बोर्ड लगाया है शहर में....

इसे क्या कहेंगे????/






मैं बताऊ.....इसे कहते हैं....अल्लाह पर यकीन...

Suresh Chiplunkar said...

काशिफ़ जी,
बड़े दिनों बाद आये, खुशामदीद…
सबसे पहले तो स्टोर खोलने की बधाई कबूल करें…

आपने फ़रमाया - "ये लोग सिर्फ़ नाम से मुस्लमान मिलेंगे। हफ़्ते में सिर्फ़ जुमे की नमाज़ पढ्ने वाले....ईद और बकरीद पर नमाज़ पढने वाले...
दुनिया के सारे शिर्क और बिदअत आपको उनके घर में मिलेंगे...दुनिया की हर बुराई मिलेगी....सिर्फ़ एक चीज़ नही मिले्गी...."

मुझे समझ नहीं आया, कि आप क्या कहना चाहते हैं? क्या ये सारे मुस्लिम शिर्क और बिदअत वाले… शेयर खरीदने के कारण हुए, लोन और इंश्योरेंस करवाने से हुए?

या फ़िर ये लोग शुरु से ही ऐसे ही थे इस वजह से इन्होंने लोन लिया और इंश्योरेंस कराया? :) :)

Shah Nawaz said...

सुरेश भाई.... जैसे दुनिया में हर तरह के लोग हैं... अच्छे भी और बुरे भी... इसी तरह मुसलमान भी हैं... जिनमें कुछ अच्छाइयों के मालिक हैं और कुछ बुराइयों के... आज बहुत से मुसलमान मिल जाएंगे जो ब्याज का पैसा खाते हैं, शराब पीते हैं, अवैध धंधे करते हैं... वहीँ कुछ अच्छे लोग भी हैं जो इन जैसी बुराइयों से दूर हैं... इसलिए अगर कुछ लोग बुराइयों से दूर रहना चाहें तो उन्हें पूरा हक होना चाहिए...

वैसे आपको बता चलूँ कि इससे बहुत पहले से दक्षिण का "श्रीराम फाइनेंस" नामक ग्रुप शरियाह इंडेक्स के अनुसार शेयर मार्केट में पैसा लगा रहा है...

I and god said...

you have beautifully written about saccha musalman.

who is a sachha hindu !

not to critisize but for self study i am asking

Roopesh Singhare said...

सोचता हूं, कुछ ना ही लिखूं तो अच्छा । हिन्दुत्व को अपनी इस उम्र तक जितना समझा है - गर्व ही किया है। लेकिन यहां कई लेखों को पढ कर लगा कि मेरे समझने से परे
पूरे हिन्दुस्तान और हिन्दुत्व की इन तथाकथित "देशभक्तों (?)" ने जो दशा बना दी है - उसके लिये सबसे गन्दी गाली भी कम है। कितने भ्रम मे हैं हम सब। हमारे नेता तो - जानवर हैं - साले किस मिट्टी के हैं - अरे, कम से कम मौत से पहले तो खुद से सच बोलोगे - एक पल के लिये ही सही - क्या बोलोगे ??
और जो सच कहते हैं, खरा बोलते हैं - लोगों को हजम नही होते। पिछले दिनो राजीव दीक्षित ( देसी आन्दोलन ) का देहान्त हुआ, कहीं खबर नही आयी। शुक्र है - भास्कर और नयी दुनिया के ई-पेपर रोज़् देख लेता हूं - सो एक कोने मे खबर दिख गयी। अफ़सोस हुआ ।
कई बार लगता है - मुझे भारतीय होने पर सचमुच गर्व है या ये मेरा भ्रम है । भारतीय होने पर गर्व होना चाहिये या हिन्दु होने पर ??

I and god said...

respected roopesh jee,

i appreciate your pain for hinduism.

i want to know more about you. and want to be in your near contact.
because i also think the same. that am i really a hindu. or what is the meaning of being a hindu.

would you please put some light on it.

i am witing in english because i do not know hindi typing.

yours
ashok gupta

Jai Hindu said...

लोकतंत्र का बिकल्प सिर्फ सैन्य शासन ही है !