Thursday, November 18, 2010

सुदर्शन जी प्रकरण में मीडिया की भूमिका और भाजपा नेतृत्व की कमजोरी… Sudershan-Sonia Gandhi RSS and Congress Conflict

(भाग-1 से जारी…)

सुदर्शन प्रकरण ने फ़िर से इस बात को रेखांकित किया है कि या तो संघ का अपना खुद का टीवी चैनल और विभिन्न राज्यों में 8-10 अखबार होने चाहिये, या फ़िर वर्तमान उपलब्ध मीडियाई भेड़ियों को वक्त-वक्त पर "समयानुसार कभी हड्डी के टुकड़े और कभी लातों का प्रसाद" देते रहना चाहिये। संघ से जुड़े लोगों ने गत दिनों सुदर्शन मसले के मीडिया कवरेज को देखा ही होगा, एक भी चैनल या अखबार ने सोनिया के खिलाफ़ एक शब्द भी नहीं कहा, किसी अखबार ने सोनिया से सम्बन्धित किसी भी पुराने मामले को नहीं खोदा… जिस तरह मुकेश अम्बानी के खिलाफ़ कुछ भी नकारात्मक प्रकाशित/प्रसारित नहीं किया जाता, उसी प्रकार सोनिया-राहुल के खिलाफ़ भी नहीं, ऐसा लगता है कि आसमान से उतरे देवदूत टाइप के लोग हैं ये... लेकिन ऐसा है नहीं, दरअसल इन्होंने मीडिया और सांसदों (अब विपक्ष भी) को ऐसा साध रखा है कि बाकी सभी के बारे में कुछ भी कहा (बल्कि बका भी) जा सकता है लेकिन "पवित्र परिवार" के विरुद्ध नहीं। जब जयललिता और दयानिधि मारन जैसों के अपने मालिकाना टीवी चैनल हो सकते हैं, तो संघ या भाजपा के हिन्दुत्व का झण्डा बुलन्द करने वाला कोई चैनल क्यों नहीं बनाया जा सकता? भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कभी सोचा है इस बारे में?



मीडिया के अन्तर्सम्बन्धों और उसके हिन्दुत्व विरोधी मानसिकता के सम्बन्ध में एक पोस्ट लिखी थी "मीडिया हिन्दुत्व विरोधी क्यों है… इन रिश्तों से जानिये",  इसी बात को आगे बढाते हुए एक अपुष्ट सूचना है (जिसकी पुष्टि मैं अपने पत्रकार मित्रों से चाहूंगा) - केरल की लोकप्रिय पत्रिका मलयाला मनोरमा के निदेशक थॉमस जैकब के पुत्र हैं अनूप जैकब, जिनकी पत्नी हैं मारिया सोहेल अब्बास। मारिया सोहेल अब्बास एक पाकिस्तानी नागरिक सोहेल अब्बास की पुत्री हैं, अब पूछिये कि सोहेल अब्बास कौन हैं? जी हाँ पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी ISI के डिप्टी कमिश्नर, इनके परम मित्र हैं मिस्टर सलाहुद्दीन जो कि हाफ़िज़ सईद के आर्थिक मैनेजर हैं, तथा मारिया सोहेल अब्बास हाफ़िज़ सईद के दफ़्तर में काम कर चुकी हैं…। यदि यह सूचनाएं वाकई सच हैं तो आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि स्थिति कितनी गम्भीर है और हमारा मीडिया किस "द्रोहकाल" से गुज़र रहा है।

भाजपा नेताओं को यह भी सोचना चाहिये कि पिछले 10 साल में सोनिया ने इक्का-दुक्का "चहेते" पत्रकारों को मुश्किल से 2-3 इंटरव्यू दिये होंगे (स्वाभाविक है कि इसका कारण उनके बहुत "सीमित ज्ञान की कलई खुलने का खतरा" है), (राहुल बाबा का ज्ञान कितना है यह नीचे दिये गये वीडियो में देख सकते हैं…) राहुल बाबा भी प्रेस कांफ़्रेंस में उतना ही बोलते हैं जितना पढ़ाया जाता है (यानी इन दोनों की निगाह में मीडिया की औकात दो कौड़ी की भी नहीं है) फ़िर भी मीडिया इनके पक्ष में कसीदे क्यों काढ़ता रहता है… सोचा है कभी? लेकिन भाजपाईयों को आपस में लड़ने से फ़ुरसत मिले तब ना… और "हिन्दू" तो खैर कुम्भकर्ण हैं ही… उन्हें तो यह पता ही नहीं है कि इस्लामिक जेहादी और चर्च कैसे इनके पिछवाड़े में डण्डा कर रहे हैं, कहाँ तो एक समय पेशवा के सेनापतियों ने अफ़गानिस्तान के अटक तक अपना ध्वज लहराया था और अब हालत ये हो गई है कि कश्मीर, असम, उत्तर-पूर्व में नागालैण्ड, मिजोरम में आये दिन हिन्दू पिटते रहते हैं… केरल और पश्चिम बंगाल भी उसी राह पर हैं… लेकिन जब हिन्दुओं को घटनाएं और तथ्य देकर जगाने का प्रयास करो तो ये जागने से न सिर्फ़ इंकार कर देते हैं, बल्कि "सेकुलरिज़्म" का खोखला नारा लगाकर अपने हिन्दू भाईयों को ही गरियाते रहते हैं। पाखण्ड की इन्तेहा तो यह है कि एक घटिया से न्यूज़ चैनल पर किसी भीड़ द्वारा तोड़फ़ोड़ करना अथवा शिवसेना द्वारा शाहरुख खान का विरोध करना हो तो, सारे सियार एक स्वर में हुँआ-हुँआ करके "फ़ासिस्ट-फ़ासिस्ट-फ़ासिस्ट" का गला फ़ाड़ने लगते हैं, अब वे बतायें कि संघ कार्यालयों पर कांग्रेसियों के हमले फ़ासिस्टवाद नहीं तो और क्या है?



रही-सही कसर गैर-भाजपाई विपक्ष पूरी कर देता है। गैर-भाजपाई विपक्ष यानी प्रमुखतः वामपंथी और क्षेत्रीय दल… इन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि कांग्रेस क्या कर रही है, क्यों एक ही परिवार के आसपास सत्ता घूमती रहती है, महाराष्ट्र का भ्रष्ट मुख्यमंत्री संवैधानिक रुप से अपना इस्तीफ़ा लेकर प्रधानमंत्री के पास न जाते हुए सोनिया के पास क्यों जाता है? करोड़ों (अब तो बहुत छोटा शब्द हो गया है) अरबों के घोटाले हो रहे हैं… लेकिन इस निकम्मे और सीमित जनाधार वाले गैर-भाजपाई विपक्ष का मुख्य काम है किस तरह भाजपा को रोका जाये, किस तरह हिन्दुत्व को गाली दी जाये, किस तरह नरेन्द्र मोदी के प्रति अपने "फ़्रस्ट्रेशन" को सार्वजनिक किया जाये। इस गैर-भाजपाई विपक्ष को एक भोंदू युवराज, प्रधानमंत्री के रुप में स्वीकार है लेकिन भाजपा का कोई व्यक्ति नहीं। इसी से इनकी प्राथमिकताएं पता चल जाती हैं। कलमाडी, चव्हाण और अब राजा, अरबों के घोटाले हुए… लेकिन कभी भी, किसी में भी सोनिया-राहुल का नाम नहीं आया, क्या इतने "भयानक" ईमानदार हैं दोनों? जब सभी प्रमुख फ़ाइलें और निर्णय सोनिया-राहुल की निगाह और स्वीकृति के बिना आगे बढ़ नहीं सकतीं तो कोई मूर्ख ही ऐसा सोच सकता है कि इन घोटालों में से "एक बड़ा हिस्सा" इनके खाते में न गया हो… लेकिन "मदर इंडिया" और "पप्पू" तरफ़ किसी ने उंगली उठाई तो वह देशद्रोही कहलायेगा।

कुछ और बातें हैं जो आये दिन सुनने-पढ़ने में आती हैं, परन्तु उनके बारे में सबूत या पुष्टि करना मुश्किल है, इनमें से कुछ अफ़वाहें भी हैं… लेकिन यह तो भाजपा का काम ही है कि ऐसी खबरों पर अपना खुफ़िया तन्त्र सक्रिय और विकसित करे ताकि कांग्रेस को घेरा जा सके, लेकिन भाजपा वाले ऐसा करते नहीं हैं, पता नहीं क्या बात है?

उदाहरण के तौर पर - जब कांग्रेसियों ने हजारों भारतीयों के हत्यारे वॉरेन एण्डरसन को छोड़ा, उसी के 6 माह बाद राजीव गाँधी की अमेरिका यात्रा के दौरान, आदिल शहरयार नामक व्यक्ति को अमेरिका में छोड़ा गया जो कि वहाँ हथियार तस्करी और फ़्राड के आरोपों में जेल में बन्द था। आदिल शहरयार कौन? जी हाँ… मोहम्मद यूनुस के सपूत। अब यह न पूछियेगा कि मोहम्मद यूनुस कौन हैं… मोहम्मद यूनुस वही एकमात्र शख्स हैं जो संजय गाँधी की अंत्येष्टि में फ़ूट-फ़ूटकर रो रहे थे, क्यों, मुझे तो पता नहीं? भाजपा के नेताओं को तो पता होगा, आज तक उन्होंने कुछ किया इस बारे में? क्या एण्डरसन की रिहाई के बदले में आदिल को छोड़ना एक गुप्त अदला-बदली सौदा था? और राजीव गाँधी को आदिल से क्या विशेष प्रेम था? क्योंकि जिस तरह से एण्डरसन के सामने मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वागत में बिछे जा रहे थे, उससे तो यह खेल दिल्ली की सत्ता द्वारा ही खेला गया प्रतीत होता है।

इसी प्रकार संजय गाँधी एवं माधवराव सिंधिया दोनों की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु भी रहस्य की परतों में दबी हुई है, आये दिन इस सम्बन्ध में अफ़वाहें उड़ती रहती हैं कि सिंधिया के साथ उस फ़्लाइट में, मणिशंकर अय्यर और शीला दीक्षित भी जाने वाले थे, लेकिन अन्तिम क्षणों में अचानक दोनों किसी काम के कारण साथ नहीं गये। माधवराव सिंधिया की सोनिया से दोस्ती लन्दन से ही थी, जो कि राजीव की शादी के बाद भी कायम रही… लेकिन राजेश पायलट के साथ-साथ कुमारमंगलम, राजशेखर रेड्डी और जीएमसी बालयोगी… सभी युवा, ऊर्जावान और कांग्रेस में "उच्च पद के दावेदार" नेताओं की दुर्घटना में मौत हुई… कैसा गजब का संयोग है, भले ही यह अफ़वाहें ही हों, लेकिन कभी भाजपाईयों ने इस दिशा में कुछ खोजबीन करने की कोशिश की? या कभी इस ओर उंगली उठाई भाजपाईयों ने?

एक बात और है जो कि अफ़वाह नहीं है, बल्कि दस्तावेजों में है, कि जिस वक्त सोनिया गाँधी (1974 में) इटली की नागरिक थीं, वह भारत की सरकारी कम्पनी ओरियंटल इंश्योरेंस की बीमा एजेण्ट भी थीं और प्रधानमंत्री कार्यालय में काम कर रहे अधिकारियों के बीमे दबाव देकर करवाती थीं, साथ ही वह इन्दिरा गाँधी के सरकारी आवास को अपने कार्यालय के पते के तौर पर दर्शाती थी, यह साफ़-साफ़ "फ़ेरा कानून" के उल्लंघन का मामला है (यानी एक तो विदेशी नागरिक, फ़िर भी भारतीय सरकारी कम्पनी में कार्यरत और ऊपर से प्रधानमंत्री निवास को अपना कार्यालय बताना… है किसी में इतना दम?) भाजपा वालों ने कभी इस मुद्दे को क्यों अखबारों में नहीं उठाया?

तात्पर्य यह है कि कांग्रेसी तो अपना "काम"(?) बखूबी कर रहे हैं, टीवी पर सिखों का हत्यारा जगदीश टाइटलर संघ को गरिया रहा था… हज़ारों मौतों से सने एंडरसन को देश से बाहर भगाने वाले लोग सुदर्शन के पुतले जला रहे थे… अरुंधती के देशद्रोही बयानों पर लेक्चर झाड़ने वाले लोग सुदर्शन को देशद्रोही बता रहे थे (मानो सोनिया ही देश हो)… IPL, गेहूं, कॉमनवेल्थ, आदर्श, 2G स्पेक्ट्रम जैसे महाघोटाले करने वाले भ्रष्ट और नीच लोग, RSS को देशभक्ति का पाठ पढ़ा रहे थे… तात्पर्य कि अपने "पैगम्बर" (उर्फ़ सोनिया माता) के कथित अपमान के मामले में कांग्रेसी अपना "असली चमचा रंग" दिखा रहे थे, परन्तु सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा के बड़े नेता क्या कर रहे थे? इतने राज्यों में सरकारें, लाखों कार्यकर्ताओं के होते हुए भी तत्काल "माफ़ी की मुद्रा" में क्यों आ गये? कहाँ गई वो रामजन्मभूमि आंदोलन वाली धार? क्या सत्ता की मलाई ने भाजपा नेताओं को भोथरा कर दिया है? लगता तो ऐसा ही है…

गोविन्दाचार्य जैसे वरिष्ठ सहित कई लोगों ने सुदर्शन जी को गलत ठहराया है, मेरे पिछले लेख में भी काफ़ी असहमतियाँ दर्शाई गईं, नैतिकता और सिद्धान्तों की दुहाईयाँ भी सुनी-पढ़ीं… परन्तु अभी भी मेरा व्यक्तिगत मत यही है कि सुदर्शन जी सही थे। खैर… मेरी औकात न होते हुए भी, अन्त में भाजपा नेताओं को सिर्फ़ एक क्षुद्र सी सलाह देना चाहूंगा कि, कांग्रेस के साथ किसी भी किस्म की रियायत नहीं बरतनी चाहिये, किसी किस्म के मधुर सम्बन्ध नहीं एवं सतत "शठे-शाठ्यम समाचरेत" की नीति का पालन हो…।

जैसा कि ऊपर मीडिया के अन्तर्सम्बन्धों के बारे में लिखा है… सच यही है कि भारत देश संक्रमण काल से गुज़र रहा है, "वोट आधारित सेकुलरिज़्म" की वजह से कई राज्यों में परिस्थितियाँ गम्भीर हो चुकी हैं, कई संदिग्ध कारणों की वजह से मीडिया हिन्दुत्व विरोधी हो चुका है… जबकि देश की 40% से अधिक जनसंख्या युवा हैं जिनमें "सच" जानने की भूख है… अब इन्हें कैसे "हैण्डल" करना है यह सोचना वरिष्ठों का काम है… हम तो सोये हुए हिन्दुओं को अपने लेखों के "अंकुश" से कोंच-कोंचकर जगाने का कार्य जब तक सम्भव होगा करते रहेंगे… बाकी आगे जैसी सबकी मर्जी…। (समाप्त)


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35 comments:

ब्लाग गुरु said...

बात तो आपने सही कही।

संजय बेंगाणी said...

आप तो लिख देते हो और खून हमारा जलता रहता है.
हम अहिंसावादी लोग है. आपको गंगा-जमना संस्कृति की तमीज..तहजिब जैसा ही कुछ कहा जाता है वह नहीं है. भगवा ब्रिगेड वाले है... देश की हर समस्या के लिए जिम्मेदार.

बाकि बाद में....

{Bhagat singh} said...

आपसे पूरी तरह सहमत हूँ
संघ का अपना चैनल होना चाहिये जिससे इस देश का जो छिपा कर इस्लामीकरण हो रहा है वो लोगो के सामने आये और सोये हुये लोग जागे

त्यागी said...

आप लिख रहे है इसका मतलब हिन्दू जिन्दा है, आप बोल नहीं पा रहे इसका मतलब अभी शक्ति और इकट्टी करनी है.
चाणक्य या परशुराम की समय में भी ऐसा ही हाल था, परन्तु साधन इस से भी कम, आज साधन ज्यादा है परन्तु प्रयास कम, आप जारी रखे तिनका तिनका एक दिन जुड़ ही जायेगा.
शंखनाद जारी रहेना चाहिए, सुदर्शन जी ने भी शंखनाद किया है बस मशाल जलती रहेनी चाहिए.
www.parshuram27@blogspot.com

मैं और मेरा परिवेश said...

आपका लेखन बहुत उम्दा है। तथ्यपरक और आक्रामक और आपकी ईमानदारी पर शंका नहीं की जा सकती। मुझे एक मेसेज मिला, महाजाल पढ़ो। आपके व्यंग्य विरोधियों को आहत करते हैं लेकिन दुख के साथ यह कहना पड़ता है कि इस लेखन में निष्पक्षता नहीं है और कुछ व्यक्तिगत एवं वाद से जुड़े पूर्वाग्रह सामने आते हैं। किसी के व्यक्तिगत जीवन पर मनगढ़ंत आरोप लगा देना उसकी चरित्र हत्या के समान है और सुदर्शन जी जैसे संस्कारी लोगों को यह शोभा नहीं देता। जहां तक बात कांग्रेस और भाजपा की है दोनों ही एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं।

पी.सी.गोदियाल said...

बहुत सही विश्लेषण किया सुरेश जी ! आपको शायद याद होगा, बी जे पी के बारे में तो मैं बहुत पहले ही कह चुका हूँ !
इस विषय पर लिखने को मेरा भी खून खौल
रहा था मगर पिछले कुछ हफ़्तों से बीमार चल रहा हूँ इसलिए हिम्मत नहीं कर पाया
! सुदर्शन जी ने अपने बयान में सिर्फ एक त्रुटी कर दी थी की केजीबी की जगह सीआईये कह गए ! अन्यथा तो उन्होंने जो अब कहा वह श्री सुब्रमनियम स्वामी जी ने २००४ में ही लिख दिया था ! और ये जो गुलाम मानसिकता के टट-पूंजे आज इतना हो हल्ला मचा रहे है वे तब क्यों नहीं बोले ! कोई भी आज इन्टरनेट पर गोगल सर्च में RAHUL & SONIA KGB AGENT टाईप करके रिजल्ट देख सकते है की वहां इनके बारे में क्या लिखा है ! क्या इस सब का जबाब इनके पास है ?

त्यागी said...

एक बात और सभी से कहेना चाहूँगा जो लोग बीजेपी को गिरिया रहे है वो जान ले की यह सही है की बीजेपी भी कोई दुध की धुली नहीं है और न इस लायक की उसे छप्पन प्रकार के भोग लगाये जाये वो भी इसी गंदे और कायर समाज का हिस्सा है, दर्द उसको भी होता है, प्यास उसको भी लगती है. परन्तु जान ले की अन्धो में काना राजा वो ही है. शिवाजी ने भी सेनापति उसको बनाया था जिस से हिन्दू पताका फहराही जाये. बीजेपी को आज के समय गिरिया कर सिर्फ और सिर्फ हिन्दू अपना ही नुक्सान करेगा. मेरी बात को ध्यान से सुना जाये.
www.parshuram27@blogspot.com

man said...

वन्देमातरम सर ,
बहुत ही उर्जावान और विचारोत्तेज्जक पोस्ट के लिए आप को साधुवाद |
इन वर्णसंकरो के तो भले कितने ही आप उल्टा लेटा लेटा के मिर्ची चूरो ,लेकिन खून में ही मिलावट हे तो उसका असर तो ये बताएँगे ही |रही बात भा.ज.पा की तो ये कांग्रेस का न्यू adition हे सत्ता की भुग्ताई ने stemina छीन लिया हे ,गुजरात का शेर ही इसे दिशा दिखायेगा |

vijay jha said...

सुरेश जी बहुत है सटीक और तथ्य परक विश्लेषण. कांग्रेस जो करा रहा है ओ तो उसकी जन्मजात रोग है जिसे ए ओ ह्युम वायरस से पिरित मानसिकता कहते है . परन्तु भा ज पा को क्या हो गया, सोनिया गाँधी का नाम सुनते ही सांप क्यों सूंघ जाता है - आखिर भा ज पा का दुखती रग क्या है, कांग्रेस झुकने के लिए कहती है तो भा ज पा बाले रेंगने लगते है, कही एसा तो नहीं दोनों पार्टी मैं गुप्त समझौता हो तू भी खा मुझे भी खाने दे . आपको याद होगा अटल बिहारी की सरकार ने बोफ़ोर्स मामले में सोनिया गाँधी को अभयदान दिया , बदले में सोनिया ने दामादजी ( रंजन भट्टाचार्य ) को अभयदान दिया. (सुरेश जी कभी मौका लगे तो इस पर भी प्रकाश डालिए ). और अंतिम बात, जो तथ्य हमें आपको पता है ओ तथ्य क्या संघ प्रमुख को नहीं पता है? क्या संघ नेतृत्व में भी अरष्ट्रिये लोगो की घुसपैठ हो चूका है? चेहरा के साथ चरित्र भी भाजपा और संघ का बदल चूका है, ना तो दीनदयाल , मुखर्जी का सोच भाजपा में रहा और ना ही हेडगेवार , गुरूजी की की सोच और लक्ष्य संघ में रहा I बंधुगण प्रकाश डालें --------------------------- धन्यवाद I

अवधेश पाण्डेय said...

चैनल भी शुरू होने है. लिंक देखे. मीडियाई भाड़ ने पहले ही भगवा चैनल का नाम दे दिया.
http://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/Now-a-TV-channel-from-saffron-stable/articleshow/6944901.cms
जी एम सी बालयोगी जी कांग्रेसी नहीं, तेदेपा के थे.
उम्दा लेख. धन्यवाद.

Anonymous said...

राजनीतिज्ञ तथा व्यवसायी परिवार के संस्कारों में पले-बढे इंद्रेश कुमार कैथल (हरियाणा) में 18 फरवरी, 1949 में पैदा हुए बाल स्वयंसेवक है। जब आज के युवा कॅरियर की तलाश में टकते रहते हैं। ऐसे समय में चंडीग़ से बी. ई. डिग्री लेने वाले इंद्रेश कुमार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रचारक बनकर सेवा का जो व्रत लिया। वो अनथक और अविरल भाव से आज तक जारी है। वे कक्षा 67 में ही गटनायक, 1970 में दिल्ली में जिला प्रचारक, 197275 में दिल्ली में हीं विग प्रचारक, 1975 से 77 तक भूमिगत रहकर आपातकाल का विरोध, 1979 से 83 तक दिल्ली युवा, विद्यार्थी विग प्रचारक, 19832000 तक जम्मूकश्मीर तथा हिमाचल सांग के प्रचारक, 20002007 अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख तथा 2007 से अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं।

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय संयोजक अफजाल भाई का इंद्रेश कुमार के संबंध में कहना है कि भाई इंद्रेश जी एक सच्चे हिंदू है। उनके मार्गदर्शन में राष्ट्रीय मुस्लिम मंच 21 राज्यों के 141 जिलों में कार्य कर रहा है। राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने अमरनाथ श्राइन बोर्ड के समर्थन में, गो हत्या निषेध हेतु, समान नागरिक संहिता बनाने तथा राष्ट्रद्रोही कसाब, अफजल गुरू तथा अब्दुल नासिर मदनी को फांसी देने के लिए मुस्लिम समाज में आंदोलन चलाया हैं। एक ऐसा समय आयेगा जब संपूर्ण मुस्लिम समाज राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के बैनर तले आ जाएगा। पैगंबर मुहम्मद साहब का पसंदीदा आहार खजूर तथा लौकी था। विश्व मंगल गौग्राम यात्रा में 8 लाख मुसलमान भाईयों ने गौहत्या के विरोध में स्वहस्ताक्षरित पत्रक माननीया राष्ट्रपति जी को सौपा। यह सब इंद्रेश भाई के हीं मार्गदर्शन तथा अथक प्रयासों से संव हुआ। प्रतिवर्ष अजमेर शरीफ के उर्स में एक चादर वे भेंट करते हैं। ऐसे व्यक्ति पर अजमेर शरीफ विस्फोट कांड में मास्टरमाइंड का आरोप लगाना वोट बैंक राजनीति से प्रेरित कुत्सित मानसिकता वाले हीं कर सकते हैं।

इंद्रेश कुमार का कहना है कि गुर्जर, बक्कवाल तथा राष्ट्रवादी कश्मीरी मुसलमान जो ‘कश्मीरी आवाज’ है उससे सरकार को वार्ता करनी चाहिए। वे कश्मीर के वास्तविक प्रतिनिधि हैं। वे कश्मीर की आवाज हैं। उनमें कुटकुटकर भारत, भारत का मन तथा भारतीय संविधान के प्रति आस्था है। वे बहुसं’यक है।

श्री रामजन्मूमि के संबंध में इंद्रेश कुमार का कहना है कि श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा भगवान विश्वनाथ में करोड़ों भारतीयों की आस्था है। वे भारतियों के आराध्य हैं। 30 सितंबर, 2010 को प्रयाग उच्च न्यायालय की विशेष पीठ द्वारा दिए गए निर्णय का पूरा समर्थन करते हैं। तोजो इंटरनेशनल की रिपोर्ट तथा मुस्लिम विद्वान मौलाना वहीदुदीन खां का यह स्पस्ट कहना है कि उक्त ढांचे का निर्माण मंदिर के अवशेषों से किया गया था।

‘लेखक, पत्रकार, फिल्म समीक्षक, कॅरियर लेखक, मीडिया लेखक एवं हिन्दुस्थान समाचार में कार्यकारी फीचर संपादक तथा ‘आधुनिक सभ्यता और महात्मा गांधी’ पर डी. लिट कर रहे हैं।

– डॉ. मनोज चतुर्वेदी

(नवोत्थान लेख सेवा, हिन्दुस्थान समाचार)

अजय सिंह said...

भाजपा अपने घर को तो संभाल नहीं पा रही है, और कहा से कांग्रेसियों का के राज़ का पर्दाफाश करेगा| पता नहीं क्या हो गया है हारे देश के राजनीती को ? काँग्रेस ने हमेशा देश को खोखला किया, भाजपा खुली आँखों से भी अंधे बना बैठा है |

अजय सिंह said...

आपने ब्लॉग पर जो वीडियो राहुल गाँधी का लगाये है. मै देख कर निष्कर्ष यही निकाल सकता हू कि राहुल को विदेश में इनके माँ बाप ने पढाया लिखाया और इसमें बहुत से रुपये खर्च हुए होंगे| सब बर्बाद किये है राजीव और सोनिया ने | लानत है ऐसे युवराज पर जिसको कक्षा १ का सामान्य ज्ञान नहीं आ रहा है|और ये हमारे देश का भावी प्रधानमंत्री भी कांग्रेसियों ने बना दिया है| बर्बाद करदेगा ये मुर्ख, बेच डालेगा भारत को|

धन्यब्बाद!
ये वीडियो बहुत ही कीमती है|
कांग्रेसियो को उनके नेता का औकात मल्लूम चल जाएगा कि ये लौंडा क्या कर सकता है देश के लिए|

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

आदरणीय सुरेश भाई … यकीनन यह एक कड़वा सच है, जिसे पढ़ते अथवा सुनते समय पीड़ा तो बहुत अधिक होती है| जब से मैंने होश संभाला है कांग्रेस पर तो कभी विश्वास रहा ही नहीं| अब तो धीरे धीरे बीजेपी नामक बाड़ भी देश रूपी खेत को खाए जा रही है| ऐसे में क्या किया जाए, किस पर भरोसा क्या जाए कुछ समझ नहीं आता|
किन्तु फिर भी निराश होकर घर नहीं बैठ सकते| कुछ न कुछ तो ऐसा करना ही पड़ेगा जिससे की यह राष्ट्र अपने खो रहे गौरव को बचा पाए|
आपका प्रयास प्रशंसनीय है| आपके वचनों में सच्चाई है| राहुल गांधी का सामान्य ज्ञान तो आपने हमें दिखा दिया किन्तु देखना अब भी कई चमचे ऐसे आएँगे जिन्हें आपका यह लेख फासीवादी(?) हिन्दू समाज की सोच से प्रेरित दिखाई देगा| क्यों की जब तक ये लोग हिन्दुओं को दो चार गालियाँ न बक दें इनका रोटी पानी हज़म नहीं होता|
आपके सफलतम प्रयास के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद|

Pratik Jain said...

सुदर्शनजी ने भारत के इस जलील परिवार के खिलाफ आवाज उठाकर महान कार्य किया है। वैसे ही जैसे कभी जार्ज फर्नांडीज ने किया था।

सुदर्शनजी को सर आंखों पर बैठाना चाहिये ना कि उनसे कन्नी काट ले
। भाजपा और संघ दोनो ही अपराधी हैं क्योंकि वे ऐसे समय सुदर्शनजी के साथ खडे नहीं हुए

man said...

http://jaishariram-man.blogspot.com/2010/11/blog-post_18.html

JANARDAN MISHRA said...

सुरेशजी
भाजपा और संघ ये दोनों को लगता है, अब हिन्दुओ की विचारधारा के साथ चल कर केंद्र में सरकार नहीं बना पाएंगे. इशी लिए ये लोग हिन्दुओं को फुटबोल समाज़ कर लतिया रहे है, लेकिन इन्हें कौन बताये जब हिन्दू इन्हें लतियाने लगे, तब इनकी दो कौड़ी कीभी औकात नहीं रह जाएगी...........

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

बांसी कढी मे उबाल नही आता
काठ की हांडी एक बार ही चढती है .
क्यो आप अपनी एनर्जी संघ परिवार पर खर्च कर रहे है . यह पावर हाउस फ़ेल हो गया है .सिर्फ़ समप्ति बनाना और उसे बचाना ही इसका एक मात्र उद्देश्य है . जिस प्रकार आर्यसमाज ,हिन्दु महासभा बीते जमाने की बात हो गै उसी तरह संघ भी चुक गया . और सबसे ज्यादा हमे दुख है क्योकि हमारी तीन पीढियो की मेहनत जाया हो गई .

Krishan Pahal said...

शायद संघ ने यह सब तात्कालिक राजनीतिक सूझ-बूझ के अंतर्गत किया है.
क्योंकि कांग्रेस ने उनके बयान पर प्रतिक्रिया अगले दिन की शाम को करनी शुरू की वोह भी उनके प्रवक्ता की प्रेस-कांफेरेंस के बाद.
कांग्रेस यह सब अपने भ्रष्टाचार से लोगो का ध्यान हटाने के लिए कर रही है.
क्योंकि यदि उसे सोनिया मानिओ की इज्जत का ख्याल होता तो वह बहुत पहले सुब्रमनियम स्वामी के विरुद्ध मुकदमे लिखवाते.
शायद संघ नेतृत्व की ही सूझबूझ से पूरा देश अब फिर से असली मुद्दे यानि भ्रष्टाचार पर ध्यान दे रहा है क्योंकि समाज की भ्रष्टाचार को सहने की भी कुछ सीमा है.
मुझे नहीं लगता की संघ अपने कार्यकर्ता वो भी पूर्व सरसंघचालक को छोड़ सकता हो.

प्रतुल वशिष्ठ said...

..

अन्दर बाहर, बाहर अन्दर होता है.
जो दिखता जैसा, वैसा ना होता है.
__________
सुना था 'सच' कड़वा होता है,
क्या सच घृणास्पद भी हो सकता है? आज जाना.
मेरी यह घृणा सच के उदघाटित कथ्य से है.
'मदर इंडिया' और 'पप्पू' जैसे शब्दों की ध्वन्यात्मकता में मुझे नये व्यंग्य अर्थों की प्रतीति हुई.
इस लेख से मिले आक्रोश को मैंने सुरक्षित कर लिया है.

..

kaverpal said...

Dear sureshji jo baat apne kahi hai wo hi apne aap me wk chenal hai BJP,SP,JD,RLD,LJP,ETC ye sab bhi to usi congress se aaye hain jisne ajadi ka matlab hi gulami samjhaya hai isliye bhai sahab ab khud hi janta inka ilaz karegi ek ya do ka to mai bhi kar dunga aap isi tarah likhte rahiye janta narsingh bhi banti hai aur janardan bhi

Anshuman said...

सुरेश जी , गूगल पर खोजते हुए आज ही आपके ब्लॉग से परिचय हुआ. संयोग से गत सप्ताह ही और एक और ब्लॉग देखा था. मुंबई से हिन्दू वोइस के नाम से पत्रिका निकलने वाले श्री देवमुतहू ने हिन्दुओं के अपने किसी प्रचार माध्यम के आभाव पर क्या लिखा है आप भी पढ़ें
http://hinduvoicemumbai.blogspot.com/

Amit said...

Pranam Sir,

Koi to kamjor nas BJP ki Congress ke hath main hai. Nahin to BJP ke pass koi reason nahin hai chup baithne ka. Desh main Muslim Raj aane ke liye taiyar hai fir bhi BJP neend se nahin jag rahi.
Pata nahin kon vote karta hai congress ko jo har bar satta main aa jati hai. Main to jis se bhi milta hoon usi se poochta hoon ki kisko vote karte ho? aur agar koi congressy nikal aaye to ek achi khasi bahas hoti hai aur fir vo congressy voter BJP voter ban jata hai. Lekin sirf etne se kaam nahin chalega. ("Neend kholne ke liye ek dhamaka jaroori hai" -- Bhagat Singh)

avenesh said...

केंद्र सरकार मिडिया को माध्यम बनाकर संघ को बदनाम करने का षड़यंत्र रच रही है अचानक से बदले मिडिया के इस रूख के पीछे का मूल कारण सरकार के पक्ष में वातावरण तैयार कर सर्वश्रेष्ठ न्यूज़ चेनल का तमगा हासिल करना. न्यूज़ चेनल कांग्रेसियों के सूर में सूर मिला रहे हैं.बदलते वक़्त के साथ आज इलेक्ट्रोनिक मिडिया में संघ को अपना न्यूज़ चेनल लांच करना चाहिए..
बंधू मैं आपकी बात से बिलकुल सहमत हूँ....

Rupesh said...

mai tyagi ji se sahmat hu. hame koshish karni chahiye ki kis tarah bjp ko bachaya jaye. kewal uske virodh karne se koi fayada nahi hone wala.

रंजना said...

साधुवाद आपका...

Kunal S said...

Ab ko hadd ho gayee....
Jara ye bhi dekh lo

ओबामा की भारत यात्रा के कुछ ही दिन बाद अमरीका ने अल्पसंख्यकों को भयभीत कर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के नाम पर कथित रूप से हिन्दुत्व थोपने का आरोप लगाते हुए संघ परिवार को निशाने पर लिया है।

अमरीका ने अपनी ताजा वैश्विक धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट में गुजरात की मोदी सरकार समेत पूरे संघ परिवार को आड़े हाथों लिया है। हालांकि, अल्पसंख्यक कल्याण के प्रयासों के लिए केन्द्र की कांग्रेस नीत यूपीए सरकार को रिपोर्ट एक तरह से बचाती नजर आ रही है। अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि भारत की संघीय सरकार अल्पसंख्यकों के हिताें के लिए उल्लेखनीय काम कर रही है और उसने हिन्दुत्व को नकार दिया है। लेकिन, हिन्दूवादी ताकतों से प्रभावित कुछ राज्यों में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के कई मामले सामने आए हैं। गुजरात, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, अरूणाचल और हिमाचल जैसे राज्यों में संघ परिवार की मंशा के अनुरूप धर्मातरण विरोधी कठोर कानून बनाए गए हैं।

गुजरात की मोदी सरकार को 2002 के दंगों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में विफल रहने पर कड़ी लताड़ लगाई गई। यूपीए सरकार सभी समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करती है, लेकिन राज्यों की सरकारों द्वारा अल्पसंख्यकों के खिलाफ ज्यादतियों पर उसने सख्ती नहीं बरती।

जम्मू-कश्मीर में प्रताड़ना की खबरें नहीं
2009-2010 के बीच जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर विद्रोही ताकतों, विदेशी ताकतों या आतंककारी संगठनों के हमले किए जाने की खबरें नहीं हैं।

Ref Rajasthan patrika

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

मैंने आठ साल पहले कई हिन्दू नेताओं को चिट्ठी/ईमेल के जरिये कहा कि अपने प्रचार के लिये एक समाचार पत्र और टेलीविजन चैनल खोलें, लेकिन एक भी नेता ने पत्र का उत्तर तक देना उचित नहीं समझा..
आप ने बिल्कुल सटीक विश्लेषण किया है.. हिन्दू कमजोर हैं... शुतुरमुर्गी सोच के शिकार भी..

Kunal Singh Dabi said...

RSS me sabhi (pracharak & swayam sevak )ye jante hain ki unka ye shangrash apno se hi hain...na ki kisy bahar walo se...

ye(hum) rajneeti se badhakar KUT-NITI ko dhayan me rakhte hain...

kisi badi challang(jump) lagane ke liye kabhi -kabhi 2,3 kadam phiche bhi hatna padta hain...

Is shangrash / SANKALP( "Param Vebwnen Ne Tumev Tatsa Rashtram" / "We want to see our Nation as a BOSS of the world") ko pura karne main me hajaro RSS pracharakno & swayam sevakon ne apni jawaniye khapaye hain....

Sangh ka kam waykti-nisth na ho k karm-nisth hota hain...

Yadi hum wakeye jag jaye hain to is maha yegya me apne karmo ki (not only wish) aahuti de...

Join RSS

sadar vende...
Kunal
the_dabi@rediffmail.com

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Niche likhe vichar maire nahi hain per mera samarthan 100% hain...
शायद संघ ने यह सब तात्कालिक राजनीतिक सूझ-बूझ के अंतर्गत किया है.
क्योंकि कांग्रेस ने उनके बयान पर प्रतिक्रिया अगले दिन की शाम को करनी शुरू की वोह भी उनके प्रवक्ता की प्रेस-कांफेरेंस के बाद.
कांग्रेस यह सब अपने भ्रष्टाचार से लोगो का ध्यान हटाने के लिए कर रही है.
क्योंकि यदि उसे सोनिया मानिओ की इज्जत का ख्याल होता तो वह बहुत पहले सुब्रमनियम स्वामी के विरुद्ध मुकदमे लिखवाते.
शायद संघ नेतृत्व की ही सूझबूझ से पूरा देश अब फिर से असली मुद्दे यानि भ्रष्टाचार पर ध्यान दे रहा है क्योंकि समाज की भ्रष्टाचार को सहने की भी कुछ सीमा है.
मुझे नहीं लगता की संघ अपने कार्यकर्ता वो भी पूर्व सरसंघचालक को छोड़ सकता हो.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बड़ी दिक्कत यह है कि जहां कुछ मुस्लिम तो यह बात समझने को तैयार हैं, वहां हिन्दू अपने कानों में तेल डालकर बैठे हैं..
इन्द्रेश जी के अच्छे कार्यों के विरुद्ध षड़यन्त्र किसी को नहीं दिखाई देता....
विदेशियों से लड़ना आसान है, लेकिन अपने लोगों से बहुत कठिन...

मंगलमय said...

अपना मीडिया स्थापित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए. पोरस के ज़माने में हम इसलिए हारे क्योंकि हमारे हाथी कीचड में धंस गए और सिकंदर के घोड़े जीत गए. मुगलों और अंग्रेजों के ज़माने में हम इसलिए हारे क्योंकि उनके पास तोपें थी और हम अपनी तलवारें ही लहराते रह गए. आज के युग का शस्त्र मीडिया है.बिना शस्त्र (निहत्थे) युद्ध करने के जो परिणाम हो सकते हैं, वही हो रहा है. आज जिन स्वामी असीमानंद जी को गिरफ्तार किया है, वे शबरी कुम्भ जैसे आयोजनों के प्रणेता हैं.
कांग्रेस चुन-चुन कर राष्ट्रवादी वीरों को समाप्त कर रही है. देश के लाखों मुसलमानों को राष्ट्रवादी विचार से जोड़ने में इन्द्रेश जी का अप्रतिम योगदान है, इसलिए वे मुख्य टार्गेट हैं. स्वामी असीमानंद ने शबरी कुम्भ जैसे आयोजन करके वनवासियों को राष्ट्रीय विचार से जोड़ा है, इसलिए वे निशाने पर हैं. स्वामी लक्ष्मणानंद को पहले ही भून दिया गया और फिर काट दिया गया...
कैसे पहुंचेंगी ये सब बातें आम आदमी तक?
मुझे नहीं लगता अपना सशक्त मीडिया खड़ा करने में धन की कोई कमी आने वाली है. देश में आज भी बहुत भामाशाह हैं. फिर भी, यदि धन ही जुटाना है, तो संघ आगे तो आए...मैं...मैं अपनी एक किडनी बेच दूंगा. दोनों किडनियां और अपने अन्य अंग इसलिए नहीं बेचूंगा क्योंकि मुझे अपने इसी जीवन में भारत के पुनः विश्वगुरु बनने का सपना पूरा होता देखना है.

Dr. Manoj Sharma said...

अपना मीडिया स्थापित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए. पोरस के ज़माने में हम इसलिए हारे क्योंकि हमारे हाथी कीचड में धंस गए और सिकंदर के घोड़े जीत गए. मुगलों और अंग्रेजों के ज़माने में हम इसलिए हारे क्योंकि उनके पास तोपें थी और हम अपनी तलवारें ही लहराते रह गए. आज के युग का शस्त्र मीडिया है.बिना शस्त्र (निहत्थे) युद्ध करने के जो परिणाम हो सकते हैं, वही हो रहा है. आज जिन स्वामी असीमानंद जी को गिरफ्तार किया है, वे शबरी कुम्भ जैसे आयोजनों के प्रणेता हैं.
कांग्रेस चुन-चुन कर राष्ट्रवादी वीरों को समाप्त कर रही है. देश के लाखों मुसलमानों को राष्ट्रवादी विचार से जोड़ने में इन्द्रेश जी का अप्रतिम योगदान है, इसलिए वे मुख्य टार्गेट हैं. स्वामी असीमानंद ने शबरी कुम्भ जैसे आयोजन करके वनवासियों को राष्ट्रीय विचार से जोड़ा है, इसलिए वे निशाने पर हैं. स्वामी लक्ष्मणानंद को पहले ही भून दिया गया और फिर काट दिया गया...
कैसे पहुंचेंगी ये सब बातें आम आदमी तक?
मुझे नहीं लगता अपना सशक्त मीडिया खड़ा करने में धन की कोई कमी आने वाली है. देश में आज भी बहुत भामाशाह हैं. फिर भी, यदि धन ही जुटाना है, तो संघ आगे तो आए...मैं...मैं अपनी एक किडनी बेच दूंगा. दोनों किडनियां और अपने अन्य अंग इसलिए नहीं बेचूंगा क्योंकि मुझे अपने इसी जीवन में भारत के पुनः विश्वगुरु बनने का सपना पूरा होता देखना है.

ANAND said...

एक आम भारतीय जो की सच्चा देशभक्त है, के मन की पीड़ा को आपने बखूबी शब्दबद्ध किया है, इसी तरह अपनी लेखनी चलते रहे और जन जागरण का कार्य करते रहे...

Anonymous said...

What a great resource!

सौरभ आत्रेय said...

आपके विचार से शत -प्रतिशत सहमत हूँ. मैं अभी कुछ दिन पहले आपके इस विषय में दोनों लेख आने से पहले अपने भाई से फोन पर यही बात कह रहा था इस समय सबको सुदर्शन जी के साथ देना चाहिये जबकि ये उन से कन्नी काट रहे हैं , यह तो उन्होंने पहल करके जनता के सामने सच्चाई लाने का प्रयास किया है. जैसे मैंने पहले भी कहा था भाजपा अब कांग्रेस और कांग्रेस लश्कर ऐ तोयेबा की एजेंट हो चुकी है. क्योकि जिस प्रकार से कांग्रेस मुस्लिम आतंकवाद और चर्चों का खुले मुहँ और दिल से साथ दे रहे हैं उसी प्रकार पहले की कांग्रेस की तरह भाजपा इन मुद्दों पर मुंह सिल कर बैठी रहती है.
धीरू भाई ने सही कहा जिस प्रकार आर्य समाज और हिन्दू महासभा बीते दिनों की बात हो गयी है उसी प्रकार से संघ और भाजपा का चरित्र बदल चुका है क्योंकि इनमें भेड़ की खाल में भेडिये घुस चुके हैं.

@मंगलमय
यही तो रोना है कि जीते युद्ध को भी हार में बदल दिया है इस कांग्रेस(मैकाले) नीति ने. यह सब दुःख होता है हमारा सभी गौरवमय इतिहास मिटा दिया गया है, हमारे पास तोप बन्दूक इन अंग्रेजों से बहुत पहले भी थे जब ये बिलकुल जंगली लोग थे लेकिन स्वार्थी लोगो ने देश को अन्ध विश्वास की खाई में ऐसा धकेला कि समस्त ज्ञान-विज्ञान चला गया इस देश से.

खैर आज के परिपेक्ष में यह बात बिलकुल सही है राष्ट्रवादी लोगो का मीडिया में अत्यधिक प्रवेश करना चाहिये. कई राष्ट्रवादी अथवा हिन्दुवादी चैनल खुलने चाहियें यह तो मेरा भी सपना है.

बीच-बीच में कई लोग राष्ट्रवादी मुसलामानों की बात करते हैं, उनकी इस मामले में या तो नासमझी जानिए या कायरता या फिर चाल क्योंकि मुसलमानों की किताब में राष्ट्रवाद नाम का शब्द भी नहीं है और जो एकाध मुसलमान यदि देश के पक्ष में बोलता भी है तो या तो उनकी लोगो को बहकाने की चाल होती है या फिर वो सच्चे मुसलमान ही नहीं होते.
इसीलिए सभी राष्ट्रवादी लोग कुछ लोगो की इन मीठी गोलियों का शिकार नहीं हो. ये मीठी गोली खाते हुए देश को सैकड़ों वर्ष हो गये हैं और उसका परिणाम सभी आँखों वाले देख सकते हैं.