Monday, November 15, 2010

सुदर्शन जी से पल्ला झाड़ना, भाजपा-संघ का पलायनवादी कदम है… Sudershan-Sonia Gandhi RSS and Congress Conflict

संघ के बुज़ुर्ग श्री सुदर्शन जी ने सोनिया के सम्बन्ध में जो वक्तव्य दिया है, उसके मद्देनज़र कांग्रेसियों द्वारा धरने-प्रदर्शन-आंदोलन-पुतले जलाओ प्रतियोगिता एवं धमकियों का दौर जारी है। कांग्रेसी वही कर रहे हैं जो पैगम्बर का कार्टून बनाने पर मुस्लिमों ने किया, क्योंकि गाँधी परिवार, कांग्रेसियों के लिये पैगम्बर है और उनके बिना कांग्रेस का कोई अस्तित्व ही नहीं है… तात्पर्य यह कि कांग्रेसी तो अपने "आजन्म चमचागिरी" के धर्म का पालन करते हुए अपना काम बखूबी कर रहे हैं…। परन्तु संघ-भाजपा का रवैया अप्रत्याशित है…

भाजपा से तो उम्मीदें उसी दिन से टूटना शुरु हो गई थीं जिस दिन नपुंसकता दिखाते हुए कंधार में इन्होंने दुर्दान्त आतंकवादियों को छोड़ा था, परन्तु अब जिस तरह से सोनिया बयान मामले पर संघ के नेताओं ने एक पूर्व सरसंघचालक और वरिष्ठ नेता से अपना पल्ला झाड़ा है वह घोर आश्चर्य और दुख की बात है। संघ के इस "बैकफ़ुट" से एक आम हिन्दूवादी कार्यकर्ता तथा एक स्वयंसेवक का मन तो आहत हुआ ही है, मेरे जैसे मामूली ब्लॉगर (जो संघ का सदस्य भी नहीं है, और न ही पत्रकार है) का मन भी बेहद खिन्न और आहत है।

सुदर्शन जी ने जो कहा उसमें मामूली (अर्थात केजीबी की एजेण्ट कहने की बजाय CIA कहना) गलती हो सकती है, परन्तु सुदर्शन जी के इस बयान के पीछे की मंशा और भावना को समझना और उनका पूर्ण समर्थन करना, न सिर्फ़ संघ बल्कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की भी जिम्मेदारी और कर्तव्य बनता था, परन्तु ऐसा नहीं हुआ। जिस तरह कांग्रेसियों ने अपने "पैगम्बर" के पक्ष में सड़कों पर प्रदर्शन किया, वैसा ही भाजपा-संघ को उतने ही पुरज़ोर तरीके से करना चाहिये था, क्योंकि आखिर सोनिया के बारे में कही गई यह बातें कोई नई बात नहीं है। विभिन्न जगहों पर, विभिन्न लेखकों ने सोनिया के बारे में कई तथ्य दिये हैं जिनसे शक गहराना स्वाभाविक है, परन्तु भाजपा के नेता कांग्रेसियों के पहले हमले में ही इतने डरपोक और समझौतावादी बन जायेंगे ऐसी उम्मीद नहीं थी।

विगत 10-20 वर्ष से जिस तरह डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी लगातार एकाकी रुप से इस "विख्यात"(?) परिवार के खिलाफ़ काम कर रहे हैं, सबूत जुटा रहे हैं वह सराहनीय है… यदि संघ-भाजपा वालों को डॉ स्वामी से कोई निजी खुन्नस है तो इसका मतलब यह नहीं कि उनके द्वारा कही और लिखी गई बातों पर कोई ध्यान ही न दें… सुदर्शन जी को जिस तरह तूफ़ान और मंझधार में अकेला छोड़कर सभी भाजपाई भाग खड़े हुए वह निंदनीय है,  भाजपाईयों को डॉ स्वामी से कुछ तो सीखना ही चाहिये। बहरहाल, सोनिया-राहुल सहित समूचे गाँधी परिवार के बारे में डॉ स्वामी ने जो तथ्य दिये हैं, उन्हें मैं यहाँ संकलित करने की कोशिश कर रहा हूं… शायद संघ-भाजपा के नेता इस पर पुनर्विचार करें और अपने रुख में परिवर्तन करें…


सोनिया गाँधी ने भारत की नागरिकता बाद में ग्रहण की जबकि मतदाता सूची में उनका नाम पहले ही (1980 में ही) आ गया था…ऐसा कैसे हुआ? कभी भाजपा के सांसदों ने इस मुद्दे पर संसद में बात उठाई? (दस्तावेज़ की प्रति डॉ स्वामी की वेबसाईट से…) इसी से सम्बन्धित डॉ स्वामी का वीडियो भी देखिये…



(डायरेक्ट लिंक - http://www.youtube.com/watch?v=SidLY-nSqvA)

सोनिया ने अपने जन्म स्थान के बारे में झूठ बोला, कि उनका जन्म ओरबेस्सानो में हुआ, जबकि बर्थ सर्टिफ़िकेट के अनुसार, जन्म लुसियाना में हुआ, लुसियाना की बात छिपाने का मकसद मुसोलिनी से सोनिया के पिता का सम्बन्ध उजागर होने से बचाना था या कुछ और? (सन्दर्भ - डॉ स्वामी का वीडियो http://www.youtube.com/watch?v=u3VdiX7KUH8)





शपथ-पत्र में झूठ बोलना तो एक अपराध है फ़िर सोनिया ने लोकसभा सचिवालय को दिये अपने शपथ पत्र में यह क्यों छिपाया कि वह बहुत कम पढ़ी-लिखी हैं और उन्होंने कैम्ब्रिज से सिर्फ़ एक अंग्रेजी भाषा सीखने का डिप्लोमा किया है न कि कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से, दोनों संस्थाओं में ज़मीन-आसमान का अन्तर है… (दस्तावेज़ की प्रति डॉ स्वामी की वेबसाइट से…)

(डॉ स्वामी के भाषण का अंश भी देखिये… http://www.youtube.com/watch?v=-BfdiWpICo4)



इटली के कानूनों के मुताबिक इटली की नागरिक महिला से होने वाले बच्चे भी स्वयमेव इटली के नागरिक बन जाते हैं चाहे वह महिला कहीं भी रह रही हो। जिस समय राहुल (Raul) और प्रियंका (Bianca) का जन्म हुआ उस समय सोनिया भारत की नागरिक नहीं थी। उसके बाद कई वर्ष तक राहुल और प्रियंका ने इटली के पासपोर्ट पर भारत से बाहर यात्रा की (सन्दर्भ डॉ स्वामी का वीडियो…)। भाजपा वाले कान में मिट्टी का तेल डालकर क्यों सोते रहे? आज भी यह स्पष्ट नहीं है कि राहुल ने इटली की नागरिकता कब छोड़ी? या अभी भी दोहरी नागरिकता रखे हुए हैं? तेज़तर्रार कहलातीं सुषमा स्वराज ने इस मुद्दे पर कितनी बार धरना दिया है?

इस विषय पर डॉ स्वामी के भाषण के अंश देखें… http://www.youtube.com/watch?v=z5As3uAc0vU



ऐसा भी नहीं कि अकेले डॉ स्वामी ही बोल रहे हैं, जर्मनी की पत्रिकाओं तथा रुस के अखबारों में भी इस "पवित्र परिवार" के बारे में कई संदिग्ध बातें प्रकाशित होती रही हैं… (नीचे देखिये "द हिन्दू" दिनांक 4 जुलाई 1992 में प्रकाशित रूसी पत्रकार व्लादिमीर रेद्युहिन की अनुवादित रिपोर्ट जिसमें राजीव को KGB से मदद मिलने की बात कही गई है…)


ऐसे न जाने कितने संवेदनशील मुद्दे हैं जिन पर भाजपा-संघ को उग्र प्रदर्शन करना चाहिये था, कोर्ट केस करना चाहिये था, संसद ठप करना था… लेकिन कभी नहीं किया…। "सदाशयता" और "लोकतन्त्र की भावना" के बड़े-बड़े शब्दों के पीछे छिपे बैठे रहे। क्या भाजपा का यह फ़र्ज़ नहीं कि वे कांग्रेस के पैगम्बर पर निगाह रखें, उनके खिलाफ़ सबूत जुटायें, देश से विदेशों से अपने सम्पर्क सूत्रों के बल पर कांग्रेस को परेशान करने वाले मुद्दे खोजकर लायें? या विपक्ष में सिर्फ़ इसलिये बैठे हैं कि कभी न कभी तो जनता कांग्रेस से नाराज़ होगी तो घर बैठे पका-पकाया फ़ल मिल ही जायेगा?   भाजपा वालों को समझना चाहिये कि कांग्रेस या वामपंथियों के साथ "मधुर सम्बन्ध" बनाने की कोशिश करेंगे तो पीठ में छुरा ही खायेंगे…। शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गाँधी की मप्र यात्रा में उसे "राजकीय अतिथि" का दर्जा दिया… बदले में राहुल ने भोपाल में ही संघ की तुलना सिमी से कर डाली। उधर नीतीश बाबू ने भाजपा के साथ मिलकर जमकर सत्ता की मलाई खाई, जब चुनाव की बारी आई तो "नरेन्द्र मोदी को बिहार में नहीं घुसने देंगे" कहकर भाजपा को हड़का दिया… भाजपा वाले भी घिघियाते हुए पिछवाड़े में दुम दबाकर नीतीश की बात मान गये, भाजपा की नीतियाँ क्या नीतीश तय करेंगे कि कौन प्रचार करेगा, कौन नहीं करेगा? पहले भी ऐसा कई बार हो चुका है कि भाजपा की राज्य सरकारों के आश्रय में वामपंथी साहित्यकारों का सम्मान कर दिया जाता है, जबकि वही कथित "गैंगबाज" साहित्यकार हॉल से बाहर आकर संघ और हिन्दुत्व को गाली दे जाते हैं। सुदर्शन जी के बयान के मद्देनज़र पहली बार कांग्रेस से सीधी लड़ाई का माहौल बना था, लेकिन अपना पल्ला झाड़कर संघ और भाजपा के लोग मैदान से भाग लिये… ऐसे कैसे पिलपिले विपक्ष हैं आप? क्या ऐसे होगी विचारधारा की लड़ाई? उधर एमजी वैद्य साहब सोनिया गाँधी को मानहानि का मुकदमा दायर करने की सलाह देकर, पता नहीं अपनी कौन सी पुरानी कुण्ठा निकाल रहे हैं। बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ और अनुभवी लोग संघ-भाजपा में बैठे हैं, क्या मेरे जैसे अदने से व्यक्ति को यह समझाना पड़ेगा कि राजनीति में प्रेम और मधुर सम्बन्ध नहीं बनाया जाता, कांग्रेस तो मीडिया और भ्रष्टों को अपने साथ रखकर बखूबी अपना खेल निर्बाध गति से चला रही है, फ़िर हिन्दुत्ववादी शक्तियों(?) को पाला क्यों मार जाता है? हिन्दुत्व को मजबूत करने के लिये हजारों लोग निस्वार्थ भाव से मैदानों में, स्कूलों में, सार्वजनिक जीवन में, पुस्तकों एवं इंटरनेट पर, संघ से एक भी पैसा लिये बगैर काम कर रहे हैं, कभी उनके मनोबल के बारे में सोचा है?

सुदर्शन जी के इस बयान से भाजपा का ऐसा कौन सा राजनैतिक नुकसान होने वाला था कि ये लोग चुप्पी साध गये? नरेन्द्र मोदी सिर्फ़ अपने साफ़-सुथरे काम के कारण ही प्रसिद्ध नहीं हैं, बल्कि इसलिये भी लोकप्रिय हैं कि वह "कांग्रेस के पैगम्बर" पर सीधा शाब्दिक और मर्मभेदी हमला बोलते हैं, जबकि दिल्ली में विपक्ष के दिग्गज(?) चाय-डिनर पार्टियों में व्यस्त हैं। सामान्य हिन्दूवादी कार्यकर्ता के मन में अब यह रहस्य गहराता जा रहा है कि आखिर भाजपा के नेता कांग्रेस और सोनिया के प्रति इतने "सॉफ़्ट" क्यों होते जा रहे हैं?


(भाग-2 में जारी रहेगा… अगले भाग में इस मुद्दे पर मीडिया की भूमिका एवं सामान्य कार्यकर्ता के मन की पीड़ा…)

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49 comments:

ajit gupta said...

आपकी बात शत प्रतिशत सत्‍य है लेकिन सम्‍पूर्ण हिन्‍दुत्‍व में ही हौसले की कमी है। आज यदि संघ और भाजपा के नेताओं में हौंसले आ जाए तो भारत का नक्‍शा ही कुछ और हो।

महाशक्ति said...

aapke lekh ka purna samrathan hai, jai hind

nitin tyagi said...

सुदर्शन जी की जय

SHIVLOK said...

सुरेश जी
जो व्यक्ति या परिवार या समुदाय या फिर राष्ट्र अपनी सत्य बात को भी पूर्ण एकता साहस , मजबूती के साथ न रख सके उसका भविष्य अंधकारमय होता है|
भयभीत सपनेहू सुख नाही |
सुदर्शन ने सोनिया पर कोई बयान दिया , कांग्रेस ने उसका जवाब देशभर में हुड़दंग मचा कर दिया जवाब में भले ही आर एस एस या भाजपा हुड़दंग ना मचाए परंतु
कुछ मजबूत और सख़्त बयान तो जारी किए ही जा सकते थे , जैसे :-

आडवाणी : कॉंग्रेस्सियों से मेरा विनम्र निवेदन है की हुड़दंग मचाने और बदतमीज़ी करने के बजाए आरोपों का स्पष्ट और तर्कपूर्ण जवाब दें |

गडकरी : मेरा सोनिया जी से विनम्र निवेदन है की पूर्णतया तर्कपूर्ण तरीके से अपने उपर लगे आरोपो का प्रतिकार करे, आरोप असत्य हैं ये देश के सामने स्पष्ट करने के लिए सभी सवालों का साफ साफ जवाब दें |

नरेंद्र मोदी: सोनिया जी से मेरा हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन है की अपने कार्यकर्ताओं से कहें की शब्दों का जवाब शब्दों से दें , कॉंग्रेस्सी जिस तरह से हुड़दंग कर रहे हैं , उससे ऐसा आभास होता है की शायद सुदर्शन जी सही कह रहे हैं , कृपा करके असत्य को तर्कपूर्ण तरीके से असत्य कहिए|

सुषमा स्वराज : आरोप लगाने का अधिकार राहुल ,दिग्विजय या मनीष तिवारी को ही नहीं है | आरोप असत्य हैं इसे आप संपूर्ण तर्कों के साथ देश के सामने रखिए | तर्कपूर्ण बहस के बजाय हुड़दंग से तो ऐसा ही आभास होता है की शायद आरोपसही हैं |
इस तरह की बातों के बजाय भयभीत बन कर प्रस्तुत हो रहे हैं |

avenesh said...

सुरेश जी मै आपसे इतना कहना चाहूँगा कि आरएसएस में सदस्यता जैसी कोई चीज नहीं होती..जो आपने अपने बारे में उपर उल्लेख किया है...

रही बात संघ और भाजपा की तो इस बात पर गौर करियेगा मा. सुदर्शन जी के इस बयांन का नतीजा है कि ४० वर्षों बाद संघ का इतना बड़ा विरोध प्रदर्शन अपने विषय से भटक गया और शीत कालीन सत्र में घोटालों पर चर्चा भी दब कर रह गयी ...सोनिया गाँधी के सन्दर्भ में दिया गया बयान सुदर्शन जी के व्यक्तित्व और कद से मेल नहीं खाता और न ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संस्कृति से |

बयानबाजी करिए लेकिन समय और परिस्थितियों का ध्यान रखना भी जरुरी होता है
और रही बात कांग्रेस के प्रदर्शन की तो इतना ही कहूँगा ..वाह रे कांग्रेस के ..... कभी इतनी जहमत नही उठाई जनता के हित के लिए, घोटाले पे घोटाले हुए, ग़ेम घोटाला 1 लाख करोड़ , आदर्श सोसाइटी घोटाला.. शहीदो को धोखा, देश के सुरक्षा से खिलवाड़, टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला पौने दो लाख करोड़.
प्रिय सोनिया और कांग्रेस के चम्चो कभी इसके विरोध मे भी बोलो.

सम्वेदना के स्वर said...

भाजपा ? हा..हा..हा....इसे गोविदाचार्य जी ने सही नाम दिया है, "भगवा कांग्रेस"! कांगेस माडल पर अर्थ व्यव्स्था के विकास की बात करने वाली भाजपा अप्रासंगिक हो चुकी है।

बताते हैं, बड़ी मुश्किल से आडवानी और जेटली अपने लिये ओबामा के साथ डिनर का आमंत्रण पत्र हासिल कर पाये!

हाँ, ये कहना भी उचित होगा कि :- बिना रणनीति के और बिना देश-काल और पात्र का ख्याल किये सुदर्शन जी ने जुबान खोलकर यही परिचय दिया है कि एक बार फिर तीर-कमान से विदेशी तोपों का मुकाबला करने की मूर्खता हो रही हैं।

Anonymous said...

suresh g namaskar mai apka abhari hun mai 2 mahine se apka lekh padh raha hun, ap humare dil ki bat likhte hen apki bat maine kai logo tak pahuchai he, par pata nahi log sach ka samna karne se kyon darte hen BJP ho ya sang sab ko sach se dar lagta he he, sonia g sachhi hoti to wo ya bhondu maharaj chhila rahe hote par wo chup hen karan wo khush hen ek to wo hum bhartiyon ko apas me ladte dekh ke khush hote hen ek bar b nahi bola kee janch kogi chachai kya he bas majje le rahe hen ki ek buddhe Lion ka koi support nahi kar raha he, par ek din to satya ki jai hogi, bande mataram.

DShekhar said...

कांग्रेस और सीआईए के पास बड़े चेहरों की ब्लेकमेल फ़ाइल मय ठोस सुबूत तैयार है. यहाँ सोनिया पर हमला हुआ, वहां स्टिंग वीडियो, खुलासे, गंभीर आरोप मीडिया पर छा जाएंगे, क्योंकि मीडिया कांग्रेस का भोंपू बन चुका है. 11, अशोक रोड की ईमारत देखते देखते ढह जाएगी. लोग महापाखंडी ---हाईपोक्रेट--- होते है, सामान्य मानवीय कमजोरियों पर भी माफ़ नहीं करेंगे. इसीलिए कोई अमेरिका और उसके मोहरों से पंगा नहीं लेना चाहता. वैसे भाजपा और सभी पार्टियों में भी सीआईए के कुछ मोहरे फिट हैं.

छोटेबड़े मीडिया संस्थानों पर सीआईए का कांग्रेस के माध्यम से पूरा नियंत्रण हो चुका है. दुनिया के कई देशों में अमेरिका ने अपनी सत्ता कायम करने के लिए सरकारें बिठाई, तख्तापलट किए. पाकिस्तान में अमेरिकी ख़ुफ़िया तंत्र खुलेआम ऐसा करता है. भरत में हालाँकि यह सब परदे (लोकतंत्र) की आड़ में किया गया है.

man said...

सादर वन्दे सर ,
एक आम हिन्दुत्व वादी कार्यकर्त्ता के मन पे क्या क्या बीती ,आप की इस पोस्ट ने बखूबी बता दिया , जंहा चमड़ी उधेड़ने का टाइम था ,वंहा पे ये राजनितिक दोगले भीगी बिल्ली बन गए |संघ भी मुखर हो कर सुदर्शन जी का बचाव करने की बजाय अपना पल्ला झाड़ लिया ,जबकि उसको मिला देशव्यापी समर्थन मायने बादल deta अभी भी टाइम हे |

रंजन said...

हा हा..

{-Bhagat singh-} said...

मुझे भी बहुत तकलीफ हुयी संघ के इस तरह पल्ला झाड़ने से.
हालाकि संघ के कार्यकर्ताओ ने कांग्रेसी चमचो की धुनाई भी की
लेकिन शीर्ष नेताओ को इस तरह पल्ला नही झाड़ना चाहिये
जब संघ का आम कार्यकर्ता सुदर्शन जी के साथ खड़ा था और सड़क पर इन कांग्रेसी चमचो को खूब लथेड़ रहा था तो फिर इन बड़े नेताओ को क्यो खेद जताना पड़ा?
कुछ समझ मे नही आया

SHIVLOK said...

सुरेश जी
हमें तो आज कल feedburner से आपके लेख मिलना बंद हो गये|
क्या हमारा subscription हटा दिया गया

abhishek said...

mai apako salah deta hu ki ap ek bar fir se sangh ka dhikarik bayan padhe,usame kahi jigr nahi hai ki sangh ne sudrashan ji ko galat bataya hai,usame kaha ki bayan ke bad ki gatanaye "durbhagy purn" hai,our ye bhi sahi hai ki sangh me kisi bhi star par es vishay ko lekar charcha nahi huyi hai.
ab aate hai vaidhay ji ke bayan par,unhoune kaha ki kisi ko deshdrohi kahana our kisi ke janm ke charcha sarvajanik rup se karana uchit nahi hai congeressi agar ahat huve hai to case dayar kariye,soniya ji case dayar karo.
ab sahab esa hai jo bate,swami ya ap kah rahe the use koyi nahi janata tha,lekin ab sara bharat janata hai,maine apake hindi me likhe anuvad ki copy kara kar apane dosto me our anek svyamsevako me bati hai,apake anuvad ko sangh ke svyamsevak ek dusare ko mail kar rahe hai yaha tak adhikari bhi,ek bar kes khulega to soniya gandhi ko bhi javab dena padega,jabaki abhi tak to case hi dayar nahi hone diya ja raha tha.
fir is tarah lad kar desh me grih yudh jaisi sthiti banana uchit nahi hai,jarurat hai sonia ki vastvikta ko janata ke samane lane ki,jo nyayalay me jarur sabit hogi,agar nyayadhish bike nahi to.......at: pujaniy sudrshan ji ne halahal pikar bhi deshdrohiyo ke marm par prahar kiya hai,na sangh ne unhe chhoda hai na svyamsevako ne,unaka ek ek shabd bahut napa tula hota hai,jisaki na keval sangh balki bahar bhi bahut paith hai,vishavs rakhiye jo kam swami ji our aap jaise aneko lekhak na kar paye vo sudrshan ji ke ek vktvy se ho gaya hai,matalab janat jaan gayi hai,mai itana hi kahunga...BAT NIKALEGI TO DUR TALAG JAYEGI........JAY SHREE RAM...

JANARDAN MISHRA said...

SURESH JI
abto sochna padega ki hinduo ke vichar dhara ke sath kaunsi party aur kaunsa sangthan hai, BJP aur RSS ab apne mul rah se bhatak gye hai. aur lagta hai ab in dono ko hinduo se koi lena dena nahi hai. ab ye log matra rajniti me bane rahana chahate hai, aur malai khana chahte hai, RSS ki lokpriyta dhire dhire ghatti ja rahi hai, ishka mukhhya karan yhihai RSS apneaap ko BJP ka BAP ( PITA ) kahta hai. lekin bap hi namard ho to putra kaisha hoga sudarshanji ke sath BJP aur RSS ko khada rahana chahiye tha lekin inlogo ne to beshrmi ki had kardi...... INKE BAREME KUCH LIKHNE ME BHI SHARM AARHI HAI

संजय बेंगाणी said...

हिन्दुओं की सबसे बड़ी कमी रही है चतुरता (कुछ हद तक धूर्तता) की. यह बहुत बड़ी कमी है. इस दृष्टी से सुदरशनजी का बयान गलत समय पर आया. भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मैडम मोयनो घिरने के बजाय सहानुभुति ले उड़ी.

संगठन में हर बात कहने के लिए उसके अनुरूप व्यक्ति का चुनाव होता है. मुझे लगता है यह बयान सुदर्शनजी द्वारा नहीं आना चाहिए था.

दुसरी ओर हमारे लिए शर्म की बात है कि चाटुकार भारतीयों के कारण एक विदेशी व्यक्ति हमारी भाग्यविधाता है. मगर मुकाबला चतुराई से करना है.

राहुल पंडित said...

इनसे यह आशा नहीं थी.....अविश्वसनीय परन्तु सच...

Suresh Chiplunkar said...

@ abhishek - Please see the link which says Bhaiyya ji Joshi apologized for sudershan statement...

http://news.in.msn.com/national/article.aspx?ucpg=2&cp-documentid=4570906

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@ Ranjan - पता नहीं चला कि आप किस बात से इतना खुश हुए…

Suresh Chiplunkar said...

@ शिवलोक जी - मैं ऐसी गुस्ताखी कभी नहीं कर सकता, Feedburner मे ही कोई तकनीकी समस्या होगी…

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

यह दोगलापन है वर्तमान संघ परिवार का ……….. और संघ मे एक कहावत भी है एक रिटायर प्रचारक और वेश्या का बुढापा हमेशा कष्टकर होता है

abhishek said...

हो सकता है मेरी जानकारी अधुरी हो पर मेने जो टिवी पर देखा वैसा बताया.
देखिये संघ कोयी राजनितिक पार्टी नही है,कोन्ग्रेस हमेशा से चाहती थी कि संघ राजनिति में आये,खुद अपने नाम से,लेकिन सत्ता को कभि साध्य नहि माना अपनी प्रम्प्रा में.कोन्गेर्स हमारी दुश्मन नही है,दुश्मन होती तो मेरे जैसे कार्य्कर्ता शुध्द कोन्गेर्सि घरों से कैसे तैयार होते??आप माने या ना माने कोन्गेर्सि भी हिन्दु होते है कट्टर हिन्दु,पर उन्कि राजनिति गलत है देह विघातक है,और अधिकांश कोन्ग्रेसियो को पता नहि है कोन्ग्रेस और कोन्गेर्स{आई} का फ़्रक,ना उन्हें इन सब चिजॊ की जानकारी है,वे तो आज भी कोन्गेस को वो ही पटेल-गाँधी वाली कोन्गेस्स समझते है उनके इस विश्वास को ही तोडना है.पुजनिय
सुदर्शन जी ने निश्चित रुप से सही कहा था,और स्वयंसेवक और कार्यक्र्ता होने के नाते में उसका सम्र्थन भी करता हुँ,में एसे किसि अधिकारी को भी नही जानता जिसने बातचित में कहा हो की यह गलत है,पर कोन्गेर्स ने बडी सफ़ायी से उस बयान के "अवैध" वाले हिस्से को उथाया था,बाकि को गौण कर दिया,भारत में कोयी भी महिला कितनी भी दुष्ट क्यो ना हो सहानुभुती रखती है,जनता ये मानने को तैयार नही है कि भोले से दिखने वाले चेहरे कितने खुन्खार है,अब जब केस दायर होगा,मैं कामना करता हुँ पुजनिय सुद्र्शन जी अपने विचार न्यायालय में रखेंगे,तो क्या जनता को असलियत पता नही चलेगी??जैसा कि उन्हौने मुझे मेरे एक प्रश्न के उत्तर में जयपुर के अभियण्ता संगम में बताया था कि अब आसुरी शक्तियो पर आक्रमक हो जाने मे कोयी अडचन नही है,यह बयान भी मुझे उस कडी का ही लगता है,इस लिये आप निश्चित रहें संघ पुजनिय सुद्र्शन जी के साथ है,बयान से पीछॆ हटना या आगे बडना समय पर निर्भर करता है,मुख्य बात है अब सभि स्वयंसेवको और सहनुभुती रखने वालो को आपके अनुवाद के बारे में पता चल गया है,और वो इसे हर जगह फ़ोर्वर्ड कर रहे है,कुछ महिनो में लोग जानने लग जायेंगे.
राजनिति मे कोयी रण्छोड बन भी जाये तो भी उसे कायर नही समझना चहिये,कोन्गेस से नहि देश विघतियो से लडायी है अपनी,आज नही तो कल ये ही कोन्गेस उलटी मार कर हिन्दु वादी बन जायेगी....................................

SHIVLOK said...

@ संजय बेंगानी

हिन्दुओं की सबसे बड़ी कमी रही है चतुरता (कुछ हद तक धूर्तता) की. यह बहुत बड़ी कमी है. इस दृष्टी से सुदरशनजी का बयान गलत समय पर आया. भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मैडम मोयनो घिरने के बजाय सहानुभुति ले उड़ी.

इसी चतुरता (कुछ हद तक धूर्तता) की
कमी शायद सुभाष बोश और सरदार पटेल में थी
और

इसी चतुरता (कुछ हद तक धूर्तता) की
अधिकता शायद गाँधी और नेहरू में थी

इसी kami aur adhikata की पीड़ा आज मेरा और आपका देश भोग रहा है

त्यागी said...

bahut stiik aur sahi baat hai. sangh ko aur bjp ko is aur jarur sochna hoga. ]
www.parshuram27@blogspot.com

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

हिंदुत्व को जिंतना नुकसान सेकुलर और गाँधी परिवार पहुंचा रहे हैं उसमे थोडा बहुत संघ और भाजपा का भी साथ है. जैसा की हम देख रहे हैं, संघ और भाजपा दोनों ही समझौतावादी रवैया अपनाते रहे हैं.

वैसे आम हिन्दू भी कम दोषी नहीं है, अपने क्षुद्र फायदे के लिए रोज हिन्दुओं का अपमान सहता रहता है.

Anonymous said...

Suresh ji
Ye Pahali bar to hua naheen....
Ramjanam bhoomi ke mamale men bhee ye hee to hua tha.

Par aapke lekh se koi sabak lega....kaha naheen ja sakata.

Pratul Vasistha said...

..

सत्य अन्वेषक सुरेश जी,
मैं निरंतर आपके द्वारा दिए जा रहे साक्ष्यों को मानस में स्टोर कर रहा हूँ. आक्रोश को उबाल आने की हद तक ले जाना चाहता हूँ.
'साच को आंच नहीं' यह कहावत मैंने इस ब्लॉग पर ही चरितार्थ होते देखी है.
मैं जान गया हूँ कि
— निर्भीकता वहीं होती है जहाँ सत्य खड़ा होता है.
— कायरता को कोड़े वही मार सकता है जो निर्लिप्त होता है.
— चाटुकारों को नंगा करने का साहस किसी भी तरह के लोभ में बँधा व्यक्ति नहीं कर सकता.

..

प्रतुल वशिष्ठ said...

..

अजित गुप्ता जी कहती हैं :
"सम्‍पूर्ण हिन्‍दुत्‍व में ही हौसले की कमी है।..."
@ बाद में आप कहते हैं कि "आज यदि संघ और भाजपा के नेताओं में हौंसले आ जाए तो भारत का नक्‍शा ही कुछ और हो।"
मैं कहता हूँ — राजनीति में आकर साफ़-सुथरी छवि के लोग भी अपनी छवि गदली कर लेते हैं. कोई विरला ही होता है जो राजनीति के घाघों के मंसूबों को जानकार दूरी बनाकर रख पाए.
डॉ. सुनीता नारायण ने भी इस बार ओबामा के आगमन पर मनमोहनी-भोज में संतुलित स्वर में स्वागत गीत गाये. ........... मुझे आश्चर्य हुआ. ........ खाए-पिये का असर जिह्वा पर आता ही है.

..

संजय बेंगाणी said...

सरदार पटेल अगर चतूर या मेरे शब्दों में "एथिकल" धूर्त न होते तो 565 रजवाड़े एक नहीं होते. सुभाष साहसी नायक थे, मगर नेहरू की धूर्तता से मात खा गए. मैं फिर से कहता हूँ, देशभक्तों में चाणक्य की "एथिकल" धूर्तता होनी ही चाहिए.

***
कांग्रेस ने वामपंथी रूख अपनाया, उसके वोटर उसके साथ रहे. वह समाजवादी बनी उसकी वोटर उसके साथ थे. उसने पल्टी मार पूँजीवादी बाना पहना, उसके वोटर उसके साथ थे. क्या भाजपा के वोटर उसके साथ रहते?

प्रतुल वशिष्ठ said...

..

शिवलोक जी,
आप कहते हैं कि "भाजपा द्वारा शास्त्रार्थ को आमंत्रण दिया जाता या शांतिपूर्वक प्रतिक्रिया देने को कहा जाता."
@ आपने धूर्त नीति के बारे में सुना होगा. मैंने नहीं सुना था लेकिन अब बचपन के एक प्रकरण से अनुमान लगाना सहज हो गया है.
'जब कोई शरारती दबंग बालक खेल में हारने लगता था तो वह खेल बिगाड़ने लगता था,
न खेल का परिणाम आयेगा न ही उसे जिहालत झेलनी होगी. यह बाल-धूर्तता तो सहनीय है. किन्तु जब
किसी पार्टी के उच्चस्थ नेताओं पर भ्रष्ट-आचरण के रिकोर्ड आरोप लगे हों तो वह आप जनता के बीच अपने उदघाटित सत्यों पर से ध्यान हटाने के लिये ताबड़-तोड़ डांस (धरने-प्रदर्शन) करवाएगी ही,
सख्त बयान और हुडदंग न मचाने के आदेश देकर शास्त्रार्थ को आमंत्रण देने से बात नहीं बनती.

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अवधेश पाण्डेय said...

सुदर्शन जी की टिप्पणी कही से सन्घ की मर्यादा के अनुकूल नही थी, सन्घ ने बयान पर खेद प्रकट कर अपने सभी कार्यकर्ताओ को सन्देश दे दिया है की सन्गठन के उपर कोइ नही।
अगर सन्घ मुद्दे को तूल देकर लडाई लडता तो कान्ग्रेस मुख्य विषय से जनता का ध्यान हटाने मे सफल हो जाती और बहुत हद तक वह सफल भी हुई। हिन्दू आतन्क, कश्मीर जैसी मुद्दे गौड हो गये। इतना कुछ करने के बाद भी कान्ग्रेस मूल मुद्दे भ्रष्टाचार से ध्यान नही हटा पाई।
राष्ट्र का नागरिक होने के नाते मै भी सुरेश जी से सहमत हू कि सोनिया की सच्चाई सामने आनी ही चाहिये लेकिन सुदर्शन जी का बयान देश, काल और परिस्थिति के अनुकूल नही था और सन्घ की रणनीति के अनुसार देश भर मे पहली बार आयोजित बेहद सफल धरने का अपेछित लाभ नही मिल पाया। 2जी, सी डब्ल्यू जी, आदर्श घोटाले, कश्मीर मुद्दे, हिन्दू आतन्क के मुद्दे से जूझ रही सरकार को सुदर्शन जी ने आक्सीजन दे दी और कान्ग्रेस नेत्रीत्व ने उसका लाभ भी लेना चाहा।
भारत माता की जय

man said...

वडनगर प्रख्यात गायिका लता मंगेशकर ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्यारा भाई और महान नेता करार दिया है। उन्होंने पहले ताना-रीरी पुरस्कार सम्मान के लिए भेजे संदेश में यह बात कही। मंगेशकर का संदेश स्वर्णिम तानारीरी महोत्सव-2010 में सोमवार को यहां दिखाया गया। शास्त्रीय संगीत मर्मज्ञ जुड़वां बहन ताना-रीरी की याद में राज्य सरकार ने ताना-रीरी संगीत सम्मान देने की शुरुआत की है।

यह पहला पुरस्कार लता-ऊषा मंगेश्कर को दिया है। सोमवार को सम्मान के ऐलान के साथ ही पुस्कार प्रदान भी किया गया। ऊषा मंगेशकर ने यहां मुख्यमंत्री के हाथ पुरस्कार ग्रहण किया। लता मंगेश्कर किसी कारण से पुरस्कार लेने नहीं आ सकीं थी। उन्होंने समारोह के लिए अपना संदेश भेजा था।

महान गायिका ने पुरस्कार लेने न पहुंचने के लिए क्षमा मांगते हुए ताना-रीरी के नाम पर पुरस्कार शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री को बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि ताना-रीरी वडनगर की महान गायिकाएं थीं, आप भी वहीं के हैं, मैंने सुना है। नरेंद्रभाई मैं आपकी इज्जत करती हूं। मैं आपको महान नेता समझती हूं। मेरे दिल आपके लिए उतना ही प्यार और इज्जत है जितना एक बहन को अपने भाई के लिए होती है।

मोदी से मिले लॉर्ड मेघनाद

अहमदाबाद गुजरात सरकार व क्लाइमेट फाइनेंस क्षेत्र की विशेषज्ञ संस्थाओं में शुमार ब्रिटेन की आइडिया द्बस्रलोबल संस्था मिल कर काम करने के लिए सहमत हो गए हैं। ब्रिटेन के लॉर्ड मेघनाद देसाई ने सोमवार को यहां मुख्यमंत्री नरे3द्र मोदी से भेंट की। इस दौरान गुजरात में क्लाइमेट चेंज संबंधी चुनौतियों पर परस्पर सहयोग से काम करने का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। राज्य सरकार ने विभिन्न प्रोजेक्ट में कार्बन क्रेडिट प्राप्त करने तथा मानव संसाधन विकास हेतु प्रोफेशनल एजुकेशन क्षेत्र में काम करने की इच्छा जताई है।

प्रतुल वशिष्ठ said...

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अवनीश जी,
आप कहते हैं : "...... ४० वर्षों बाद संघ का इतना बड़ा विरोध प्रदर्शन अपने विषय से भटक गया और शीत कालीन सत्र में घोटालों पर चर्चा भी दब कर रह गयी ...सोनिया गाँधी के सन्दर्भ में दिया गया बयान सुदर्शन जी के व्यक्तित्व और कद से मेल नहीं खाता और न ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संस्कृति से |"
@ बर्दाश्त की भी एक सीमा होती है. लावा भूधर को फाड़कर कभी-न-कभी बाहर आता ही है.
— जो पार्टी संवेदनशील मुद्दों के प्रति घोर उपेक्षा रखती हो,
— और नैतिक चरित्र, सांस्कृतिक मूल्यों को समाप्त करने पर तुली हो,
— राष्ट्रीय मुद्दों के प्रति समझोतावादी रहती हो.
— जो अपना कलुषित अतीत छिपाती हो.
— जो अपने आदर्शों के खोखले गीत गव्वाती हो.
आपने सुने होंगे देश-प्रेम के नगमे जो कपोत-छोडू नेता के नाम से अटे पड़े हैं. और उनके कारनामों के दबे-छिपे सच्चाई वाले पन्ने संग्राहलयों में भी नहीं मिलते.
और अब भी वह क्रम जारी है. क्या सुदर्शन जी ये बयान तब देते जब उनके दशन टूट जाते या फिर सत्य अपने दशन तोड़ लेता?
या फिर उनके सुर में सुर न मिलता देख संघ अपनी संस्कृति के दर्शन की 'आजादी के समय वाले दर्शन' से तुलना करता?
कहते हैं आजादी के समय आरआरएस ने स्वतन्त्रता में कोई योगदान नहीं दिया, अपितु अंग्रेजों का ही साथ दिया.
कोई एक शहीद का नाम बतायें जो आर आर एस का रहा हो. मेरी जानकारी कुछ कम है.
हम जानते हैं कि आज के लोगों से ही पार्टियाँ बनी हैं, लेकिन पार्टी का भी एक संस्कार होता है जो सत्कार्यों के अभ्यास से ही सुधरता है.

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प्रतुल वशिष्ठ said...

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संवेदना के स्वर वाले सलिल और आलोक जी,
गोविन्दाचार्य की तरह मैं भी नामकरण का शौकीन रहा हूँ'
कुत्ता समाज पर आरोपित कांग्रेस और भाजपा पर लिखी मेरी कुछ कथाएँ हैं, जिनमें काफी कुछ उदघाटित है, अभी केवल नाम बताना सही होगा.
[१] काट के रेस पार्टी ........... दूसरा नाम काटो-दौड़ो पार्टी ............ ?
[२] भौं भौं पा ..................... दूसरा नाम भौंको-भौंको पार्टी .............. ?
[३] बहुस्वान समाज पार्टी ................ ?
[४] स्वान दल ................. ?
[५] मारो काटो पार्टी ............. दूसरा नाम माकपा
[६] भारतीय भागमभाग पार्टी .............. ?
............... कृपया बतायें कौन-सी पार्टी किसकी याद दिलाती है?

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Kunal S said...

सुदर्शन जी की टिप्पणी कही से सन्घ की मर्यादा के अनुकूल नही थी, सन्घ ने बयान पर खेद प्रकट कर अपने सभी कार्यकर्ताओ को सन्देश दे दिया है की सन्गठन के उपर कोइ नही।
अगर सन्घ मुद्दे को तूल देकर लडाई लडता तो कान्ग्रेस मुख्य विषय से जनता का ध्यान हटाने मे सफल हो जाती और बहुत हद तक वह सफल भी हुई। हिन्दू आतन्क, कश्मीर जैसी मुद्दे गौड हो गये। इतना कुछ करने के बाद भी कान्ग्रेस मूल मुद्दे भ्रष्टाचार से ध्यान नही हटा पाई।
राष्ट्र का नागरिक होने के नाते मै भी सुरेश जी से सहमत हू कि सोनिया की सच्चाई सामने आनी ही चाहिये लेकिन सुदर्शन जी का बयान देश, काल और परिस्थिति के अनुकूल नही था और सन्घ की रणनीति के अनुसार देश भर मे पहली बार आयोजित बेहद सफल धरने का अपेछित लाभ नही मिल पाया। 2जी, सी डब्ल्यू जी, आदर्श घोटाले, कश्मीर मुद्दे, हिन्दू आतन्क के मुद्दे से जूझ रही सरकार को सुदर्शन जी ने आक्सीजन दे दी और कान्ग्रेस नेत्रीत्व ने उसका लाभ भी लेना चाहा।
भारत माता की जय

man said...

http://jaishariram-man.blogspot.com/2010/11/blog-post_16.html

रंजना said...

आज हम भारतीयों के लिए सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है की हमारे पास कांग्रेस (भ्रष्टाचार के जनक और पोषक) का कोई विकल्प नहीं...

pappu said...

ham aur aap kaun hote hai videshi bolne vale ...ye purana mamla ho gaya ....aur janta ne accept kia hai sonia gandhi ko ....aur mere hisab se o aaj ki best leader hai ...aur congress bhi jaise jairam ramesh,pranab babu,chindbram....

Shailendra said...

सुरेश जी तीन बातें समझ में नहीं आयी -
पहली बात - कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से सोनिया गाँधी के बारे में सूचना क्यों मांगी गयी जबकि उस समय उनका नाम अंटोनियो माईनो था
दूसरी बात - आपके एक लेख "सोनिया गाँधी को आप कितना जानते हैं ? (भाग-१) "
में अपने एक जगह अनुवाद किया है कि
"जाहिर है कि एक तो सोनिया गाँधी तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के अहसानों के तले दबना नहीं चाहती थीं" और अपने ये बात १९८५ के समय के परिप्रेक्ष्य में लिखी है जबकि शायद वो उस समय गृहमंत्री थे क्या यह एक लेखकीय त्रुटी है या अनुवाद के समय ऐसा हुआ है
तीसरी बात - आपके एक लेख "सोनिया गाँधी को आप कितना जानते हैं ? (भाग-२)"
में अपने एक जगह अनुवाद किया है कि
"जब सारे भारतीय पायलट अपनी मातृभूमि की सेवा में लगे थे तब सोनिया अपने पति और दोनों बच्चों के साथ इटली की सुरम्य वादियों में थीं" और अपने ये बात १९७१ के समय के परिप्रेक्ष्य में लिखी है जबकि उस समय प्रियंका का जन्म भी नहीं हुआ था क्या यह भी एक लेखकीय त्रुटी है या अनुवाद के समय ऐसा हुआ है
-शैलेन्द्र कुमार

Suresh Chiplunkar said...

@ भाई शैलेन्द्र जी,
1) यह गलतियाँ मूल प्रूफ़ में भी हैं, चूंकि मैंने सिर्फ़ अनुवाद किया है इसलिये जस का तस रखने की कोशिश की है।
2) कैम्ब्रिज विवि से सम्बन्धित सारे दस्तावेज़ डॉ स्वामी के पास हैं।
3) आपने डॉ स्वामी वाले सभी वीडियो देखे ही होंगे, ये सभी बातें वे काफ़ी समय से सार्वजनिक रुप से कहते आ रहे हैं परन्तु आज तक कभी सोनिया ने उन पर मानहानि का मुकदमा दायर नहीं किया है…
===========

@ pappu - ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha

Neeraj नीरज نیرج said...

बीजेपी और संघ का सुदर्शन के बयान से किनारा आज उस डील की सार्वजनिक घोषणा है जो बृजेश मिश्रा के हवाले से वाजपेयी औऱ सोनिया में हुई थी। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने अपनी किताब में इसका ज़िक्र किया है। बृजेश आज भी पीएमओ में रसूख रखते हैं और यदा-कदा अपनी विशेष राय मनमोहन को दे आते हैं।
राउल विंची को अमेरिका में बचाने का काम भी बृजेश के करकमलों से ही हुआ था। ज़ाहिर है कि वाजपेयी की भी सहमति ली गई होगी। यह ऊंचे दर्जे पर खेला जाने वाला खेल है जहां संघ विचारधारा की परवाह कौन करता है। वो भी तब जब बीजेपी में कारोबारियों का बोलबाला हो।
सुदर्शन का बयान ग़लत वक़्त पर आया है। सुब्रमण्यम स्वामी पहले पूरी ताक़त लगा चुके हैं और कोर्ट द्वारा खारिज किए जा चुके है। जब कोई ठोस प्रमाण है नहीं तो जनता के बीच ऐसी बातें उठाना अपनी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कराना है।
सियासी गलियारों में सोनिया गांधी की असलियत पर कई संदेह खड़े होते रहे हैं लेकिन कोई भी इसकी तस्दीक नहीं करता। वजह साफ़ है - ऐसा पालीटिकल स्टंट के लिए ठीक हो सकता है। कानूनी पचड़ों में पड़ना कोई नहीं चाहता।

man said...

सुबर्ह्मन्यम की कोशीश देखिये ............
सुप्रीम कोर्ट ने 2 जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने पूछा है कि इस घोटाले में केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा को लेकर उठने वाले सवालों का प्रधानमंत्री जवाब क्‍यों नहीं देते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस घोटाले से जुड़ी जनता पार्टी के अध्‍यक्ष सुब्रमण्यम स्‍वामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सवाल उठाया। स्‍वामी ने अदालत में याचिका दायर कर राजा के खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत देने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि प्रधानमंत्री की 'चुप्‍पी और निष्क्रियता' से हम हैरान-परेशान हैं।

स्वामी ने 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर 2008 में ही प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी लेकिन प्रधानमंत्री इसका कोई जवाब नहीं दिया। कोर्ट ने इस पर कहा कि आखिर प्रधानमंत्री ने स्‍वामी की चिट्ठी का जवाब क्‍यों नहीं दिया। अदालत ने कहा कि सरकार को राजा के खिलाफ लग रहे सभी आरोपों का जवाब देना चाहिए। स्‍वामी की याचिका में सरकारी महकमे में हो रही 'गड़बड़ी' के कई उदाहरण पेश किए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीएम ने इससे पहले राजा के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी क्‍यों नहीं दी।

याचिकाकर्ता स्‍वामी ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्‍पणी का स्‍वागत करते हुए कहा कि पीएम को अब यह बताना चाहिए कि राजा के खिलाफ कार्रवाई करने में देरी क्‍यों हो रही है। स्‍वामी के मुताबिक उन्‍होंने प्रधानमंत्री को कई पत्र लिखे लेकिन उन्‍होंने आखिर इनका जवाब क्‍यों नहीं दिया।

इससे पहले, 1.76 लाख करोड़ रुपये के गड़बड़झाला को लेकर कैग की रिपोर्ट आज संसद में पेश कर दी गई जिसमें राजा पर अंगुली उठाई गई है। इसमें प्रधानमंत्री को क्‍लीन चिट देते हुए कहा गया है कि राजा ने प्रधानमंत्री की सलाह को दरकिनार करते हुए स्‍पेक्‍ट्रम आवंटित किए। ऐसे में सरकार को घेरने के लिए विपक्षी दलों के हाथ 'ठोस हथियार' लग गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्‍यूरो (सीबीआई) भी राजा से पूछताछ की तैयारी में हैं।

संसद में हंगामा
राजा के मंत्री पद के इस्तीफे के बाद भी सरकार और विपक्षी दलों में टकराव जारी है। 2 जी स्‍पेक्‍ट्रम आवंटन, आदर्श सोसाइटी और कॉमनवेल्‍थ घोटाले की जांच जेपीसी से कराए जाने की मांग को लेकर विपक्षी दल के सदस्‍यों ने संसद के दोनों सदनों में मंगलवार को भी जमकर हंगामा किया। इसके बाद लोकसभा और राज्‍यसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्‍थगित कर दी गई। संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने के लिए वित्‍त मंत्री प्रणब मुखर्जी की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का भी कोई नतीजा नहीं निकला। विपक्षी दलों ने स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले की जांच का मामला सीबीआई को सौंपने की सरकार की पेशकश ठुकरा दी और जेपीसी गठित किए जाने की मांग पर अड़े रहे। ऐसी स्थिति में अब इस मामले में पीएम की दखल से ही कोई समाधान निकलने की गुंजाइश है।

राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही आज शुरू होते ही भाजपा एवं सहयोगी दलों तथा सपा, बसपा और अन्नाद्रमुक के सदस्य अध्यक्ष के आसन के पास आकर भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिये जेपीसी गठित करने की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे। इस बीच, कांग्रेस के सदस्य भी उन अखबारों की प्रतियां लहराते हुये हंगामा करने लगे जिनमें कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री बी एस येदियुरप्‍पा की ओर से अपने बेटों को कथित तौर पर जमीन आवंटन की खबरें छपी थीं। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने बार बार सदस्यों से प्रश्न काल चलने देने का अनुरोध किया लेकिन उनकी बात का कोई असर नहीं हुआ। राज्यसभा में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य सदन के बीचोंबीच आकर नारेबाजी करने लगे। सभापति हामिद अंसारी ने दोनों पक्षों के सदस्यों को वापस जाकर सीट पर बैठने के लिये कहा पर सत्ता और विपक्ष दोनों के सांसद अड़े रहे। जब सांसद चुप नहीं हुये तो अंसारी ने राज्यसभा की कार्यवाही पहले 12 बजे फिर दो बजे तक के लिये स्थगित कर दी। 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी संयुक्‍त संसदीय जांच समिति (जेपीसी) बनाने की मांग पर विपक्षी सांसदों का हंगामा जारी रहा।

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

आदरनीय सुरेश भाई अब तो पीड़ा बढती ही जा रही है| जब कोई अपना ही शत्रु से जा मिले तो पीड़ा तो होती ही है| किन्तु एक आशा है कि हम फिर से उठ खड़े होंगे और अपने शत्रुओं को शांत करेंगे साथ ही अपने देश का गौरव बढ़ाएंगे हम प्रयासरत हैं, और मरते दम तक हम यह काम करते रहेंगे| आपका मार्गदर्शन मिलता रहे तो हम एक दिन अपने लक्ष्य को अवश्य ही पा लेंगे|

धन्यवाद|

उम्दा सोच said...

श्री कृष्ण ने श्रीमदभागवत में कहा है "संघे शक्ति कलयुगे"... दुर्भाग्यपूर्ण है की संघ संगठित नहीं है!

kumaram said...

A Church is not a
Tample for saints,
But rather a hospital
For sinners.

धर्म स्थलों में तोड़फोड़ संतों का अपमान करना भारत की संस्कृति नही

उड़ीसा,मध्य प्रदेश,कर्नाटक एंव देश के विभिन्न हिस्सों में ईसाईयों पर हो रहे अत्याचार हमले और चर्चों को जलाये जाने की घटना दुखद है।

देश मे चन्द लोग धर्म के ठेकेदार राजनैतिक लाभ के लिये लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काकर हमारे देश की भोली-भाली जनता,नौजवान,युवा वर्ग को मानवता,भाईचारा, आपसी सद्भाव, देश प्रेम की शिक्षा, अच्छे आदर्श की मजबूत नीव डालने के बजाये। हमारे देश की नीव, हमारे देश के मजबूत खम्बे,हमारे देश का गौरव, भारत देश का भविष्य हमारे नौजवान,युवा वर्ग के हाथों से जघन्य अपराध करवा कर पाप के भागी बना कर भारत देश की नीव को कमजोर खोखला कर रहे हैं।और देश में फूट डालने का काम कर रहे है। कहावत है:-जिस घर देश मे फूट पड़ जाती है वो घर बर्बाद हो जाता है। हम सब जानते है बुजुर्गों ने भी कहा है जैसा हम बीज बोते है वैसा हम काटते हैं तात्पर्य जैसी करनी वैसी भरनी। हर बुरे और अच्छे कार्य का प्रतिफल इसी मनुष्य योनी मे मिलता है। और पीढियों तक भुगतना पड़ता है।हमारी आने वाली पीढी ये न कहे कि हमारे बाप दादों ने अंगूर खाये थे दांत हमारे खट्टे हुऐ। हम सब देखते और जानते हैं इतिहास भी गवाह है।


ईसाई समाज यीशु मसीह की आज्ञा जैसे कि:- अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करना आदर करना, हत्या न करना, चोरी न करना, किसी के विरुद्ध झूठी गवाही न देना किसी भी प्रकार का लोभलालच न करना,झूठ न बोलना,व्यभिचार न करना,मनुष्य से अपने समान प्रेम रखना,झगड़ा न करना ईर्ष्या न करना आदि हैं।
भूखे को रोटी भोजन देना, नन्गे को कपड़ा पहनाना, गरीबों लाचारों की मदद करना, बीमारों की सेवा और उनके लिये प्रार्थना करना,बन्दीग्रह मे कैदियों की सुधी लेना, अनाथों और विधवाओं पर अन्याय नही करना इनकी मदद करना, मनुष्य का हृदय ईश्वर का मंदिर है ईश्वर मनुष्य के हृदय मे वास करता है यही मानव सेवा है जिसे हम मानवता या मानव धर्म कहते हैं।

ईश्वर की सेवा है। जो कंगालों पर अनुग्रह करता है वो ईश्वर परमात्मा को उधार कर्ज देता है। ईश्वर के इन्ही आदर्शों का पालन करते हुऐ भारत देश के मूल निवासी मसीही समाज अपने जीवन का निर्वाहन कर रहा है।

मै आपसे यह पूछना चाहता हंू कि क्या ये गलत काम है अगर ये गलत काम है तो फिर अच्छे काम क्या हैं। जो चन्द लोग अपने राजनैतिक लाभ के लिये करवा रहे हैं:- गुरुओं को अपमानित करना उनकी हत्या करना,भोले भाले लोगों की हत्या, लोगों के घरो मे आग लगाना और बेघर करना, धार्मिक स्थानो को आग लगा कर उजाड़ना, साघू संतों पर अण्डे फेकना, समाज को अच्छी शिक्षा देने वाले पूज्यनीय धर्म गुरुओं, ईश्वर के दूतों को जूते चप्पल से मारना लात घूसों से मारते हुऐ अपमानित करना,क्या ये ही इन लोगों का धर्म एंव धर्म की परिभषा है क्या ये ही हमारे भारत देश की संस्कृति और सभ्यता है

समाज के सभी वर्गों के लोंगों और देश का भविष्य नौजवान युवा वर्ग से यह आग्रह है कि ये चन्द लोग मानवता, भाईचारा, आपसी सद्भाव को छोड़ कर अपने घृणित मंसूबे पूरे करवाते आ रहे हैं। और देश के लोंगों को युवा वर्ग को पाप के गर्त में ढकेलने वाले धर्म की गलत शिक्षा देने वाले ऐसे लोगों से हमें एंव भारत देश के प्रत्येक व्यक्ति को सावधान रहने की जरुरत है। भारत देश में मानवता,आपसी सद्भाव भाई-चारा एंव एकता बनाये रखने मे अपना अमिट सहयोग प्रदान करना प्रत्येक भारतीय व्यक्ति का कर्तव्य है।

संजय बेंगाणी said...

बन्धूगण कृष्ण को रणछोड़ के रूप में भी देखने की आदत डाले.... :)

sanjay said...

मैं जान गया हूँ कि
— निर्भीकता वहीं होती है जहाँ सत्य खड़ा होता है.
— कायरता को कोड़े वही मार सकता है जो निर्लिप्त होता है.
— चाटुकारों को नंगा करने का साहस किसी भी तरह के लोभ में बँधा व्यक्ति नहीं कर सकता.

..saanch ko aanch kya.......
man gaye guruji

pranam.

abhishek1502 said...

सुदर्शन जी के साथ आम स्वयंसेवक है और ये बात काग्रेसियो को उन की उद्दंडता पर सबक सिखा कर सन्देश भी दिया फिर सफाई देने की क्या जरुरत थी ???????????

Amit said...

Pranaam Sir,

Shaq to mujhe bhi hota hai ki etna sab chal raha hai. ek se badh kar ek mudde hain BJP ke pass lekin fir bhi ye log chup hain. Kahin aisa to nahin ki agle Chunaw main Congress ke sath gathbandhan ki Sarkar banane ka sapna dekh rahe ho. Etne sare ghotalon ke bad to BJP ko sarkar hi gira deni chahiye thi. Lekin ye log etne chup hain ki jaise kuch ho hi nahin raha ho. BJP ko samajhna chahiye ki agar unko sarkar main aana hai to chuppi se kam nahin chalega. Balki ek strong Vipaksh ki bhoomika unko nibhani hogi. Janta ke liye Sarkar se jawab mangne honge. BJP ko samajhna hoga ki vo congress se badi party hai jisko sirf ek parivar nahin chalata. Aur na hi BJP ko kuch Virasat main mila hai. Jo kuch bhi BJP ke pass hai vo Janta ka vishawash hi hai jisko kho kar enke hath kuch nahin lagne wala.

jagdishcandra said...

namaskaar,
Palayanwad nahi yeh awhaan hai.
sudarshanji akhele hi kafi hai, he himmat to ladlo, jisko galat laga unke statement se wo case kare, ya proove kare ki SONIA ki sachhayi!!!!
CIA AGENT WO HE AUR INC to atankwadiyonka AGENT he. koi shaq?

SKY13 said...

kumaram see this video http://www.youtube.com/watch?v=D8xx37Z-wjM&feature=related
it is the reality of the Church and ईसाई.
ईसाई always tell lie.ईसाई use propoganda war against HINDUES as Sonia Gandhi used very successefully aginst HINDU.

All the action aginst Church and ईसाई as you says it is the natural reaction of the आम आदमी when he knows the truth of Church and ईसाई.

I think You got the answer of your Question.