Wednesday, September 29, 2010

अचानक सभी को "न्यायालय के सम्मान"(?) की चिंता क्यों सताने लगी है?... Ram Janmabhoomi Court Verdict, Ayodhya Secularism

पिछले एक-दो महीने से सभी लोगों ने तमाम चैनलों के एंकरों को गला फ़ाड़ते, पैनलिस्ट बने बैठे फ़र्जी बुद्धिजीवियों को बकबकाते और अखबारों के पन्ने रंगे देखे होंगे कि अयोध्या के मामले में फ़ैसला आने वाला है हमें "न्यायालय के निर्णय का सम्मान"(?) करना चाहिये। चारों तरफ़ भारी शोर है, शान्ति बनाये रखो… गंगा-जमनी संस्कृति… अमन के लिये उठे हाथ… सुरक्षा व्यवस्था मजबूत… भौं-भौं-भौं-भौं-भौं-भौं… ब्ला-ब्ला-ब्ला-ब्ला-ब्ला-ब्ला… आदि-आदि। निश्चित ही सभी के कान पक चुके होंगे अयोध्या-अयोध्या सुनकर, मीडिया और सेकुलरों ने सफ़लतापूर्वक एक जबरदस्त भय और आशंका का माहौल रच दिया है कि (पहले 24 सितम्बर) अब 30 सितम्बर को पता नहीं क्या होगा? आम आदमी जो पहले ही महंगाई से परेशान है, उसने कमर टूटने के बावजूद अपने घर पर खाने-पीने के आईटमों को स्टॉक कर लिया।

प्रधानमंत्री की तरफ़ से पूरे-पूरे पेज के विज्ञापन छपवाये जा रहे हैं कि "यह अन्तिम निर्णय नहीं है…", "न्यायालय के निर्णय का पालन करना हमारा संवैधानिक और नैतिक कर्तव्य है"… "उच्चतम न्यायालय के रास्ते सभी के लिये खुले हैं…" आदि टाइप की बड़ी आदर्शवादी लफ़्फ़ाजियाँ हाँकी जा रही हैं, मानो न्यायालय न हुआ, पवित्रता भरी गौमूर्ति हो गई और देश के इतिहास में न्यायालय से सभी निर्णयों-निर्देशों का पालन हुआ ही हो…


प्रणब मुखर्जी और दिग्विजय सिंह जैसे अनुभवी नेता से लेकर "बुरी तरह के अनुभवहीन" मनीष तिवारी तक सभी हमें समझाने में लगे हुए हैं कि राम मन्दिर मामले के सिर्फ़ दो ही हल हैं, पहला - दोनों पक्ष आपस में बैठकर समझौता कर लें, दूसरा - सभी पक्ष न्यायालय के निर्णय का सम्मान करें, तीसरा रास्ता कोई नहीं है। यानी संसद जो देश की सर्वोच्च शक्तिशाली संस्था है वह "बेकार" है, संसद कुछ नहीं कर सकती, वहाँ बैठे 540 सांसद इस संवेदनशील मामले को हल करने के लिये कुछ नहीं कर सकते। यह सारी कवायद हिन्दुओं को समझा-बुझाकर मूर्ख बनाने और मामले को अगले और 50 साल तक लटकाने की भौण्डी साजिश है। क्योंकि शाहबानो के मामले में हम देख चुके हैं कि किस तरह संसद ने उच्चतम न्यायालय को लतियाया था, और वह कदम न तो पहला था और न ही आखिरी…।

अरुण शौरी जी ने 1992 में एक लेख लिखा था और उसमें बताया था कि किस तरह से देश की न्यायपालिका को अपने फ़ायदे के लिये नेताओं और सेकुलरों द्वारा जब-तब लताड़ा जा चुका है - गिनना शुरु कीजिये…

एक- यदि हम अधिक पीछे न जायें तो जून 1975 में इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय ने श्रीमती गांधी को चुनाव में भ्रष्‍ट आचरण का दोषी पाकर छह सालों के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्‍य ठहरा दिया था। न्यायालय के इस निर्णय के खिलाफ "प्रायोजित प्रदर्शन" करवाये गये। जज का पुतला जलाया गया। श्रीमती गांधी ने सर्वोच्‍च न्‍यायालय में फैसले के खिलाफ अपील की। उनके वकील ने न्‍यायालय से कहा, ‘’सारा देश उनके (श्रीमती गांधी के) साथ है। उच्‍च न्‍यायालय के निर्णय पर ‘स्‍टे’ नहीं दिया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।" सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने सशर्त ‘स्‍टे’ दिया। देश में आपात स्थिति लागू कर दी गई, हजारों लोगों को जेलों में बंद कर दिया गया। चुनाव-कानूनों में इस प्रकार परिवर्तन किया गया कि जिन मुद्दों पर श्रीमती गांधी को भ्रष्‍ट-आचरण का दोषी पाया गया था वे आपत्तिजनक नहीं माने गये, वह भी पूर्व-प्रभाव के साथ। कहा गया कि तकनीकी कारणों से जनादेश का उल्‍लंघन नहीं किया जा सकता। "तथाकथित प्रगतिशील" लोगों ने इसकी जय-जयकार की, उस समय किसी को न्यायपालिका के सम्मान की याद नहीं आई थी।

दो- कई वर्षों की मुकदमेबाजी तथा नीचे के न्‍यायालयों के कई आदेशों के बाद आखिरकार 1983 में सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने आदेश दिया कि वाराणसी में शिया-कब्रगाह में सुन्नियों की दो कब्रें हटा दी जायें। उत्तर प्रदेश के सुन्नियों ने इस निर्णय पर बवाल खड़ा कर दिया (जैसा कि वे हमेशा से करते आये हैं)। उत्तर प्रदेश की सरकार ने कहा कि न्यायालय का आदेश लागू करवाने पर राज्य की शांति, व्यवस्था को खतरा पैदा हो जायेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ही आदेश के कार्यान्वयन पर दस साल की रोक लगा दी। लेकिन संविधान के किसी "हिमायती"(?) ने जबान नहीं खोली।

तीन- 1986 में सर्वोच्च न्यायालय ने घोषित किया कि, जिस मुस्लिम पति ने चालीस साल के बाद अपनी लाचार और बूढ़ी पत्नी को छोड़ दिया है, उसे पत्नी को गुजारा भत्ता देना चाहिये। इसके खिलाफ भावनाएँ भड़काई गईं। सरकार ने डर कर संविधान इस प्रकार बदल दिया कि न्यायालय का फैसला प्रभावहीन हो गया। राजीव भक्तों ने कहा कि यदि "ऐसा नहीं करते तो मुसलमान हथियार उठा लेते”। उस समय सभी सेकुलरवादियों ने वाह-वाह की, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को जूते लगाने का यह सबसे प्रसिद्ध मामला है।

चार-अक्तूबर 1990 में जब वी.पी.सिंह ने मण्डल को उछाला तो उनसे पूछा गया कि यदि न्यायालयों ने आरक्षण-वृद्धि पर रोक लगा दी तो क्या होगा? उन्होंने घोषणा की- हम इस बाधा को हटा देंगे, यानी संसद और विधानसभाओं में बहुमत के आधार पर न्यायालय के निर्णय को धक्का देकर गिरा देंगे, "प्रगतिशील"(?) लोगों ने उनकी पीठ ठोकी… न्यायालय के सम्मान की कविताएं गाने वाले दुबककर बैठे रहे…

पांच- 1991 में सर्वोच्च न्यायालय ने कावेरी जल विवाद पर अपना फैसला सुनाया-
"न्यायाधिकरण के आदेश मानने जरूरी हैं” परन्तु सरकार ने आदेश लागू नहीं करवाये। कभी कहा गया कर्नाटक जल उठेगा तो कभी कहा गया तमिलनाडु में आग लग जायेगी… न्यायपालिका के सम्मान की बात तो कभी किसी ने नहीं की?

छह- राज्यसभा में पूछे गये एक सवाल- कि रेल विभाग की कितनी जमीन पर लोगों ने अवैध कब्जा जमाया हुआ है? रेल राज्य मंत्री ने लिखित उत्तर में स्वीकार किया कि रेल्वे की 17 हजार एकड़ भूमि पर अवैध कब्जा है तथा न्यायालयों के विभिन्न आदेशों के बावजूद यह जमीन छुड़ाई नहीं जा सकी है क्योंकि गैरकानूनी ढंग से हड़पी गई जमीन को खाली कराने से "शांति भंग होने का खतरा"(?) उत्पन्न हो जायेगा… किसी सेकुलर ने, किसी वामपंथी ने, कभी नहीं पूछा कि "न्यायालय का सम्मान" किस चिड़िया का नाम है, और जो हरामखोर सरकारी ज़मीन दबाये बैठे हैं उन्हें कब हटाया जायेगा?


सात - अफ़ज़ल गुरु को सर्वोच्च न्यायालय ने फ़ाँसी की सजा कब की सुना दी है, उसके बाद दिल्ली की सरकार (ज़ाहिर है कांग्रेसी) चार साल तक अफ़ज़ल गुरु की फ़ाइल दबाये बैठी रही, अब प्रतिभा पाटिल दबाये बैठी हैं… सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय और सम्मान(?) गया तेल लेने।

आठ - लाखों टन अनाज सरकारी गोदामों में सड़ रहा है, शरद पवार बयानों से महंगाई बढ़ाये जा रहे हैं, कृषि की बजाय क्रिकेट पर अधिक ध्यान है। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि अनाज गरीबों में बाँट दो, लेकिन IMF और विश्व बैंक के "प्रवक्ता" मनमोहन सिंह ने कहा कि "…नहीं बाँट सकते, जो उखाड़ना हो उखाड़ लो… हमारे मामले में दखल मत दो"। कोई बतायेगा किस गोदाम में बन्द है न्यायपालिका का सम्मान?

ऐसी अनेक घटनाएं हैं, जिनमें सरेआम निचले न्यायालय से लेकर, विभिन्न अभिकरणों, न्यायाधिकरणों और सर्वोच्च न्यायालय तक के आदेशों, निर्देशों और निर्णयों को ठेंगा दिखाया गया है, इनमें जयपुर के ऐतिहासिक बाजारों में अवैध निर्माण को हटाने के न्यायालय के आदेशों से लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा एक "अवैध मस्जिद" को नष्ट करने के आदेशों तक की लम्बी श्रृंखला है, जिनकी अनुपालना "शांति भंग होने की आशंका"(?) से नहीं की गई, इसके उलट बंगाल की अवैध मस्जिद को तो नियमित ही कर दिया गया।


इनका पहला सबक है, कि सरकार और कानून एक खोखला मायाजाल है। जब शासक वर्ग श्रीमती गाँधी की तरह अपने स्वार्थों के लिये कानून को बदल देता है, जब न्यायालय आपात-स्थिति में दिए गये निर्णयों की तरह शासकों के भय से खुद कानून की हत्या कर देते हैं, जब सरकार शाहबानों मामले की तरह "एक वर्ग के भय"(?) से घुटने टेक देती है, जब सरकार आतंकवादियों की चुनौती का सामना करने में कमजोर साबित होती है तो दूसरे भी यह नतीजा निकालते हैं, कि सरकार को झुकाया जा सकता है- झुकाया जाना चाहिये, कि न्याय और कानून भी ताकतवर के कहे अनुसार चलते हैं, परन्तु राम मन्दिर के मामले में हिन्दुओं को लगातार नसीहतें, भाषण, सबक, सहिष्णुता के पाठ, नैतिकता की गोलियाँ, गंगा-जमनी संस्कृति के वास्ते-हवाले सभी कुछ दिया जा रहा है। कारण साफ़ है कि यह उस समुदाय से जुड़ा हुआ मामला है जो कभी वोट बैंक नहीं रहा, हजारों जातियों में टुकड़े-टुकड़े बँटा हुआ है, जिसका न तो कोई सांस्कृतिक स्वाभिमान है, और न ही जिसे इस्लामिक वहाबी जेहाद के खतरे तथा चर्च और क्रॉस की "मीठी गोलीनुमा" छुरी का अंदाज़ा है।

सेकुलरिज़्म के पैरोकार और वामपंथ के भोंपू जिसे ‘हिन्दू कट्टरपंथी’ कहते हैं वह रातोंरात पैदा नहीं हो गया है, उन्होंने देखा है कि सामान्य निवेदनों पर जो न्यायालय और सरकार कान तक नहीं देते वे "संगठित समुदाय के एक धक्के" से दो सप्ताह में ही ध्यान से बात सुनने को तैयार हो जाते हैं। यह सबक अच्छा तो नहीं है, पर कांग्रेसी सरकारों और कछुआ न्यायालयों ने ही यह सबक उन्हें सिखाया है। कांग्रेस का छद्म सेकुलरिज़्म, वामपंथ का मुस्लिम प्रेम और हिन्दू विरोध, हुसैन और तसलीमा टाइप का सेकुलरिज़्म और कछुआ न्यायालय ये चारों ही हिन्दू कट्टरपंथ को जन्म देने वाले मुख्य कारक हैं…

रही मीडिया की बात, तो उसे विज्ञापन की हड्डी डालकर, ज़मीन के टुकड़े देकर, आसानी से खरीदा जा सकता है, खरीदा जा चुका है…। जहाँ मुस्लिम और सिख साम्प्रदायिकता ने लगातार सरकार से मनमानी करवाई है, हमारे समाचार-पत्रों और चैनलों ने दोहरे-मापदण्ड, और कुछ मामलों में तो "दोगलेपन" का सहारा लिया है। जम्मू के डेढ़ लाख शरणार्थियों की अनदेखी इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। क्योंकि यदि वे मुसलमान होते, तो क्या समाचार-पत्र और मानवाधिकार संगठन उनको इस तरह कभी नजर अन्दाज नहीं करते। मीडिया ने पिछले कुछ दिनों से जानबूझकर भय और आशंका का माहौल बना दिया है, ताकि आमतौर पर सहिष्णु और शान्त रहने वाला हिन्दू इस मामले से या तो घबरा जाये या फ़िर उकता जाये।

अयोध्या मामले में भी अखबारों और बिकाऊ चैनलों का यही रुख है। किसी अखबार ने यह नहीं लिखा, कि मध्य-पूर्व के देशों में सड़कें चौड़ी करने जैसे मामूली कारणों से सैंकड़ों मस्जिदें गिरा दी गई हैं। किसी अखबार ने नहीं लिखा कि सऊदी अरब की सरकार ने सामान्‍य नहीं, बल्कि पैगम्‍बर के साथियों की कब्रों और मकबरों तक को ध्‍वस्‍त किया है। जब यह दिखने लगा कि वि.हि.प. द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य वजनी हैं तो उनको अनदेखा किया गया, पुरातात्विक साक्ष्यों को मानने से इंकार कर दिया गया, फ़र्जी इतिहासकारों के जरिये तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। इस दोगलेपन ने भी हिन्दुओं का गुस्सा उतना ही भड़काया है, जितना सरकार के मुस्लिम साम्प्रदायिकता के सामने घुटने टेकने ने। हिन्दुओं का यह वर्षों से दबा हुआ गुस्सा, बाबरी ढाँचे के विध्वंस या गुजरात दंगों के रुप में कभीकभार फ़ूटता है।

बकौल अरुण शौरी… "…इस दोगलेपन तथा वहाबी साम्प्रदायिकता और आतंकवाद के सामने घुटने-टेकू सरकारी नीति के कारण हिन्दू भावनाएँ जितनी उग्र हो गई है उनको कम समझना जबर्दस्त भूल होगी…"। संदेश साफ है, ”यदि आप शाहबानों के मामले में सरकार से समर्पण करा सकते हैं तो हम अयोध्या के मामले में ऐसा करेंगे। यदि आप 10 फीसदी का वोट बैंक बना रहे हैं, तो हम 80 प्रतिशत लोगों का वोट-बैंक बनायेंगे, चाहे उसके लिये कोई भी तरीका अपनाना पड़े"। न्यायालय का सम्मान तो हम-आप, सभी करते हैं, लेकिन उसे अमल में भी तो लाकर दिखाओ… सिर्फ़ हिन्दुओं को नसीहत का डोज़ पिलाने से कोई हल नहीं निकलेगा। शाहबानो और अफ़ज़ल गुरु के मामलों में उच्चतम न्यायालय की दुर्गति से सभी परिचित हो चुके हैं, "न्यायालय के सम्मान" के नाम पर हिन्दुओं को अब और बेवकूफ़ मत बनाईये… प्लीज़।

अयोध्या का राम मन्दिर आन्दोलन सात सौ साल पहले हुए एक "दुष्कर्म" का विरोध भर नहीं है, यह तो गत सत्तर सालों की नेहरुवादी-मार्क्सवादी राजनीति के विरोध का प्रतीक है, विशेष कर पिछले दस-बीस सालों की तुष्टीकरण, दलाली, दोमुंहेपन और वोट बैंक की राजनीति का, इसलिये अयोध्या विवाद का हल किसी ‘फारमूले’ में नहीं है। मानो यदि किसी हल पर सहमति हो भी जाती है लेकिन सेकुलर-वामपंथी राजनीति का घृणित स्वरूप ऐसा ही बना रहता है तो अयोध्या से भी बड़ा तथा उग्र आन्दोलन उठ खड़ा होगा।

फ़िर मामले का हल क्या हो??? सीधी बात है, न्यायालय की "टाइम-पास लॉलीपाप" मुँह में मत ठूंसो, संसद में आम सहमति(?) से प्रस्ताव लाकर, कानून बनाकर राम मन्दिर की भूमि का अधिग्रहण करके उस पर भव्य राम मन्दिर बनाने की पहल की जाये, सिर्फ़ और सिर्फ़ यही एक अन्तिम रास्ता है इस मसले के हल का… वरना अगले 60 साल तक भी ये ऐसे ही चलता रहेगा…


Ram Janmabhoomi, Ayodhya Dispute and Court Verdict, Babri Masjid Demolition and Secularism, Supreme Court Verdicts in India, Afzal Guru and Shah Bano Decision, Muslim Appeasement by Congress and Communist, Supreme Court of India, Cauveri Dispute, राम जन्मभूमि विवाद, बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि, बाबरी मस्जिद और धर्मनिरपेक्षता, उच्चतम न्यायालय के निर्णय, भारत का सुप्रीम कोर्ट, अफ़ज़ल गुरु और शाहबानो मामला, मुस्लिम तुष्टिकरण, कावेरी विवाद, भारत की न्यायपालिका, Blogging, Hindi Blogging, Hindi Blog and Hindi Typing, Hindi Blog History, Help for Hindi Blogging, Hindi Typing on Computers, Hindi Blog and Unicode

60 comments:

Bunty said...

आपका लेख चोरी हो गया है ....
यहाँ देखे ...
http://chorikablog.blogspot.com/2010/09/blog-post_9451.html

संजय बेंगाणी said...

आज की हमारी ट्विट यहाँ भी प्रासंगिग हो गई है.

"विवादित जगह पर होस्पिटल का विचार सुन्दर है, क्यों न शरूआत शक्ति स्थल, वीरभूमि जैसी कब्जाई जगहों से करें."

ऐसे ही एक महान चिंतक ने बीबीसी पर लिखा कि बाबरी गीरने के साथ दो समुदायों में दरार पड़ गई और ब्ला ब्ला ब्ला.... समझ नहीं आता भाईचारा साल्ला इतना ही फैवीकोल था तो पाकिस्तान बना क्यों?

अभी एक और मुद्दा खटक रहा है, बाद में टिप्पणी करता हूँ.

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद said...

@ सुरेशजी जिस प्रकार से "अयोध्या और देश" के इलाकों को किला बना दिया गया है मुझे टी इसमें साजिश की बड़ी "बू" आ रही है. क्या पता सरकार ने अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए "मस्जिद बनाने" का इरादा कर लिया है. अगर हिन्दू मान गए तो ठीक नहीं तो उन पर उन्ही के टैक्स के पैसों से गोलिया, लाठिया, चलायी जाएगी..

मेरी तो सभी हिन्दुओं यही अपील है है इस कांग्रेस और बिकाऊ मीडिया के छद्मसेक्युलर दिखावे में मत आओ और विरोध करो, अगर आज दब गए तो याद राखियों आगे कभी नहीं उठ पाओगे, अपने ही देश में खानाबदोश और काफिर बना दिए जाओगे. तब आने वाली पीढ़ियों को क्या जवाब दोगे...??? वो तुम्हे कभी माफ़ नहीं करेंगी.
आज मुझ जैसे कई युवा जिस प्रकार "मोहनदस गांधी" को कोस रहे है, तुम्हारी आने वाली पीढियां तुम्हे कोसेंगी.

--
जागो हिन्दू और हिंदुत्व के लिए लड़ो.

Anonymous said...

यदि आप शाहबानों के मामले में सरकार से समर्पण करा सकते हैं तो हम अयोध्या के मामले में ऐसा करेंगे। यदि आप 10 फीसदी का वोट बैंक बना रहे हैं, तो हम 80 प्रतिशत लोगों का वोट-बैंक बनायेंगे, चाहे उसके लिये कोई भी तरीका अपनाना पड़े"।

पी.सी.गोदियाल said...

गुरूजी, क्षमा करना, वैसे तो मुझे मेरी अंतरात्मा ने बता दिया कि फैसला क्या आयेगा इस "मुस्लिम सेक्युलर देश" में, मगर मुझे तो ये चिंता सताने लगी है, अगर १ परसेंट केस में फैसला सच के हक़ में आता है और मुद्दा समाप्त हो जाता है तो ये बीजेपी और बी एच पी वालोनो की दुकानों के लिए ताले खरीदने पड़ेगे ! और कोई मुद्दा तो इनके पास है ही नहीं !

आलोक मोहन said...

जबरन ही इस मुद्दे को अटकाया जा रहा है
कुछ न कुछ बहाना बना करर इसे आगे बढ़ाते रहगे

अब समय आ गया है कुछ ड़ोस कदम उठाने का
मज़ेदार बात ये है की दोनों ही पछ समझोते के लिए तैयार नही थी ..फिर
जबरन समझोता का बहाना बनाकर इसे लटकाया गया

Anonymous said...

I am fully agree with Mr. Bengani... is that - समझ नहीं आता भाईचारा साल्ला इतना ही फैवीकोल था तो पाकिस्तान बना क्यों?

Anonymous said...

सुरेश जी, आप हर ज्वलन्त मुददे पर जिस तरह कलम चलाते हैं उससे हमें एक सर्जन का अहसास दिलाते हैं जो कैंसर के ऑपरेशन में दिल-जान से लगा हो।
कभी-कभी आप मुझे एक लोहार लगते हैं जो बिना रुके अनथक हथौड़े बरसा रहा हो
आपको नमन है

उम्दा सोच said...

हिन्दू बैठा पेड़ पर स्वयं को दिया लटकाए ,
सहिष्णु की खुली है, सारे काट काट ले जाए!!!

अपने अस्तित्व का आभास जिन हिन्दू भाई को हो , ध्यान दे !

सलीम ख़ान said...

I like your point number 8


आठ - लाखों टन अनाज सरकारी गोदामों में सड़ रहा है, शरद पवार बयानों से महंगाई बढ़ाये जा रहे हैं, कृषि की बजाय क्रिकेट पर अधिक ध्यान है। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि अनाज गरीबों में बाँट दो, लेकिन IMF और विश्व बैंक के "प्रवक्ता" मनमोहन सिंह ने कहा कि "…नहीं बाँट सकते, जो उखाड़ना हो उखाड़ लो… हमारे मामले में दखल मत दो"। कोई बतायेगा किस गोदाम में बन्द है न्यायपालिका का सम्मान?

baqi sab baqwaas...

dam hai to tippani prakashit kar do... mera maqsad to aap tak msg pahunchana hai...

Saleem Khan

कृष्ण मुरारी प्रसाद said...

नमस्कार.....

Mahak said...

आदरणीय एवं गुरुतुल्य सुरेश जी ,

आपने जिस प्रकार के तथ्यपरक उदहारण दिए हैं सुप्रीम कोर्ट और उसके आदेशों का सम्मान करने सम्बन्धी ,उससे तो सचमुच देश में एक विशेष धर्म (हिंदुत्व) के प्रति भेद-भाव झलकता है , आखिर ये दोगलापन क्यों ?? , ये सचमुच गलत है और यही दोगला व्यवहार हमारे हिंदू भाईयों के अंदर धीरे-२ प्रतिक्रिया स्वरुप में अत्यधिक कट्टरता लाता जा रहा है, अगर ये भेद-भाव बंद नहीं हुआ तो सभी को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे


महक

Vivek Rastogi said...

हमारे कर के रुप में चुकाये गये रुपयों से ही कल से हम पर गोलियों में बारुद भरकर वापिस दिया जायेगा.. पता नहीं कब हमारे कर के रुपयों का सही इस्तेमाल किया जायेगा।

क्या हम अपने कर के रुपयों को सरकार को देने से मना कर सकते हैं। अगर नहीं तो क्या सरकार को बाध्य किया जा सकता है कि हमारे द्वारा चुकाये गये कर के रुपयों का पाई पाई का हिसाब दे।

'उदय' said...

... प्रभावशाली पोस्ट !!!

Anonymous said...

न्यायालय का फ़ैसला वही होगा जो मनमोहन अंसारी, सोनिया ख़ातून, राहुल ख़ान के मन में है. अन्यथा संसद में बिल पास करवा कर वे अपने मन का कर हीं लेंगे.
बिनोद

krishna kumar soni said...

सुरेश जी,
पता नही ये वोटो के सोदागर कब् तक हमारी सहिष्णुता को हमारी कायरता समझते रहेंगे ! फिर हमे भी मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के संदेश को याद रखना चाहिए - विनय न मानत जलधि जड गए तीन दिन बीत, बोले राम सकोप तब भय बिन होय न प्रीत .

SHIVLOK said...

एक बार फिर, हाँ जी एक बार फिर,
आपकी लेखनी को नमन,
आपकी माता जी को नमन,
धन्य हैं आप,

लेकिन सुरेश जी
मुझे हमारे देश के इन हालातों के लिए बहुसंख्यक वर्ग ही ज़िम्मेदार नज़र आता है
दोषी बहुसंख्यक वर्ग ही है



सिर्फ़ एक बार "विशाल हिन्दू वोट बैंक" की अवधारणा की कल्पना कीजिये और उसे अमल में लाने का प्रयास कीजिए… फ़िर देखिये अपने-आप देश की रीतियाँ-नीतियाँ, परिस्थितियाँ, यहाँ तक कि मानसिकता भी… सब बदल जायेंगी…।


अगर हिंदू वोट बैंक नहीं बना तो देश की तबाही तय है

अगर हिंदू वोट बैंक नहीं बना तो देश की तबाही तय है

अगर हिंदू वोट बैंक नहीं बना तो देश की तबाही तय है

अगर हिंदू वोट बैंक नहीं बना तो देश की तबाही तय है

गिरिजेश राव said...

टीवी, अखबार, रेडियो हर तरफ से सिखावन का इतना हमला है कि सिखावन की मंशा पर ही शक होने लगा है।
अभी झंडू बाम द्वारा दबंग फिल्म का प्रचार दिखा है और दिल्ली कॉमनवेल्थ का समाचार - एक और सड़क धँसी है।
ऊपर का नमस्कार भी देख रहा हूँ। सब कुछ कितना अजीब है न?

बस यही कहना है:

... जो नहीं जानता दैन्य, नहीं जानता विनय,
कर गया भेद वह मायावरण प्राप्त कर जय,
बुद्धि के दुर्ग पहुँचा विद्युत-गति हतचेतन
राम में जगी स्मृति हुए सजग पा भाव प्रमन।
...काँपा ब्रह्माण्ड, हुआ देवी का त्वरित उदय -
...देखा राम ने, सामने श्री दुर्गा, भास्कर
वामपद असुर स्कन्ध पर, रहा दक्षिण हरि पर,
ज्योतिर्मय रूप, हस्त दश विविध-अस्त्र सज्जित,
मन्द स्मित मुख, लख हुई विश्व की श्री लज्जित

"होगी जय, होगी जय, हे पुरूषोत्तम नवीन।"
कह महाशक्ति राम के बदन में हुई-लीन।

लगे रहिए। होगी जय, होगी जय। बुद्धि के दुर्ग में स्मृतिप्रकाश की आवश्यकता है। समर शेष है।

{-Bhagat singh-} said...

अयोध्या मे तो हर हाल मे मंदिर बनेगा.

चाहे कोई जितना जोर लगा ले.
रामलला का भव्य मंदिर बन के रहेगा
इन सेकुलरो की कोई चाल कामयाब नही होने दी जायेगी

जय श्री राम

Vijayvargiya said...

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद भाई... जरा बताने का कष्ट करें की आप "मोहनदास गाँधी" को क्यूँ कोस रहे है..

Anonymous said...

Media ki tarah darr failane ke bajaaye jaagrukta ka abhiyaan chlaaye rakhein chiplunkar bhai....... lekh ke liye dhanybaad

Anonymous said...

Suresh ji this is a great collection of facts... i am really surprised by political utilization of our Court of Law and Justice and in continuation we will soon see one more Political Justice given to so called minorities and one great example of Political Secularism ........

I pray to god when the day will come when Hindus will be given proper justice and rights , all of us will have to fight for that.

Anonymous said...

Dear Mahak .......

I dont agree with your comments at all because i think you have not been able to watch the "Kattarpanti" of minors..........

सुलभ § Sulabh said...

बात शीशे की तरह साफ़ है.
कोई बार बार गन्दा कर रहा है इसे, कब तक पोछा लगाया जाये...बेहतर है गन्दगी फैलाने वालों को बाहर का रास्ता दिखाया जाये.

सुज्ञ said...

सर्वांग सत्य, जिसे अशान्ति-भय स्वीकार नहिं करता।

{-Bhagat singh-} said...

ये भाईचारा , शांति और गंगा जमुनी तहजीब की खुराक हिँदुओ को ही क्यो पिलायी जा रही है ?
ये सब खुराक कश्मीर मे जाकर पिलाओ जहाँ मुल्लो का आतंक फैला हुआ.जहाँ एक भी हिँदु नही बचा है

ये खुराक पिलाओ पाकिस्तान मे जा के जहाँ जो गिनती भर के हिँदु बचे है उनको भी जबरन मुसलमान बनाया जा रहा है

अयोध्या मामले को इतना लंबा खीचने के पीछे इन सेकुलरो की मंशा ये है
कि जो पुरानी पीड़ी इससे जुड़ी है वो सब ऊपर पहुच जाये
और जो नई पीढ़ी है उसमे इस मामले के प्रति कोई लगाव न रह जाये.

और मुझे कुछ पप्पू टाइप हिँदुओ की ये बात सुनकर शर्म और क्रोध दोनो आता है कि "विवादित स्थल पर अस्पताल या फला फला बना देना चाहिये"
क्यो भाई ! क्या अस्पताल बनवाने के लिये ही इतने सारे कारसेवक शहीद हुये थे?

क्या तुम लोगो के अंदर संघर्ष करने की जरा सी भी ललक और क्षमता नही है? कि तुरंत समर्पण की मुद्रा मे आ जाते हो
ऐसे ही 'पप्पू टाईप ' लोगो के कारण देश की ये दुर्गति है

shivani's World said...

अगर हिंदू वोट बैंक नहीं बना तो देश की तबाही तय है

Anonymous said...

आदरणीय सुरेश जी
हिन्‍दुओं की सोयी हुई आत्‍मा को जगाने का अति उत्‍तम प्रयास है आपका,
अगर अब भी हम न जागे तो एक दिन ये मुगल हमारे घर पर भी अपना दावा करेंगे और न्‍यायालय और कमीने नेता लोग उसमें भी समझौता करने की बात कहेंगे ।

समझ में ये नहीं आता है कि जो चीज निरा हमारी है उस पर किस बात का समझौता, ये तो वही हुआ कि भाई तू जितना कमाता है वो सारी सैलरी मेरी है, अब न्‍यायालय इसे मुझे ही दिला दिया करे तो ठीक वरना मुस्लिम कानून का अपमान और भंडुए नेताओं की बेइज्‍जती है ।।

आपका ये लेख अन्‍य लोगों के पास ईमेल के द्वारा भेजने की आज्ञा चाहता हूँ । हर हिन्‍दू के खून को खौलाने के लिये कि जरूरत पडे तो पूरे देश को अब से मुगल विहीन कर दिया जाए ।।

जय श्री राम ।।

Mahak said...

Anonymous said...

Dear Mahak .......

I dont agree with your comments at all because i think you have not been able to watch the "Kattarpanti" of minors..........



Dear Anonymous

You have full right to become disagree from me or my comments but can you be disagree from all the facts which respected Suresh Ji have presented in front of us ???


महक

मिहिरभोज said...

हिन्दू बैठा पेड़ पर स्वयं को दिया लटकाए ,
सहिष्णु की खुली है, सारे काट काट ले जाए!!!
बहुत ही सटीक दोहा...


जो लोग हास्पीटल बनाने की बात करते हैं उनको मेरा सुझाव है कि बिचारे अल्पसंख्यक कितने गरीब है क्यों नहीं अपने अपने घरबार उनको दान कर देते हैं.....क्यों ये राम के पीछे पङे हैं

Bhavesh (भावेश ) said...

हर बार की तरह एक उत्कृष्ट लेख. आपके तर्क पूरी तरह से सही और प्रासंगिक है इसलिए इस लेख पर किसी ने भी असहमति नही जताई. हकीकत तो लगभग हर वो लोग जानते है जो वोट नहीं देते पर सरकार उन लोगो द्वारा चुनी जाती है जो समझ नहीं सकते. इसिलए पिछले छह दशक से ऐसी नपुंसक सरकारे और न्यायपालिका देश को गर्त में धकेल रही है. अगर केवल न्यायपालिका ही सही ढंग से अपना काम करने लग जाये तो देश का भाग्य बदल सकता है और ये देश कलमाड़ी, मायावती, लल्लू मुल्लू सरीखे लुटेरो से निजात पा सकता है.

DEEPAK BABA said...

सधी हुई पोस्ट - बिलकुल अपने निशाने पर - यानी आज के हालात पर सटीक बैठती ह.

और इन सुधि पाठकों की इमानदारी से दी गई टिप्पणियां:

संजय बेंगाणी
हिंदुत्व और राष्ट्रवाद
उम्दासोच
महक
शिवलोक
गिरिजेश राव
सुलभ
सुज्ञ

आप सभी का मत मेरा मत माने
साधुवाद.


जय राम जी.

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

ऎसा लग रहा जैसे मेरे अन्दर दबी आवाज को आपने शब्द दिये .
अदालती आदेश जो इतने पहले हो चुके है उनके बारे में क्या हुआ यह सम्झे आज के सेकुलर लोग .
दुनिया की कोई अदालत अयोध्या में स्थित राममंदिर को छू भी नही सकती .
जो सोचते है हिन्दु चुतिया है वह गलत है

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

the hindoo, themselves, are responsible for all that mess...

Anonymous said...

@ Saleem
bahiye apanaa girebaan jhaankh kitanaa gandaa likhataa hai too

abhishek1502 said...

अदालत के फैसले का स्वागत
न्यायपालिका ने पूर्णतया सत्य का साथ दिया

ZEAL said...

.

According to preliminary reports, the title of the land of Ramjanmabhoomi-Babri Masjid has been split into 3 parts in the decision delivered by the Allahabad High Court on 30-Sep-2010.

* The site of the idol of Ramlala has been given to the Lord Ram.
* Sita Rasoi and Ram Chabutra has been marked for Nirmohi Akhara, and
* The rest has been given to the Sunni Wakf Board.

The decision also stipulates that a status quo has to be maintained for a period of 3 months. This will give any body wanting to contest the decision time to appeal in the Supreme Court of India.

Detailed evaluation of the judgement will reveal more details and the finer points.

The decision of the 60 year long Ayodhya land dispute has been delivered by the Lucknow bench of Allahabad High Court on 30-Sep-2010, bring the curtains down on the period of uncertainity.

.

abhishek1502 said...

जहा तक अस्पताल की बात है तो ये वो स्तिथि पर लागु था जब कोई भी विकल्प न बचता और ये तुष्टिकरण वाली सरकार वहा पर मस्जिद बनवाने पर पर तुल जाती . आम हिन्दू तो बस रियलिटी शो में वोट करने ,कौन चुनाव जीतेगा आदि गप्प मारने में व्यस्त है स्थानीय मुद्दों पर वोट डालने वालो के पास राष्ट्रिय मुद्दों के लिए समय कहा है .बहुत से तो वोट डालने तक नही जाते और सीना फुला कर कहते है हम भारतीय है मुट्ठी भर लोग ही जाग्रत है .

फिर भी मेरी बात से अगर किसी को कष्ट पंहुचा हो तो मैं छमा प्रार्थी हू

Anonymous said...

सुरेश जी,

कृपया आतंकी अफजल का नाम सुधार लें - वह 'मुहम्मद अफजल' है, 'अफजल गुरू' नहीं। शौकत गुरू एक दूसरी अभियुक्त थी। न्यायालय के दस्तावेज में सही नाम है, मुहम्मद अफजल। कृपया गलत नाम न दोहराएं। कम से कम गुरू शब्द तो गंदा न हो। जहाँ तक संभव हो।

- शंकर

man said...

जय श्री राम सर .,
सर आज के दिन आप के आलेख पढ़ के दोहरी जय श्री राम करने का दिल कर रहाहे ,अपने वतन परस्त मुस्लिम भाई बहिन भी बाबर को अत्याचारी मानते हे ,में उनको सलाम करता हूँ '''' न हमको दीन से बढ़ के ईमान चाहिए ,ना प्यार से बढ़ के जहाँ चाहिए ,,,,आगे बढे जिस मुल्क से सल्माते कोम वो हमें .प्यारा हिन्दुस्तान चाहिए |
सर आप को पुन साधुवाद
संजय बेगानी से पुन सहमत ...की
विवादित जगह पर होस्पिटल का विचार सुन्दर है, क्यों न शरूआत शक्ति स्थल, वीरभूमि जैसी कब्जाई जगहों से करें." ,,,,,, जंहा जबरन नसबंदी जेसे विचार आलोकिक आराम कर रहे हे?
भगवान् श्री राम इनको इसी धरा पे मोक्स दे ?

Mrs. Asha Joglekar said...

आज के निकाल के बाद के लेख की प्रतीक्षा है । न्यायालय ने तो एक लड्डू के तीन टुकडे करके बांट दिया ।

Ratan Singh Shekhawat said...

अब तो अदालत का फैसला आ गया है अब देखना कितना सम्मान करते है ये लोग !
फैसला पूरा पढ़ा नहीं कि सुन्नी वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट जाने की बात करने लगा इससे इनकी मानसिकता का पता चलता है |

abhishek1502 said...

अभी तो ये अंगडाई है
आगे बहुत लडाई है .
न्यायमूर्ति शर्मा जी ने ही सही फैसला दिया .अगर वहा पर मंदिर था तो फिर ये तो हिन्दू समाज के साथ घोर अन्याय हुआ की इतने साल तक हम वहा भव्य मंदिर न बना पाए . और सुन्नी वक्फ बोर्ड को जमीन किस आधार पर मिली है .वहा पर तो सिर्फ हिन्दुओ का अधिकार है.
एक कुत्ते बाबर बाबर ने मंदिर तोडा और मस्जिद बना दी और ये सुन्नी वक्फ बोर्ड इस आधार पर की बाबर सुन्नी था इस लिए वहा पर अधिकार जमा रहे है .
वहा मंदिर था ये बात सुन कर तो उन्हें खुद ही सारी जमीन दे देनी चाहिए पर ये बाबर वाली मानसिकता अब भी रक्खे हुए है .वक्फ बोर्ड का वहा पर दावा नही बनता है.यो तो वही बात हुई की कोई आप को जबर्दस्स्ती आप के ही घर से निकल दे और जब वह आक्रमणकारी कमजोर पड़ जाये तो वो ये कहे की मैं तो बहुत समय से कब्ज़ा किये हू अब ये घर मेरा है .इन को एक इंच भूमि देना भी अपराध है .क्या हम माँ के तीन टुकडे कर दे .ये तो अन्याय है


\

SHIVLOK said...

कोर्ट का फ़ैसला लागू करने में अड़ंगा लगाने व इसे धूल चटाने की दिशा में मायावती ने अपने कदम बढ़ा दिए:-
"फ़ैसले पर अमल , केंद्र की ज़िम्मेदारी"

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अभिषेक की पंक्तियों से अक्षरश: सहमत..

ZEAL said...

.

एक-तिहाई लोलीपोप मुझे देकर , उन्होंने मुझे रोक लिया , वरना हम तो जा रहे थे पकिस्तान, इज्ज़त की जिंदगी बसर करने।

जब मस्जिदों में ही बंदगी करनी है तो हिन्दुस्तान क्यूँ ?, पकिस्तान क्यूँ नहीं ?

http://zealzen.blogspot.com/2010/09/blog-post_30.html


अडवानी, उमा भारती तुझे सलाम --- थोड़े तेरे -थोड़े मेरे !

.

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said...

बहुत सही कह रहे है सुरेश जी.....आप हमेशा हर मसले को सिर्फ़ एक नज़रिये और एक चश्मे से देखते हो और फ़िर अपने आपको पत्रकार कहते हो......

आपने एक अवैध मस्ज़िद का ज़िक्र तो कर दिया लेकिन पुरे हिन्दुस्तान में मौजुद लाखों अवैध मंदिरों का ज़िक्र नही किया जिनको रोकने के लिये सुप्रीमकोर्ट का आदेश भी आ चुका है लेकिन कोई फ़ायदा नहीं है....

अकेले आगरा में 3000 से ज़्यादा मंदिर है जो सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण करके बनाये गये है.....

आगरा के भाजपा सांसद रामशंकर कठेरिया ने ऐसे ही अवैध कब्ज़ा करके ईदगाह रेलवे स्टेशन के पास रेलवे लाइन से मह्ज़ 100 मीटर दुर मौजुद मंदिर के जीर्णौउद्दार के लिये सांसद निधि से 5 लाख रुपये देने का ऐलान किया लेकिन तब किसी ने ऐतराज़ नही किया.....

आगरा के राजा की मण्डी के प्लेटफ़ार्म न. 1 के बीचोबीच मंदिर का कब्ज़ा है जो लगभग पुरा प्लेट्फ़ार्म अपने अंदर समेट चुका है यात्रियों के निकलने के लिये मुश्किल से 3 फ़ुट जगह बची होगी....अक्सर ट्रेन के पीछे भागते यात्री प्लेटफ़ार्म के उससे हिस्से में पहुंचकर फ़ंस जाते है.....

राजा की मंडी चौराहे पर फ़ुटपाथ पर एलआईसी की बिल्डिंग की दीवार पर जहां लोग 4 साल पहले तक पेशाब करते थे वहां साई का मंदिर बना दिया गया है.. जिसने देखते देखते पुरा फ़ुटपाथ और लगभग 25% सडक अपने अंदर ले ली है...जब दिन में दो बार वहां बडी आरती होती है तो आगरा का सबसे संकरा चौराहा बन्द हो जाता है और दो-तीन किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है...

इसका हिसाब कौन लेगा????

"हमारा हिन्दुस्तान"

"इस्लाम और कुरआन"

Simply Codes

Attitude | A Way To Success

{-Bhagat singh-} said...

राम जन्मभूमि का विभाजन किसी भी कीमत पे हिन्दुओ को स्वीकार नही है.
एक तिहाई हिस्सा जो "जज खान" ने मुल्लो को दे दिया है वो जमीन भी हिंदुओ की है और हिँदु किसी भी कीमत पर उस जमीन को नही छोड़ेगे.
राम जन्म भूमि कोई साधारण भूमि नही है कि उसके तीन टुकड़े किये जाये
मुल्लो का हित इसी मे है कि अब वो सहर्ष जो एक तिहाई जमीन उनको मिली है उसको हिँदुओ को सौप दे और भव्य राम मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त करे. अन्यथा वो जमीन कैसे लेनी है वो भी हिँदुओ को पता है.
और आज उन तमाम शहीद कारसेवको को याद करने का दिन है जिन्होने हिँदुत्व की रक्षा के लिये अपनी जान दे दी.एक बात और सभी हिँदुओ को ध्यान मे रखनी चाहिये कि
विहिप और RSS की वजह से ही आज इस देश मे हिँदुत्व का वजूद कायम है और अगर आज हम लोगो को राम मंदिर मिला है तो इसका पूरा श्रेय विहिप और RSS को जाता है जो निस्वार्थ भाव से हिँदुत्व की रक्षा के लिये तन मन धन से लगे है
वरना इन सेकुलर सरकारो ने देश को हिँदुत्व विहीन करने मे कोई कसर नही छोड़ी है

"विहिप ,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उन हजारो शहीद कारसेवको को मेरा शत शत नमन"

abhishek1502 said...

अवैध कब्जे की बात कर ते है .मैं आप को एक छोटा सा उद्दहरण देता हू . कानपुर में एक एक्सप्रेस रोड है (परिपर्तित नाम चौधरी चरण सिंह मार्ग ) जो सेन्ट्रल स्टेशन को माल रोड को जोडती है . सडक बनने से पहले वहा एक बड़े भाग पर आस पास के शहर का कूड़ा डाला जाता था .इतनी बदबू होती थी की पास से निकालने वाला मु में कपडा न रक्खे तो उस की साँस ही रुक जाये .सिर्फ चूहे ,कुत्ते और सूअर आदि जानवर ही वहा पर लोटते थे .
जब कभी वहा पर कूड़ा कम होता तो एक कब्र दिख जाती थी कभी कभी . अर्थात कब्र कूड़े से ढकी रहती थी . जब सड़क बनी तो कब्र छोड़ दी गयी .
धीरे से कब्र पक्की हुई . फिर कुछ समय बाद पत्थर भी लग गए .फिर जगह घेर ली .अब हर ब्रहस्पतिवार को मन्नत मागने वाले आने लगे है क्यों की कब्र मुरादे भी पूरी करने लगी है .अभी और निर्माण की कोशिस मात्र लगभग ३० दिन पहले की थी .पर प्रशासन ने ऐसा न होने दिया .
पर कोशिसे जारी है

ePandit said...

सबका सोचना है कि तथ्यों एवं सबूतों के आधार पर २४ सितम्बर को आने वाला फैसला पूरी तरह मन्दिर के पक्ष में था जिसे कॉंग्रेस सरकार ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिये टलवाकर उसमें १/३ हिस्सा मुस्लिमों को देने का संशोधन करवाया।

जब वक्फ बोर्ड का दावा विवादित जमीन पर खारिज हो गया तो फिर एक तिहाई हिस्सा देने का क्या अर्थ? यह तो साफ तौर पर तुष्टिकरण है।

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said...

@ अभिषेक जी,
सबसे पहले मैं आपको बता दूं की "इस्लाम में पक्की कब्र बनाना जाइज़ नही है इसे हराम कहा गया है क्यौंकि इंसान शुरु से बुतों के रुप में पत्थर की पुजा करता रहा है..पक्की कब्र भी एक बुत/पत्थर ही है अब चाहे उसे खडा पुजो या लेटा..।"

दुसरी बात इन मज़ारों पर मन्नत मांगने वालों में से गैर-मुस्लिमों का प्रतिशत अच्छा खासा रहता है।

मैं आगरा में मौजुद बहुत सी मज़ारो को जिन्होने सडक और फ़ुटपाथ पर कब्ज़ा किया हुआ है तोडने के लिये ज़िला प्रशासन से अपील भी कर चुका हूं लेकिन भला हो हमारे कुछ "कथित मुल्लाओं" का जिन्होने आज के अनपढ मुस्लमानों के दिमाग में ये सब चीज़े भर दी है.....
=============
"हमारा हिन्दुस्तान"

"इस्लाम और कुरआन"

Simply Codes

Attitude | A Way To Success

Samir Jain said...

@काशिफ़ आरिफ़ जी आप,जनाब भारतवर्ष के नागरिक नहीं हो.आप मुग़ल हो ,जो की विदेशी थे.आप के पूर्वजो ने हमारे भारतवर्ष पर कब्ज़ा किया था.और अब अप जैसे लोग केर रहे है.ये टू इस देश का पतन ही है जो की क्रूर कौम की जी हूजूरी करती है,वर्ना आप के कौम की असलियत तो पूरी दुनिया पाकिस्तान,अफगानिस्तान ,रूस का विघटन ,इरान,इराक,बंगलादेश,फिलिस्तीन के वर्त्तमान हाल को देख केर ही लगा लेती है.ये हम भारतवासी ही है जिनकी वज़ह से आप यहाँ सुरक्षित है.वर्ना बाकी देशो में आप इतना भी नहीं लिख पाते.

Samir Jain said...

@सलीम खान जी आप,जनाब भारतवर्ष के नागरिक नहीं हो.आप मुग़ल हो ,जो की विदेशी थे.आप के पूर्वजो ने हमारे भारतवर्ष पर कब्ज़ा किया था.और अब अप जैसे लोग केर रहे है.ये टू इस देश का पतन ही है जो की क्रूर कौम की जी हूजूरी करती है,वर्ना आप के कौम की असलियत तो पूरी दुनिया पाकिस्तान,अफगानिस्तान ,रूस का विघटन ,इरान,इराक,बंगलादेश,फिलिस्तीन के वर्त्तमान हाल को देख केर ही लगा लेती है.ये हम भारतवासी ही है जिनकी वज़ह से आप यहाँ सुरक्षित है.वर्ना बाकी देशो में आप इतना भी नहीं लिख पाते.और आप जिस अनाज की बात कर रहे हो उस पर आपका बिलकुल भी हक नहीं है .आप देश का नमक खा कर के देश की बजाना बंद करो वर्ना ये देश आपकी बजाना चालू कर देगा.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

कशिफ, सलीम और भी इनके जैसे... हर सड़क पर एक मजार उग आती है, हर साल... हर मुख्य मार्ग पर... है हिम्मत यह कहने की कि सन उन्नीस सौ पचास के बाद बने सारे ऐसे निर्माण गिरा दिये जायें.

शाह रजा पहलवी ने ईरान को सुधार कर रख दिया दिया, एक मुसलमान ने... उसके बारे में पढ़ना कभी...

परमजीत सिँह बाली said...

सुरेश जी ये बाते समझ नही आई।

"जहाँ मुस्लिम और सिख साम्प्रदायिकता ने लगातार सरकार से मनमानी करवाई है,"

सवाल ये है कि "सिख साम्प्रदायिक्ता ने कब सरकार से मनमानी करवाई??"

१९८४ मे;)कृपया बताये।

पूरा आलेख पढ़ा लेकिन इस बात को समझने मे असमर्थ रहा।

खबरों की दुनियाँ , भाग्योत्कर्ष said...

सबके दिलों का दर्द कह दिया आपने । अच्छी पोस्ट , शुभकामनाएं । पढ़िए "खबरों की दुनियाँ"

yogesh saroya said...

suresh ji ...Aap apana ek PAGe facebook me bhi banaiye....
aur ager pahale se bana ho to url ko blog me puclish kar dijiye.....
hum join karenge.
JAI HIND

JANARDAN MISHRA said...

musalmano ko bhi ab samzlena chahey ki unko kuch gande rajnitigya log bharma kar badnam kar rahe hai unhe sachha hindustani ban kar rahna chahiye...........

kamal ahmad said...

Bhai logo, yaha sab ke comments padhey, kisi ne apne desh ki baatein nahi ki, sab ke sab bhid gaye apney apney Dharm ke liye, Kya Bharat ki seva sabse pehla dharm nahi hai,
Aur congressio se yahi kehna chahunga 60 saal ho gaye Shaasan kartey hue, kya bhalaa kar diya musalmaano ka, kya diya unko sirf hindu muslim mein ladaai karvaai,Desh ka bantvaara kara diya, aur angrejo ki phoot daalo Raj karo vaali neeti apnai.
musalmaan berozgaar ke berozgaar hi rahe, aur zyada backword ho gaye, Muslim tushtikaran ki neeti apnakar kewal musalmaano ka istemaal vote bank ke roop mein kiya jaa raha hai.
Aur jo muslims Hinduo ko ya Unke devi devtaao ya mandiro ko gaaliya de rahe hai, zara ek baat batao aisa kon si hadis ya shariyat mein likha hai ki tum dusrey dharm ka apmaan karo, Prophet Mohd. Ne sakht hidaayat di thi ki kisi dharm ko gaali mat do, aur Sabse bari baat to ye hai ki islam mein kahi aisa koi aadesh nahi hai,Hazrat Mohd. (PBUH) ke chacha ne to aakhir tak islaam kabool nahi kiya tha, Lekin kitna saath diya tha Nabi ka, to kya pyarey nabi ne unke saath Bhojan karna chhor diya tha, wo unke chachaa hi the.
Ai Duniya ke musalmaano sudhar jao, kyun poorey muslim samudaaye ko badnaam karqa rahe ho,
Maaloom hai Aaj ka musalmaan sabse zyada sharaab,juaa,satta,atankwad,bhrashtachar,jaativaad,kattarpanth mein lipt hai, is vishay par saala kisi mulla, ya muslim netaa ne fatwa nahi diya, aur jo Desh bhakti ka prateek hai Vandey Matram Us par Raajneeti karney ke liye Hazaaro fatvey laga diye, jiske liye Desh ke Mahaan sapoot Bhagat singh, Ashfaq ullah khan vandey matram kehtey hue marr gaye, pichhley 100 saalo se koi fatwa nahi aaya aur jaise hi chunaav aaye the to muslimo ke vote lene ke liye unko bharkaa diya.
What a bloody politics?
Mein jaante hun ki kitney muslim deshbhakt hai, jab Bharat-Pak ka match hota hai mostly muslims pak ka support kartey hai, bari sharm aati hai. Kehlo jise kaafir kehna hai, par meine Bharat ko apni maa maana hai aur iski dil se seva karunga.
Musalmaan kabhi tarakki ke baarey mein nahi sochega bus hindu-muslim kitni hi kara lo,chahe saala peeth peechy kitney hi bure kaam karta ho,
Aur mein Hindu Bhaiyo se bhi kehnaa chahunga ki wo kyun is prakaar ki baatey kartey hai ki dopsrey ki dharmik bhaavno ko thes pahuche, humein kisi dharm ki ya usse sambandhit pavitra cheezo ki buraai nahi karni chahiye,baaki aapka matbhed Dharm ke kuch logo se ho sakta hao, to aap un logo ko bura kahiye.
Dharm koi bura nahi Dharm ke log burey hai.
Plz ab humko ye sab kuch chhor kar Bharat ki tarakki ke baarey mein sochna chahiye, humne is desh ka namak khaya hai, iska karz hai hum par isko chukaana hai, namak harami mat karo.
Jisko namak harami karni hai wo PAKISTAN jaye Bharat ko uski aavshyakta nahi hai, Usko pak mein khud samajh aa jayega ki kya hota hai.
To aa jaiye ek sath dosto ek munch par, hum sab Hindu-musalmaan ek sath milkar Desh ki tarakki ke baarey mein sochein,
Aaj humaari ye haalat dekhkar Maa bharati ki Aankho mein aansu aatey hai, Khokhla kar diya in sankeerna maansikta ke logo ne.
If u r satisfied by my views,
Send me ur response to...
kamalahmadbhartiya@gmail.com
Dhanyavaad!!
Jai Hind, Jai Bharat, Vandey Matram!!!

I and god said...

this is a site for hindus, and by hindus. i am a hindu also.

this site is beautifully showing the pain of hindus in general, but it looks that anti-hindu lobby is more strong.

my request is that we all hindus , also take the help of rama and krishna , by reading their scriptures like ramayana and bhagwadgita.

if you feel difficulty in understanding it, i offer my personal services . you can be in my touch regulartly , and i will tell you , what i have learned after sitting at lotus feet of saints.

you can contact me at my email: richmond.intel@gmail.com then i will give you my phone and skype address.

jai shree ram

ashok gupta
delhi.