Sunday, January 16, 2011

“हिन्दू आतंक”, सीबीआई की जाँच और कुछ संयोग?…… Hindu Terror, CBI and NIA India, Lashkar and SIMI

रूस में स्टालिन के ज़माने का एक किस्सा है, स्टालिन से मिलने चार ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमण्डल आया था। स्टालिन से उनकी चर्चा हुई और ग्रामीण उनके केबिन से बाहर निकल गये। स्टालिन को सिगार पीने की याद आई, उन्होंने जेबें टटोलीं… टेबल की दराज देखीं, कोट को हिला-डुलाकर देखा लेकिन उनका प्रिय सिगार उन्हें नहीं मिला। स्टालिन ने तत्काल अपनी सेक्रेटरी मारिया को बुलवाया और कहा कि अभी-अभी जो चार ग्रामीण बाहर निकले हैं उनसे मेरे सिगार के बारे में पूछताछ करो। मारिया के जाने के थोड़ी देर बाद स्टालिन को वह सिगार टेबल के नीचे पड़ा दिखाई दिया, स्टालिन ने मारिया को फ़ोन लगाया और कहा कि उन ग्रामीणों को छोड़ दो… तब मारिया बोली, “लेकिन सर, चार में से तीन लोगों ने तो स्वीकार कर लिया है कि आपका सिगार उन्होंने चुराया था और चौथा भी जल्दी ही मान जायेगा, मै “चारों” सिगार लेकर आ ही रही हूँ…”

भले ही यह किस्सा स्टालिन की तानाशाही कार्यप्रणाली के लिये हँसी-मजाक के तौर पर उपयोग होता है, लेकिन यह भारत की तथाकथित “सर्वश्रेष्ठ जाँच संस्था”(?) सीबीआई की कार्यप्रणाली से अक्षरशः मेल खाता है। जब से कांग्रेस सरकार महंगाई, स्पेक्ट्रम, कलमाडी और आदर्श जैसे मामलों के कीचड़ में धँसी है, तभी से कांग्रेस व उसके चमचों खासकर तहलका, टाइम्स और नेहरु डायनेस्टी टीवी (NDTV) में “हिन्दू आतंक”(?) को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और हल्ला मचाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। स्वामी असीमानन्द द्वारा समझौता ब्लास्ट मामले में दिया गया “तथाकथित बयान” भी जानबूझकर लीक करवाया गया है, इसके कथित कागज़ात व सबूत “तहलका” पर प्लाण्ट करवाये गये हैं, जबकि समझौता एक्सप्रेस बम विस्फ़ोट मामले में सीबीआई पहले भी सिमी के प्रमुख कार्यकर्ता सफ़दर नागोरी से भी कबूलनामा ले चुकी है, जबकि अमेरिकी जाँच एजेंसी ने इसी मामले में डेविड हेडली की पत्नी के बयान को लेकर उसके खिलाफ़ पहले ही मामला खोल रखा है।


सीबीआई के अनुसार, सफ़दर नागोरी, कमरुद्दीन नागोरी व आमिल परवेज़ ने नार्को टेस्ट में कबूल किया था कि समझौता एक्सप्रेस में उन्होंने बम रखवाये थे और इस मामले से कर्नल पुरोहित व साध्वी प्रज्ञा का कोई लेना-देना नहीं है, जबकि सीबीआई अब कह रही है कि असीमानन्द ने रितेश्वर और सुनील जोशी के साथ मिलकर यह साजिश रची। उधर अमेरिका में डेविड हेडली की पूर्व-पत्नी फ़ैज़ा औतुल्ला ने हेडली द्वारा समझौता एक्सप्रेस में लश्कर के साथ मिलकर बम विस्फ़ोट करने की योजना का खुलासा किया है। नार्को टेस्ट में सफ़दर नागोरी ने कबूल किया है कि समझौता एक्सप्रेस में बम रखने के लिये सूटकेस कटारिया मार्केट इन्दौर से खरीदे गये थे, नागोरी ने यह भी कबूल किया है कि सिमी नेता अब्दुल रज्जाक ने समझौता एक्सप्रेस विस्फ़ोट के लिये पाकिस्तान से आर्थिक मदद प्राप्त की थी। (32 पेज की यह नार्को टेस्ट रिपोर्ट एवं फ़ोरेंसिक टीम के निष्कर्षों की पूरी कॉपी अखबार “द पायनियर” के पास उपलब्ध है) 

इसी प्रकार हेडली की मोरक्कन बीवी ने अमेरिकी जाँच एजेंसी को शिकायत की थी कि हेडली भारत की किसी एक्सप्रेस ट्रेन में बम रखवाने की योजना बना रहा है, समझौता एक्सप्रेस बम विस्फ़ोट के बाद उसका शक और गहरा गया। लश्कर से हेडली के सम्बन्ध जगज़ाहिर हैं।

अब ऐसे में सवाल उठता है कि भारत की “महान जाँच एजेंसी”(?) जिसने हाल ही में आरुषि हत्याकाण्ड में अपनी “स्टालिन-मारिया टाइप की योग्यता” दर्शाई है, क्या असीमानन्द के मामले में उस पर भरोसा किया जा सकता है? सफ़दर नागोरी, डेविड हेडली या असीमानन्द… किसकी बात सच मानी जाये, किसकी झूठ? सफ़दर नागोरी का नार्को टेस्ट बड़ा बयान माना जाये या असीमानन्द का मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया “कथित” बयान?

सीबीआई का न तो रिकॉर्ड साफ़-सुथरा है न ही उसकी इमेज इतनी दमदार है कि वह जनता में यह संदेश देने में कामयाब हो कि वह निष्पक्षता से जाँच करेगी ही। बोफ़ोर्स मामले में हम देख चुके हैं कि किस तरह “महारानी विक्टोरिया” ने सीबीआई की बाँहें मरोड़कर उनके चहेते क्वात्रोची को क्लीन चिट दिलवाई थी और गाहे-बगाहे केन्द्र में समर्थन लेने के लिये कभी मायावती, कभी मुलायम सिंह तो कभी जयललिता के पुराने मामलों को कब्र से निकालकर उनकी गर्दन पकड़ने का काम सीबीआई के जरिये किया जाता रहा है… इसलिये भारतीय पुलिस की स्टालिन-मारिया स्टाइल वाली पूछताछ और बयानों से किसी भी समय, किसी को भी दोषी सिद्ध किया जा सकता है…

ये बात और है कि कोर्ट में इनके लगाये-बनाये हुए केस की धज्जियाँ उड़ जाती हैं, लेकिन सुनियोजित तरीके से बयानों को अपने पालतू मीडिया में लीक करवाकर हिन्दू संगठनों को बदनाम करने का जो खेल खेला गया है, अभी तो वह कारगर दिखाई दे रहा है। अभी मामला कोर्ट में नहीं गया है, लेकिन यदि मान लो कि असीमानन्द दोषी साबित भी हो गये (जिसकी सम्भावना कम ही है) तब भी जाँच के तरीके और सफ़दर के बयानों के मद्देनज़र शक की गुंजाइश हमेशा बनी रहेगी…

जिस तरह काफ़ी समय से कांग्रेस की कोशिश रही है कि उसके “10 किलो के भ्रष्टाचार”  और भाजपा के 100 ग्राम भ्रष्टाचार को तराजू में रखकर बराबरी से तौला जाये, उसी प्रकार अब दिग्विजय सिंह जैसे लोगों के ज़रिये यह जी-तोड़ कोशिश की जा रही है कि किस प्रकार पाक प्रायोजित जेहादी आतंकवाद और हिन्दू आतंकवाद को एक पलड़े पर लाया जाये… चूंकि मीडिया में कांग्रेस के ज़रखरीद गुलाम भरे पड़े हैं और हिन्दुओं में भी “जयचन्द” इफ़रात में मिल जाते हैं इसलिये कांग्रेस की यह कोशिश रंग भी ला रही है। कांग्रेस ने पाकिस्तान को जानबूझकर यह कार्ड भी पकड़ा दिया है, और इसका बखूबी इस्तेमाल वह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर करेगा ही। 26/11 के बाद पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर चौतरफ़ा जिस प्रकार घेरा गया था, अब “हिन्दू आतंक” के नाम पर सेकुलरों द्वारा खुद एक डाकू को ही “चोर-चोर-चोर” चिल्लाने का मौका दिया गया है।



गुलामों द्वारा दिखाई जा रही स्वामीभक्ति के चन्द नमूने भी देख लीजिये – “26/11 - संघ की साजिश” नाम की कूड़ा पुस्तक लिखने वाले अज़ीज़ बर्नी से किसी भी मीडिया हाउस ने अभी तक कोई गम्भीर सवाल-जवाब नहीं किये हैं। एक तरफ़ तो दिग्विजय सिंह बार-बार इस घटिया पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में जाते हैं, उसका “प्रचार” करते हैं और दूसरी तरफ़ ये भी कहते हैं कि मैं हेमन्त करकरे की शहादत पर सवाल नहीं उठा रहा और पाकिस्तान का हाथ तो 26/11 में है ही…। कोई उनसे यह नहीं पूछता कि यदि आपको भरोसा है कि 26/11 में पाक और लश्कर का हाथ है तो अज़ीज़ बर्नी के प्रति आपका स्नेह इतना क्यों टपक रहा है? क्या इस पुस्तक की रॉयल्टी में उनका भी हिस्सा है? उधर “तहलका” भारत के सबसे सफ़ल मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को “पोस्टर बॉय” कहता है, तहलका को शायद “वायब्रेण्ट गुजरात” की सफ़लता से चिढ़ हो गई हो, तहलका की ही एक “ईसाई” रिपोर्टर निशा सूसन थीं जिन्होंने प्रमोद मुतालिक को पिंक चड्डी भेजने का छिछोरा अभियान चलाया था, ये बात और है कि तसलीमा नसरीन पर हमला करने वाले हैदराबाद के मुल्ले को “ग्रीन चड्डी” भेजने की उनकी हिम्मत नहीं है। नेहरु डायनेस्टी टीवी (NDTV) के बारे में तो कुछ कहना बेकार ही है यह तो अपने जन्म से ही “हिन्दू-विरोधी” है।

इन गुलामों में से कितनों ने NIA द्वारा केरल में की जा रही जाँच, अब्दुल मदनी से आतंकियों से सम्बन्ध और सिमी के ट्रेनिंग कैम्पों के बारे में अपने चैनलों पर दिखाया? क्या कभी सूफ़िया मदनी द्वारा दिये गये बयान अचानक प्रेस के माध्यम से सार्वजनिक हुए हैं? नहीं। लेकिन चूंकि “हिन्दू आतंक” शब्द को कांग्रेस द्वारा “ग्लोरिफ़ाय” किया जाना है और “भोंदू युवराज” हिन्दू आतंकवाद को ज्यादा खतरनाक बता चुके हैं तो सीबीआई और मीडियाई गुलामों का यह कर्त्तव्य बनता है कि वे इसे “साबित” भी कर दिखायें… चाहे स्टालिन-मारिया तकनीक ही क्यों न अपनानी पड़े…

तात्पर्य यह कि “जयचन्दों और खरीदे हुए भाण्डों” के सहारे “हिन्दुओं को बदनाम करो” अभियान सफ़लतापूर्वक चल रहा है।
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चलते-चलते : स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती की उड़ीसा में हत्या हुई, नित्यानन्द को कर्नाटक में एक फ़र्जी वीडियो के जरिये बदनाम किया गया (वह वीडियो भी आश्रम के एक पूर्व कर्मचारी, जो ईसाई है, द्वारा ही बनाया गया है), हिन्दुओं की नाक पर बूट मलने की खातिर, कांची के शंकराचार्य को ऐन दीपावली की रात को हवालात में डाला गया और अब स्वामी असीमानन्द की बारी आई है…… क्या “गजब का संयोग”(?) है कि उक्त चारों महानुभाव मिशनरी द्वारा किये जा रहे धर्मान्तरण के खिलाफ़ कंधमाल(उड़ीसा), कर्नाटक, तमिलनाडु एवं डांग(गुजरात) में जबरदस्त अभियान चलाये हुए थे व हिन्दू जनजागरण कर रहे थे।

क्या अगला नम्बर योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर) का होगा? इसका जवाब भोंदू युवराज या महारानी विक्टोरिया ही दे सकते हैं…

27 comments:

nitin tyagi said...

eye opening article
but it is also true that maikale is also sucessfull this time

due to wrong history and education we hindu (lions) has become just fox

JANARDAN MISHRA said...

जिश दिन योगी आदित्य नाथ या नरेन्द्र मोदी जैसे लोगों के गिरेबान पे हाथ डालने कि गलती कोंग्रेश, मिडिया या मेडम और तथा कथित राजाबाबू ( भारत का सबसे निकम्मा और बुढा नवजवान ) करें गे, उस दिन उन्हें पता चल जाये गा, कि हिन्दू क्या कर सकता है. और उस दिन वो कहावत सच्ची हो जाएगी कि गीदड़ कि, मौत आती है तो वो................ शेर ( हिन्तुतव के पुजारी ) जबतक सोरहे हैं उन्हें आलसी मत समझो जब अंगड़ाई ले कर खड़े होंगे तो सब गीदड़ ( हिन्दू विरोधी ) दुम दबाकर भाग खड़े होंगे.....

Anonymous said...

हिन्दुओं के लिये रहना मुहाल हो जायेगा एक दिन और इसके लिये खुद हिन्दू ही जिम्मेदार हैं. इतिहास में दर्ज होगा कि किस तरह हिन्दुओं ने अपने आप को मिटाया...चन्द धूर्त नेताओं की चाल में आकर..

ajit gupta said...

अगला नाम किसका होगा, इसका अंदाज है मुझे। जो भी जितने प्रभावी ढंग से भारत के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है उसको आज अधिक खतरा है। आज से दस वर्ष पूर्व से ही असीमानन्‍द जी के पीछे ये लोग पड़े थे, डांग में भी इन्‍होंने तूफान मचाने का बहुत प्रयास किया था लेकिन ये सफल नहीं हुए। अब चाल गहरी है, क्‍योंकि ये लोग अब सत्ता में बैठे हैं।

Man said...

सादर वन्दे सर ,
तताकथित ''''कांग्रेस इनवेस्टिगेंशन ब्यूरो "" को कांग्रेस ने अपने शाशन काल में रखेल की जेसे मनमाफिक काम में लिया हे |चाहे कोई भी मामला हो ?अमेरिका की ऍफ़ .बी. आई . की जेसे कभी भी सीना तान के चलने की की कोशीश कभी नहीं की केवल जोगिन्दर के निदेशक कार्यकाल के आलावा |एक अपराधिक षड्यंत्र के तहत हिन्दू बनाम आतंकवाद की एक नयी अवधारणा को जन्म दिया जा रहा हे जो की हजारो वर्षो में कभी भी हिंदुवो के साथ नहीं जुडी |जो हिन्दू सेकड़ो वर्षो की गुलामी जुल्मो को सहने के बाद भी शांत और सहिष्णु हे ,उसे बदनाम किया जा रहा हे |अगर इन जाँच एजेंसियों इतनी ही कुव्वत होती तो हेडली भारत में महीनो रह के इन की पिछवाड़े वाली दुकान में पानी कूड के नहीं चल गया होता |इन से अच्छा तो में छोटे राजन को सलाम करता हूँ जो अपराधी सरगना हो के भी अपने रास्ट्र और हिंदुवो के पर्ती इतना आस्थावान हे की पिछले दिनों सिम्मी के पर्मुख अहमद रियाज भटकल को कंरांची के सबसे सुरक्षित इलाके में अपने आदमी से मार गिरवाया |ये गुलाम एजेंसिया भी इसी देशभक्त राजन की मोहताज हे |शर्म से डूब मरना चाहिए इन्हें ?ये साले रिटायर होके फिर अपनी "रेप गाथा "' गाते हे मेरे साथ ऐसा हुआ था ?थोड़ी सी भी गेरत बची हुई थी तो क्यों नहीं दिया स्थीपा ?या बाद में रेप में आनंद आने लग गया ?

Ravindra Nath said...

CBI के पराक्रमः-

१. आरुषि के कातिल का पता लगाने मे नाकाम

२. काला-माणी अभी तक पकड से बाहर

३. दरबारी (CWG) के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने मे असफल - दरबारी को जमानत

४. मनिन्दर सिंह पंढेर के खिलाफ केस को कमजोर करने मे सहायक - पंढेर रिहा (निठारी)

५. चारा घोटाला - अब तक कोइ फैसला नही

६. बोफोर्स - क्वात्रोची के खाते को सील रखने मे नाकाम

७. ताज कोरीडोर - हर दिन अलग व्यक्तव्य

इसके बावज़ूद CBI यह दावा कर रही है कि उसने कुछ केस हल कर लिए और वो चाहती है कि हम लोग विश्वास भी कर लें - कैसा घटिया मज़ाक है यह।

sudesharma said...

@ janardan ji,
hamare yaha ek billi thi, badi hi taktvar, diler, agar man me thaan leti to sher ko bhi prast kar de,
lekin vo aakhirkar mar hi gyi lekin kabhi man me thana hi nhi.......
Lagta h yhi hall hmara h aakhirkaar ek ek kar barbrd ho jayege ..... Aur hum intjaar kr rahe h modi aur yoginath ji ki baari ka.
Ye mudda saanp ke jane ka nhi h, balki us lakeer ka h ko rasta banti ja rahi h

सुलभ § Sulabh said...

अधिसंख्य हिन्दू देशविरोधी-सेकुलरों की चाल को समझने में गच्चा खा जाता है.
उधर कांग्रेस की कोतवाली में सी.बी.आई. तो पानी भरने का काम कर ही रहा है.

मतलब सही समय चल रहा है असली आतंकवादियों को हिन्दुस्तान से खेलने के लिए.

दीर्घतमा said...

सिम्मी को तथा इस्लामी आतंकियों देश भक्त बताने हेतु किसी को कभी भी कोई भी बयान लिया जा सकता है हिन्दू अपने ही देश में गुलामी का जीवन ब्यतीत कर रहे है.

P K Surya said...

Bhaiya ko Pranam, ye sale congress ka sara kiya dhara he, जिश दिन योगी आदित्य नाथ या नरेन्द्र मोदी जैसे लोगों के गिरेबान पे हाथ डालने कि गलती कोंग्रेश, मिडिया या मेडम और तथा कथित राजाबाबू ( भारत का सबसे निकम्मा और बुढा नवजवान ) करें गे, उस दिन उन्हें पता चल जाये गा, कि हिन्दू क्या कर सकता है. और उस दिन वो कहावत सच्ची हो जाएगी कि गीदड़ कि, मौत आती है तो वो................ शेर ( हिन्तुतव के पुजारी ) जबतक सोरहे हैं उन्हें आलसी मत समझो जब अंगड़ाई ले कर खड़े होंगे तो सब गीदड़ ( हिन्दू विरोधी ) दुम दबाकर भाग खड़े होंगे.....
dil ko bahalane ke liye Galib ye khayal bhi achchha he,
pahle to hume jagna padega hum hindu humesa jada kharab hone k bad he jagenge tab tak to etna der hoga kee phir humari sabhyata sanshkriti kafi pichchhe chali jayegi, Aj jagna padega Aj karna padega. har hindu Sree Narendra Modi se kam nahi he hume her hindu bhai k liye kranti karnee padegi maine to TOI, NDTB sorry NDTV, or videshi chijo ko dekhna ya use karna chhod diya he sachche hindu hen hum sab to swadeshi chizo ke taraf jao or jo b hindu virodhi he uska bend bajao, warna phir se 200 saal pichhe ho jao, jai bharat

अन्तर सोहिल said...

स्वामी असीमानन्द के कबूलनामे की खबर देखते ही सबसे पहले दिमाग में यही कौंधा था कि एक सील बन्द बयान कैसे लीक हो सकता है। निसन्देह जानबूझ कर लीक किया गया।
असीमानन्द से तथाकथित बयान कैसे लिया गया होगा ये भी अन्दाजा है।

प्रणाम

उम्दा सोच said...

जांच नहीं ये देश के खिलाफ कांग्रेस की साजिश चल रही है... देश में गृहयुद्ध करवाने की !!! हिन्दू जिस दिन आतंकवाद की राह पर चल पडा तो बेटा भागने की जगह नहीं मिलेगी !!! इसलिए सहिष्णु को सहिष्णु ही रहन दो परसुराम बनाने पर मत मजबूर कर !!

डॉ महेश सिन्हा said...

दिग्विजय इतने सच्चे हैं तो अपने विदेशी खातों का खुलासा करें । अब तो सूप्रीम कोर्ट ने भी नाम मांगे हैं।

सम्वेदना के स्वर said...

स्वामी असीमानन्द के हद्र्य परिवर्तन की कहानी तो एक्दम गप्प सरीखी लग रही है! उनका पत्र लिखकर भारत और पाकिस्तान के राष्ट्पतियों से यह अनुरोध करना कि वो मुल्ला उमर जैसे आतंकवादीयों से मिलकर उनका भी हद्र्य परिवर्तन कराना चाहते हैं,कितना बढ़ा मज़ाक है!

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

तुम्हे मादरे हिंद पुकार रही है,उठो सपूतों,
तुम वतन के मसले पर,ढुलमुल कैसे हो !
बहुत लूट लिया देश को इन बत्ती वालों ने,
अब यह सोचो, इनकी बत्ती गुल कैसे हो!!


असीमानद के काउन्फेस्सन के बारे में एक और गडी गई कहानी यहाँ पढ़े ;
http://www.rediff.com/news/report/meet-the-youth-who-inspired-aseemanand-to-confess/20110108.htm

पंकज झा. said...

ओह ..क्या तेज़श्विता है चिपलूनकर जी की कलम मे...सोच कर कोई भी मुख्यधारा का कथित प्रकार पानी-पानी हो जाय. अद्भुत...इतने सन्दर्भों से भरे हर लेख के लिए सुरेश जी को हर बार बधाई..बारम्बार साधुवाद.
पंकज झा.

Anonymous said...

कांग्रेस का कमीनापन देखो
दिल्ली मे हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक अवैध मस्जिद गिरायी गयी. तो इन गद्दार मुसलमानो के हो हो करने पर वहाँ की बूढ़ी शीला दीक्षित तुरंत उस कमीने इमाम बुखारी के पास पहुची और मस्जिद दुबारा बनवाने का ऐलान कर दिया. जब कि हाईकोर्ट ने आदेश दिया था
बात यही खत्म नही हुयी वही पर एक मंदिर को बेरहमी से तोड़ दिया गया .मूर्तियो को हटाने का मौका भी नही मिला . मूर्तियो को खंडित कर के फेक दिया गया.
हिँदु चिल्लाते रहे लेकिन न वहाँ वो बूढ़ी कुतिया शीला पहुची और न ही वो मुल्ला मुलायम जो मस्जिद तोड़ने पर दहाड़े मार कर रो रहा था.
कमीनेपन की भी हदे टूट गयी.

INDIAN said...

मेरी अपील है हिँदुओ से कि हिँदुओ की इतनी भयंकर दुर्गति देखने के बाद अब एकजुट हो जाये और इतनी कोशिश जरुर करे कि आने वाले किसी भी चुनावो मे अपने परिवार और अपने आसपास अपने मित्रो आदि का वोट कांग्रेस को न जा पाये. क्यो कि अब ये हिँदुस्तान कांग्रेस को और नही झेल सकता. अगर इस हिँदुस्तान को मुगलिस्तान बनने से रोकना है तो इस नीच कांग्रेस को लात मार कर सत्ता से निकालना बहुत जरुरी है. इतनी जिम्मेदारी हर हिँदु की है

INDIAN said...

जैसा मैने अपने ऊपर कमेन्ट मे बताया है .अगर हर हिँदु अपने हिँदुस्तान के लिये इतना भी नही कर सकता है तो बेकार है घड़ियाली आसूँ बहाना. और इन गददार मुसलमानो से एक बात कहूंगा कि मुल्लो अभी बहुत खुश हो बहुत मजा आ रहा है हिँदुओ के देश मे इतनी सुविधाये पाकर. लेकिन बेटा अब समय आ गया है
जैसे दिया बुझने के पहले बहुत तेज जलता है ऐसे ही तुमलोगो का कमीनापन अपनी चरम अवस्था पर है. ऐसा हाल होगा तुम कमीनो का कि हिँदु नाम सुनते ही तुम्हारी रुहेँ काँप उठेँगी

Ravindra Nath said...

संघ को आतंकवादी संगठन साबित करके कांग्रेस क्या सन्देश देना चाहती है, कि उसके कुशासन में सदा शांत और सहनशील हिंदू भी आक्रामक हो उठे हैं?..

----साध्वी चिदर्पिता

Anonymous said...

Mr. Chiplunkarji
I Salute for 100-100 times.
Kas aapki pahuch Print & Electronic media me bhi hoti

Jago Hinduo Jaog
1 Boond chiplunkar Ji Ki.
Mere Priya hinduo Apne Apaahij Dimag Ko Kholiya our dekhiya Kya ho raha hia aap ke sath.

Jeet Bhargava said...

इस देश में हिन्दू-हिंदुत्व और हिन्दुस्तान का विरोध करने से ही गधा भी सेकुलर बुद्धिजीवी कहलाने के लायक बन जाता है.
दिग्गी हिन्दू और संघ विरोध का खेल खेलकर सोनिया दरबार में अपना स्कोर बढ़ाना चाहते हैं. ताकि भविष्य में पी एम् बनाने का चांस मिले. अर्जुन सिंह ने भी यही प्रयास किया था. लेकिन बेचारे हाशिये में चले गए. हिन्दू विरोध की तकनीक से सपा, बसपा, पासवान, कम्युनिस्ट जैसे निकृष्ट और निकम्मे लोग भी सत्ता सुख भोग चुके हैं. आप विकास मत करो, आप भष्टाचार के जारी देश को लूटकर स्विस बैंको में जमा कराओ, आप निकम्मे रहो... फिर भी आपके सात खून माफ़ हैं. क्योंकि आप सेकुलर (हिन्दू-विरोधी) हैं.
दिग्गी की हर बात अतार्किक ही नहीं बल्कि दुर्भावना से प्रेरित है. सोनिया का आशीर्वाद पाकर यह शख्स अपनी सत्ता, NDTV छाप बिकाऊ मीडिया और 'परम ज्ञानी' बुद्धिजीवियों के बल पर छल-प्रपंच कर रहा है. वोट बैंक की गंदी राजनीति कर रहा है. सीबीआई जैसी संस्था को रखैल बना दिया है.
यदि हिन्दुओं के पास जागरूकता और धन खर्च करने का दिल होता तो राजदीप, बुर्का दत्त, वीर संघवी,चावला, तरुण तेजपाल और प्रणव जेम्स राय जैसे लोगो को मेडम माइनो, मार्क्सवादी, मुस्लिम जेहादी और मिशनरी नहीं खरीद पाते. और ना ही दिग्गी राजा जैसे सेकुलर गधो को कोइ भाव देता.
विकीलीक्स से आपके दिग्गी राजा और भोंदू युवराज की हिन्दू विरोधी मानसिकता और कुटील चालबाजियो की पोल खुल ही चुकी है.

रंजना said...

बहुत सही कहा आपने...

हिन्दू आतंकवाद को ग्लोरिफाई करने और हिन्दी हिन्दू को हीन बनाने ठहराने का अभियान हर बीतते पल के साथ सफलता के झंडे गाड़े चला जा रहा है.....

धिक्कार है हर उस भारतीय को जो इतना पिसने के बाद भी कांग्रेस के हाथ को मजबूत किये जा रही है...एक खून चूसने वाले राज को मुस्कुराते हुए अपना खून चूसने दे रही है...

दिवाकर मणि said...

कांग्रेसी राज में कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन से इससे ज्यादा की उम्मीद भी नहीं की जा सकती...

Anonymous said...

एन डी टीवी और तुष्टिकरण मे लगे हुऍ मीडिया और राजनीति के तमाम लोगो से निपटने का सबसे अच्छा प्रभावशाली उपाय एक हो सकता है वह है कि हर इस तरह की घटनाओ पर उनके खिलाफ तथ्यात्मक व आक्रामक याचिकाये दायर की जाये और संबधित झूठे और निहितस्वार्थी मक्कार तत्वो को भी इसके दायरे में लाया जाए । अगर एक एक इस तरह की घटना या हरकत पर कम से कम दस दस याचिकाये न्यायालयो में दायर होने की स्थिति अगर हम बनाने मे सफल हो जाये मेरा दावा है कि ये झूठे लोग ऐसे गायब हो जायेगें जैसे गधे के सिर से सिंग । बस इसके लिए कुछ समर्पित वकीलो की आवश्यकता है । यह ऐसा एक सौ टंच ठोस कार्य है जो न केवल बेहद व सुनिश्चित सकारात्मक परिणाम ही देगा बल्कि इस बिमारी को जड़ से ही खत्म कर देगा । -

girish.nagda said...

एन डी टीवी और तुष्टिकरण मे लगे हुऍ मीडिया और राजनीति के तमाम लोगो से निपटने का सबसे अच्छा प्रभावशाली उपाय एक हो सकता है वह है कि हर इस तरह की घटनाओ पर उनके खिलाफ तथ्यात्मक व आक्रामक याचिकाये दायर की जाये और संबधित झूठे और निहितस्वार्थी मक्कार तत्वो को भी इसके दायरे में लाया जाए । अगर एक एक इस तरह की घटना या हरकत पर कम से कम दस दस याचिकाये न्यायालयो में दायर होने की स्थिति अगर हम बनाने मे सफल हो जाये मेरा दावा है कि ये झूठे लोग ऐसे गायब हो जायेगें जैसे गधे के सिर से सिंग । बस इसके लिए कुछ समर्पित वकीलो की आवश्यकता है । यह ऐसा एक सौ टंच ठोस कार्य है जो न केवल बेहद व सुनिश्चित सकारात्मक परिणाम ही देगा बल्कि इस बिमारी को जड़ से ही खत्म कर देगा । -गिरीश नागडा

आशुतोष की कलम said...

दुष्ट नहीं माने तो हिंसा बहुत जरुरी है
इन गद्दार कांग्रेसियों को जीने देने की क्या मजबूरी है???