Friday, November 26, 2010

भाजपा के लिये "जगीरा डाकू" का एक सामयिक संदेश…

पहले कृपया यह वीडियो क्लिप देखिये, फ़िल्म का नाम है “चाइना गेट”, राजकुमार संतोषी की फ़िल्म है जिसमें विलेन अर्थात डाकू जगीरा के साथ एक गाँव वाले की लड़ाई का दृश्य है… जिसमें उस ग्रामीण को धोखे से मारने के बाद जागीरा कहता है… “मुझसे लड़ने की हिम्मत तो जुटा लोगे, लेकिन कमीनापन कहाँ से लाओगे…”… फ़िर वह आगे कहता है… “मुझे कुत्ता भाया तो मैं कुत्ता काट के खाया, लोमड़ी का दूध पीकर बड़ा हुआ है ये जगीरा…”… असल में डाकू जागीरा द्वारा यह संदेश भाजपा नेताओं और विपक्ष को दिया गया है, विश्वास न आता हो तो आगे पढ़िये -



डायरेक्ट लिंक - http://www.youtube.com/watch?v=KRyH0eexMpE

भाजपा से पूरी तरह निराश हो चुके लोगों से अक्सर आपने सुना-पढ़ा होगा कि भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेस बन चुकी है और दोनों पार्टियों में कोई अन्तर नहीं रह गया है, मैं इस राय से "आंशिक" सहमत हूं, पूरी तरह नहीं हूं… जैसा कि ऊपर "भाई" डाकू जगीरा कह गये हैं, अभी भाजपा को कांग्रेस की बराबरी करने या उससे लड़ने के लिये, जिस "विशिष्ट कमीनेपन" की आवश्यकता होगी, वह उनमें नदारद है। 60 साल में कांग्रेस शासित राज्यों में कम से कम 200 दंगों में हजारों मुसलमान मारे गये और अकेले दिल्ली में 3000 से अधिक सिखों को मारने वाली कांग्रेस बड़ी सफ़ाई से "धर्मनिरपेक्ष" बनी हुई है, जबकि गुजरात में "न-मो नमः" के शासनकाल में सिर्फ़ एक बड़ा दंगा हुआ, लेकिन मोदी "साम्प्रदायिक" हैं, अरे भाजपाईयों, तुम क्या जानो ये कैसी ट्रिक है। अब देखो ना, गुजरात में तुमने "परजानिया" फ़िल्म को बैन कर दिया तो तुम लोग साम्प्रदायिक हो गये, लेकिन कांग्रेस ने "दा विंसी कोड", "मी नाथूराम गोडसे बोलतोय" और "जो बोले सो निहाल" को बैन कर दिया, फ़िर भी वे धर्मनिरपेक्ष बने हुए हैं…, "सोहराबुद्दीन" के एनकाउंटर पर कपड़े फ़ाड़-फ़ाड़कर आसमान सिर पर उठा लिया लेकिन महाराष्ट्र में "ख्वाज़ा यूनुस" के एनकाउंटर को "पुलिस की गलती" बताकर पल्ला झाड़ लिया…। महाराष्ट्र में तो "मकोका" कानून लागू करवा दिया, लेकिन गुजरात में "गुजकोका" कानून को मंजूरी नहीं होने दी… है ना स्टाइलिश कमीनापन!!!

इनके "पुरखों" ने कश्मीर को देश की छाती पर नासूर बनाकर रख दिया, देश में लोकतन्त्र को कुचलने के लिये "आपातकाल" लगा दिया, लेकिन फ़िर भी तुम लोग "फ़ासिस्ट" कहलाते हो, कांग्रेस नहीं… बोलो, बराबरी कर सकते हो कांग्रेस की? नहीं कर सकते… अब देखो ना, कारगिल की लड़ाई को "भाजपा सरकार की असफ़लता" बताते हैं और एक "चेन स्मोकर" द्वारा पंचशील-पंचशील का भजन गाते-गाते जब चीन ने धुलाई कर डाली, तो कहते हैं "यह तो धोखेबाजी थी, सरकार की असफ़लता नहीं"…। चलो छोड़ो, अन्तर्राष्ट्रीय नहीं, देश की ही बात कर लो, संसद पर हमला हुआ तो भाजपा की असफ़लता, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बावजूद अफ़ज़ल को फ़ाँसी नहीं दी तो इसे "मानवता" बता दिया…। एक बात बताओ भाजपाईयों, तुम्हारे बंगारू और जूदेव कहाँ हैं किसी को पता नहीं, लेकिन उधर देखो… 26/11 हमले का निकम्मा विलासराव देशमुख केन्द्र में मंत्री पद की मलाई खा रहा है, CWG में देश की इज्जत लुटवाने वाला कलमाडी चीन में एशियाई खेलों में ऐश कर रहा है, जल्दी ही अशोक चव्हाण की गोटी भी कहीं फ़िट हो ही जायेगी… तुम लोग क्या खाकर कांग्रेस से लड़ोगे? ज्यादा पुरानी बात नहीं करें तो हाल ही में अरुंधती ने भारत माता का अपमान कर दिया, कोई कांग्रेसी सड़क पर नहीं निकला… पर जब सुदर्शन ने सोनिया माता के खिलाफ़ बोल दिया तो सब सड़क पर आ गये, बोलो "भारत माता" बड़ी कि "सोनिया माता"?  

हजारों मौतों के जिम्मेदार वॉरेन एण्डरसन को देश से भगा दिया, कोई जवाब नहीं… देश के पहले सबसे चर्चित बोफ़ोर्स घोटाले के आरोपी क्वात्रोची को छुड़वा दिया, फ़िर भी माथे पर कोई शिकन नहीं…। अब देखो ना, जब करोड़ों-अरबों-खरबों के घोटाले सामने आये, जमकर लानत-मलामत हुई तब कहीं जाकर कलमाडी-चव्हाण-राजा के इस्तीफ़े लिये, और तुरन्त बाद बैलेंस बनाने के लिये येदियुरप्पा के इस्तीफ़े की मांग रख दी… अरे छोड़ो, भाजपा वालों, तुम क्या बराबरी करोगे कमीनेपन की…। क्या तुम लोगों ने कभी केन्द्र सरकार में सत्ता होते हुए "अपने" राज्यपाल द्वारा कांग्रेस की राज्य सरकारों के "कान में उंगली" की है? नहीं की ना? जरा कांग्रेस से सीखो, देखो रोमेश भण्डारी, बूटा सिंह, सिब्ते रजी, हंसराज भारद्वाज जैसे राज्यपाल कैसे विपक्षी राज्य सरकारों की "कान में उंगली" करते हैं, अरे भाजपाईयों, तुम क्या जानो कांग्रेसी किस मिट्टी के बने हैं।

एक चुनाव आयुक्त को रिटायर होते ही "ईनाम" में मंत्री बनवा दिया, फ़िर दूसरे चमचे को चुनाव आयुक्त बनवा लिया, वोटिंग मशीनों में हेराफ़ेरी की, जागरुक नागरिक ने आवाज़ उठाई तो उसे ही अन्दर कर दिया… भ्रष्टाचार की इतनी आदत पड़ गई है कि एक भ्रष्ट अफ़सर को ही केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त बना दिया… कई-कई "माननीय" जजों को "ईनाम" के तौर पर रिटायर होते ही किसी आयोग का अध्यक्ष वगैरह बनवा दिया…।  भाजपा वालों तुम्हारी औकात नहीं है इतना कमीनापन करने की, कांग्रेस की तुम क्या बराबरी करोगे।

डाकू जगीरा सही कहता है, "लड़ने की हिम्मत तो जुटा लोगे, लेकिन कमीनापन कहाँ से लाओगे…?" गाय का दूध पीने वालों, तुम लोमड़ी का दूध पीने वालों से मुकाबला कैसे करोगे? अभी तो तुम्हें कांग्रेस से बहुत कुछ सीखना है…


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58 comments:

संजय बेंगाणी said...

भाईजी हम तो सदा से ही "एथिकल धूर्तता" के पक्षधर रहें है. उत्तम उदाहरण कृष्ण, चाणक्य और पटेल हमारे सामने है.

सुज्ञ said...

सुरेश जी,

सटीक डायलाग ढूंढ लाए है,,,,,,,

"लड़ने की हिम्मत तो जुटा लोगे, लेकिन कमीनापन कहाँ से लाओगे…?"

पुरा चरित्र उजागर, न्यून शब्दो में और मर्म पर चोट भी।

ajit gupta said...

बहुत अच्‍छा विश्‍लेषण। राजनीति करनी है तो कुटिलनीति भी आनी ही चाहिए। चाणक्‍य का उदाहरण देते हैं लेकिन अपनाते नहीं। ढूंढ-ढूंढ कर बेवकूफों की जमात एकत्र कर ली है, बुद्धिजीवियों का तो अकाल पड़ा हुआ है। सारे ही व्‍यापारी टाइप के लोग भर्ती हैं जिन्‍हें पैसे की बात के अलावा कुछ दिखायी देता नहीं। बहुत कुछ कहा जा सकता है, लेकिन छिछालेदारी से कुछ होगा नहीं इनका। यह समझ ही नहीं सकते क्‍योंकि इनके पास समझ ही नहीं है।

awyaleek said...

baat to sahi h...

kaverpal said...

Dear Suresh ji aapne kam likhkar bahut kuchh likh diya ,dekhan me chhote lagen ghav kare gambhir,vah

एस.एम.मासूम said...

बहुत अच्‍छा विश्‍लेषण किया है. भैया भयंकर माया जाल है. इस छोटी सी ज़िंदगी मैं इतना वक कैसे मिल जाता है लोगों को..

पाक हिन्दुस्तानी said...

पटेल और चाणक्य को धूर्त कहना गलत है. नीतिज्ञ शब्द का उपयोग करें.

सुरेश जी, आपका लेख अति-मारक है. इसमें कोई शक नहीं कि कांग्रेस उन सब पापों की दोषी है जो आपने गिनाये. लेकिन अगर आप कह रहे हैं कि भाजपा को कांग्रेस का कमीनापन अपना लेना चाहिये तो मैं असहमत हूं. अगर ऐसा होगा तो देश को क्या मिलेगा? बल्कि यह कहूंगा की भाजपा कि जो आज गति है वह कांग्रेस का कमीनापन अपनाने की वजह से ही है.

सत्ता पाने के लिये भाजपा ने जो वादे किये वो सत्ता में आते ही भुला दिये. उनमें से एक भी (राम मंदिर, 376...) पूरा किया होता तो लोग उन्हें धोखेबाज नहीं मानते. लेकिन सत्ता सुख पाने के लिये उन्होंने हर मोड़ पर समझौता किया और अपने वादे झुठलाते गये.

अब यह स्थिति है कि जिस तरह लोग कांग्रेस पर भरोसा नहीं करते उसी तरह भाजपा पर भी नहीं कर पा रहे.

अगर भाजपा को कांग्रेस से आगे आना है तो उसका कमीनापन नहीं अपनाना चाहिये, इसके बजाय संघर्षशीलता लानी चाहिये. अगर भाजपा मुद्दे उठाए और उनपे टिकी रहे तो जरूर यह हालत बदलेगी.

लेकिन जब भाजपा राजा के जवाब में येदुयरप्पा को ले आती है तो हम किसका मुंह देखें? उसका बने रहना उन लोगों के गाल पर तमाचा है जिन्होंने भाजपा पर भरोसा किया.

वरना अगर भ्रष्ट, निकम्मे, चोर, धोखेबाज, फिरकापरस्त, हिन्दु-विरोधी लोगों को ही सत्ता में लाना है तो कांग्रेस क्या बुरी है? भाजपा की क्या जरुरत है?

Suresh Chiplunkar said...

@ पाक हिन्दुस्तानी -
1) "…लेकिन अगर आप कह रहे हैं कि भाजपा को कांग्रेस का कमीनापन अपना लेना चाहिये तो मैं असहमत हूं…"
- मैं भी असहमत हूं, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा ही हो रहा है और वो भी आधे-अधूरे मन से, भाजपा को कमीनापन अपनाना ही है तो पूरी तरह से अपनाये… :)

2) "…सत्ता पाने के लिये भाजपा ने जो वादे किये वो सत्ता में आते ही भुला दिये…"
- हल्का संशोधन, सत्ता में आते ही नहीं बल्कि सत्ता को बचाये रखने और मलाई खाते रहने के लिये… :) यदि "मर्द" बने होते और अपनी बात पर अड़ जाते तो बहुत कुछ कर सकते थे…

3) "…भाजपा की क्या जरुरत है?…"
- यही मैं सोच रहा हूं, कि क्यों न या तो उसका कोई अन्य विकल्प बनाया जाये अथवा उसी की ठीक से साफ़-सफ़ाई करके दोबारा बनाया जाये… :)

सागर नाहर said...

मेरी तरफ से; पाक हिन्दुस्तानीजी के कमेंट को कॉपी पेस्ट समझें।

Tausif Hindustani said...

लेख तो मारक व धांसू फ़िल्मी टाईप की है किन्तु
केवल कांग्रेस को ही निशाना क्यों बनाया है( जैसे भाजपा को प्यार से गाली दी हो ) लगता है भाजपा से कोई पुराना नाता है
भाजपा की बातों को कम क्यों बताया है
dabirnews.blogspot.com

केवल राम said...

काश हर कोई आपकी तरह देश के बारे में सोच पाता..काफी सही विश्लेषण किया है ..जय हिंद
चलते -चलते पर आपका स्वागत है

नया सवेरा said...

... behatreen charchaa !!!

man said...

वन्दे मातरम सर ,
काफी विश्लेष्णात्मक लेख ,सही हे भा. ज. पा में कांग्रेस वाली कुटिलता नहीं हे ,भले ही वो सत्ता लालच में कुछ गलत फेसले भी कर डालती हो ,इसका उदाहरन हे भाजपाई राज्यों में हुआ विकास ,जबकि कांग्रेस साठ साल तक लोगो से छलावो के आलावा कुछ नहीं जो उसका पर्मुख हथियार था गरीबी और छदम सेकुलरता(जिसका अर्थ हे अपने बाप का पता नहीं या सभी को अपना बाप मानता हो) जिस पर वो धीटता से आज भी कायम हे लेकिन लोग अब बदल गए हे बिहार में रगड़ रगड़ के धोया हे ,और आने वाले चुनावो में जनता डोरी पर सूखने के टांग देगी
http://jaishariram-man.blogspot.com/2010/11/blog-post_25.html.....
read this artical

ZEAL said...

.

सुरेश जी,

वो कमीनगी तो सचमुच नहीं ला सकेंगे। लेकिन जरूरत भी नहीं इसकी । कांग्रेस को ही मुबारक हो ये कमीनगी । देश चलाने के इमानदारी की जरूरत है । जब तक दो-चार भी इमानदार जिन्दा हैं, मुंह छिपाते फिरेंगे ये घोटालेबाज ।

पूर्व में जब मैंने ये पोस्ट --" क्या हिन्दुस्तान आजाद है ? पहले मुग़ल , फिर अंग्रेज़ और अब कांग्रेसी मानसिकता के गुलाम हैं हम "----लिखी थी तब ब्लॉग जगत के कुछ कमीनगीज़दा लोग आ गए थे लड़ने। लेकिन जो सरफ़रोश हैं , वो डरते नहीं--क़तर दिए गए उनके पर , हमेशा के लिए।

कमीनगी का हल -- इमानदारी , हिम्मत और देशभक्ति का ज़ज्बा है।

नहीं गलेगी इनकी दाल ज्यादा दिनों तक ।

.

Tarkeshwar Giri said...

लड़ने की हिम्मत तो जुटा लोगे, लेकिन कमीनापन कहाँ से लाओगे…?"

Jai ho Soniya MAiiiiiiii kiiiiii

अवधेश पाण्डेय said...

बिहार की बुद्धिमान जनता ने कान्ग्रेस पार्टी को चार विधायक दिये हैं, अब वो विधायक आराम से कान्ग्रेस की अर्थी उठा कर "राम नाम सत्य है" बोलते हुए कान्ग्रेस पार्टी का अन्तिम संस्कार कर सकते हैं। जय हो।।।।।

सतीश सक्सेना said...

मेरी टिप्पणी नहीं प्रकाशित करने का "भी" धन्यवाद… आपका ब्लॉग है, आपकी मर्जी है…"

यह क्या गज़ब कर रहे हो सुरेश भाई !
कहीं टिप्पणी और कहीं तो नहीं दे आये और नाम मेरा ले रहे हो ! आपकी सारी टिप्पणी प्रकाशित की गयी हैं उनमें आपत्तिजनक कुछ भी नहीं था और यदि होता तो हटाने से पहले मैं आपसे संशोधन का आग्रह अवश्य करता !
आप मेरे लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं इसका मुझे विश्वास है !
सादर

pradeep said...

maafi chahunga-- kamingi to sakramit kar chuki hai BJP ko..... ab sakraman door karna hoga...

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

सुरेश जी गज़ब ढा गए...आज तो मज़ा ही गया आप का लेख पढ़ कर...क्या चुन चुन कर नंगा किया है कांग्रेस को...मुन्नी को बदनाम कर दिया...आप सच में कमाल हो...मै अपने सभी मित्रों को यह लेख पढ़ाऊंगा...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बात यह है कि प्रोपेगैण्डा करना नहीं आता इन्हें. गोयबल्स से कुछ सीखा होता तो आज बाकी दल बैकफुट पर होते.
एक दो चैनल और अखबार वालों को सांठ लिया होता.
अपने हितैषियों के जायज-नाजायज काम कराये होते.
अपनी पार्टी के लोगों को कुछ समझा होता और उनके भी काम कराये होते.
साथ देने वाले अफसरों को अच्छी जगह पोस्टिंग दी होती..
पाक हिन्दुस्तानी जी. भारत की जनता यदि राम मन्दिर के नाम पर वोट देती तो चार सौ सीटें मिलतीं. लेकिन हमारी जनता...!/?
धारा ३७६ नहीं है, अनुच्छेद ३७० है. इसे हटाने के लिये भी दो-तिहाई बहुमत चाहिये..

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

आयेगा जरूर आयेगा कमीनापन भी आयेगा इन्तज़ार करे .

Anonymous said...

बहुत ही टुच्ची सोच के साथ और चूतियापने का लिखते हो
चलो कांग्रेसी सभी कमीने लेकिन
भा०ज०पा० भी सत्ता में थी ....क्या उखाड़ा उन्होंने ?
अटल भी यूँ ही सबसे लचर प्रधानमन्त्री साबित हुआ था
तुम एक ख़ास तरह का चश्मा पहनते हो ....हाफ नेकर की मानसिकता .. जो सिर्फ हुआं..हुआं कर सकते हैं ... बस

Anonymous said...

ये तो जानता हूँ की तुम कमेन्ट प्रकाशित नहीं करोगे
असल खून नहीं है न इसलिए ...... बस अपने गिनती के चार-पांच चूतियों के साथ ऐसे ही बकते रहो .... एक दिन पागल हो जाओगे

उमेश प्रताप वत्स said...

Umesh Pratap Vats
राम-राम सुरेश भाई।
श्रेष्ठ विशलेषण. चाणक्य कूटनीतिज्ञ थे किन्तु प्रखर राष्ट्रवादी भी थे।
कांग्रेस की एक चाल ओर चाल भी गिना देते . जब भी किसी वस्तु के 2 रू. बढाने हो तो 5रू बढाती है , फिर सोनिया माता 2रू कम कराती है , अर्थात 2रू के स्थान पर 3...रू बढ जाते है, जनता फिर भी कहती है कि सोनिया जी ने बचा लिया।
कुछ भाईयो ने भाजपा पर टिप्पणी की है वे बताए कि भाजपा कंहा कांग्रेस जैसी दिखती है ।अब राजनीति मे सन्त टोली तो टिक नही सकती ,थोडा बहूत तो चलता है किन्तु....................

शैलेन्द्र कुमार said...

सुरेश जी आपने जो कहा है वो एकदम सत्य है बीजेपी में भी वो कमीनापन होना चाहिए लेकिन कांग्रेस के नाश के लिए और केवल राष्ट्र के हित के लिए
एक निवेदन आपसे और करना चाहता हूँ चूँकि आप एक अनुवादक भी है इसलिए आप से निवेदन है की हिंदुत्व पर सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या क्या है इसे हिंदी में प्रकाशित करें आपका सदैव आभारी रहूँगा
अगर ये पहले से ही किसी वेबलिंक पर है तो कृपया उपलब्ध कराये

जीत भार्गव said...

सुरेशजी,
कोंग्रेस ठहरी मुन्नी बाई, उसकी बदनामी और कमीनेपन की आदत सबको हो गयी है, लेकिन देश की जनता भाजपा को सती-सावित्री की तरह देखना चाहती है. इसे मीडिया का मायाजाल कहिए या प्रजा का भोलापन कि, कोंग्रेस के काले बुर्के पर तो लाखो दाग छिप जाते है, लेकिन भाजपा की सफ़ेद धोती पर मामूली छींटा पड़ने पर भी हाय-तौबा मच जाती है. मीडिया रुदाली गाने लगता है.

कोंग्रेस ने पिछले ६० साल में देश को लूटकर अकूत धन एकत्र किया है. घोटाले करने और उस पर मौन व्रत रखने के लिए बार-बार कोर्ट के लताड़ खा चुकी है. उसके कार्यकाल में सीबीआई का इतना दुरुपयोग हुआ कि उस ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है. कोंग्रेस के भ्रष्टाचार और दोगलेपन पर पी.एच डी हो सकती है. फिर भी महात्मा बनी फिरती है. उसके पी आर की दाद देनी पड़ेगी. उसने मीडिया को भाड़े पे खरीद रखा है. और यही मीडिया उसके छवि सुधार अभियान में लगा रहता है. दूसरी तरफ भाजपा मीडिया को खरीदना तो दूर, गाँठ के गोपीचंद बनाकर कलम घिसनेवाले राष्ट्रवादी विचारको, पत्रकारों की भी सुध नहीं लेती.

रही बात कमीनेपन की तो, एक भाजपाई का कमीनापन दूसरे भाजपाई के खिलाफ ही खर्च हो जाता है. ऐसे में वो कोंग्रेस को कहाँ मात देंगे..?
भाजपा को भी कोंग्रेस जैसा कमीनापन मिले इसी की कामना के साथ आपके सटीक विश्लेषण के लिए आभार.

जीत भार्गव said...

सुरेशजी,
कोंग्रेस ठहरी मुन्नी बाई, उसकी बदनामी और कमीनेपन की आदत सबको हो गयी है, लेकिन देश की जनता भाजपा को सती-सावित्री की तरह देखना चाहती है. इसे मीडिया का मायाजाल कहिए या प्रजा का भोलापन कि, कोंग्रेस के काले बुर्के पर तो लाखो दाग छिप जाते है, लेकिन भाजपा की सफ़ेद धोती पर मामूली छींटा पड़ने पर भी हाय-तौबा मच जाती है. मीडिया रुदाली गाने लगता है.कोंग्रेस ने पिछले ६० साल में देश को लूटकर अकूत धन एकत्र किया है. घोटाले करने और उस पर मौन व्रत रखने के लिए बार-बार कोर्ट के लताड़ खा चुकी है. उसके कार्यकाल में सीबीआई का इतना दुरुपयोग हुआ कि उस ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है. कोंग्रेस के भ्रष्टाचार और दोगलेपन पर पी.एच डी हो सकती है. फिर भी महात्मा बनी फिरती है. उसके पी आर की दाद देनी पड़ेगी. उसने मीडिया को भाड़े पे खरीद रखा है. और यही मीडिया उसके छवि सुधार अभियान में लगा रहता है. दूसरी तरफ भाजपा मीडिया को खरीदना तो दूर, गाँठ के गोपीचंद बनाकर कलम घिसनेवाले राष्ट्रवादी विचारको, पत्रकारों की भी सुध नहीं लेती.रही बात कमीनेपन की तो, एक भाजपाई का कमीनापन दूसरे भाजपाई के खिलाफ ही खर्च हो जाता है. ऐसे में वो कोंग्रेस को कहाँ मात देंगे..? भाजपा को भी कोंग्रेस जैसा कमीनापन मिले इसी की कामना के साथ आपके सटीक विश्लेषण के लिए आभार.

Vivek Rastogi said...

पर यहाँ तो ऐसा लगने लगा है कि कांग्रेस "डाकू जगीरा" का भी बाप है, कमीनेपन में

अमित शर्मा said...

होत्त तमेरे की इत्ता कमीनापन !!!!!!!!!!! पर हम भी कमीने ही तो हैं .............कर्महीन ही लुडकता लुडकता कमीन बना है और अपने से ज्यादा कर्महीन लोग और कहाँ मिलेंगे जो साठ साल में भी कमीन लोगों को धत्त कर्म करने से ना रोक पाए !!!!!!!!!!!!!

KRISHNA KUMAR SONI (RAMBABU) said...

सुरेश जी,
नि:संदेह भा.ज.पा. शासन में आने के बाद अपने वादों और सिद्धांतों पर पूर्ण रूप से खरी नहीं उतरी लेकिन गठबंधन के कारण उसकी कुछ मजबूरियां भी थी. खैर इस समय भा.जा.पा.को मजबूत विपक्ष की भूमिका का निर्वहन करते हुए भ्रष्टाचार,आतंकवाद, देश की आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा,बहुसंख्यकों के हितों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपना पक्ष बहुत मजबूती के साथ रखना चाहिए.छद्म धर्म निरपेक्ष पार्टियों के कारण आज आतंकवाद का जहर नासूर बन गया है. ये धर्मं रिर्पेक्ष्ता का मुखोटा ओढ़कर देश में इस्लाम का साम्राज्यवाद लाना चाहती हैं.

sanjay said...

o begani bhaiji ne kahi apke lekh par
tipa tha.....

aap to likh dete ho......aur khoon hamara jalta hai....

isme mai jorna chahoonga ki agar sirf
padhne se khoon jalta hai to likhne mai to dil jalta hoga .... lekin jalne dijiye ..... kya pata koi low
andhkar me doobe hindusthan ko prakash se bhar de.......

mai aapka cadar banne ko tayaar hoon......

pranam

man said...

कांग्रेसी मुन्नी और छोटा मुना दोनों बदनाम हो गए बिहार में डार्लिंग .........?

man said...

हाँ देल्ही के गलियारों में तो मूह काला करते टाइम रंगे हाथ पकड़ लिया ,इसकी वजह से संसद ठप्प हे ......? वाह मुन्नी वाह

man said...

Anonymous@ उर्फ़ गुप्त रोगी ,
बहुत बढ़िया तूझे अपनी ताई की लूटी पिट्टी इज्जत का अब भी ख्याल हे ?जलन लगी हो तो देशी घी लगा ले ?

Anonymous said...

SURESH JI IN KAMINO KE AAKNDE KAHAN SE IKATHHA KARTE HO ?

rk said...

suresh ji parnam
itne kamino ke kaminapan kahan se doondh kar late ho ?

SHIVLOK said...

ऐथिकल धूर्तता या
ऐथिकल कुटिलता या
ऐथिकल चतुराई या
ऐथिकल कमीनापन
चाहे जो भी शब्द हो ये देशभक्त या राष्ट्रभक्त नेतृत्व में निश्चित ही होना चाहिए
अगर नेहरू की जगह पटेल प्रधानमंत्री होते तो आज भारत की तस्वीर अलग ही होती
लेकिन गाँधी और नेहरू के कामीनेपन ने पटेल को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया
यह हमारे देश का दुर्भाग्य ही रहा एकीकृत भारत के निर्माण का महाकार्य पूर्ण चतुराई , कुटिलता और सजगता से करने वाला महान नेता भी गाँधी और नेहरू के कमिनेपन से हारा
सुरेश जी
मेरे विचार से सड़ी गली भाजपा की सफाई करने के बजाय
नया विकल्प याने नया संगठन खड़ा किया जाए
सुरेश जी
समझौतावादी होना बहुत अच्छी बात है समय के साथ रण छोड़ भी होना चाहिए
परंतु सिद्धांत और नैतिकता के साथ समझौता नहीं होना चाहिए
भाजपा और संघ के लोगों में यही रोग हो गया है
सिद्धांत और नैतिकता के साथ समझौता इनकी आदत बन गया है
इनका स्वार्थ राष्ट्रहित नहीं रह गया है

I and god said...

i fully agree with the post, and congratulate the post person.

by i want to know something about the solution. can any body start a dialogue about the solutions.

ashok gupta
delhi
ashok.gupta4@gmail.com

sorry for writing in english, as i do not know, how to type in hindi.

rupesh mishra said...

suresh bhaiya pranam, apne hamesha ki tarah ekdum satik likha hai. aise hi likhate rahein, ham apke sath hai. aur bhi log jud rahe hain. dhere dhere hi sahi asar ho raha hai.

rahul gandhi jindabad said...

अगर कांग्रेस इतनी ही बुरी है तो फिर वो इतने सालो के सत्ता में क्यों है???????????????
आजादी की लडाई में संघ का क्या योगदान है ?????????????/
ये जो अंग्रेजो के सैनिक थे सब यही नेकर पहनते थे . अंग्रेज चले गए पर ये वही है .
जो सत्ता में रहेगा आरोप उसी पर लगेंगे अब भाजपा बेचारी हर बार जनता के हाथो पिट जाती है तो उस की खीज समझ में आती है .
मेरा कमेन्ट पढ़ कर ये हिंदूवादी एक साथ हमला करेंगे .
आप लोग चिंता मत करे सब को मु तोड़ जवाब मिलेगा बस अभद्र भाषा का प्रयोग न करे
चापलुस्कर जी का धन्यवाद

subhash said...

nice post

avenesh said...

ab to aadat si hai aise jine ki............

nitin tyagi said...

nice post

Anonymous said...

Sureshjee..ITane seedhe to BJP wale bhee nahee hen..Sudarshanjee Pad par nahee hen to Palla zad liyaa, Indreshjee pad par hen to samhaal liyaa ? Kyaa BJP waalo ko bhee Congress ne SET kar liyaa hen yaa aapas me hee ??

rk said...

RHAUL GANDHI JINDABAD :-KYA SANDESH DENA CHAHATA HAI IS COMMENT ME SAD HUI BADBOO NAHIN AA RAHI HAI KYA?

Anonymous said...

SORRY FOR OFF-TOPIC BUT PLS CHECK THIS LINK:

http://hamzabaan.blogspot.com/2010/08/blog-post_30.html

again sorry for off-topic.

Amit said...

Sahi kaha sir aapne. BJP agar 10% bhi kameenapan le aaye to Congress par bhari pade.
Lekin koi bat nahin. Desh ko BJP ke kameenapan se jyada Janta ke jagruk hone ki jarurat hai jis se Kameeno ka safaya kiya ja sake.

babazee said...

Anonymous Aur Rahul ke bachcho

Congres ne itane din Raj kaise kiya....? Aap jaiso ke karan .
Suresh ji ji kya batayenge...Angrejo ne bhee ese hi Raj kiya tha.. jaise Aaj tum javab dene ke bajay Suresh ji ko Gali de rahe ho...ese hee kabhee Neharu aur Gandhi bhee Subhash aur Bhagat singh ko kosate the...... Ye Himmat bhee Suresh ji ki hee thtt ki tumhari bat mitai naheen.

Yadi himmat hai to Soniya ji ke bare men Sudarshan ji ne jo bola hai...un par case lagao.
Pragya ko jail men kyon pataka hai...adalat men le jao.
Par tumase bolane se fayada hi kya....yadi tum Bhartiy hote to Arundhati Roy ki bat par chilla uthate..

Man said...

http://jaishariram-man.blogspot.com/2010/12/blog-post_05.html...................please read it

Man said...

जाजम उठाऊ कांग्रेसी यंहा देखे अपनी स्थिति
http://jaishariram-man.blogspot.com/2010/12/blog-post_05.html

ZEAL said...

.

जीत भार्गव जी,

आपका कमेन्ट बहुत ही जबरदस्त लगा। मुझे तो अब मिडिया भी कांग्रेसी ही लगती है।

.

adi said...

Lekh mein aag hai Suresh ji mein koshis karunga ki aapke blog ko adhik se adik log padhen aur in Darindon ki asliyat ko jaane

JANARDAN MISHRA said...

सुरेशजी
कोंग्रेश में जगीराओं कि कमी नहीं है, लेकिन भाजपा में भी नामर्दों कि कमी नहीं है, नरेन्द्र मोदी जैशे मर्द और देश भक्त कुछ भाजपा में और पैदा हो जाय, तभी देश का बेडा पार होगा.... नमो नमः

Dr. Manoj Sharma said...

माननीय सुरेश जी, आपने गागर में सागर भरते हुए एक फिल्म के दृष्टांत के साथ अपनी पीड़ा जिस प्रकार उड़ेली है, उसके लिए आपको साधुवाद.
मेरा विश्वास है कि आपने कांग्रेस और भाजपा के कमीनेपन की तुलना कांग्रेस को नंगा करने के लिए ही की है और आप भाजपा वालों द्वारा वही कमीनापन अपनाए जाने के हामी नहीं हैं. परन्तु, यदि आपका मत मेरी धारणा से इतर है तो मेरा यही कहना है कि भाजपा कमीनेपन में सदियों तक अभ्यास करने के बाद भी कांग्रेस के कमीनेपन को मात नहीं दे सकती. जिस संगठन का अभ्युदय ही ऐ ओ ह्यूम की धूर्तता के सहारे अंग्रेजों के कमीनेपन के कारण हुआ हो, उस संगठन के कमीनेपन को राष्ट्रीय विचारों के लोग कभी भी मात नहीं दे सकते. यहाँ भाजपा पर बहुत लोगों ने कमेंट्स किये हैं. मेरा मानना है कि भाजपा का शासन तो अभी तक देश में आया ही नहीं है. फिर भी, कूटनीति में भाजपा वाले अभी कच्चे हैं. यहाँ, जमीन से जुड़े नेताओं पर ऐसे आयातित नेता हावी हैं, जिन्होंने माननीय दीनदयाल जी के 'एकात्म मानववाद' का पहला पन्ना भी नहीं पढ़ा और न ही वे इसे पढना ही चाहते हैं. परन्तु, फिर भी देश के सामने वही एक विकल्प है. आप और हम जो कर सकते हैं, कर रहे हैं, करते रहेंगे, लगे रहेंगे.
मुझे लगता है, कमीनेपन की आवश्यकता नहीं, अपने सिद्धांतों से जो विश्वास डगमगा जाता है, उसी को दृढ़ करने की आवश्यकता है. भाजपा के शीर्ष नेतृत्त्व को नवागत लोगों को ज्यादा सिर पे नहीं बिठाना चाहिए. यही लोग सिद्धांतों से समझौता करने के पक्षधर होते हैं और पूरी पार्टी की नाव डगमगाने लगती है.

त्यागी said...

only salute to you

हल्ला बोल said...

गज़ब विश्लेसन भैया, आपने तो हल्ला बोल दिया है.

yogesh said...

Lomree ka doodha peekar bare huyei hai,Girgit(Chameleon)kee taraha sei ranga badalna pahile se hee aata hai.In ko kameena kahna bhee galat hai kameena to ghar walon ko chorta hai,yahan to history hai kee satta kei liye pati ko bhee marwane mei hickichahat naheen hoti .

Kishan Gopal Maru said...

Sir mujhe aapka ye blog bahut pasand aaya.....jald hi BABA RAMDEV AND ANNA HAZARE ke bare kuchh likhen....in waiting