Thursday, October 14, 2010

वर्धा ब्लॉगर सम्मेलन की रिपोर्ट “जरा हट के”… Wardha Hindi Bloggers Workshop, Blogging Ethics

जैसा कि सभी जानते ही हैं कि वर्धा में 9-10 अक्टूबर को ब्लॉगर कार्यशाला और संगोष्ठी सम्पन्न हुई, जिसमें देश के “छँटे” हुए ब्लॉगर्स को आमंत्रित किया गया था। इस सम्मेलन में ब्लॉगर आचार संहिता पर चर्चा की गई, और लगभग सभी ब्लॉगर्स सहमत थे कि ब्लॉगिंग पर कोई आचार संहिता डण्डे के जोर से नहीं लाई जा सकती, जब चीन और अमेरिका इस “तूफ़ान” को रोकने की कोशिश में सफ़ल नहीं हुए तो हमारी क्या औकात है। परन्तु साथ-साथ ही इस बात पर भी सहमति बनी कि आत्मनियन्त्रण से बेहतर कोई आचार संहिता नहीं हो सकती…।

विगत दो-तीन दिनों में सभी ब्लॉगर्स वर्धा सम्मेलन की विभिन्न रिपोर्टें पढ़ ही चुके हैं, किसने क्या कहा, किसने क्या वक्तव्य दिया, किसने कैसे सम्बोधित किया, क्या चर्चा हुई, क्या बहस हुई… आदि बातों के बारे में आप सभी कई ब्लॉग्स पर पढ़ चुके हैं… (नहीं पढ़ा हो तो यहाँ, यहाँ, यहाँ, यहाँ और यहाँ क्लिक करके पढ़ लें)… अतः मैं वर्धा सम्मेलन के निष्कर्षों के बारे में बार-बार वही बातें दोहराकर आपको बोर करना नहीं चाहता… इसलिये इस सम्मेलन की यह रिपोर्ट पेश है “थोड़ी हट के”…

सबसे पहले तो मैं सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी का धन्यवाद करना चाहूंगा कि उन्होंने मुझे आमंत्रित किया और बड़े-बड़े लेखकों के बीच मुझे बैठने-बतियाने-समझने का मौका दिया। मैं वर्धा हिन्दी विवि के कुलपति विभूति नारायण राय का भी आभारी हूं जिन्होंने हिन्दी ब्लॉगिंग जैसे नये विषय को विश्वविद्यालय के उपक्रम में लगातार दूसरे वर्ष जगह दी, निश्चित ही इससे विश्वविद्यालय के छात्रों को एक नई दृष्टि और विचार मिले होंगे। कुलपति महोदय के साथ पूरी पहाड़ी के चार किलोमीटर रास्ते का मॉर्निंग वॉक का अनुभव भी मजेदार रहा, विश्वविद्यालय के भविष्य को लेकर उनकी योजनाएं और चिंताएं स्पष्ट रुप से परिलक्षित हो रही थीं, और उनका विश्वास है कि आने वाले कुछ ही वर्षों में यह विवि भारत की सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधि का प्रमुख केन्द्र बन जायेगा।

(गाँधी हिल का मनोरम दृश्य)

खैर… अब मैं “अपनी वाली” पर आ जाता हूं… और जो खबरें, घटनाएं, वक्तव्य आप अब आगे पढ़ेंगे वह सारी घटनायें या तो विश्वस्त सूत्रों की खबर पर आधारित हैं, या तो संवाददाता को कोई उड़ती चिड़िया बताकर गई है, या फ़िर इन खबरों का स्रोत कोई काला कौआ है… अतः वर्धा ब्लॉगर सम्मेलन की इन खबरों को आप अपने-अपने विवेक से, अपनी-अपनी जोखिम पर समझने को स्वतन्त्र हैं… यदि कोई इन खबरों को काल्पनिक मानना चाहे तब भी कोई वान्दा नहीं है…

1) सबसे पहले आयोजक श्री त्रिपाठी जी के बारे में… सम्मेलन में इस बात पर आम सहमति थी कि सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी की मेजबानी बेहद उत्तम और उनका समय प्रबन्धन बेहतरीन था… ब्लॉगर्स का मानना था कि मेजबानी इतनी बेहतरीन थी कि जब त्रिपाठी जी अपनी लड़की की शादी करेंगे, तो उनकी इस मुस्कुराहट भरी शान्त स्वभाव की उम्दा मेजबानी देखकर लड़के वाले दहेज माँगना तो दूर, उलटा कुछ देकर ही जायेंगे… विश्वस्त सूत्रों ने बताया है कि त्रिपाठी जी की इस मेजबानी से कुछ ब्लॉगर्स इतने खुश हुए थे कि उनका वहीं टिकने का मूड बन गया था और उन्हें बड़ी मुश्किल से धक्के मारकर बाहर निकाला गया…

2) विवेक सिंह नामक ब्लॉगर ने मोबाइल खो जाने का बहाना बनाया, लेकिन उड़ती चिड़िया ने ऐसा बताया है कि यह दुष्कृत्य उन्होंने इसलिये किया ताकि ब्लॉगर्स सम्मेलन के दौरान पानीपत से उनकी पत्नी बार-बार फ़ोन करके उन्हें डिस्टर्ब ना करें और वे निर्विघ्न रुप से कार्यशाला के मजे लूट सकें…

3) सुरेश चिपलूनकर के कमरे का दरवाजा बाहर से बन्द करके सेकुलरों द्वारा साजिश रची गई थी, जो कि त्रिपाठी जी द्वारा तत्परता से फ़ेल कर दी गई… हालांकि सेकुलर फ़िर भी बाज नहीं आये और अगले दिन संजय बेंगाणी जी का दरवाजा बाहर से बन्द कर उसका आरोप सुरेश चिपलूनकर पर मढ़ा गया तथा हिन्दूवादियों में फ़ूट डालने की असफ़ल कोशिश की गई…। हिन्दूवादियों का दरवाजा बार-बार बाहर से बन्द होने की घटना की गम्भीरता को देखते हुए नरेन्द्र मोदी जी ने गुजरात CID को इसकी जाँच का जिम्मा सौंपा है, क्योंकि सीबीआई पर अब किसी को भरोसा नहीं रहा…

4) जो बात अब तक किसी को पता नहीं थी कि श्री अनूप शुक्ल का “पसन्दीदा शब्द” कौन सा है, अब यह राज़ नहीं रहा… वर्धा ब्लॉगर सम्मेलन के दौरान दो दिनों में अनूप शुक्ल द्वारा 84 बार “हिन्दूवादी ब्लॉगर” शब्द का उच्चारण किया गया, इससे सिद्ध होता है कि यही उनका सबसे प्रिय शब्द है… अतः सभी ब्लॉगर्स से अनुरोध है कि भविष्य में वे अनूप जी को उनके इसी प्रिय शब्द से पुकारें…

5) जहाँ एक ओर संजय बेंगाणी इस बात से परेशान थे कि गुजरात के नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस के ताबूत में एक कील कम ठोंकी गई (अर्थात बेंगानी जी का वोट नहीं डल पाया)…। इसी प्रकार सभी ब्लॉगर्स को बोर्नविटा और ब्राह्मी आँवला का एक-एक चम्मच लेने हेतु सब्सिडी की माँग की गई, क्योंकि कई ब्लॉगर्स दूसरे ब्लॉगरों को पहचान नहीं पाये… इसे एक राष्ट्रीय समस्या के रुप में देखा गया।

6) गायत्री शर्मा (जो कि नईदुनिया इन्दौर में पत्रकार और विवि से पीएचडी की शोध-छात्रा हैं) के बारे में सभी ब्लॉगर्स में आम सहमति थी कि चूंकि आजकल कैटरीना कैफ़ पीठ दर्द से परेशान रहने लगी हैं और मुम्बई फ़िल्म इंडस्ट्री से कभी भी आऊट हो सकती हैं, अतः उन्हें ब्लॉगिंग और पत्रकारिता जैसे फ़ड़तूस काम छोड़कर उधर हाथ आजमाना चाहिये…

7) एक काले कौए ने बताया कि यशवन्त सिंह द्वारा रात 2 बजे तक अपने गाने सुनाकर कई ब्लॉगर्स की नींद खराब करने के जुर्म में उन्हें अगली ब्लॉगर्स मीटिंग से प्रतिबन्धित कर दिया गया है…

8) एक ब्लॉगर द्वारा “वैज्ञानिक बिरादरी” शब्द को हाईजैक करके उस पर कब्जा जमाने की भी कोशिश की गई, लेकिन हर्षवर्धन, संजीत और बेंगाणी जी द्वारा तत्परता और सक्रियता से इसे खारिज कर दिया गया। विश्वस्त सूत्रों ने बताया है कि इस वजह से भविष्य में जब भी लखनऊ, वाराणसी या कानपुर में नोबल पुरस्कार समारोह का आयोजन किया जायेगा तो उसमें उक्त तीनों ब्लॉगर्स को आमंत्रित नहीं किया जायेगा…

9) सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी बार-बार ऑल-आउट को लेकर संशयित रहे… जिस तरह तेंडुलकर के स्कोर के बारे में हम बार-बार पूछताछ करते हैं वैसे ही त्रिपाठी जी लगातार ऑल-आउट का “स्कोर” पूछ रहे थे, उड़ती चिड़िया ने बताया कि इलाहाबाद ब्लॉगर सम्मेलन के बाद एक “मच्छर प्रकरण” की वजह से ऐसा हुआ है।

10) एक बुज़ुर्ग (तम) कवि द्वारा अपने वक्तव्य में गुजरात दंगों का उल्लेख करने की वजह से माहौल खराब होते-होते बचा। उनकी बुज़ुर्गियत और मेज़बान के शालीन आयोजन का लिहाज करते हुए कतिपय ब्लॉगरों द्वारा इस विषय पर मेहनतपूर्वक चुप्पी साधी गई।

11) रायपुर से आये हुए एक डैशिंग ब्लॉगर ने इस अफ़वाह को फ़ैलाने की कोशिश की, कि रायपुर में भी जल्दी ही एक ब्लॉगर सम्मेलन आयोजित होने वाला है… उसमें एक शर्त रहेगी कि यह सम्मेलन “कुआँरों द्वारा, कुँआरों का और कुँआरों के लिये” ही आयोजित किया जायेगा, स्वाभाविक रुप से कई ब्लॉगर अपने-आप कट जायेंगे और खर्चा बचेगा।

12) वर्धा और पवनार आश्रम भ्रमण के दौरान एक वरिष्ठ ब्लॉगर को बस में धक्का लगाने एवं जैक हटाने का काम भी दिया गया, जिससे उनमें ब्लॉगिंग के प्रति वैराग्य भाव पैदा हो गया है और वे फ़ुल-टाइम क्लीनर बनने के बारे में सोच रहे हैं…

13) शैलेष भारतवासी और संजय बेंगाणी को विश्वविद्यालय के छात्रों को ब्लॉगिंग के गुर सिखाने का काम सौंपा गया था, इन दोनों ने नये-नये प्रशिक्षुओं को पता नहीं क्या सिखाया कि अब सभी छात्र इनके खिलाफ़ मोर्चा निकालकर उनका टाइम खराब करने के एवज़ में क्षतिपूर्ति की माँग कर रहे हैं… हालांकि गाँवों में जिस तरह मोतियाबिन्द के ऑपरेशन के आँकड़े बढ़ाचढ़ाकर पेश किये जाते हैं वैसे ही इन दोनों ब्लॉगरों ने बताया कि इन्होंने पहले ही दिन 50 नये ब्लॉग बनवा दिये थे। विश्वविद्यालय इनकी बातों पर विश्वास करने को तैयार नहीं है इसलिये फ़िलहाल इनका मानदेय रोक लिया गया है…

तो भाईयों और बहनों, यह कुछ झलकियाँ थी वर्धा के ब्लॉगर सम्मेलन की, इनमें से अधिकतर बातें विश्वस्त सूत्रों से पता चली हैं और ब्लॉगिंग में आचार संहिता लागू हो चाहे नहीं, पत्रकारिता की संहिता ये कहती है कि अपने विश्वस्त सूत्र का नाम ज़ाहिर नहीं करना चाहिये…

खैर… अब हँसी-ठिठोली बहुत हुई, मुझे मालूम है कि ब्लॉगर सम्मेलन की इस रिपोर्ट में मेरी भाषा शैली से कुछ लोग हैरान होंगे और कुछ परेशान… परन्तु जब सभी लोग वर्धा की रिपोर्ट मुझसे पहले ही सौंप चुके हैं तो मुझे कुछ “हट के” तो बताना ही था…, इसलिये वर्धा सम्मेलन की यह मेरी पहली और आखिरी रिपोर्ट आपके चरणों में अर्पित करता हूं…। “आखिरी” इसलिये कहा, कि इस रिपोर्ट को बनाने के चक्कर में मेरे एक-दो “हिन्दुत्ववादी” लेख पेण्डिंग पड़े हैं, और उनका अधिक देर तक पेण्डिंग पड़े रहना उचित नहीं है, वरना मेरे नियमित पाठक नाराज़ हो जायेंगे…। इस लेख को "अपवाद" के रुप में लिया जाये, क्योंकि जिनके लिये ब्लॉगिंग का मतलब सिर्फ़ हँसी-ठिठोली-मौज-कविता-पहेली है, उनकी बात अलग है और मेरी बात अलग है…।

आशा है कि ब्लॉगर सम्मेलन की यह "संक्षिप्त" रिपोर्ट(?) पसन्द की जायेगी, यदि इसे पढ़कर कोई नाराज़ होता है तो यह सिद्ध हो जायेगा कि जिस तरह अनूप शुक्ल को कोई "सीरियसली" नहीं लेता, वैसे ही मुझे कोई "लाइटली" नहीं लेता…

सिद्धार्थ त्रिपाठी जी भले ही मन ही मन कह रहे हों "अतिथि तुम कब जाओगे…" लेकिन हम हिन्दी ब्लॉगर सोच रहे हैं, "वर्धा तुम दोबारा कब बुलाओगे…"। शेष शुभ हो, सभी ब्लॉगरों को दशहरे की शुभकामनाएं…
==================

चलते-चलते :- जिन ब्लॉगरों ने अपने-अपने कैमरे में मेरी तस्वीरें खींची हैं और भेजने का वादा करने के बावजूद अब तक नहीं भेजी हैं, जल्दी से भेजें… वरना इस वादाखिलाफ़ी के विरोध में इससे भी अधिक "मारक पोस्ट" लिखी जायेगी… 


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52 comments:

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI said...

आपकी उडती चिड़िया बड़े काम की है ....ज्यादतर निष्कर्षों से सहमति जताने में ही भलाई जो है!!!

संजय बेंगाणी said...

तस्वीरें हमने ही देखी नहीं तो कैसे भेजते जी?

गुजरात के दंगों के जिक्र से माहौल नहीं बिगड़ता, उसका अनावश्यक उल्लेख करने से बिगड़ता. मेजबान की इज्जत अपनी इज्जत, बस इसलिए खैर कर गए.

संजय बेंगाणी said...

बहुत सही तरीके से रिपोर्टिंग की है आपने.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Gazab dhayo rama.

रचना said...

इस लेख को "अपवाद" के रुप में लिया जाये, क्योंकि जिनके लिये ब्लॉगिंग का मतलब सिर्फ़ हँसी-ठिठोली-मौज-कविता-पहेली है, उनकी बात अलग है और मेरी बात अलग है…।
this should have been in capital bold letters

not one single report has come which is true to points ie where all the minutes / dialogs have been truly given

on hindutvvadi
in this country not a single hindu will willingly marry his / her children into a muslim family but they will still say they are not hindutavvadi

Pratik Pandey said...

वाह, बढ़िया रपट है जी। काफ़ी "खुलासे" किए गए हैं। :)

ajit gupta said...

चलिए सुरेश जी कम से कम आपके खाते में एक रोचक पोस्‍ट तो जुटी। आपके कैमरे में भी हमारी कोई बदसूरत सी फोटो हो तो कृपया भेज दें। हम सब एक प्रस्‍ताव पारित करके त्रिपाठी जी को धन्‍यवाद तो दे ही दें। वैसे आपने एक सुझाव बढिया दिया है कि अब त्रिपाठी जी की लड़की की शादी में कठिनाई नहीं आएगी। अरे हम सब कठिनाई के रूप में वहाँ उपस्थित रहेंगे ना। नहीं जी हम सब उन्‍हें मुफ्‍त सेवा देंगे। मेरी पोस्‍ट भी शाम को आ रही है, मुहुर्त्त तभी का निकला है।

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद said...

@सुरेश जी बहुत अच्छी रिपोर्ट.दी आपने---

पर अपन को ये काम ज़मता नहीं साहेब.. और न ही आपको ज़मता है.. आप तो कुछ "खोदकर" लाते है तभी मज़ा आता है गुरूजी..
एक बात बताऊँ बुरा मत मानना " अगर सचिन तेंदुलकर बेटिंग छोड़कर रिपोर्टिंग "(चिरकुटगिरी)" करे तो कैसा लगेगा..सेम वैसा ही अपुन को लगा.. अब आने दो कुछ धांसू..


-- हिंदी ब्लॉग जगत में ऐसे सम्मलेन से वास्तव में "हिंदी" में नयी जान आएगी इसमें कोई दो-राय नहीं है..

ब्लोग्गेर्स मीट में शामिल होने वाले सभी महानुभावों को बधाई..

दिवाकर मणि said...

हा हा हा. क्या मारक रिपोर्टिंग की है आपने....मजा आ गया.

उम्दा सोच said...

हा हा हा ! अगर ये पोस्ट ,वीडियो पोस्ट होता तो उड़ती चिड़िया और कौवे का बाईट भी इस पोस्ट के साथ होता !

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद said...

@ सुरेशजी,
एक सवाल - -

बहुत से ब्लॉगस पर इस ब्लॉगर मीट की "सामूहिक फोटो" है...बहुत से ब्लॉगर महानुभाव इन फोटों में है.. पर आपकी एक भी फोटो नहीं है.. क्या वहां "हिन्दुत्ववादी" ब्लागरों का "बायकाट" किया गया था क्या..?? या फिर "हिन्दुत्ववादी" ब्लागरों ने "वाकआउट" कर दिया...??

या फिर आप कही --- ?????


बताइए साहब.. हो सके तो आपकी एक अदद फोटो दिखा दीजिये...

विवेक सिंह said...

साड्डे नाल रहोगे तो ऐसी ही पोस्ट लिखोगे । मजेदार । इमेज से निकल रहे हो आप । बधाई !

honesty project democracy said...

आपकी रिपोर्ट सही मायने में जरा हटके है .....

डॉ महेश सिन्हा said...

कई ब्लागरों का यात्रा वारंट निकल चुका था इसलिए वे सामूहिक कृत्य के सहभागी नहीं बने :)

रवीन्द्र प्रभात said...

यह तेवर ज़रा हट के है सुरेश जी, वैसे आपने देखा होगा क़ि मैंने तस्वीरें नहीं ली थी, यह उत्तरदायित्व जाकिर भाई पर सौंप दिया था, उन्ही से और आपसे तस्वीरें उधार लेकर पोस्ट के साथ पोस्ट किया है ....अच्छा लगा पोल खोलू पोस्ट देखकर !

anitakumar said...

ये हुई न बात, अब हम टिपिया सकते है, सही में पोल खोलू पोस्ट मजेदार रही।a अप ने ये नहीं बताया कि हिन्दूवादी बस में गिर पड़ा था तो उसे संभालने राष्ट्रवादी के हाथ ही सबसे पहले उठे थे…:)

sanjay patel said...

भाऊ
आपकी रिपोर्ट तो मज़ेदार है और इसमें न बुलाए जाने का मलाल पाल कर अब मैं अपने आपको ब्लॉगर मानने का भ्रम नहीं पालूँगा.न जाने कहाँ कहाँ कहता फ़िरता हूँ कि मैं ब्लॉग लिखता हूँ लेकिन अब मुझे अपनी औक़ात समझ में आ गई.

उपसंहार: हाय हम न हुए.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

दुबारा कमेंट करने आया हूँ, वाया चिटठा जगत। वैसे ये 'जरा हटके' लगाने की क्या जरूरत थी। जब आप लिख रहे हो, तो हटके तो होगा ही।
................
वर्धा सम्मेलन: कुछ खट्टा, कुछ मीठा।
….अब आप अल्पना जी से विज्ञान समाचार सुनिए।

Anirudh Pratap Singh Yadav said...

सुरेश जी मै आप का ब्लॉग हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद के लीये पढ़ता हूँ इस बकवास के लीये नहीं

सुज्ञ said...

वाह जी,
उडती चिडिया पिंजरे में बंद कर दी!!

तेवर तो आपके ही है, संजय जी ने स्टाम्प भी मार दिया, रिपोर्टपर।

जी.के. अवधिया said...

रोचक रिपोर्ट!

Arvind Mishra said...

खालिस ब्लागीय रिपोर्ट :) मजेदार ! हिन्दू ब्लॉगर हिंदूवादी ब्लॉगर का फर्क शुकुल महराज समझाएगें क्या ?
बाकी मच्छर और बेड टी का आतंक तो छाया ही रहा -प्रतिभागियों का भला तो सब भला

Ratan Singh Shekhawat said...

बढ़िया लगा रिपोर्टिंग का अंदाज |

अब रिपोर्ट तो पढ़ ली सो आने दीजिए हिंदूवादी लेख |

सम्वेदना के स्वर said...

उड़ती चिडिया और काले कौए के साथ आपको भी बधाई! (अन्दर की खबरें देने के लिये)

हर्षवर्धन said...

ये मारा ! सुरेश जी अब जरा जल्दी से मेरी ईमेल पर एक मेल भेजिए जिसमें आपके शानदार कैमरे में जमा मेरी बहुत शानदार तस्वीरें हैं। :)

डॉ.कविता वाचक्नवी Dr.Kavita Vachaknavee said...

सुरेश जी, हँसते हुए पढी यह आपकी रिपोर्ट.
विवाह तो मेरी ही बेटी का सन्निकट है. लगता है वर्धा में ही आयोजित करना चाहिए और सिद्धार्थ जी की `मुस्कुराहटों पे हो निसार' वाली मुस्कान का पूरा लाभ लेना चाहिए ...

वैसे एक पते की बात बताऊँ (यदि आप के पाठक इसे जानकर कम न होते हों तो कहूँ कि) ... आप तो स्वयं हर स्वयं खिलखिलाते दीखे.

हमारे कैमरे के सारे चित्र शैलेश ने अपने लैपटॉप में अपलोड कर लिए थे, बल्कि अन्य भी कइयों के उसी के लैपटॉप में हैं.
और हाँ, एक .... वादी ब्लॉगर बस में गिरे भी तो थे जिन्हें दुसरे ... वादी ने सहारा दिया था.


http://hindibharat.blogspot.com/2010/10/blog-post_13.html

http://vaagartha.blogspot.com/2010/10/blog-post.html

काजल कुमार Kajal Kumar said...

आह ! ये कैसी अहिन्दुवादी पोस्ट है !
:)

ऋषभ Rishabha said...

शायद आपको याद हो कि १० की शाम की गप्प गोष्ठी में यह सवाल उठा था कि किसे किस [शुद्ध ब्लोगर ]की भाषा सबसे अच्छी लगती है; और मैंने इसका उत्तर नहीं दिया था. अब इस पोस्ट को पढ़कर मैं उत्तर में आपका नाम बताना चाहूँगा.

ZEAL said...

.

आपकी ' ज़रा हट के ' , रिपोर्ट बहुत अच्छी लगी। सच को बिना मिलावट के पेश करना सब के बस की बात भी नहीं होती । बस एक ही दुःख है, यदि मामूली लोगों को भी निमंत्रण मिलता तो मेरे जैसों को भी वर्धा घूमने का एक मौका मिलता, वर्ना वर्धा तो सिर्फ भूगोल के पन्नों पर ही ज्ञात है।

आयोजक एवं वर्धा के अतिथि ब्लोगरों को बधाई ।

.

krishna kumar soni(RANBABU) said...

सरेश जी ,
बाल की खाल निकालना तो कोई आपसे सीखे
इस विविधता भरे लेख के लिए धन्यवाद

वन्दना अवस्थी दुबे said...

सचमुच ज़रा हट के पोस्ट है.

JANARDAN MISHRA said...

SURESH JI
aap ka hindutva aour rashtrabhakti ke report padhne me jyada sukun milta hai........ JAY HIND

ललित शर्मा said...

बढिया रिपोर्टिंग सुरेश भाई

शोभना चौरे said...

बहुत अच्छी रिपोर्टिंग |

बी एस पाबला said...

वाकई में ज़रा हट कर की गई रिपोर्टिंग

जब मैंने फोन किया तो मालूम नहीं था कि आप भी वहीं हो

...और यह वादियों का क्या चक्कर है? अगली बार किन्ही पहाड़ी इलाके की वादियों में 'मीट' का इरादा लगता है :-)

Anonymous said...

आपकी रिपोर्ट काफी कुछ कह जाती है. ब्लोगरो का अनूप शुक्लिया विभाजन मान ले तो दो ही कसिम के ब्लोगर हैं- एक 'हिंदूवादी' और दूसरे 'भोंदूवादी' ब्लोगर. एक की प्रेरणा हिंदुत्व और राष्ट्रवादहै तो दूसरे की प्रेरणा 'भोंदू युवराज'..!!

Jeet Bhargava said...

आपकी रिपोर्ट काफी कुछ कह जाती है. ब्लोगरो का अनूप शुक्लिया विभाजन मान ले तो दो ही कसिम के ब्लोगर हैं- एक 'हिंदूवादी' और दूसरे 'भोंदूवादी' ब्लोगर. एक की प्रेरणा हिंदुत्व और राष्ट्रवादहै तो दूसरे की प्रेरणा 'भोंदू युवराज'..!!

प्रतिभा सक्सेना said...

इस रिपोर्ट से बहुत जानकारियाँ मिली .
ब्लाग्ज़ का महत्व तो प्रतिपादित हुआ ही
विश्वास है व्यावहारिक मान-मूल्य विकसित होने की प्रक्रिया आगे चलेगी और संवाद तथा संचार के क्षेत्र में इस जनतांत्रिक विधा की हलचल ने लोगों कान खड़े कर दिये होंगे .
जिनके नाम भर सुने थे उन्हें और उनके विषय में जानना बहुत अच्छा लगा .
आप सब को बहुत-बहुत बधाई ,
साथ ही हमारे लिए यह सब प्रस्तुत करने के लिए आभार.

Amit said...

Bahut achhi report hai Sir !!

Waise aapke blogs ka kafi asar ho raha hai. Main aapke blog ka poore jor shor se prachar kar raha hoon. Waise mujhe jyada mehnat nahin karni padti. Ek bar koi aapka blog padh le to fir aapka regular reader ban jata hai.

Waise aapke hi blogs ka asar hai ki maine aur mere kafi doston ne party Join karne aur desh aur Hinduism ke liye kuch karne ka man bana liya hai. Aapki Shubh kamnao ki jarurat hai !

Mahak said...

आपकी रिपोर्ट सही मायने में जरा हटके है .....

charkli said...

सुरेश जी,
आपकी पोस्ट पढ़कर मजा आया। आपने वर्धा ब्लॉगर सम्मेलन में आमंत्रित हर ब्लॉगर के बारे में बड़ी ही सटिक टिप्पणी है। जिसमें हास्य के पुट ने उसे और भी अधिक रोचक बना दिया है।
सच कहूँ तो हम 'मालवाचंल' के लोगों की खासियत यही है कि हम 'पामणों' का बड़ा आवआदर करते हैं और जब कोई हमारा आवआदर करता है तो हम कभी उसकी बेवजह आलोचना नहीं करते हैं।
बढि़या व उम्दा पोस्ट के लिए बधाई।

charkli said...

सुरेश जी,
आपकी पोस्ट पढ़कर बड़ा अच्छा लगा। आपने वर्धा ब्लॉगर सम्मेलन में पधारे सभी ब्लॉगरों के बारे में बिल्कुल सटिक टिप्पणी की है। आपकी लेखन शैली उसमें स्थान स्थान पर हास्य का पुट आपकी पोस्ट को और भी रोचक व प्रभावी बना रहा है।
सच कहूँ तो यह हम 'मालवाचंल' के लोगों की खासियत है कि हम अपने घर पधारे 'पामणों'की आवभगत में कोई कसर बाकी नहीं रखते हैं और जब हम किसी के घर आमंत्रित किए जाते हैं तो हम कभी उसकी बेवजह बुराई नहीं करते हैं। मालव माटी की यह झलक आपकी पोस्ट में साफ तौर पर झलकती है। अंत में एक अच्छी पोस्ट के लिए पुनश्च बधाई।

priti said...

Priti sagar..That fraud lady will coordinate the blogging in wardha..who has been declared Literary writer without any creative work..who has got prepared fake icard of non existing employee..surprising

Priti Krishna said...

HINDI BLOGGING MEIN BHI AJEEB TAMASHE CHAL RAHI HAI..MAHATMA GANDHI ANTARRASHTRIYA HINDI VISHWAVIDYALAYA , WARDHA KE BLOG PER ENGLISH KI EK POST PER PRITI SAGAR NE EK COMMENT POST KI HAI…AISA LAGA KI POST KO SABSE JYADA PRITI SAGAR NE HI SAMJHA..PER SACHHAI YE HAI KI PRITI SAGAR NA TO EK LINE BHI ENGLISH LIKH SAKTI HAIN AUR NA HI BOL SAKTI HAIN…BINA KISI LITERARY CREATIVE WORK KE PRITI SAGAR KO UNIVERSITY KI WEBSITE PER LITERARY WRITER BANA DIYA GAYA…PRITI SAGAR NE SUNITA NAAM KI EK NON EXHISTING EMPLOYEE KE NAAM PER HINDI UNIVERSITY KA EK FAKE ICARD BANWAYA AUR US ICARD PER SIM BHI LE LIYA…IS MAAMLE MEIN CBI AUR CENTRAL VIGILECE COMMISSION KI ENQUIRY CHAL RAHI HAI.. MEDIA KE LOGON KE PAAS SAARE DOCUMETS HAI AUR JALDI HI YEH HINDI UNIVERSITY WARDHA KA YAH SCANDAL NATIONAL MEDIA MEIN HIT KAREGA….AISE FRAUD BLOGGERS SE NA TO HINDI BLOGGING KA BHALA HOGA , NA TECHNOLOGY KA AUR NA HI DESH KA…KYUNKI GANDI MACHLI KI BADBOO SE POORA TAALAB HI BADBOODAAR HO JAATA HAI

Priti Krishna said...

Lagta hai Mahatma Gandhi Hindi Vishwavidyalaya men saare moorkh wahan ka blog chala rahe hain . Shukrawari ki ek 15 November ki report Priti Sagar ne post ki hai . Report is not in Unicode and thus not readable on Net …Fraud Moderator Priti Sagar Technically bhi zero hain . Any one can check…aur sabse bada turra ye ki Siddharth Shankar Tripathi ne us report ko padh bhi liya aur apna comment bhi post kar diya…Ab tripathi se koi poonche ki bhai jab report online readable hi nahin hai to tune kahan se padh li aur apna comment bhi de diya…ye nikammepan ke tamashe kewal Mahatma Gandhi Hindi Vishwavidyalaya, Wardha mein hi possible hain…. Besharmi ki bhi had hai….Lagta hai is university mein har shakh par ullu baitha hai….Yahan to kuen mein hi bhang padi hai…sab ke sab nikamme…

Priti Krishna said...

Praveen Pandey has made a comment on the blog of Mahatma Gandhi Hindi University , Wardha on quality control in education...He has correctly said that a lot is to be done in education khas taur per MGAHV, Wardha Jaisi University mein Jahan ka Publication Incharge Devnagri mein 'Web site' tak sahi nahin likh sakta hai..jahan University ke Teachers non exhisting employees ke fake ICard banwa kar us per sim khareed kar use karte hain aur CBI aur Vigilance mein case jaane ke baad us SIM ko apne naam per transfer karwa lete hain...Jahan ke teachers bina kisi literary work ke University ki web site per literary Writer declare kar diye jaate hain..Jahan ke blog ki moderator English padh aur likh na paane ke bawzood english ke post per comment kar deti hain...jahan ki moderator ko basic technical samajh tak nahi hai aur wo University ke blog per jo post bhejti hain wo fonts ki compatibility na hone ke kaaran readable hi nain hai aur sabse bada Ttamasha Siddharth Shankar Tripathi Jaise log karte hain jo aisi non readable posts per apne comment tak post kar dete hain...sach mein Sudhar to Mahatma Handhi Antarrashtriya Hindi Vishwavidyalaya , Wardha mein hona hai jahan ke teachers ko ayyashi chod kar bhavishya mein aisa kaam na karne ka sankalp lena hai jisse university per CBI aur Vigilance enquiry ka future mein koi dhabba na lage...Sach mein Praveen Pandey ji..U R Correct.... बहुत कुछ कर देने की आवश्यकता है।

Priti Krishna said...

MAHATMA Gandhi Hindi University , Wardha ke blog per wahan ke teacher Ashok nath Tripathi nein 16 november ki post per ek comment kiya hai …Tripathi ji padhe likhe aadmi hain ..Wo website bhi shuddha likh lete hain..unhone shayad university ke kisi non exhisting employee ki fake id bhi nahin banwai hai..aur unhone program mein present na rahne ke karan pogram ke baare mein koi comment nahin kia..I respect his honesty ..yahan to non readable post per bhi log apne comment de dete hain...really he is honest...Unhen salaam….

Priti Krishna said...

महोदय/महोदया
आपकी प्रतिक्रया से सिद्धार्थ जी को अवगत करा दिया गया है, जिसपर उनकी प्रतिक्रया आई है वह इसप्रकार है -

प्रभात जी,
मेरे कंप्यूटर पर तो पोस्ट साफ -साफ़ पढ़ने में आयी है। आप खुद चेक कीजिए।
बल्कि मैंने उस पोस्ट के अधूरेपन को लेकर टिप्पणी की है।
ये प्रीति कृष्ण कोई छद्मनामी है जिसे वर्धा से काफी शिकायतें हैं। लेकिन दुर्भाग्य से इस ब्लॉग के संचालन के बारे में उन्होंने जो बातें लिखी हैं वह आंशिक रूप से सही भी कही जा सकती हैं। मैं खुद ही दुविधा में हूँ।:(
सादर!
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय
वर्धा, महाराष्ट्र-442001
ब्लॉग: सत्यार्थमित्र
वेबसाइट:हिंदीसमय

इसपर मैंने अपनी प्रतिक्रया दे दी है -
सिद्धार्थ जी,
मैंने इसे चेक किया, सचमुच यह यूनिकोड में नहीं है शायद कृतिदेव में है इसीलिए पढ़ा नही जा सका है , संभव हो तो इसे दुरुस्त करा दें, विवाद से बचा जा सकता है !

सादर-
रवीन्द्र प्रभात

अविनाश वाचस्पति said...

इतना जरा सा और भी हटिए
हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के एक सेमिनार में शामिल ब्‍लॉगरों के हथियारों की झलक

sonu said...

महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्‍वविद्यालय, वर्धा के ब्लॉग हिन्दी विश्‍व पर राजकिशोर के ३१ डिसेंबर के 'एक सार्थक दिन' शीर्षक के एक पोस्ट से ऐसा लगता है कि प्रीति सागर की छीनाल सस्कृति के तहत दलाली का ठेका राजकिशोर ने ही ले लिया है !बहुत ही स्तरहीन , घटिया और बाजारू स्तर की पोस्ट की भाषा देखिए ..."पुरुष और स्त्रियाँ खूब सज-धज कर आए थे- मानो यहां स्वयंवर प्रतियोगिता होने वाली ..."यह किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के विश्‍वविद्यालय के औपचारिक कार्यक्रम की रिपोर्टिंग ना होकर किसी छीनाल संस्कृति के तहत चलाए जाने वाले कोठे की भाषा लगती है ! क्या राजकिशोर की माँ भी जब सज कर किसी कार्यक्रम में जाती हैं तो किसी स्वयंवर के लिए राजकिशोर का कोई नया बाप खोजने के लिए जाती हैं !

Priti Krishna said...

महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्‍वविद्यालय वर्धा के ब्लॉग हिन्दी-विश्‍व पर आज २ पोस्ट आई हैं.-हिंदी प्रदेश की संस्थाएं: निर्माण और ध्वंस और गांधी ने पत्रकारिता को बनाया परिवर्तन का हथियार .इन दोनों में इतनी ग़लतियाँ हैं कि लगता है यह किसी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्‍वविद्यालय का ब्लॉग ना हो कर किसी प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे का ब्लॉग हो ! हिंदी प्रदेश की संस्थाएं: निर्माण और ध्वंस पोस्ट में - विश्वविद्यालय,उद्बोधन,संस्थओं,रहीं,(इलाहबाद),(इलाहबाद) ,प्रश्न , टिपण्णी जैसी अशुद्धियाँ हैं ! गांधी ने पत्रकारिता को बनाया परिवर्तन का हथियार- गिरिराज किशोर पोस्ट में विश्वविद्यालय, उद्बोधन,पत्नी,कस्तूरबाजी,शारला एक्ट,विश्व,विश्वविद्यालय,साहित्यहकार जैसे अशुद्ध शब्द भरे हैं ! अंधों के द्वारा छीनाल संस्कृति के तहत चलाए जा रहे किसी ब्लॉग में इससे ज़्यादा शुद्धि की उम्मीद भी नहीं की जा सकती ! सुअर की खाल से रेशम का पर्स नहीं बनाया जा सकता ! इस ब्लॉग की फ्रॉड मॉडरेटर प्रीति सागर से इससे ज़्यादा की उम्मीद भी नहीं की जा सकती !

Priti Krishna said...

महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय,वर्धा के ब्लॉग हिन्दी-विश्व पर २६ फ़रवरी को राजकिशोर की तीन कविताएँ आई हैं --निगाह , नाता और करनी ! कथ्य , भाषा और प्रस्तुति तीनों स्तरों पर यह तीनों ही बेहद घटिया , अधकचरी ,सड़क छाप और बाजारू स्तर की कविताएँ हैं ! राजकिशोर के लेख भी बिखराव से भरे रहे हैं ...कभी वो हिन्दी-विश्व पर कहते हैं कि उन्होने आज तक कोई कुलपति नहीं देखा है तो कभी वेलिनटाइन डे पर प्रेम की व्याख्या करते हैं ...कभी किसी औपचारिक कार्यक्रम की रिपोर्टिंग करते हुए कहते हैं कि सब सज कर ऐसे आए थे कि जैसे किसी स्वयंवर में भाग लेने आए हैं .. ऐसा लगता है कि ‘ कितने बिस्तरों में कितनी बार’ की अपने परिवार की छीनाल संस्कृति का उनके लेखन पर बेहद गहरा प्रभाव है . विश्वविद्यालय के बारे में लिखते हुए वो किसी स्तरहीन भांड से ज़्यादा नहीं लगते हैं ..ना तो उनके लेखन में कोई विषय की गहराई है और ना ही भाषा में कोई प्रभावोत्पादकता ..प्रस्तुति में भी बेहद बिखराव है...राजकिशोर को पहले हरप्रीत कौर जैसी छात्राओं से लिखना सीखना चाहिए...प्रीति सागर का स्तर तो राजकिशोर से भी गया गुजरा है...उसने तो इस ब्लॉग की ऐसी की तैसी कर रखी है..उसे ‘कितने बिस्तरों में कितनी बार’ की छीनाल संस्कृति से फ़ुर्सत मिले तब तो वो ब्लॉग की सामग्री को देखेगी . २५ फ़रवरी को ‘ संवेदना कि मुद्रास्फीति’ शीर्षक से रेणु कुमारी की कविता ब्लॉग पर आई है..उसमें कविता जैसा कुछ नहीं है और सबसे बड़ा तमाशा यह कि कविता का शीर्षक तक सही नहीं है..वर्धा के छीनाल संस्कृति के किसी अंधे को यह नहीं दिखा कि कविता का सही शीर्षक –‘संवेदना की मुद्रास्फीति’ होना चाहिए न कि ‘संवेदना कि मुद्रास्फीति’ ....नीचे से ऊपर तक पूरी कुएँ में ही भांग है .... छिनालों और भांडों को वेलिनटाइन डे से फ़ुर्सत मिले तब तो वो गुणवत्ता के बारे में सोचेंगे ...वैसे आप सुअर की खाल से रेशम का पर्स कैसे बनाएँगे ....हिन्दी के नाम पर इन बेशर्मों को झेलना है ..यह सब हमारी व्यवस्था की नाजायज़ औलाद हैं..झेलना ही होगा इन्हें …..