Friday, October 15, 2010

पश्चिम बंगाल में बजरंग बली की मूर्ति प्रतिबन्धित हैं?…… Communist Secularism and Islamic Fanatics

कोलकाता में बजबज इलाके के चिंगरीपोटा क्षेत्र में रहने वाले एक व्यवसायी श्री प्रशान्त दास ने अपने घर की बाउंड्रीवाल के प्रवेश द्वार पर बजरंग बली की मूर्ति लगा रखी है। 14 अगस्त की रात को बजबज पुलिस स्टेशन के प्रभारी राजीव शर्मा इनके घर आये और इन्हें वह मूर्ति तुरन्त हटाने के लिये धमकाया। पुलिस अफ़सर ने यह कृत्य बिना किसी नोटिस अथवा किसी आधिकारिक रिपोर्ट या अदालत के निर्देश के बिना मनमानी से किया। पुलिस अफ़सर का कहना है कि उनके मुख्य द्वार पर लगी बजरंग बली की मूर्ति से वहाँ नमाज़ पढ़ने वाले मुस्लिमों की भावनाएं आहत होती हैं।

पुलिस अफ़सर ने उन्हें "समझाया"(?) कि या तो वह बजरंग बली की मूर्ति का चेहरा घर के अन्दर की तरफ़ कर लें या फ़िर उसे हटा ही लें। स्थानीय मुसलमानों ने (मौखिक) शिकायत की है कि नमाज़ पढ़ते समय इस हिन्दू भगवान की मूर्ति को देखने से उनका ध्यान भंग होता है और यह गैर-इस्लामिक भी है। उल्लेखनीय है कि उक्त मस्जिद प्रशान्त दास के मकान के पास स्थित प्लॉट पर अवैध रुप से कब्जा करके बनाई गई है, यह प्लॉट दास का ही था, लेकिन कई वर्षों तक खाली रह जाने के दौरान उस पर कब्जा करके अस्थाई मस्जिद बना ली गई है और अब उनकी निगाह दास के मुख्य मकान पर है इसलिये दबाव बनाने की कार्रवाई के तहत यह सब किया जा रहा है।


श्री दास का कहना है कि पवनपुत्र उनके परिवार के आराध्य देवता हैं और यह उनकी मर्जी है कि वे अपनी सम्पत्ति में हनुमान की मूर्ति कहाँ लगायें या कहाँ न लगायें। मूर्ति मेरे घर में लगी है न कि कहीं अतिक्रमण करके लगाई गई है, इसलिये एक नागरिक के नाते यह मेरा अधिकार है कि अपनी प्रापर्टी में मैं कोई सा भी पोस्टर अथवा मूर्ति लगा सकता हूं, बशर्ते वह अश्लीलता की श्रेणी में न आता हो। परन्तु पुलिस अफ़सर ने लगातार दबाव बनाये रखा है, क्योंकि उस पर भी शायद ऊपर से दबाव है।

पश्चिम बंगाल जिस तेजी से इस्लामी रंग में रंगता जा रहा है उसके कई उदाहरण आते रहे हैं, परन्तु आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी पार्टियाँ मुस्लिम वोट बैंक के पालन-पोषण में जोर-शोर से लगी हैं, हाल ही में ममता बनर्जी ने रेल्वे के एक उदघाटन समारोह के सरकारी पोस्टर में खुद को नमाज़ पढ़ते दिखाया था। ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि बजबज इलाके के माकपा कार्यालय को हनुमान की मूर्ति हटाने के अनाधिकृत आदेश के बारे में जानकारी न हो, परन्तु अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह से वामपंथ और इस्लाम एक दूसरे से हाथ मिलाते जा रहे हैं, उस स्थिति में बंगाल और केरल के हिन्दुओं की कोई सुनवाई होने वाली नहीं है। फ़िलहाल प्रशान्त दास ने अदालत की शरण ली है कि वह पुलिस को धमकाने से बाज आने को कहे, पर लगता है अब पश्चिम बंगाल में कोई अपने घर में ही हिन्दू भगवानों की मूर्ति नहीं लगा सकता, क्योंकि इससे वहाँ अवैध रुप से नमाज़ पढ़ रहे मुस्लिमों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, मजे की बात तो यह है कि यही "कमीनिस्ट" लोग खुद को सबसे अधिक धर्मनिरपेक्ष कहते नहीं थकते…

अब दो तस्वीरें इन्हीं कमीनिस्ट इतिहासकारों और उन रुदालियों के लिये जो बाबरी ढाँचा टूटने और अयोध्या के अदालती निर्णय आने के बाद ज़ार-ज़ार रो रही हैं और अपने कपड़े फ़ाड़ रही हैं…

पहली तस्वीर 1989 में कश्मीर में स्थित एक शिव मन्दिर की है… 



यह दूसरी तस्वीर उसी मन्दिर की है 2009 की, जिसमें शिवलिंग तो गायब ही है, जलाधरी और गर्भगृह की दीवार भी टूटी हुई साफ़ दिखाई दे रही है…


अमन की आशा कार्यक्रम चलाने वाले बिकाऊ, कश्मीर पर समितियाँ बनाने वाले नादान, अलगाववादियों के आगे गिड़गिड़ाने वाले पिलपिले नेता, आतंकवादियों को मासूम बताने वाले पाखण्डी, अयोध्या निर्णय आने के बाद एक फ़र्जी मस्जिद के लिये आँसू बहाने वाले मगरमच्छ… सभी सेकुलर, कांग्रेसी और वामपंथी अब कहीं दुबके बैठे होंगे… उन्हें यह तस्वीरें देखकर उनके सबसे निकटस्थ पोखर में डूब मरना चाहिये…। अब सोचिये, इस जगह पर पाकिस्तान से मोहम्मद हाफ़िज़ सईद आकर एक मस्जिद बना दे, उसमें नमाज़ पढ़ी जाने लगे, फ़िर 400 साल बाद फ़र्जी वामपंथी इतिहासकार इसे "पवित्र मस्जिद" बताकर अपनी छाती कूटें तो क्या होगा? जी हाँ सही पहचाना आपने… उस समय भी गाँधीवादियों द्वारा हिन्दुओं को ही उपदेश पिलाना जारी रहेगा…

ताज़ा खबरों के अनुसार पश्चिम बंगाल के देगंगा इलाके के 500 हिन्दू परिवारों ने उनके साल के सबसे बड़े त्योहार दुर्गापूजा को नहीं मनाने का फ़ैसला किया है, आसपास के सभी गाँवों की पूजा समितियों ने इस मुहिम में साथ आने का फ़ैसला किया है, क्योंकि देगंगा में सितम्बर माह में हुए भीषण दंगों (यहाँ पढ़ें…) के बावजूद किसी प्रमुख उपद्रवी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है, न ही तृणमूल सांसद नूर-उल-इस्लाम के खिलाफ़ कोई कार्रवाई की गई है। 1946-47 में भी इसी तरह नोआखाली में नृशंस जातीय सफ़ाये के विरोध में हिन्दुओं ने "काली दीपावली" मनाई थी, जब वध किये जाने से पहले एक "तथाकथित शान्ति का मसीहा" उपवास पर बैठ गया था। आज इतने सालों बाद भी देगंगा के हिन्दू… मीडिया की बेरुखी और मुस्लिम वोटों के बेशर्म सौदागरों की वजह से "काला दशहरा" मनाने को मजबूर हैं…
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विशेष नोट - मेरे नियमित पाठक वर्धा सम्बन्धी मेरी पिछली पोस्ट को "इग्नोर" करें, उसे "बकवास निरुपित करने" और "इससे हमें क्या मतलब?" जैसे मंतव्य वाले कुछ शिकायती ईमेल भी प्राप्त हुए हैं…। प्रिय पाठक निश्चिन्त रहें जल्दी ही "वैसी" पोस्टों के लिये एक अलग ब्लॉग शुरु करने की योजना है। बीच में 3-4 दिन वर्धा ब्लॉगर सम्मेलन के कारण टिप्पणियों को प्रकाशित करने में देरी हो गई, इसके लिये भी क्षमाप्रार्थी हूं…


कश्मीर सम्बन्धी दोनों चित्र - श्री पवन दुर्रानी के सौजन्य से (via Twitter)

अन्य स्रोत -
http://southbengalherald.blogspot.com/2010/10/bajrangbali-banned-in-bengal.html



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47 comments:

अन्तर सोहिल said...

जो दूसरे के इष्ट को देखकर आहत होता है वह इबादत किस काम की?

प्रणाम

honesty project democracy said...

मैं किसी धर्म या कौम विशेष के सन्दर्भ में आपकी इस पोस्ट को नहीं देख रहा बल्कि यह पोस्ट पश्चिम बंगाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के हनन को दर्शाता है और असामाजिक तत्वों को भ्रष्ट राजनेताओं द्वारा किस बेशर्मी से पोषित और रक्षित किया जाता है इसकी भी मिसाल देता है | धर्म निरपेक्षता यह नहीं की कोई तो लाउडस्पीकर से डेली अपने अराध्य को बुलाये और किसी को अपने द्वार पर अराध्य की मूर्ति लगाने का भी सरकारी प्रतिरोध का सामना करना परे | दरअसल इन साले भ्रष्ट राजनेताओं को सरे आम ऐसे कृत्यों के लिए जब तक आम लोग जूते नहीं मारेंगे ये हरामी और इनके हरामी चमचे जिनका धर्म नाम से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं होता है अपनी गन्दी हरकतों से बाज नहीं आयेंगे | हम श्री प्रशांत दास के अभिव्यक्ति की स्वंत्रता की ही नहीं बल्कि उनके आराधना के स्वतंत्रता की भी रक्षा करने की पश्चिम बंगाल के सरकार सहित भारत सरकार से भी आग्रह करते हैं ...

संजय बेंगाणी said...

पाठकों का दबाव पोस्टों पर नहीं होना चाहिए. आपकी पिछली पोस्ट भी सुन्दर थी.

नालायक कमिनिष्टों पर अब कहने को शब्द नहीं. हिन्दु मीडिया क्योंकि राष्ट्रवादी इसी नाम से जाने जाते है, की जरूरत इस समय सबसे ज्यादा है.

KK Yadava said...

यही तो विडंबना है...

त्यागी said...

vir tum bade chalo, dhir tum bade chalo.
www.parsuram27@blogspot.com

दिवाकर मणि said...

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सुरेश जी, आपकी हर पोस्ट लोग, समाज, व देश के भूत, वर्तमान व भविष्य की घटनाओं का आईना है. हमारे भूतकालिक भूलों का खामियाजा आज चारों ओर अपना लादेनी व बुखारी मुँह फैलाए खड़ा है, लेकिन शायद हम व हमारी सरकार फिर भी अपनी जयचंदी कुकृत्यों से कुछ भी ना सीखने को अभिशप्त है. देश के हर कोने में लादेनों के नए-नए समूह तैयार हो रहे हैं, और उन्हें खड़ा करने का श्रेय हमारे ही समाज के कुछ नाजायज लोगों यथा- मुल्ला मुलायम, ललूआ यादव, राम के नाम को बदनाम करता विलास पासवान, जयचंद की मां ममता बानरजी, इटली मैया के चमचे कांग्रेसी जन, कमीनिस्ट इत्यादि के नव-छद्म धर्मनिरपेक्षता के प्रणेता भाजपा के कतिपय नेतागण, को है.

बाकी, इस दोगले, बर्बर, म्लेच्छ सोच वाले आतंकवादी संप्रदाय के गुंडई मानसिकता वाले लादेन, बाबर के भारत में रहने वाले नाजायज औलादों के बारे में क्या कहना....इनके लिए तो एक पाकिस्तानी लेखक की यह उक्ति ही सबकुछ बयां कर देती है... वे कहते हैं कि - "दुनिया के किसी भी कोने में जब तक इस आतंकवादी मानसिकता वाले धर्म के अनुयायी अल्पसंख्या में रहते हैं, गीदड़ या भेड़ बन कर रहते हैं, जब बराबरी में आ जाते हैं तो समान शक्ति वाले साँढ़ की तरह हो जाते हैं, और जब संख्या में एक भी अधिक हो जाते हैं तो फ़िर भेड़िया बन जाते हैं." कितनी सही बात कही है, इस लेखक ने... दूर कहीं क्या जाना... भारत के अंग आज के कश्मीर को ही देख लो..... और उसी रास्ते पर प. बंगाल, आसाम इत्यादि जा रहे हैं....

वैसे भी सच्ची बात तो यह है कि भले ही कोई इस्लाम व उसके मध्यकालीन सोच वाले अनुयायियों को अमन व शांति का धर्म व पुरोधा बतलाता रहे....है तो यह बुखारियों, लादेनों, व अनगिनत आतंकवादियों को ही टोकरी भर-भर कर पैदा करने वाली जमात...
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Suresh Chiplunkar said...

बेंगाणी जी आप सही कहते हैं, लेकिन पाठकों के प्रेम और "बहुमत" का दबाव आ ही जाता है…
वैसे मैं इसे दबाव की बजाय "ब्राण्ड के प्रति प्रेम" मानता हूं :) :)
वैसे भी वर्धा के सम्मेलन के बारे में उन पाठकों को क्या इंटरेस्ट हो सकता है जो हिन्दी ब्लॉगिंग को नहीं जानते या ब्लॉगर नहीं हैं…

DEEPAK BABA said...

"अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह से वामपंथ और इस्लाम एक दूसरे से हाथ मिलाते जा रहे हैं, उस स्थिति में बंगाल और केरल के हिन्दुओं की कोई सुनवाई होने वाली नहीं है।"



एक नग्न सत्य है जो विकास और उन्नति रूपी अन्धकार में नहीं दिख रहा .......

जय राम जी की.

दीर्घतमा said...

सेकुलर क़ा अर्थ हिन्दू बिरोध हो गया है.
वाह रे धर्मनिरपेक्षता जिसमे हिन्दू नंबर दो क़ा नागरिक हो गया है मुसलमानों की हार इक्षा पूरी करना ही सच्ची धर्मनिरपेक्षता है ,जबतक हिन्दू समाज सोता रहेगा तबतक यह होता रहेगा बामपंथी और इस्लाम क़ा तो समझौता है ममता भी एक कदम आगे है सोचना हिन्दुओ को है की उन्हें क्या करना?

RAJENDRA said...

आदरणीय सुरेशजी लम्बे समय तक सहन करना भी असामाजिक तत्वों को उनकी कुत्सित योजनाओं को मजबूती से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है - आपका धन्यवाद कि आप ऐसी घटनाओं को सामने ला देते हैं . ये बात केवल पश्चिम बंगाल में ही नहीं अन्य hजगह भी पूरी शिद्दत के साथ जारी है इसमें मीडिया का भी योगदान निष्पक्ष नहीं है वे पता नहीं क्यों सेकुलर दिखाने के फेर में तथ्यों को सामने नहीं लेट.

ajit gupta said...

ये धर्मनिरपेक्ष सरकारें इस देश को पाकिस्‍तान बनाकर छोडेंगी। लेकिन औरंगजेब के काल में भी हिन्‍दुत्‍व समाप्‍त नहीं हुआ था जबकि उसके सैनिकों ने सम्‍पूर्ण भारत के मंदिरों को ही नहीं अपितु एक-एक मूर्ति तक को खण्डित कर दिया था। मैं तो मानती हूँ कि 30 सितम्‍बर के बाद एक नवीन भारत का उदय हो चुका है और अब इस देश में पुन: श्रीराम स्‍थापित होंगे। प्रत्‍येक घर पर हनुमान इसी प्रकार पहरा देंगे। अब बुखारी जैसे लोग भड़कने लगे हैं। मुस्लिम भाइयों को भी समझ आने लगा है कि कौन इस देश में झगड़ा करा रहा है।

डॉ महेश सिन्हा said...

इन कम-निष्ठों, जिनकी निष्ठा अपनी मातृभूमि से नहीं होकर और किसी भी से हो सकती है, का एक गिरोह है जो विभिन्न रूप धर के इस देश को बरबाद करने के षड्यंत्र में लगा है । इसका सबसे बुरा पक्ष यह है की तथाकथित मानवाधिकार की आड़ में यह इस देश के युवा वर्ग को दिग्भ्रमित कर रहे हैं।
अब दिग्विजयसिंग आरएसएस को isi के पैसे से चलता बता रहे हैं। लगता है इनकी ऊपरी मंजिल पूरी तरह से खाली हो चुकी है ।
मुझे एक बात आज तक नहीं समझ आयी की इतने बड़े शक्ति के उपासक बंगाल के लोग कैसे वामपंथी हो गए ??

डॉ महेश सिन्हा said...


मेकाले ने जो षड्यंत्र 1835 में रचा था वो अभी तक जारी है।

एक मुस्लिम पत्रकार के प्रश्न से निरुत्तर होकर शाही इमाम उससे हाथापाई पर उतर आए और जान से मारने की धम्की दे डाली !!

vikas mehta said...

suresh ji karipya aap apne lekh rashtriy smachar patro me bheje jisse hindu smaaj yudhstr par jagrit ho

Ratan Singh Shekhawat said...

इन नालायक दोगले कम्युनिष्टों से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है !!

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद said...

@ सुरेश जी,

टेंशन मत लीजिये... "वामपंथियों" का भी चालीवाड़ा (चाल्यमान) शुरू हो चूका है...इनके मुंह पर कड़क थप्पड़ मारा गया है जिसकी गूंज चीन से लेकर कलकत्ता तक सुनायी दे रही है... आपको सुनायी दी.....???

अगली पोस्ट में बताऊंगा,, बहुत जल्द--

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--- रही बात पिछली पोस्ट की तो सुरेशजी ऐसी पोस्ट लिखने के लिए बहुत से ब्लॉग है.. जो कवितायें, कहानिया, चुटकले सुनातें है.. "मारक" पोस्ट लिखने वाले आप जैसे ब्लॉग बहुत कम है.. इसलिए ऐसे ही "आपको ऐसे ही ब्रांड सूट" करते है..

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

जब बुखारी पत्रकार को मारने की धमकी देता है और उसके समर्थक उसे मारने लगते हैं तो इन लोगों की मानसिकता समझी जा सकती है. यह छद्म सेकुलर तो धर्म परिवर्तन कर लेंगे लेकिन आम आदमी मुश्किल में आ जायेगा...

अवधेश पाण्डेय said...

देश के दुश्मन कम्मुनिस्ट आखिरी सान्से गिन रहे है, बोलो बजरन्ग बली की जय.

JANARDAN MISHRA said...

ab samay aa gaya hai bajrang bali aap apna sahi rup dikhaiye aur kuch voto ki lalch me kuch pakhandi hinduo ki bhavna ko jo thesh pahucha rahe hai unhe sabak sikhaiye......... JAY BAJRANG BALI

ZEAL said...

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कुछ हिन्दुओं की अकर्मण्यता , देशद्रोही मुसलामानों का मनोबल बढ़ा रही है।

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सौरभ आत्रेय said...

@अब सोचिये, इस जगह पर पाकिस्तान से मोहम्मद हाफ़िज़ सईद आकर एक मस्जिद बना दे, उसमें नमाज़ पढ़ी जाने लगे, फ़िर 400 साल बाद फ़र्जी वामपंथी इतिहासकार इसे "पवित्र मस्जिद" बताकर अपनी छाती कूटें तो क्या होगा?

क्या आपको अभी भी आशा है ४०० साल तक धर्म बचेगा, आज की परिस्तिथि को देखते हुए तो लगता है ४० साल भी नहीं लगेंगे हिन्दुओं का विनाश होने में और तब तक इस देश में ये फर्जी या सच्चे वामपंथी, सेकुलर इत्यादि भी नहीं बचेंगे छाती कूटने के लिये क्योंकि तब तक देश में इस्लाम अर्थात शान्ति के मजहब का राज्य कायम हो चुका होगा.

विनाशकाले विपरीतबुद्धि !!

Shailendra Singh said...

सुरेश जी , हूँ तो में डॉक्टर और अपने क्षेत्र में ठीक से काम भी कर रहा हूँ, पर अब ऐसा लगता है कि सक्रिय राजनीती में कदम रखना पड़ेगा वरना ये सेकुलर लोग इस देश को खा जायंगे | हमें अटल जी जैसे १०-१५ नेताओ को जरूरत है जो इस देश के हिन्दुओं को उनके स्वाभिमान का अहसास करा सकें | आप ऐसे ही लिखते रहिये , धीरे धीरे कारवां बनता चला जायेगा |

एक बात और वो वर्धा वालो पोस्ट में मजा नहीं आया , आप अपना कीमती समय सिर्फ देश को जाग्रत करने में लगाइए , वर्धा वाले काम दुसरे लोगों को करने दीजिये |

आपके लिए एक लिंक भेज रहा हूँ , नवभारत टाइम्स कि है , एक नागर जी नाम के लेखक है , उनका ब्लॉग है, समय मिले तो जरूर देखिएगा |
http://blogs.navbharattimes.indiatimes.com/ekla-chalo/entry/%E0%A4%95-%E0%A4%AF-%E0%A4%AE%E0%A4%B8-%E0%A4%9C-%E0%A4%A6

शैलेन्द्र सिंह

awyaleek said...

२-३ दिनों से मैं यह सोच ही रहा था कि बजरंगबली को तो वरदान प्राप्त है इसलिए पूरे भारत में सबसे सबसे ज्यादा उनके ही मंदिर हैं पर बंगाल में इनकी संख्या इतनी कम क्यों है...!!सच में मैं करीब २-३ महीने से यहाँ हूँ पर उनकी एक भी मंदिर दिखाई नहीं पड़ी...आपके ब्लाग ने सब कुछ समझा दिया मुझे...इतना तो है कि ये सब अब ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाला है..इसका प्रमाण स्वंय मैं ही तो हूँ कि इतनी कम उम्र में आपलोगों के साथ इन सब बातों पर चर्चा में भाग ले रहा हूँ.अर्थ ये है कि आने वाले ५-६ सालों में भारत के संसद भवन युवाओं के नए उर्जा से भरे होंगे ना कि रोगग्रस्त बूढ़ों से...IITians और IIMs की पार्टी अगले चुनाव में भाग ले रही है जिसके युवा लाखों-करोड़ो की विदेशों की नौकरी को ठुकराकर सिर्फ़ अपने देश भारत के लिए इस राजनीती में आए हैं जिस राजनीति के नाम को इतना बदनाम कर दिया है इन नेताओं ने कि इसे सुनते ही मन में एक भय और घृणा आने लगती है लोगों के मन में...इसके साथ-साथ रामदेव बाबा भी तो आ रहे हैं राजनीति में...और इसके अतिरिक्त आर्कुट में "हम बदलेंगे अपने देश भारत को" जैसे बहुत से समुदाय हैं जिसके सदस्य युवा भी नहीं किशोर हैं...
अगर आपलोगों में से कोई जुड़ना चाहें तो मैं लिंक दे रहा हूँ ....

http://www.orkut.co.in/Main#Community?rl=cpp&cmm=14247277

Anonymous said...

BHAI ATAL JI NE KYA KIYA HAI YEH UNKI SARKAR KE 5 SAAL MEIN SAAF PATA CHALTA HAI. UNHONE TO BHAGWAAN RAM SE BHI DHOKHEBAZI KI HAI. PM SE PEHLE RAM MANDIR WAHI BANAYEGE PAR PM BANE TO HUM TO COURT KA FAISLA MANENGE.

JAI HO ATAL MAHARAJ KI
AZAADI KE BAAD SABSE BADE NETA.

YA KUCH LOGON KE LIYE SIRF.

M.K.Pansari said...

जीसस अल्ला ईश्वर, सारे मन्तर सीख
ना जाने किस नाम से मिले जियादा भीख।

यही सिद्धान्त इस धार्मिक भारत मे धर्म कहलाता है और यही इस देश मे प्रजातान्त्रिक कर्म है।

Anonymous said...

IN SABHI KO YE BOL KAR DESH SE BHAGA DENA CAHIYE KI JAB TAK TUM GANDGI KARTE RAHOGE HAMARA BHI MAN NAHI LAGEGA TUM LOG APAVITRA HO AUR DUSHT SHUKRACHARYA KE STUDENT HO

शंकर फुलारा said...

क्या इस भारत का कुछ हो पायेगा ?
हे भगवान ! हमारा २०१४ का लक्ष्य और व्यवस्था परिवर्तन का आन्दोलन पूर्ण रूप से सफल बनाना |

मिहिरभोज said...

प्यारे हिंदुओ तुम सैक्यूलर बने रहो क्यों कि विश्व मैं तुम और सिर्फ तुम ही सैक्यूलर हो सकते हो....तुम्हें ये कभी समझ न आयेगा कि व्हाईट हाऊस को बारबार ओबामा को ईसाई घोषित करना पङता है....वो दिन दूर नहीं जब तुह्रारे घर से भी बजरंग वली की मूर्तियां हटाई जायेगी.....तब क्या करोगे

Poorviya said...

jai bajrang bali.

rakesh said...

ye to sahi ek to choree uper se seena joree ab samey aa gaya he ki sab hindu jag jay nahi ek din hume inke adheen rehna padega

Ravindra Nath said...

सुरेश जी आप के द्वारा हमे यह सब जानकारी मिलती है अन्यथा इस सेक्युलर मीडिया को तो भूत प्रेत और सांप ज्यादा महत्वपूर्ण लगते हैं और इस प्रकार की खबरें जो हमारे मूल्भूत अधिकारों से जुडी हैं उन पर कोइ नजर भी डालने को तैयार नही है। दुर्भाग्य देश का।



आपका पिछला पोस्ट भी अच्छा था, पर दूसरा ब्लोग उसके लिए अलग से आप पर दोहरा बोझ डाल देगा, ऐसे मे मैं सशंकित हूं कि कहीं आप की गुणवत्ता न प्रभावित हो, या गुणवत्ता को बनाए रखने मे आपका स्वास्थ्य। यह दोनो ही हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे २-१ पोस्ट से आपका brand image नही धुलने वाली, बल्कि मैं तो कहता हूं कि अब तो आप खुद भी अपना brand नही बदल पाएगे, इतना गहरा छाप है इस brand का।

sanjay said...

IS BRAND ME MILAWAT .... PATHKGAN
KATTAI NA MANEGE ....... YSE HAMNE
AAPKE .... SARE MAJEDAR LEKH PADHE
HAIN....LEKIN BAHUT MAJEDAR HOTE...
HUE BHI HUM YSE .... VICHARON KI
KHURAK NAHI LENGE....YAHAN TO SIRF..
24 CARRET WALA CHALEGA .... YANE KI
RASHTRWAD PAR ..... PURE JALAL SE ..

JO DIPAK APNE JALAYE HAIN .... OOSKI
LOW KO PRAJWALITT RAKHNE KE LIYE....
APNI KHOON BHI KUM HAI ......

SADAR PRANAM.

dschauhan said...

वाम पंथी देश के गद्दार हैं! इनमे और जमा मस्जिद के इमाम में कोई फर्क नहीं है!

bhart yogi said...

ye log kyo bhgva aatankvad ko aamntrit kar rahe hai ,,,,,,,

man said...

सादर वन्दे और जय श्री राम सर ,
सर जिस तरह से आप इन वामपंथी दोगलो और शर्मनिर्पेक्सो की नंगाई लोगो के सामने ला रहे हे आप को धन्यवाद ,आप की जागरूकता की जोत में नए खून की रवानिया भी जुड़ रही हे जो भविष्य के लिए अच्छा संकेत हे | इन्टरनेट के माध्यम से तताकथित माध्यम वर्ग के "'' शहतूत के कीड़े "''अपने कोकुनो में अपने को सुरक्षित समझते थे ,उनकी अगली पीढियों की मानसिकता बदल रही हे |रास्ट्रवादिता का विचार एक बड़े स्तर पर फल फूल रहा हे ,लहर बनेगा |और रही बात इन सफ़ेद खून के सियारों की तो हराम जादो की अंतिम घडी आने वाली हे ?बस यु ही आप इन को "''माँ जाये "'करते रहिये ,ये आगे दोनों हाथ लगा के छुपते फिरेंगे ?और वेसे भी शर्म्निर्पेक्स हे ?

Amit said...

Sir, Desh ke liye kuch karna hi padega. Main aur mere Friends aapki wajah se ab Party Join karne wale hain. (Thanks to you I am not alone in this mission). Mullaon himmat badhti hi ja rahi hai. aur mera vishvash kijiye aisi harkate kar ke ye log apni kabar khod rahe hain.

Waise ek bat achhi hai. Enki harkaton ki wajah se Hindu ekjut ho rahe hain. Achha hai na. Ek din Hindu ek sath huthenge aur enko kuchal kar rakh denge !!

Jai Sri Ram ! Hai Hind !!

man said...

डॉ. महेश सिन्हा साहब ,
दोष इनकी उपरी मंजिल का नहीं हे .दोष इनकी घटिया निर्माण सामग्री का हे ,जिसे "'' जेनेटिक मिस्टेक कोड "' कह सकते हे |

Anonymous said...

अच्छा है

सुलभ § Sulabh said...

एक कथन सर्वमान्य हैं - "आत्म रक्षा के दौरान हमले जायज हैं" इसमें कहीं कोई आपत्ति नहीं है.
मतलब जो चीज़ निराधार थी अब उसकी जरुरत है. मेरा मतलब "भगवा आतंकवाद" राष्ट्र की सुरक्षा के लिए जरुरी है.
--
इनदिनों यात्राओं का दबाव बना हुआ है. अपने गृह क्षेत्र में कुछ परिवर्तन और घटनाओं को देखने के बाद मन आहत है. नियमित ब्लोगरी (संवाद) से दूरी बनी हुई है.

nitin tyagi said...

Kash aaj Gandhi jinda hota use dikhate secular ki kimat

abhishek1502 said...

मेरा तो खून खौल उठता है ऐसा अन्याय देख कर ,
हिन्दुओ जागो इस से पहले ही बहुत देर हो जाये .इतिहास को भूलने वालो इतिहास तुम को कभी माफ़ नही करेगा और न ही भविष्य की पीढ़ी तुम को कभी माफ़ करेगी
नीचे किये गए लिंक का लेख पढ़ कर सोचे की क्या हमारा भविष्य सुरक्षित है ?

rahulworldofdream.blogspot.com/2010/10/blog-post_20.html

ePandit said...

यह अविश्वनीय है कि अपने देश और अपने ही घर में श्री दास अपने आराध्य हनुमान की पूजा करने हेतु आजाद नहीं है और इसके लिये एक सरकारी अधिकारी द्वारा धमकाये जा रहे हैं।

यह हिन्दू-विरोध की पराकाष्ठा है। वे छद्म धर्मनिरपेक्ष बुद्धिजीवी तथा मानवाधिकार कार्यकर्ता कहाँ हैं जो हमेशा अभिव्यक्ति की आजादी का शोर करते रहते हैं?

यह घटना पूरे पश्चिम बंगाल को मुस्लिम बहुल राज्य बनाने की साजिश का एक हिस्सा है। सरकार मुस्लिम वोटबैंक के लालच में चुप है (बल्कि ऐसे तत्वों का समर्थन कर रही है)।

अमित जैन (जोक्पीडिया ) said...

तुम्हारी इबादत , इबादत
बाकि सब फजीहत
वाह रे मुस्लिम दोस्तों ,
कर न सके जब तुम कुश और गलत ,
कर दी शिकायत भगवन की ,
वाह रे पोलीस,
अब तो कर ही डालो ,ग अर्रेस्ट हनुमान जी की पर्तिमा को ,
लगा कर इल्जाम ,
कही सामाजिक सोहार्द न बिगड जाये ,

BALOKDA said...

जब तक इस देश मैं वोटों की राजनीति चलती रहेगी धर्मनिरपेक्ष्ता का नाटक चलता रहेगा। हमारी भारत माता रत्न्गर्भा है जिस की कोख से जयचंद,मुल्लायम,अमर,अर्जुन,वीपी,अरुंधती राय,तीस्ता,जैसे महान सितारे इस धरा धाम पर अवतरित हुए हैं। ये सब महान संत भारत से हिन्दू धर्म रूपी कलंक का खात्मा किए बिना चैन से बैठ्ने वाले नहीं,गाँधी बाबा,चाचा नेहरु के अधूरे ख्वाबों को पूरा जो करना है। छोटे भाईयों को कोई तकलीफ न हो इस के लिये अपनी औलाद का गला भी घोंटना पडे तो भी कोई हर्ज नहीं,दुनिया इस बात की कायल तो हो ही जायेगी की हुम दुनिया के सब से बडे धर्मनिरपेक्ष हैं। यह तमगा भारत की सभी समस्याओं से मुक्ती दिलाने मैं अलादीन के चिराग की तरह से कामयाब हो जायेगा। हिंदुओं की आस्था के आधार पर अगर कोर्ट के फैसले होने लग गये तो बडा जलजला आ जायेगा,काफ़िर,जिन का कत्ल जायज है सर उठा कर घूमने लगेंगे,शेर हो जायेंगे,इन्हें तो गीदड की मौत ही मरना चाहिये। या अल्लाह भेज दे मुहम्मद गजनवी कोई। अब सहा नहीं जाता,आस्था के आधार पर फैसले का हक तो हमारा हैऔर अगर आस्था के आधार पर कोर्ट हमारे हक मैं फैसला ना दे तो संविधान को तार तार करने का परम कर्तव्य धर्मनिरपेक्ष नेताओं का है या इन मानवाधिकारियों का है,वैसे ये बेचारे दिन रात एक कर रहे हैं पर इन की भी तो एक सीमा है,इस लिये हम खुदाबन्द करीम से दुआ मांगते हैं कि तालिबानों और दीगर गाजियों को यहां भेज कर कुफ़्र के खात्मे की इनायत फरमावे। आमीन ।

vijay singh said...

अगर एक उदाहरण हो तो उस बारे मे चर्चा की जे. यहा तो ये घटनाए आम होने लगी है. अब इसी मामले को ले लीजिए इस से तो लगता है की या तो हमे एक हो कर वोटो का ध्रुवीकरण करना चाहिए या इस डेमॉक्रेसी से ही तौबा कर लेनी चाहिए जिसके लिए मानवीया मूल्‍यो की कोई कद्र नही है.

Anonymous said...

Suresh JI aapki har post kamal ki hoti hai hajaro varso se soi hindu janta ke thande pad gaye khoon me jo aap garmi lane ka paryas kar rahe hai wo parsasniya hai aapke sahas or hosle ko parnam.

Deepak Sharma said...

kya hindu ek nahi ho sakte
jis parkar mulle ek hai us prakar sab hinduo ki ek bhaw
na honi chahiye
or ek hi samajh honi chahiye

support Modi....