Wednesday, September 1, 2010

एक भिखमंगे और एक गाँधीवादी की कहानी…... Pakistan Floods, India's Donation to Pakistan

क्या आपने कभी ऐसा भिखारी देखा है जो भीख भी माँगता है और भीख देने वाले को न सिर्फ़ गालियाँ देता है, बल्कि दाता को नुकसान पहुँचाने की हरसम्भव कोशिश भी करता रहता है… दूसरी तरफ़ एक गाँधीवादी दाता भी है जो उस भिखारी से हमेशा बुरा-भला सुनता रहता है, वह भिखारी आये दिन उस दाता को लातें जमाता रहता है, दाता के घर में उसके घर की गन्दगी फ़ैलाता रहता है… फ़िर भी वह बेशर्म गाँधीवादी दाता हें हें हें हें हें हें हें करते हुए लगातार उस भिखारी के जूते खाता जाता है, खाता जाता है, खाता ही रहता है। न तो कभी पलटकर यह पूछता है कि "आखिर तू भिखारी क्यों रह गया? और इतने साल से भीख ही माँग रहा है तो आखिर वैसा कब तक बना रहेगा? क्या कभी अपने पैरों पर खड़ा होना भी सीखेगा?", और न ही उस भिखारी को दो लात जमाकर मोहल्ले से बाहर करता है, न ही उससे ये कहता है कि "…आगे से कभी मेरे दरवाजे पर मत खड़ा होना, मेरा-तेरा कोई सम्बन्ध नहीं…"।

इस प्रकार उस भिखारी की हमेशा मौज रहती है, वह गाँधीवादी दाता से अहसान जताकर पैसा तो लेता ही है, बाकी पूरे मोहल्ले से भी यह कहकर पैसा वसूल करता है कि "यदि तुम लोगों ने मुझे भीख नहीं दी तो मैं अपने बच्चों को तुम्हारे घर पर छोड़ दूंगा…" उल्लेखनीय है कि उस भिखारी द्वारा पाले-पोसे हुए बच्चे बुरी तरह से "एड्स" से पीड़ित हैं जिन्हें कोई अपने घर में देखना तक पसन्द नहीं करता, लेकिन भिखारी इसे भी अपना प्लस पाइंट समझकर पूरे मोहल्ले को धमकाता है कि "भीख दो, वरना मेरे बच्चे आयेंगे…"।

उस मोहल्ले का एक पहलवान है, वैसे तो वह भिखारी उस पहलवान से डरता है, क्योंकि वह पहलवान चाहे जब उस भिखारी को उसी के घर में घुसकर झापड़ रसीद करता रहता है, लेकिन पहलवान को भी उस भिखारी की जरुरत पड़ती है अपने उल्टे-सीधे काम करवाने के लिये,,,, सो वह उसे पुचकारता भी रहता है, खाने को भी देता है… उसके एड्स पीड़ित बच्चों की देखभाल भी करता है। मोहल्ले का पहलवान, उस गाँधीवादी को दबाने और धमकाने के लिये उस भिखारी का उपयोग गाहे-बगाहे करता रहता है, और चूंकि उस गाँधीवादी में आत्मसम्मान नाम की कोई चीज़ नहीं है, इसलिये वह पहलवान की लल्लो-चप्पो भी करता रहता है और भिखारी की भी खिदमत करता रहता है। हालांकि उस भिखारी के पाले-पोसे बच्चे पहलवान की नाक में भी दम किये हुए हैं, लेकिन पहलवान अपनी नाक ऊँची रखने के चक्कर में किसी को कुछ बताता नहीं, जबकि मोहल्ले के सभी लोग इस बात को जानते हैं।

असल में उस गाँधीवादी के घर के कुछ सदस्य अति-गाँधीवादी टाइप के भी हैं, और हमेशा सोचते रहते हैं कि कैसे उस भिखारी से मधुर सम्बन्ध बनाये जायें, वे लोग हरदम सोचते रहते हैं कि भिखारी उनका दोस्त बन सकता है, वे लोग भिखारी को अपने साथ, अपने बराबर बैठाने की जुगत में लगे रहते हैं… भले ही वह इन लोगों की बातों पर कान न देता हो और न ही गाँधीवादी के बराबर बैठने की उसकी औकात हो… फ़िर भी लगातार कोशिश जारी रहती है कि किस तरह भिखारी का "दिल जीता" जाये।

मजे की बात यह कि गाँधीवादी और वह भिखारी बरसों पहले एक ही मकान में रहते थे, फ़िर भिखारी अपने कर्मों की वजह से अलग रहने लगा, उसी समय गाँधीवादी ने दरियादिली दिखाते हुए उस भिखारी को गृहस्थी जमाने के लिये काफ़ी पैसा दिया था, लेकिन उस भिखारी की "शिक्षा-दीक्षा" और मानसिकता कुछ ऐसी थी कि वह हमेशा असन्तुष्ट रहता था, चाहे जितनी भीख मिले हमेशा आतिशबाजी में उड़ा देता था, "गलत-सलत शिक्षा-दीक्षा" के कारण उसके बच्चों को एड्स भी हो गया… लेकिन फ़िर भी वह बाज नहीं आता। वैसे एक बार जब पानी सिर से गुजर गया था तब गाँधीवादी ने उस भिखमंगे की जमकर ठुकाई की थी, लेकिन उसके बावजूद वह आये-दिन चोरी के इरादे से घुसपैठ करता रहता है, गाँधीवादी सिर्फ़ सहता रहता है।

कई बार बहुत "कन्फ़्यूजन" होता है कि आखिर दोनों में से "बड़ा लतखोर" कौन है? वह भिखारी या वह गाँधीवादी?
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खैर जाने दीजिये, कहानी बहुत हुई… अब दो खबरें असलियत के धरातल से भी पढ़ लीजिये…



1) पाकिस्तान ने बाढ़पीड़ितों के लिये भारत की दी हुई 50 लाख डालर की सहायता राशि लेने से इंकार कर दिया था… फ़िर कहा कि यह राशि उसे संयुक्त राष्ट्र के जरिये दी जाये… और "मेरा भारत महान" इसके लिये भी राजी है…। अब ताज़ा खबर ये है कि इस 50 लाख डालर की सहायता रकम को पाँच गुना बढ़ाकर 250 लाख डॉलर कर दिया गया है, ताकि हमारा "छोटा भाई" और अधिक हथियार खरीद सके, और अधिक कसाब-अफ़ज़ल भेज सके, कश्मीर में और अधिक आग भड़का सके… ("अमन की आशा" की जय हो…)। जबकि बाढ़ का फ़ायदा उठाकर अब मंगते पाकिस्तान ने चिल्लाना शुरु कर दिया है कि उस पर समूचे विश्व के देशों और वर्ल्ड बैंक का जितना भी कर्ज़ बाकी है वह माफ़ किया जाये, क्योंकि वह चुकाने में सक्षम नहीं है…।

मैने तो सुना था कि OPEC यानी पेट्रोल उत्पादक देशों का समूह जिसमें अधिकतर इस्लामिक देश ही शामिल हैं और जो मनमाने तरीके से पेट्रोल के भाव बढ़ाकर खून चूसने में माहिर है… वह पूरी दुनिया को खरीद सकते है, फ़िर पाकिस्तान के बाढ़पीड़ितों को गोद क्यों नहीं लेते? या OPEC ऐसा क्यों नहीं कहता कि पाकिस्तान हमारा "भाईजान" है और हम उसके सारे कर्जे चुका देंगे… लेकिन खुद इस्लामिक देशों को ही भरोसा नहीं है कि उनके दिये हुए पैसों का पाकिस्तान में "सही और उचित" उपयोग होगा। ये बात और है कि "जेहाद" और "ज़कात" के नाम पर चादर बिछाकर चन्दा लेने में यही सारे देश बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं… जबकि हकीकत में बाढ़पीड़ित गरीबों की मदद करना कोई नहीं चाहता और जो देश ऐसा चाहते हैं उन्हें पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है…। फ़िर भी हम हैं कि 50 लाख डालर की जगह ढाई करोड़ डालर देकर ही रहेंगे… चाहे कुछ हो जाये।






2) इधर "अमन की आशा" के एक और झण्डाबरदार शाहरुख खान ने फ़िर से अपने पाकिस्तान प्रेम को जाहिर करते हुए IPL-4 में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को खिलाने की पैरवी की है… जबकि उधर इंग्लैण्ड में नशेलची मोहम्मद आसिफ़ के साथ 6 अन्य खिलाड़ी पाकिस्तान का राष्ट्रीय खेल (यानी "सट्टेबाजी") खेलने में लगे हैं…। शायद शाहरुख खान अब माँग करें कि उन सभी "मज़लूम, मासूम और बेगुनाह" खिलाड़ियों को भारत की "मानद नागरिकता" प्रदान की जाये, ताकि उन्हें किसी लोकसभा सीट से खड़ा करके संसद में पहुँचाया जा सके… (मुरादाबाद की तरह)

फ़िलहाल आप तो सेकुलरिज़्म और गाँधीवाद की जय बोलिये और अपने काम पर लगिये… क्योंकि भिखमंगों के साथ इन दोनों की फ़ूहड़ और आत्मघाती जुगलबन्दी तो 65 साल से चल ही रही है… आगे भी चलती रहेगी…


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33 comments:

संजय बेंगाणी said...

किसान मर रहे है? मरने दो...बस वे नहीं मरने चाहिए जो हमें मारने पर तुले हुए है. सब जानते है भारत का दिया पैसा कहाँ जाने वाला है.

अच्छा होता पाकिस्तान के हिन्दुओं पर यह पैसा खर्च होता. कम से कम भारतीयों की कमाई जैहादियों की जेब में नहीं जाती.

यह प्लिज ले लो प्लिज ले लो वाला मामला तो पहली बार देखा है. जय हो...

जी.के. अवधिया said...

मजे की कहें या दुःख की बात तो यह है कि उस गांधीवादी दाता को, जिसने भिखारी को पाल रखा है, मोहल्ले के लोगों ने ही सारा अधिकार दे रखा है।

Bhavesh (भावेश ) said...

अगस्त २० को मैंने भी इस विषय पर अपने विचार लिखे थे कि क्यों हम आस्तीन में सांप पालने का खेल खेल रहे है. अफ़सोस भोपाल पीडितो को देने के लिए न्याय या पैसा सरकार के पास नहीं है लेकिन आतंकवाद की कोख, पडोसी देश के पाँव पड़ कर, उससे दुत्कार खा कर, उसके सामने गिडगिडा कर उसे भीख देने की उलटी गंगा बहा कर, उसे देने के लिए देश में पैसे की कोई कमी नहीं है.

पी.सी.गोदियाल said...

क्या कहें, गाधीवादी की तो बात ही निराली है मगर भिखमंगे भी उस्ताद है समस्या को भुनाने में और साथ ही वो अंगरेजी वाली कहावत भी उलटना चाहते है ! वैसे सुरेश जी आपने एक गलती लिखने में कर रखी है कृपया उसे सुधार ले ५ लाख डौलर नहीं बल्कि ५० लाख डौलर है ( ५ मिल्लियन ) और कुल ढाई करोड़ डौलर हुआ २५ लाख नहीं !

पी.सी.गोदियाल said...

sORRY, IN MY PREVIOUS COMENT, I FORGOT TO ADD THE ENGLISH PROVERB;
'BAGGERS CAN'T BE CHOOSERS' BUT IN PAKISTAN'S CASE BAGGERS ARE TRYING TO BECOME CHOOSERS!!

Suresh Chiplunkar said...

गोदियाल जी भूल सुधार हेतु धन्यवाद, 5 लाख की जगह 50 लाख और ढाई करोड़ डॉलर कर दिया है…

काजल कुमार Kajal Kumar said...

1225 करोड़ रूपये बने 250 मिलियन डालर को 49 के हिसाब से बदल कर. लुटे-पिटे करदाता को ठग कर नंगे ने नंगे को भीख दी. नेताओं की अंटी से धेला भी न गया.
मेरा भारत महान.

Divya said...

.
Unfortunately there is pseudo-secularism in our country. This is the soul cause of all trouble in our country.

.

सुलभ § Sulabh said...

शायद इसलिए कहते हैं.... मेरा भारत महान (?)

सौरभ आत्रेय said...

इससे बड़ा मूर्खता का उदाहरण पूरे विश्व में कहीं नहीं मिल सकता यह मैं दावे के साथ कह सकता हूँ.अपने हत्यारे को ही पैसे दिए जा रहें हैं.

यह भी सभी देख लो हम भारतियों का कर(taxes)आदि का पैसा यहाँ की सरकार आतन्कवादियों को हमारी ही हत्या की सुपारी के लिये दे रही है.

कुछ मुर्ख लोग कहते हैं यह सब अन्तराष्ट्रीय राजनीति के लिये करना पड़ता है. भाड़ में गयी ऐसी राजनीति अपना घर सम्भलता नहीं और खाने को दाना नहीं है और शान, दिखावे के लिये दावत के लिये पूरा मोहल्ला बुलाने को तैयार हो. अन्तराष्ट्रीय राजनीति अपने को सशक्त करने के उपरान्त होती है इन सब बकवासबाजियों से नहीं. और भीख भी भिखारी को देख कर दी जाती है.
"शक्तिशाली के सभी मित्र होते हैं कमजोर को कोई नहीं पूछता चाहे व्यक्ति हो या राष्ट्र"

"यह गांधीवाद सोच इस देश के सर्वनाश में सबसे बड़ा कारण है"

आनंद जी.शर्मा said...

The Beggars

Beggars are not those, who for Economic Reasons, have Temporarily Spread their Palms,
Beggars certainly are those, who attack my Country, Loot, Rape, Plunder with no Qualms.

"Beggar" is a Mentality, deprived of "Food" ; for Body or for the Mind,
Devil helps them with Arrogance and Desperation ; standing their behind.

Even if these "Beggars" become Rich and Famous ; from Loot and Plunder,
Honesty and Peace are Crime ; thy Mentor Devil won't allow this "Blunder".

"Beggars'" Modus operandi has "Refined" ; It is safe to promote all Baser Instincts,
Now corrupting unsuspecting immature minds ; do you understand these clear hints ?

"Beggars" sole objective is one ; their mind gets focused like a Laser beam,
The intensity of "Beggars'" thoughts, Out-focused Intellectuals can not dream.

Country spends a lot on Education and Upliftment of "Beggars" and Anti-Nationals,
Learning fully at Taxpayers' cost; they return to "Family Business" as Professionals.

Unashamed Dishonest "Beggars" want to "Negotiate" ; by sending their Officials,
Height of Idiocy is ; not asking the "Beggars" their History, Deeds,and Credentials.

Culturally, Traditionally, Habitually Beggars remain hungry and always they fight,
The more "Donors" give them Freely, the more they demand as their "Birth-Right".

My Country's Terrace-Garden has long been encroached upon by Beggars,
Once known as Eden, has now turned to Hell by Beggars, Evil Death Vendors.

Why in the first place Beggars came in, if their land was providing food and water,
Barren lands cannot feed, and intense hunger is Devil's tool to design their culture.

Hellfire in belly, Devil's design in mind, dangerous creature is called "Beggar",
Logic, Request not in Dictionary, they understand only Rape, Murder & Plunder.

Beggar is traditional Rapist of the Host Country - that offers Job, Food and Shelter,
My Country shelters many clans of Beggars ; but Beggars' only aim is to Rape her.

My Country remains Perpetual Donor of Wisdom, Food, Shelter to all for the ages,
The "Eternal Beggars" will remain Beggars, so it shall be written in History pages.

दीर्घतमा said...

यह भीख उसी प्रकार है जैसे १९४८ में गाँधी ने ५० करोर देने क़े लिए अनसन किया था और दिया भी फिर पाकिस्तान ने उसी पैसे से भारत पर हमला किया था ,ये गाधी बादी निति भारत क़ा सर्वनाश कर रही है .

विजयप्रकाश said...

आज के समय में कथित गांधीवाद अप्रासंगिक हो गया है.पता नहीं यह बात हमारे राज नेताओं को कब समझ आयेगी.हमें तो "शठे शाठ्यम समाचरेत" वाली नीति अपनानी चाहिये.

raghu said...

सुरेश जी बहुत हि अच्छा लिखा है, उस भिकमंगे से ज्यादा निच तो वो गांधिवादि है, जो ऐसे काम के लिये पैसा दे रहा है, जो सारे विश्व के लिये खतरनाक है!गांधिवादि ये जानते हुये भी पैसे दे रहा है, क्योंकि उसे अपनि गांधिवादि छबी हर हाल मे बनाई रखनि है! चाहे वो भिखारि उस गांधिवादि के परिवार का सत्यानाश कर दे!
भविष्य मे कहि ऐसा ना हो,कि ये गांधिवाद आतंकवाद से भी भयानक रुप ना ले!

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

इन मूर्ख गाँधीवादियों को इक्तनी सी बात क्यूँ नहीं समझ में आती कि:---
रहिमन लाख भली करौ, कछु सुधार न होए
राग सुनत,पय पियतहू,सांप सहजहि घर खाए ।।

चाटे-काटे स्वान के, दुहूं भान्ती विपरीत....

Meenu Khare said...

सुरेश जी बहुत अच्छा लिखा है.

Ravindra Nath said...

कौन समझेगा भारत (हिन्दु) कि २५० मिलीयन डलर मे १६% वोट खरीदे गए हैं, वैसे खरीदने वाले को भी धोखा होने वाला है, क्योंकि यह वोट तो समय देख कर करवट लेता है।

abhishek1502 said...

अति सुन्दर
आप का तो अंदाज ही निराला है.

nitin tyagi said...

गाँधी की अहिंसा?? नहीं कायरता है!

chandra said...

ab to azruddin bhi rozana apne comments de raha hai bo bhi cricket match fixing?
ak kahavat '' sup to sup chalani bhi bol rahi hai jisme hazaro chhed hain''

Anonymous said...

सर्प को दूध पिलाकर हमारी सरकार देश को नर्क कि को ढकेल रही है.

{-Bhagat singh-} said...

अगर गांधीवादी दाता ऐसे ही हेँहेँहेहेँहेँहेँ करते हुये सब लुटाता रहा तो एक दिन वो खुद भिखारी बन जायेगा .और रही बात हमेशा मांगने वाले उस एडस पीड़ित भिखारी की . तो वो तो जन्मजात भिखारी है. उसका अपना तो कुछ है ही नही. सब कुछ भीख मे मिला है. ऐसे भिखारी से बचने का एक ही उपाय है कि उसको गोली मारकर उसकी असली जगह नर्क मे पहुचा देना चाहिये

DEEPAK BABA said...

दादा आप भूल रहे हैं....... नागपंचमी थी....... सोनिया मैडम धीरे धीरे ही सही मगर हिन्दुस्तानी तहज़ीब सीख रही है......... उन्होंने सरदार जी से कहा नागपंचमी है....... नागों को दूध पिलाओ.........

बस..


पाकिस्तान को मदद जारी हो गई.

sm said...

very well written
but one point i want to add,
do you think one beggar should give donation to other beggar?

viruslover said...

गाँधी वाद हिंदुस्तान को खा जायेगा मगर फिर भी गाँधी परिवार को मजा नहीं आये गा १६% वोट के लिए भारत की माँ बहन एक हो जाये कोई बात नहीं पहले अपना पेट भर जाये फिर पाकिस्तान का पिछवाडा ढक जाये बस हो गयी राजनीती
यह गाँधी वाद नहीं गन्दी बात है उनकी बताई हर बात हर नीति क्यों नहीं समझना चाहते भारत वासी
मेरा भारत महान १०० में ९९ बेईमान एक दम सही कहा था सनी देवल ने जब सोचो तो सही लगता है

अपने ही खून पसीने की कमाई से अपनी ही मौत की सुपारी वाह रे अंकल सरदार जी और मेरी प्यारी इंग्लिश बहुरानी थोड़े बम मिसाइल AK ४७ भेज दो बाढ़ में इनका भी तो नुकसान हुआ होगा उनके आयुध भंडार भी बह गए होगे थोड़ी मदद और कर दो बहुत सारा प्यार मिले गा पाकिस्तान के मित्र देसों का

गौतम राजरिशी said...

आपके कटाक्ष हमेशा निशाने पर होते हैं सुरेश जी...

सचमुच ये तय करना बड़ा मुश्किल है कि दोनों में बड़ा लतखोर कौन है।

Anonymous said...

सुरेश जी, जिसे आप लतिया रहे हैं वो भारत है. लेकिन ज़ाहिर है आप के विचार सरकार की नीतियों से मेल नहीं खाते. उसी तरह बहुत सारे पाकिस्तानियों के विचार भी, संभव है, पाकिस्तानी सरकार की नीतियों से मेल ना खायें. तो क्या इस मतभेद के चलते हमें इंसानियत का नाता भी भूल जाना चाहिये?

Ravindra Nath said...

Anonymous बंधु, आप किस इंसान और इंसानियत की बात कर रहे हैं? हमारी
सहायता तो सरकार के माध्यम से ही जाएगी, कहां जाएगी, किस जरूरतमंद को
मिलेगी आप जानते हैं क्या? और यह सब सामग्री भारत के नाम से नही जायेगी,
UN के नाम से जाएगी, संभव है उसके बाद सरकार इसको JuD (मुम्बई हमलों क
रणनीतिकार) के माध्यम से वितरित कराए। ऐसे मे वो हमारे ही मदद को हमारे
खिलाफ इस्तेमाल करेगा, आप इस विषय कभी सोचियेगा फिर अपना comment
दीजिएगा।

Anonymous said...

आजकल जो हमारे देश की हालत है उसे देख के तो लगता है की अब ना सरकार को कोई चिंता है ना ही जायदातर लोगों को | हमरा देश जो भी तरक्की कर रहा है वो लोगों की अपनी मेहनत का नतीजा है | उस पे भी सरकार की और सभी की नजर लगी रहती है | जो हमरा नुक्सान करते है हम ना उन्हें जवाब देते हैं और ना ही कोई ठोस प्रतिकिरिया दिखलाते है , सिर्फ हल्ला और नौटंकी करने के अलावा कुछ नहीं होता | ना जाने ये अहिंसा क्या विचारधारा है ? ये महात्मा और साधुवाद तक तो ठीक है , एक बहुत अच्छी विचारधारा भी है , मगर हमारे देश को चलाने और राज करने के लिए बिलकुल भी अप्रायोगिक है | प्रजातंत्र और राजनीती , जहाँ कूटनीती और छल का इस्तेमाल एक बहुत जरूरी औजार की तरह किया जाता है , वहां अहिंसा की बात करना गटर की गन्दगी साफ़ करने की बजाय , उसके पास धूप या अगरबत्ती जलाने जैसा ही है | आज भी हम विकसित देशों की बात करे तो ,उन्होंने लड़ कर आजादी हासिल की , मगर हमें मिली आजादी भीख की तरह लगती है | जंग का मतलब लड़ना होता है , दुश्मन को मिटा देना और उसे अपनी शक्ति का लोहा मनवाना होता है , ना की उपदेश देना | आज भी हम उपदेश ही तो देते रहते है | जो हमारे पीठ पे वार करते है हम उन्ही से भाईचारा बनाने की सोचते है | हम इसी बकवास में पले और आज भी यही बकवास देखते है | जब भी अनुदान या बैठक की बात होती है , तो मन मै घिन होने लगती है , की क्या सरकार को कुछ दिखाई नहीं देता ? जो तकरीबन ६० सालो हमारी पीठ में छुरा भोंक रहे है , हम उन्ही के पास घुसे जा रहे है ? और उनसे सुलह कर के भी हमें कोन सा अमन चैन का खजाना मिल जाने वाला है ? सरकार तो एक चालक व्यवसायी की तरह लगती है जो सब कुछ नौटंकी कर के अपनी जेब भरने में लगी है | उसे ना दुश्मनों की फ़िक्र है और ना ही समस्याओं से कुछ लेना है | फिर भी हमारे देश के अहिंसा वादी लोगों का एक बहुत बड़ा हजूम है जो आज भी उनके बारे में बुरा नहीं सुनना चाहते | हम तो बस यही सुन के रोमांचित हो उठते हैं की
"वो खून कहो किस मतलब का जिसमे उबाल का नाम नहीं "
काश हमने भी लड़ कर अपना हक़ और अपनी आजादी पायी होती , यकीनन हम आज सबसे विकसित राष्ट्र होते , और सुरेश जी की कहानी की तरह ना किसी पहलवान की लल्लो चप्पो करनी पड़ती और ना ही किसी भिखारी के जूते खाने पड़ते |
धन्यवाद सुरेश जी , कोई तो है जो हमारे मन की कहता है , धन्यवाद
जय हिंद

Ikraaz (Anil Mistery) said...

आजकल जो हमारे देश की हालत है उसे देख के तो लगता है की अब ना सरकार को कोई चिंता है ना ही जायदातर लोगों को | हमरा देश जो भी तरक्की कर रहा है वो लोगों की अपनी मेहनत का नतीजा है | उस पे भी सरकार की और सभी की नजर लगी रहती है | जो हमरा नुक्सान करते है हम ना उन्हें जवाब देते हैं और ना ही कोई ठोस प्रतिकिरिया दिखलाते है , सिर्फ हल्ला और नौटंकी करने के अलावा कुछ नहीं होता | ना जाने ये अहिंसा क्या विचारधारा है ? ये महात्मा और साधुवाद तक तो ठीक है , एक बहुत अच्छी विचारधारा भी है , मगर हमारे देश को चलाने और राज करने के लिए बिलकुल भी अप्रायोगिक है | प्रजातंत्र और राजनीती , जहाँ कूटनीती और छल का इस्तेमाल एक बहुत जरूरी औजार की तरह किया जाता है , वहां अहिंसा की बात करना गटर की गन्दगी साफ़ करने की बजाय , उसके पास धूप या अगरबत्ती जलाने जैसा ही है | आज भी हम विकसित देशों की बात करे तो ,उन्होंने लड़ कर आजादी हासिल की , मगर हमें मिली आजादी भीख की तरह लगती है | जंग का मतलब लड़ना होता है , दुश्मन को मिटा देना और उसे अपनी शक्ति का लोहा मनवाना होता है , ना की उपदेश देना | आज भी हम उपदेश ही तो देते रहते है | जो हमारे पीठ पे वार करते है हम उन्ही से भाईचारा बनाने की सोचते है | हम इसी बकवास में पले और आज भी यही बकवास देखते है | जब भी अनुदान या बैठक की बात होती है , तो मन मै घिन होने लगती है , की क्या सरकार को कुछ दिखाई नहीं देता ? जो तकरीबन ६० सालो हमारी पीठ में छुरा भोंक रहे है , हम उन्ही के पास घुसे जा रहे है ? और उनसे सुलह कर के भी हमें कोन सा अमन चैन का खजाना मिल जाने वाला है ? सरकार तो एक चालक व्यवसायी की तरह लगती है जो सब कुछ नौटंकी कर के अपनी जेब भरने में लगी है | उसे ना दुश्मनों की फ़िक्र है और ना ही समस्याओं से कुछ लेना है | फिर भी हमारे देश के अहिंसा वादी लोगों का एक बहुत बड़ा हजूम है जो आज भी उनके बारे में बुरा नहीं सुनना चाहते | हम तो बस यही सुन के रोमांचित हो उठते हैं की
"वो खून कहो किस मतलब का जिसमे उबाल का नाम नहीं "
काश हमने भी लड़ कर अपना हक़ और अपनी आजादी पायी होती , यकीनन हम आज सबसे विकसित राष्ट्र होते , और सुरेश जी की कहानी की तरह ना किसी पहलवान की लल्लो चप्पो करनी पड़ती और ना ही किसी भिखारी के जूते खाने पड़ते |
धन्यवाद सुरेश जी , कोई तो है जो हमारे मन की कहता है , धन्यवाद
जय हिंद

आनन्‍द पाण्‍डेय said...

सुरेश जी
सबसे पहले तो आपका धन्‍यवाद करना चाहता हूँ कि आप कभी भी अन्‍याय का सहयोग न करते हुए हमेशा इसके खिलाफ आवाज बुलंद करते हैं ।

इस विषय पर पहले ही लोग अपनी-अपनी राय दे चुके तो कुछ खास कहना रह नहीं गया ।
एक चीज जो मुझे कहनी है वो यह कि हम सारे भारतीय इस विषय पर खिन्‍न होते हैं कि इस तरह के वाकये क्‍यूँ हो रहे हैं , हम ये भी जानते हैं कि यह यहॉं की जनता का काम नहीं नेताओं का काम ही है, फिर भला हम बार बार गलत नेताओं का चुनाव क्‍यूँ करते हैं ।

यह जो वर्तमान सरकार है, है तो यह भी गाँधी और नेहरू की ही वंशपरम्‍परा, तो रंग तो वही होगा न ।
एक देश के बाप बनने के चक्‍कर में अपनी ही नहीं करोणों लोगों की माँ भारत माँ को बेच देता है तो दूसरा केवल राज्‍य करने के चक्‍कर में भडुवों से अपना ही बलात्‍कार करवा लेता है ।

अपशब्‍द प्रयोग के लिये क्षमा प्रार्थी हूँ किन्‍तु जब ऐसे प्रकरण आते हैं तो खून खौल उठता है ।

खैर आपकी लेखनी धन्‍य है जो आप भारत की समस्‍याओं पर इतने सजग हैं ।
माँ वीणापाणि की आप पर कृपा बनी रहे ।

Rahul Gupta said...

Apne Desh mai to kai logo ko 1 waqt ki roti bhi naseeb nahi hoti hai or ye daan mai paise dekar mera desh mahan karne chale hai.
pahale khud k har state mai jakar dekho kahan par kya haal hai. phir dena ye daan dakshina. ok

JANARDAN MISHRA said...

ye padosi des ko jo paisho ki madad ki ja rahi hai kya vo netao ke bap ka hai kya apne jeb se dena hoga to denge.??????????