Wednesday, January 19, 2011

उधर लाशें उठाई जा रही थीं, इधर “भावी प्रधानमंत्री” पार्टी मना रहे थे… … Sabrimala Stampede, Tragedy in Sabrimala, Rahul Gandhi and 26/11

जैसा कि सभी को ज्ञात हो चुका है कि केरल के सुप्रसिद्ध सबरीमाला अय्यप्पा स्वामी मन्दिर की पहाड़ियों में भगदड़ से 100 से अधिक श्रद्धालुओं की मौत हुई है जबकि कई घायल हुए एवं अब भी कुछ लोग लापता हैं। इस दुर्घटना को प्रधानमंत्री ने “राष्ट्रीय शोक” घोषित किया, एवं कर्नाटक सरकार के दो मंत्रियों द्वारा अपने दल-बल के साथ घटनास्थल पर जाकर मदद-सहायता की। समूचे केरल सहित तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश व कर्नाटक में शोक की लहर है (मरने वालों में से अधिकतर तमिलनाडु व कर्नाटक के श्रद्धालु हैं)…


लेकिन इतना सब हो चुकने के बावजूद कांग्रेस के “युवा”(??) महासचिव एवं भारत के आगामी प्रधानमंत्री (जैसा कि चाटुकार कांग्रेसी उन्हें प्रचारित करते हैं), दुर्घटनास्थल से मात्र 70 किमी दूरी पर कुमाराकोम में केरल के बैकवाटर में एक बोट में पार्टी मना रहे थे। जिस समय “सेवा भारती” एवं “अय्यप्पा सेवा संगम” के कार्यकर्ता सारी राजनैतिक सीमाएं तोड़कर घायलों एवं मृतकों की सेवा में लगे थे, सेना के जवानों की मदद कर रहे थे, जंगल के अंधेरे को दूर करने के लिये अपने-अपने उपलब्ध साधन झोंक रहे थे… उस समय भोंदू युवराज कुमारकोम में मछली-परांठे व बाँसुरी की धुन का आनन्द उठा रहे थे।



यह भीषण भगदड़ शुक्रवार यानी मकर संक्रान्ति के दिन हुई, लेकिन राहुल बाबा ने शनिवार को इदुक्की जिले में न सिर्फ़ एक विवाह समारोह में भाग लिया, बल्कि रविवार तक वे कुमारकोम के रिसोर्ट में “रिलैक्स”(?) कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि राहुल गाँधी अलप्पुझा में अपने पारिवारिक मित्र अमिताभ दुबे के विवाह समारोह में आये थे (अमिताभ दुबे, राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन के ट्रस्टी बोर्ड के सदस्य व नेहरु परिवार के खासुलखास श्री सुमन दुबे के सुपुत्र हैं)। अमिताभ दुबे का विवाह अमूल्या गोपीकृष्णन के साथ 15 जनवरी (शनिवार) को हुआ, राहुल गाँधी 14 जनवरी (शुक्रवार) को ही वहाँ पहुँच गये थे।

पाठकों को याद होगा कि किस तरह 26/11 के मुम्बई हमले के ठीक अगले दिन, जबकि मेजर संदीप उन्नीकृष्णन की माँ की आँखों के आँसू सूखे भी नहीं थे… “राउल विंची”, दिल्ली के बाहरी इलाके में एक फ़ार्म हाउस में अपने दोस्तों के साथ पार्टी मनाने में मशगूल थे… उधर देश के जवान अपनी जान की बाजी लगा रहे थे और सैकड़ों जानें जा चुकी थीं। मुम्बई जाकर अस्पताल में घायलों का हालचाल जानना अथवा महाराष्ट्र की प्रिय कांग्रेस सरकार से जवाब-तलब करने की बजाय उन्होंने दिल्ली में पार्टी मनाना उचित समझा… (यहाँ देखें…

केरल के कांग्रेसजनों ने राहुल की इस हरकत पर गहरा क्रोध जताया है, स्थानीय कांग्रेसजनों का कहना है कि जब मुख्यमंत्री अच्युतानन्दन एवं नेता प्रतिपक्ष ओम्मन चाण्डी घटनास्थल पर थे, तो मात्र 70 किमी दूर होकर भी राहुल गाँधी वहाँ क्यों नहीं आये? (परन्तु नेहरु परिवार की गुलामी के संस्कार मन में गहरे पैठे हैं इसलिये कोई भी खुलकर राहुल का विरोध नहीं कर रहा है)।

यदि शनिवार की सुबह राहुल गाँधी उस विवाह समारोह को छोड़कर राहत कार्यों का मुआयना करने चले जाते तो कौन सी आफ़त आ जाती? शादी अटेण्ड करना जरूरी था या दुर्घटना स्थल पर जाना? न सिर्फ़ शनिवार, बल्कि रविवार को भी राहुल बाबा, बोट पर पार्टी मनाते रहे, गज़लें सुनते रहे… उधर बेचारे श्रद्धालु कराह रहे थे, मर रहे थे। यह हैं हमारे भावी प्रधानमंत्री…

अन्ततः शायद खुद ही शर्म आई होगी या किसी सेकुलर कांग्रेसी ने उन्हें सुझाव दिया होगा कि केरल में चुनाव होने वाले हैं इसलिये उन्हें वहाँ जाना चाहिये, तब रविवार शाम को राहुल गाँधी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रमेश चेन्निथला के साथ घटनास्थल के लिये उड़े… लेकिन शायद भगवान अय्यप्पा स्वामी भी, राहुल की “नापाक उपस्थिति” उस जगह नहीं चाहते होंगे इसलिये घने कोहरे की वजह से हेलीकॉप्टर वहाँ उतर न सका, और युवराज बेरंग वापस लौट गये (ये बात और है कि उनके काफ़िले में भारत के करदाताओं की गाढ़ी कमाई की मजबूत गाड़ियाँ व NSG के कमाण्डो की भीड़ थी, वे चाहते तो सड़क मार्ग से भी वहाँ पहुँच सकते थे, लेकिन ऐसा कुछ करने के लिये वैसी “नीयत” भी तो होनी चाहिये…)।

मीडिया के कुछ लोग एवं कांग्रेस के ही कुछ कार्यकर्ता दबी ज़बान में कहते हैं कि रविवार शाम को भी कोहरे, धुंध व बारिश का तो बहाना ही था, असल में राहुल बाबा इसलिये वहाँ नहीं उतरे कि घटनास्थल से लगभग सभी लाशें उठाई जा चुकी थी… ऐसे में राहुल गाँधी वहाँ जाकर क्या करते… न तो मीडिया का फ़ुटेज मिलता और न ही राष्ट्रीय स्तर पर छवि चमकाने का मौका मिलता… इसलिये कोहरे और बारिश का बहाना बनाकर हेलीकॉप्टर वापस ले जाया गया… लेकिन जैसा कि पहले कहा, यदि “नीयत” होती और “दिल से चाहते” तो, सड़क मार्ग से भी जा सकते थे। जब वे नौटंकी करने के लिये किसी दलित की झोंपड़ी में जा सकते हैं, अपना सुरक्षा घेरा तोड़कर उड़ीसा के जंगलों में रहस्यमयी तरीके से गायब हो सकते हैं (यहाँ पढ़ें…), तो क्या शादी-ब्याह-पार्टी में से एक घण्टा घायलों को अस्पताल जाने के लिये नहीं निकाल सकते थे? और कौन सा उन्हें अपने पैरों पर चलकर जाना था, हमारे टैक्स के पैसों पर ही तो मस्ती कर रहे हैं…

कांग्रेस द्वारा “भाड़े पर लिये गये मीडिया” ने तब भी राहुल का गुणगान करना नहीं छोड़ा और इन भाण्डों द्वारा “राहुल की सादगी” के कसीदे काढ़े गये (“सादगी” यानी, उन्होंने इस यात्रा को निजी रखा और केरल की पुलिस को सूचना नहीं दी, न ही हमेशा की तरह “वीआईपी ट्रीटमेंट” लेते हुए रास्ते और ट्रेफ़िक को रोका…। इस सादगी पर बलिहारी जाऊँ…), कुछ “टट्टू” किस्म के अखबारों ने राहुल और प्रियंका द्वारा मार्च 2010 में उनके निजी स्टाफ़ के एक सदस्य के. माधवन की बेटी की शादी में आने को भी “सादगी” मानकर बखान किया… लेकिन किसी भी अखबार या चैनल ने “राउल विंची” द्वारा हिन्दू श्रद्धालुओं के प्रति बरती गई इस क्रूर हरकत को “हाइलाईट” नहीं होने दिया… वरना “ऊपर” से आने वाला पैसा बन्द हो जाता और कई मीडियाकर्मी भूखों मर जाते…। जिन संगठनों को “आतंकवादी” साबित करने के लिये यह गिरा हुआ मीडिया और ये मासूम राहुल बाबा, जी-जान से जुटे हुए हैं, उन्हीं के साथी संगठनों के कार्यकर्ता, रात के अंधेरे में सबरीमाला की पहाड़ियों पर घायलों की मदद कर रहे थे।

जैसी संवेदनहीनता और लापरवाही मुम्बई हमले एवं सबरीमाला दुर्घटना के दौरान “राउल विंची” ने दिखाई है… क्या इसे मात्र उनका “बचपना”(?) या “लापरवाही” कहकर खारिज किया जा सकता है? गलती एक बार हो सकती है, दो-दो बार नहीं। आखिर इसके पीछे कौन सी “मानसिकता” है…
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चलते-चलते : अब कुछ तथ्यों पर नज़र डाल लीजिये…

1) केरल सरकार को प्रतिवर्ष सबरीमाला यात्रा से 3000 करोड़ रुपए की आय होती है।

2) ट्रावणकोर देवस्वम बोर्ड द्वारा राज्य के कुल 1208 मन्दिरों पर साल भर में खर्च किये जाते हैं 80 लाख रुपये। (जी हाँ, एक करोड़ से भी कम)

3) एक माह की सबरीमाला यात्रा के दौरान सिर्फ़ गरीब-मध्यम वर्ग के लोगों द्वारा दिये गये छोटे-छोटे चढ़ावे की दानपेटी रकम ही होती है 131 करोड़…

(लेकिन हिन्दू मन्दिरों के ट्रस्टों और समितियों तथा करोड़ों रुपये पर कब्जा जमाये बैठी “सेकुलर गैंग” सबरीमाला की पहाड़ियों पर श्रद्धालुओं के लिये मूलभूत सुविधाएं – पानी, चिकित्सा, छाँव, पहाड़ियों पर पक्का रास्ता, इत्यादि भी नहीं जुटाती…)

- अरे हाँ… एक बात और, केन्द्रीय सूचना आयुक्त ने RTI के एक जवाब में बताया है कि राहुल गाँधी की सुरक्षा, परिवहन, यात्रा एवं ठहरने-भोजन इत्यादि के खर्च का कोई हिसाब लोकसभा सचिवालय द्वारा नहीं रखा जाता है… इसलिये इस बारे में किसी को नहीं बताया जा सकता…

जय हो… जय हो…

28 comments:

honesty project democracy said...

इनसब भोंदुओं को अब सत्ता के शिखर पर नहीं बैठने देना है....भ्रष्टाचार और कुकर्म की दौलत से अब कोई भी IAS या IPS का पद खरीदकर इसदेश और समाज को नहीं लूट पायेगा ,भ्रष्ट मंत्री की अब जेल जाने के साथ अपने पद और संपत्ति से भी हाथ धोना होगा क्योकि भ्रष्टाचार के खिलाप जनयुद्ध का शंखनाद 30 जनवरी 2011 को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने जा रहा है इस देश की जनता के द्वारा,जनता के लिए ......आपसब भी इस जनयुद्ध को अपना अभियान समझिये और इसमें जरूर शामिल होइए.......

ज्यादा जानकर इस लिंक पर जाकर पढ़िए...http://gantantradusrupaiyaekdin.blogspot.com/2011/01/30-2011.html

दिवाकर मणि said...

सही है...बहुत बढ़िया है...अच्छा है...ऐसा ही होना भी चाहिए....बढ़िया है राउल बाबा....बहुत बढ़िया है..देश की मूर्ख जनता जिनके लिए सोनिया माई और राउल बाबा भगवान से कम नहीं है....

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

एक और जंग हमको फिर से लडनी होगी,
आजादी की उचित परिभाषा गढ़नी होगी!
तुम्हे मादरे हिंद पुकार रही है,उठो सपूतों,
तुम वतन के मसले पर, ढुलमुल कैसे हो !
बहुत लूट लिया देश को इन बत्ती वालों ने,
अब यह सोचो, इनकी बत्ती गुल कैसे हो!!

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

क्या करे, इस देश के लोगो की सोच ही इतनी छोटी है ! अभी चंद रोज पहले एक खबर थी कि लखनऊ में कानपुर की उस अभागन मासूम दिव्या की माँ गुहार लेकर इस भोंदुराम के पास पहुँची , जिसे , एक कानपुर के बाहुबली स्कूल मालिक और उसके बेटे ने बलात्कार कर मार डाला था ! अब उसे क्या मिला, उलटे युपी पोलिसे और माया की दुश्मनाई मोल ली ! बजाये गुहार लगाने के दो खींचकर मारती कि क्या यदि राज्यों की क़ानून ब्यवस्था खराब है तो केंद्र की कोई जिम्मेदारे नहीं बनती उसे सुधारने की ? उन्होंने क्या किया इसे सुधारने के लिए ? सिर्फ साझा सरकारों का रोना रोकर ये देश को कल किसी विदेशी ताकत के हाथ में बेच देंगे तो क्या यह स्वीकार कर लिया जाएगा ? कोलिशन गौवार्न्मेंट का मतलब यह तो नहीं कि तुम देश को बुरी तरह लूट लो ?

सुलभ § Sulabh said...

राजा के सौ गुनाह माफ़ होते हैं.

क्या अभ भी गणतंत्र दिवस मनाने को दिल करता है. वैसे कहने को तो हम स्वतंत्र देश के नागरिक हैं, फिर ये राजा कहाँ से ?

JANARDAN MISHRA said...

सुरेश जी इस निकम्मे छोरे के बारे में लिख कर आप अपना समय ना बिगड़े. हमे पता है आप के पास भारत माता के कई सपूतो के बारे में कई मजे दर लेख है. आप उशे लिखे. ये तो इटली का कुपूत है, इशे देवी दर्सन में मरने वालों से क्या मतलब हैं, किसी चर्च में हादसा होता तो ये जरुर जाता....

दीर्घतमा said...

सुरेश जी अप किसकी बात कर रहे है राहुल गाढ़ी तो स्याम ही अमेठी का बलात्कारी है उस परिवार का पता नहीं है ,मनमोहन सिंह जैसा गिरा प्रधानमंत्री आज तक भारत में कभी नहीं हुआ ,गलती प्रधान मंत्री की नहीं भारतीय जनता की है शबरी माल्या में तो हिन्दू लासे थी यदि वह मुसलमानों की लासे होती तो प्रधानमंत्री क्या वह तो उनकी मालकिन सोनिया भी गयी होता. गोदियाल जी से हम सहमत है एक नयी आज़ादी की लडाई लड़नी होगी.

ajit gupta said...

इन माँ-बेटों को कभी भी किसी भी देश की समस्‍या से जूझते देखा है क्‍या? ये तो भगवान सदृश्‍य हैं, जो हैं और सब कुछ देखते हैं। मुझे कोई इस राहुल की दिनचर्या बताए कि यह करता क्‍या है? मीडिया वाले दो-तीन महिने में एकबार इसे दिखा देते हैं कि देखो ये हैं, बस। पूरे एक महिने का हिसाब कोई दे सकता हैं क्‍या? लेकिन फिर भी देश की जनता बलि-बलिहारी है, सपने देख रही है कि ये गद्दी पर बैठेंगे? क्‍या करेंगे तब? तब तो रोज ही दिखना पड़ेगा। भगवान न कराए कि इस देश को वो दिन भी देखना पड़े।

Man said...

वन्दे मातरम सर ,
खोजपरक और "'' राउल द विन्ची कोड ""के अय्याशी और भोंदुपने को उजागर करता लेख |
ये नालायक भारत का पि.एम् .बनने लायक हे क्या ?इस "सत्भेली मिलावटी"' ओलाद का D.N.ए कोड इतना बिगड़ा हुआ हे की इसके I .Q के हिसाब से तो ये तो नगर पालिका का पार्षद बनने लायक भी नहीं हे |मीडिया कितना भी नंगा हो के नाच ले की राहुल बाबा राहुल बाबा ,लेकिन जनता सब समझ चुकी हे बिहार में इसके झक पेय्जामा का नाडा खेंच चुकी हे |जनता ने नितीश के सुशासन लिए दुशासन बन के सोनिया गाँधी का चीर हरण कर दिया जंहा कोई भी कान्हा बचाने नही आया |अब देश में सभी जगह इनके चीर हरण और नाडा खुलाई की रस्मे तेज होंगी और इटली भागने की तेयारी में होंगे ये लोग |तब शुद्र जाजम उठाव कांग्रेसी अनाथ महसूस करेंगे खुद को |

त्यागी said...

its just starting of journey of rahul baba, let us see what next !!!!
www.parshuram27.blogspot.com

nilesh mathur said...

बहुत दुखद है!

पंकज झा. said...

कितना चिल्लायेंगे चिपलूनकर जी? यहाँ आपकी हर आवाज़ नक्कारखाने मे तूती हो जानी है. शिकायत केवल जनता से है जो इतनी नपुंसक, निकम्मी या लाचार बनी हुई है कि अभी भी चुनाव हो तो शायद यह नालायक सरकार चुन कर तिबारा आ जाय...शायद बिहार जैसा परिणाम प्राप्त करने के लिए वैसा ही धैर्य रखना होगा और वैसी ही बर्बादी झेलनी होगी. खैर...सदा की तरह आपके स्तुत्य प्रयास के लिए सदा की तरह साधुवाद.
पंकज झा.

Alok Mohan said...

सहमत ,पर राहुल गाँधी महाराज जी जानते है की ये
सब मोह माया है ,जीवन के हर एक पल को एन्जॉय करो
ये सब चलता रहता है "आने वाले p .m . जो है "

राज भाटिय़ा said...

हमारे देश की उस जनता का दिमाग खरब हे जो इन्हे इतना सर पर बिठा कर रखा हे,पता नही क्यो, शायद इन के जीन मे गुलामो का ही खुन होगा, वर्ना यह मां बेटा इटली मे किसी होटल मे बरतन माजंते, इन्हे वेबकुफ़ ओर कहां मिलेगे, कर लो भाई ऎश..दलो हमारे दिल पर मुंग

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

आखिर सोच कैसे बदले जन सामान्य की.. इस पर विचार होना चाहिये तभी राजनीतिबाज जनता को मूर्ख बनाना बन्द कर सकेंगे.

views on news ......... let's change the world said...

http://www.facebook.com/photo.php?fbid=1389899021561&set=a.1317542132684.47740.1054653683

this is the link to Rahul's feat on 26/11

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Rahul's feat on 26/11...

nice work Sureshji...

प्रतुल वशिष्ठ said...

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इस तरह का बेख़ौफ़ बहाव कांग्रेस चाटुकारों के मंसूबों की चूलें हिला देगा.
आप इसी तरह वर्तमान और भावी (?) कर्णधारों के राज़ खोलते रहें
जैसे दीप से दीप जला करता है उसी तरह ऎसी सूचनाओं को
अपने साथियों और परिचितों तक पहुँचाना / फैलाना
हम पाठकों का काम रहा.
एक तरह से आपकी समस्त जानकारियों का मैं प्रचारक हूँ.

.

यशवंत said...

और तो और समाचारों मे मृतको से पहले वहाँ भगदड़ से कुछ ही देर पहले निकले विवेक ओबेरॉय के मुंबई निवास पर मिडियाई गिद्ध जमा हो गए उनकी कुशलक्षेम पूछने के लिए जीनामे नवभारत टाइम्स (पॉर्न समाचार) ने तो अपनी हेडलाइन मे यह लिख दिया कि विवेक ओबेरॉय ठीक है ! हा हा हा

कैसी विडम्बना है कि 100 मृतक ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है वो भांड ज्यादा महत्वपूर्ण है । और एक बात उस मंदिर मे जाने से से दो महीने पहले ब्रह्मचर्य का कठोर पालन करना पड़ता है और दो महीने नंगे पैर का व्रत ! लेकिन विवेक ओबेरॉय कि दो महीने पहले ही शादी हुई थी ! और नंगे पैर उनके रहते नहीं ! लोगो का मानना है वहाँ पर कि उसी हरामी भांड कि वजह से यह घटना हुई थी

यशवंत शहाने said...

सुरेश जी आपसे अपेक्षा है की आप उन भगवा धारी बाबा के ऊपर भी एक लेख लिखे जिनहोने हाल ही मे वंदे मातरम के विरोधी मंच पर एक आतंकवादी मदनी के साथ हाथ मिलाया और हाथ मिलकर हाथ उठाया ! और उनके followers जीनामे बीजेपी + आरएसएस के सपूत थे उनका सर शर्म से नीचा कर दिया ! वे बाबा रामदेव अब सत्ता के लोभ से नहीं बच पा रहे है या फिर ऐसा लगता है की यह सब उस अग्निवेश का किया कराया है यह ऐसा जासूस है वामपंथियो का जिसने बिदा उठाया है रामदेवजी के रथ को रोकने का ?

P K Surya said...

केन्द्रीय सूचना आयुक्त ने RTI के एक जवाब में बताया है कि राहुल गाँधी की सुरक्षा, परिवहन, यात्रा एवं ठहरने-भोजन इत्यादि के खर्च का कोई हिसाब लोकसभा सचिवालय द्वारा नहीं रखा जाता है… इसलिये इस बारे में किसी को नहीं बताया जा सकता…

जय हो… जय हो… Ye Bilkul Galat Bat He Kee Koi Rahul Gadhi ke Bare me jane ki wo kya karta he sara din Mahine ka jannne ka haq to hume he nahi Sala Raat ko Bike se Le Meridian, or Ashoka Hotel jata he kya karne Bholi Bhali janta ko to pata b nahi ki unke TAx ke paise se kya Haramkhori hoti he, Rahi bat Rashtriye Shok kee to Rahul Gadhi ya Soniya Gadhi to jarur jate yadii kisi Mahaqid ya Charch me 2 - 4 jane bhi jati par Bhai sahab ye Hinduon kee jane he Waise Bhi hum 85 Crore hindu mee 100 200 mar bhi jayen to.... hume to bus marne ka haq he, hum to bahusankhayat to lagta he jaise kagajo me he hen, Sale Congresiyon ko to matlab bus musalmano issaiyon se he, Sale Mantri bhi badalte he to Isai ko he Pad milta he Sarad pawar gaya to aya Isai, Desh ko lutne wale sabhi Haramkhoro kee Maut bahot buri hoti he en Kameeno ko pata he kee En Gandhion ke bure karme ka kya Harsh hua pata nahi phir bhi kitne Aandhe Beokuf he kee jante hen niche wale kuchh nahi karenge to upar baitha Ishwar to karega he karega. . . . . Jai Bharat

INDIAN said...

ये भोँदू बहुत चालाक है और देश की जनता को भोँदू बना रहा है

mahendra said...

Thanks Sir ,

Giving Valuble Information ,

Jay Shree Ram

Anonymous said...

बहुत ही उल-जुलूल लिखते हो भाया
यहाँ तो ये हाल है कि कुछ भी घटिया सा विचार परोस दो बीस-पच्चीस आलतू-फालतू लोग जयकारा लगाने जरूर उपस्थित हो जायेंगे. तुम्हारे कई लेख पढ़े तो यही लगा कि तुम पूर्वाग्रह के मारे इंसान हो, जहनी तौर पर ऐसे लोग बीमार होते हैं. तुम अपनी हर बात में सोनिया गांधी, राहुल और मनमोहन सिंह को जबरदस्ती ले आते हो. तुमको लगता है एक तुम ही होशियार हो बाकी जनता बेवकूफ है. तुमको दुसरे पक्ष की कमियां कभी दिखती ही नहीं या आँखें बंद कर लेते हो कबूतर की तरह ? अजीब जाहिलाना सोच है

रंजना said...

रोज तो कहीं न कहीं कोई न कोई मरता ही रहता है,अब बेचारा एक राजकुमार कहाँ कहाँ जाए...इत्ती भी अपेक्षाएं नहीं रखनी चाहिए.. गलत बात है...

अब देखिये, आपके कहने se क्या होता है, दशकों se इनकी भक्त ये मरती हुई कौम जब इनसे ये सब अपेक्षाएं नहीं रखती तो आप क्यों रखते हैं...

anitakumar said...

गलती तो इस देश की जनता की है, जिसे गोरी चमड़ी की पूजा करने की आदत पड़ गयी है।

sudesharma said...

aise chhote -motte hadso se inki sehat par koi khas fark nahi padta, kyoki abhi chunav door hai.

suresh ji RAJIV DIXIT aur SVADESHI par aapki post ka intjar h

Basant said...

Ais Swarthi Adami Prime Minister baane ka Koi Adhikar nahi hai jo desh ki Bhavnao ko Bhi nahi Samje