Tuesday, January 25, 2011

लेकिन फ़िर भी लाल चौक पर तिरंगा नहीं फ़हराया जा सकता…… Lal Chowk Srinagar, Tricolour Hoisting, Secularism and Separatists

श्रीनगर के लाल चौक में तिरंगा न फ़हराने देने के लिये मनमोहन सिंह, चिदम्बरम और उमर अब्दुल्ला एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, भाजपा नेताओं को असंवैधानिक रुप से जबरन रोके रखा गया, कर्नाटक से भाजपा कार्यकर्ताओं को लेकर आने वाली ट्रेन को ममता बैनर्जी ने अपहरण करवाकर वापस भिजवा दिया (यहाँ देखें…) (इस ट्रेन को भाजपा ने 57 लाख रुपये देकर बुक करवाया था), “पाकिस्तान के पक्के मित्र” दिग्विजय सिंह भाजपा को घुड़कियाँ दे रहे हैं, लालूप्रसाद लाल-पीले हो रहे हैं (क्योंकि खुद भी राष्ट्रगान के वक्त बैठे रहते हैं - यहाँ देखें), मनमोहन सिंह “हमेशा की तरह” गिड़गिड़ा रहे हैं, कि कैसे भी हो, चाहे जो भी हो… कश्मीर में लाल चौक पर तिरंगा मत फ़हराओ, क्योंकि -

1) इससे राज्य में “कानून-व्यवस्था”(?) की स्थिति खराब होगी… (मानो पिछले 60 साल से वहाँ रामराज्य ही हो)

2) लोगों की भावनाएं(?) आहत होंगी… (लोगों की, यानी गिलानी-मलिक और अरूंधती जैसे “भाड़े के टट्टुओं” की)

3) तिरंगे का राजनैतिक फ़ायदा न उठाएं… (क्योंकि तिरंगे का राजनैतिक फ़ायदा लेने का कॉपीराइट सिर्फ़ कांग्रेस ने ले रखा है)

यदि भाजपा की इस पहल को “खान-ग्रेस” (Congress) पार्टी “राजनैतिक” मानती है, तो मनमोहन, सोनिया, चिदम्बरम, और उमर अब्दुल्ला एक साथ, एक मंच पर खड़े होकर लाल चौक पर तिरंगा क्यों नहीं फ़हराते? जब दो कौड़ी के कश्मीरी नेता दिल्ली में ऐन सरकार की नाक के नीचे भारत को “भूखों-नंगों का देश” कहते हैं, कश्मीर को अलग करने की माँग कर डालते हैं…तब सभी मिमियाते रह जाते हैं, लेकिन भाजपा लाल चौक में तिरंगा नहीं फ़हरा सकती? अलबत्ता “कांग्रेस के दामाद लोग” पाकिस्तान का झण्डा अवश्य फ़हरा सकते हैं… (देखें लाल चौक का एक चित्र)।


कहने का तात्पर्य यह है कि –

1) कश्मीर में गरीबी की दर है सिर्फ़ 3.4 प्रतिशत है जबकि भारत की गरीबी दर है अधिकतम 26 प्रतिशत (बिहार और उड़ीसा जैसे राज्यों में)


– फ़िर भी बिहार, उड़ीसा में तिरंगा फ़हराया जा सकता है, लाल चौक पर नहीं…

2) 1991 में कश्मीर को 1,244 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया जो कि सन् 2002 तक आते-आते बढ़कर 4,578 करोड़ रुपये हो गया था (सन्दर्भ-इंडिया टुडे 14 अक्टूबर 2002)।

- फ़िर भी हम लाल चौक में तिरंगा नहीं फ़हराएंगे…

3) 1991 से 2002 के बीच केन्द्र सरकार द्वारा कश्मीर को दी गई मदद कुल जीडीपी का 5 प्रतिशत से भी अधिक बैठता है। इसका मतलब है कि कश्मीर को देश के बाकी राज्यों के मुकाबले ज्यादा हिस्सा दिया जाता है, किसी भी अनुपात से ज्यादा। यह कुछ ऐसा ही है जैसे किसी परिवार के “सबसे निकम्मे और उद्दण्ड लड़के” को पिता का सबसे अधिक पैसा मिले “मदद(?) के नाम पर”

– फ़िर भी हम अपना अलग संविधान, अलग झण्डा रखेंगे…

4) “वे” लोग हमारे पैसों पर पाले जा रहे हैं, और वे इसे कभी अपना “हक”(?) बताकर, कभी असंतोष बताकर, कभी “गुमराह युवकों”(?) के नाम पर… और-और-और ज्यादा हासिल करने की कोशिश में लगे रहते हैं। भारत के ईमानदार करदाताओं का पैसा इस तरह से नाली में बहाया जा रहा है…


– फ़िर भी बहादुर सिख कौम के प्रधानमंत्री कहते हैं, लाल चौक पर तिरंगा नहीं फ़हराना चाहिये…

5) जब नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि “गुजरात से कोई टैक्स न लो और न ही केन्द्र कोई मदद गुजरात को दे” तो कांग्रेस इसे तत्काल देशद्रोही बयान बताती है। अर्थात यदि देश का कोई पहला राज्य, जो हिम्मत करके कहता है कि “मैं अपने पैरों पर खड़ा हूँ…” तो उसे तारीफ़ की बजाय उलाहने और आलोचना दी जाती है, जबकि गत बीस वर्षों से भी अधिक समय से “जोंक” की तरह देश का खून चूसने वाला कश्मीर, “बेचारा है” और “धर्मनिरपेक्ष भी है”?


– फ़िर भी गाँधीनगर में तिरंगा फ़हरा सकते हैं, श्रीनगर में नहीं…

6) कश्मीर के प्रत्येक व्यक्ति पर केन्द्र सरकार 10,000 रुपये की सबसिडी देती है, जो कि अन्य राज्यों के मुकाबले लगभग 40% ज्यादा है (कोई भी सामान्य व्यक्ति आसानी से गणित लगा सकता है कि कश्मीरी नेताओं, हुर्रियत अल्गाववादियों, आतंकवादियों और अफ़सरों की जेब में कितना मोटा हिस्सा आता होगा, “ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल” की ताजा रिपोर्ट में कश्मीर को सबसे भ्रष्ट राज्य का दर्जा इसीलिये मिला हुआ है)

– फ़िर भी हम लाल चौक में तिरंगा नहीं फ़हरा सकते…

7) इसके अलावा रेल्वे की जम्मू-उधमपुर योजना 600 करोड़, उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला योजना 5000 करोड़, विभिन्न पहाड़ी सड़कों पर 2000 करोड़, सलाई पावर प्रोजेक्ट 900 करोड़, दुलहस्ती हाइड्रो प्रोजेक्ट 6000 करोड़, डल झील सफ़ाई योजना 150 करोड़ आदि-आदि-आदि

– फ़िर भी लाल चौक पर तिरंगा फ़हराना “राजनीति” है…
(समस्त आँकड़े CAGR की रिपोर्ट के अनुसार)

8) कश्मीर घाटी से गैर-मुस्लिमों का पूरी तरह से सफ़ाया कर दिया गया है,
कश्मीरी सारे भारत में कहीं भी रह सकते हैं, कहीं भी जमीने खरीद सकते हैं, लेकिन कश्मीर में वे किसी को बर्दाश्त नहीं करते, अमरनाथ यात्रियों के लिये एक टेम्परेरी ज़मीन का टुकड़ा भी नहीं दे सकते…

- फ़िर भी भाजपा ही “शांति भंग”(?) करना चाहती है…

जम्मू में तिरंगा फ़हरा सकते हैं, लेह में फ़हरा सकते हैं, लद्दाख में शान से लहरा सकते हैं, द्रास-कारगिल में बर्फ़ की चोटियों पर गर्व से अड़ा सकते हैं… सिर्फ़ एक छोटे से टुकड़े कश्मीर” के लाल चौक में नहीं फ़हरा सकते… क्यों? इस क्यों का जवाब “कांग्रेस(I) – अर्थात कांग्रेस (Italy)” ही दे सकती है… लेकिन देगी नहीं, क्योंकि राष्ट्रीय स्वाभिमान, तिरंगे की आन-बान-शान, एकता-अखण्डता इत्यादि शब्द उसके लिये चिड़ियाघर में रखे ओरांग-उटांग की तरह हैं…

यदि कल को पश्चिम बंगाल के 16 जिलों में, अथवा असम के 5 जिलों में, या उत्तरी केरल के 3 जिलों में भी तिरंगा फ़हराने पर “किसी” की भावनाएं आहत होने लग जायें तो आश्चर्य न कीजियेगा… “सत्य-अहिंसा के पुजारियो” ने जो विरासत हमें सौंपी है, उसमें ऐसा बिलकुल हो सकता है…।

वाकई दुर्भाग्य है कि, “मैकाले की शिक्षा पद्धति” ने, खामख्वाह में “बच्चों के चाचा” बन बैठे एक व्यक्ति ने, और अलगाववादियों के सामने “सतत रेंगते रहने वाले” वाले गाँधी परिवार, नरसिंहराव, वीपी सिंह, अटलबिहारी वाजपेयी सभी ने मिलकर… देश को एक सड़े हुए टमाटर की तरह पिलपिला बनाकर रख दिया है…

49 comments:

Azad said...

Bohat hi badhiya lekh likha hai aapne. Is kyun ka jawaab Congress bhi nahin de sakti. kya kahegi? Ye ki wo sirf gaddi chahte hain? Ye kise nahin pata hai sahab!!
Phir bhi humaare desh k "intellectuals' unko vote dete hain...

Surendra Mohan said...

"तिरंगा फहराने से क़ानून व्यवस्था ख़राब होती है", काश कांग्रेस आजादी से पहले ही यह बात समझ लेती. जो लोग गुलामी के जमाने में तिरंगा फहराते मारे गए, वो तो न मारे जाते.....

Deepesh said...

केवल शुरुवात है, अभी तो अल्पसंख्यक(?) आरक्षण, हिन्दु टैक्स कोड़ (जजिया) आदि आना बाकी है।

honesty project democracy said...

जो इस देश को खा-खा कर मोटे होते जा रहें हैं वही तिरंगा,इस देश के कानून तथा इस देश के नागरिकों का अपमान करते हैं......जो ईमानदारी से इस देश की सेवा कर रहें हैं उनके दिल में इस देश के कण-कण के प्रति सम्मान है तथा वे लोग चाहते हैं की इस देश की असल सूरत बदले............तिरंगा तो एक बहाना है जो लोग इंसान को बर्बाद करने पे तुले हैं वो तिरंगा का सम्मान क्या कर सकते हैं.......

अन्तर सोहिल said...

यदि कल को पश्चिम बंगाल के 16 जिलों में, अथवा असम के 5 जिलों में, या उत्तरी केरल के 3 जिलों में भी तिरंगा फ़हराने पर “किसी” की भावनाएं आहत होने लग जायें तो आश्चर्य न कीजियेगा…

ऐसी सरकार और ऐसा ही चलता रहा तो ये दिन भी दूर नहीं।

प्रणाम स्वीकार करें

Rahul said...

भाई साब हम "आजाद हिन्दुस्तानी के गुलाम हिन्दू" है यह कोइ पहली बार नही हो रहा है हर बार यही होता है हर बार हमारी भावनाओं को आहत किया जाता रहा है हम ना तो आजादी से बोल सकते है ना ही लिख सकते है हम हमारे देश मे हि गुलामो कि तरह जीवन यापन कर रहे है आप कही से भी देख लो ,,,,,
कश्मीरी पण्डितो से ही सीख लो कितने सालो से सडको पर जी रहे है
मै जब स्कुल मै पढता था तो प्राथना के समय वो,, विशेष दर्जे के लडके राष्ट गीत नही बोलते थे तब से मैने समझ लिया

mahendra said...

Jay Shree Ram

Un logo ki Halat " vinash kale Viprit Buddhi Jaise Hai "

कृष्ण की पुकार है ये भागवत का सार है
की युद्घ ही तो वीर को प्रमाण है

Jay Shree Ram.

avenesh said...

कांग्रेस और एन सी पी की बात से सहमत हू मैं...
तो देश की बाकी जगह भी तिरंगा फह्राने का विरोध करता हू ताकि देश के मुसलमानो को बुरा ना लगे, या आप कहे तो पाकिस्तान का झंडा फहरा देते है,

Anonymous said...

भाई साहब ये इनका दोष नही है |
इनकी कौम कि ऐसी है|
जब ये लोग अपनी माँ बहनों का सम्मान नही कर सकते है तो इनसे राष्ट्र के सम्मान की बात सोचना ही बेवकूफी है|
भारत में ये कहीं भी रहे हमेशा उस हरामी ,नाजायज देश के वफादार रहते है और अपने देश का बुरा ही चाहते है|
जब तक खान ग्रेस का पूर्ण विनाश नही होगा देश ऐसे ही परेशान रहेगा|
इस देश को खान ग्रेस,लालू,मुलायम,मुल्लाओ और वामपंथियों से मुक्त किये बिना शांति स्थापित होना मुश्किल है|
वंदेमातरम

गौतम राजरिशी said...

पोस्ट हमेशा की जबरदस्त है। विगत दो सालों से आपको लगातार पढ़ता आ रहा हूँ और कुछ छिट-पुट पोस्टॊं पर टिप्पणियाँ भी करता रहा हूँ, शायद ये पहली पोस्ट है जिसमें मैं आपसे सहमत नहीं। भाजपा का मैं एक बचपन से प्रशंसक रहा हूँ...लेकिन आप की ये पोस्ट और इससे जुड़ी ऐसी हे तमाम बातें जो सामने आ रही हैं, वो व्यर्थ का तूल देना है। लाल चौक मानो लाल चौक न हुआ कोई किला हो गया फ़तेह करने का। लाल चौक श्रीनगर बाजार का एक मुख्य हिस्सा भर है, उसे बेवजह का तिरंगा फराने के नाम से उछाला जा रहा है। कल गणतंत्र दिवस के अवसर पर यहाँ हर जगह पर समारोह हो रहे हैं। मुख्य समारोह के लिये दिल्ली के लाल किले की तरह यहाँ श्रीनगर का बख्शी स्टेडियम है...फिर ये लाल चौक के ऊपर इतनी हाय-तौबा क्यों? उन्हें आह्वान करना था तो करते कि चलो कश्मीर में तिरंगा फराये, लेकिन ये जबरदस्ती का लाल चौक का नाम जोड़ना पूरे वाकिये को महज एक उन्माद का रूप देना है...

Suresh Chiplunkar said...

गौतम जी आपकी असहमति सिर-माथे…
आप अधिक जानकार हैं, क्योंकि आप वहाँ ज़मीनी स्तर पर महान कार्य कर रहे हैं (कर चुके हैं)… मैंने सिर्फ़ इस बात पर तथ्य रखने की कोशिश की है कि कैसे भारत द्वारा किये गये काम, दिये गये पैसे इत्यादि का न सिर्फ़ दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि इतना सब करने के बावजूद भारत को सिर्फ़ बदनामी ही मिल रही है…

इतना हंगामा होता ही नहीं, यदि उमर अब्दुल्ला कहते कि भाजपा का स्वागत है और मनमोहन सिंह एवं चिदम्बरम के साथ सुषमा स्वराज वगैरा सब मिलकर एक साथ लाल चौक पर झण्डा फ़हराएंगे…। यदि ऐसा होता तो… सोचिये क्या तगड़ा मैसेज जाता…

Anonymous said...

भारतीय जनता पार्टी का एक सूत्री कार्यक्रम होता है कि देश में कैसे भी सनसनी फैलाई जाए. रात-दिन सिर्फ सिर्फ इसी सोच में रहते हैं कि किसी भी तरह उन्माद का वातावरण फैलाया जाए.
फलस्वरूप आप जैसे ठलुए आ जाते हैं उनके बहकावे में. अटल बिहारी प्रधानमन्त्री थे तब क्यूँ नहीं फहराया था झंडा वहां ? दरअसल भाजपाई एक नंबर की दोगली पार्टी है. उनका अपना कोई एजेंडा नहीं है. इनका एजेंडा एक ही है स्थापित सरकार के किस तरह ऊँगली की जाए .. अस्थिरता पैदा की जाए. येन केन प्रकारेण सत्ता तक पहुँचने का सपना देखते रहते हैं

Suresh Chiplunkar said...

मेरे प्यारे बेनामी भाई,
1) वाजपेयी जी को तो मैंने भी आज तक माफ़ नहीं किया कंधार प्रकरण के लिये…

2) वोटिंग मशीनों के फ़र्जीवाड़े द्वारा "स्थापित सरकार" में अस्थिरता पैदा करना तो विपक्ष का कर्तव्य ही है…।
जब भारद्वाज जैसे दलालों के जरिये कर्नाटक में अस्थिरता फ़ैलाने का काम किया जा सकता है, तो तिरंगा के जरिये क्यों नहीं? :) :) क्योंकि भारत की जनता के मानस में महंगाई, आतंकवाद और भ्रष्टाचार जैसे महा-मुद्दों पर तो कोई उबाल नहीं आ रहा… शायद (शायद, शायद) तिरंगा के नाम पर ही आ जाये… :) :)

और भाई हम तो हैं ही "ठलुए" एकदम पक्के वाले…। भाजपा के बहकावे में आना ज्यादा बेहतर समझते हैं, बजाय दिग्गी राजा की तरह पाकिस्तान के बहकावे में आने से… :) :)

वीरु said...

बेनामी शायद तुझे इतिहास पता नही है इससे पहले भी बीजेपी तिरंगा यात्रा करके लाल चौक पर तिरंगा फहरा चुकी है तब मुरली मनोहर जोशी ने फहराया था .तब भी अलगाववादियो ने लाल चौक पर तिरंगा फहराने की चुनौती दी थी और इस बार भी चुनौती दी है. इसलिये बीजेपी तिरंगा फहराने लाल चौक जा रही हैँ.

बीजेपी के शाशन काल मे इन अलगाववादियो ने तिरँगा फहराने की चुनौती देने की हिम्मत नही की थी .तब ये अपने बिल मे छुपे थे. जैसे ही इनके माई बाप कांग्रेस की सरकार आयी .ये फिर अपने बिल से निकल आये और गीदड़ भभकी देने लगे कि तिरंगा फहरा के दिखाओ.
इसलिये बीजेपी इन गीदड़ो की औकात दिखाने के लिये लाल चौक पर तिरंगा फहराने जा रही है. ये ठी क वैसे ही है जैसे कि मेरे घर के सामने सड़क पर ( जहाँ कभी तिरंगा नही फहराया जाता ) .- अगर उस सड़क पर जा के कोई कमीना ये चुनौती दे कि यहाँ तिरंगा फहरा के दिखाओ और यही नही वो वहाँ पाकिस्तानी झंडा फहराने की कोशिश करे तो मै क्या करुंगा? मै वहाँ जाऊंगा.पहले उस कमीने को वहाँ दस लात मारुंगा और फिर वहाँ तिरंगा फहराऊंगा और जोर जोर से चिल्लाऊंगा . जय हिँद . ठीक वही काम बीजेपी कर रही है और चुनौती देने वाला कमीना है यासीन मलिक.
समझे मेरे इस्लामिक बेनामी. अब दुबारा ये घिसा पिटा सवाल मत पूछना जो तेरे कांग्रेसी बाप सुबह से पूछ रहे है हाँ
तुझे और खुजली हो रही हो तो बता तेरी सारी खुजली शांत कर दूंगा.
और वैसे ये सब भारत मे ही हो सकता है . जब वहाँ पर पाकिस्तानी झंडा लगा दिया गया तब इस अब्दुल्ला ने सुरक्षा नही लगायी उसको रोकने के लिये और अब तिरंगा लगाने को रोकने के लिये ऐसी सुरक्षा लगा रहा है जैसे ये हिँदुस्तान नही पाकिस्तान हो . कारण साफ है इसकी रगो मे जिस कौम का खून बह रहा है उस कौम का हमेशा गद्धारी का रिकार्ड रहा है.
लेकिन देखते है इनकी अम्मा कब तक खैर मनायेगी .

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

शहीद अपनी छाती कूट रहे होंगे.. बात जमीन के एक टुकड़े की नहीं, बात सोच की है.. एक छोटा टुकड़ा ही कल बढ़कर पूरे देश का रूप ले सकता है..

दीपक बाबा said...

विस्फोटक स्तिति पर विस्फोटक लेख..........

साधुवाद.

राहुल पंडित said...

श्रीमान तिरंगा कल ऐतिहासिक लाल चौक पर फहरेगा..इसके लिए चाहे उमर अब्दुल्ला की ....ऊपर से जाना पड़े.

JANARDAN MISHRA said...

लगता है अब समय आ रहा है हम लोग लेपटोप लेकर लिखते रहेंगे,और सोनिया माइनो अपने पालतू कुत्तों (दिग्विजय,प्रणव,मनमोहन,गुलाम,अम्बिका) और कई,,, के साथ मिलकर लालकिले पर भी इटली का झंडा लहराएँगे और हम देखते रह जायेंगे...........!!!!!!!!!!!!!!

उमेश प्रताप वत्स said...

लाल चौंक पर तिरंगा फहरे यह भारतीय जनता चाहती है। तिरंगा न फहरे यह केन्द्रीय सरकार चाहती है। अब देश की जनता निर्णय करे कि क्या करना है?

Vivek Rastogi said...

दिग्विजय सिंह तो केवल बोलने के लिये ही हैं, असल में उससे बड़ा कोई देशद्रोही मिल ही नहीं सकता, राष्ट्रगान का सम्मान पता नहीं हमारे कितने राजनेता करते हैं, केवल बैठने से क्या होता है, इनका बस चले तो तिरंगे को बेचकर खा जायें।

नाम बिल्कुल सही लिया है खान-ग्रेस, पाकिस्तान में जा मिले तो वही इन्हें काफ़िर कहकर पिछाड़े पर लात मारेंगे, और एक हम भारत वाले इनको स्पेशल मानते हैं।

मेरी जाँ तिरंगा है, मेरा मान तिरंगा है...

nayana.kanitkar said...

सुरेशजी क्या स्रिर्फ़ तिरंगा फहराने से देशभक्ति साबित होगी आप्के बिन्दु सटीक हे लेकिन उस विस्फोटक स्थिति का क्या?

nitin tyagi said...

जिस दिन इस देश में तिरंगा फराने पर विरोध करने वालों को गोली मारी जाएगी, उस दिन भारत विकसित हो जायेगा |

Anonymous said...

BHAISAB,AAP SACH HI KAHTE HO "तालाब के किनारे बैठकर सिर्फ़ यह सोचने से कि "तालाब गन्दा है…" काम नहीं बनेगा… उसमें विचारों, लेखों के पत्थर फ़ेंको, धीरे-धीरे एक लहर बनेगी, जो अन्ततः गंदगी को बहा ले जायेगी…" OR ANT ME AAPKE BLOGGER KO JANMADIVAS KI HARDI SHUBKAMANA AAJ 26-JAN-2011 KO AAPKA BLOGGER 4 SAL KA HO GAYA HE

saurabh rai said...

Sir, Aap bahut achha likhte hain. Padhne se utsaah badhta hai. Likhte rahiye.

Arvind Mishra said...

एक तथ्य पूर्ण विवेचन और मेजर राजरिशी का असली चेहरा :)
लोगों इन चेहरों को देख लो ताकि सनद रहे !

क्रिएटिव मंच-Creative Manch said...

गौतम राजरिशी जी की प्रतिक्रिया अत्यंत निराशाजनक है और आपत्तिजनक भी !

हम भारतीय जनता पार्टी का समर्थक कभी नहीं रहे किन्तु यह मामला पार्टी का नहीं है, यह मामला हमारी अस्मिता का, हमारे गौरव का है ! भारत के किसी भी भू-भाग पर तिरंगा फहराने के लिए किसी के रहमोकरम पर रहना होगा ? लाल चौक हो या पीला चौक क्या फर्क पड़ता है ?

अगर ऐसा ही रहा तो अलगाववादियों की नाराजगी का डर भविष्य में देश के भीतर न जाने कितने लाल चौक बनवा देगा ! यहाँ सवाल मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज का नहीं है ! वहां कोई भी जाकर तिरंगा फहराए ... बस फहराना हमारा तिरंगा चाहिए !

डूब मरने वाली बात है कि राष्ट्र ध्वज के नाम पर भी घटिया राजनीति की जा रही है ! कागजों पर हमें महाशक्ति के रूप में आँका जाता है लेकिन वास्तविकता में बंगलादेश से भी गए बीते हैं ! यह समय है एकजुट होने का ... एक स्वर का .........
जय हिंद
जय हिंद
जय हिंद

गौतम राजरिशी said...

सुरेश जी को नमन और गणतंत्र दिवस की समस्त शुभकामनायें! आपके सारे तथ्य और आंकड़े एकदम वाजिब हैं...लेकिन इन सबसे लाल चौक का क्या सरोकार है? तीन दशक हो गये हैं सर, लाल चौक अब जाकर एक शांत सहज मार्केट प्लेस हुआ है। उसे महज एक शापिंग एरिया ही रहने दिया जाये न कि राजनीति का बवंडर। मैं बस ये चाहता हूँ। कई करीबी दोस्तों को खोया है यहां विगत दस-बारह सालों में...

आपकी विनम्रता का कायल हूँ सर। वर्ना तो यहां लोग, अपने विचार रखने पर आक्रोश जाहिर करने लगे हैं। बगैर जाने कि आक्रोश हर किसी को आता है और उसे जाहिर करना भी...किंतु वो खुद की कमजोरी का द्योतक है।

झंडा फराने के नाम पर लाल चौक को जोड़ने का कोई औचित्य नहीं बनता। किसी को नहीं पता कि कलकत्ता में कहां झंडा फराने का अह्वान किया गया था, लेकिन पूरे मुल्क को पता है कि कश्मीर में लाल चौक है। क्यों? क्या इसी से ये साबित नहीं होता कि तिरंगा को फहराने से ज्यादा उसका मुद्दा बनाना उद्देश्य था। मेरा विरोध बस इस बात से है।

Satish Chandra Satyarthi said...

अरविन्द मिश्रा जी की इसी विषय की पोस्ट पर जो टिप्पणी दी है वही यहाँ भी दूंगा...
लल्लो-चप्पो नहीं बोलूंगा मैं... लाल चौक हो या हरा चौक या पीला चौक देशं की मिट्टी के किसी भी टुकड़े पर तिरंगा फहराने का हक हर भारतीय का है चाहे वो भाजपा का सदस्य हो या किसी और दल का... इस बात से मैं भी सहमत हूँ कि इसके पीछे भाजपा का अपना राजनीतिक स्वार्थ है पर राजनीतिक स्वार्थ किस पार्टी का नहीं होता.. हर पार्टी अपनी विचारधारा को कई तरीकों से जनता तक पहुंचाना चाहती है... फिर भाजपा अगर अपनी कट्टर राष्ट्रवादी छवि को डंके की चोट पर दिखाना चाह रही है तो इसपर तिलमिलाहट क्यों... रही बात कि 'लाल चौक ही क्यों?' की तो मैं कहूँगा कि लाल चौक क्यों नहीं? वो किसी की बपौती है क्या?
एक कुतर्क दे रहे हैं लोग कि इससे वहाँ अशांति फ़ैल सकती है, तनाव बढ़ सकता है... राजधानी दिल्ली में आकार कोइ आपकी संप्रभुता को ठेंगा दिखाकर कश्मीर को भारत से अलग बताकर चला जाता है... उससे सरकार को तनाव बढ़ने का डर नहीं लगता... कई राज्यों में अनपढ़ गरीबों-आदिवासियों को बहला-फुसला कर बन्दूक बांटे जा रहे हैं... दिल्ली के प्रमुख विश्वविद्यालय में भारत के खिलाफ सशत्र लड़ाई लड़ने के खुलेआम भाषण दिए जा रहे हैं.. इनसे तनाव भडकने का डर नहीं लगता सरकार को.. तिरंगा फहराने से तनाव फ़ैल जाएगा... तनाव तो वहाँ सेना के रहने से भी फ़ैल रहा है तो उसे भी हटा लिया जाए वहाँ से... हद है नपुंसकता की....

Suresh Chiplunkar said...

मुझे अरविन्द मिश्रा जी की टिप्पणी पर सख्त ऐतराज़ है…

मिश्रा जी, जबकि आप मेजर गौतम को जानते हैं, वे कश्मीर में पदस्थ रह चुके हैं… यह उनके विचार हैं इसमें आपको ऐसी टिप्पणी नहीं करना चाहिये थी… अन्य तरीके से विरोध किया जा सकता था… क्योंकि आप तो प्रोफ़ेसर हैं, शब्दों से खेलना जानते हैं।

Suresh Chiplunkar said...

@ नयना कानिटकर जी - माना कि सिर्फ़ तिरंगा फ़हराने से देशभक्ति साबित नहीं होती, लेकिन भाजपा का यह कार्यक्रम सिर्फ़ "सिम्बालिक" और राजनैतिक ही था…।

अब यात्रा रोक ली गई, किसी को लाल चौक नहीं जाने दिया गया, सबको गिरफ़्तार कर लिया… इस पूरी नौटंकी से किसका फ़ायदा हुआ? क्या उमर अब्दुल्ला के इस कदम से, गिलानी-मलिक-अरुंधती जैसों का हौसला बुलन्द नहीं होगा? चैनलों-अखबारों के जरिये भले ही कांग्रेस, अपनी प्रतिद्वंद्वी भाजपा को "बदनाम"(?) करने में सफ़ल हो जाये परन्तु इस कवायद से कश्मीर के अलगाववादियों को यही संदेश गया कि "भारत सरकार" पिलपिली है…

दूसरी स्थिति (अब काल्पनिक) यह थी कि उमर अब्दुल्ला स्वयं आगे आकर भाजपा की यात्रा का स्वागत करते, साथ में जाते और तिरंगा फ़हराते, चिदम्बरम को भी साथ लेते… तब क्या मैसेज जाता… खुद ही सोचिये…। और यदि ऐसा कदम उठाया जाता तो भाजपा द्वारा राजनैतिक पाइंट स्कोर करने की कोशिश भी फ़ुस्स हो जाती…

Anupam Singh said...

Prat dar parat Bharat ki kendra sarkaar Kashmir ko algaowaadiyon ke haatho mein saupti jaa rahi hai.
Badhiya lekh!

Anonymous said...

अपने स्वाभिमान अपनी अस्मिता को खोकर पायी शान्ति लेकर हम क्या करेंगे ! ऐसी शान्ति गयी तेल लेने ! गौतम राजरिशी जी ने अपने कई दोस्तों की शहादत देखी है तो यह भी देखा होगा कि लाखों नौजवान शहादत को तैयार बैठे हैं !

veeru said...

गौतम राजर्षि जी
आपने पूछा कि आखिर लालचौक ही क्यो ?
तो इसका उत्तर ये है क्यो कि अलगाववादियो ने इसी लालचौक पर पाकिस्तानी झंडा फहराया है.
दूसरा कारण अलगाववादि यासीन मलिक ने इसी लालचौक पर तिरंगा फहरा के दिखाने की चुनौती दी.
इस लिये बीजेपी लाल चौक पर ही तिरंगा फहराने की बात कर रही है .

संजय बेंगाणी said...

भाई भाजपा का यह कार्यक्रम दो कौडी का था, बेमतलब का था. पता नहीं फिर क्यों लोग उसे फालतू का काम साबित करने पर तूल गए?

भाजपा भी देखो कहती है लाल चौक. अरे लालचौक ही क्यों? हम कहते है कमरे में ही क्यों? बरामदे में क्यों नहीं. बरामदे में है तो गलियारे में क्यों नहीं, रसोई में क्यों नहीं, पाखाने में क्यों नहीं? बोलो.... मगर नहीं कहते है लालचौक जहाँ फहराने से देशद्रोहियों को तकलिफ होती है बस वहीं....


राजनीति करती है... करना है तो फिक्सिंग करे...लोबिंग करे.... धर्मांतरण करवाये.... मगर झंडा फहराने कि राजनीति करती है.... धिक्कार है.

झंडा फहराना कोई देशभक्ति नहीं, पता नहीं आज लालकिले पर क्यों फहराया गया है....

संजय बेंगाणी said...

सच कहता हूँ, मुझे गंगा-जमना संस्कृति से बहुत प्रेम है, मरा जा रहा हूँ इसके लिए. इसलिए अपने भाईयों को बूरा न लगे इसलिए आज तिरंगा नहीं फहराया. वे कहेंगे तो पाकिस्तानी झंडा भी फहरा दुंगा. क्या फरक पड़ता है आखिर अंहिसा शांति और भाई चारे से बड़ा तिरंगा और देश तो नहीं...

VEERU said...

कुछ लोग कहते है कि वहाँ तिरंगा फहराने से तनाव फैलेगा
अगर वहाँ तिरंगा फहराने से तनाव फैलता है तो सर माथे पर ऐसा तनाव. ऐसा तनाव नकली शांति की अपेक्षा ज्यादा अच्छा है
ऐसी तनाव तब तक फैलता रहना चाहिये जब तक वहाँ असली शांति न हो.
ऐसी नकली शांति का क्या फायदा जो तिरंगा फहराने से भंग होती हैँ.
क्या भारत की जनता के टैक्स का सबसे ज्यादा भाग कशमीर पर इसी" नकली शांति" के लिये खर्च किया जा रहा है ? क्या इस नकली शांति का हम अचार डालेंगेँ.
क्या हमने वहाँ रह रहे पाकिस्तानी विचारो वाले लोगो (जिनको तिरंगा से नफरत है) को पालने का ठेका लिया हुआ है.

सुलभ § Sulabh said...

इस देश में अक्सर ऐसा होता है हमारे अंदरूनी कमजोरियों का फायदा उठा विदेशी ताकतों ने चालाकी से अपना उल्लू सीधा किया है.
राजनीति तो अपने जगह पर है ये क्रिया प्रतिक्रिया का दौर चलता रहेगा. बस चिंता की बात यही है - जहाँ हर साल एक देश सफल और मजबूत गणतंत्र राष्ट्र बनने की दिशा में "गणतंत्र दिवस" का
आयोजन करता और है साथ ही देशवासी गर्व से मनाते भी हैं. वहाँ भारत एक बार फिर विदेशी ताकतों और देशद्रोहियों से गच्चा खा गया. आज हम ६२ वाँ मन रहे हैं. आने वाली स्थिति शायद ये होगी कि हम शताब्दी समारोह नहीं मना पायेंगे. गणतंत्र बचेगा तब न ... बात सिर्फ कश्मीर की नहीं चारो तरफ अलगाववादियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं.

मेरे ननिहाल दार्जिलिंग से भी अशांति की खबरे आती रहती है. वहां GLF गोरखा लिबरेशन वाले प. बंगाल सरकार पर चढ़े हुए हैं. दुकाने, स्कूलें बंद हो जाती है. असाम, केरल भी इसी देश में है जहाँ अशांती है. क्या कहें. सिर्फ यह बोलकर संतोष कर लें कि स्थिति तनावपूर्ण है या रास्ता भी निकाला जाए.

Anonymous said...

अब हमें लाल चौक पर पर तिरंगा फहराने के पहले यासीन मालिक का कटा हुआ सिर देखना है ...

Anonymous said...

from IBN news : a Good news

जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के एतिहासिक लालचौक पर केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने आज तिरंगा फहराया। इसके अलावा राज्य के प्रत्येक जिले एवं तहसील में गणतंत्र के उपलक्ष्य में तिरंगा फहराने के बाद कई कार्यक्रम आयोजित किये गये।
http://khabar.ibnlive.in.com/news/47229/1

P K Surya said...

Dil Dimag me kya ho raha he samajh me nahi ata Bhaiya hum apne office me apke blog ko forward kiye to Bahut bara charcha ka wisay ban gaya sale ek ne to mujhe yahan tak kaha Pankaj tum NATHURAM GODSE kyon na ban jate ho to hum bole time aya to sala wo bhi ban ke dikha dunga par me SREE KRISHNA KA bhakt hun en maha kameene Deshdrohiyon ke ghar me ghush ke marunga or marwaunga (RAHI BAT BJP Ke to BJP ne jo 5 saal me kiya he wo ye congres 100 janam me nahi kar sakti)JAI BHARAT

sanjay jha said...

yahan hum @sanjay begani ji se sahmat

agar lal chowk pe pakistani jhanda to
hamare ghar kyon nahi...............

jai ho ganga-jamuni sanskriti ki....

pranam.

अहसास की परतें - समीक्षा said...

गौतम जी, सन १९९२ से हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस पर सेना यहां लाल चौक पर झण्डा फहराती थी, विगत वर्ष सेना को इसके लिए क्यों मना कर दिया गया? कृपया इसका उत्तर हो तो ज़रूर दीजीएगा।

आपने अपने दोस्तों को खोया होगा, आप कहते हैं तो झूठ नही होगा, पर क्या हमारे वीर जवान हमने नही खोए हैं, इसी झण्डे की गरिमा के लिए? अगर वो भी ऐसा सोचते तो कैसा रहता?

लाल चओक से इसको इसीलिए जोडा गया है क्योंकि इसी चौक पर कभी भी तिरंगा जलाने को तत्पर बैठे रहते हैं उपद्रवी, और यहीं हरा झण्डा फहराया जाता है सबसे ज्यादा।

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बेनामी जी आप तो कायरों के सरदार निकले, अपना नाम तक देने मे घबरा गये, आप से क्या उम्मीद करना, आप तो बस अपनी मां बहन का प्रश्न आने पर शांति की बातें मत करने लगना, मेरी इतनी ही प्रार्थना है।

रही बात वाज़पई सरकार के समय की तो तुम्हारी जानकारी के लिए इतना बता दूं (वैसे कोइ फर्क नही पडता तुम कोइ दूसरा बहाना निकालोगे), १९९२ मे जोशी जी ने वहां झण्डा फहराया था तब से पिछले साल २६ जनवरी तक हर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर फहरता रहा है यह।

Omkar said...

mujhe maaf karenge!!! kyunki mai es kafi mahtwpurn blog ko kafi samay ke baad access kar paya. and I must say thanks to my friend Mr. Bhaskar who come to me at here.

But it is realy gr8. magaar hume chahiye ke en deshdrohiyon (congresiyo) ko na bakshen....

रंजना said...

कितने लाचार और अभागे हैं हम....जाने कब यह दुर्भाग्य दूर होगा...

Sunil said...

http://www.youtube.com/watch?v=AVN9OayjkqU
Ye wo sachai he jisko hume samjna hoga or Muslim Bhaiyon ko aage aana hoga...yhi he Kashmir Samasya....oh. . sorry ....Delhi ki samasya.

MANU MARAJ said...

जो लोग भाजपा की राष्ट्रीय एकता यात्रा पर भाजपा द्वारा राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं , में उन्हे बताना चाहता हूँ कि भाजपा एक मान्यताप्राप्त राष्टीय राजनीतिक पार्टी है | एक राजनीतिक पार्टी राजनीति नहीं करेगी तो क्या घास खोदेगी ? देश का झंडा देश के अंदर फहराना अगर राजनीति है तो ऐसी राजनीति हर पार्टी को करनी चाहिए | इसमे बुराई कहाँ है ? अगर इस यात्रा से भाजपा को लाभ होता है यह अच्छी बात है | अच्छे काम करके वोट बटोरना अच्छी राजनीति की पहचान है | विरोधियों पर झूठे आरोप लगा कर उन्हे बदनाम करके किसी समुदाय विशेष के वोट बटोरने से तो अच्छा है कुछ पॉजिटिव कार्य करके वोट बटोरे जाएँ |

रूपेश मिश्र said...

बेहद सटीक लेख

dilip said...

Mere Benami dost aap jaiso ke karan hi aisi stithi bani hai..... agar use sudhar nahi sakte to kam se kam kisi doosre ko na toke anyatha ab gulam hi gaye to hamare paas aap jaise log hi hain.

Gautam ji, Hame pata hai aur yakin bhi ki aapne bahut kuch khoya hoga lekin aapne socha hai ki jo bedakhal kar diye gaye un par kya bitti hogi. sena ke jawan kyo aapki zameen ki raksha ke liye apni jaan dene aaye?? kuch hazar rs. ke liye hi koi sena ki naukri nahi karta hai......

Anonymous said...

Jaisa jaisa comment aap kuch log karte hai,sayad unhe ye nahi pata hai ki sarkaar kabhi nahi chahti hai ki law and order dissolve ho. Aur ek pandit jee comment karte hai ki 26 January ko lal choek par tringa fahraiyenge,iske liye chahe umar Abdulla ke upar se kyun na gujarna pade. To Pandit jee mein aapko ek baat bata deta hoon ki Kathni aur karni me bahut fark hai.Faltu wala bayanbaazi karke khud ko jayda kaabil mat samajhiye.aapke body me blood hai aur Kashmir ki janta ki body me water.Aap jo bolte hai use aapki character ka pata chalta hai.Agar acche baat boliye ga to log aapko accha kahenge.aap jaise aadmi hi desh me danga failate hai.Jisko log bhagwa atank kahte hai.Ek baar gulf country ghoom kar aaiye aur yahi bhasan jara wahan jaarkar boliye,tab pata chalega ki aapki original aukat kya hai.