Thursday, September 9, 2010

वामपंथी क्रान्तिकारी चे ग्वेवारा, भारत माता और सरस्वती से भी बड़े हैं…?…… Che Shoes, Kerala Communist, Secularism

खबर केरल के कन्नूर से है, जहाँ वामपंथियों की स्टूडेण्ट्स ब्रिगेड DYFI ने एक जूता बेचने वाले की दुकान पर हमला किया, दुकानदार को धमकाया और दुकान को तहस-नहस कर दिया। कारण? वामपंथियों के आराध्य देवता(?) चे ग्वेवारा की तस्वीरों वाले जूतों की बिक्री…। उल्लेखनीय है कि कार्ल मार्क्स, लेनिन, माओ, चे ग्वेवारा, फ़िदेल कास्त्रो (यानी सब के सब विदेशी) कुछ ऐसे लोग हैं जिनकी पूजा वामपंथी करते हैं (भले ही वे खुद को नास्तिक कहते हैं, लेकिन असल में ये सारे शख्स इनके लिये पूजनीय हैं और इनकी किताबें वामपंथियों के लिये रामायण-गीता के समान हैं)। जब केरल में इन्होंने चे ग्वेवारा की तस्वीरों को जूतों पर देखा तो इनका माथा घूम गया और उस दुकानदार की शामत आ गई जो दिल्ली से यह जूते मंगवाकर बेच रहा था, उस बेचारे को तो ये भी पता नहीं होगा कि चे ग्वेवारा कौन थे और क्या बेचते थे?


लेकिन पाखण्ड और सत्ता के अभिमान से भरे हुए वामपंथी कार्यकर्ताओं ने सभी जूतों को नष्ट कर दिया और दुकान से बाकी का माल दिल्ली वापस भेजने के निर्देश दे दिये। क्या कहा? पुलिस?…… जी हाँ पुलिस थी ना… दुकान के बाहर तमाशा देख रही थी। भई, जब माकपा का कैडर कोई "जरुरी काम" कर रहा हो तब भला पुलिस की क्या औकात है कि वह उसे रोक ले। कोडियेरी पुलिस ने गरीब दुकानदार पर "चे" के चित्र वाले जूते बेचने (भावनाएं भड़काने) के आरोप में उस पर केस दर्ज कर लिया। जब वहाँ उपस्थित संवाददाताओं ने पुलिस से दुकानदार के खिलाफ़ लगाई जाने वाली धाराओं के बारे में पूछा तो उन्हें कुछ भी पता नहीं था, और वे पुलिस के उच्चाधिकारियों से सलाह लेते रहे। जब दुकानदार से पूछा गया तो उसने भी कहा कि "मुझे नहीं पता था कि चे की तस्वीरों वाले जूते बेचना प्रतिबन्धित हो सकता है, क्योंकि मैंने कई मेट्रो शहरों में चे की तस्वीरों वाले टी-शर्ट, की-चेन, मोजे, बिल्ले और जूतों की बिक्री होते देखी है, और यह जूते भी मैंने घर पर नहीं बनाये हैं बल्कि दिल्ली से मंगाये हैं…"। (उसकी बात सही भी है, क्योंकि "चे" की तस्वीरें ऐसी-ऐसी वस्तुओं पर छपी हैं जिनकी फ़ोटो यहाँ दिखाना अश्लीलता होगी…)

सभी देशवासियों और पाठकों को याद होगा कि एक दो कौड़ी के चित्रकार द्वारा भारत माता, सरस्वती, दुर्गा, सीता आदि के नग्न और अश्लील चित्र बनाये जाने पर हिन्दूवादियों द्वारा उसे लतियाकर देश से बाहर करने के मामले में, तथाकथित प्रगतिशील वामपंथियों, सेकुलरों ने "अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता" को लेकर जमकर रुदालियाँ गाई थीं… हिन्दू संगठनों को बर्बर, तानाशाह इत्यादि कहा गया… उस चित्रकार को (जिसने लन्दन-अमेरिका या नेपाल नहीं बल्कि एक धुर इस्लामी देश कतर की नागरिकता ली) को वापस बुलाने के लिये जमकर गुहार लगाई थी, और दुख में अपने कपड़े फ़ाड़े थे। उस चित्रकार को केरल सरकार ने "राजा रवि वर्मा" पुरस्कार भी प्रदान किया था, जो कि एक तरह से राजा रवि वर्मा का अपमान ही है। यही सारे कथित प्रगतिशील और वामपंथी तसलीमा नसरीन मामले में न सिर्फ़ दुम दबाकर बैठे रहे, बल्कि इस बात की पूरी कोशिश की कि तसलीमा पश्चिम बंगाल में न आ सके और न ही उसका वीज़ा नवीनीकरण हो सके।




लेकिन चे की तस्वीरों वाले जूतों पर हंगामे ने इनके पाखण्ड को उघाड़कर रख दिया है, इससे यह भी साबित हुआ है कि "भारतीय संस्कृति और जड़ों" से कटे हुए वामपंथी और प्रगतिशील ढोंगी हमेशा "विदेशी नायकों" को अपना हीरो मानते हैं, इनकी नज़र में चे ग्वेवारा की औकात भारत माता और सरस्वती से भी ज्यादा है। इनका संदेश है कि जूतों पर चे की तस्वीर को "अपमान" माना जायेगा, लेकिन भारत माता का नग्न चित्रण "अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता" है… यह है विशुद्ध वामपंथी चरित्र…

(यहाँ इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि चे ग्वेवारा कितने बड़े क्रान्तिकारी थे या उनका संघर्ष कितना महान था… यहाँ मुख्य मुद्दा है वामपंथियों के दोहरे मापदण्ड…)

अब इस "देसी" वामपंथी चरित्र और सेकुलरिज़्म का एक और उदाहरण देख लीजिये… केरल में कुछ समय पहले एक प्रोफ़ेसर के हाथ जेहादियों ने काट दिये थे क्योंकि उसने कथित तौर पर परीक्षा में इस्लाम के खिलाफ़ अपमानजनक प्रश्न पूछ लिया था। हालांकि वह प्रोफ़ेसर ईसाई है और वह कॉलेज भी ईसाई संस्था (Newman College) द्वारा संचालित है (यहाँ देखें…), लेकिन फ़िर भी केरल सरकार का दबाव और मुस्लिम संगठनों का डर इतना हावी है कि कॉलेज प्रशासन ने उस अपंग हो चुके प्रोफ़ेसर जोसफ़ को "ईशनिंदा" के आरोप में बर्खास्त कर दिया [एमजी विश्वविद्यालय आचार संहिता अध्याय 45, धारा 73(7) भाग डी, ताकि प्रोफ़ेसर को किसी भी अन्य निजी कॉलेज में नौकरी न मिल सके], साथ ही बेशर्मी से यह भी कहा कि यदि मुस्लिम समाज उस प्रोफ़ेसर को माफ़ कर देता है, तभी वे उसे दोबारा नौकरी पर रखेंगे…। कॉलेज के इस कदम की विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने प्रशंसा की है।

पहले प्रोफ़ेसर को धमकियाँ, फ़िर प्रोफ़ेसर का भूमिगत होना, इस कारण प्रोफ़ेसर के लड़के की थाने ले जाकर बेरहमी से पिटाई, दबाव में प्रोफ़ेसर का फ़िर से सार्वजनिक होना और अन्त में उसका हाथ काट दिया जाना… इस पूरे मामले पर केरल की वामपंथी सरकार का रुख वही है जो अब्दुल नासिर मदनी की गिरफ़्तारी के समय था, यानी गहन चुप्पी, वोट बैंक का नापतोल (ईसाई वोट और मुस्लिम वोटों की तुलना) और प्रशासन का पूरी तरह राजनीतिकरण…(यहाँ देखें…)।

मुस्लिम वोटों के लिए गिड़गिड़ाने, बिलखने और तलवे चाटने का यह घृणित उपक्रम हमें पश्चिम बंगाल के आगामी चुनावों में देखने को मिलेगा, जब मुस्लिम वोटों की सौदागरी के दो चैम्पियन तृणमूल और माकपा आमने-सामने होंगे… ये बात अलग है कि यही वे लोग हैं जो नरेन्द्र मोदी की आलोचना में सबसे आगे रहते हैं और हिन्दू वोट बैंक (यदि कोई हो) को हिकारत की निगाह से देखते हैं…
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चलते-चलते :- सेकुलर नेताओं ने अपने साथ-साथ प्रशासन को भी कैसा डरपोक और नपुंसक बना दिया है इसका उदाहरण मुम्बई की इस सड़क दुर्घटना मामले से लगाया जा सकता है जिसमें मरीन ड्राइव पुलिस ने कोर्ट में आधिकारिक रुप से कहा कि चूंकि टक्कर मारने वाला "हिन्दू" है और मरने वाला मोटरसाइकल सवार "मुस्लिम" है इसलिये उसे ज़मानत नही दी जाये, वरना क्षेत्र में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने का खतरा है…। आश्चर्य हुआ ना? लेकिन रोज़ाना होने वाली सैकड़ों सड़क दुर्घटनाओं की तरह इस मामले को नहीं देखा गया, बल्कि पुलिस ने अपने बयान में लिखित में कहा कि सुशील कोठारी को पुलिस हिरासत में रखना जरूरी है, क्योंकि उसकी जमानत से शांति भंग हो सकती है…। अब इस मामले को उलटकर देखें और बतायें कि यदि मरने वाला हिन्दू होता और टक्कर मारने वाला मुस्लिम होता, क्या तब भी मुम्बई पुलिस ऐसा "सेकुलर" बयान देती?

खैर… आप तो केन्द्र सरकार को और ज्यादा टैक्स देने के लिये तैयार रहियेगा, क्योंकि पुणे की जर्मन बेकरी ब्लास्ट केस में दो और "मासूम-बेगुनाह-गुमराह" लोग पकड़ाये हैं, जो लम्बे समय तक जेल में चिकन-बिरयानी खाएंगे, क्योंकि नेहरुवादी सेकुलरिज़्म का ऐसा मानना है कि "मासूमों" को फ़ाँसी दिये जाने पर "साम्प्रदायिक अशांति" फ़ैलने का खतरा होता है… इसी से मिलते-जुलते विचार कार्ल मार्क्स की भारतीय संतानों के भी हैं…

देश में इस प्रकार की घटनाएं और व्यवहार इसलिये होते हैं क्योंकि वोट बैंक की राजनीति और नेहरुवादी सेकुलर शिक्षा का मैकालेकरण, प्रशासनिक-राजनैतिक व्यवस्था की रग-रग में बस चुका है…। सिर्फ़ एक बार "विशाल हिन्दू वोट बैंक" की अवधारणा की कल्पना कीजिये और उसे अमल में लाने का प्रयास कीजिए… फ़िर देखिये अपने-आप देश की रीतियाँ-नीतियाँ, परिस्थितियाँ, यहाँ तक कि मानसिकता भी… सब बदल जायेंगी…।


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सन्दर्भ -
http://expressbuzz.com/states/kerala/%E2%80%98chinese%E2%80%99-che-shoes-can-land-you-in-trouble!/202902.html

http://expressbuzz.com/cities/kochi/%E2%80%98will-reinstate-lecturer-if-muslims-pardon-him%E2%80%99/204046.html

http://www.indianexpress.com/news/mumbai-cops-reason-for-custody-victim-muslim-accused-hindu/676496/

35 comments:

संजय बेंगाणी said...

इस्लामी कट्टरपंथियों को कट्टरता में वामपंथी टक्कर देते है. मैनें इस पर एक पोस्ट भी लिखी थी कि "कट्टरपंथी धर्म है वामपंथ". तो अंधे लोगो से उम्मीद करना ही बेकार है. ये दया के पात्र है जो गलत सिद्धातों से चिपके हुए है और इसके लिए खून बहा रहे है.

rohit said...

बंधू केरल में कुछ भी हो सकता है अभी एक खवर पड़ी की केरल के आई जी रंक के अधिकारी के लश्कर से सम्बन्ध है. तो भाई वो केरल है कुछ भी हो सकता है आखिर हम सेकुलर जो ठहरे

rohit said...

यह एक समाचार पत्र में छपा था की केरल के एक आई जी रँक के अधिकारी को लश्कर से सम्बन्ध के शक में पूछ ताछ अन आई ए द्वारा की जा रही है

honesty project democracy said...

उस बेचारे दुकानदार को कुछ कहने के वजाय जूते बनाने वाले को पकड़ना चाहिए था बामपंथियों को ,वैसे सुरेश जी मुझे तो ये सारा माजरा इस जूते के विज्ञापन का प्रतीत होता है ,क्योकि बामपंथी विरोध ज्यादातर पैसों के खेल पे आधारित है तभी तो इनकी पार्टी की आय काफी बढ़ी है ...इनके किसी भी विरोध में मुझे निरंतरता कभी भी दिखाई नहीं दी है ...?

सुलभ § Sulabh said...

आजाद देशो में गुलामों की फौज है, दिमाग गिरवी रख रखी है विदेशियों के हाथ में. ऊपर से सेकुलरिज्म का ड्रामा.

Anil said...

चे को फोटो वाले जूते चीन में बने हुए हैं और मुंबई में भी फुटपाथ पर दिख जाते हैं. अच्छा हुआ की मैंने नहीं ख़रीदे,

कम्युनिस्ट लोगों के नाजायज बाप तो हिंदुस्तान से बाहर बैठे हुए लोग हैं.. जब चीन रूस या क्यूबा में बरसात होती है तो ये यहाँ छतरी तान लेते हैं.

जो लोग 1962 की लड़ाई में हिन्दुस्तान को हमलावर बताएं और चीन की तरफदारी करें, जिनके नम्बुदरीपाद जैसे चीनी चमचे नेता हों, उनसे ये उम्मीद ही क्यों लगाते हो की उनका दिल भारत के लिए धड़केगा?

मरीन ड्राइव की पुलिस ने इस प्रकार का जो तर्क दिया है इसकी न्यायालय द्वारा भी भर्त्सना की जानी चाहिए.. कानून द्वारा हिन्दू मुसलमान का भेदभाव किये सिर्फ न्याय करना चाहिए... न कि किसी समुदाय विशेष को खुश करने के लिए कोई फैसला दिया जाए.

Mohit singh said...

ye vaampanth democracy jyada achcha joota lagti hai...bahut khoob chiplunkar ji..maza khada kar diya

आनंद जी.शर्मा said...

सुरेश जी,
आपने लिखा है - "वामपंथियों के आराध्य देवता(?) चे ग्वेवारा" |
ये कौनसे देवता हैं - इनका मंदिर कहाँ है - इनकी पूजा अर्चना विधि क्या है - ये अपने भक्तों को प्रसन्न होने पर क्या वरदान देते हैं - कोई सिद्ध मन्त्र है तो कितनी संख्या में एवं कितने दिनों में सिद्धि प्राप्त होती है - इत्यादि जिज्ञासामूलक प्रश्नों के आप अथवा विद्वान् पाठक गणों द्वारा उत्तर अपेक्षित है |

आनंद जी.शर्मा said...

सुरेश जी,
आपने लिखा है - "सभी देशवासियों और पाठकों को याद होगा कि एक दो कौड़ी के चित्रकार द्वारा भारत माता, सरस्वती, दुर्गा, सीता आदि के नग्न और अश्लील चित्र बनाये जाने पर हिन्दूवादियों द्वारा उसे लतियाकर देश से बाहर करने के मामले में, तथाकथित प्रगतिशील वामपंथियों, सेकुलरों ने "अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता" को लेकर जमकर रुदालियाँ गाई थीं… हिन्दू संगठनों को बर्बर, तानाशाह इत्यादि कहा गया…"

मुझे "दो कौड़ी के चित्रकार" के मूल्यांकन पर घोर आपत्ति है |

आपने "फूटी कौड़ी की औकात वाले" का मूल्यांकन इतना ज्यादा कैसे किया ?

कृपया शीघ्र जबाब दीजिये एवं मूल्यांकन में सुधार कीजिये |

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

सच कहते हो सुरेश भाई,अब तो कई बार ऐसा लगता है कि विनाश निकट ही है,किन्तु फिर चित को शांत करता हु कि हम जैसे लोग ही हार मान लेंगे तो इस राष्ट्र का क्या होगा,क्योंकि मै यह मानता हूँ कि इस राष्ट्र के कल्याण में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है,तो मेरी भूमिका भी अनिवार्य ही है.सच पूछो तो कई बार ऐसा लगता है कि यहाँ मानव शायद लकीर का फ़कीर ही रहेगा,तोते कि तरह एक ही बात कि रट लगाये रहेगा.
आपके ब्लॉग को मै नित्य पढता हूँ और चाहता हूँ कि मेरे सभी परिचित उस सत्य से परिचित हों जिसे दुनिया के सामने लाने का प्रयास आप कर रहे हैं,इसलिए आपके link मै facebook पर अपनी profile पर लगाता रहता हूँ,मुझे कई बार अच्छी प्रतिक्रियाएं मिली हैं,लोगों ने इस प्रयास की सराहना भी की है,किन्तु फिर भी कई बार कुछ लोग ऐसा कह जाते हैं कि उसे स्वीकार कर पाना कठिन होता है,जैसे कि नरेन्द्र भाई मोदी को ही ले लीजिये,आल भी मुझे ऐसे कमेन्ट मिल जाते हैं कि "गोधरा कांड के पश्चात नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया हजारों मुस्लिमों का संहार क्यों भूल जाते हो?" मुझे समझ नहीं आता कि जो तथाकथित सेकुलरिज्म एक आम भारतीय कि रग रग में बस गया है उसे कैसे निकाला जाये. ये सभी लोग वही भाषा बोलते हैं जो इस देश के तथाकथित महान और तथाकथित सेकुलर नेहरु-गाँधी परिवार ने उन्हें ६३ वर्षों में सिखाई है...

शंकर फुलारा said...

इनका दिया बुझने से पहले की ये फड़फड़ाहट है और कुछ नहीं | ये ( विचारधारा) अब इस दुनिया में जिन्दा तो रहेगी पर मरणासन्न | बस आप इनके काले कारनामों को उजागर करते रहिये | जानकारी के लिए धन्यवाद |

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद said...

@ सुरेशजी, किस विचारधारा कि बात कर रहे है आप.. वामपंथ कि जो खुद को खत्म करने पर तुला हुआ है या सेल्युलर कि जो अपनों को ख़तम करने पर तुला हुआ है. कश्मीर के नाम पर दंगे करवा कर फिर वहां हम भारतियों कि मेहनत कि कमाई पर डाका डालकर वहां करोड़ों के रहत पैकेज देकर "भटके और मासूम" मुसलमानों कि हमदर्दी पाने वाली इस रीढविहीन सरकार भारत के मूल्यों कि रक्षा कि बात करना बेमानी है..

(हिन्दुओं के शौर्य और आस्था का प्रतिक "भगवा" को आतंक का पर्याय बताने वाला वेदांता के एक दलाल को आज मुसलमानों कि कुरान को जलाये जाने से बहुत दुःख हो रहा है और वो अन्तराष्ट्रीय बिरादरी के सामने घडियाली आंसू बहा रहा है.)

कश्मीर कि हकीक़त जानना चाहते तो यहाँ पढ़िए जो शायद आपको इस बिकाऊ मीडिया में जरिये कभी न मिलेगी.

http://hinduraaj.blogspot.com/2010/09/jammu-kashmir-reality-double-standerd.html

दिवाकर मणि said...

संजय बेंगाणी जी और आनंद शर्मा जी की टिप्पणियों को मेरा भी विचार मानें.

अस्तु, माओ-स्टालिन-लेनिन के नाजायज भारतीय कमीनिस्ट कुत्तों के लिये जितनी भी लानतें-मलानतें दी जायें, कम ही है. कहने को तो ये कम्युनिस्ट गुंडे अपने आपको बड़े ही तार्किक, बुद्धिजीवी और ना जाने क्या-क्या विशेषण से नवाजते हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि इनकी कोई सच्चाई नहीं है. जब तक किसी बात, वाद, सिद्धांत, कार्यव्यवस्था इत्यादि से इनको कोई हानि न हो तब तक तो वो ठीक है, लेकिन जब वे सारे बात, वाद, व्यवस्था आदि विपरीत पड़ने लगें तो फिर नये (कु)तर्कों और (कु)कृत्यों के साथ ये दुमछल्ले अपने को प्रस्तुत करने लगते हैं. अंत में, मार्क्स-माओ-लेनिन-स्टालिन के इन नाजायज मानसपुत्रों को अनगिनत !@$#^%%^*&&*(&(*&%^%$%$@@#@!~#&^&(**%%$@@@$%$^

भुवनेश शर्मा said...

वामपंथियों की कट्टरता तो काबिलेतारीफ है ही....पर हमारे हिंदू कार्यकर्ताओं, हाफपैंटियों, भाजपाईयों की कट्टरता पे हमें तो कम से कम नाज है जी...स्विस बैंक को वो भी किसी तीर्थस्‍थल से कम नहीं समझते
एक हाथ से भगवा-ध्‍वज पकड़कर दूसरे हाथ से अपनी मां का सौदा तक करने को तैयार बैठे हैं भाईलोग..धन्‍य है
विश्‍वहिंदू परिषद और भगवा संगठनों कें लोग जब उत्‍पात मचाने उतरते हैं तो गौर कीजिएगा...ज्‍यादातर भाड़े के गुंडे और लफंगे होते हैं....विचारधारा तो देशी पौवे की बैसाखियों पर ही चल रही है

ZEAL said...

.

हिन्दू समाज में ज्यादातर कायर और भीरु हैं। अपने आप को संत दिखने के लिए कुछ भी कर सकते, मूल में रेत ही रेत है। कब इनका दिखावा भरभराकर गिर पड़ेगा , कहना मुश्किल है।

सेक्युलर राष्ट्र होना ही सबसे बड़ा श्राप है भारत के लिए।

अपना वोट बैंक बनाये रखने के लिए ये कुछ भी कर सकते हैं।ये असंवेदनशील हैं । राष्ट्र की भलाई से इन्हें कुछ नहीं लेना देना है। कोई भारत माता क्या इनकी बेटी की तस्वीर ऐसे बना दे तो इनको क्या फरक पड़ता है।

हम जिनसे उम्मीद रखते हैं , क्या वो इसके काबिल हैं?

एक ही हल है --

कई जोड़ी जूतों पर हमारे असंवेदनशील नेताओं के चित्र बनाकर , घर-घर [buy one, get one free ] पहुंचा दें ।

दीवारों से सर नहीं टकराया जाता !
दीवारें तोड़ देनी चाहिए।

असंवेदनशील दीवारें= हमारे नेता

आभार !

.

ZEAL said...

.

We must not expect from the impotent lot around. But then, we do not have much options. We have to live with these people only. So raising voice against unjust is the only option left for patriots and that is what we are doing.

Our efforts won't go waste.

..

kaverpal said...

dear suresh ji aap se anurodh hai ki mujhe in kutto ka address dila den. aur che ki photo to condom per bhi hai usko ye kyon nahi bolte.sanatry towel per bhi us kameene ki photo hai parantu under thode hi dikhta hai.

सौरभ आत्रेय said...

वामपंथ भी इस्लाम की तरह एक मजहब ही है, दोनों में अधिक अन्तर नहीं है. अपनी हर उलटी बात को सीधा बोलेंगे दूसरे की सीधी बात को भी उल्टा बोलेंगे. अपने स्वार्थ के लिये किसी भी हद तक जायेंगे और दूसरे के अधिकार का भी मजाक बनायेगें और बेशर्मी से न्याय और सत्य के पैरोकार बनेंगे. अब ऐसे लोगो को कैसे समझाया जा सकता हैं एक समझदार व्यक्ति समझ सकता है.

Sachi said...

नमस्ते,

इस्लामिक कट्टरता की तरह ही वामपंथी कट्टरता भी खतरनाक है। आपने जिस तरह से उसको प्रस्तुत किया, वह हमेशा की तरह ही लाजवाब है। मैंने आपके कई लिंक को अपने फेसबुक स्टेटस में लगाया है।

कल मेरी किसी से बात हो रही थी। वे ईसाईओं में घुर दक्षिण पंथी है। कुरान जलाने के ऊपर बात हो रही थी। उन्होनें एक ही बात कही," जब पाक परास्त तालिबानों ने अफगान की बुद्धप्रतिमाओं को ध्वस्त किया तो एक मुस्लिम देश ने भी विरोध नहीं किया। आज वे सर्वधर्म सद्भाव के ऊपर बात कर रहें हैं।"

विजयप्रकाश said...

वाम पंथियों और हिजड़ों में कोई अंतर नहीं है.ये बेचारे न इधर के हैं न उधर के.

DEEPAK BABA said...

धर्म को हफीम मानने वाले वामपंथी विचारकों को क्या मालूम था .......... कि हिन्दुस्तान पहुँचते पहुँचते.. वामपंथ का क्या रूप हो जाएगा. आज ये विचारधारा - पश्चिम बंगाल में तो अपने अस्तित्व कि लड़ाई लड़ रही है. और केरल जैसे राज्य में चर्च का प्रशय पाकर फलफूल रही है.

बाकि 'चे ग्वेवारा' के बारे में क्या बात करें, दिल्ली शहर में कई लोंडे 'चे ग्वेवारा' छपी टी-शर्ट पहनकर घूम रहे होते है - और उन को मालूम नहीं - कि ये कौन सा चित्र है.



बाकि में ZEAL से सहमत हूँ.
एक ही हल है --

कई जोड़ी जूतों पर हमारे असंवेदनशील नेताओं के चित्र बनाकर , घर-घर [buy one, get one free ] पहुंचा दें ।

दीर्घतमा said...

सुरेश जी नमस्ते
बामपंथी दोगले है इनके चेहरे दिखने मे तो अच्छे है बोलते भी अच्छे है लेकिन जन हित कि केवल बात ,कार्य तो केवल सत्ता और सरकार ये भी मुसलमान और ईशाई क़े समान ही तकियानूसी कट्टरपंथी है अपनी बात क़े अलावा किसी कि नहीं सुनना विशुद्ध बैचारिक तानाशाही इनके बुद्धिजीवी समर्थक भी बिदेशो क़े द्वारा ख़रीदे हुए ही है हमेसा भारतीय बांग्मय में ही खोट नज़र आती है इस नाते ये कुछ भी कर सकते है, वास्तव में लात क़े भूत बात से नहीं मानते.

{~Bhagat singh~} said...

खून खौलाने वाला लेख लिखा है आपने.
हिँदु देवी देवताओ का अपमान तो हिँदुस्तान मे आम बात है.
जब कि और धर्मो के बारे मे जरा सा भी अपमान जनक लिखा जाये तो पूरा दिल्ली हिल जाता है.और हिले भी क्यो नही आखिर वोट बैँक का मामला है.
अब देखो न
अमेरिका मे कुरान जलाने की बात हुई तो यहाँ कब्र मे दफन मुल्ले भी खड़े हो कर ढेचूँ ढेचूँ कर रहे है.

शिवम् मिश्रा said...


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

SHIVLOK said...

सिर्फ़ एक बार "विशाल हिन्दू वोट बैंक" की अवधारणा की कल्पना कीजिये और उसे अमल में लाने का प्रयास कीजिए… फ़िर देखिये अपने-आप देश की रीतियाँ-नीतियाँ, परिस्थितियाँ, यहाँ तक कि मानसिकता भी… सब बदल जायेंगी…।
SATYA VACHAN PRABHO
SATYA VACHAN PRABHO
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सिर्फ़ एक बार "विशाल हिन्दू वोट बैंक" की अवधारणा की कल्पना कीजिये और उसे अमल में लाने का प्रयास कीजिए… फ़िर देखिये अपने-आप देश की रीतियाँ-नीतियाँ, परिस्थितियाँ, यहाँ तक कि मानसिकता भी… सब बदल जायेंगी…।
SATYA VACHAN PRABHO
SATYA VACHAN PRABHO
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सिर्फ़ एक बार "विशाल हिन्दू वोट बैंक" की अवधारणा की कल्पना कीजिये और उसे अमल में लाने का प्रयास कीजिए… फ़िर देखिये अपने-आप देश की रीतियाँ-नीतियाँ, परिस्थितियाँ, यहाँ तक कि मानसिकता भी… सब बदल जायेंगी…।
SATYA VACHAN PRABHO
SATYA VACHAN PRABHO
SATYA VACHAN PRABHO

सिर्फ़ एक बार "विशाल हिन्दू वोट बैंक" की अवधारणा की कल्पना कीजिये और उसे अमल में लाने का प्रयास कीजिए… फ़िर देखिये अपने-आप देश की रीतियाँ-नीतियाँ, परिस्थितियाँ, यहाँ तक कि मानसिकता भी… सब बदल जायेंगी…।
SATYA VACHAN PRABHO
SATYA VACHAN PRABHO
SATYA VACHAN PRABHO

Dr. Mandhata Singh said...

राजनीति का सत्ता के लिए पाखंड देश को ले डूबेगा। दिख यह रहा है कि जो सबसे बड़े लोलतात्रिक और आदर्शवादी होमे का दावा करते हैं वे सबसे बड़े पाखंडी निकलते हैं। जनसता में परसो एक मुख्य लेख कामरेडों के महिला कामरेडों के शोषण को उजागर करते हुए कम्युनिस्ट सिद्धान्तों का धज्जियां उड़ाई गई। आप पाखंड का एक और रूप यहां देख सकते हैं। जाने कितने चेहरे हैं इनके ?......

anusoni said...

आदरणीय सुरेश जी पिचले कई दिनों से आप के ब्लॉग पर कमेन्ट पोस्ट करने की कोशिश की लेकिन नेट के स्पीड कम होने से नहीं लिख पाया लेकिन आज जब आज तक पर आपरेशन " हे राम" देखा तो रहा नही गया और आप को बताना उचित समझा क्योकि आज आपकी मीडिया के ऊपर लिखी गयी पोस्ट याद आ गयी आशा हे आप इस संदर्भ अपने अगले पोस्ट में जरुर लिखे गे

sunil patel said...

श्री सुरेश जी. आप बुल्कुल सही कह रहे है. इसी तरह की सत्य जानकारी देते रहिया, करवा बनता चलेगा. धन्यवाद.

Meenu Khare said...

सिर्फ़ एक बार "विशाल हिन्दू वोट बैंक" की अवधारणा की कल्पना कीजिये और उसे अमल में लाने का प्रयास कीजिए… फ़िर देखिये .................

rohit said...

एर्नेस्तो चे गुएवेरा की महानता पर कम से कम मुझे कोई शक नहीं है चे गुवेरा एक डॉक्टर थे लेकिन लातिन अमेरिका के लोगो की गरीब दशा देख कर उन्होंने क्रांति का रुख किया बे चाहते तो एक डॉक्टर के पेशे को भी अपना सकते थे लेकिन गरीबो की दशा देख क्रांति की राह अपनाई उनका cuba की क्रांति में महान योगदान रहा है इसमे कोई शक मुझे नहीं है.
सुरेश भाऊ हमारे देश के लोगो में उनके जैसा समर्पण शायद ही देखने को मिले वामपंथी सिर्फ उनका नाम और फोटो ही जानते है उनके विचारो को कभी शायद नहीं पड़ा और नहीं जिया यही इस देश का दुर्भाग्य है पश्चिम बंगाल में कितनी गरीबी है और सरकार भी वामपंथी है लेकिन कोई भी चे गुएवेरा वहा नहीं है यदि चे गुएवेरा होते तो वो जरुर इस नीच वामपंथ के खिलाफ लड़ते. वो एक अलग समय था ये एक अलग समय है देश काल और समय के अनुसार परिस्तिथिया बदल जाती है जिस अमेरिका के आगे हम लेट जाते है उसकी नाक में उन्होंने दम कर रखा था. वो एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे. इस देश में ऐसे लोग मिलना भूसे में सुई धुदने के बराबर है.मैं वीर सावरकर, भगत सिंह ,जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी की बातनहीं कर रहा हूँ मैं वर्तमान की घटिया वाम पंथी और इटली पंथी राजनीती की बात कर रहा हूँ भा ज पा से कुछ उम्मीद थी लेकिन वह भी टूट गयी है विपक्ष की सत्ता पक्ष के साथ एक नूरा कुश्ती संसद में चल रही है यही देश का दुर्भाग्य है
its my own thoughts. i regret if i hurt someone's thought & belief.

man said...

सादर वन्दे सर ,
वामपंथी दोगलो के फाखंड की कलई खोलने वाला लेख प्र्तूस्तकरने करने के लिए साधुवाद?
""""सिर्फ़ एक बार "विशाल हिन्दू वोट बैंक" की अवधारणा की कल्पना कीजिये और उसे अमल में लाने का प्रयास कीजिए… फ़िर देखिये अपने-आप देश की रीतियाँ-नीतियाँ, परिस्थितियाँ, यहाँ तक कि मानसिकता भी… सब बदल जायेंगी…।""""सही हे सर ..

lokendra singh rajput said...

सुरेश जी बहुत सही कहा आपने। इस देश में सेक्यूलरिज्म के नाम पर सिर्फ दोगलाई के अलावा कुछ नहीं होता। कम्युनिष्टों को मैं यूं परिभाषित करता हूं - कम्युनिष्ट - भारत के प्रति 'कम निष्ठावानÓ । इन्होंने सदैव देश को भ्रम में रखा। इस देश पर इन्हें बिलकुल भी गर्व नहीं है। यही इस विचारधारा की महानता है कि यह देश भूखे-नंगों का है, गंवारों का देश है, यहां के धर्म ग्रंथ, सद्साहित्य सब कचरा हैं और इस देश में महान लोग है ही नहीं सब महान कम्युनिष्ट देशों में ही पैदा हुए। वैसे अब कम्युनिष्ट कहीं रह नहीं गए। जैसे तैसे लोगों का खून बहा कर नेपाल पर कब्जा जमाया था अब वहां भी जमकर इनका विरोध हो रहा है। विरोध करने वाले आमजन हैं न तो राजा के आदमी हैं और न ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लोग। देश को बचाना है तो सबसे पहले इनका सफाया जरूरी है।

abhishek purohit said...

यधपि आपने बहुत अच्छा लिखा पर मेरा चिन्तन कहता है कि विचार को विचार से ही काटना चाहिये,अगर आप "वामपंथ" के वास्तविक चिन्तन के मुल पर प्रहार करते तो बहुत ज्यदा अच्छा लगता,सत्यता तो ये है कि हम मे से अधिकांश वामपंथ को नहीं जानते,अत: निवेदन है कि उनके विचारो को हिन्दु विचारो से काटकर उनकि बौधिक व्य्र्थता का बोध करायें,स्वर्गिय दंतोपंथ जि ठेगडी व मुरलि मनोहर जि जोशि के अनेक लेख शायद मार्गद्शन करें,आपके एसे लेख की प्रतिक्षा में..........................................

yogesh saroya said...

बहुत अच्छा
बहुत आश्चर्यजनक.
मैं चाहता हूँ कि आप अपने सभी पोस्ट प्रिंट मीडिया में प्रकाशित करें.तो यह सब तक पहुँच.

Madan Kumar Tiwari said...

कुछ तो रहम किजिये सरकार इस देश की गरीब जनता पर । चे की तस्वीर हो या देवी मां की उनका अपमान करना गलत है। आप एक की गलती के आधार पर दुसरी गलती को जायज नही ठहरा सकतें। अभी क्या हालत देश की हो गई है, पता है, न , आपलोग जिस तरह का हिंदुत्व परोस रहे हैं वह तालिबानों से भी खतरनाक है । आज तालिबानों के कारण उदार मुस्लिम भी शर्मिंदगी महसूस करता है, उसी तरह आप जैसे अंध , अशिक्षित, और हिंदु धर्म की गलत व्याख्या करनेवालों के कारण हमारे जैसे आदमी को तकलीफ़ होती है, आखिर आप लोग चाहते क्या हैं, दुसरे धर्म वालों को देश से खदेड दिया जाय। या पाकिस्तान जैसा एक कट्टर हिंदु मुल्क चाहते हैं , आपलोग। चे क्या बारे में कभी पढा भी है ? वह एक क्रांतिकारी था, हमारे भगत सिंह, सुभाषचन्द्र बोस की तरह। अगर चे जैसे लोग नही रहें तो अमेरिका आप सबकी बाट लगा देगा । सब भाषणबाजी निकल जायेगी .